Answers from Sakar Murli 08-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 08-08-2020*

1. _______ आत्मा की निशानी है सन्तुष्टता, सन्तुष्ट रहो और सन्तुष्ट करो।
°सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न

2. बेहद का बाप तुमको विश्व का मालिक बनाते हैं, सो भी _______ विश्व का। बाप बैठ बच्चों को पारसपुरी का ______ बनाते हैं। यहाँ कौड़ियाँ, वहाँ ____ होंगे। भारत है सबसे _____ ते _____ ।
°गोल्डन एजेड, मालिक, हीरे, ऊंच, ऊंच

3. हमें खुशी है कल्प-कल्प भोलानाथ बाबा हम मीठे-मीठे बच्चो को बेहद सुख का वर्सा (स्वर्ग की बादशाही) देते अर्थात् मनुष्य से देवता बनाते हैं। यह समझकर पूरा पुरुषार्थ करने लिए ड्रामा के कुछ राज़ समझना बहुत जरूरी है। इस सन्दर्भ में बाबा ने:
° a) *मोक्ष* के बारे में क्या सुनाया?
° b) *प्रलय* के बारे में क्या सुनाया?
° c) यह सब समझना *क्यों जरूरी* है?
°°° उत्तर)
° a) इस बने-बनाये ड्रामा में हर एक आत्मा-एक्टर-पार्टधारी निर्वाणधाम से आती है इस नाटकशाला-कर्मक्षेत्र मे पार्ट बजाने, जो फिर *रिपीट* होता रहता है। यह *बना बनाया* ड्रामा है, एक भी एक्टर न एड हो सकता, न कम हो सकता है। सभी को अपना-अपना *पार्ट मिला हुआ* है। मोक्ष को पा नहीं सकते। (फिर तो पार्ट विनाशी हो जाए, रिपीट कैसे हो!)
° b) भल वे सोचते हैं महाभारत बाद प्रलय हो गई फिर समुद्र में पीपल के पत्ते पर एक बच्चा अंगूठा चूसता आया। (लेकिन इनसे फिर दुनिया कैसे पैदा होगी।) वास्तव में प्रलय कभी भी होती नहीं ( *भारत अविनाशी खण्ड है, कभी विनाश नहीं होता*)। हिसाब-किताब चुक्तू कर जाना हैं। फिर नयेसिर तुम आयेंगे।
° c) यह बाबा इसलिए समझाते क्योंकि हमे जीवन-जिम्मेवारियों से भागना नहीं है (मोक्ष-प्रलय की आश में), बल्कि ज्ञान-योग द्वारा मन को मजबूत कर श्रेष्ठ जीवन अनुभव कर सबकी जीवन श्रेष्ठ बनानी है। ( *जितना याद में रहेंगे उतना पवित्र बनेंगे और ऊंच पद पायेंगे*।)

4. *बचपन* के नाज़ नखरे किन्हें कहेंगे? *वानप्रस्थ* में कौन-सा कार्य करना होता? और कब? (वरदान)
° छोटी-छोटी बातों में संगम के अमूल्य समय को गंवाना बचपन के नाज़ नखरे हैं।
° अब यह नाज़ नखरे शोभते नहीं, वानप्रस्थ में सिर्फ एक ही कार्य रह जाता है – *बाप की याद और सेवा।* इसके सिवाए और कोई भी याद न आये।
° *उठो* तो भी याद और सेवा, *सोओ* तो भी याद और सेवा – *निरन्तर* यह बैलेन्स बना रहे। (त्रिकालदर्शी बनकर बचपन की बातें वा बचपन के संस्कारों का समाप्ति समारोह मनाओ, तब कहेंगे वानप्रस्थी।)

5. तुम सबके _____ बनते हो, अन्धों की लाठी बनते हो सबको रास्ता बताने के लिए। यथा बाप _____ तथा तुम बच्चों को भी बनना है। सबको रास्ता बताना है। तुम आत्मा, वह परमात्मा है, उनसे बेहद का वर्सा मिलता है। भारत में बेहद का राज्य था, अब नहीं है। तुम हो सच्चे-सच्चे ब्राह्मण, तो सबको _____ चिता पर बिठाते हो।
°गाइड, गाइड, ज्ञान

6. जिसकी भक्ति करते, तो उनकी बायोग्राफी को भी जानना चाहिए। तुम बच्चे अभी सबकी बायोग्राफी जानते हो बाप के द्वारा। *बाप की बायोग्राफी* का पता है। क्या है बाप की बायोग्राफी?
° बाप है पतित-पावन, लिबरेटर, गाइड। (और पढ़ाकर पावन-देवता बनाते, स्वर्ग की बादशाही का वर्सा देते।)

7. शिव भगवानुवाच, हम इन ______ के द्वारा स्वर्ग के द्वार खोल रहे हैं। ______ पर कलष रखा है। वह फिर सबको ज्ञान _____ पिलाती हैं। तुम _____ सारे विश्व का उद्धार करती हो। अभी फिर बाप तुम _____ को कितना ऊंच बनाते
बुलाते हैं
°माताओं, माताओं, अमृत, मातायें, माताओं

8. गाते है पतित-पावन आओ परन्तु अपने को पतित समझते थोड़ेही हैं। बाप बच्चों को सुजाग करते हैं, तुम घोर अन्धियारे से सोझरे में आये हो। बाप पतित से *पावन बनने की कौन-सी बहुत सहज युक्ति* बताते?,
° अपने को *आत्मा समझ बाप को याद* करो। (आत्मा में ही खाद पड़ने से मुलम्मे की बन गई है। जो पारसबुद्धि थे वही अब पत्थरबुद्धि बने हैं। तुम बच्चे अभी बाप के पास पत्थरनाथ से पारसनाथ बनने आये हो।)

9. *याद* करने लिए शरीर निर्वाह अर्थ धन्धा आदि सब छोड़ना पड़ेगा। _(सही / गलत)_
° *गलत* (शरीर निर्वाह अर्थ धन्धा आदि भी करना है। छोड़ना कुछ भी नहीं है। बाबा कहते हैं *सब कुछ करते हुए मुझे याद करते रहो*। भक्ति मार्ग में भी तुम मुझ माशूक को याद करते आये हो कि हमको आकर सांवरे से गोरा बनाओ। उनको मुसाफिर कहा जाता है।)

10. बाप आकर शूद्र से _____ बनाते हैं। यज्ञ में ______ जरूर चाहिए। यह है ____यज्ञ, भारत में यज्ञ बहुत रचते हैं। अब यह तो है ______ यज्ञ, जिसमें सारी पुरानी दुनिया स्वाहा होनी है।
°ब्राह्मण, ब्राह्मण, ज्ञान, रूद्र ज्ञान

11. कई कहते हमको तो मुक्ति ही पसन्द है। हम वहाँ ही बैठे रहें। क्या यह *हो सकता है?* यदि नहीं, तो इन आत्माओं का क्या *पार्ट* है?
° ऐसे थोड़ेही हो सकता है।
° ड्रामा में नूँधा हुआ है, जाकर *पिछाड़ी में आयेंगे जरूर*। बाकी सारा समय शान्तिधाम में रहते हैं। यह बेहद का ड्रामा है। अच्छा!

Answers from Sakar Murli 11-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 11-08-2020*

1. संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं का कौन-सा *वन्डरफुल स्थान* है? उनकी *निशानी* क्या है?
° *बापदादा का दिलतख्त*। (ऐसा तख्त सारे कल्प में नहीं मिल सकता – यह इतना विशाल तख्त है जो चलो, फिरो, खाओ-सोओ लेकिन सदा तख्तनशीन रह सकते हो।
° (निशानी) जो बच्चे सदा बापदादा के दिलतख्तनशीन रहते हैं वे इस *पुरानी देह वा देह की दुनिया से विस्मृत रहते* हैं, इसे देखते हुए भी नहीं देखते।

2. वण्डरफुल *रंग-बिरंगी* कौन-सी चीजें है? (3)
° यह *खेल* रंग-रंगीला है।
° *स्वर्ग-बैकुण्ठ* कितना रंग-बिरंगा है, खूबसूरत (हीरे-जवाहरातों के महल, खेलना, रास-विलास)। वण्डर ऑफ दी वर्ल्ड!
° यहाँ है *माया का राज्य* । यह भी कितना वण्डरफुल है। (मनुष्य क्या-क्या करते रहते हैं। दुनिया में यह कोई भी नहीं समझते कि हम नाटक में खेल कर रहे हैं।)

3. हम वण्डर ऑफ वर्ल्ड स्वर्ग लिए अपनी तकदीर अनुसार पुरुषार्थ कर रहे। याद में रहते, बहुत हर्षित रहते। तो और क्या करना है, कि माया हमे भील-मुर्दे समान खुशी उड़ा न दे? (3)
° *श्रीमत* पर चलना है (श्रीमत पर न चलने का तो जैसे कसम उठा लेते हैं।)
° *सर्विसएबुल* बनना है।(बच्चों को तो जैसे सर्विस ही सर्विस सूझती रहेगी। समझते हैं बाबा की सर्विस नहीं की, किसको रास्ता नहीं बताया तो गोया हम अन्धे रहे। यह समझने की बात है ना।)
° *मामेकम् याद* करो। देह के सब धर्म छोड़ अपने को आत्मा समझो।

5. *याद* में रहने से कौन-कौन सी प्राप्तियां है? (3)
° आत्मा *कंचन* बनेंगी ही याद की यात्रा से। (बाप कहते हैं मामेकम् याद करो – यह फरमान मानने से तुम *गोरे* बन जायेंगे। )
° बाप कहते हैं मुझे याद करो तो जन्म-जन्मान्तर के *पाप कट* जायेंगे, *पावन* बन *पावन दुनिया का मालिक* बन जायेंगे।
° याद की जब मेहनत करेंगे तब ही *वाणी जौहरदार* होगी। अभी वह ताकत कहाँ है। योग है नहीं।

6. इन ____ की बहुत वैल्यु है। यह ज्ञान रत्न _____ करने हैं। अभी तुम ज्ञान ____ से डायरेक्ट सुनते हो तो फिर और कुछ भी सुनने की दरकार ही नहीं।
°रत्नों, धारण, सागर

7. *भाषण* करने के लिए बाबा ने कौन सी सुन्दर तैयारी सिखाई? (3)
° बच्चों को *विचार सागर मंथन* करना है, तब ही प्वाइंट्स निकलेंगी।
° भाषण करना है तो *सवेरे उठकर लिखना* चाहिए।
° *फिर पढ़ना* चाहिए। भूली हुई प्वाइंट्स फिर *एड* करनी चाहिए। इससे धारणा अच्छी होगी (फिर भी लिखत मुआफिक सब नहीं बोल सकेंगे। कुछ न कुछ प्वाइंट्स भूल जायेंगे।)

8. बाबा ने कहा *कृष्ण जन्माष्टमी* पर भी होशियार हैं वह खुशी से समझायेंगे। कौन-कौन सी वन्डरफुल पॉइंट्स सुना सकते? (9)
° श्रीकृष्ण वण्डर ऑफ वर्ल्ड का प्रिन्स था। वह *सतयुग फिर कहाँ गया* ! सतयुग से लेकर सीढ़ी कैसे उतरे। सतयुग से कलियुग कैसे हुआ? उतरती कला कैसे हुई?
*° श्रीकृष्ण आ रहे हैं* । कृष्ण का राज्य फिर स्थापन हो रहा है।
° श्रीकृष्ण है प्रिन्स। *कृष्ण कौन है*, यह तो वण्डर ऑफ वर्ल्ड का मालिक था। भारत ही पैराडाइज था। उस पैराडाइज का मालिक श्रीकृष्ण था। (हम आपको सन्देश सुनाते हैं कि श्रीकृष्ण आ रहे हैं। राजयोग भगवान ने ही सिखाया है। अब भी सिखला रहे हैं। पवित्रता के लिए भी पुरुषार्थ करा रहे हैं, डबल सिरताज देवता बनाने के लिए।)
° *कृष्ण के चित्र* में भी लिखत बड़ी फर्स्टक्लास है। इस लड़ाई के बाद स्वर्ग के द्वार खुलने हैं। इस लड़ाई में जैसे स्वर्ग समाया हुआ है।
° बच्चों को भी बहुत खुशी में रहना चाहिए, जन्माष्टमी पर मनुष्य कपड़े आदि नये पहनते हैं। लेकिन तुम जानते हो कि अभी हम यह पुराना शरीर छोड़ *नया कंचन शरीर लेंगे।* कंचन काया कहते हैं ना अर्थात् सोने की काया। आत्मा भी पवित्र, शरीर भी पवित्र।
° कृष्ण के लिए कहते श्याम-सुन्दर। *श्याम-सुन्दर का अर्थ* समझाकर कहो कि तुम भी अब राखी बांध, काम चिता से उतर ज्ञान चिता पर बैठेंगे तो गोरा बन जायेंगे। अब बाबा आये हैं सुन्दर बनाने।
° *कृष्ण का जन्म कब* हुआ, यह भी किसको पता नहीं है।
° *बैज में भी कृष्ण* का चित्र है, इस पर भी तुम समझा सकते हो।
° *मुख छोटा बात बड़ी* – यह कृष्ण के लिए कहते हैं। अभी तुम कितनी बड़ी बातें सुनते हो, इतना बड़ा बनने के लिए।

9. बच्चों की _____ तो बड़ी फर्स्टक्लास होनी चाहिए। मुख से सदैव ____ निकलने चाहिए। बच्चे, अच्छे _____ धारण करो, कुल का नाम बाला करो। तुम जानते हो अभी हम ऊंच ते ऊंच ब्राह्मण कुल के हैं।
°चलन, रत्न, गुण

10. हद के नाम, मान, शान के पीछे दौड़ लगाना अर्थात _____ के पीछे पड़ना।
°परछाई

11. भारतवासी ही परिस्तानी थे, अब कब्रिस्तानी बने हैं फिर _____ पर बैठ ______ धारण कर परिस्तानी बनते हैं। इतना _____ चाहिए – हमको भगवान पढ़ाते हैं। भगवान के साथ रहते हैं। भगवान के बच्चे भी हैं तो फिर हम पढ़ते भी हैं। यह बाप का _____ तो सबको देना है।
°ज्ञान चिता, दैवी गुण, नशा, पैगाम

12. हम किसको *पवित्र बनने की राखी* बांध सकते? और कभी?
° *किसको भी* तुम राखी बांध सकते हो (यूयूरोपियन, वेश्याओं, आदि)। पवित्र बनना है।
° भल राखी बंधन का दिन न हो, *कभी भी* राखी बांध सकते हो। (तुम्हारा धन्धा ही यह है। बोलो, बाप के साथ प्रतिज्ञा करो। बाप कहते हैं मामेकम् याद करो तो पवित्र बन जायेंगे।)

13. कहना है – भगवानुवाच, जरूर कोई ____ से कहेंगे ना। शिवबाबा पढ़ाते हैं। ____ बिगर तो पढ़ा न सकें, इशारा देना ही बस है।
°तन, रथ

14. बहुत कहते हैं हमारे में मम्मा आती है, शिवबाबा आते हैं। बाबा ने कहा यह बिल्कुल गलत है। बाबा ने यह कैसे *सिद्ध* किया? (3)
° परन्तु *नई-नई प्वाइंट्स तो मुकरर तन द्वारा ही सुनायेंगे* कि दूसरे किसी द्वारा सुनायेंगे। यह हो नहीं सकता।
° ऐसे तो बच्चियाँ भी बहुत प्रकार की *अपनी प्वाइंट्स* सुनाते हैं। (जैसे मैगजीन में, ऐसे नहीं कि मम्मा-बाबा उनमें आते, वह लिखवाते हैं। नहीं)
° बाप तो यहाँ डायरेक्ट आते हैं, *तब तो यहाँ सुनने के लिए आते* हो। अगर मम्मा-बाबा कोई में आते हैं तो फिर वहाँ ही बैठ उनसे पढ़ें। नहीं, यहाँ आने की *सबको कशिश होती* है। (दूर रहने वालों को और ही जास्ती!)

Answers from Sakar Murli 06-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 06-08-2020*

1. _____ की शमा चारों ओर जलाओ तो बाप को सहज देख सकेंगे।
°पवित्रता

2. अभी तुम जानते हो – हम कितने साहूकार थे। अभी फिर बनते हैं। बाबा लिखते भी हैं तुम ______ -पति बनते हो। तुम बच्चे जानते हो बाबा हमारा ______ भरपूर कर देते हैं। आधाकल्प के लिए जितना चाहिए उतना ____ लो, परन्तु पुरूषार्थ पूरा करो। गफलत नहीं करो। कहा जाता है ना फालो _____ । तो यह जाकर बनेंगे। नर से _____ , नारी से लक्ष्मी।
°पदमापदम, खजाना, धन, फादर, नारायण

3. यह बहुत ही नया-रमणीक- रहस्ययुक्त ज्ञान है, जब कोई ऐसी बात सुनी जाती है तो चिन्तन चलता है। तुम बच्चों का भी *सवेरे-सवेरे उठ यही चिन्तन-सिमरण करना है*। किन बातों का? (4) इस चिन्तन के फलस्वरूप हमें *कैसा बनना* है?
° कितनी छोटी (वन्डरफुल!) *आत्मा के आधार पर यह कितना बड़ा शरीर चलता* है।
° *आत्मा में 84 जन्मों का पार्ट* नूँधा हुआ है। शरीर तो विनाश हो जाता है। बाकी आत्मा रहती है।
° *आत्म-अभिमानी बनना है* । (आत्मा की महिमा है तो शरीर की भी महिमा होती है।) आत्मा इन शरीर के कानों द्वारा *सुनती* । आत्मा ही *बोलती* है शरीर द्वारा। आत्मा ही शरीर द्वारा अच्छे वा बुरे *कर्म करती* है। (अब फिर हम घर जायेंगे। जहाँ सब आत्मायें आती हैं, वह हमारा घर है।)
° इस शरीर में जो आत्मा है, उनको *परमपिता परमात्मा पतित-पावन ज्ञान-सुख-शान्ति सागर बैठ पढ़ाते* हैं। (आत्मा का ज्ञान रत्नों से श्रृंगार करते)
° (कैसा बनना) जैसे बाप मीठा है, ऐसे *मीठा गुल-गुल* बन सबको *सुख देना* है। कोई भी अकर्तव्य कार्य नहीं करना है। *उत्तम से उत्तम कल्याण का ही कार्य करना* है। (इसके लिए बाप-समान शरीर में होते भी देही-अभिमानी- अशरीरी-नष्टोमोहा रहना है।) (जबकि बाप ब्रह्मा द्वारा ऊंच ब्राह्मणों को रच नई दुनिया की स्थापना कर रहे हैं। हमारा यह ईश्वरीय गोद में जन्म अति-दुर्लभ हीरे जैसा है।)

4. हम आत्माओं को बाप कहते हैं मीठे-मीठे बच्चों! तुम कितना _____ बन रहे हो। तुम्हारी बुद्धि में सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का सारा _____ है।
°समझदार, ज्ञान

5. तुम भी सागर से निकली हुई ज्ञान ____ हो। तुम भी ज्ञान सागर से निकली हो फिर सब ______ चली जायेंगी, जहाँ बाबा रहते हैं, वहाँ तुम आत्मायें भी रहती हो। ज्ञान सागर आकर तुमको _____ मीठा बनाते हैं। आत्मा जो ____ बन गई है उनको मीठा बनाते हैं। 5 विकारों रूपी छी-छी ______ तुमसे निकल जाती है, तो तुम तमोप्रधान से सतोप्रधान बन जाते हो।
°नदी, वहाँ (घर), पवित्र, खारी, नमकीन

6. क्या लक्ष्मी-नारायण को कहेंगे *सदैव* पवित्रता का सागर?
° नहीं। *एक बाप ही* सदैव पवित्रता का सागर है।

7. ______ आत्मा को _______ बाप द्वारा ________ मत मिलती है। अभी की श्रीमत ही _______ बन जाती है, जो आधाकल्प चलती है। कुछ भी नहीं समझते हो तो बाप से पूछो क्योंकि बाप है _______ सर्जन।
°अविनाशी, अविनाशी, अविनाशी, अविनाशी, अविनाशी

8. *मोहजीत राजा की कहानी* है (बच्चे ने शरीर छोड़ा यह खबर सुनाई, फिर भी उनके परिवार में कोई रोया नहीं), वह सचमुच सतयुग में था। _(सही / गलत)_
° *गलत* (कोई मोहजीत राजा वास्तव में होता नहीं। यह तो कथायें बहुत बनाई हैं ना। वहाँ अकाले मृत्यु होती नहीं। तो पूछने की भी बात नहीं रहती। इस समय तुमको मोहजीत बनाते हैं।)

9. हम ब्राह्मण *नई दुनिया में* है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (नई दुनिया स्थापन होती है।)

10. बाबा के *सम्मुख* आते हो, तो पहले क्या याद करना है? और क्यों?
° (क्या याद करना) हम *ईश्वर बाप के सम्मुख* जाते हैं। *शिवबाबा* तो *निराकार* है। उनके सम्मुख हम कैसे जायें। तो उस बाप को *याद* कर फिर बाप के सम्मुख आना है। तुम जानते हो वह इसमें बैठा हुआ है। यह शरीर तो पतित है।
° (क्यों) शिवबाबा की याद में न रह कोई काम करते हो तो (देह-भान के संस्कार पक्के होते अर्थात्‌) पाप लग जाता है।

11. बाप श्रीमत देते हैं तो फिर उस पर चलना है। _______ का उल्लंघन नहीं करना है। श्रीमत से ही तुम _____ बनते हो।
°कायदे कानून, श्री

12. बाबा ने कहा मंजिल बड़ी है, इसलिए अपना *रोज़ का खाता* रखो। उसमे क्या-क्या चेक करना है? (3)
° कमाई की या नुकसान किया?
° बाप को कितना याद किया?
° कितने को रास्ता बताया? (अन्धों की लाठी तुम हो ना। तुमको ज्ञान का तीसरा नेत्र मिलता है। अच्छा!)

13. भारत अब _____ जैसा कंगाल है ना। पुरूषार्थ कर अपनी जीवन ____ जैसी बनानी है। गफलत नहीं करनी है। _____ के पिछाड़ी हैरान नहीं होना है। अभी बाबा हमको क्या बनाते हैं। एम-ऑब्जेक्ट तो है ना। हम नर से नारायण बनते हैं।
°कौड़ी, हीरे, कौड़ियों

14. *चैलेन्ज और प्रैक्टिकल की समानता* द्वारा स्वयं को पापों से सेफ रखने वाले विश्व सेवाधारी भव। तो कौन-सी *छोटी बातें* भी पाप को बढ़ाती है? (5) अब *क्या करना* है? (2)
° (छोटी बातें) संकल्प में भी किसी भी विकार की कमजोरी, व्यर्थ बोल, व्यर्थ भावना, घृणा वा ईर्ष्या की भावना पाप के खाते को बढ़ाती है।
° (क्या करना) इसलिए *पुण्य आत्मा भव* के वरदान द्वारा स्वयं को *सेफ* रख *विश्व सेवाधारी* बनो। संगठित रूप में *एकमत, एकरस* स्थिति का अनुभव कराओ।

Answers from Sakar Murli 31-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 31-08-2020*

1. जब हर _____ श्रेष्ठ होगा तब स्वयं का और विश्व का कल्याण होगा। अभी तक जो कुछ हुआ – उसे ______ लगाओ। बीती को चिंतन में न लाना – यही _____ पुरूषार्थ है। अभी _____ करने का समय नहीं है क्योंकि संगमयुग की दो घड़ी अर्थात् अनेक वर्ष। फुलस्टॉप लगाना अर्थात् सर्व ______ से फुल बनना।
°संकल्प, फुलस्टॉप, तीव्र, वेस्ट, खजानों

2. इस दुनिया को तो हम जानते हैं। बाकी *पुण्य की दुनिया* कौन-सी है? (2)
° *मुक्ति और जीवनमुक्ति* पुण्य की दुनिया को कहा जाता है। वहाँ पाप होता नहीं। (पाप होता है दु:खधाम रावण राज्य में।)

3. *सतयुग में पवित्रता* के आधार पर कितने प्रकार (कैटेगरी) की आत्माएं होंगी?
° सतयुग में तो मलेच्छ होते नहीं। है ही पवित्र दुनिया। *एक ही कैटेगरी है* ।

4. हम इस समय *पूरा* रावण राज्य में हैं। _(सही / गलत)_
° *गलत* (रावण राज्य में है, परन्तु किनारा किया हुआ है। *हम अभी पुरुषोत्तम संगमयुग पर हैं*। बच्चे जब यहाँ आते तो बुद्धि में है – हम उस बाप के पास जाते हैं जो हमको मनुष्य से देवता बनाते हैं। सुखधाम का मालिक बनाते हैं।)

5. *सुखधाम का मालिक* बनाने वाले हैं ब्रह्मा बाबा। _(सही / गलत)_
° *नहीं* (कोई भी देहधारी नहीं। बनाने वाला है ही *शिवबाबा*, जिसको देह नहीं है। तुम समझते हो हम *बेहद के बाप* पास जाते हैं। वह हमको श्रेष्ठ मत देते हैं।)

6. बाबा के पास आते हैं, बाबा ज्ञान का _____ कराते हैं आत्मा को। समझते हो हम आत्मा ज्ञान से _____ होंगी। फिर शरीर भी ______ मिलेगा। आत्मा और शरीर दोनों पवित्र ______ में होते हैं।
°श्रृंगार, पवित्र, पवित्र, सतयुग

7. तुम अभी जानते हो हम आत्मा ______ हैं। पहले-पहले हम सुखधाम में आये फिर अब दु:खधाम में आये हैं। अब बाप फिर सुखधाम में ले जाने आये हैं। कहते हैं मुझे ______ करो और _______ बनो।
°एक्टर, याद, पवित्र

8. संगमयुग पर जो *अच्छे पुरुषार्थी* हैं, वह क्या समझते होंगे? (2)
° हमने *84 जन्म* लिए हैं फिर इन *लक्ष्मी-नारायण के साथ* ही हम *सतयुग में राज्य* करेंगे। (सिर्फ एक ने तो 84 जन्म नहीं लिया है ना।)

9. *पहली सब्जेक्ट* कौन-सी हे? _(आज की मुरली अनुसार)_
° मुख्य बात है *बाप को याद करो तो विकर्म विनाश हों*। यह है पहली सब्जेक्ट।

10. जबकि हम सारे राज़ को जानते (रचता बाप, सूक्ष्मवतन, भविष्य मर्तबा आदि)। तो बाप कहते ऐसे *दैवीगुण* भी धारण करने हैं। फिर *आँखों को शीतल* करने लिए कौन-सी जबरदस्त युक्ति सुनाई? (2)
° आत्मा इन *खिड़कियों से देखती* है (जैसे बाप)। हमारी भी *दृष्टि आत्मा पर* जाती है। आत्मा को समझाते।
° अपने को *अशरीरी* समझो। (यह कर्मातीत अवस्था पिछाड़ी में होगी सो भी जब बाबा को अपना *चार्ट* भेज देंगे।)

11. बाबा किन्हें *सच्चा ऑनेस्ट बच्चा* समझते?
° *जो चार्ट लिखते* हैं। (चार्ट के साथ फिर मैनर्स भी चाहिए। बच्चे चार्ट नहीं लिखते हैं तो जरूर कुछ खामियां हैं, जो बाबा से छिपाते हैं।)

12. चार्ट में क्या-क्या *नोट* कर सकते?
° हमने किसी को *दु:ख* तो नहीं दिया? कोई से लड़ा- *झगड़ा* तो नहीं? उल्टा-सुल्टा तो नहीं *बोला* ? कोई *अकर्तव्य* कार्य तो नहीं किया? *दृष्टि* ठीक रही?

13. बाबा कहते किसी को भी दु:ख न दो। फिर कोई दिखाते हैं बाबा हमारा चार्ट देखो। *हमने ज़रा भी किसको दु:ख नहीं दिया* है। तो बाबा ने उनकी किन श्रेष्ठ शब्दों में महिमा की? (2)
° बाबा कहेंगे यह बच्चा तो *बड़ा मीठा* है। *अच्छी खुशबू* निकाल रहे हैं।
° बाबा *बुलायेंगे* भी ऐसे अच्छे बच्चे को *हम देखें तो सही* । सपूत बच्चों को बाप *बहुत प्यार करते* हैं।

14. *टीचर* बनने में कितना समय लगता? (2)
° *एक दिन में भी* टीचर बन सकते। (बाप तुमको 84 का राज़ समझाते, टीच करते। फिर जाकर उस पर मनन करना है। हमने 84 जन्म कैसे लिये?)
° टीचर बनना तो *सेकण्ड का काम* है। (कई टीचर से भी जास्ती दैवीगुण धारण करते। याद की यात्रा में तीखे निकलते। तो टीचर से भी ऊंच पद पायेंगे।)

15. बाबा ने कहा रोज़ *शिव के मन्दिर में* जाकर टीच करो। वहां क्या समझा सकते?
° *शिवबाबा कैसे आकर* स्वर्ग की स्थापना करते हैं? *स्वर्ग का मालिक बनाते* हैं। (समझाना बहुत ही सहज है।)

16. तुम कितना *प्रदर्शनी* में भी समझाते। निकलते बिल्कुल थोड़े हैं। इसलिए सेवा करनी ही नहीं चाहिए। _(सही / गलत)_
° गलत (ड्रामा में था, किया! *कहाँ निकलते भी हैं* प्रदर्शनी से। कहाँ नहीं निकलते हैं। *आगे चल आयेंगे*, ऊंच पद पाने का पुरूषार्थ करेंगे।

17. (कुछ ठीक नहीं होता, तो) कहते *भगवान ने* ऐसे क्यों किया?
° यह अनादि ड्रामा बना हुआ है (कर्मों के हिसाब-किताब भी है)। *भगवान ने थोड़ेही कुछ किया।*

18. हर एक कहते भी हैं पार लगाओ। अब पार तो जायेंगे ______ में। परन्तु वहाँ पद ऊंच पाना है तो _____ बनना है। मेहनत करनी है।
°सतयुग, पवित्र

19. भगवान, देवी-देवता आदि के लिए *अनेक प्रश्न* करते। बाबा ने कौन-सा श्रेष्ठ समाधान सुनाया?
° पहली-पहली मुख्य बात भगवान कौन है, उनको तो समझो। *अपने को आत्मा* समझेंगे तो कहेंगे यह तो बात ठीक है। हमको पतित से *पावन* जरूर बनना है। *याद करना* है उस एक भगवान को। सब धर्मों में भगवान को याद करते हैं।

20. बलिहारी गुरू आपकी…… अर्थात्‌ बलिहारी उस सतगुरू की जिसने गोविन्द श्रीकृष्ण का साक्षात्कार कराया। बस *साक्षात्कार ही काफी* है! _(सही / गलत)_
° गलत (साक्षात्कार से सिर्फ मुख मीठा नहीं होता। मीरा साक्षात्कार कर सचमुच स्वर्ग में तो गई नहीं। *गोविन्द को सिर्फ देखना नहीं है, ऐसा बनना है।* तुम यहाँ आये ही हो ऐसा बनने। यह नशा रहना चाहिए हम उनके पास जाते हैं जो हमको ऐसा बनाते हैं। *गुरू द्वारा तुम गोविन्द बनते* हो।)

21. भल कितने भी *बड़े-बड़े मकान* हैं, सुख के सब साधन हैं तो भी कहेंगे पतित पुरानी दुनिया है। _(सही / गलत)_
° *सही* (विषय वैतरणी नदी में गोता खाते रहते हैं। यह भी नहीं समझते कि विकार पाप है। बुलाते भी हैं – हे भगवान, हे पतित-पावन आकर इस पतित दुनिया को पावन बनाओ। स्वर्ग में एक भी पतित होता नहीं।)

22. बाबा ने कहा चाल-चलन का सारा मदार आंखों पर है। तो *आंखें* कैसे-कैसे धोखा देती हैं? (3)
° यह आंखें क्रिमिनल हैं, कोई को देखने से *विकार* की दृष्टि जाती है (तो उनके 84 जन्म नहीं होंगे। वह नर से नारायण बन नहीं सकेंगे। जब इन आंखों पर जीत पा लेंगे तब कर्मातीत अवस्था होगी।)
° आंखे देखती हैं – यह *क्रोध* करते हैं तो खुद भी लड़ पड़ते हैं।
° चीज़े उठा लेना ( *लोभ* )।

23. *शिवबाबा का यज्ञ* है ना। तो कुछ भी उठा सकते। _(सही / गलत)_
° गलत (चार्ज वाली के बिगर पूछे चीज़ उठा नहीं सकते। *तो और भी ऐसे करने लग पड़ेंगे*। वह भी पाप बन जाता।)

24. (सम्पूर्ण योग लगाकर कल्प-कल्पानतर सर्व प्राप्ति सम्पंन बनने लिए बेहद का वैराग्य चहिए) इसलिए इस *पुरानी दुनिया* को बाबा ने आज कौन-कौन से नाम दिए? (7)
° रावण राज्य, पतित दुनिया, कंगाल दुनिया, दु:खी दुनिया, पाप की दुनिया, दु:खधाम, नर्क!

Answers from Sakar Murli 04-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 04-08-2020*

1. हर संकल्प में _____ की विशेषता को प्रैक्टिकल में लाओ तो प्रत्यक्षता हो जायेगी।
°दृढ़ता

2. भल कांटों के जंगल दुःखधाम मे कोई भी समस्या हो (तन की बीमारी, धन ऊपर-नीचे आदि), सुखदाता बाप के बच्चो को *स्वप्न में भी दु:ख की फीलिंग / लहर नहीं* आ सकती। यह कैसे होता?
° क्योंकि *योगबल से चुक्तू* कर सुख-स्वरूप रहते (जब दु:ख आये तो मंत्र ले लो जिससे दु:ख भाग जायेगा। जैसे सागर में लहरें आती हैं और चली जाती हैं लेकिन जिन्हें उन लहरों में लहराना आता है वह उसमें सुख का अनुभव करते हैं, लहर को जम्प देकर ऐसे क्रास करते हैं जैसे खेल कर रहे हैं। तो सागर के बच्चे सुख स्वरूप हो, दुख की लहर भी न आये।)

3. परमात्मा का कौन-सा *यथार्थ परिचय* हम जानते, जिससे ब्रह्मा का राज़ भी स्पष्ट हो जाता?
° ऊंच ते ऊंच है भगवान *शिवबाबा*
° जो प्रजापिता ब्रह्मा में *प्रवेश* कर उन्हें क्रियेट कर हमारे ऊंच ब्राह्मण कुल को रचते। (प्रजापिता जरूर यहां स्थूल वतन में होंगे, और यह वही कृष्ण-नारायण-विष्णु की आत्मा का 84 वा जन्म है)
° फिर शिवबाबा नॉलेजफुल बन आदि-मध्य-अन्त की *नॉलेज देते*, वा ज्ञान-यज्ञ (ईश्वरीय विद्यालय) रचते
° हम आत्मायें *मामेकम् याद* में मस्त रह (ड्रामा को *साक्षी* देख) पावन-डबल सिरताज-देवता बनते।

4. यह _____ सब आत्माओं के रथ हैं। अकालमूर्त आत्मा का बोलता चलता _____ है। जो _____ में पहले-पहले होते हैं, वहाँ भी वह पहले आयेंगे। बाप कहते हैं ____ में रहने से तुम सेफ्टी में रहेंगे।
°(शरीर), तख्त, पढ़ाई, याद

5. वैकुण्ठ को विष्णुपुरी कहा जाता है अर्थात् _____ का राज्य था। अभी तुम पुरूषार्थ करते हो – हम नई दुनिया में जायें। वहाँ जाकर नये-नये _____ बनाने पड़ेंगे।
°लक्ष्मी-नारायण, महल

6. ज्ञान से या तो है सेकण्ड में _____ या तो फिर कहते सागर को ____ बनाओ तो भी पूरा नहीं हो। या तो सिर्फ कहते हैं ____ को याद करो।
°जीवनमुक्ति, स्याही, अल्फ

7. ब्राह्मण बनने से तुम _____ के बन गये। आत्मायें कहती हैं – शिवबाबा, हमारी तो आपसे _____ हो गई। अब आपसे हम मिलें कैसे? शिवबाबा तो पतियों का _____ है। बच्चों पर अब है _____ की दशा।
°धनी, सगाई, पति, ब्रहस्पति

8. राधे वा कृष्ण के माँ-बाप का *पद* उनसे ज्यादा ऊँच है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (वह सेकण्ड क्लास का पद है जो सिर्फ निमित्त बनते हैं कृष्ण को जन्म देने। ऐसे नहीं कि कृष्ण की आत्मा से वह ऊंच पढ़ा हुआ है। राधे-कृष्ण है नम्बर-वन!)

9. हमारा *ज्ञान* कभी कम-जास्ती होता रहता। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ज्ञान कभी कम-जास्ती नहीं होता। याद की यात्रा ही कभी कम, कभी जास्ती होती है। ज्ञान तो जो मिला है सो है ही। याद की यात्रा में कभी उमंग रहता है, कभी ढीला।)

10. अगर कोई ____ में गिरा तो बुद्धि में धारणा हो नहीं सकती। बाबा कहते हैं तुम ऐसी कड़ी भूल करेंगे तो ______ हो जायेंगे। तुमको हम गोरा बनाने के लिए आये हैं, फिर तुम ______ कैसे करते हो। भल स्वर्ग में आयेंगे, पाई पैसे का पद पायेंगे। राजधानी स्थापन हो रही है ना। कोई तो हार खाकर जन्म-जन्मान्तर पद भ्रष्ट हो जाते हैं। पिछाड़ी में तुमको सब _______ होंगे। ______ का ही मान है।
°विकार, चकनाचूर, काला मुँह, साक्षात्कार, पवित्रता

Answers from Sakar Murli 03-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 03-08-2020*

1. *एकान्तवासी* बनना अर्थात् क्या?
° *एक के अन्त में* खो जाना!

2. *विजयी रत्नों* को कौन-सा नशा रहता? (3) इससे *प्राप्ति* क्या है? (3)
° (कौन-सा नशा) सदा यही नशा रहे कि हम *बाबा के गले का हार* विजयी रत्न हैं,
° हम *विश्व के मालिक के बालक* हैं।
° *हमें जो मिला* है वह किसी को भी मिल नहीं सकता
° (प्राप्ति) यह नशा और खुशी स्थाई रहे तो किसी भी प्रकार की *आकर्षण से परे* रहेंगे।
° जो सदा विजयी हैं वो *सदा हर्षित* हैं।
° एक बाप की *याद के ही आकर्षण में आकर्षित* हैं।

3. तुमको बाप द्वारा पता पड़ा है कि हमारा _____ धर्म है। बाप आकर फिर तुमको उस धर्म में _____ करते हैं। तुम जानते हो हमारा धर्म कितना _____ देने वाला है।
°आदि सनातन देवी-देवता, ट्रांसफर, सुख

4. बाबा ने आते ही कहा बच्चों को *नशा* चढ़ता है। कौन-सा नशा?
° हमको माया से लड़कर (विजयी बन) इस विश्व पर गुप्त रीति *राज्य स्थापन करना* है अथवा *बाप से वर्सा लेना है*।

5. इसको वास्तव में *लड़ाई भी नहीं* कहेंगे। क्यों? (3)
° ड्रामा अनुसार तुम जो सतोप्रधान से तमोप्रधान बने हो सो *फिर सतोप्रधान बनना है*।
° तुमको कोई से लड़ाई आदि नहीं करनी है। तुमको तो अपने *स्वधर्म में टिकना* है। अन्दर में यह स्मृति रहनी चाहिए – मैं *आत्मा शान्त स्वरूप* हूँ। (ड्रामा का चक्र पूरा हुआ, अभी फिर पवित्र बन हमको वापिस घर जाना है।)
° और *बाप को याद करना है*। (तुमको नशा चढ़ेगा हम ईश्वर की सन्तान हैं। बाप को याद करने से ही विकर्म विनाश होते हैं। कितना सहज है – याद से हम पवित्र बन फिर शान्तिधाम में चले जायेंगे। यही सच्ची कमाई है।

6. सर्व का सद्गति दाता, ज्ञान का सागर उस परमपिता परमात्मा को कहा जाता है। और कोई को ____ -वान कह नहीं सकते। फिर सब हैं _____-वान। यहाँ तो घर में रहते, सब कुछ करते ____ को याद करना है। इस टीचर से तो बहुत-बहुत ऊंच ____ मिलता है। टीचर की याद रहे तो भी ____ और ____ याद जरूर आयेंगे।
°ज्ञान, भक्ति, टीचर, पद, बाप, गुरू

7. बाप सर्विस के लिए कितना उछलते हैं (अखबार, देहली, बनारस, कॉन्फ्रेंस, बड़ा मेला, गीता का भगवान, आदि)। हमको भी बहुत मदद देते। फिर भी बच्चों को *रूहानी सर्विस का हौंसला / उछल* क्यों नहीं? (6)
° बुद्धि कहाँ न कहाँ फँसी हुई है।
° क्रिमिनल आई बड़ा नुकसान करती है। यह बीमारी बड़ी कड़ी है इसलिए उछलते नहीं हैं।
° धन के भूखे हैं (लोभ)
° झरमुई झगमुई में बहुतों की बुद्धि अटकी रहती है।
° मोह
° देह-अभिमान

8. सर्विस को *स्वतः तेज़* करने लिए कौन-सी युक्तियां है? (2)
° आपस में *क्षीरखण्ड* होना चाहिए। अपना पाण्डवों का *किला* तो बनायें। आपस में मिलकर राय करो। (विहंग मार्ग की सेवा लिए)
° ज्ञान में याद की यात्रा का जौहर चाहिए। बाप कहते हैं तुम *याद में मस्त* रहो तो सर्विस बढ़ती जायेगी। (ज्ञान सुनाना तो प्रत्यक्ष है। याद ही गुप्त मेहनत है, जिससे शक्ति मिलती है। ज्ञान से शक्ति नहीं मिलती। तुम पतित से पावन याद के बल से बनते।)

9. तुम तो सिर्फ सोये हुए को _____ हो। बच्चों को बाप का _____ करना है। बाप तो आये हैं पतितों को ____ बनाने।
°जगाते, शो, पावन

10. देह-अभिमान ने ही सत्यानाश की है। अब बाप *सत्या ऊंच* करने की कितनी सहज बात बताते हैं। कौन-सी?
° *बाप को याद* करो तो शक्ति आये। (नशे से, हम किस बाप के बच्चे हैं।)

11. बच्चों को कब बहुत *खुशी* रहती, और कब खुशी गायब हो जाती?
° *याद जब एकरस* रहती है, *अवस्था अच्छी* है तो बहुत खुशी रहती है।
° और *जब याद ठीक नहीं*, किसी बात में घुटका खाते हैं तो खुशी गायब हो जाती है।

12. सबसे *ऊंच ते ऊंच सेवा* कौन-सी है?
° *बाप की याद* ही है ऊंच ते ऊंच सेवा। मन्सा-वाचा-कर्मणा बुद्धि में बाप की याद रहे।
° मुख से भी *ज्ञान* की बातें सुनाओ। किसको दु:ख नहीं देना है। कोई अकर्तव्य नहीं करना है।
° टाइम वेस्ट नहीं करो। अच्छी रीति *धारणा* करो।

13. हम पतित से पावन *ज्ञान के बल* से बनते हैं। _(सही / गलत)_
° *गलत* (याद के बल से!)

14. इस _____ दुनिया में माया का शो बहुत है। कितना फैशन हो गया है। छी-छी दुनिया से _____ आनी चाहिए।
°छी-छी, ऩफरत

Answers from Sakar Murli 01-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 01-08-2020*

1. रीयल _____ बनकर अपने वायब्रेशन की _चमक_ विश्व में फैलाओ। (स्लोगन)
°डायमण्ड

2. हम अभी सतयुगी नये जन्म में जाते हैं। *सतयुग* की कौन-सी एक नई बात आज बाबा ने सुनाई?
° स्वर्ग में कोई गन्दी चीज़ होती नहीं, जिसमें हाथ-पांव अथवा कपड़े आदि *मैले* हों। देवताओं की कैसी सुन्दर पहरवाइस है। कितने फर्स्ट क्लास कपड़े होंगे। *धोने की भी दरकार नहीं* । (इनको देखकर कितनी खुशी होनी चाहिए। आत्मा जानती है भविष्य 21 जन्म हम यह बनेंगे। ऐसे बाबा के हम बच्चे फिर रोते क्यों हैं! हमको कोई फिक्र थोड़ेही होना चाहिए।)

3. हमें खुशी हैं स्वयं पतित-पावन सर्व का सद्गति दाता, बेहद का बाप / सुप्रीम टीचर हमें नर्कवासी से स्वर्गवासी बनाते। इसका *बहुत सहज रास्ता* कौन-सा बताया? (3) नम्बरवन दैवीगुण *पवित्रता धारण करने की वन्डरफुल युक्ति* कौन-सी सुनाई? जब *सम्पूर्ण पवित्र* बन जाएंगे, तो क्या होगा?
° (बहुत सहज रास्ता) सिर्फ *याद* करना है और अपने में *दैवीगुण* धारण करने हैं। अपनी *जांच* रखनी है।
° (पवित्रता धारण करने की वन्डरफुल युक्ति) बाप ने तुम बच्चों को स्मृति दिलाई है कि तुम *आदि सनातन देवी-देवता धर्म वाले थे* (हम ही पूज्य थे), चक्र खाकर आये अब फिर तुमको *वही बनना है*। यह मीठी स्मृति आने से पवित्र बनने की हिम्मत आती है। (अब हियर नो ईविल…….)
° (सम्पूर्ण पवित्र) आत्मा पवित्र बन जाती है तो फिर अपवित्र शरीर को छोड़ना पड़ता है। सब आत्माओं को पवित्र होकर जाना है। पवित्र दुनिया अब स्थापन हो रही है।

4. बाप की याद के साथ-साथ *घर को भी याद* जरूर करना चाहिए। क्यों? कैसे?
° क्योंकि अब *वापिस* घर जाना है।
° (कैसे घर को याद करना) *घर में ही बाप* को याद करना है।
° भल तुम जानते हो बाबा इस तन में आकर हमको सुना रहे हैं परन्तु *बुद्धि* परमधाम स्वीट होम से टूटनी नहीं चाहिए। टीचर घर छोड़कर आते हैं, तुमको पढ़ाने। पढ़ाकर फिर बहुत दूर चले जाते हैं।

5. बाप ने हमे बोलते-चलते *स्वदर्शन चक्रधारी बनने की स्मृति* क्यों दिलाई है? स्वदर्शन चक्र फिरते रहने से क्या *प्राप्तियां* है? (3)
° अब स्मृति आई है, *सिमरण करने* के लिए।
° (प्राप्तियां) स्वदर्शन चक्र फिरते रहने से *विकर्म विनाश* हो जायेंगे। तुम इस *रावण पर जीत* पा लेंगे। *आसुरीपना खत्म* होता है।

6. यह है बिल्कुल नई ____ । तुमने ही यह सुनी थी और पद पाया था और कोई नहीं जानते। तुमको ____ परमपिता परमात्मा सिखला रहे हैं। अभी तुम ब्रह्मा की सन्तान ब्राह्मण वंशी हो। तुम ईश्वरीय _____ बने हो। ईश्वर बैठ तुमको शिक्षा देते हैं। अभी तुम देवी-देवता बन रहे हो। यह सारा दिन _____ करते रहो तो भी तुम्हारा बहुत कल्याण है। उनको बागवान कहा जाता है। देवी-देवता धर्म का _____ शिवबाबा ने ही लगाया है।
°पढ़ाई, राजयोग, औलाद, सिमरण, बीज

7. हमारी *मुख्य रूहानी सर्विस* क्या है? (5)
° बाप से शिक्षा लेकर पतित से पावन बनना और दूसरों को भी *पावन बनने का रास्ता बताना*।
° पहले-पहले कोई को भी *आत्मा का ज्ञान देना* है। (तुम आत्मा हो। आत्मा अविनाशी है। जब समय होता है आत्मा शरीर में आकर प्रवेश करती है।)
° उनकी मत से सब *मनुष्यों को श्रेष्ठ* बनाना।
° आत्मा में अन्दर *ज्ञान* है जो तुम बच्चों को और भाई-बहिनों को *समझाना* है। (बड़े-बड़े करोड़पति को भी समझा सकते!)
° बच्चे भी *मददगार* तो बनेंगे ना।

8. भक्ति मार्ग के कौन-से 4 *दृष्टान्त* और 2 *गायन* आज बाबा ने याद किये? देवताओं और असुरों की *लड़ाई* क्यों हो न सके?
° (दृष्टान्त) नारद का मिसाल, कछुए का, सर्प का, भ्रमरी का दृष्टान्त।
° (गायन) देवताओं का जन्म दिन अथवा भगवान का जन्म दिन
° (लड़ाई क्यों हो न सके) क्योंकि असुर हैं कलियुग में, देवतायें हैं सतयुग में। बीच में है संगमयुग।

9. जैसे अब वापिस जाना है।विनाश सामने खड़ा है। सतयुग में दैवी परिवार बहुत ____ होता है। वर्ल्ड वार लग जायेगी। उससे पहले तुम बच्चों को अपनी पढ़ाई से ______ अवस्था प्राप्त करनी है।
°छोटा, कर्मातीत,

10. “ *धरत परिये धर्म न छोड़िये* ” का क्या अर्थ बाबा ने सुनाया? इसके लिये क्या *श्रेष्ठ* करना है? (6) कौन-सी *डेट फिक्स* करनी है?
° (अर्थ) कोई भी सरकमस्टांश आ जाए, माया के महावीर रूप सामने आ जाएं लेकिन *धारणायें* न छूटे। संकल्प द्वारा त्याग की हुई बेकार वस्तुयें *संकल्प में भी* स्वीकार न हों।
° (क्या श्रेष्ठ करना) सदा अपने श्रेष्ठ *स्वमान* , श्रेष्ठ *स्मृति* और श्रेष्ठ *जीवन* के समर्थी स्वरूप द्वारा श्रेष्ठ *पार्टधारी* बन *श्रेष्ठता का खेल* करते रहो। (कमजोरियों के सब खेल समाप्त हो जाएं।)
° (डेट फिक्स) जब ऐसी *सम्पूर्ण आहुति* का संकल्प दृढ़ होगा तब *परिवर्तन समारोह* होगा। इस समारोह की डेट अब संगठित रूप में निश्चित करो।)

11. तुम बच्चे उस शिवबाबा को सिमरण करते हो। ब्रह्मा को नहीं। तो भक्ति मार्ग में ब्रह्मा की *मन्दिर में पूजा* क्यों होती? और *दाढ़ी* क्यों दिखाते?
° (पूजा क्यों) क्योंकि वह *सम्पूर्ण अव्यक्त मूर्त* बनते।
° (दाढ़ी क्यों) ब्रह्मा को दाढ़ी दिखाते हैं तो मालूम पड़े यह *यहाँ का* है।

12. जब सब आ जाते हैं फिर तो वापिस जायेंगे। *घर भेजने वाले* हैं धर्म स्थापक। _(सही / गलत)_
° *गलत* … (वह तो भिन्न नाम-रूप में तमोप्रधान अवस्था में है। सतो, रजो, तमो में आते हैं ना। इस समय सब तमोप्रधान जड़जड़ीभूत अवस्था में हैं। अब सबको वापिस जाना है जरूर। *बाबा ही वापिस घर ले जाते*।
फिर से चक्र फिरना चाहिए। पहले नया धर्म चाहिए जो सतयुग में था। बाप ही आकर आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना करते हैं।)

Answers from Sakar Murli 05-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 05-08-2020*

1. संकल्पों की _____ श्रेष्ठ परिवर्तन में फास्ट गति ले आती है।
°एकाग्रता

2. बापदादा की श्रीमत है बच्चे व्यर्थ बातें न सुनो, न सुनाओ और न सोचो। *सदा शुभ भावना से सोचो, शुभ बोल बोलो*। तो यदि कोई व्यर्थ सुनाये, फिर क्या करना है?
° व्यर्थ को भी शुभ भाव से सुनो। *शुभ चिंतक* बन बोल के भाव को *परिवर्तन* कर दो। *सदा भाव और भावना श्रेष्ठ* रखो, *स्वयं को परिवर्तन* करो न कि अन्य के परिवर्तन का सोचो। स्वयं का परिवर्तन ही अन्य का परिवर्तन है (इसमें पहले मैं – इस मरजीवा बनने में ही मजा है। इसी को ही महाबली कहा जाता है। इसमें खुशी से मरो – यह मरना ही जीना है, यही सच्चा जीयदान है।)

3. हीरे जैसे परमपिता परमात्मा *भोलानाथ देने वाला* है। वो क्या, कब ओर कैसे देते हैं? (आज की मुरली का मुख्य टॉपिक।) तो अब *हमे क्या करना* है?
° (क्या देते) भोलेनाथ ने ही नई दुनिया-स्वर्ग-सुखधाम की *बादशाही-राज्य भाग्य श्री लक्ष्मी-नारायण (उत्तम पुरूष) को दी* (वा कृष्ण को दी)
° (कब देते) इसके पहले जरूर पुरानी दुनिया-कलियुग-नर्क था… तो जरूर *बीच के कल्याणकारी पुरूषोत्तम संगमयुग (लीप युग) में* पतित-पावन बाप ने राजयोग सिखाया होगा। (जिस पुरूषार्थ की प्रालब्ध फिर नये जन्म में मिलती, वा सर्व की गति-सद्गति हो जाती।)
° (कैसे देते) इसके लिए जरूर अलौकिक जन्म (शिवजयन्ती) पहले हुआ होगा। अर्थात्‌ बहुत जन्मों के अन्त के साधारण तन में प्रवेश / एडाप्ट कर ब्राह्मण रचते। (कृष्ण की आत्मा के ही 84 वे जन्म में प्रवेश करते, वह फिर कृष्ण बनती।)
° (हमे क्या करना है) पवित्र बनने की *प्रतिज्ञा* कर (सबसे भारी प्रतिज्ञा!) *मामेकम् याद* -योगबल द्वारा *पावन* बन पावन दुनिया के *मालिक* बन जायेंगे। (डबल-अहिंसक!)

4. इसमें *जन्माष्टमी* की समझानी कैसे आ जाती?
° राधे-कृष्ण, प्रिन्स-प्रिन्सेज ही लक्ष्मी-नारायण महाराजा-महारानी बनते हैं। उन्हों ने ही 84 जन्म लिए फिर अन्त के जन्म में ब्रह्मा-सरस्वती बने। बहुत जन्मों के अन्त में बाप ने प्रवेश किया। और इनको ही कहते हैं तुम अपने जन्मों को नहीं जानते हो। तुम पहले जन्म में लक्ष्मी-नारायण थे। (चित्र में दिखाया है – पुरानी दुनिया को लात मार रहे हैं। नई दुनिया हाथ में है। अभी पढ़ रहे हैं इसलिए कहा जाता है – श्रीकृष्ण आ रहे हैं)

5. बाकी थोड़ा टाइम है _____ का। यह पाठशाला है, इसमें सबसे जास्ती टाइम लगता है _____ मे। बच्चे मेहनत करते रहते हैं बाप को ____ करने की।
तुम्हारा भी यह ____ जैसा जन्म है फिर गोल्डन एज में आते हो।
°पढ़ाई, याद, याद, हीरे

6. *हम बच्चों के लिए* अभी कलियुग चल रहा है _(सही / गलत)_
° *गलत* (तुम बच्चों के लिए यह है संगमयुग। तुम्हारे लिए कलियुग पूरा हो गया।)

7. *ड्रामा* के बारे में बाबा ने आज क्या सुनाया? (3)
° *बाप जो सुनाते हैं*, तुम जानते हो ड्रामा में सारी नूंध है। अक्षर बाई अक्षर जो कल्प पहले सुनाया था वह फिर आज सुनाते हैं। यह रिकॉर्ड भरा हुआ है। (भगवान खुद कहते हैं मैंने जो 5 हज़ार वर्ष पहले हूबहू अक्षर बाई अक्षर सुनाया है वही सुनाता हूँ। यह शूट किया हुआ ड्रामा है। इसमें फ़र्क ज़रा भी नहीं पड़ सकता। इतनी छोटी आत्मा में रिकार्ड भरा हुआ है।)
° बाप कहते हैं मैं कल्प-कल्प आता हूँ, *मेरा भी ड्रामा में पार्ट है* । पार्ट बिगर मैं भी कुछ नहीं कर सकता हूँ। मैं भी ड्रामा के बन्धन में हूँ। पूरे टाइम पर आता हूँ।
° *ड्रामा के प्लैन अनुसार* मैं तुम बच्चों को वापिस ले जाता हूँ। अब कहता हूँ मनमनाभव।

8. इस *ईश्वरीय विश्व विद्यालय* की कौन-सी जबरदस्त महिमा है?
° यह है ईश्वरीय विश्व विद्यालय, *सारे विश्व को सद्गति देने वाला* दूसरा कोई ईश्वरीय विश्व विद्यालय हो न सके। *ईश्वर बाप खुद आकर* सारे विश्व को चेंज कर देते हैं। (हेल से हेविन बनाते हैं। जिस पर फिर तुम राज्य करते हो)

9. शिव को *बबुलनाथ* क्यों कहते?
° क्योंकि वह आकर तुमको *काम कटारी (कांटे) से छुड़ाए पावन बनाते* हैं।

10. भक्ति मार्ग में तो बहुत शो है, यहाँ तो _____ में याद करना है। बाप कहते हैं यज्ञ, तप, दान, पुण्य आदि करते तुम नीचे गिरते आये हो। ____ से ही सद्गति होती है। समझते हैं ब्रह्म में लीन हो जायेंगे। गोया आत्मा को _______ बना देते हैं।
°शान्त, ज्ञान, मार्टल (विनाशी)

11. बाबा ने आज *विराट रूप के चित्र* को थोड़ी भिन्न अंदाज़ में याद किया। कैसे?
° जन्मों की संख्या (वा जनसंख्या) के हिसाब से! (कैसे हर युग में बढ़ते जाते)
° यह है संगमयुग। यह बहुत छोटा-सा युग है। चोटी सबसे छोटी होती है ना। फिर उनसे बड़ा मुख, उनसे बड़ी बांहें, उनसे बड़ा पेट, उनसे बड़ी टाँगे। (विराट रूप दिखाते हैं, परन्तु उसकी समझानी कोई नहीं देते। तुम बच्चों को यह 84 जन्मों के चक्र का राज़ समझाना है।)

Answers from Sakar Murli 24-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 24-08-2020*

1. नाज़ुक परिस्थितियों से घबराओ नहीं, उनसे _____ पढ़कर स्वयं को _____ बनाओ।
°पाठ,परिपक्व

2. तुम सारी _____ के कल्याणकारी हो। श्रीमत पर हम _____ का कल्याण कर रहे हैं – बुद्धि में यह ____ रहना चाहिए। अच्छा!
°सृष्टि,विश्व,नशा

3. जो *सर्व खजानों से सम्पन्न सन्तुष्ट मास्टर सागर* है, उनकी निशानी क्या है? (3)
° वह *सदा खुशी में नाचते* रहेंगे। (अन्दर खुशी के सिवाए और कुछ आ नहीं सकता।)
° स्वयं सम्पन्न होने के कारण किसी से भी *तंग नहीं* होंगे। किसी भी प्रकार की उलझन या *विघ्न एक खेल* अनुभव होगा, *समस्या मनोरंजन* का साधन बन जायेगी।
° निश्चयबुद्धि होने के कारण *सदा हर्षित और विजयी* होंगे।

4. *विकर्माजीत बनने वाले बच्चों* को विकर्मों से बचने लिए किस बात पर बहुत ध्यान देना है? (2)
° जो सर्व विकर्मों की जड़ देह-अभिमान है, उस देह-अभिमान में कभी न आयें, यह ध्यान रखना है। इसके लिए *बार-बार देही-अभिमानी* बन बाप को याद करना है।
° इस जन्म के पापों के बोझ को हल्का करने के लिए बाप को *सच-सच सुनाना* है।

5. सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी का कौन-सा *राज़* हम बच्चों ने समझा है?
° वह *हम ही थे!*

6. सब कहते हैं बाबा आकर हमारे *दु:ख हरकर सुख दो* । बाप को ही दु:ख हर्ता सुख कर्ता कहते। क्यों?
° (क्योंकी बाबा की बनाई हुई) *नई दुनिया में* इन देवताओं का राज्य था। वहाँ *किसी भी प्रकार का दु:ख नहीं* था।

7. *स्वदर्शन चक्र* है गला काटने के लिए। _(सही / गलत)_
° *गलत* (स्वदर्शन चक्र से कोई का गला नहीं काटते हैं। अपने अन्दर आसुरी स्वभाव को परिवर्तन करते है।)

8. सदा इसी खुशी में रहो कि हमने 84 का चक्र पूरा किया, अब जाते हैं अपने घर, बाकी थोड़े दिन यह ______ है। तुम बच्चों को इस सृष्टि चक्र और सारे ड्रामा को जानना है क्योंकि सब _____ है। इसमें डिटेल में नहीं समझ सकेंगे। (क्योंकि) यह तो ____ जन्मों को जानना होता है।
°कर्मभोग, एक्टर्स, 84

9. 84 लाख जन्म नहीं, यह तो सिर्फ *84 जन्मों की कहानी* है। इसका कौन-सा तर्क बाबा ने सुनाया?
° 84 लाख जन्म हों तो कितने वर्ष सुनाने में लग जायें। तुम तो सेकण्ड में जान जाते हो – यह 84 जन्मों की कहानी है। *84 लाख हो तो सेकण्ड में थोड़ेही समझ सकते।*

10. हम है *आलराउन्ड पार्टधारी* । कैसे? (2)
° *आदि से अन्त तक पार्ट* और कोई का है नहीं। (तुमको ही बाप समझाते हैं। बाप कहते हैं – बच्चे, तुम्हें पतित से पावन, पावन से पतित बनना ही है। यह भी ड्रामा में नूँध है।)
° *अनेक बार* यह चक्र पास किया है। (पास करते ही रहेंगे।)

11. बड़े ते बड़ी मंजिल है _____ की। बहुतों को सिर्फ सुनने का शौक रहता है। _____ को समझना तो बहुत सहज है। बाप कहते हैं तुम्हारे 84 जन्मों की कहानी सुनाता हूँ।
°याद, ज्ञान

12. हम है *अननोन वारियर्स*। कैसे?
° तुम *गुप्तवेष में इस पुरानी दुनिया का परिवर्तन कर रहे* हो। तुमको कोई नहीं जानते। (बाबा भी गुप्त, नॉलेज भी गुप्त। इनका कोई शास्त्र आदि भी नहीं बनता।)

13. बच्चे कहते हैं *काम नहीं है* । क्या यह ठीक है? (3)
° नहीं!
° बाबा कहते हैं *यह सर्विस तो बहुत है*। यहाँ एकान्त में बैठ यह काम करो। (जो भी बड़ी-बड़ी संस्थायें हैं, गीता पाठशालायें आदि हैं, उन सबको जगाना है। सबको सन्देश देना है। यह पुरुषोत्तम संगमयुग है। नई दुनिया की स्थापना और पुरानी दुनिया का विनाश।)
° यह *बैठकर लिखो* – गीता का भगवान कौन? दोनों की बायोग्राफी की महिमा लिखो। शिवबाबा की भी बायोग्राफी लिखो। फिर आपेही वह जज करेंगे। (फिर शिव और शंकर का *भेद* भी दिखाना है।)
° यह भी बाबा ने समझाया है – कल्प 5 हज़ार वर्ष का है। मनुष्य 84 जन्म लेते हैं, न कि 84 लाख। (यह *मुख्य-मुख्य बातें शॉर्ट में* लिखनी चाहिए। जो *एरोप्लेन से भी गिरा सकते* हैं, समझा भी सकते हैं।)

14. हमारे *बहुत अच्छे-अच्छे चित्र* है। बाबा ने इनका प्रयोग करने की कौन-सी जबरदस्त युक्ति सुनाई?
° *मुख्य 12 चित्रों के कैलेन्डर्स* भी छपवा सकते हो। जिसमें सारा ज्ञान आ जाए और सर्विस सहज हो सके। (यह चित्र बिल्कुल ज़रूरी है। कौन-से चित्र बनाने हैं, क्या-क्या प्वाइंट लिखनी चाहिए। वह बैठ लिखो।)

15. मनुष्य जहाँ *स्नान* करने जाते हैं, वहाँ क्या समझा सकते?
° *पतित-पावन कौन?* (यह पानी कोई पतित-पावनी नहीं। पतित-पावन तो निराकार परमपिता परमात्मा है। इसका चित्र भी हैं।)

16. *अमरनाथ की यात्रा* पर क्या समझा सकते? (3)
° हम तुमको *सच्ची अमरनाथ की कथा* सुनायें।
° अमरनाथ तो *एक को ही* कहा जाता है।
° अमरनाथ अर्थात् जो *अमरपुरी सतयुग स्थापन* करे। (ऐसे सर्विस करनी पड़े। वहाँ पैदल जाना पड़ता है। जो अच्छे-अच्छे बड़े-बड़े आदमी हों उनको जाकर समझाना चाहिए।)

17. भादों का मास आता है, सभी पित्रों को *श्राद्ध* खिलाते हैं। इसमें क्या करना है? (2)
° वह भी *युक्ति से* करना चाहिए, नहीं तो कहेंगे कि ब्रह्माकुमारियों के पास जाकर सब कुछ छोड़ दिया है। ऐसा कुछ नहीं करना है, जिसमें नाराज हों।
° युक्ति से तुम *ज्ञान दे सकते* हो।

18. इस मास में तुम *ब्राह्मणों* की बहुत सर्विस कर सकते हो। क्या समझा सकते?
° ब्राह्मण तो *प्रजापिता ब्रह्मा की औलाद* है। बताओ ब्राह्मण धर्म *किसने स्थापन किया* ? (तुम उन्हों का भी कल्याण कर सकते हो घर बैठे।)

19. तुम बच्चे *3 बाप का राज़* भी सबको समझा सकते हो। इसकी क्या समझानी है?
° दो बाप तो सब समझते हैं *लौकिक* और *पारलौकिक*।
° और यह *अलौकिक* प्रजापिता ब्रह्मा फिर है यहाँ संगमयुग पर। पुरुषोत्तम संगमयुगी ब्राह्मण भी चाहिए ना। (ब्राह्मण सो देवी-देवता नम:!)

20. बाप *नॉलेजफुल* है अर्थात्‌ सबके दिलों को जानने वाला है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (नॉलेजफुल अर्थात्‌ बाबा के पास बुद्धि में सारे सृष्टि के आदि-मध्य-अन्य का ज्ञान है।)

21. सबके दिलों को जानते / देखते हैं, तब तो *भगवान कर्मों का फल देते* हैं। _(सही / गलत)_
° बाप कहते हैं यह *ड्रामा में नूँध* है। ड्रामा में जो विकर्म करते हैं तो उनकी सज़ा होती जाती है। अच्छे वा बुरे कर्मों का *फल (आपेही) मिलता* है।

Answers from Sakar Murli 29-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 29-08-2020*

1. किसी भी प्रकार की सेवा में सदा _____ रहना ही अच्छे मार्क्स लेना है।
°सन्तुष्ट

2. बाप द्वारा होने वाली *प्राप्तियां की लिस्ट सदा सामने* रखने से क्या-क्या प्राप्तियां होती? (4)
° जब प्राप्ति अटल, अचल है तो *हिम्मत और हुल्लास भी अचल* रहेंगा।
° सर्व प्राप्तियों का अनुभव सदा सामने वा स्मृति में रहे तो *सब विघ्न खत्म* हो जायेंगे।
° सदा *नया उमंग, नया हुल्लास* रहेगा।
° *स्थिति एकरस और अचल* रहेगी। (मन की स्थिति चंचलता में नहीं आएंगी।)

3. *अभी हम चलते है सुखधाम।* यहाँ हम पुरूषार्थ से 21 जन्मों लिए स्वर्ग की प्रालब्ध बनाते। तो सतयुग में कौन-सी 4 चीज़े नहीं होंगी?
° बाकी वहाँ *हॉस्पिटल* , *कोर्ट* , *पुलिस* आदि कुछ नहीं होगा।
° वहाँ *वजीर* भी होता नहीं। (ऊंच ते ऊंच खुद महाराजा-महारानी, वह वजीर की राय थोड़ेही लेंगे।)

4. हम विश्व के मालिक अमीर थे। अमीरचन्द से फकीरचन्द बने हैं। *अब फिर अमीर बनना है* । इसके लिए बाबा ने आते ही कौन-सी *वन्डरफुल युक्ति* सुनाई?
° यह है पढ़ाई। इसको अच्छी रीति पढ़कर इन *अविनाशी ज्ञान रत्नों को धारण करना-कराने की कोशिश* करनी है। आत्मा रूप-बसन्त है ना।

5. *आत्मा ही धारण करती* है, शरीर तो विनाशी है। यह बाबा ने कैसे सिद्ध किया?
° काम की जो चीज़ नहीं होती है, उनको जलाया जाता है। *शरीर* भी काम का नहीं रहता है तो उनको *आग में जलाते* हैं।

6. स्वदर्शन चक्रधारी बन 84 का ______ बुद्धि में फिराना है। एक ______ को ही याद करना है। दूसरे कोई की याद न रहे। जैसे स्त्री का पुरूष से लव रहता, यहाँ तुम्हारा है _______ लव। तुम्हें उठते-बैठते, पतियों के ______ , बापों के _____को याद करना है।
°चक्र, बाप, रूहानी, पति, बाप

7. अमरनाथ सर्वशक्तिमान् बाप आकर आत्माओं को *अमर बनाने की शक्ति* दे शक्तिवान बनाते (वहाँ अपने समय पर फुल-बड़ी आयु पर अपनी मर्जी से एक शरीर छोड़ दूसरा लेते। सर्प का मिसाल।) तो *बाबा से शक्ति लेने* लिए हमें क्या करना है? (3)
° एक तो *पवित्र बनना* है (पाप आत्मा तो शक्ति ले न सके। पुण्य आत्मा बनते हैं तो शक्ति मिलती है।)
° और *शिवबाबा की याद में रहना* है तब शक्ति मिलती है। बाप से शक्ति का वर्सा लेते हो।(याद से ही सतोप्रधान बनेंगे नहीं तो सज़ायें खाकर फिर कम पद पा लेंगे। मूल बात है याद की, जिसको ही भारत का प्राचीन योग कहा जाता है।
° साथ-साथ *सर्विस भी करेंगे* तो ताकत मिलेगी। समझो कोई सेन्टर खोलते हैं तो बहुतों की आशीर्वाद उन्हों के सिर पर आ जाती। (जैसे मनुष्य धर्मशाला-हॉस्पिटल-युनिवर्सिटी खोलते।)

8. *सब थोड़ेही सतोप्रधान होंगे*। कोई तो सतो भी होंगे ना।
यह सोचना ठीक है। _(सही / गलत)_
° नहीं, हमेशा शुभ भावना रखनी चाहिए। अपने को समझना चाहिए *हम पहले-पहले सतोप्रधान थे। निश्चय से ही सतोप्रधान बनेंगे* । (ऐसे नहीं कि हम कैसे सतोप्रधान बन सकेंगे। फिर खिसक जाते हैं। याद की यात्रा पर नहीं रहते। जितना हो सके पुरूषार्थ करना चाहिए। अपने को आत्मा समझ सतोप्रधान बनना है, और बाप की याद में रहकर।)

9. अब पुरूषार्थ करना है कि हम ______ सतयुग में आयें। इस अन्तिम जन्म में _____ पुरूषार्थ करना है। बाप कोई फाँसी पर नहीं चढ़ाते हैं। सिर्फ कहते हैं ______ बनो और बाप को _____ करो।
° पहले-पहले, पूरा, पवित्र, याद

10. 108 की माला बनाते हैं। अर्थात्‌ *सिर्फ 8-108 आत्माएं* ही अच्छी मेहनत करते। _(सही / गलत)_
° गलत (नम्बरवार तो *बहुत हैं, जो अच्छी मेहनत करते* हैं।)

11. इन 5 ______ ने ही तुमको बिल्कुल वर्थ नाट ए पेनी बनाया है। तुम बच्चे जानते हो हमको _____ जाना है। हम भारत की सेवा कर ______ राज्य स्थापन करते हैं। फिर हम राज्य करेंगे। गाया भी जाता है फालो ______। तुम ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ सब ______ सीख रहे हो। कितना क्लीयर है। (झाड़ के चित्र में)
°विकारों, घर, दैवी, फादर, राजयोग

12. रूद्र यज्ञ होता है तो सालिग्रामों (अर्थात्‌ हम *आत्माओं) की भी पूजा* होती है। क्यों?
° *जरूर कुछ सर्विस की है* तब तो पूजा होती है। तुम ब्राह्मण *रूहानी सेवाधारी* हो। सबकी आत्माओं को *जगाने वाले* हो। (मैं आत्मा हूँ, यह भूलने से देह-अभिमान आ जाता है। यहाँ पार्ट बजाते-बजाते सबको शरीर का भान पक्का हो गया है।)

13. प्रदर्शनी में भी तुमसे पूछते हैं तो बोलो हम बी.के. अपने ही _______ से श्रीमत पर सेवा कर ______ -राज्य स्थापन कर रहे हैं। अपना _____ भी सफल कर अपना कल्याण करो। तो भारत का भी कल्याण होगा। हम अपनी राजधानी _______ पर फिर से स्थापन करते हैं। याद की यात्रा से और सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त को जानने से ही हम _______ राजा बन जायेंगे। देवताओं का है छोटा झाड़। फिर कितनी वृद्धि हो जाती है। आत्मायें सब आती रहती हैं, यह बना-बनाया _____ है।
°तन-मन-धन, राम, पैसा, श्रीमत, चक्रवर्ती, खेल

14. काशी में भी शिव का मन्दिर है। वहाँ जाकर साधू लोग मंत्र जपते। शिव काशी विश्वनाथ गंगा। *शिव* जो काशी के मन्दिर में बिठाया है, *उनको कहते हैं – विश्वनाथ* । यह ठीक है। _(सही / गलत)_
° गलत (बाबा कहते अब *मैं तो विश्वनाथ हूँ नहीं। विश्व के नाथ तुम बनते हो।* मैं बनता ही नहीं हूँ। ब्रह्म तत्व के नाथ भी तुम बनते हो। तुम्हारा वह घर है। वह राजधानी है। मेरा घर तो एक ही ब्रह्म तत्व है। मैं स्वर्ग में आता नहीं हूँ। न मैं नाथ बनता हूँ। *मेरे को कहते हैं शिवबाबा। मेरा पार्ट है पतितों को पावन बनाना*।)

15. महिमा गाते हैं एकोअंकार…… अजोनि यानी *जन्म-मरण रहित* । यह ठीक है। _(सही / गलत)_
° *सही* (मैं तो 84 जन्म लेता नहीं हूँ। मैं इनमें प्रवेश करता हूँ। मनुष्य 84 जन्म लेते हैं।)

16. इस दादा (ब्रह्मा बाबा) की आत्मा कहती है मुझे बहुत ______ करनी पड़ती है। ऐसे नहीं कि मेरे साथ बैठा है तो याद अच्छी रहती है। नहीं। एकदम इकट्ठा है। जानता हूँ (शिवबाबा) मेरे पास है। इस शरीर का जैसे वह ______ है। फिर भी भूल जाता हूँ। बाबा को यह (शरीर) मकान दिया है रहने के लिए। बाकी एक _____ में मैं बैठा हूँ। बड़ा आदमी हुआ ना। विचार करता हूँ, _____ में मालिक बैठा है। यह रथ उनका है। वह इनकी सम्भाल करते हैं। मुझे शिवबाबा खिलाते भी हैं। मैं उनका रथ हूँ। कुछ तो खातिरी करेंगे। इस _____ में खाता हूँ। दो-चार मिनट बाद भूल जाता हूँ, तब समझता हूँ बच्चों को कितनी मेहनत होती होगी।
°मेहनत, मालिक, कोने, बाजू, खुशी

17. माया बड़ी जबरदस्त है, तुम _____ के मैदान में हो। तुम ______ -अभिमानी बनो। आत्माओं और परमात्मा का यह _____ है। हम आत्मायें बाप के _____ रहने वाली हैं। वह आत्माओं का घर है ना। बाप भी वहाँ है, उनका असली नाम है ______ शिव।
°युद्ध, आत्म, मेला, साथ, कल्याणकारी

18. यहाँ तो थोड़ी बात में तंग हो पड़ते फिर पढ़ाई को छोड़ देते हैं। बाप को ______ बनावन्ती, ______ सुनावन्ती, पढ़न्ती, दिव्य दृष्टि से ____ देखन्ती, ____ करन्ती, अहो मम माया मुझे ______ देवन्ती, भागन्ती।
°अपना, ज्ञान, स्वर्ग, रास, फारकती

19. रावण राज्य में बिल्कुल ही बेअक्ल तुच्छ बुद्धि बन जाते हैं, इसका *प्रमाण* क्या है?
° इसलिए *विनाश का रास्ता ढूँढते रहते* हैं। खुद समझते हैं हम विश्व को बहुत ऊंच बनाते हैं परन्तु यह और ही नीचे गिरते जाते हैं। अब विनाश सामने खड़ा है।