Answers from Sakar Murli 20-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 20-08-2020*

1. साइलेन्स की _____ से निगेटिव को पॉजिटिव में परिवर्तन करो।
°पॉवर

2. रायल कुल में *फर्स्ट जन्म* के सम्बन्ध में समीप कौन-से बच्चे आते हैं? (2)
° वही बच्चे जो यहाँ बाप के गुण-संस्कारों के *समीप* हैं, सर्व सम्बन्धों से बाप के *साथ* का वा *समानता* का अनुभव करते हैं।
° वही आयेंगे जो आदि से अब तक *अव्यभिचारी* और *निर्विघ्न* रहे हैं। (विघ्नों के ऊपर सदा विजयी, विघ्न-विनाशक)

3. हमे किन-किन बातों की *अथाह खुशी* होनी चाहिए? (5)
° हमको सदैव खुशी क्यों नहीं होनी चाहिए। जबकि *ऊंच ते ऊंच बाप के बने* हैं।
° *घर (और राजधानी) को याद* कर खुश होना चाहिए।(मनुष्य मुसाफिरी कर घर लौटते हैं तो खुशी होती है ना। हम आत्माओं का भी घर है मूलवतन। कितनी खुशी होती है।)
° *यह है पुरुषोत्तम संगमयुग* । बाबा हमको पुरूषोत्तम बना रहे हैं। यह याद रहे तो भी खुशी रहे। *भगवान पढ़ाते हैं, विश्व का मालिक बनाते* हैं।
° यह आन्तरिक खुशी रहनी चाहिए कि हमको बागवान-पतित पावन का हाथ मिला है, हम *शिवबाबा से ब्रह्मा द्वारा हैण्ड-शेक* करते हैं।
° हम इस *पढ़ाई से स्वर्ग की पटरानी* बनते हैं – इसी आन्तरिक खुशी में रहना है।

4. किस बात का *नशा* होना चाहिए?
° अन्दर में नशा रहना चाहिए – हम *शिवबाबा के साथ आये हैं* दैवी राज्य स्थापन करने, *सारे विश्व को स्वर्ग बनाने* ।

5. बाप को सब पुकारते हैं क्योंकि उनसे शान्ति और सुख का _____ मिलता है। दुनिया में कोई भी 84 जन्मों की हिस्ट्री-जॉग्राफी नहीं जानते। अभी बाप ने आकर सारी _____ कहानी समझाई है। अभी तुम बच्चे जानते हो यह दुनिया बदल रही है। यह _____ का युग है, जबकि नई दुनिया स्थापन हो रही है। मनुष्यों को भी बदलना है। जरूर ______ वाले मनुष्य चाहिए। तुम कितने _____ थे। भल इस समय पैसे कौड़ी हैं परन्तु यह तो कुछ है नहीं। कौड़ियां हैं।
°वर्सा, जीवन, गीता, दैवी गुणों, साहूकार

6. तुम ______ हो जो पार जाती हो। तुम जानते हो हमको इस मायावी दुनिया से पार जाना है।तुम _____ करते हो – सतोप्रधान दुनिया में जाने का।
°नईया, पुरुषार्थ

7. जबकि बचड़ेवाल-बाबा हमारी सेफ्टी की इतनी सम्भाल करते (पोतामेल देखना, किस बच्चे को कहाँ भेजना, आदि) की बच्चे विकारों रूपी माया के चम्बे से बचे। तो हमें भी *पुण्य आत्मा जरूर बनना है*, इसके लिए क्या करना हैं? (2)
1. *श्रीमत* पर सदा चलते रहो। *याद* की यात्रा में ग़फलत नहीं करो।
2. *आत्म-अभिमानी* बनने का पूरा-पूरा पुरूषार्थ कर काम महाशत्रु पर *जीत प्राप्त करो*। (यही समय है – पुण्यात्मा बन इस दु:खधाम से पार सुखधाम में जाने का।)

8. बाप को पुकारते हैं कि हमारे दु:ख दूर करो। तुम समझते हो दु:ख दूर सब होने हैं। *दुःख दूर करने का एकमात्र उपाय* कौन-सा है?
° सिर्फ *बाप को याद* करते रहो। (हम दु:ख हर्ता सुख कर्ता के बच्चे है, अब दु:खी नहीं होना है।)

9. याद बढ़ाने की सर्वश्रेष्ठ युक्ति है – चार्ट रखना। तो अपने *चार्ट* में क्या-क्या देखना है? (3)
° अपने आपको देखना है कि *याद का चार्ट ठीक है?* कहाँ तक बाबा को याद करते हैं? (बाबा के पास कोई का 5 घण्टे का, कोई का 2-3 घण्टे का भी चार्ट आता। कोई तो लिखते ही नहीं हैं। बहुत कम याद करते हैं।)
° हर एक को अपना चार्ट देखना है *- मैं कहाँ तक पद पा सकूँगा?*
° कहाँ तक *खुशी का पारा* चढ़ता है? हमको सदैव खुशी क्यों नहीं होनी चाहिए?

10. बस घर और राजधानी याद रहे। परन्तु यहाँ बैठे भी कोई-कोई को अपने कारखाने आदि याद रहते हैं। बाबा ने यहां कौन-सा हंसी का *उदाहरण* दिया?
° जैसे देखो *बिड़ला* है, कितने उनके कारखाने आदि हैं। सारा दिन उनको ख्यालात रहती होगी। उनको कहें बाबा को याद करो तो कितनी उनको अटक पड़ेगी। घड़ी-घड़ी धन्धा याद आता रहेगा।

11. यहां नदी में मूर्ति डुबोने जाते हैं, अर्थी को भी ले जाते। (हरीबोल, हरीबोल कर डुबो देते)। और वहां *सतयुग में नदी पर* क्या करते? (नशे की बात!)
° तुम जानते हो यह *जमुना का कण्ठा* था, जहाँ *रास विलास* आदि करते थे। वहाँ तो *बड़े-बड़े महल* होते हैं।

12. *कुमार-कुमारियों* के लिए बहुत सहज है, इसलिए परमात्मा को कन्हैया भी कहते। (इतनी कन्यायें जरूर शिवबाबा की होगी।) तो उन्हें *क्या सोचना* है? (याद से सम्बंधित)
° देह सहित देह के सब सम्बन्ध छोड़ अपने को आत्मा समझ *शिवबाबा का बन जाना* है।
° *शिवबाबा को ही याद* करते रहना है क्योंकि पापों का बोझा सिर पर बहुत है।
° अभी तुम इस पढ़ाई से पटरानी बन रहे हो, इसमें *पवित्रता* भी मुख्य चाहिए। (दिल तो सबकी होती है, हम जीते जी शिवबाबा का बन जायें। शरीर का भान न रहे। हम अशरीरी आये थे फिर अशरीरी बनकर जाना है। बाप के बने हैं तो बाप के सिवाए दूसरा कोई याद न रहे।)

13. *नये को* पहले-पहले क्या समझाना है? *बड़ो-बड़ों को* कैसे समझाना है? बाबा के बच्चे *कोने-कोने में* है (विदेश में भी), उनके लिए क्या करना है?
° (नये को) एक हद के, दूसरा *बेहद के बाप का परिचय* देना है। बेहद के *बाप से स्वर्ग (बहिश्त) नसीब होता* है।
° (बड़ो-बड़ों को समझाने), *आपस में मिलकर राय* करनी है कि सर्विस की वृद्धि कैसे हो। विहंग मार्ग की सर्विस कैसे हो।
° कोने-कोने में जाना चाहिए। विलायत में भी।

14. पास्ट में दान-पुण्य किया है तो भी बहुत *पैसा* मिलता है। फिर ज्ञान-योग का पुरुषार्थ क्यों करना है? (4)
° वह दान-पुण्य है एक जन्म की बात। यहाँ तो *जन्म-जन्मान्तर के लिए* साहूकार बनते हैं।
° जिनको बहुत धन है वह फिर बहुत फंसे हुए हैं ( *लोभ* )। कभी ठहर न सके। कोई साधारण गरीब ही सरेन्डर होंगे। साहूकार कभी नहीं होंगे।
° जैसे बहुत दान जो करते हैं तो वह राजा बनते हैं। परन्तु *एवरहेल्दी* तो नहीं हैं।
° राजाई की तो क्या हुआ, *अविनाशी सुख नहीं* है। यहाँ कदम-कदम पर अनेक प्रकार के दु:ख होते हैं। वहाँ यह सब दु:ख दूर हो जाते हैं।

15. तुम जानते हो बाप हमको राजयोग सिखा रहे हैं। हम पुरुषार्थ कर रहे हैं। इसमें *संशय क्यों नहीं* हो सकता? किसको संशय हो तो क्या समझा सकते?
° (संशय क्यों नहीं) हम *(इतने सारे) बी.के.* राजयोग सीख रहे हैं। झूठ थोड़ेही बोलेंगे।
° कोई को यह संशय आये तो समझाना चाहिए, यह तो *पढ़ाई* है। *विनाश* सामने खड़ा है। हम हैं *संगमयुगी ब्राह्मण चोटी*। प्रजापिता ब्रह्मा है तो जरूर ब्राह्मण भी होने चाहिए। (तुमको भी समझाया है तब तो निश्चय किया है।)

Answers from Sakar Murli 19-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 19-08-2020*

1. ब्राह्मण जीवन का ____ उमंग-उत्साह है इसलिए किसी भी परिस्थिति में उमंग-उत्साह का _____ कम न हो।
°सांस, प्रेशर

2. तुमको अविनाशी ज्ञान _____ का दान मिलता है, जिससे तुम साहूकार बनते हो। तुम बच्चे इस पढ़ाई से ____ -पति बनते हो। सोर्स ऑफ इनकम है ना। इन ज्ञान रत्नों को तुम _____ करते हो। झोली भरते हो।
°रत्नों, पद्म, धारण

3. *ओम् शान्ति* कौन-कौन कहते? (3)
° एक *सुप्रीम आत्मा (शिवबाबा)* कहते हैं ओम् शान्ति।
° दूसरा यह दादा ( *ब्रह्मा बाबा*) कहते हैं ओम् शान्ति। (शिवबाबा और ब्रह्मा बाबा दोनों को हक है बच्चे-बच्चे कहना)
° फिर तुम *बच्चे* भी कहते हो हम आत्मा शान्त स्वरूप हैं, रहने वाले भी शान्ति देश के हैं। स्थूल देश में पार्ट बजाने आये। (तो शरीर द्वारा लड़ना नहीं है, भाई-भाई से। )

4. आखिर *वह दिन* आया आज। कौन-सा दिन? (4)
° जो *बाप आया है* पढ़ाने।
° बाबा *दु:ख हरकर सुख देते*। (हर एक मनुष्य सुख-शान्ति ही पसन्द करते हैं।)
° जब तुम पुराने भक्तों के पुकार की *सुनवाई* होती है। जब भगवान *भक्ति का फल* देता है। (भक्तों को देवता बनाता!)
° *पुरुषोत्तम संगमयुग का दिन*। जब तुम उत्तम से उत्तम पुरूष बन रहे हो (उत्तम ते उत्तम पुरुष हम ही थे!)

5. जबकि सुखदाता श्री श्री शिवबाबा हमें *श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ श्रीमत* देते विश्व का मालिक बनाने। (जहाँ अप्राप्त कोई वस्तु नहीं, आधाकल्प प्योरिटी-पीस-प्रासपर्टी सम्पन्न दैवी राज्य, जमुना के कण्ठे पर परिस्तान!), तो ऐसी श्रीमत पर जरूर चलना है। बाबा *पहली-पहली मत* कौन-सी देते? _(आज की मुरली अनुसार)_
° पहली-पहली मत देते हैं – *देही-अभिमानी बनो*। (बाबा हम आत्माओं को पढ़ाते हैं। यह पक्का-पक्का याद करो। यह अक्षर याद किया तो बेड़ा पार है। बच्चों को समझाया है, तुम ही 84 जन्म लेते हो। तुम ही तमोप्रधान से सतोप्रधान बनते हो।)

6. जबकि सर्वशक्तिमान्-पतित पावन खिवैया-बागवान *शिवबाबा हमे पढ़ाते* (जो सद्गति-दाता ज्ञान-सागर बाप है।), तो अच्छी रीति पढ़कर *दैवी कर्म करने है* । कौन-सा एक भ्रष्ट कर्म बिल्कुल नहीं करना चाहिए?
° “जुआ”। बहुत मनुष्यों में जुआ खेलने की आदत होती है, यह भ्रष्ट कर्म है क्योंकि हारने से दु:ख, जीतने से खुशी होगी। ऐसा कोई भी कर्म नहीं करना है जिसमें टाइम वेस्ट हो। सदा *बेहद की जीत (माया पर जीत!)* पाने का पुरुषार्थ करो।

7. *सुप्रीम बाप आया है साथ ले जाने लिए* (शिव की बरात!) तो इसके लिए मुख्य कौन-सा पुरूषार्थ है?
° *आत्मा को पवित्र बनाना*। आत्मा ही पवित्र बन पार जाती है। उड़ती है। (इसलिए कहते कि अन्त में बाप आकर सबको *पवित्र बनाए* साथ ले जाते।)

8. _____ कितना प्यार से बैठ समझाते हैं। तुम बच्चों को भी नम्बरवार _____ अनुसार निश्चय है। थोड़ा टाइम भी चाहिए ना, _____ बनने के लिए। जो अच्छी रीति इन बातों को समझेंगे, तुम फील करेंगे यह हमारे ____ का है।
°बाप, पुरुषार्थ, पावन, कुल

9. जब बाप के साथ सर्व सम्बन्ध जोड़ लिए तो और किसी में ____ कैसे हो सकता। मनमनाभव की _____ द्वारा बन्धनों के _____ को समाप्त करने वाले नष्टोमोहा स्मृति स्वरूप भव।
°मोह, विधि, बीज

10. *बड़ के झाड़* का मिसाल बाबा क्यों देते?
° क्योंकि उसमें थुर है नहीं। बाकी सारा झाड़ खड़ा है। वैसे इस समय भी *देवी-देवता धर्म का फाउन्डेशन* है नहीं। बाकी सारा झाड़ खड़ा है। (था जरूर परन्तु प्राय: लोप हो गया है फिर रिपीट होगा नई दुनिया में।)

11. वैकुण्ठ के खेल-पाल देखना, *भक्ति में साक्षात्कार* आदि करना। इसमें कोई प्राप्ति नहीं है। कैसे?
° (मीरा का मिसाल) साक्षात्कार किया, परन्तु उससे *स्वर्ग में तो नहीं जा सकते* । गति-सद्गति तो संगम पर ही मिल सकती है। (इस पुरूषोत्तम संगमयुग को तुम समझते हो। हम बाबा द्वारा अब मनुष्य से देवता बन रहे हैं।)

12. शिव जयन्ती के बाद फिर होती है _____ जयन्ती । वह फिर श्री- _____ बनते हैं। फिर चक्कर लगाए अन्त में _______ बनते। बाप आकर फिर _____ बनाते हैं।
°कृष्ण, नारायण, सांवरा (पतित), गोरा

13. बहुत हैं जो *यहाँ सुनकर बाहर गये* तो (पढ़ाई) यहाँ की यहाँ रह जाती है। इसके लिए बाबा ने कौन-सा मिसाल दिया?
° जैसे *गर्भ जेल* में कहते हैं – हम पाप नहीं करेंगे। बाहर निकले, बस वहाँ की वहाँ रही। थोड़ा बड़ा हुआ पाप करने लग पड़ते।

14. बाबा कहते तुम *काम चिता पर बैठ कब्रिस्तानी* बन पड़े थे। फिर तुमको परिस्तानी बनाते हैं। इसके कौन-से 3 यादगार भक्ति मार्ग में चले आये है?
° श्रीकृष्ण को *श्याम-सुन्दर* कहते हैं – क्यों? बाप कहते हैं काम चिता पर बैठने से आइरन एज में हैं।
° (एक कहानी में) गाया हुआ भी है, *सागर के बच्चे* काम चिता पर जल मरे। अब बाप सब पर ज्ञान वर्षा करते हैं। फिर सब चले जायेंगे गोल्डन एज में।
° *भस्मासुर* भी नाम है।

Answers from Sakar Murli 18-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 18-08-2020*

1. ______ के अन्दर चलना माना मर्यादा पुरूषोत्तम बनना।
°मर्यादा

2. _(वरदान)_ जीवन में ड्रामा अनुसार समस्यायें व परिस्थितियां तो आनी ही हैं। तो उन *नजारों को पार करने* लिए क्या नहीं करना है? और क्या करना है?
° (क्या नहीं करना) यदि *करेक्शन* करने लग जाते हो तो बाप की याद का *कनेक्शन* लूज हो जाता है और *मनोरंजन* के बजाए *मन को मुरझा* देते हो।
° (क्या करना है) इसलिए *वाह नजारा वाह* के गीत गाते आगे बढ़ो अर्थात् *सदा विजयी भव के वरदानी* बनो।

3. सब कहते हैं हमको शान्ति कैसे मिले। तो *शान्ति कहां* होती है? (2)
° वह तो *शान्तिधाम में* मिलती है।
° और *सतयुग में* एक धर्म होने कारण वहाँ अशान्ति होती नहीं। (अशान्ति होती है रावण राज्य में)।

4. *लाइट का ताज* सिर्फ किसको दे सकते? *अमरलोक* क्यों कहते?
° (लाइट का ताज) *देवी-देवताओं को* ही!
° (अमरलोक क्यों) क्योंकि वहाँ मरने का अक्षर नहीं। यहाँ तो बैठे-बैठे अचानक मर जाते, इसको मृत्युलोक उसको अमरलोक कहा जाता है। *पुराना एक शरीर छोड़ फिर बालक बन जाते* हैं। रोग होता नहीं। कितना फायदा होता है। श्री श्री की मत पर तुम एवरहेल्दी बनते हो।

5. यह बेहद का ड्रामा है। इसमें *सबसे मुख्य पार्ट* किसका है? _(आज की मुरली अनुसार)_
° *तुम्हारा* है सबसे मुख्य पार्ट बाप के साथ, जो *तुम पुरानी दुनिया को नई बनाते* हो।

6. अपने को आत्मा समझ *बाप को याद* करने से ही मायाजीत-पवित्र-सतयुगी देवता बन सतोप्रधान-सदैव सुखी जीवन की तकदीर प्राप्त होती (और विश्व का भी कल्याण होता)। तो ऐसा पदम भाग्यशाली हमे बनाने, *आज बाबा ने याद की कौन-सी अनोखी युक्ति* सुनाई?
° यह तो अपने पास *लिख दो*। बांह पर नाम लिखते हैं ना। तुम भी लिख दो – *हम आत्मा हैं, बेहद के बाप से हम वर्सा ले रहे* हैं क्योंकि माया भुला देती है इसलिए लिखा हुआ होगा तो *घड़ी-घड़ी याद रहेगी* ।

7. तुम यहाँ 10-15 मिनट बैठते हो, उनमें भी _____ करो – याद में अच्छी रीति रहते हैं? _____ सुनाना तो अच्छा ही है और भी सीखेंगे। _____ में ही मेहनत है। बाकी बीज से झाड़ कैसे निकलता है, वह तो सबको मालूम रहता है। कहते लक्ष्मी नारायण बनेंगे, बाबा कहते तुम्हारे मुख में गुलाब लेकिन इसके लिए _____ भी करनी है।
°जांच, सच, याद, मेहनत

8. बाप ही सबसे ऊंच है, और किसकी महिमा नहीं। *बाप कहते हैं मैं भी यहाँ ही आकर भारत को स्वर्ग सचखण्ड बनाता* हूँ। तो ऐसे बाप के अवतरण के कौन-से *2 यादगार* भक्ति में चले आये हैं?
° लिखा हुआ है *यदा यदाहि…..*
° अभी तुम जानते हो बाप आते हैं जरूर, *शिवजयन्ती* पर।

9. शिवबाबा की कौन-सी *महिमा* आज की मुरली में है? (2)
° शिवबाबा है परमपिता, पतित-पावन।
° बाप तो सत्य है, चैतन्य है, ज्ञान का सागर है। (बिन्दी है)

10. जिनको सेमिनार आदि में बुलाया है, वह ही *राय दे सकते*। _(सही / गलत)_
° *गलत* ( *राय तो कोई भी दे सकते।* ऐसे नहीं कि जिनके नाम हैं उनको ही देनी है। हमारा नाम नहीं है, हम कैसे देवें। नहीं, कोई को भी सर्विस अर्थ कोई राय हो, एडवाइज़ हो लिख सकते। बाबा इस युक्ति से पैगाम दे कल्याण कर सकते।)

11. *दुकानदार* कैसे सेवा कर सकते?
° दुकान में भी *सबको याद कराते रहें*। (भारत में जब सतयुग था तो एक धर्म था। सबका एक बाप है। बाप कहते हैं मामेकम् याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश हो जाएं। स्वर्ग के मालिक बन जायेंगे। अच्छा!)

12. कदम-कदम पर ____ लेनी चाहिए। अब तुमको मिलती है _____ मत। तुम बच्चे ____ -मत से सारे विश्व को हेविन बनाते हो।
°मत, ईश्वरीय, श्री

13. पुरूषार्थ में पैसे की बात नहीं है। याद में रहना है और आप समान बनाना है। इसका कौन-सा *जबरदस्त उदाहरण* बाबा ने दिया?
° बाबा ने *मम्मा का मिसाल* बताया है – चावल मुट्ठी भी नहीं ला पाई।

14. और यदि पैसे है, तो क्या करना है? (3)
° समझते हैं हमारे पास पैसे पड़े हैं तो क्यों न यज्ञ में सेवा करे। विनाश तो होना ही है। सब व्यर्थ हो जायेगा। इससे कुछ तो *सफल करें*।
° हर एक मनुष्य कुछ न कुछ दान-पुण्य आदि जरूर करते हैं।परन्तु उनसे सब कामनायें तो सिद्ध नहीं होती हैं। यहाँ तो बेहद के बाप द्वारा तुम्हारी *सब कामनायें पूरी* हो जाती हैं।
° तुम बनते हो पावन तो सब पैसे *विश्व को पावन बनाने* में लगाना अच्छा है ना। (थोड़े भी सेन्टर पर आये, तो भी कम बात नहीं।)

15. दुनिया में इतना धन है, बड़े-बड़े महल है, बिजलियाँ हैं, बस *यही स्वर्ग है*। _(सही / गलत)_
° *गलत* (यह सब है *माया का पाम्प* । सुख के लिए साधन बहुत करते हैं। बड़े-बड़े महल मकान बनाते हैं फिर बीमारी वा मौत कैसे अचानक हो जाता, वहाँ मरने का डर नहीं। यहाँ तो अचानक मर जाते हैं फिर कितना शोक करते हैं। फिर समाधि पर जाकर आंसू बहाते हैं।)

16. अब बाप कहते हैं सबकी ______ अवस्था है, पढ़ो न पढ़ो, जाना है जरूर। तैयारी करो न करो, _____ दुनिया जरूर स्थापन होनी है। अच्छे-अच्छे बच्चे जो हैं वह अपनी _____ कर रहे हैं। _____ पद पाना है तो आप समान बनाने की सेवा करो।
°वानप्रस्थ, नई, तैयारी, ऊंच

Answers from Sakar Murli 17-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 17-08-2020*

1. *डायमण्ड जुबली* मनाना अर्थात्‌ क्या? (2)
° *डायमण्ड* बन, *डायमण्ड* बनने का मैसेज देना।

2. सन्तुष्टता द्वारा सर्व से प्रशन्सा प्राप्त करने वाले सदा प्रसन्नचित भव। जब सभी सदा प्रसन्न रहेंगे तब _______ का आवाज गूंजेगा अर्थात् ______ का झण्डा लहरायेगा।
°प्रत्यक्षता, विजय

3. अब मैं ज्ञान सागर तुमको ____ -सागर में ले जाता हूँ। सचखण्ड की स्थापना करने वाला है _____ बाबा। ____ -गुरू तो एक ही है।
°क्षीर, सच्चा, सत

4. मैं संगमयुग पर आकर तुमको _____ आत्मा बनाता हूँ, _____ -बुद्धि। तुम बच्चे समझते हो – अब हमारी _____ कला होती है। अब बाप कहते हैं – मीठे-मीठे बच्चों, मेरा बनकर फिर मेरी ____ पर चलो। एक सत का _____ ही पार करता है, बाकी सब डुबोते हैं।
°पुण्य, पारस, चढ़ती, मत, संग

5. गीत:- जो पिया के साथ है…। तो हम *कौन-से पिया के साथ* है? उनकी *ज्ञान वर्षा* से क्या होता?
° (कौन-से पिया) जो रूहानी बाप, परमपिता परमात्मा, शिवबाबा है। वही *ज्ञान का सागर* , सर्व का सद्गति दाता है।
° (ज्ञान वर्षा) इस धरती को फिर से *सब्ज, सुख से भरपूर नई दुनिया-स्वर्ग* कर देते। (दैवीगुणों वाले निर्विकारी दैवी सम्प्रदाय)

6. हम बच्चों को किस बात की *अथाह खुशी* होनी चाहिए?
° इस गन्दी-करप्ट दुनिया में बाप आये हैं, बच्चों को *स्वर्ग का मालिक बनाने* तो अथाह खुशी होनी चाहिए ना!

7. हम सर्वोत्तम कुल वाले बच्चों का *मुख्य कर्तव्य* क्या है? हर एक *चित्र के नीचे* क्या लिख देना है? *प्रदर्शनी के उद्घाटन* लिए क्या लिख सकते? *घर-घर में* क्या समझा सकते?
° (मुख्य कर्तव्य) सदा *ऊंची रूहानी सेवा* करना। सारे *विश्व को पावन* बनाना, श्रीमत पर *बाप के मददगार* बनना – यही सर्वोत्तम ब्राह्मणों का कर्तव्य है।
° (चित्र के नीचे) पारलौकिक परमपिता परमात्मा *त्रिमूर्ति शिव भगवानुवाच* । (त्रिमूर्ति न लिखने से कहेंगे शिव तो निराकार है, वह कैसे ज्ञान देंगे?)
° (प्रदर्शनी का उद्घाटन) *बाप परमधाम से आये हैं – हेविन का उद्घाटन करने*। बाप कहते हैं मैं हेविनली गॉड फादर हेविन का उद्घाटन करने आया हूँ।
° (घर-घर में) भारतवासी तुम *सतोप्रधान थे* फिर 84 जन्मों बाद तमोप्रधान बने हो। अब फिर *सतोप्रधान बनो* । *मनमनाभव* । (हम जानते हैं अभी यह भक्तिमार्ग की रात पूरी होती है।)

8. राजा *बनना अच्छा* है या दासी बनना अच्छा?
° *राजा* (राजा बनना है तो इस पढ़ाई में लग जाओ)

9. इन शब्दों का *अर्थ* क्या है – सतगुरू अकाल, जप साहेब?
° सतगुरू अकाल….. अर्थात् जिसको *काल नहीं खाता* । (मनुष्य को तो काल खा जाता है।)
° (जप साहेब) बाप कहते हैं *मुझे याद करो* – जप साहेब को। साहेब तो एक है। (वास्तव में तुमको जपना नहीं है, याद करना है। यह है अजपाजाप। मुख से कुछ बोलो नहीं।)

10. मनुष्य दुर्गती में इतने पतित दु:खी *निधनके* क्यों बने? *नम्बरवन अवगुण* कौन-सा है? अभी बाप कौन-सा *आर्डीनेन्स* निकालते? बच्चों को अभी *नये नाम* क्यों नहीं मिलते?
° (निधनके क्यों) बाप ने समझाया है मैं तुम सभी आत्माओं का बाप हूँ। परन्तु *मुझे और मेरे कर्तव्य को न जानने कारण* ही मनुष्य ऐसे बने। (तुम्हारा बाप है या नहीं है?)
° नम्बरवन अवगुण है जो *बाप को नहीं जानते* । (दूसरा अवगुण है अपवित्रता)
° (आर्डीनेन्स) तुम 63 जन्म पतित रहे हो, अब *पावन दुनिया स्वर्ग में चलना चाहते हो तो पवित्र बनो*। (वहाँ पतित आत्मा जा नहीं सकती इसलिए ही मुझ बेहद के बाप को तुम बुलाते हो।)
° (नाम नहीं रखते) क्योंकि यदि *माया जीत लेती है* तो ब्राह्मण से बदल शूद्र बन जाते हैं (ब्राह्मणों की माला तो होती नहीं!)

11. *अमरनाथ* लिए बाबा ने कौन-से 3 तर्क सुनाये?
° जिनको *सूक्ष्मवतन* में दिखाते हो वह फिर स्थूल वतन में कहाँ से आया? (पहाड़ आदि तो यहाँ हैं ना।)
° वहाँ *पतित* हो कैसे सकते? (जो पार्वती को ज्ञान देते हैं।)
° बर्फ का लिंग तो कहाँ भी बना सकते।

12. विश्व में शान्ति तब होती है जब _____ होता है। इस _____ द्वारा ही स्वर्ग के गेट खुलते हैं।
°विनाश, लड़ाई

Answers from Sakar Murli 15-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 15-08-2020*

1. किसी भी विधि से ______ को समाप्त कर समर्थ को इमर्ज करो।
°व्यर्थ

2. हमको भगवान पढ़ाते हैं। बस _____ में ठण्डे ठार हो जाना चाहिए। बाप की ______ से सब घोटाले निकल जाते हैं। तुम समझते हो हम ब्राह्मण _____ पर पढ़कर विश्व के मालिक बनते हैं। कितनी खुशी होनी चाहिए। यह बाबा तो अभी ही समझते रहते हैं कि हम जाकर ______ बनेंगे। बचपन की वह बातें अभी ही ______ आ रही हैं, चलन ही बदल जाती है।
°खुशी, याद, श्रीमत, बच्चा, सामने

3. *गोप-गोपियाँ* सतयुग में होंगे। _(सही / गलत)_
° *गलत* (गोप-गोपियाँ तो तुम हो। सतयुग में तो होंगे प्रिन्स-प्रिन्सेज। गोप-गोपियों का गोपी वल्लभ है ना। यह सब हैं मुख वंशावली।)

4. *कृष्ण पर लव* लक्ष्मी-नारायण से भी जास्ती रहता है (भल वह एक ही है)। क्यों?
° क्योंकि *बचपन है सतोप्रधान अवस्था* ।

5. कल्प पहले भी परमात्मा-शमा ने हम चैतन्य परवाने-आत्मा से मिल भारत को वाइसलेस शिवालय बनाया था (सद्गति-दाता के ज्ञान से सद्गति हुई थी), यह वही *कल्याणकारी समय* चल रहा (पुरूषोत्तम युग, सच्चा-सच्चा भागवत, वा गीता)। फिर भी *एक-एक दिन जास्ती कल्याणकारी* किनका कहेंगे?
° उनका *जो बाप को अच्छी रीति याद कर अपना भी कल्याण करते* रहते हैं।

6. बाबा ने कहा अवस्थायें नीचे-ऊपर होती। यह है बहुत बड़ी कमाई। कभी बहुत खुशी में अच्छे ख्यालात रहते, कभी ठण्डे पड़ते। तो *अवस्था को सदा ऊँची* रखने की एक युक्ति कौन-सी है?
° *सुबह को उठ बाप को याद* करने से बहुत खुशी होती है ओहो! बाबा हमको पढ़ा रहे हैं। वण्डर है। सभी आत्माओं का बाप भगवान हमको पढ़ा रहे हैं।

7. बाबा ने कहा अपने को आत्मा समझ परमात्मा *बाप से बातें* करनी चाहिए। कैसी बातें?
° बाबा हमारा *बाप* भी है, हमको *पढ़ाते* भी हैं फिर हमको *साथ* भी ले जायेंगे। बाबा हमको *अभी मालूम पड़ा है*।

8. बाप कहते हैं कुमारियों को तो बहुत खड़ा होना चाहिए। कौन-से 3 मन्दिर *कुमारियों के यादगार* बाबा ने कहा?
° कुंवारी कन्या, अधर कुमारी, देलवाड़ा आदि जो भी मन्दिर हैं, यह तुम्हारे ही एक्यूरेट यादगार हैं। (वह जड़, यह चैतन्य। तुम यहाँ चैतन्य में बैठे हो, *भारत को स्वर्ग बना रहे* हो।)

9. हम कैसे *बड़ी सुन्दर कहानी* के रूप में किसी को ज्ञान सुनाने की सेवा कर सकते? (3)
° *लांग-लांग 5 हज़ार वर्ष पहले यह भारत सतयुग था*, सिर्फ देवी-देवताओं का ही सूर्यवंशी राज्य था। लक्ष्मी-नारायण का राज्य चला 1250 वर्ष, फिर उन्होंने राज्य दिया दूसरे भाइयों क्षत्रियों को फिर उनका राज्य चला। तुम समझा सकते हो कि *बाप ने आकर पढ़ाया था* । जो अच्छी रीति पढ़े वह सूर्यवंशी बनें। जो फेल हुए उनका नाम क्षत्रिय पड़ा। बाबा कहते हैं *बच्चे तुम मुझे याद करो* तो तम्हारे विकर्म विनाश हो जायेंगे। तुम्हें *विकारों पर जीत* पानी है। बाप ने ऑर्डीनेन्स निकाला है, जो काम पर जीत पायेंगे वही *जगतजीत* बनेंगे।
° *राम राज्य और रावण राज्य* आधा-आधा है। उनकी कहानी बैठ बनानी चाहिए। फिर क्या हुआ, फिर क्या हुआ।
° यही *सत्य नारायण* की कहानी है। सत्य तो एक ही बाप है, जो इस समय आकर सारे आदि-मध्य-अन्त का तुमको नॉलेज दे रहे हैं, जो और कोई दे न सके। (मनुष्य तो बाप को ही नहीं जानते। जिस ड्रामा में एक्टर हैं, उनके क्रियेटर-डायरेक्टर आदि को नहीं जानते। तो बाकी कौन जानेंगे!)

10. बाबा ने *इन्द्रप्रस्थ की नम्बरवार परियां* (नीलम परी, पुखराज परी) किन 2 कारणों से याद की? (2)
° *तुम्हारे में भी कोई हीरे जैसा रत्न है*। देखो रमेश भाई ने ऐसी बात निकाली प्रदर्शनी की जो सबका विचार सागर मंथन हुआ। तो हीरे जैसा काम किया ना। कोई पुखराज है, कोई क्या है! (बाप कहते हैं – विचार सागर मंथन कर युक्तियां निकालो कि कैसे जगायें? जागेंगे भी ड्रामा अनुसार।)
° यहाँ दूसरा कोई आ न सके। *बाप कहते हैं मैं बच्चों को ही पढ़ाता हूँ*। कोई नये को यहाँ बिठा नहीं सकते।

11. हम जब पुजारी बने थे तब मन्दिर बनाये थे, हीरे ______ का। कोई कितना भी माथा मारे, तुम्हारी _______ तो स्थापन होनी ही है। रावण ही तुमको अज्ञान के घोर अन्धियारे में ______ देते हैं।
°माणिक, राजधानी, सुला

12. बाबा तुमको *गीता* ही पढ़कर सुनाते हैं। _(सही / गलत)_
° *गलत*… बाबा तुमको कोई गीता पढ़कर नहीं सुनाते हैं। वह तो *राजयोग की शिक्षा देते* हैं, जिसका फिर भक्ति मार्ग में शास्त्र बनाते हैं तो अगड़म बगड़म कर देते हैं। (तो तुम्हारी मूल बात है कि गीता का ज्ञान किसने दिया! उनका नाम बदली कर दिया है। कृष्ण तो सर्वगुण सम्पन्न देवता है।)

13. भल कितनी भी पोजीशन वाले बड़े-बड़े विद्वान, पण्डित आदि हैं, कहते भी हैं गॉड फादर को याद करते हैं, परन्तु वह *क्या नहीं जानते?*
° भगवान किसको कहा जाता है। कब आया, क्या आकर किया यह सब भूल गये हैं। *बाप सब बातें समझाते* रहते हैं।

14. और धर्म शास्त्र चले आते, विनाश नहीं होते। तुमको तो जो ज्ञान अभी मैं देता हूँ, इनका कोई शास्त्र बनता नहीं है ( *प्रायः लोप* हो जाता)। ऐसा क्यों? (2)
° यह तो तुम लिखते हो यह सब नैचुरल जलकर *खत्म हो जायेंगे*। (संगम के बाद सतयुग की नई शुरूआत है।)
° बाप ने कल्प पहले भी कहा था, अभी भी तुमको कह रहे हैं – यह ज्ञान तुमको मिलता है फिर *प्रालब्ध जाकर पाते हो फिर ज्ञान की दरकार नहीं* रहती।

15. (वरदान) अभी *कैसा समय* आने वाला है? (4) तो अब हमें क्या करना है?
° अभी ऐसा समय आयेगा जब हर आत्मा प्रत्यक्ष रूप में अपने *रीयल्टी द्वारा रॉयल्टी का साक्षात्कार* करायेगी।
° प्रत्यक्षता के समय माला के मणके का *नम्बर* और भविष्य राज्य का *स्वरूप* दोनों ही *प्रत्यक्ष* होंगे।
° अभी जो रेस करते-करते थोड़ा सा रीस की धूल का पर्दा चमकते हुए हीरों को छिपा देता है, अन्त में यह पर्दा हट जायेगा फिर *छिपे हुए हीरे अपने प्रत्यक्ष सम्पन्न स्वरूप में आयेंगे*
° *रॉयल फैमली* अभी से अपनी *रायॅल्टी दिखायेगी* अर्थात् अपने भविष्य पद को स्पष्ट करेगी।
° (क्या करना है) इसलिए *रीयॅल्टी द्वारा रायॅल्टी* का साक्षात्कार कराओ

Answers from Sakar Murli 14-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 14-08-2020*

1. समय की सूचना है – ______ बनो ______ बनो।
°समान, सम्पन्न

2. *महावीर विजयी बच्चे* क्या नहीं करते? (2) और क्या करते हैं? (2)
° महावीर विजयी बच्चे पेपर को देखकर *घबराते नहीं* क्योंकि त्रिकालदर्शी होने के कारण जानते हैं कि हम *कल्प-कल्प के विजयी हैं* ।
° महावीर कभी ऐसे नहीं कह सकते कि बाबा हमारे पास *माया को न भेजो – कृपा करो,* आशीर्वाद करो, शक्ति दो, क्या करूं कोई रास्ता दो….यह भी कमजोरी है। महावीर तो *दुश्मन का आह्वान करते हैं कि आओ और हम विजयी बनें।*

3. बाप का *बड़ा मीठा और वन्डरफुल पार्ट* है। क्या? (खुद बाबा के शब्दों में)
° बहुत समय से याद करते आये हो तो *बाप भी खुशी से आता* है। जानते हैं मैं जाता हूँ बच्चों के पास (पराई राजधानी में)। जो बच्चे काम चिता पर बैठ जल गये हैं उन्हों को अपने *घर भी ले आऊं* और फिर *राजाई में भेज* दूँ। उसके लिए *ज्ञान से श्रृंगार* भी करूँ।
° सारी पुरानी दुनिया को *हेविन बनाने* आते हैं और *ज्ञान देते* हैं। (ज्ञान-सागर जरूर ज्ञान देने का कर्तव्य करेंगे।) फिर *तुमसे कराते* भी हैं कि औरों को भी मैसेज दो। मैं *श्रीमत देता* हूँ।
° बाप कहते हैं – बच्चे, मैं आकर *सतयुगी आदि सनातन देवी-देवता धर्म* की स्थापना करता हूँ, जिसमें *100 प्रतिशत सुख-शान्ति-पवित्रता* सब है इसलिए उनको हेविन कहा जाता है। वहाँ दु:ख का नाम नहीं है। बाकी जो भी सब धर्म हैं उन सबका विनाश कराने निमित्त बनता हूँ। सतयुग में होता ही *एक धर्म* है। वह है *नई दुनिया* । पुरानी दुनिया को खत्म कराता हूँ। ऐसा धन्धा तो और कोई नहीं करते हैं।
° सब आत्मायें भी मच्छरों मिसल जायेंगी। शिव की बरात है ना। तुम सब हो ब्राइड्स। *मैं ब्राइडग्रूम आया हूँ सबको ले जाने।* तुम छी-छी हो गये हो इसलिए श्रृंगार कर साथ ले जाऊंगा। जो श्रृंगार नहीं करेंगे तो सज़ा खायेंगे। जाना तो है ही।

4. और बाबा मुख्य हमे क्या *पुरुषार्थ* करने लिए कहते? (3)
° कहते हैं हे बच्चे *मामेकम् याद* करो तो विकर्म विनाश होंगे और चले जायेंगे अपने घर। फिर बड़ी यात्रा होगी अमरपुरी की।
° *आत्मा समझ* बाबा को याद करो।
° बाप सबके लिए कहते हैं कि अब *देह का भान छोड़* मुझे याद करो तो विकर्म विनाश होंगे।

5. जबकि बाबा हमारे पास इतनी खुशी से आते, तो हमें *क्या करना* है? (5)
° बच्चे भी *बाप से जास्ती खुश* होने चाहिए। बाप जबकि आये हैं तो *उनका बन* जाना चाहिए। उनको बहुत *लव* करना चाहिए।
° आत्मा *(अपने से) बात* करती है ना। बाबा 5 हज़ार वर्ष बाद ड्रामा अनुसार आप आये हैं, हमको बहुत खुशी का खज़ाना मिल रहा है। बाबा आप हमारी *झोली भर* रहे हैं, हमको अपने *घर शान्तिधाम में ले चलते* हैं फिर *राजधानी में भेज* देंगे। कितनी अपार खुशी होनी चाहिए।
° *खुशी होती* है कि हम पूज्य से पुजारी बने, अब फिर पूज्य बनते हैं। कितनी *खुशियाँ मनाते* हैं।
° बच्चों को *नशा* बहुत रहना चाहिए। बाप पर बहुत लव होना चाहिए।
° औरों को भी *मैसेज दो* । (देवी-देवता धर्म के पत्ते, शिव-देवताओं के भक्त आयेंगे।)

6. हर एक लिखत में यह जरूर लिखना है – _________ ऐसे समझाते हैं। बाबा कहते हैं एक-एक पेज़ में जहाँ-तहाँ नाम जरूर हो। _______ हम बच्चों को समझाते हैं। मुख्य-मुख्य प्वाइंट किताब में ऐसी क्लीयर लिखी हुई हो जो पढ़ने से आपेही ज्ञान आ जाए। _____ भगवानुवाच होने से पढ़ने में मज़ा आ जायेगा। रंगीन चित्र का किताब ऐसा हो जो मनुष्य देखकर _____ हो जाएं।
°शिवबाबा, शिवबाबा, शिव, खुश

7. बाबा ने आज कौन-से *चित्रों* को याद किया? (3)
° ( *त्रिमूर्ति* ) यह तो उनका रथ है, यह बहुत जन्मों के अन्त का जन्म है। इनमें प्रवेश किया है। ब्रह्मा द्वारा यह ब्राह्मण बनते हैं फिर मनुष्य से देवता बनते हैं। चित्र कितना क्लीयर है।
° भल *अपना भी साधारण और डबल सिरताज वाला चित्र* हो। योगबल से हम ऐसे बनते हैं। ऊपर में शिवबाबा। उनको याद करते-करते मनुष्य से देवता बन जाते हैं।)
° *गीता के भगवान* वाला चित्र है मुख्य।

8. बाबा स्वदर्शन चक्रधारी तो ठहरे। साथ में बाबा को *कमल फूल समान* भी बनना है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (बाबा तो ऐसे नहीं कहेंगे कि मुझे कमल फूल समान बनना है। सतयुग में तुम कमल फूल समान ही रहते हो।)

9. सतयुग में *दीपमाला* आदि लक्ष्मी को बुलाने के लिए होती है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (दीपमाला होती है *कारोनेशन पर* ।)

10. अभी हर कर्म _____ -युक्त करना है, _____ को ही दान देना है। पाप आत्माओं से अब कोई पैसे आदि की लेन-देन नहीं करनी है। ______ -बल से सब पुराने हिसाब-किताब चुक्तू करने हैं।
°ज्ञान, पात्र, योग

11. बाबा क्यों कहते कि *योगबल से हिसाब-किताब चुक्तू करो*? (2)
° नहीं तो सजा होती जैसेकि जन्म-जन्मान्तर का दु:ख भोग रहा हूँ। वह दु:ख की फीलिंग ऐसी होती है। *जन्म-जन्मान्तर के पापों की सज़ा* मिलती है।
° जितनी सज़ायें खायेंगे उतना *पद कम* हो जायेगा इसलिए बाबा कहते हैं योगबल से हिसाब-किताब चुक्तू करो। याद से जमा करते जाओ। नॉलेज तो बहुत सहज है।

12. प्रजापिता ब्रह्मा के इतने बच्चे हैं, तो जरूर यहाँ _______ होते होंगे। यही पतित से पावन _______ बनते हैं इसलिए फिर ब्रह्मा देवता कहा जाता है। जिससे देवी-देवता ______ स्थापन होता है। यह बाबा भी देवी-देवता धर्म का पहला _____ बनता है।
°एडाप्ट, फरिश्ता, धर्म, प्रिन्स

13. कौन-कौन सी रोचक *पॉइंट्स* भी सुना सकते? (8)
° *कल्प पहले भी ऐसे हुआ था।* यह सेमीनार आदि भी ऐसे ही कल्प पहले हुए थे। ऐसी प्वाइंट्स निकली थी। आज का दिन जो पास हुआ अच्छा हुआ फिर कल्प बाद ऐसे ही होगा।
° जिस्मानी पण्डे हो। अब *रूहानी पण्डे* बनो।
° *एक ही समय है* जबकि तुम आदि-मध्य-अन्त को जानते हो।
° सन्यासियों का है हठयोग। यह है *राजयोग* ।
° पैगम्बर वा *मैसेन्जर सिर्फ एक बाप* को कहेंगे। बच्चे तो सब हैं ऑल ब्रदर्स। और सब धर्म स्थापन करने आते हैं। बाप तो स्थापना और विनाश दोनों कराते हैं।
° *ब्रह्मा सो विष्णु, विष्णु सो ब्रह्मा* (दोनों यहाँ हैं। ब्रह्मा बोल सकते, विष्णु बोल सकते हैं? सूक्ष्मवतन में क्या बोलेंगे। यह सब समझने की बातें हैं।)
° बाबा ने कहा था मैगज़ीन में भी डालो – यह लड़ाई लगी, *नथिंग न्यु* । 5 हज़ार वर्ष पहले भी ऐसे हुआ था।
° ब्राह्मण देवी-देवता नम: कहते हैं। कौन से ब्राह्मण? तुम ब्राह्मणों को भी समझा सकते हो *ब्रह्मा की औलाद कौन* हैं?

Answers from Sakar Murli 13-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 13-08-2020*

1. जबकि सबसे अक्लमंद ऊंच ते ऊंच सुप्रीम टीचर निराकार भगवान पढ़ाते, हमे उत्तम ते उत्तम पुरुष लक्ष्मी-नारायण पैराडाइज़ के मालिक बनाने (प्योरिटी, पीस, प्रासपर्टी से सम्पन्न), तो बाबा ने कहा एकदम रोमांच खड़े हो जाने चाहिए। *फिर क्या पुरुषार्थ करना है?* (4)
° सयाना बन एकदम इस *पढ़ाई में लग जाना* चाहिए।
इसमें बहुत *अटेन्शन* देना है। *पूरी रीति पढ़ना* चाहिए ना।(आत्मा ही पढ़ती है)
° उनकी *मत* पर चलना चाहिए। बाप कहते हैं *पवित्र* रहो।
° और मुझे *याद* करो। (आत्मा समझ बाप को याद करो। छोटे बच्चे को माँ-बाप के सिवाए दूसरा कोई उठाते हैं तो उनके पास जाते नहीं। तुम भी बेहद के बाप के बने हो तो और कोई को देखना पसन्द भी नहीं आयेगा, फिर कोई भी हो।)
° *दैवीगुण धारण* किये तो तुम यह बन जायेंगे।

2. बाबा हमे *डबल सिरताज* राजाओं का राजा बनाते। कौन-से दो ताज? (और कैसे मिलते?)
° *लाइट का ताज* (मनमनाभव)
° *रतन जड़ित ताज* (मध्याजीभव)।
° (निश्चय हो जाता है हम इस पढ़ाई से विश्व का मालिक बनते हैं)

3. सिंगल ताज वाले राजाओं को *गॉड-गॉडेज* कहेंगे। _(सही / गलत)_
° *गलत*
° जो पवित्र डबल सिरताज थे उन्हों को बिगर ताज वाले अपवित्र पूजते हैं। वो हो गये *पुजारी राजायें* । उनको तो गॉड-गॉडेज नहीं कहेंगे क्योंकि इन *देवताओं की पूजा करते* हैं। (आपेही पूज्य, आपेही पुजारी, पतित बन जाते हैं तो रावण राज्य शुरू हो जाता है।)

4. वरदान में बाबा ने *सेवा की सफलता* लिए कौन-सी विधि सुनाई? (2)
° जब आप बच्चे हिम्मतवान बनकर *संगठन में एकमत और एकरस* अवस्था में रहते वा *एक ही कार्य में* लग जाते हो तो स्वयं भी सदा प्रफुल्लित रहते और धरनी को भी फलदायक बनाते हो। (जैसे आजकल साइन्स द्वारा अभी-अभी बीज डाला अभी-अभी फल मिला, ऐसे ही साइलेन्स के बल से सहज और तीव्रगति से प्रत्यक्षता देखेंगे।)
° जब स्वयं *निर्विघ्न एक बाप की लगन में मगन, एकमत और एकरस* रहेंगे तो अन्य आत्मायें भी स्वत: सहयोगी बनेंगी और धरनी फलदायक हो जायेगी।

5. इस योग की ताकत से आत्मा _______ बन गोल्डन एज में चली जायेगी, फिर उनके लिए राज्य चाहिए। बोलो इस याद के बल से हम _____ बनते हैं। योगबल क्या चीज़ है, जिससे तुम विश्व पर _____ पाते हो और कोई थोड़ेही जानते। बाप ही पतित-पावन है। ______ दुनिया जरूर स्थापन करके ही छोड़ेंगे। ड्रामा अनुसार नूँध है। डीटी डिनायस्टी थी तो ______ थे।
°सतोप्रधान, पवित्र, विजय, पावन, पवित्र

6. यह है ______ परिवार। बाप के बच्चे हैं, पोत्रे और पोत्रियां हैं, बस और कोई ______ नहीं। नई सृष्टि इनको कही जाती है फिर देवी-देवता तो थोड़े बनेंगे। फिर आहिस्ते-आहिस्ते _______ होती है।
°ईश्वरीय, संबंध, वृद्धि

7. जो अभिमान को शान समझ लेते, वह _____ नहीं रह सकते।
°निर्मान

8. बाप को तुम भूल जाते हो, _____ नहीं आती है, वह नशा नहीं चढ़ता है। यहाँ से बहुत अच्छा रिफ्रेश हो जाते हैं फिर वहाँ ______ हो जाते हैं। तुमको तो अब बाप मिला है, तुम सारे सृष्टि चक्र को जानते हो तो खुशी में ______ होना चाहिए।
°लज्जा, सोडावाटर, गदगद

9. आज बाबा ने *स्वदर्शन चक्र* कैसे फिराया? (2)
° अभी तुम बच्चों को मालूम पड़ा है – असुल में हम आत्मायें बाप के साथ अपने घर में रहती हैं। बाप का बनने से अभी तुम स्वर्ग के मालिक बनते हो फिर बाप को भूल आरफन बन पड़ते हो। फिर परमपिता परमात्मा प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा नई सृष्टि ब्राह्मणों की रचते हैं। (84 जन्मों की कहानी!)
° आत्मा ही सीखती है। बाप तुम बच्चों को *आत्म-अभिमानी* बनाते हैं। तुम आत्मा हो मूलवतन की रहने वाली। तुम आत्मा कितनी छोटी हो। अनेक बार तुम आई हो पार्ट बजाने। मैक्सीमम हैं ही 84 जन्म।

10. बाबा ने कहा इंगलिश में भी तुम लोग अच्छी रीति समझा सकते हो। जो इंगलिश जानते हैं तो ट्रांसलेशन कर फिर समझाना चाहिए। बाबा ने आज कौन-से *अंग्रेजी शब्द* प्रयोग किये? (4)
° फादर *नॉलेजफुल* है, उनको ही यह *नॉलेज* है कि सृष्टि का चक्र कैसे फिरता है। यह है पढ़ाई। ( *स्प्रीचुअल* नॉलेज)
° योग को भी बाप की याद कही जाती है, जिसको अंग्रेजी में *कम्यूनियन* कहा जाता है। बाप से कम्यूनियन, टीचर से कम्यूनियन, गुरू से कम्यूनियन।
° यह है *गॉड फादर* से कम्यूनियन। खुद बाप कहते हैं मुझे याद करो और कोई भी देहधारी को याद नहीं करो।
° यह लक्ष्मी-नारायण *पैराडाइज़* / गोल्डन एज के मालिक थे ना, *प्योरिटी, पीस, प्रासपर्टी* सब थी।

11. जब यह ज्ञान अच्छे से फॉरेन में सुनाएंगे, तो वह खुश होकर *क्या कहेंगे*? (6)
° तुमको वहाँ 1000 रूपया मिलते हैं, हम आपको 10-20 हज़ार रूपया देंगे। *हमको भी नॉलेज सुनाओ।*
° यह बातें अच्छी रीति समझाओ तो वह *चक्रित हो जायेंगे। कहेंगे यह हम सुनें तो सही।* हम बाप से पढ़ते हैं, यह बातें सुनकर चक्रित हो जायेंगे।
° कहेंगे *यह तो स्प्रीचुअल नॉलेज है।* यह तो डायरेक्ट उस सुप्रीम फादर का बच्चा है, उनसे राजयोग सीख रहा है
° सुनकर कहेंगे *ओहो! यह तो गॉड फादर के बच्चे हैं।*
° समझेंगे यह तो *कोई अथॉरिटी है*, इनमें गॉड ने आकर प्रवेश किया है।
° ऐसी-ऐसी बातें समझाने से बहुत *वन्डर खायेंगे* । (ऐसी-ऐसी बातें बताते रहेंगे तो वह खुश होंगे। ऐसे-ऐसे बैठ समझायें तो कितना मज़ा कर दिखायें)

12. बाबा ने कहा बात करने में होशियार चाहिए, स्पीड भी अच्छी हो। तो *फॉरेन वालों को कौन-कौन सी बातें* सुना सकते? (7)
° एक बाप को ही कहते हो लिबरेटर, गाइड *जबकि वही लिबरेटर है तो फिर उनको ही याद करना चाहिए* (धर्म स्थापक भी उनकी ओर इशारा करते)
° *पैराडाइज़ की स्थापना हो रही* है, उसके लिए यह महाभारत लड़ाई भी है। बाप कहते हैं मैं तुमको राजाओं का राजा डबल सिरताज बनाता हूँ। *प्योरिटी, पीस, प्रासपर्टी सब थी*। विचार करो, कितने वर्ष हुए? *क्राइस्ट से 3 हज़ार वर्ष पहले* इन्हों का राज्य था।
° *फिर अपने समय पर धर्म स्थापक आकर* तुम्हारा धर्म स्थापन करेंगे।
° बोलो बाकी सब आत्मायें स्वीट होम में रहती हैं। बाप ही ले जाते हैं, सर्व का सद्गति दाता वह बाप है। उनका *बर्थ प्लेस है भारत।* यह कितना बड़ा तीर्थ हो गया।
° बोलो हम इस *याद के बल से पवित्र* बनते हैं और सबका विनाश हो जायेगा। नैचुरल कैलेमिटीज भी आने वाली हैं। हमारा रियलाइज़ किया हुआ है और दिव्य दृष्टि से देखा हुआ है। यह सब खलास होना है।
° यह बताओ कि *आत्माओं का बाप* कौन है। भगवान तो *निराकार* ही है। वही इस पतित दुनिया को *पावन बनायेंगे* ।
° तुम जानते हो सबको तमोप्रधान बनना ही है। पुनर्जन्म सबको लेना है, *वापिस कोई भी जा नहीं सकते।* ऐसी-ऐसी बातें समझाने से बहुत वन्डर खायेंगे।

Answers from Sakar Murli 12-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 12-08-2020*

1. कहा जाता *अन्तर्मुखी सदा सुखी* । ऐसा क्यों? तो हमें क्या करना है?
° (क्योंकि) जो बच्चे सदा *अन्तर्मुखी भव का वरदान प्राप्त कर लेते, वह बाप समान सदा सुख के सागर में लवलीन रहते* हैं। सुखदाता के बच्चे स्वयं भी *सुख दाता* बन जाते हैं। सर्व आत्माओं को सुख का ही खजाना बांटते हैं।
° (क्या करना) तो अब *अन्तर्मुखी बन ऐसी सम्पन्न मूर्ति बन जाओ* जो आपके पास कोई भी किसी भी भावना से आये, अपनी भावना सम्पन्न करके जाये। जैसे बाप के खजाने में अप्राप्त कोई वस्तु नहीं, वैसे आप भी *बाप समान भरपूर* बनो।

2. रूहानी _____ में रहो तो कभी भी अभिमान की फीलिंग नहीं आयेगी।
°शान

3. बेहद-बाबा हम बच्चों से बात ऐसे करते हैं जैसे हम आपस में करते। तो जबकि बाबा ने हमे आत्म-अभिमानी बनाकर पार्टधारी की स्मृति दे घर जाने का रास्ता बताया है (की सतोप्रधान बनना है), तो *अब हमें प्रैक्टिकल में क्या करना है?* (5)
° जो *श्रीमत* (ईश्वरीय मत, डायरेक्शन) बाबा देते, उस पर सपूत बन चलना हैं।
° तो अब श्रीमत पर *कर्म श्रेष्ठ* करना चाहिए (अर्थात्‌ दैवीगुण धारण करने हैं।) भोजन भी शुद्ध, किसी को भी दु:ख न दो लड़कर। विकार में मत जाओ। (बाबा सुधारने आये हैं तो अच्छी रीति सुधरना चाहिए ना।)
° बहुत *खुशी में हर्षित* रहना चाहिए।
° बाप कहते हैं अपने को *आत्मा समझ बाप को (मामेकम्) याद करो* और सर्व संबंधों को हल्का करते जाओ। *8 घण्टा* याद रखनी है। *मैं बाप का बच्चा हूँ*, यह नहीं भूलो।
° सबको *बाप का परिचय* देना है।

4. बाप कहते हैं मेरा ऐसा पार्ट है जो *बीमार को अच्छा* कर दूँ। _(सही / गलत)_
° *गलत*
° हमारा पार्ट है रास्ता बताना कि तुम पवित्र कैसे बनो? पवित्र बनने से ही तुम घर में भी जा सकेंगे। राजधानी में भी जा सकेंगे।
° अर्थात्‌ बाबा बीमारी के बीज (अपवित्रता) को ही समाप्त करने के कर्म हमें सिखलाते है। (यही सच्चा सदाकाल का समाधान है!)

5. हमारा *धन्धा* क्या है? इसमे *क्या समझाना* है?
° हमारा भी वही धन्धा है – सबको रास्ता बताना, *अन्धों की लाठी* बनना।
° (चित्र भी तुम्हारे पास हैं।) तुम तो फिर समझाते हो तुम *आत्मा* हो, शरीर नहीं हो। बाप कहते हैं तुम सभी आत्मायें *भाई-भाई* हो ना। गॉड *फादर* कहते हो ना। तो कभी भी आपस में *लड़ना-झगड़ना नहीं* चाहिए। *वर्सा* दादे से लेना है इसलिए दादे को ही *याद* करते हैं।

6. बाप _____ का ______ है, सब झगड़ों से छुड़ा देते हैं। तुम बच्चों को _______ खुशी बहुत होनी चाहिए। हम बाबा के बच्चे बने हैं। बाप ने हमको ______ किया है वर्सा देने।
°वकीलों, वकील, आन्तरिक, एडाप्ट

7. बाबा हम ब्राह्मण कुल भूषण को *देवताओं से भी ऊंच* कहते। क्यों?
° तुम भारत की बहुत *ऊंच सेवा करते* हो। फिर तुम पूज्य बन जायेंगे। अब *पुजारी को पूज्य, कौड़ी से हीरे जैसा बना रहे* हैं।

8. बाबा ने हमे *आत्म-अभिमानी* बनाने लिए कौन-सी बातें सुनाई? (3)
° निराकार भगवानुवाच – निराकारी आत्माओं प्रति। असुल तुम *निराकार* हो फिर साकारी बनते हो। साकार बिगर तो आत्मा कुछ कर ही नहीं सकती। आत्मा शरीर से निकल जाती तो *चुरपुर* कुछ भी हो नहीं सकती। आत्मा फौरन जाकर दूसरे *शरीर में अपना पार्ट* बजाती है। (इन बातों को अच्छी रीति समझो, अन्दर घोटते रहो।)
° हम *आत्मा बाबा से वर्सा लेते* हैं। वर्सा मिलता है सतयुग का।
° यह समझना है – मैं आत्मा हूँ, बाबा आया हुआ है, हमको *पवित्र बनाकर अपने घर ले जाते हैं। फिर राजधानी* में आ जायेंगे।

9. वह सत्य चैतन्य ज्ञान-सागर *स्वदर्शन चक्रधारी बाबा* हमे क्या कहते? (2)
° बाप कहते हैं वास्तव में *मैं हूँ स्वदर्शन चक्रधारी।* आत्मा में सारे सृष्टि चक्र का ज्ञान आ जाता।
° बाबा भी परमधाम में रहने वाला है। बाप आकर *अपना परिचय देते* हैं। मैं पतित-पावन आया हूँ तुम्हारे पास। मुझे बुलाया ही है कि आकर पतित से पावन बनाओ, लिबरेट करो। बाप कहते हैं मैं आता ही हूँ तब जब रात पूरी होती है, तो दिन बनाने आता हूँ। दिन में 21 जन्म फिर रात में 63 जन्म, आत्मा ही भिन्न-भिन्न जन्म लेती है। तुमको भी स्वदर्शन चक्रधारी बनाता हूँ।

10. बाबा हमें राजयोग सिखाते भविष्य 21 जन्मों के लिए। साथ मे सच्ची गीता, सच्ची रामायण सुनाते। तो आज *सच्ची रामायण* के विषय पर कौन-सी बेहद बाते सुनाई? (3)
° एक राम-सीता की बात नहीं थी। इस समय तो *सारी दुनिया लंका है*। चारों ओर पानी है ना। यह है बेहद की लंका, जिसमें रावण का राज्य है।
° एक बाप है ब्राइडग्रूम ( *राम* )। बाकी सब हैं ब्राइड्स ( *सीताएं* )।
° तुमको अब रावण राज्य से बाप छुड़ाते हैं। यह है शोक वाटिका। *सतयुग को कहा जाता है अशोक वाटिका* । (वहाँ कोई शौक होता नहीं। इस समय तो शोक ही शोक है। अशोक एक भी नहीं रहता।)

11. बाप का बनें तो *सबकुछ छोड़ यहाँ आकर बैठ जाना* है। _(सही / गलत)_
° *_गलत_*
° *सबको यहाँ तो नहीं बिठा सकते।* घर में रहकर भी याद करना है।
° नौकरी तो करनी ही है। कितने ढेर बच्चे हैं, इतने सब तो रह नहीं सकते। रहना सबको गृहस्थ व्यवहार में है।
° ऐसे भी नहीं यहाँ आकर हॉस्टल में रहना है। नहीं, गृहस्थ व्यवहार में बाल बच्चों के साथ रहना है। *बाबा पास आते ही हैं रिफ्रेश होने।*

12. बेहद का वैराग्य सिखलाने वाला चाहिए। बाप ने समझाया था यह _______ है, इनके बाद परिस्तान बनना है। यह _____ -लोक है। यह तो पराया रावण का छी-छी ____ है। बाप कहते हैं – बच्चे, अब नया _____ प्रवृत्ति मार्ग स्थापन हो रहा है। यह ज्ञान बाप ______ पर ही देते हैं क्योंकि अभी तुमको पतित से पावन होना है। अच्छा!
°कब्रिस्तान, मृत्यु, घाट, दैवी, संगम

Answers from Sakar Murli 07-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 07-08-2020*

1. _____ की विशेषता से डायमण्ड की चमक को बढ़ाओ।
°सत्यता

2. तुम अभी सच्ची _____ कर रहे हो। स्वर्ग में तुमको सब कुछ _____ माल मिलेगा।अभी तुम जानते हो बाप को ______ करते-करते हम गोल्डन एज में चले जायेंगे।
°कमाई, नया, याद

3. सतयुग में होते हैं *आत्म-अभिमानी*। _(सही / गलत)_
° *सही*
° अपने को (शरीर छोड़ते समय) आत्मा जानते हैं। हमारा शरीर बड़ा हुआ है, अब यह छोड़कर फिर छोटा लेना है।

4. तुम जानते हो वहाँ ( *सतयुग में* ) हमें क्या नहीं मिलेगा! क्या- *क्या मिलेंगा?* (3)
° *बेहद की बादशाही* , बेहद का सुख मिलता है।
° वहाँ कोई बीमारी आदि होती नहीं। *हेल्थ वेल्थ हैप्पीनेस सब* रहता है।
° *बुढ़ापा भी वहाँ बहुत अच्छा* रहता। खुशी रहती है। कोई प्रकार की तकलीफ नहीं रहती है। प्रजा भी ऐसी बनती है।

5. ज्ञान है बुद्धि के लिए भोजन। तो चिन्तन कर आपेही भोजन बनाना चाहिए। बाबा ने आज कहा त्रिमूर्ति शिव भगवानुवाच।
a) तो *शिवबाबा का पार्ट / सर्विस* सबसे ऊँच कैसे है?
b) ब्रह्मा और विष्णु का तो बड़ा पार्ट है 84 जन्मों का। (हम जानते हैं विष्णु का अथवा कृष्ण का अन्तिम 84 वां जन्म, जिसका नाम ब्रह्मा रखा है।) तो सबसे *जास्ती पार्ट किसका कहेंगे* – ब्रह्मा या विष्णु का?
c) शिवबाबा की रचना तो सब है फिर भी वास्तविक (डायरेक्ट) *बच्चा किसे कहेंगे* ? का
d) मनुष्य तो कह देते – *शंकर* आंख खोलते हैं तो विनाश हो जाता है। इस पर क्या सुनाया?
° a) *सारे झाड़ का बीजरूप है शिवबाबा*। जितनी शिव की रचना है उतनी ब्रह्मा की नहीं। सभी आत्मायें उनकी औलाद हैं। *बेहद की आत्माओं का कल्याण करते* । ब्रह्मा द्वारा स्वर्ग की स्थापना करते। तुम सबका हिसाब-किताब चुक्तू कराए तुमको पतित से पावन बनाए ले जाता हूँ।
° b) ब्रह्मा का भी बहुत थोड़ा समय पार्ट है। विष्णु का सतयुगी राजधानी में 8 जन्म पार्ट चलता है। ब्रह्मा का तो एक ही जन्म का पार्ट है। *विष्णु का पार्ट बड़ा कहेंगे*।
° c) यह दोनों बच्चे हैं शिव के। वास्तव में बच्चा एक है (एडाप्टेड)। हिसाब करेंगे तो *ब्रह्मा है शिव का बच्चा* । बाप और दादा।
° d) सब कुछ *प्रैक्टिकल* में चाहिए ना। सिर्फ आंख खोलने से थोड़ेही हो सकता।

6. *ब्रह्मा बाबा* के कौन-कौन से नाम आज मुरली में सुनाये? (6)
° ब्रह्मा, आदि देव, एडम, आदम, प्रजापिता, अलौकिक फादर।

7. तुम यहाँ मेहनत कर रहे हो _____ बनने के लिए। तुम बच्चे ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण बन फिर _____ बन जाते हो, विष्णुपुरी के मालिक। अब बाप समझाते हैं – मैं आया हूँ पत्थरबुद्धियों को _____ -बुद्धि बनाने। दिन-प्रतिदिन बाप तुम बच्चों को ______ बुद्धि बनाते हैं। तुम बच्चों को तो बड़ी _____ में नाचना चाहिए – हमको पढ़ाते कौन हैं? शिवबाबा। त्रिमूर्ति शिव।हम बाप से वर्सा ले रहे।
°पावन, देवता,पारस, रिफाइन, खुशी

8. प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा शिवबाबा स्थापना कर रहे हैं। तो हम ब्राह्मणों का *धंधा* क्या है? (2)
° तुम ब्राह्मण *श्रीमत पर सेवा* करते हो।
° सिर्फ मनुष्यों को *रास्ता बताते* हो – मुक्ति और जीवनमुक्ति को पाना है तो ऐसे पा सकते हो। दोनों चाबी हाथ में हैं। तुम्हारा सारा दिन यही धंधा है।
° तुम्हारा धन्धा है रचना के आदि-मध्य-अन्त को जानना और किसको मुक्ति-जीवनमुक्ति का रास्ता बताना।

9. तुम किसको भी समझाओ तो हमेशा *योग* अक्षर बोलो। _(सही / गलत)_
° *गलत* (योग अक्षर रांग है। टीचर को स्टूडेन्ट की *याद* रहती है। फादर है सुप्रीम सोल। तुम आत्मा सुप्रीम नहीं हो। तुम हो पतित। अब बाप को याद करो। टीचर को, बाप को, गुरू को याद किया जाता है।)

10. गुरू लोग मंत्र देते। तो हमारा सतगुरू *बाबा कौन-सा मंत्र देते* ? (2)
° उनका मंत्र एक ही है – *मनमनाभव* ।
° फिर क्या होगा? *मध्याजी भव* । तुम विष्णुपुरी में चले जायेंगे।

11. पुरुषार्थ नहीं होता तो कोई हर्जा नहीं – *प्रजा तो प्रजा ही सही*। _(सही / गलत)_
° *गलत* (फिर तो ऐसे होंगे जैसे यहाँ के भील। सूर्यवंशी लक्ष्मी-नारायण बनना है तो फिर इतना *पुरूषार्थ करना चाहिए*। अच्छा!)

12. *अमरलोक* कैसे कह सकते?
° आत्मा तो अविनाशी है, वह कभी मरती नहीं। *एक शरीर छोड़ फिर दूसरा लेकर पार्ट बजाती है*। उनको मृत्युलोक नहीं कहा जाता। वह है ही अमरलोक। चोला सिर्फ बदलती है। यह बातें बड़ी सूक्ष्म समझने की हैं।

13. सबके सहयोगी रहते कम्पेनियन सिर्फ एक को बनाने से क्या *प्राप्ति* होती? (3) तो अब *क्या करना* है? (2)
° (प्राप्ति) *मायाजीत, मोहजीत, विजयी* रहेंगे। (अगर जरा भी किसी में मोह होगा तो तीव्र पुरूषार्थी के बजाए पुरूषार्थी बन जायेंगे)
° इसलिए क्या भी हो, कुछ भी हो *खुशी में नाचते रहो* , मिरूआ मौत मलूका शिकार – इसको कहते हैं नष्टोमोहा। ऐसा *नष्टोमोहा* रहने वाले ही विजय माला के दाने बनते हैं।

14. गाया भी जाता है – सेकेण्ड में जीवनमुक्ति। यह *तुरन्त मिल जाती*। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे थोड़ेही मिल जाती है, यह *समझा जाता है* – बच्चे बनेंगे तो मिलेगी जरूर)

15. पेट कोई जास्ती नहीं खाता है – एक मनुष्य का पेट 4-5 रूपया, एक मनुष्य का पेट 400-500 रूपया। पैसा बहुत है तो ____ हो जाती है। गरीबों को पैसे ही नहीं तो _____ भी नहीं। वह सूखी रोटी में ही खुश होते हैं। बच्चों को जास्ती _____ के हंगामें में भी नहीं जाना चाहिए। ____ का शौक नहीं रहना चाहिए।
°हबच, हबच, खान-पान,खाने

16. *गन्धर्वी विवाह* किया यह खुशी की बात है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (यह तो *कमज़ोरी है*। कुमारी अगर कहे हम पवित्र रहना चाहते हैं तो कोई मार थोड़ेही सकते हैं। ज्ञान कम है तो डरते हैं।)

Answers from Sakar Murli 10-08-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 10-08-2020*

1. जो *श्रेष्ठ वेला में जन्म लेने वाले भाग्यशाली बच्चे* हैं, उनकी निशानियाँ क्या है? (3)
° वह जन्मते ही *अपने पन का अनुभव* करते हैं।
° वह जन्मते ही *सर्व प्रापर्टी के अधिकारी* होते हैं। (जैसे बीज में सारे वृक्ष का सार समाया हुआ है ऐसे नम्बरवन वेला वाली आत्मायें सर्व स्वरूप की प्राप्ति के खजाने के आते ही अनुभवी बन जाते हैं।)
° वे कभी ऐसे नहीं कहेंगे कि सुख का अनुभव होता, शान्ति का नहीं, शान्ति का होता सुख का व शक्ति का नहीं। *सर्व अनुभवों से सम्पन्न* होते हैं।

2. अपने प्रसन्नता की छाया से शीतलता का अनुभव कराने के लिए ____ और _____ बनो।
°निर्मल, निर्मान

3. हम बच्चों को किस बात की बहुत खुशी होनी चाहिए? (2)
° तुम बच्चों को कितनी खुशी होनी चाहिए। बाबा *कल्प-कल्प* आकर हमको *राजयोग* सिखलाए मनुष्य से *देवता* बनाते हैं।
° तुमको मालमू पड़ा है हम सो *देवी-देवता थे फिर अब बनते* हैं। यहाँ तुम आते ही हो सत्य नारायण की कथा सुनने, जिससे *नर से नारायण* बनेंगे। नारायण बनेंगे तो जरूर लक्ष्मी भी होगी। *लक्ष्मी-नारायण* होंगे तो जरूर उन्हों की *राजधानी* भी होगी ना।

4. इस पार से उस पार जाने के लिए याद की यात्रा में अच्छा ____ बनना है। माया के _____ नहीं खाने हैं। _______ याद करना है। याद नहीं करते तो घुटका खाते हैं।
°तैराक, घुटके, मामेकम्

5. *आज का गीत* 🎶 कौन-सा था? इसका कौन-सा *अर्थ* है, जो सिर्फ हम रूहानी ब्राह्मण-बच्चे ही जानते?
° *तुम्हें पाके हमने* जहान पा लिया है……..
° अब बेहद के बाप *शिवबाबा को तो पा लिया* है। बेहद के बाप से हमे (यहाँ शान्ति में बैठ, ब्रह्मा द्वारा) स्वर्ग-सुखधाम का वर्सा मिलता है, जिस *वर्से को कोई भी छीन नहीं सकता।*
° हम आदि सनातन *देवी-देवता धर्म के, पूज्य, विश्व के मालिक* होंगे। जहां एक धर्म, एक राज्य, *पवित्रता-शान्ति-सुख-सम्पत्ति-महल* सबकुछ होंगा, सतोप्रधान *नैचुरल ब्यूटीफुल* , आधाकल्प से भी जास्ती सुख (फिर भल ड्रामा-नाटक अनुसार रावण राज्य में वर्सा का नशा चला जाता, पुजारी बन जाता।)

6. जो भी मनुष्य मात्र हैं उन्हों को अपने शरीर के नाम का नशा है। क्यों? हम *आत्मा* के बारे में क्या-क्या जानते? (3)
° क्योंकि मनुष्य देह-अभिमानी हैं। हम आत्मा हैं यह जानते ही नहीं। (आत्मा सो परमात्मा कहते)
° (हम क्या जानते) *सुनती तो आत्मा है* । हम आत्मा हैं, न कि शरीर।
° हम आत्माओं का *स्वधर्म है ही शान्त*।
° *आत्मा सो विश्व के मालिक देवी-देवता बन रही*। हम सो देवता फिर क्षत्रिय घराने में आयेंगे (84 जन्मों का हिसाब)। फिर घर जाते फिर सुख का पार्ट।

7. वहाँ देवताओं को दाढ़ी आदि भी नहीं होती। क्लीनशेव होती है। _(सही / गलत)_
° *सही* (नैन-चैन से मालूम पड़ता है यह मेल है, यह फीमेल है। आगे चल तुमको बहुत साक्षात्कार होते रहेंगे।)

8. ज्ञान का सागर पतित-पावन तो ____ भगवान है। बाप आकर सब बातें समझाए अ- ____ बनाते हैं। बाप तो न कभी शरीर में आते हैं, न ___ करते हैं। न सिर्फ रास्ता बताते हैं परन्तु ____ भी बनाते हैं।
°निराकार, भुल, भूल, लाइफ

9. कोई को भी *दृष्टि से तीर* कब लगेगा?
° जब वह *जौहर* भरता (इसके लिए अभी याद की यात्रा में मस्त रहना है।)

10. दिन-प्रतिदिन तुम नई-नई प्वाइंट्स सुनते रहते हो। तो *प्वाइंट्स नोट करना* क्यों अच्छा है? (2)
° *भाषण करते समय रिहर्सल* करेंगे। यह-यह प्वाइंट्स समझायेंगे।
° *टॉपिक की लिस्ट* होनी चाहिए। आज इस टॉपिक पर समझायेंगे।

11. *’रावण कौन है, राम कौन है?’* सच क्या है, वह हम आपको बताते हैं। इस टॉपिक पर क्या समझानी है?
° रावण (5 विकार) तो आज सबमें हैं। इस समय रावण राज्य सारी दुनिया में है। बाप (निराकार राम) आकर फिर रामराज्य की स्थापना करते हैं। यह हार और जीत का खेल है।

12. कोई-कोई चार्ट दिखाते हैं – हम सारे दिन में *5 घण्टा याद में रहा*। बाबा ने क्या कहा?
° हम विश्वास नहीं करते, जरूर भूल हुई है। (याद के चार्ट को समझते ही नहीं)

13. कोई समझते हैं हम *जितना समय यहाँ पढ़ते हैं उतना समय तो चार्ट ठीक* रहता है। यह ठीक हैं?
° नहीं। बहुत हैं यहाँ बैठे हुए भी, सुनते हुए भी बुद्धि बाहर में कहाँ-कहाँ चली जाती है। पूरा सुनते भी नहीं हैं। इधर-उधर देखते रहते हैं। (इसलिए बाबा कहते हैं नये-नये को जल्दी यहाँ क्लास में आने की छुट्टी न दो। नहीं तो वायुमण्डल को बिगाड़ते हैं।)

14. *सबसे बड़ी भूल* कौन-सी है?
° *अपने स्वधर्म को भूलना* (अभी तुम्हें अभुल बनना है, अपने घर और राज्य को याद करना है।)

15. हम सृष्टि चक्र का राज़ समझते हैं। वह समझते हैं कि धर्म स्थापक गॉड के पास पहुँचे। कई फिर यह समझते हैं वह भी पुनर्जन्म लेते-लेते अभी तमोप्रधान है। *सच* क्या है? हम और कौन-सी *वन्डरफुल बात* जानते?
° (सच) जो भी धर्म स्थापन करने आते हैं वह सब पुनर्जन्म लेते-लेते अभी आकर तमोप्रधान बने हैं। अन्त में सारा झाड़ जड़जड़ीभूत अवस्था को पा लिया है। (इसलिए उनको गुरू नहीं कह सकते। वह धर्म स्थापन करने आते हैं। *सद्गति दाता सिर्फ एक है*।)
° (वन्डरफुल बात) धर्म स्थापक *फिर अपने समय पर धर्म स्थापन करने आयेंगे* ।