Answers from Sakar Murli 25-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 25-08-2020*

1. नाज़ुक परिस्थितियों के पेपर में पास होना है तो अपनी नेचर को ______ बनाओ।
°शक्तिशाली

2. अपने को *वर्ल्ड सर्वेन्ट, सच्चे सेवाधारी* समझने से क्या प्राप्तियां होती? (2)
° जैसे सर्वेन्ट को सदा सेवा और मास्टर याद रहता। ऐसे *बाप और सेवा* के सिवाए कुछ भी याद नहीं रहता, इससे ही *एकरस स्थिति* में रहने का अनुभव होता है।
° उन्हें एक बाप के रस के सिवाए सब रस नीरस लगते। कहाँ भी आकर्षण नहीं जाती, *सर्व आकर्षणों से मुक्त* बनते।

3. _____ समझ बाप को याद करने में बहुत मज़ा है। बाप कहते हैं फिर हम आकर ज्ञान अमृत की ____ करते हैं। बाप आकर ज्ञान रत्न चुगने वाला ____ बनाते हैं। आगे चल तुम्हारे चरणों में सब झुकेंगे। कहेंगे बरोबर यह मातायें ____ का द्वार खोलती हैं।
°आत्मा, वर्षा, हंस, स्वर्ग

4. तुम इस सारे विश्व को स्वर्ग बनाते हो। अपने को _____ में लाना चाहिए। हम श्रीमत से अपनी ______ स्थापन कर रहे हैं। वहाँ तो ______ के महल होते हैं, सब प्रकार के वैभव होते हैं। जब _____ होगा तब तुम स्वर्ग के साक्षात्कार के हलवे खायेंगे।
°नशे, राजाई, हीरों, विनाश

5. सुखधाम के *देवी-देवता धर्म* को ऊंच ते ऊंच धर्म क्यों कहते?
° क्योंकि सुखधाम में तुमको *सुख भी है तो शान्ति भी है*, इसलिए तुम्हारा ऊंच ते ऊंच धर्म है। ( *अथाह सुख* रहता है। विचार करो हम क्या बनते हैं। स्वर्ग के मालिक बनते हैं। वह है *हीरे जैसा जन्म* ।)

6. *बाप समान मीठा, प्यार का सागर, सूर्यवंशी लक्ष्मी-नारायण* (16 कला सम्पूर्ण, परफेक्ट, सतोप्रधान, सम्पूर्ण निर्विकारी, एवरहेल्दी) बनने के लिए क्या करना है? (4)
° *याद* ही प्यार खींचता है।
° बहुत मीठे, बहुत प्यारे बनने चाहते हो, ऊंच पद पाना चाहते हो तो *मेहनत* करो।
° जब समझेंगे कि *हम आत्मा हैं*। देही-अभिमानी बनने के लिए बहुत प्रयत्न करो।
° जितना हो सके कोशिश करो – मैं आत्मा हूँ, बाबा का बच्चा हूँ। अन्दर में *बहुत खुशी* रहनी चाहिए।

7. *याद* से और कौन-कौन सी प्राप्तियां होती? (5)
° *बाप भी तुमको मीठा लगेगा* ।
° कहाँ-कहाँ *खिट-खिट* होती है, *अहंकार* आ जाता है, वह कभी नहीं होगा – याद की यात्रा में रहने से।
° *दिल पर चढ़ते* । *याद से याद* मिलेगी।
° जितनी कलायें बढ़ेगी उतना *खुशी का पारा* चढ़ेगा।
° बाप की याद से ही *पाप कटते* हैं, रात-दिन कोशिश करनी चाहिए। फिर कर्मेन्द्रियों की *चंचलता बन्द* हो जायेगी।

8. आज के मनुष्य क्या हैं, कल के क्या होंगे। अभी तुम हो बीच में। _____तारे कुसंग बोरे। तुम पुरूषोत्तम बनने के लिए बाप का _____ पकड़ते हो। नहीं तो माया खींच लेती है। अब तुम बच्चों को बाप के साथ _____ बुद्धियोग लगाना है, इसमें मूँझना नहीं है।अब बाप इशारा देते हैं _____ में रहने का। तुम बुलाते ही हो कि हमको आकर पतित से पावन बनाओ।
°संग, हाथ, पूरा, याद

9. अगर तुम बच्चे चाहते हो परफेक्ट दुनिया में जायें तो ________ बनना है। अब मुझ आत्मा को परमात्मा बाप कहते हैं तुम पहले _____ थे। सब आत्मायें वहाँ _______ ही हैं।
°परफेक्ट, परफेक्ट, परफेक्ट

10. *किसको थोड़ा समझाया* – इसमें बाबा बहुत खुश होते है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (बाबा बार-बार समझाते हैं – याद को बढ़ाओ। किसको थोड़ा समझाया – इसमें बाबा खुश नहीं होते। एक पण्डित की भी कथा है ना।)

11. यह घमण्ड रख सकते कि *हमको ज्ञान बहुत है* । _(सही / गलत)_ (3)
° *गलत* (मूल बात है याद। ज्ञान तो *बिल्कुल सहज* है। कोई भी सीख जायेंगे। आत्मायें सब भाई-भाई हैं। बाप एक है। 84 जन्म कल्प-कल्प लेते आये। पिछाड़ी में तमोप्रधान दु:खी बने।
° सिर्फ नॉलेज को परफेक्ट नहीं कहा जाता। पढ़ाई तो *बिल्कुल कॉमन* है, पवित्र बनना है, याद में रहना है।
° बहुत हैं जिनकी याद का चार्ट है नहीं। गोया *फाउन्डेशन है नहीं* ।

12. बाप को अविनाशी सर्जन भी कहा जाता है। ज्ञान ______ सतगुरू दिया। _____- का दाना बनना है तो पुरूषार्थ करना पड़े।
°इन्जेक्शन, माला

13. सभी मनुष्य मात्र दान तो करते ही हैं (यात्रा पर, फकीरों को, चावल मुट्ठी आदि)। अभी बाबा हमको *डबल दानी* बनाते हैं। कैसे?
° बाप कहते हैं तीन पैर पृथ्वी पर तुम यह *ईश्वरीय युनिवर्सिटी, ईश्वरीय हॉस्पिटल (दोनों एक में!)* खोलो जिसमें मनुष्य 21 जन्मों के लिए आकर शफा पायें।

14. तुम जानते हो – यह है पुरुषोत्तम संगमयुग। हम अभी *पुरुषोत्तम बन रहे* हैं, तो हमें क्या करना चाहिए? (2)
° *पूरा पढ़ना चाहिए*।
° *लोक-लाज* कुल की मर्यादा में भी बहुत फँसे रहते हैं। (इस बाबा ने तो कोई की भी परवाह नहीं की। पहले-पहले आने वालों ने तो कमाल की। अभी ऐसे कोई विरले निकलेंगे। लोक-लाज बहुत है। पहले जो आये उन्हों ने बहुत हिम्मत दिखाई।)

15. अरे गीता में भगवानुवाच है ना – ____ महाशत्रु है, इन पर जीत पाने से विश्व के मालिक बनोगे। मुझ से भी कोई कहलाते हैं कि _____ विकार को जीतने से तुम जगतजीत बनेंगे। तुमको स्वर्ग की बादशाही देने आया हूँ। अब _____ बनो और बाप को याद करो। _____ रहने से ही याद में रह सकेंगे। यह प्वाइंट अच्छी रीति धारण करो।
°काम, काम, पवित्र, पवित्र

16. बाबा ने कहा इस *पुरानी दुनिया से दिल नहीं लगानी* है (तब ही अच्छे से बाबा को याद कर कल्प-कल्पनान्तर का भाग्य बना सकेंगे)। तो बेहद का वैराग्य दिलाने बाबा ने कौन-सी बातें सुनाई? (7)
° दुनिया में मनुष्य कितना लड़ते झगड़ते हैं। जीवन ही जैसे *ज़हर मिसल* कर देते हैं।
° यह है ही विषय सागर। रौरव नर्क में सब पड़े हैं, बहुत गन्द है। दिन-प्रतिदिन गन्द वृद्धि को पाता रहता है। इनको कहा जाता है *डर्टी वर्ल्ड*।
° एक-दो को दु:ख ही देते रहते क्योंकि *देह-अभिमान का भूत* है। काम का भूत है। बाप कहते हैं इन भूतों को भगाओ। यह भूत ही तुम्हारा काला मुँह करते हैं।
° यहाँ तो *सब मिलावटी चीजें* हैं। सबसे तन्त (सार, इसेन्स) निकाल बाकी दे देते हैं। गाय को खाना भी ठीक नहीं मिलता।
° *एटॉमिक बॉम्ब्स* बनाने वालों का भी मान कितना है, इनसे सबका विनाश हो जाता है।
° यहाँ तो *कैसी-कैसी बीमारियां* होती हैं। बीमारी में कितनी बांस हो जाती है। हॉस्पिटल में देखो तो ऩफरत आती है। कर्मभोग कितना है। विकारी मनुष्यों की आयु भी कितनी छोटी हो जाती है।
° बुलाते भी हैं हे दु:ख हर्ता सुख कर्ता परमात्मा, हे मात-पिता……. अच्छा, मात-पिता की बॉयोग्राफी तो बताओ। *कुछ भी पता नहीं* ।

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