Sakar Murli Churnings 17-01-2019

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Sakar Murli Churnings 17-01-2019

1. हमारा कितना wonderful बाबा है, जिसे कोई भी तमन्ना नहीं है… सिर्फ हमारी पालना, पढ़ाई, पुचकार कर गुल-गुल बनाते हैं… सिर्फ यही आश है बच्चे लायक, गुणवान बनें!

2. हम नई दुनिया के लिए पढ़ रहे हैं, यह याद रहे तो भी मनमनाभव है… अपने कल्याण पर पूरा ध्यान देना है, दुनियावी बातों लड़ाई झगड़े में टाईम वेस्ट नहीं करना है… माया से बचकर बाबा की श्रीमत पर उसकी यादों में रहना है

3. ऊंच पद पाने लिए दिन-रात सेवा का ओना रहे, गला भल घुट जाए, सेवा के बिना सुख न लगे… स्थूल सेवा भी जरूर करनी है… अंत मे result निकलेगी, हमारा कल्प-कल्प का क्या पद होगा!

सार

तो चलिए आज सारा दिन… यही स्मृति रखे की हम नई दुनिया के लिए पढ़ते, और पढ़ाई याद और सेवा में पूरा जोर लगा दे… तो हमारा और सबका सदा के लिए कल्याण हो, विश्व स्वर्ग बन जाएंगा… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | मैं सर्वगुण सम्पन्न देवता हूँ | I’m full of all virtues

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योग कमेंटरी | मैं सर्वगुण सम्पन्न देवता हूँ | I’m full of all virtues

मैं सर्वगुण सम्पन्न देवता हूँ… सदा सन्तुष्ट… हर्षितमुख… प्रसन्नचित हूँ

मेरी आखें शीतल… बोल मधुर… व्यवहार बहुत मीठा है

मेरी चलन बड़ी रॉयल है… उदारचित हूँ… मैं दिव्यता से सम्पन्न… सतयुगी देव आत्मा हूँ

मैं सतोप्रधान… सम्पूर्ण पवित्र आत्मा हूँ… मर्यादा पुरुषोत्तम हूँ

मैं उमंग उत्साह से भरपूर हूँ… हर पल उत्सव है… हर दिन त्योहार… खुशियां ही खुशियां है… ओम् शान्ति!

गीत: जीवन गुणों से पुर्ण होगा…


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और योग कमेंटरी:

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Creating Peace in the World | विश्व में शान्ति स्थापन करने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 15-01-2019

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Creating Peace in the World | विश्व में शान्ति स्थापन करने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 15-01-2019

1. भ्रूकुटी में आत्मा भाई को देखना है, उससे ही बातें करनी है… तो गलत ख्यालत समाप्त हो, कर्मेंद्रीयां control में रहेंगे, और दिव्यगुण automatically धारण होते जाएंगे!… बाबा की याद रहेगी!

2. भगवान आकर पढ़ाते हैं, हमें तमोप्रधान से सतोप्रधान बनाने… तो अब हमारा एम ऑब्जेक्ट है सतोप्रधान देवता बनना और बनाना!

3. शिवबाबा ने विश्व में शान्ति स्थापन की थी, तब लक्ष्मी-नारायण का राज्य था… और पवित्रता ही सुख शान्ति की जननी है, इसलिए बाबा पवित्रता के बल से स्थापना करते हैं… तो पावन जरूर बनना है!… खुशी में रोमांच खड़े हो जाने चाहिए, हम ऎसे डबल सिरताज बनने वाले हैं!

सार

तो चलिए आज सारा दिन… आत्मा भाई-भाई की दृष्टि पक्की कर सदा आत्म-अभिमानी रह, बाबा से शक्ति लेते रहें… ऎसे पावन सतोप्रधान बनने से हम बहुत शीतल शान्त बन जाते… हर जगह शान्ति फैलाते रहते, औरों को भी ऎसे शान्त बनने की प्रेरणा मिलती, और विश्व में शान्ति का राज्य सतयुग स्थापन हो जाता… ओम् शान्ति!

Becoming Sweetest | स्वीटेस्ट बनने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 15-01-2019

Becoming Sweetest| स्वीटेस्ट बनने की सहज विधि| Sakar Murli Churnings 15-01-2019

1. अभी हमारा पार्ट है most sweetest (स्वीट के पहाड़) बाबा के संग sweet children बनकर… स्वीटेस्ट स्वर्ग के मालिक लक्ष्मी-नारायण बनना!

2. इसलिए शान्त अन्तर्मुखी रहकार पवित्र देही-अभीमानी बनना है… अपना सुखधाम का पुरुषोत्तम चेहरा और चोला बार-बार देखते रहना है!

3. बाबा को बहुत लव से याद करना है, खुशी में रोमांच खड़े हो जाने चाहिए, प्रेम में आंसू भी भले आए… अपना चार्ट रोझ देखना है, हम बाबा को कितना याद करते हैं… खामियां निकाल flawless diamond बनने का पुरूषार्थ करना है, तो बाबा भी current देकर सहयोग देंगे!

4. अपने को अशरीरी आत्मा समझ बाप को याद करना है, तो ever-healthy-wealthy बन जाएँगे… मुख से ज्ञान रत्न ही निकालने से बाप का नाम बाला होगा और सब फॉलो करेंगे

सार

तो चलिए आज मकर संक्रांति के पावन अवसर पर… गुड समान sweetest बनने के लिए, अपने को तिल रूप-समान आत्मा समझेे, और अपनेे जीवन की डोर बाबा के हाथों मे दे… तो हम भी पतंग समान हल्के बन परमधाम की ऊंची स्थिति की ऊंची उड़ान भरते रहेंगे… और खुशियों की दुनिया सतयुग बनाते चलेंगे… ओम् शान्ति!

Sakar Murli Churnings 14-01-2019

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Sakar Murli Churnings 14-01-2019

1. हम संगमयुग पर है, तो बाबा कलियुग और सतयुग के विभिन्न नामों को याद कर रहे थे… पूछना है कि हम कलियुगी पुरानी दुनिया नर्क (अर्थात विकारी भ्रष्टाचारी डेविल दुनिया) में है या सतयुगी नई दुनिया स्वर्ग (अर्थात निर्विकारी श्रेष्ठाचारी डीटी वर्ल्ड) में

2. अपने को आत्मिक स्थिति में स्थित कर बाबा की यादों में नारायणी नशे में रहना है… अगर इस फरमान का पालन नहीं कर सकते, तो जरूर देह भान में है, और पाप विकर्म हो रहे हैं… तो अपने पर कृपा कर आत्म अभीमानी रहने का पुरूषार्थ करना है

3. पाण्डवों के चित्रा को बड़ा बनाते क्योंकि उनकी बुद्धि बड़ी विशाल थी… तो ऎसी बुद्धि बनाने के लिए रोज़ पढ़ना है, अच्छे से पढ़ना है, और सबको पढ़ाना है (एक एक को समझा सको तो बहुत अच्छा)

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा के ज्ञान की बातों को बुद्धि में रख, देहभान से न्यारे और बाप के प्यारे रहे… जिससे सहज ही दिव्यगुणों की धारणा, और कमझोरीयों का परिवर्तन होता रहेगा, और हम सतयुगी देवता बन जाएँगे… जिससे दुनिया भी सतयुग बन जाएंगी… ओम् शान्ति!


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God’s love, the greatest fortune! | परमात्म प्यार है सबसे बड़ा भाग्य | Avyakt Murli Churnings 13-01-2019

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God’s love, the greatest fortune! | परमात्म प्यार है सबसे बड़ा भाग्य | Avyakt Murli Churnings 13-01-2019

प्रभु प्यार का भाग्य

  • हम स्नेही सहयोगी सहजयोगी आत्माएं बाप के प्रिय सो विश्व के प्रिय है… इसी भाग्य की खुशी व नशे में रहना है
  • परमात्म प्यार बिना जीवन नीरस है, सभी यह चाहते, और हमें रोझ मिलता है!… तो इसे अच्छे से अनुभव जरूर करना है
  • परमात्म प्यार में लवलीन रहने से सहज ही विघ्न-विनाशक, समाधान-स्वरूप, मायाजीत बन जाते हैं!

श्रेष्ठ भाग्य बनाने की सहज विधि

सर्व सम्बन्ध की याद से सहजयोगी बन जाते… और ऎसे बाबा को सदा साथ रखने से समस्याएं खेल बन जाती (अर्थात वह हमें प्रभावित नहीं करती)… तो श्रेष्ठ जमा भी होता और पुराना चुक्यू भी होता रहता, double प्राप्ति!

अनुभव की अथॉरिटी बनने से हर कदम में सफलता मिलती रहती है… और सेवा के निमित्त बनने से लिफ्ट प्राप्त होती, जिससे सहज ही सम्पन्न बन जाते!

हम कई झंझतों से मुक्त है, तो हिम्मतवान बनकर लौकिक में रहते आलोकोक सेवा करते रहना है… एक बाबा को संसार बनाकर उसकी याद में एकरस रहना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… परमात्म प्यार का सर्व संबंध से अनुभव कर मायाजीत बन श्रेष्ठ भाग्य बनाते चले… और विश्व का भी भाग्य बदल सतयुग बना दे… ओम् शान्ति!


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Becoming a true Benefactor | कल्याणकारी बनने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 12-01-2019

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Becoming a true Benefactor | कल्याणकारी बनने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 12-01-2019

1. त्रिमूर्ति शिवबाबा संगम पर ब्रह्मा मुख द्वारा जो ज्ञान (अर्थात सच्चा गीता ज्ञान) सुनातेउससे 21 जन्म सद्गति हो जाती है, अर्थात 100% पवित्रता सुख शान्ति का अटल अखण्ड सतयुगी दैवी स्वराज्य स्थापन हो जाता है.. ऎसा कौड़ी तुल्य कलियुगी मनुष्य से हीरे तुल्य सतयुगी देवता बनने का ईश्वरीय निमंत्रण सबको देना है

2. कल्याणकारी बाप के बच्चे हम भी कल्याणकारी है… इसलिए स्व का कल्याण कर (ज्ञान, विचार सागर मंथन और योग से)… अनेकों के कल्याण के निमित्त बनना है (बाबा के मददगार बनकर, हड्डी सेवा द्वारा)

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा के सत्य ज्ञान का विचार सागर मंथन कर अपना जीवन हीरे तुल्य बनाते जाए… और अनेको को हीरे तुल्य जीवन बनाने की प्रेरणा देते रहे… जिससे सहज ही सतयुग आ जाएगा… ओम् शान्ति!

अन्य पॉइन्ट्‍स

  • मातेष्वरी जी के मधुर माहवाक्य में… मम्मा ने घर गृहस्थ में रहने वाले पवित्र गोप-गोपियों की बहुत महिमा की… कैसे अतिन्द्रीय सुख के अनुभव में रह, अनेकों के कल्याण के निमित्त बने है!
  • आज के वरदान में… कमझोर संकल्प (पता नहीं, आदि) भी एक माया की ज़ाल है… इनसे मुक्त होने के लिए याद रखना है कि निश्चयबुद्धि विजयी, सफलता मेरा जन्म-सिद्ध अधिकार है!
  • आज का विशेष पुरूषार्थ… अनेक मेरे-मेरे को एक मेरा बाबा में समा दो, मेरा तो एक शिवबाबा दूसरा ना कोई… तो एकाग्रता बहुत सहज हो जाएंगी (जब चाहे, जहां चाहे और जितनी देर चाहे एकरस फरिश्ता स्वरूप की !)

योग कमेंटरी | देही अभिमानी स्थिति का अभ्यास | Soul Conscious in actions

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योग कमेंटरी | देही अभिमानी स्थिति का अभ्यास | Soul Conscious in actions

मैं आँखों द्वारा देखने वाली… कानों द्वारा सुनने वाली… मुख द्वारा बोलने वालीं… शरीर द्वारा कर्म करने वाली शक्ति आत्मा हूँ

मैं करावनहार हूँ, शरीर करनहार है… मैं मालिक हूँ… इस रथ (व गाड़ी) की

यह देह बाबा की अमानत है… मुझे इसे श्रीमत पर ही use करना है

आँखों से विशेषताएं देखनी है… मुख द्वारा मीठे ज्ञान रत्न ही बोलने है… कर्म द्वारा गुणवान बनाना, सबको सुख देना है

मैं मालिक हूँ, इस शरीर को चला रही हूँ…

इन्हीं संकल्पों को बार बार दोहराते… मुझे अपनी देही अभिमानी स्थिति मजबूत करनी है… ओम् शान्ति!


और योग कमेंटरी:

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Being Happy Always | सदा खुश रहने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 11-01-2019

Being Happy Always | सदा खुश रहने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 11-01-2019

1. अपार खुशी में रहने के लिए:

  • विचार सागर मंथन करते रहना है… कैसे हम छोटी सी आत्मा में 84 जन्मों का पार्ट नुन्धा हुआ है, अब हमारा अन्तिम जन्म है, सद्गति दाता बाप आया है (पुरानी दुनिया, पुराने तन में) हमें नर से नारायण बनाने के लिए!
  • योग में रहना है… योग करना ही सबसे बड़ा पुण्य है, जिससे पुण्य आत्मा बन जाएँगे
  • याद रखना है कि
    • यह कल्याणकारी पुरूषोत्तम संगमयुग चल रहा है
    • बाबा हमारा बाप भी है, टीचर है, सतगुरु भी है (सही ठिकाना देते हैं)

2. औरों को खुशी बांटना व सही रास्ता बताना सबसे बड़ी कृपा है… सबको माया से लीबरेट करने की इस सेवा में अपना सहयोग अवश्य देना है… वाचा नहीं तो स्थूल कर्मणा सेवा करनी है… सेन्टर खोल सको तो और ही अच्छा!

सार

तो चलिए आज सारा दिन… खुशियों के सागर को सदा साथ रखते सदा खुशमिज़ाज़ और प्रसन्न रहे… और सबके साथ खुशी बांटते रहे, खुशियों की दुनिया स्वर्ग बनाते रहें… ओम् शान्ति!

आज का विशेष पुरूषार्थ

संकल्प, स्वभाव-संस्कार में डबल लाइट रहकर… चलते फिरते फरिश्ता स्वरूप की अनुभूति करनी है… अशरीरी-पन का अभ्यास करना है