*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 29-10-2020*
1. अव्यक्त पालना के वरदान का अधिकार लेने के लिए ____ -वादी बनो।
° _स्पष्ट_
2. *आत्मा करावनहार है* , करनहार ये विशेष त्रिमूर्ति शक्तियां हैं (मन, बुद्धि और संस्कार), यह आप *मास्टर रचता* की रचना हैं। तो अब क्या करना है?
° इन्हें अपने *अधिकार की शक्ति से सहयोगी* बनाओ। (जैसे राजा स्वयं कार्य नहीं करता, कराता है, करने वाले राज्य कारोबारी अलग होते हैं।)
° तो *मास्टर रचयिता के वरदान को स्मृति में रख* त्रिमूर्ति शक्तियों को और साकार कर्मेन्द्रियों को सही रास्ते पर चलाओ।
3. तुम जानते हो हम देवता बनने के लिए पढ़ रहे हैं। पढ़ाई में _____ रहता है ना। तुम भी समझते हो हम बाबा द्वारा पढ़कर विश्व के मालिक बनते हैं। तुम्हारी पढ़ाई है फार _____ । बाबा को याद करते-करते आत्मा पवित्र हो जायेगी फिर यह पुराना शरीर खत्म हो जायेगा। बच्चों को अपार ____ होनी चाहिए। तुम हो कितने साधारण और बनते क्या हो! ____ के मालिक। तुम्हारा कितना ____ होगा। ____ स्पून इन माउथ।
° _नशा_, _फ्यूचर_, _खुशी_,
_विश्व_, _श्रृंगार_, _गोल्डन_
4. *पुरूषार्थ पूरा* करना चाहिए। क्यों? _(सतयुग की एक वन्डरफुल प्राप्ति)_
° तुमको *21 जन्म का वर्सा* मिलता है, बेहद के बाप से। फिर *21 पीढ़ी तुम सुखी* रहते हो। बुढ़ापे तक दु:ख का नाम नहीं रहता। फुल आयु सुखी रहते हो। ( *जितना* वर्सा पाने का पुरूषार्थ करेंगे *उतना* ऊंच पद पायेंगे। तो पुरूषार्थ पूरा करना चाहिए।)
5. निर्विकारी के पास तो पहले-पहले जन्म श्री- ____ को ही लेना है।
° _कृष्ण_
6. आगे चल देखना तुम्हारे पास बड़े-बड़े घर के बच्चे _______ कैसे आते हैं। बाप तुम्हारी कितनी महिमा करते हैं। तुमको हम अपने से भी ____ बनाता हूँ। जैसे कोई लौकिक बाप बच्चों को ____ बनाते हैं।
° _प्रिन्स-प्रिन्सेज_, _ऊंच_, _सुखी_
7. इस पुरूषोत्तम संगमयुग पर मोस्ट वैल्युबुल निराकारी-सत् बाप-टीचर-गुरू स्वर्ग-रचयिता *शिवबाबा को लव से याद* कैसे करना है?
° जिनका बाप के साथ पूरा लव है उनको *बहुत कशिश* होती है। ऐसे बाबा को तो *एकदम पकड़ लो* । बाबा आप तो *कमाल* करते हो। आप हमारी *जीवन* ऐसी बनाते हो। बहुत लव चाहिए। (लव क्यों नहीं है क्योंकि कट चढ़ी हुई है। याद की यात्रा के सिवाए कट निकलेगी नहीं, इतने लवली नहीं बनते हैं।)
8. बहुत लव रखना, कट उतारना आदि के फलस्वरूप *हम कैसे* बन जाएगे? (2)
° *लवली* बनते हैं। तुम फूलों को तो यहाँ ही खिलना है, *फूल* बनना है। तब फिर वहाँ जन्म-जन्मान्तर फूल बनते हो। कितनी *खुशी* होनी चाहिए – हम कांटे से फूल बन रहे हैं। फूल हमेशा सबको *सुख देते* हैं। (फूल को सब अपनी आंखों पर रखते हैं, उनसे खुशबू लेते हैं। फूलों का इत्र बनाते हैं। गुलाब का जल बनाते हैं।) बाबा तो वन्डर खाते हैं, शिवबाबा हमको स्वर्ग का फूल बनाते हैं! तमोप्रधान मनुष्य से सतोप्रधान देवता!)
° बाबा को याद करते-करते आत्मा *पवित्र* हो जायेगी फिर यह पुराना शरीर खत्म हो जायेगा। बच्चों को *अपार खुशी* होनी चाहिए।
9. अच्छे *फर्स्टक्लास पुरूषार्थी* बच्चे कौन से बोल खुले दिल से बोलेंगे?
° बाबा हम तो *पास विद् ऑनर* होकर दिखायेंगे। आप *बेफिक्र* रहो। उनका रजिस्टर भी *अच्छा* होगा। (उनके मुख से कभी भी यह बोल नहीं निकलेंगे कि अभी तो हम पुरूषार्थी हैं। पुरुषार्थ कर ऐसा महावीर बनना है जो माया जरा भी हिला न सके।)
10. बाबा हमे *याद की यात्रा मैं दौड़ाकर विन* कराकर कौन-सी 2 माला का मणका बनाना चाहते?
° *रूद्र* माला और *रूण्ड* माला (विष्णु के गले का हार)।
11. आज *बाबा का कौन-सा नया टाइटल* मुरली में था?
° *युद्धिष्ठिर* भी वास्तव में बाप को कहना चाहिए जो युद्ध सिखलाते हैं। (युद्धिष्ठिर बाप तुमको सिखलाते हैं – माया से तुम युद्ध कैसे कर सकते हो। इस समय युद्ध का मैदान है ना। बाप कहते हैं – काम महाशत्रु है, उन पर जीतने से तुम जगत जीत बनेंगे।)
12. और *हमे कौन-सा नया टाइटल* मिला?
° भागीरथ यह है। ऐसे *तुम सब भागीरथ हो, भाग्यशाली* हो ना।
13. बाबा जो ज्ञान का सागर है, सभी आत्माओं का बाप है, वह हमको पढ़ा रहे हैं। ____ रच रहे हैं। मैगजीन में भी अच्छी-अच्छी _____ निकलती रहती हैं। हो सकता है _____ चित्रों की भी मैगजीन निकले। सिर्फ अक्षर छोटे-छोटे हो जाते हैं। ____ तो बने हुए हैं। कहाँ भी कोई बना सकते हैं। ऊपर से लेकर हर एक चित्र का ____ तुम जानते हो।
° _युक्ति_, _प्वाइंट्स_, _रंगीन_, _चित्र_, _आक्यूपेशन_
14. ज्ञान से सर्व की ____ मैं करता हूँ। तुम्हारे निमित्त सबका ____ हो जाता है क्योंकि तुम्हारे लिए जरूर ____ दुनिया चाहिए। तुम कितने खुश होते हो। अब _____ की कान्फ्रेन्स में भी तुम बच्चों को निमंत्रण मिला हुआ है। बाबा तो कहते रहते हैं हिम्मत करो। ____ जैसे शहर में तो एकदम आवाज़ फैल जाए।
° _सद्गति_, _कल्याण_, _नई_, _वेजीटेरियन_, _देहली_
15. तुम कैसे लाइट हाउस हो। एक आंख में ____ -धाम, एक में ____ -धाम। इस चक्र को जानने से तुम ____ -वर्ती राजा, सुखधाम के मालिक बन जायेंगे।अभी तुम विष्णुपुरी क्षीरसागर के मालिक बन रहे हो – ____ की यात्रा से और ____ -दर्शन चक्र फिराने से। ___ -गुण भी यहाँ धारण करने हैं। यह है पुरूषोत्तम _____ -युग। पढ़ते-पढ़ते तुम पुरूषोत्तम बन जायेंगे।
° _मुक्ति_, _जीवनमुक्ति_, _चक्र_, _याद_, _स्व_, _दैवी_, _संगम_
16. माया के तूफानों से डरना नहीं है, ____-वीर बनना है। अपने ____ -गुणों को निकालते जाना है, सदा ____ रहना है। कभी भी हिलना नहीं है।
° _महा_, _अव_, _हर्षित_
17. भक्ति में *सर्वव्यापी* मानने का और एक नया कौन-सा कारण बाबा ने सुनाया?
° भक्ति मार्ग में *बाप तो कोई का भी साक्षात्कार करा सकते* हैं। इस कारण मनुष्यों ने सर्वव्यापी कह दिया है, यह भी ड्रामा की भावी। (तुम बच्चे बहुत ऊंच पढ़ाई पढ़ रहे हो।)
18. सारी विश्व दैवी राजस्थान थी, यही देहली *जमुना का कण्ठा* था, उनको परिस्तान कहा जाता है। और यहां की नदियाँ कैसी है?
° वहां उछलती थोड़ेही हैं। अभी तो *कितनी उछलती हैं, डैम्स फट पड़ते* हैं। (प्रकृति के जैसे हम दास बन गये हैं। फिर तुम मालिक बन जायेंगे। वहाँ माया की ताकत नहीं रहती है जो बेइज्जती करे। धरती की ताकत नहीं जो हिल सके।)
