Answers from Sakar Murli 28-07-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 28-07-2020*

1. *एक का पदमगुणा* फल किन्हें मिलता?
° जो *समय पर सहयोगी* बनते हैं।

2. दुनिया में बहुत प्लान्स बनाते। तो *बाबा का प्लान* क्या है? और हम *बच्चों का प्लान*?
° बाप कहते हैं मेरा प्लैन है *पुरानी को नया* बनाना।
° हमारा एक ही प्लैन है। जानते हो *बाप की श्रीमत से हम अपना वर्सा ले रहे* हैं। बाबा रास्ता बताते हैं, श्रीमत देते हैं, *याद में रहने की मत* देते हैं।

3. बाबा ने आज पुरुषार्थ की कौन-सी *अच्छी-अच्छी युक्तियां* सुनाई? (3) माया *तंग* किन्हें करती है?
° सवेरे में स्नान कर *(याद में) घूमने फिरने* में बड़ा मज़ा आता (तनदुरस्ती भी रहती), अन्दर यही याद रहे हम एक्टर्स हैं। बाबा ने चक्र का राज़ बताया है। हम सतोप्रधान थे, यह बड़ी खुशी की बात है। (मनुष्य घूमते-फिरते हैं, उनकी कुछ भी कमाई नहीं। तुम तो बहुत कमाई करते।)
° अपने को देखो – हम *क्या थे, अब क्या बन गये हैं! फिर हमको बाबा ऐसा देवता बनाते* हैं।
° पुरुषार्थ करते रहो फिर *पक्का* होता जायेगा फिर ऑफिस में काम करने समय भी यह ईश्वर की स्मृति रहेगी। तुम भी घर में बैठो फिर भी बुद्धि उस तरफ लगी रहे। यह *आदत* रखो तो तुम्हारे अन्दर यही *चिन्तन* चलता रहे।
° (माया तंग) जो बच्चे ज्ञान का *विचार सागर मंथन नहीं करते* हैं उनकी बुद्धि में माया खिट-खिट करती है। उन्हें ही माया तंग करती है। (अन्दर विचार करो हमने यह चक्र कैसे लगाया। सतयुग में इतने जन्म लिए। अब फिर सतोप्रधान बनना है। बाबा ने कहा है – मुझे याद करो तो सतोप्रधान बन जाएंगे।)

4. बाप आते ही सेकण्ड में ऊंच चढ़ा देते हैं, तीसरा नेत्र दे दूरांदेशी-विशाल बना देते। तो जबकि हम इतने *समझदार-बुद्धिवान* है, तो हम इस *ड्रामा* में बारे में क्या-क्या जानते हैं? (5) *सार* में क्या याद रखना है?
° हम आत्मा हैं। यह शरीर रूपी *चोला पहनकर बहुरूपी पार्ट* बजाते हैं। नाम, रूप, देश, फीचर्स बदलते जाते हैं।
° सारे ड्रामा के *चक्र का राज़* बुद्धि में याद है (जो बाबा ने दिया है)। एक्टर्स घर में चले जाते हैं, वहाँ कोई पार्ट नहीं बजाते। पार्ट इस स्टेज पर बजाते। गोल्डन एज में सतोप्रधान-पावन-सुख का राज्य था, फिर आइरन एज में रावण-वश तमोप्रधान-पतित-दु:खी बने।
° बाकी आत्मायें सब ऊपर से यहाँ आती हैं पार्ट बजाने। यह झाड़ *सब धर्मों* का नम्बरवार है। (यह सब बीज-झाड़ के चित्र में भी आ जाता, बीच में त्रिमूर्ति भी रखकर समझा सकते)
° इस चैतन्य ड्रामा में ज़रा भी *अदली-बदली नहीं* हो सकती।
° सतयुग से लेकर कलियुग तक आते हैं फिर जाते हैं *फिर नये सिर* आकर पार्ट बजाते हैं।
° ( *सार* ) अपने को *आत्मा* समझना है। मुझ आत्मा में सारे चक्र का *पार्ट* है। अभी वह पार्ट *पूरा* हुआ है। बाप राय देते हैं बहुत सहज, मुझे *याद* करो।

5. वहाँ के *गरीब भी बहुत ऊंच* हैं, यहाँ के साहूकारों से। _(सही / गलत)_
° *सही*… (भल यहां कितने भी बड़े-बड़े राजायें थे, धन बहुत था परन्तु हैं तो विकारी ना। इनसे वहाँ की साधारण प्रजा भी बहुत ऊंच बनती है। बाबा फर्क बतलाते हैं।)

6. कौन-सी *3 प्रकार की विद्या* बाबा ने बताई? इस आध्यात्मिक विद्या (स्प्रीचुअल नॉलेज) की *मुख्य विशेषता* कौन-सी हे?
° उन स्कूलों में मिलती है *जिस्मानी* विद्या। और फिर वह है *शास्त्रों* की विद्या। यह फिर है *रूहानी* विद्या (आध्यात्मिक विद्या, स्प्रीचुअल नॉलेज)
° यह स्प्रीचुअल नॉलेज जो *स्प्रीचुअल फादर* सभी आत्माओं का बाप है, वही *पढ़ाते* हैं। (उनकी महिमा है *शान्ति, सुख का सागर*……।)

7. *परमधाम* के कौन-कौन से नाम आज की मुरली में आये हैं? (6) वहां आत्माएं *कैसी* दिखती है?
° शान्तिधाम, मुक्ति, घर, मूलवतन, निराकारी दुनिया, ब्रह्म महतत्व।
° आत्मायें ब्रह्म महतत्व में खड़ी होती हैं, *जैसे स्टार्स आकाश में* खड़े हैं। (यह स्टार्स तो दूर से *छोटे-छोटे* देखने में आते हैं।)

8. याद के लिए *यात्रा* अथवा *युद्ध* अक्षर सिर्फ समझाने में काम में लाते हैं। _(सही / गलत)_
° *सही* … (इसमें युद्ध आदि कुछ है नहीं। यात्रा भी अक्षर है। बाकी है तो याद।)
° ( *यात्रा* ) याद करते-करते पावन बन जायेंगे। यह यात्रा पूरी भी यहाँ ही होगी। कहाँ जाना नहीं है।
° ( *युद्ध* ) युद्ध कोई है नहीं। अपने को तमोप्रधान से सतोप्रधान बनाना है। माया पर जीत पानी है।

9. भल माया की चमक कितनी भी है परन्तु यह है ______ की गोल्डन एज, वह (सतयुग) है _____ गोल्डन एज। सतयुग में तो एक ____ एक _____ थी, जो अब फिर से स्थापन कर रहे हैं। बाप तो _____ भाषा में ही समझाते रहते हैं। मीठे-मीठे बच्चों को फिर भी समझाते हैं – जल्दी-जल्दी _____ करो। शरीर पर भरोसा थोड़ेही है।
°रावण, ईश्वरीय, राज्य,भाषा, हिन्दी, पुरूषार्थ

10. कोई-कोई बहुत कट्टर होते हैं सुनते भी नहीं, लिटरेचर भी नहीं लेते। बहुत मेहनत करते हैं फिर भी कोई *बिरले निकलते* हैं। इसलिए सेवा छोड़ देनी चाहिए। _(सही / गलत)_
° *गलत* (थकना नहीं है। मेहनत तो करनी है। मेहनत बिगर कुछ मिलता थोड़ेही है। प्रजा तो बनती रहती है)

11. ज्ञान मार्ग में बच्चे कौन-सी *गुड़ियों का खेल* करते? इसके बदले बातों का *क्या करना* है?
° (गुड़ियों का खेल) आपके सामने भी जब कोई निर्जीव, असार बातें (ईर्ष्या, अनुमान, आवेश आदि) आती हैं, आप उनका *विस्तार कर अनुभव करते* या कराते हो कि यही सत्य हैं, तो यह भी जैसे उनमें प्राण भर देते हो।
° फिर उन्हें ज्ञान सागर बाप की याद से, बीती सो बीती कर, स्वउन्नति की लहरों में डुबोते भी हो लेकिन इसमें भी टाइम तो वेस्ट जाता है। इसलिए पहले से ही *मास्टर ज्ञान सागर बन स्मृति सो समर्थी भव के वरदान से इन गुड़ियों के खेल समाप्त* करो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *