*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 23-10-2020*
1. ईश्वरीय शक्तियों से बलवान बनो तो ____ का फोर्स समाप्त हो जायेगा।
° _माया_
2. अन्तिम विनाश लीला में हम *साक्षी दृष्टा बन शान्ति-शक्ति की किरणें* सर्व आत्माओं के प्रति कब दे सकेंगे?
° इसके लिए *विश्व कल्याणकारी की ऊंची स्टेज* चाहिए। (जिस स्टेज पर स्थित होने से *देह के सर्व आकर्षण* अर्थात् सम्बन्ध, पदार्थ, संस्कार, प्रकृति के *हलचल की आकर्षण समाप्त* हो जाती।)
3. तुमको ऐसा बाप मिला है तो बहुत ____ होनी चाहिए। यहाँ बच्चे आते हैं बाप से _____ सुनने। यहाँ ताजा-ताजा _____ बाबा चढ़ाते हैं। यहाँ तुम समझते हम बाबा के _____ में बैठे हैं। तुमको अपने से भी ____ बनाता हूँ। ऐसे बाप को तुम भूल जाते हो। दुनिया में सच्ची _____ किसको भी मिल न सके। पवित्रता, सुख, शान्ति, सम्पत्ति सिवाए बाप के कोई दे नहीं सकता।
° _खुशी_, _डायरेक्ट_, _नशा_, _परिवार_, _ऊंच_, _शान्ति_
4. *कौन-से* रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप बैठ समझाते हैं? _(मुरली की शुरूआत)_
° *नये विश्व वा नई दुनिया के मालिक बनने वाले* रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप बैठ समझाते हैं। (यह तो बच्चे समझते हैं कि बाप आये हैं *बेहद का वर्सा* देने।)
5. हमे *दिव्यगुण धारण* कर श्रेष्ठ-लायक क्यों बनना चाहिए? _(बाबा ने 2 सुन्दर कारण सुनाये)_
° क्योंकि बाप आकर *तुमको श्रेष्ठ देवता बनाते* हैं। (सच खण्ड में रहने वाले *सच्चे-सच्चे मनुष्य* लक्ष्मी-नारायण। बाकी मनुष्यों में आसुरी गुण होते हैं तो चलन जानवरों मिसल हो जाती है।)
° हमको *बेहद के बाप ने एडाप्ट किया* है। हम उनके बने हैं। (बाप है *स्वर्ग का रचयिता* । तो ऐसे स्वर्ग का मालिक बनने के लायक सर्वगुण सम्पन्न बनना पड़े। यह लक्ष्मी-नारायण सर्वगुण सम्पन्न थे। बच्चों को इस एक जन्म के लिए ही ज्ञान सागर द्वारा शिक्षा मिलती है क्योंकि अभी दुनिया को चेन्ज होना है।)
6. *देवता बनने वाले* बच्चों को विशेष किन बातों का ध्यान रखना है? (3)
° कभी कोई बात में *रूठना* नहीं, *शक्ल मुर्दे जैसी* नहीं करनी है।
° किसी को भी *दु:ख नहीं देना* है। देवता बनना है तो *मुख से सदैव फूल* निकलें। (अगर कांटे वा पत्थर निकलते हैं तो पत्थर के पत्थर ठहरे।)
° *गुण बहुत अच्छे* धारण करने हैं। ( *यहाँ ही सर्वगुण सम्पन्न* बनना है। सज़ा खायेंगे तो फिर पद अच्छा नहीं मिलेगा।)
7. तो ऐसा दिव्यगुण-सम्पन्न *श्रेष्ठ बनने की युक्ति* क्या है?
° श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ बनने के लिए बाबा *श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ मत* देते हैं। *पुरूषार्थ* कर ऐसा श्रेष्ठ बनना है। मुझे *याद* करो। (बाप बच्चों को ही कहते हैं कि मुझे याद करो। *पतित-पावन* एक ही बाप है। अभी हम उस *पावन* बनाने वाले बाप को याद करते हैं, *जीवनमुक्ति* दाता वह एक ही है।)
8. अच्छी रीति *याद* करते हो तो बाप द्वारा तुम्हें *ताकत* मिलती। परन्तु यहाँ रहते भी बहुतों की बुद्धि बाहर में भटकती रहती है। तो फिर बाबा ने कौन-सी वन्डरफुल *युक्ति* सुनाई? _(जिसका बल याद में मदद करेंगा।)_ (2)
° इसलिए बाबा कहते हैं यहाँ *चित्रों के सामने बैठ जाओ* तो तुम्हारी बुद्धि इसमें बिजी रहेगी। गोले पर, सीढ़ी पर *किसको समझाओ*। (बोलो सतयुग में बहुत थोड़े मनुष्य होते हैं। अभी तो ढेर मनुष्य हैं। बाप कहते हैं मैं ब्रह्मा के द्वारा नई दुनिया की स्थापना कराता हूँ, पुरानी दुनिया का विनाश कराता हूँ। ऐसे-ऐसे बैठ प्रैक्टिस करनी चाहिए। चित्र तो सबको मिल सकते हैं, हिम्मत रखनी चाहिए – अपने घर का कल्याण करें।)
° अपना *कमरा चित्रों से सजा दो* तो तुम बिजी रहेंगे। यह जैसे तुम्हारी *लाइब्रेरी* हो जायेगी। (दूसरों का कल्याण करने के लिए चित्र आदि लगा देना चाहिए। जो आये उनको समझाओ। तुम बहुत सर्विस कर सकते हो। बाबा इतनी उन्नति की युक्तियां बतलाते हैं।)
9. सेवा करने लिए *मुख नहीं खुलता*। तो बाबा का जबरदस्त उत्तर?
° अपना मुख *आपेही* खोल सकते हैं। अन्दर में जो चलता है वह बाहर में भी निकलना चाहिए।
(गूँगे तो नहीं हो ना। *घर में रड़ियां मारने के लिए मुख खुलता है, ज्ञान सुनाने के लिए नहीं खुलता!*)
10. कितना *मम्मा को याद करते* हैं। बाप कहते हैं याद करते हो, यह तो ठीक है, परन्तु………… क्या? (3)
° अभी सिर्फ मम्मा के नाम-रूप को याद नहीं करना है। हमको भी *उन जैसी धारणा करनी है*। (हम भी मम्मा जैसे *अच्छा बनकर गद्दी लायक* बनें। सिर्फ मम्मा की महिमा करने से थोड़ेही हो जायेंगे।)
° बाप तो कहते हैं मामेकम् याद करो, याद की यात्रा में रहना है। *मम्मा जैसा ज्ञान सुनाना* है।
° मम्मा की महिमा का *सबूत* तब हो जब तुम भी ऐसे *महिमा लायक बनकर दिखाओ* । (सिर्फ मम्मा-मम्मा कहने से पेट नहीं भरेगा। शिवबाबा को याद करने से पेट भरेगा।)
11. *हम शिवबाबा को देते* हैं। _(सही / गलत)_
° नहीं, हमने शिवबाबा से पद्म *लिया*, दिया नहीं। *बाबा तो तुमको अनगिनत देते* हैं। शिवबाबा तो *दाता* है, तुम उनको देंगे कैसे? (मैंने दिया, यह समझने से फिर देह-अभिमान आ जाता है। हम शिवबाबा से ले रहे हैं। बाबा के पास इतने ढेर बच्चे आते हैं, आकर रहते हैं तो प्रबंध चाहिए ना। गोया तुम देते हो अपने लिए। उनको अपना थोड़ेही कुछ करना है। राजधानी भी तुमको देते हैं इसलिए करते भी तुम हो।)
12. भक्ति भी पहले एक की करते हैं क्योंकि सर्व की _____ करने वाला एक है फिर दूसरे किसी की भक्ति क्यों करनी चाहिए। इन _____ को भी बनाने वाला, _____ -योग सिखलाने वालातो शिव है ना। बाप को ____ करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। बाकी गंगा में जाकर एकदम ____ जाओ तो भी विकर्म विनाश नहीं होंगे।
° _सद्गति_, _लक्ष्मी-नारायण_, _राज_, _याद_, _डूब_
13. भक्ति मार्ग में भल गाते *हे पतित-पावन* आओ। परन्तु…… क्या?
° *पावन राजायें कैसे होते* हैं फिर पतित राजायें कैसे होते हैं, यह राज़ कोई नहीं जानते। ज्ञान को तो और कोई जानता नहीं। तुम बच्चों को *बाप समझाते हैं और ऐसा बनाते* हैं। (कर्म तो यह देवतायें भी सतयुग में करते हैं परन्तु पतित कर्म नहीं करते हैं। उनमें दैवीगुण हैं, स्वर्गवासी।)
° बाबा अपना और अपनी रचना के आदि-मध्य-अन्त की सारी नॉलेज देते। *बाप कितना सहज समझाते* हैं – तुम आत्मायें पार्टधारी हो। (आत्मायें अपने घर से आकर यहाँ पार्ट बजाती हैं। उनको मुक्तिधाम कहा जाता है। स्वर्ग है जीवनमुक्ति। यहाँ तो है जीवन बंध। मोक्ष कभी होता नहीं, पार्ट से तो निकल नहीं सकते। यह अनादि बना बनाया खेल है। वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी हूबहू रिपीट होती है। सतयुग में वही देवता आयेंगे। फिर पीछे इस्लामी, बौद्धी आदि सब आयेंगे। यह ह्युमन झाड़ बन जायेगा। इनका बीज ऊपर में है। बाप है मनुष्य सृष्टि का बीजरूप।)
14. *मनुष्य सृष्टि में* धीरे-धीरे बहुत वृद्धि होती जाती है। अच्छा, फिर छोटी कैसे होती?
° क्योंकि जब बाप आकर पतित से पावन बनाते हैं, तो *कितने थोड़े पावन बनते* हैं। *कोटों में कोई* निकलते हैं। आधाकल्प बहुत थोड़े होते हैं। (सबसे जास्ती सम्प्रदाय उन देवताओं की होनी चाहिए क्योंकि पहले-पहले यह आते हैं परन्तु और-और धर्मों में चले जाते हैं क्योकि बाप को ही भूल गये हैं। यह है एकज़ भूल का खेल। भूलने से कंगाल हो जाते हैं। भूलते-भूलते एकदम भूल जाते हैं।)
15. कोई भी प्रापर्टी का झगड़ा आदि है, तो *लड़ते ही रहना* चाहिए। _(सही / गलत)_
° नहीं, *झगड़ा खलास कर दो*। झगड़ा करते-करते तो प्राण भी निकल जायेंगे। (बाप समझाते हैं इसने छोड़ा तो कोई झगड़ा आदि थोड़ेही किया। कम मिला तो जाने दो, उसके बदले कितनी राजाई मिल गई। बाबा बताते हैं मुझे साक्षात्कार हुआ विनाश और राजाई का तो कितनी खुशी हुई। हमको विश्व की बादशाही मिलनी है तो यह सब क्या है।)
