*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 20-08-2020*
1. साइलेन्स की _____ से निगेटिव को पॉजिटिव में परिवर्तन करो।
°पॉवर
2. रायल कुल में *फर्स्ट जन्म* के सम्बन्ध में समीप कौन-से बच्चे आते हैं? (2)
° वही बच्चे जो यहाँ बाप के गुण-संस्कारों के *समीप* हैं, सर्व सम्बन्धों से बाप के *साथ* का वा *समानता* का अनुभव करते हैं।
° वही आयेंगे जो आदि से अब तक *अव्यभिचारी* और *निर्विघ्न* रहे हैं। (विघ्नों के ऊपर सदा विजयी, विघ्न-विनाशक)
3. हमे किन-किन बातों की *अथाह खुशी* होनी चाहिए? (5)
° हमको सदैव खुशी क्यों नहीं होनी चाहिए। जबकि *ऊंच ते ऊंच बाप के बने* हैं।
° *घर (और राजधानी) को याद* कर खुश होना चाहिए।(मनुष्य मुसाफिरी कर घर लौटते हैं तो खुशी होती है ना। हम आत्माओं का भी घर है मूलवतन। कितनी खुशी होती है।)
° *यह है पुरुषोत्तम संगमयुग* । बाबा हमको पुरूषोत्तम बना रहे हैं। यह याद रहे तो भी खुशी रहे। *भगवान पढ़ाते हैं, विश्व का मालिक बनाते* हैं।
° यह आन्तरिक खुशी रहनी चाहिए कि हमको बागवान-पतित पावन का हाथ मिला है, हम *शिवबाबा से ब्रह्मा द्वारा हैण्ड-शेक* करते हैं।
° हम इस *पढ़ाई से स्वर्ग की पटरानी* बनते हैं – इसी आन्तरिक खुशी में रहना है।
4. किस बात का *नशा* होना चाहिए?
° अन्दर में नशा रहना चाहिए – हम *शिवबाबा के साथ आये हैं* दैवी राज्य स्थापन करने, *सारे विश्व को स्वर्ग बनाने* ।
5. बाप को सब पुकारते हैं क्योंकि उनसे शान्ति और सुख का _____ मिलता है। दुनिया में कोई भी 84 जन्मों की हिस्ट्री-जॉग्राफी नहीं जानते। अभी बाप ने आकर सारी _____ कहानी समझाई है। अभी तुम बच्चे जानते हो यह दुनिया बदल रही है। यह _____ का युग है, जबकि नई दुनिया स्थापन हो रही है। मनुष्यों को भी बदलना है। जरूर ______ वाले मनुष्य चाहिए। तुम कितने _____ थे। भल इस समय पैसे कौड़ी हैं परन्तु यह तो कुछ है नहीं। कौड़ियां हैं।
°वर्सा, जीवन, गीता, दैवी गुणों, साहूकार
6. तुम ______ हो जो पार जाती हो। तुम जानते हो हमको इस मायावी दुनिया से पार जाना है।तुम _____ करते हो – सतोप्रधान दुनिया में जाने का।
°नईया, पुरुषार्थ
7. जबकि बचड़ेवाल-बाबा हमारी सेफ्टी की इतनी सम्भाल करते (पोतामेल देखना, किस बच्चे को कहाँ भेजना, आदि) की बच्चे विकारों रूपी माया के चम्बे से बचे। तो हमें भी *पुण्य आत्मा जरूर बनना है*, इसके लिए क्या करना हैं? (2)
1. *श्रीमत* पर सदा चलते रहो। *याद* की यात्रा में ग़फलत नहीं करो।
2. *आत्म-अभिमानी* बनने का पूरा-पूरा पुरूषार्थ कर काम महाशत्रु पर *जीत प्राप्त करो*। (यही समय है – पुण्यात्मा बन इस दु:खधाम से पार सुखधाम में जाने का।)
8. बाप को पुकारते हैं कि हमारे दु:ख दूर करो। तुम समझते हो दु:ख दूर सब होने हैं। *दुःख दूर करने का एकमात्र उपाय* कौन-सा है?
° सिर्फ *बाप को याद* करते रहो। (हम दु:ख हर्ता सुख कर्ता के बच्चे है, अब दु:खी नहीं होना है।)
9. याद बढ़ाने की सर्वश्रेष्ठ युक्ति है – चार्ट रखना। तो अपने *चार्ट* में क्या-क्या देखना है? (3)
° अपने आपको देखना है कि *याद का चार्ट ठीक है?* कहाँ तक बाबा को याद करते हैं? (बाबा के पास कोई का 5 घण्टे का, कोई का 2-3 घण्टे का भी चार्ट आता। कोई तो लिखते ही नहीं हैं। बहुत कम याद करते हैं।)
° हर एक को अपना चार्ट देखना है *- मैं कहाँ तक पद पा सकूँगा?*
° कहाँ तक *खुशी का पारा* चढ़ता है? हमको सदैव खुशी क्यों नहीं होनी चाहिए?
10. बस घर और राजधानी याद रहे। परन्तु यहाँ बैठे भी कोई-कोई को अपने कारखाने आदि याद रहते हैं। बाबा ने यहां कौन-सा हंसी का *उदाहरण* दिया?
° जैसे देखो *बिड़ला* है, कितने उनके कारखाने आदि हैं। सारा दिन उनको ख्यालात रहती होगी। उनको कहें बाबा को याद करो तो कितनी उनको अटक पड़ेगी। घड़ी-घड़ी धन्धा याद आता रहेगा।
11. यहां नदी में मूर्ति डुबोने जाते हैं, अर्थी को भी ले जाते। (हरीबोल, हरीबोल कर डुबो देते)। और वहां *सतयुग में नदी पर* क्या करते? (नशे की बात!)
° तुम जानते हो यह *जमुना का कण्ठा* था, जहाँ *रास विलास* आदि करते थे। वहाँ तो *बड़े-बड़े महल* होते हैं।
12. *कुमार-कुमारियों* के लिए बहुत सहज है, इसलिए परमात्मा को कन्हैया भी कहते। (इतनी कन्यायें जरूर शिवबाबा की होगी।) तो उन्हें *क्या सोचना* है? (याद से सम्बंधित)
° देह सहित देह के सब सम्बन्ध छोड़ अपने को आत्मा समझ *शिवबाबा का बन जाना* है।
° *शिवबाबा को ही याद* करते रहना है क्योंकि पापों का बोझा सिर पर बहुत है।
° अभी तुम इस पढ़ाई से पटरानी बन रहे हो, इसमें *पवित्रता* भी मुख्य चाहिए। (दिल तो सबकी होती है, हम जीते जी शिवबाबा का बन जायें। शरीर का भान न रहे। हम अशरीरी आये थे फिर अशरीरी बनकर जाना है। बाप के बने हैं तो बाप के सिवाए दूसरा कोई याद न रहे।)
13. *नये को* पहले-पहले क्या समझाना है? *बड़ो-बड़ों को* कैसे समझाना है? बाबा के बच्चे *कोने-कोने में* है (विदेश में भी), उनके लिए क्या करना है?
° (नये को) एक हद के, दूसरा *बेहद के बाप का परिचय* देना है। बेहद के *बाप से स्वर्ग (बहिश्त) नसीब होता* है।
° (बड़ो-बड़ों को समझाने), *आपस में मिलकर राय* करनी है कि सर्विस की वृद्धि कैसे हो। विहंग मार्ग की सर्विस कैसे हो।
° कोने-कोने में जाना चाहिए। विलायत में भी।
14. पास्ट में दान-पुण्य किया है तो भी बहुत *पैसा* मिलता है। फिर ज्ञान-योग का पुरुषार्थ क्यों करना है? (4)
° वह दान-पुण्य है एक जन्म की बात। यहाँ तो *जन्म-जन्मान्तर के लिए* साहूकार बनते हैं।
° जिनको बहुत धन है वह फिर बहुत फंसे हुए हैं ( *लोभ* )। कभी ठहर न सके। कोई साधारण गरीब ही सरेन्डर होंगे। साहूकार कभी नहीं होंगे।
° जैसे बहुत दान जो करते हैं तो वह राजा बनते हैं। परन्तु *एवरहेल्दी* तो नहीं हैं।
° राजाई की तो क्या हुआ, *अविनाशी सुख नहीं* है। यहाँ कदम-कदम पर अनेक प्रकार के दु:ख होते हैं। वहाँ यह सब दु:ख दूर हो जाते हैं।
15. तुम जानते हो बाप हमको राजयोग सिखा रहे हैं। हम पुरुषार्थ कर रहे हैं। इसमें *संशय क्यों नहीं* हो सकता? किसको संशय हो तो क्या समझा सकते?
° (संशय क्यों नहीं) हम *(इतने सारे) बी.के.* राजयोग सीख रहे हैं। झूठ थोड़ेही बोलेंगे।
° कोई को यह संशय आये तो समझाना चाहिए, यह तो *पढ़ाई* है। *विनाश* सामने खड़ा है। हम हैं *संगमयुगी ब्राह्मण चोटी*। प्रजापिता ब्रह्मा है तो जरूर ब्राह्मण भी होने चाहिए। (तुमको भी समझाया है तब तो निश्चय किया है।)
