Answers from Sakar Murli 17-11-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 17-11-2020*

1. ज्ञान का ____ करना ही सदा हर्षित रहने का आधार है।
° _सिमरण_

2. आपके सामने कैसी भी आत्मा हो लेकिन अपने ____ की वृत्ति से, _____ भावना से उसे परिवर्तन कर दो-यही है सच्ची सेवा। जैसे साइन्स वाले रेत में भी खेती पैदा कर देते हैं ऐसे साइलेन्स की शक्ति से ____ -दिल बन अप-कारियों पर भी ____ कर धरनी को परिवर्तन करो। _____ परिवर्तन से, शुभ भावना से कैसी भी आत्मा परिवर्तन हो जायेगी क्योंकि शुभ भावना _____ अवश्य प्राप्त कराती है।
° _रहम_, _शुभ_, _रहम_, _उपकार_, _स्व_, _सफलता_

3. बहुत ___ से बैठकर रूहानी बाप को याद करना है। याद में प्रेम के ____ आ जायें तो वह विजय माला का ____ बन जायेंगे। अपना समय भविष्य प्रालब्ध बनाने में _____ करना है।
° _प्रेम_, _ऑसू_, _दाना_, _सफल_

4. बाबा भी कहते हैं मैं _____ भी हूँ, _____ भी हूँ। छोटी सी बिन्दी हूँ और फिर ज्ञान का सागर भी हूँ। तुम्हारी आत्मा में सारा ज्ञान भरते हैं। 84 जन्मों का सारा राज़ तुम्हारी बुद्धि में है। तुम ज्ञान का _____ बन ज्ञान की वर्षा करते हो। ज्ञान का एक-एक रत्न कितना _____ है, इनकी वैल्यु कोई कर न सके इसलिए बाबा कहते हैं _____ भाग्यशाली। तुम्हारे चरणों में ____ की निशानी भी दिखाते हैं, इनको कोई समझ न सके।
° _रूप_, _बसन्त_, _स्वरूप_, _अमूल्य_, _पदमापदम_, _पदम_

5. यह ज्ञान बड़ा वन्डरफुल है। तुम कितने ____ स्टूडेन्ट हो। तुम कहेंगे हम ____ -शाला में जाते हैं, ____ हमको पढ़ाते हैं। एम ऑबजेक्ट क्या है? हम यह _______ बनेंगे। मनुष्य सुनकर वन्डर खायेंगे। हम अपने हेड ऑफिस में जाते हैं। क्या पढ़ते हो? मनुष्य से ___ , बेगर से ____ बनने की पढ़ाई पढ़ रहे हो।
° _गुप्त_, _पाठ_, _भगवान_,
_(लक्ष्मी-नारायण)_, _देवता_, _प्रिन्स_

6. फिर सतोप्रधान बनना हैं। उसके लिए बाप युक्ति बताते हैं कि अपने को आत्मा समझ ____ याद करो। मैं ही ___ -शक्तिमान् हूँ। मुझे याद करने से तुम्हारे में ____ आयेगी। तुम विश्व के ____ बनेंगे। यह लक्ष्मी-नारायण का वर्सा इन्हों को ____ से मिला है। कैसे मिला वह समझाते हैं।
° _मामेकम्_, _सर्व_, _शक्ति_, _मालिक_, _बाप_

7. पहले-पहले _____ का परिचय देना है। बाप कहते हैं _____ । जितना _____ करेंगे उस अनुसार पद पायेंगे। आदि सनातन ______ धर्म का राज्य स्थापन हो रहा है। इन ______ की डिनायस्टी है।
° _बाप_, _मनमनाभव_, _पुरूषार्थ_, _देवी-देवता_, _लक्ष्मी-नारायण_

8. महिमा है ही एक की। पतित से ____ बनाना यह तो बाप का ही काम है। ____ से छुड़ाने वाला तो एक ही बाप है। यह सब प्वाइंट्स बुद्धि में अच्छी रीति धारण करनी है। एक गॉड को ही मर्सीफुल कहा जाता है। एक बाप ही सब पर _____ करते हैं। सतयुग में सब ____ – ______ में रहते हैं।
° _पावन_, _दु:ख_, _रहम_, _सुख_, _शान्ति_

9. एक रूहानी बाप जिसका नाम ___ है, वह बैठ अपने बच्चों को समझाते हैं। हम कहते परमपिता परमात्मा ____ गीता का भगवान है। वही ज्ञान का ____ है। लिबरेटर, _____ भी परमात्मा को ही कहा जाता है। परमपिता परमात्मा ही आकर लिबरेट करते हैं अर्थात् तमोप्रधान से सतोप्रधान बनाते हैं। कहते हैं मैं ब्रह्मा द्वारा स्थापना करता हूँ। उस एक ही _____ बाप के सब बच्चे हैं। शिवरात्रि गाई जाती है तो जरूर ____ यहाँ आये होंगे ना।
° _शिव_, _शिव_, _सागर_, _गाइड_, _निराकार_, _शिव_

10. पहले-पहले यही बात ( *बाप का परिचय*) अन्तर्मुख हो समझानी-निश्चय करानी है, जास्ती तीक-तीक नहीं। इससे क्या *फायदा* होंगा? (2)
° तो फिर *आगे समझना सहज* होगा। (अगर बाप का परिचय ही नहीं मिला होगा तो प्रश्न करते रहेंगे।)
° बच्चे एक बात अल्फ पर किसको निश्चय कराते नहीं, और-और बातों में चले जाते हैं *फिर कहते गला ही खराब हो गया*। (तुम और बातों में जाओ ही नहीं।)

11. बाप जो सत्य है वह जरूर सत्य ही सुनायेंगे। दुनिया पहले नई सतोप्रधान थी। अभी दुनिया पुरानी तमोप्रधान है। *दुनिया को बदलने वाला एक बाप* ही है। बाप कैसे बदलते हैं वह भी समझाना चाहिए। तो मुख्य कौन-सी चीज बदलनी पड़े?
° *आत्मा जब सतोप्रधान बनें* तब दुनिया भी सतोप्रधान स्थापन हो।

12. “मीठे बच्चे – बाप आये हैं ____ दुनिया बनाने, तुम्हारे _____ सुधारने, तुम भाई-भाई हो तो तुम्हारी ___ बहुत शुद्ध होनी चाहिए”
° _वाइसलेस_, _कैरेक्टर_, _दृष्टि_

13. बाप की ____ में रहने से तुम किसको समझाने में भी एकरस होंगे। नहीं तो कुछ न कुछ नुक्स (कमी) निकालते रहेंगे। बाबा कहते हैं तुम जास्ती कुछ भी ____ न लो। स्थापना तो जरूर होनी ही है। ____ को कोई भी टाल नहीं सकते। ____ में रहना चाहिए। बाप से हम बेहद का ___ ले रहे हैं। बाप कहते हैं मामेकम् याद करो।
° _याद_, _तकलीफ_, _भावी_, _हुल्लास_, _वर्सा_

14. मनुष्यों की नब्ज भी देखनी चाहिए-कुछ समझता है या ____ है? टाइम ____ नहीं करना चाहिए। चात्रक, पात्र को परखने की भी ____ चाहिए। जो समझने वाला होगा उनका ____ ही बदल जायेगा। पहले-पहले तो खुशी की बात देनी है। बेहद के बाप से बेहद का ____ मिलता है ना।
° _तवाई_, _वेस्ट_, _बुद्धि_, _चेहरा_, _वर्सा_

15. बोलो, बाप तो सत्य बोलेंगे ना। हम ____ को बाप ही सुनाते हैं। यह ____ सब उसने बनवाये हैं, इसमें संशय नहीं लाना चाहिए। संशयबुद्धि विनशन्ती। पहले तुम अपने को आत्मा समझ बाप को याद करो तो _____ विनाश होंगे। और कोई उपाय नहीं। ____ -पावन तो एक ही है ना। बाप कहते हैं देह के सब सम्बन्ध छोड़ ____ याद करो। बाप जिसमें प्रवेश करते हैं, उनको भी फिर ____ कर सतोप्रधान बनना है।
° _बी.के._, _चित्र_, _विकर्म_, _पतित_, _मामेकम्_, _पुरूषार्थ_

16. प्रदर्शनी में इतने ढेर चित्रों की दरकार नहीं। तो बाबा ने आज कौन-से *3 चित्र* रखने लिए कहा?
° नम्बरवन चित्र है गीता का *भगवान कौन?* उसके बाजू में *लक्ष्मी-नारायण* का, *सीढ़ी* का। बस। (तुम बच्चों को जितना हो सके याद की यात्रा को बढ़ाना है। मूल फिकरात रखनी है कि पतित से पावन कैसे बनें!)

17. *पात्र* तुमको कहाँ मिलेंगे? (2)
° शिव के, लक्ष्मी-नारायण के, राम-सीता के *मन्दिरों में* । वहाँ जाकर तुम उन्हों की सेवा करो।
° *गंगा नदी पर* भी जाकर तुम समझाओ – पतित-पावनी गंगा है या परमपिता परमात्मा है? (सर्व की सद्गति यह पानी करेगा या बेहद का बाप करेगा? तुम इस पर अच्छी रीति समझा सकते हो। विश्व का मालिक बनने का रास्ता बताते हो। दान करते हो, कौड़ी जैसे मनुष्य को हीरे जैसे विश्व का मालिक बनाते हो। भारत विश्व का मालिक था ना। तुम ब्राह्मणों का देवताओं से भी उत्तम कुल है।)

18. यह बाबा तो समझते हैं – मैं बाप का एक ही ______ बच्चा हूँ। बाबा ने हमारा यह शरीर ___ पर लिया है। बाबा की हमारे पर _____ की हुई है। हमने बाबा को ____ दिया है कि सर्विस करो। उनका एवजा फिर वह कितना देते हैं। जो हमको सबसे ऊंच _____ पर चढ़ाते हैं। नम्बर- _____ ले जाते हैं। बाप को बच्चे प्यारे लगते हैं।
° _सिकीलधा_, _लोन_, _सवारी_, _शरीर_, _कन्धे_, _वन_

19. ब्रह्मा और विष्णु का कनेक्शन भी बताते हैं। बाप तुम ____ को राजयोग सिखलाते हैं तो तुम ____ -पुरी के मालिक बनते हो। फिर तुम ही 84 जन्म ले अन्त में शूद्र बनते हो। फिर बाप आकर शूद्र से ____ बनाते हैं। ऐसे और कोई बता न सके।
° _ब्राह्मणों_, _विष्णु_, _ब्राह्मण_

20. तुम बच्चे बेफिक्र बादशाह हो फिर भी तुम्हें *एक मूल फिकरात* अवश्य होनी चाहिए – कौन सी?
° हम पतित से *पावन कैसे बनें* – यह है मूल फिकरात। (ऐसा न हो बाप का बनकर फिर बाप के आगे सज़ायें खानी पड़ें। सज़ाओं से छूटने की फिकरात रहे, नहीं तो उस समय बहुत लज्जा आयेगी। बाकी तुम बेपरवाह बादशाह हो, सबको बाप का परिचय देना है। कोई समझता है तो बेहद का मालिक बनता, नहीं समझता है तो उसकी तकदीर। तुम्हें परवाह नहीं।)

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