Answers from Sakar Murli 31-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 31-08-2020*

1. जब हर _____ श्रेष्ठ होगा तब स्वयं का और विश्व का कल्याण होगा। अभी तक जो कुछ हुआ – उसे ______ लगाओ। बीती को चिंतन में न लाना – यही _____ पुरूषार्थ है। अभी _____ करने का समय नहीं है क्योंकि संगमयुग की दो घड़ी अर्थात् अनेक वर्ष। फुलस्टॉप लगाना अर्थात् सर्व ______ से फुल बनना।
°संकल्प, फुलस्टॉप, तीव्र, वेस्ट, खजानों

2. इस दुनिया को तो हम जानते हैं। बाकी *पुण्य की दुनिया* कौन-सी है? (2)
° *मुक्ति और जीवनमुक्ति* पुण्य की दुनिया को कहा जाता है। वहाँ पाप होता नहीं। (पाप होता है दु:खधाम रावण राज्य में।)

3. *सतयुग में पवित्रता* के आधार पर कितने प्रकार (कैटेगरी) की आत्माएं होंगी?
° सतयुग में तो मलेच्छ होते नहीं। है ही पवित्र दुनिया। *एक ही कैटेगरी है* ।

4. हम इस समय *पूरा* रावण राज्य में हैं। _(सही / गलत)_
° *गलत* (रावण राज्य में है, परन्तु किनारा किया हुआ है। *हम अभी पुरुषोत्तम संगमयुग पर हैं*। बच्चे जब यहाँ आते तो बुद्धि में है – हम उस बाप के पास जाते हैं जो हमको मनुष्य से देवता बनाते हैं। सुखधाम का मालिक बनाते हैं।)

5. *सुखधाम का मालिक* बनाने वाले हैं ब्रह्मा बाबा। _(सही / गलत)_
° *नहीं* (कोई भी देहधारी नहीं। बनाने वाला है ही *शिवबाबा*, जिसको देह नहीं है। तुम समझते हो हम *बेहद के बाप* पास जाते हैं। वह हमको श्रेष्ठ मत देते हैं।)

6. बाबा के पास आते हैं, बाबा ज्ञान का _____ कराते हैं आत्मा को। समझते हो हम आत्मा ज्ञान से _____ होंगी। फिर शरीर भी ______ मिलेगा। आत्मा और शरीर दोनों पवित्र ______ में होते हैं।
°श्रृंगार, पवित्र, पवित्र, सतयुग

7. तुम अभी जानते हो हम आत्मा ______ हैं। पहले-पहले हम सुखधाम में आये फिर अब दु:खधाम में आये हैं। अब बाप फिर सुखधाम में ले जाने आये हैं। कहते हैं मुझे ______ करो और _______ बनो।
°एक्टर, याद, पवित्र

8. संगमयुग पर जो *अच्छे पुरुषार्थी* हैं, वह क्या समझते होंगे? (2)
° हमने *84 जन्म* लिए हैं फिर इन *लक्ष्मी-नारायण के साथ* ही हम *सतयुग में राज्य* करेंगे। (सिर्फ एक ने तो 84 जन्म नहीं लिया है ना।)

9. *पहली सब्जेक्ट* कौन-सी हे? _(आज की मुरली अनुसार)_
° मुख्य बात है *बाप को याद करो तो विकर्म विनाश हों*। यह है पहली सब्जेक्ट।

10. जबकि हम सारे राज़ को जानते (रचता बाप, सूक्ष्मवतन, भविष्य मर्तबा आदि)। तो बाप कहते ऐसे *दैवीगुण* भी धारण करने हैं। फिर *आँखों को शीतल* करने लिए कौन-सी जबरदस्त युक्ति सुनाई? (2)
° आत्मा इन *खिड़कियों से देखती* है (जैसे बाप)। हमारी भी *दृष्टि आत्मा पर* जाती है। आत्मा को समझाते।
° अपने को *अशरीरी* समझो। (यह कर्मातीत अवस्था पिछाड़ी में होगी सो भी जब बाबा को अपना *चार्ट* भेज देंगे।)

11. बाबा किन्हें *सच्चा ऑनेस्ट बच्चा* समझते?
° *जो चार्ट लिखते* हैं। (चार्ट के साथ फिर मैनर्स भी चाहिए। बच्चे चार्ट नहीं लिखते हैं तो जरूर कुछ खामियां हैं, जो बाबा से छिपाते हैं।)

12. चार्ट में क्या-क्या *नोट* कर सकते?
° हमने किसी को *दु:ख* तो नहीं दिया? कोई से लड़ा- *झगड़ा* तो नहीं? उल्टा-सुल्टा तो नहीं *बोला* ? कोई *अकर्तव्य* कार्य तो नहीं किया? *दृष्टि* ठीक रही?

13. बाबा कहते किसी को भी दु:ख न दो। फिर कोई दिखाते हैं बाबा हमारा चार्ट देखो। *हमने ज़रा भी किसको दु:ख नहीं दिया* है। तो बाबा ने उनकी किन श्रेष्ठ शब्दों में महिमा की? (2)
° बाबा कहेंगे यह बच्चा तो *बड़ा मीठा* है। *अच्छी खुशबू* निकाल रहे हैं।
° बाबा *बुलायेंगे* भी ऐसे अच्छे बच्चे को *हम देखें तो सही* । सपूत बच्चों को बाप *बहुत प्यार करते* हैं।

14. *टीचर* बनने में कितना समय लगता? (2)
° *एक दिन में भी* टीचर बन सकते। (बाप तुमको 84 का राज़ समझाते, टीच करते। फिर जाकर उस पर मनन करना है। हमने 84 जन्म कैसे लिये?)
° टीचर बनना तो *सेकण्ड का काम* है। (कई टीचर से भी जास्ती दैवीगुण धारण करते। याद की यात्रा में तीखे निकलते। तो टीचर से भी ऊंच पद पायेंगे।)

15. बाबा ने कहा रोज़ *शिव के मन्दिर में* जाकर टीच करो। वहां क्या समझा सकते?
° *शिवबाबा कैसे आकर* स्वर्ग की स्थापना करते हैं? *स्वर्ग का मालिक बनाते* हैं। (समझाना बहुत ही सहज है।)

16. तुम कितना *प्रदर्शनी* में भी समझाते। निकलते बिल्कुल थोड़े हैं। इसलिए सेवा करनी ही नहीं चाहिए। _(सही / गलत)_
° गलत (ड्रामा में था, किया! *कहाँ निकलते भी हैं* प्रदर्शनी से। कहाँ नहीं निकलते हैं। *आगे चल आयेंगे*, ऊंच पद पाने का पुरूषार्थ करेंगे।

17. (कुछ ठीक नहीं होता, तो) कहते *भगवान ने* ऐसे क्यों किया?
° यह अनादि ड्रामा बना हुआ है (कर्मों के हिसाब-किताब भी है)। *भगवान ने थोड़ेही कुछ किया।*

18. हर एक कहते भी हैं पार लगाओ। अब पार तो जायेंगे ______ में। परन्तु वहाँ पद ऊंच पाना है तो _____ बनना है। मेहनत करनी है।
°सतयुग, पवित्र

19. भगवान, देवी-देवता आदि के लिए *अनेक प्रश्न* करते। बाबा ने कौन-सा श्रेष्ठ समाधान सुनाया?
° पहली-पहली मुख्य बात भगवान कौन है, उनको तो समझो। *अपने को आत्मा* समझेंगे तो कहेंगे यह तो बात ठीक है। हमको पतित से *पावन* जरूर बनना है। *याद करना* है उस एक भगवान को। सब धर्मों में भगवान को याद करते हैं।

20. बलिहारी गुरू आपकी…… अर्थात्‌ बलिहारी उस सतगुरू की जिसने गोविन्द श्रीकृष्ण का साक्षात्कार कराया। बस *साक्षात्कार ही काफी* है! _(सही / गलत)_
° गलत (साक्षात्कार से सिर्फ मुख मीठा नहीं होता। मीरा साक्षात्कार कर सचमुच स्वर्ग में तो गई नहीं। *गोविन्द को सिर्फ देखना नहीं है, ऐसा बनना है।* तुम यहाँ आये ही हो ऐसा बनने। यह नशा रहना चाहिए हम उनके पास जाते हैं जो हमको ऐसा बनाते हैं। *गुरू द्वारा तुम गोविन्द बनते* हो।)

21. भल कितने भी *बड़े-बड़े मकान* हैं, सुख के सब साधन हैं तो भी कहेंगे पतित पुरानी दुनिया है। _(सही / गलत)_
° *सही* (विषय वैतरणी नदी में गोता खाते रहते हैं। यह भी नहीं समझते कि विकार पाप है। बुलाते भी हैं – हे भगवान, हे पतित-पावन आकर इस पतित दुनिया को पावन बनाओ। स्वर्ग में एक भी पतित होता नहीं।)

22. बाबा ने कहा चाल-चलन का सारा मदार आंखों पर है। तो *आंखें* कैसे-कैसे धोखा देती हैं? (3)
° यह आंखें क्रिमिनल हैं, कोई को देखने से *विकार* की दृष्टि जाती है (तो उनके 84 जन्म नहीं होंगे। वह नर से नारायण बन नहीं सकेंगे। जब इन आंखों पर जीत पा लेंगे तब कर्मातीत अवस्था होगी।)
° आंखे देखती हैं – यह *क्रोध* करते हैं तो खुद भी लड़ पड़ते हैं।
° चीज़े उठा लेना ( *लोभ* )।

23. *शिवबाबा का यज्ञ* है ना। तो कुछ भी उठा सकते। _(सही / गलत)_
° गलत (चार्ज वाली के बिगर पूछे चीज़ उठा नहीं सकते। *तो और भी ऐसे करने लग पड़ेंगे*। वह भी पाप बन जाता।)

24. (सम्पूर्ण योग लगाकर कल्प-कल्पानतर सर्व प्राप्ति सम्पंन बनने लिए बेहद का वैराग्य चहिए) इसलिए इस *पुरानी दुनिया* को बाबा ने आज कौन-कौन से नाम दिए? (7)
° रावण राज्य, पतित दुनिया, कंगाल दुनिया, दु:खी दुनिया, पाप की दुनिया, दु:खधाम, नर्क!

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