Answers from Sakar Murli 11-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 11-09-2020*

1. करनकरावनहार की _____ से भान और अभिमान को समाप्त करो।
°स्मृति

2. गृहस्थ व्यवहार में रहते कमल फूल समान, सहनशील, युक्तियुक्त रहना है। और बाबा ने कहा *योगयुक्त* बच्चे जिम्मेवारियों, माया, वा मन के *बन्धन से मुक्त* होंगे। तो ऐसी स्थिति बनानी कैसे है? (2)
° लौकिक जिम्मेवारी तो खेल हैं, इसलिए *डायरेक्शन प्रमाण खेल की रीति से हंसकर खेलो* तो कभी छोटी-छोटी बातों में थकेंगे नहीं। (अगर बंधन समझते हो तो तंग होते हो। क्या, क्यों का प्रश्न उठता है।)
° *जिम्मेवार बाप है आप निमित्त हो* । इस स्मृति से बन्धनमुक्त बनो तो योगयुक्त बन जायेंगे।

3. कोई-कोई को बहुत _____ होती है। ओहो! अब बाबा आये हैं, हम तो चले अपने ______ -धाम। बाप कहते हैं – अभी पूरी _______ स्थापन ही कहाँ हुई है। तुम इस समय हो ______ सन्तान फिर होंगे देवतायें। डिग्री कम हो गई ना। मीटर में प्वाइन्ट होती हैं, इतनी प्वाइन्ट कम।
°खुशी, सुख, राजधानी, ईश्वरीय

4. यह ड्रामा का _____ एक्यूरेट चल रहा है, जिसका जो _____ जिस घड़ी होना चाहिए, वही _____ हो रहा है, यह महीन बात यथार्थ रीति समझना है।
°खेल, पार्ट, रिपीट

5. आज मुरली में *परमात्मा* शिवबाबा की कौन-कौन सी *महिमा* सुनाई है? (3)
° *रूहानी बाप एक* को ही कहा जाता है। बाकी सब हैं आत्मायें। उनको *परम आत्मा* कहा जाता है। बाप कहते हैं मैं भी हूँ आत्मा। परन्तु मैं *परम सुप्रीम सत्य* हूँ। मैं ही *पतित-पावन, ज्ञान का सागर* हूँ। (बाप कहते हैं मैं आता ही हूँ भारत में, बच्चों को विश्व का मालिक बनाने।)
° *पारलौकिक बाप*
° बाप को कहा जाता है *रांझू रमज़बाज* । सब उनको याद करते हैं ना – हे *भगवान* दु:ख हरो, रहम करो, लिबरेट करो। वो *लिबरेटर* बाप सबका एक ही है।

6. बाबा ने कहा तुम ही मालिक थे ना। अब स्मृति आई है। बच्चों को स्मृति दिलाते हैं – तुम पहले-पहले सतयुग में आये फिर पार्ट बजाते, 84 जन्म भोग अब पिछाड़ी में आ गये हो। फिर बाबा ने हमे *आत्म-अभिमानी* कैसे बनाया? (6)
° तुम अपने को आत्मा समझो। *आत्मा अविनाशी है*, शरीर विनाशी है। आत्मा ही *देह के साथ आत्माओं से बात* करती है। (आत्म-अभिमानी हो करके नहीं रहते हैं तो जरूर देह-अभिमान है। मैं आत्मा हूँ, यह सब भूल गये हैं। कहते भी हैं पाप आत्मा, पुण्य आत्मा, महान् आत्मा।)
° *आत्मा जब शरीर में प्रवेश करती है तो नाम पड़ता* है क्योंकि शरीर से ही पार्ट बजाना होता है। (तो मनुष्य फिर शरीर के भान में आ जाते हैं, मैं फलाना हूँ।)
° अभी समझते – हाँ मैं आत्मा हूँ। हमने *84 का पार्ट* बजाया है। अभी हम आत्मा को जान गया हूँ। हम आत्मा *सतोप्रधान* थी, फिर अभी *तमोप्रधान* बनी हूँ।
° बाबा बार-बार तुम्हें कहते हैं पहले अपने को आत्मा समझो। *मैं बाबा का हूँ।*
° बाप कहते हैं – बच्चे, देह सहित देह के सब धर्मों को त्याग मुझे याद करो। अभी तुम सम्मुख बैठे हो। अपने को *देह नहीं समझना है, मैं आत्मा हूँ*।
° हम आत्मा *शान्त स्वरूप* हूँ। इस *शरीर द्वारा कर्म* करती हूँ। *शान्ति तो हमारा स्वधर्म* है। (बहुत कहते हैं मन की शान्ति हो। अरे आत्मा तो स्वयं शान्त स्वरूप है, उनका *घर ही है शान्तिधाम* । तुम अपने को भूल गये हो।)

7. हम आत्मा *सतोप्रधान* थी, फिर अभी *तमोप्रधान* बनी हूँ। इसके लिए बाबा ने कौन-सा *मिसाल* दिया?
° बाप आते ही तब हैं जब सब आत्माओं पर कट लगी हुई है। *जैसे सोने में खाद पड़ती है* ना। तुम पहले सच्चा सोना हो फिर चांदी, तांबा, लोहा पड़कर तुम बिल्कुल काले हो गये हो। (यह बात और कोई समझा न सके। सब कह देते हैं आत्मा निर्लेप है। खाद कैसे पड़ती है, यह भी बाप ने समझाया है बच्चों को। बाप कहते हैं मैं आता ही भारत में हूँ। जब बिल्कुल तमोप्रधान बन जाते हैं, तब आता हूँ।)

8. तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट ही है – यह ______ बनने की। बन गये फिर तो _____ की दरकार नहीं। बाप जो पढ़ाने वाला है, उनको _____ तो करना चाहिए। तुमको सब सहज कर दिया है। इन लक्ष्मी-नारायण ने भी ______ बनकर ही यह वर्सा लिया है, जो अभी तुम ले रहे हो।
°लक्ष्मी-नारायण, पढ़ाई, याद, आस्तिक

9. अब तुम्हारी बुद्धि में सीढ़ी का ज्ञान है। _____ कला, सर्व का भला। फिर धीरे-धीरे उतरती कला होती है। शुरू से लेकर इस चक्र को अच्छी रीति समझना है। इस समय तुम्हारी चढ़ती कला होती है क्योंकि बाप ____ है ना। बाबा _____ बच्चे कहते रहते हैं और बच्चे फिर बाबा-बाबा कहते रहते हैं।
°चढ़ती, साथ, मीठे-मीठे

10. तुम बच्चों का *प्रभाव* कब निकलेगा? अभी तक किस शक्ति की कमी है?
° जब *योग में मजबूत* होंगे तब प्रभाव निकलेगा। अभी वह जौहर नहीं है। *याद से ही शक्ति* मिलती है। ज्ञान तलवार 🗡️ में *याद का जौहर* चाहिए, जो अभी तक कम है। (अगर अपने को *आत्मा समझ बाप को याद* करते रहो तो बेड़ा पार हो जायेगा। यह सेकण्ड की ही बात है।)

11. आजकल कहते हैं एक राज्य, *एक धर्म, एक भाषा* हो। वन कास्ट, वन रिलीजन, वन गॉड। तो इस टॉपिक पर हम क्या लिख सकते?
° लिखना है। लक्ष्मी-नारायण का चित्र बनाते हो, ऊपर में लिख दो *सतयुग में जब इन्हों का राज्य था तो वन गॉड, वन डीटी रिलीजन था*

12. तुम्हारे पास कोई आते हैं, तो उन्हें *एक साथ समझा देना* है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (उनको अलग-अलग समझाओ, पहले एक-एक को अलग-अलग बैठ समझाते थे।)
° बहुत मनुष्य अटेन्शन नहीं देते। अटेन्शन उनका जायेगा जो हमारे *ब्राह्मण कुल का* होगा। और कोई नहीं समझेंगे इसलिए बाबा कहते हैं अलग-अलग बिठाओ फिर समझाओ। *फार्म भराओ* तो मालूम पड़ेगा क्योंकि कोई किसको मानने वाला होगा, कोई किसको। (सबको इकट्ठा कैसे समझायेंगे। अपनी-अपनी बात सुनाने लग पड़ेंगे।)

13. तुमसे कोई पूछे *रचयिता और रचना के आदि-मध्य-अन्त* को जानते हो? क्या कहेंगे?
° तो *तुम झट कहेंगे हाँ*, सो भी तुम सिर्फ अभी ही जान सकते हो फिर कभी नहीं। (बाबा ने समझाया है तुम ही मुझ रचयिता और रचना के आदि-मध्य-अन्त को जानते हो। लक्ष्मी-नारायण भी नहीं जानते। यह तो वण्डर है।)
° तुम कहते हो हमारे में ज्ञान है। तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट ही है – यह लक्ष्मी-नारायण बनने की।
( *बाप ही आकर अपना परिचय देते हैं और रचना के आदि-मध्य-अन्त का राज़ समझाते* हैं। बाप है बेहद का मालिक रचता।)

14. मन्दिरों आदि को देखते सदा यह स्मृति रहे कि यह सब हमारे ही _____ हैं। अब हम ऐसा ______ बन रहे हैं। बच्चों को तो अब ______आती होगी, रावण का चित्र कैसा बनाया है।
°यादगार, लक्ष्मी-नारायण, हंसी

15. इस समय सभी मनुष्य मात्र पुकारते-हे पतित-पावन आकर हमको पावन बनाओ। दु:ख हर कर सुख का रास्ता बताओ। कहते भी हैं भगवान जरूर कोई वेष में आ जायेगा। तो *बाबा कौन-से वेष में आये हैं?*
° अब कुत्ते-बिल्ली, ठिक्कर-भित्तर आदि में तो नहीं आयेंगे। गाया हुआ है *भाग्यशाली रथ पर आते हैं* । (बाप खुद कहते हैं मैं इस साधारण रथ में प्रवेश करता हूँ। यह अपने जन्मों को नहीं जानते हैं, तुम अभी जानते हो। इनके बहुत जन्मों के अन्त में जब वानप्रस्थ अवस्था होती है तब मैं प्रवेश करता हूँ।)

16. *ब्रह्मा बाबा* के कौन-से टाइटल्स आज मुरली में आये हैं? (5)
° *प्रजापिता* ब्रह्मा,
सगंमयुगी वन्डरफुल *अलौकिक बाप*, ग्रेट-ग्रेट ग्रैण्ड फादर, आदि देव, एडम….।

Answers from Sakar Murli 10-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 10-09-2020*

1. जहाँ अभिमान होता है वहाँ ______ की फीलिंग जरूर आती है।
°अपमान

2. *सतयुग की धन-समृद्धि* का बाबा ने बहुत सुन्दर वर्णन किया। याद कीजिए। (5)
° स्वर्ग में तो *सोने के महल* बनते हैं। वहाँ तो अथाह धन है।
° दीवारों में भी *हीरे-जवाहरात* लगे रहते हैं। हीरों की *जड़त* का शौक रहता है।
° वहाँ धन की कमी है नहीं। *कारून का खजाना* रहता है। (अल्लाह अवलदीन का एक खेल दिखाते हैं। ठका करने से महल निकल आते हैं। यहाँ भी दिव्य-दृष्टि मिलने से स्वर्ग में चले जाते हैं।)
° वहाँ प्रिन्स-प्रिन्सेज के पास *मुरली आदि सब चीज़ें हीरों की* रहती हैं।
° इन लक्ष्मी-नारायण की दुनिया तो *वाह-वाह* थी। हीरों-जवाहरातों के महल थे। (तुम जानते हो बरोबर हम स्वर्ग के मालिक थे। हमने ये सोमनाथ का मन्दिर बनाया था।)

3. बाबा ने आज आते ही हमे *आत्म-अभिमानी* बना दिया। कैसे (किन शब्दों से)? (6)
° रूहानी बच्चों प्रति अथवा रूहों प्रति, क्योंकि रूह अथवा *आत्मा सुनती है* कानों द्वारा। *धारणा आत्मा में* होती है। बाप की *आत्मा में भी ज्ञान* भरा हुआ है। बच्चों को आत्म-अभिमानी बनना है इस जन्म में।
° आत्मा है जरूर। आत्मा ही *शरीर में प्रवेश करती* है। (दु:ख भी आत्मा को ही होता है। कहा भी जाता है पतित आत्मा, पावन आत्मा)
° आत्मा *कितनी छोटी* है, उसमें कैसे *पार्ट भरा हुआ* है,
° *घड़ी-घड़ी* अपने को आत्मा समझना है।
° तुम बच्चे अब *चैतन्य* में हो, यह शरीर तो विनाशी है। मिट्टी का बनता है, मिट्टी में मिल जाता है। आत्मा तो *अविनाशी* है ना। (बाकी बैटरी डिस्चार्ज होती है।)
° *आत्मायें ही* बाप को *पुकारती* हैं (ओ बाबा हम डिस्चार्ज हो गये हैं, अब आप आओ, हमको चार्ज होना है। l

4. आत्म-अभिमानी बनाने के बाद, *याद की यात्रा* सिखाते हुए बाबा ने एक जबरदस्त मिसाल दिया। कौन-सा?
° जैसे देखो यह इमर्जेन्सी लाइट💡आई है, जो बैटरी पर चलती है। इसको फिर चार्ज करते हैं। *बाप है सबसे बड़ी पावर* । आत्मायें कितनी ढेर हैं। सबको उस पावर से भरना है। बाप है *सर्वशक्तिमान्* । हम आत्माओं का उनसे *योग लगाकर बैटरी को चार्ज* करना होता है।

5. ऐसे सर्वशक्तिमान् बाबा साथ योग लगाने से कौन-सी *प्राप्तियां* होती? (4)
° बाप कहते हैं मेरे साथ बुद्धि योग लगाओ तो तुम्हारी आत्मा में *पावर भरकर सतोप्रधान* बन जायेगी। पढ़ाई तो है ही कमाई। याद से तुम *पावन* बनते हो। *आयु बड़ी* होती है। *बैटरी चार्ज* होती है।

6. बाप से बहुत ____ होना चाहिए। बाबा हम आपके हैं, आपके साथ ही _____ जाने वाले हैं। जैसे पियर घर से ससुरघर वाले ले जाते हैं ना। यहाँ तुमको दो बाप मिले हैं, ______ कराने वाले। श्रृंगार भी अच्छा चाहिए अर्थात् सर्व- _____ सम्पन्न बनना है।
°लव, घर, श्रृंगार, गुण

7. कोई कह देते *ड्रामा आपेही पुरूषार्थ करायेगा।* तो बाबा ने आज कौन-सा वन्डरफुल उत्तर दिया?
° अच्छा *अब ड्रामा पुरूषार्थ करा रहा है ना, तो करो* । एक जगह बैठ तो नही जाना है। (जिन्होंने कल्प पहले पुरूषार्थ किया है, वह करेंगे।)

8. बाप ही विश्व की बादशाही देते हैं, उनको कितना _____ करना चाहिए। याद में न रहने से माया का ______ लग जाता है। सबसे कड़ा थप्पड़ है _____ का। युद्ध के मैदान में तुम ब्राह्मण ही हो ना, तो तुमको ही तूफान आयेंगे। परन्तु कोई ______ कर हार नहीं खाना।
°याद, थप्पड़ 👋, विकार, विकर्म

9. बाबा सदा कहते अपने से पूछो (कोई अवगुण तो नहीं, कर्मणा से तो कुछ नहीं करता? दु:ख तो नहीं देता?)। ऐसे *क्यों चेक* करना है? (2)
° (हमारा) *बाप है दु:ख हर्ता, सुख कर्ता*।
° *हम भी सबको सुख का रास्ता बताते* हैं।

10. *बच्चे तंग करते* हैं तो गुस्सा आ जाता है। क्या यह ठीक है?
° बच्चों को अच्छी रीति सम्भालेंगे नहीं तो खराब हो जायेंगे। कोशिश करके *थप्पड़ नहीं लगाओ।* (कृष्ण के लिए भी दिखाते हैं ना ओखली से बांधा। रस्सी से बांधो, खाना न दो। रो-रो कर आखिर कहेंगे अच्छा अब नहीं करेंगे।) बच्चा है फिर भी करेगा, *शिक्षा देनी है*। (बाबा भी बच्चों को शिक्षा देते हैं – बच्चे, कभी विकार में मत जाना, कुल-कलंकित नहीं बनना।)

11. जैसे गन्दगी में कीड़े, वैसे ही *मेरा-पन से माया* का जन्म होता है। तो *मायाजीत* कैसे बनना है? (3)
° माया-जीत बनने का सहज तरीका है-स्वयं को *सदा ट्रस्टी* समझो। ब्रह्माकुमार माना ट्रस्टी, ट्रस्टी की किसी में भी *अटैचमेंट नहीं* होती क्योंकि उनमें मेरापन नहीं होता। (गहृस्थी समझेंगे तो माया आयेगी और ट्रस्टी समझेंगे तो माया भाग जायेगी।)
° इसलिए *न्यारे होकर प्रवृत्ति के कार्य में* आओ तो मायाप्रूफ रहेंगे।

12. तुम जानते हो _____ है दिन, _____ है रात। फिर रात से होता है ____, फिर दिन शुरू होता है। बाप कहते हैं रात को भूलो, अब दिन को _____ करो। स्वर्ग है दिन, नर्क है रात। अभी तुम कितने समझदार बनते हो। तुम्हारी बुद्धि चली जाती है _____ में। वहाँ से हम आये हैं। यहाँ सूक्ष्मवतन का तो मालूम पड़ गया। ब्रह्मा-सरस्वती फिर लक्ष्मी-नारायण बनते हैं, इसलिए _____ को 4 भुजा दी हैं। अब स्मृति आई है कल्प-कल्प 84 का चक्र लगाया है, फिर वापिस जाते हैं। यह है _____-युग। अब ट्रांसफर होते हैं।
°ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, याद, घर, विष्णु, संगम

13. भल *वाणी* तो बहुत अच्छी-अच्छी चलाते हैं। साथ में क्या चाहिए?
° *याद* का जौहर नहीं तो वह ताकत नहीं रहती है। *जौहर*-दार तलवार नहीं।

14. बाबा ने कहा *बैज़ेस आदि भगवान ने खुद बनाये* हैं, तो इनका बहुत कदर हो। फिर बैज से समझाना क्या है?
° मुख से सिर्फ इतना बोलो कि *बाप को याद करो* तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे और तुम यह *लक्ष्मी-नारायण बन जायेंगे*।

15. भारतवासी जो खास *देवी-देवताओं के पुजारी* हैं, उनको क्या समझाना है?
° *सतयुग में देवी-देवता धर्म था* तो उनकी पूजा करते हैं। (जैसे धर्म स्थापक की महिमा करते, हम आदि सनातन देवी-देवता धर्म की महिमा करते हैं।)
° वह *किसने स्थापन किया*।

16. तुम तो हो सेना। तुम्हारा नाम ही है *प्रजापिता ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ* । फिर कोई भी अन्दर आये (सेंटर में), तो क्या समझा सकते? _(ब्रह्मा बाबा से संबंधित बातें) (3)_
° पहले-पहले तो ये पूछो कि किसके पास आये हो? कहेंगे हम *बी. के.* के पास आये हैं। अच्छा *ब्रह्मा* कौन है? प्रजापिता ब्रह्मा का नाम कभी सुना है? हाँ *प्रजापिता के तो तुम भी बच्चे* हो। सिर्फ जानते नहीं हो।
° ब्रह्मा भी जरूर किसी का बच्चा होगा ना। *उनके बाप का कोई शरीर देखने में नहीं आता* है। (ब्रह्मा-विष्णु-शंकर इन तीनों के ऊपर है *शिवबाबा*। त्रिमूर्ति शिव कहा जाता है तीनों का रचयिता। वह है आत्माओं का पिता।)
° अच्छा, फिर ब्रह्मा कहाँ से आया। बाप कहते हैं मैं *इनमें प्रवेश कर*, इनका *नाम रखता हूँ ब्रह्मा* । (शिवबाबा कहते हैं यह मेरा दिव्य अलौकिक जन्म हैं। तुम बच्चों को तो एडाप्ट करता। बाकी इनमें प्रवेश करता हूँ, बाजू में आकर बैठता हूँ। यह हो गये बाप-दादा।)

17. समझाने की _____ भी होती हैं ना। धीरे-धीरे तुम्हारी वृद्धि होती जायेगी। अभी बाबा बड़ी _____ खोल रहे हैं। इसमें समझाने के लिए _____ तो चाहिए ना। आगे चलकर तुम्हारे पास यह सब चित्र ______ के बन जायेंगे जो फिर तुमको समझाने में भी सहज हो।
°युक्तियाँ, युनिवर्सिटी, चित्र, ट्रांसलाइट

18. तुम्हारी *सच की नांव* को तूफान लगते हैं (कोई रिद्धि-सिद्धि दिखाते, अपने को भगवान कहते, हिलाने की कोशिश करते)। परन्तु अन्त में क्या होंगा?
° तुम जानते हो कि हमारी सच की नांव कभी डूब नहीं सकती। आज जो विघ्न डालते हैं, *वह कल समझेंगे* कि सद्गति का रास्ता यहाँ ही मिलना है। सबके लिए यह *एक ही हट्टी है*। (कोई का भी सच्चा कनेक्शन नहीं है। सच्चा कनेक्शन है ही तुम बच्चों का। बाप को याद करने बिगर ज्योत जगेगी कैसे? ज्ञान भी सिर्फ एक बाप ही देते हैं।)

19. जो चलते-चलते *भाग गये* , (शादी आदि), उनका क्या होगा?
° ड्रामा में पार्ट होगा तो आकर *फिर पुरूषार्थ करेंगे* , जायेंगे कहाँ। (बाप के पास ही सबको पूँछ लटकाना पड़ेगा। लिखा हुआ है भीष्मपितामह आदि भी अन्त में आते हैं। तुम भी हर 5 हज़ार वर्ष के बाद पार्ट बजाते हो, राजाई लेते हो, गंवाते हो। दिन-प्रतिदिन सेन्टर्स बढ़ते जाते हैं।)

20. *बेहद का वैराग्य* दिलाने लिए (ताकि हम योग द्वारा फूल चार्ज हो जाये), बाबा ने इस दुनिया के बारे में क्या सुनाया? (4)
° (झाड़ का मिसाल) सब मनुष्य जैसे *सूख गये हैं।* (सब एक-दो को दु:ख देते रहते हैं। अभी सबका शरीर खलास हो जायेगा। बाकी आत्मायें चली जायेंगी।)
° अभी यह पुरानी दुनिया है, *सब चीज़ों से ताकत निकल गई है*। सोना भी खानियों से नहीं निकलता है।
° कुछ भी नहीं है। *कर्जा ही कर्जा* लेते रहते हैं। अनाज, चीनी आदि *कुछ नहीं मिलता*। अब विश्व को बदलना है।
° बाप आते ही हैं सर्व की सद्गति करने। फिर *न तो यह जंगल रहेगा, न जंगल में रहने वाले रहेंगे*। अभी तुम हो संगमयुग पर, जानते हो कि यह पुरानी दुनिया *कब्रिस्तान* हुई पड़ी है। कोई मरने वाले से दिल थोड़ेही लगाते हैं, यह दुनिया तो गई कि गई। *विनाश* हुआ कि हुआ।

Answers from Sakar Murli 09-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 09-09-2020*

1. *फरिश्ता* कौन है? _(स्लोगन)_
° जो देह के सूक्ष्म अभिमान के सम्बन्ध से भी *न्यारा* है।

2. मनन शक्ति द्वारा *शुद्ध संकल्पों का स्टॉक* जमा करने से, वा *ज्ञान की गहराई* में जाकर अनुभवी मूर्त बनने से क्या प्राप्तियां है? (2)
° अनुभवी *सदा अविनाशी और निर्विघ्न* रहते हैं। (उन्हें कोई भी हिला नहीं सकता।)
° अनुभवी के आगे *माया* की कोई भी कोशिश सफल नहीं होती। अनुभवी *कभी धोखा नहीं* खा सकते। (इसलिए अनुभवों को बढ़ाते हुए हर गुण के अनुभवी मूर्त बनो।)

3. तुम्हारे इस *योगबल की करामात* क्या है? (3)
° यही योगबल है जिससे तुम्हारी *सब कर्मेन्द्रियाँ वश* हो जाती हैं।
° योग बल के सिवाए तुम पावन बन नहीं सकते। योगबल से ही *सारी सृष्टि पावन बनती* है इसलिए पावन बनने के लिए वा *भोजन को शुद्ध* बनाने के लिए याद की यात्रा में रहो। युक्ति से चलो। नम्रता से व्यवहार करो।

4. बाप आकर समझाते, तुम एकदम ऊंच चोटी थे। अब महसूस करते। स्वप्न में भी नहीं था कि बाप आकर क्या करेंगे। अब बाप मिला हुआ है तो समझते हो ऐसे *बाप के ऊपर तो न्योछावर* होना पड़े। यहां बाबा ने कौन-सा मिसाल दिया? (2)
° जैसे *पतिव्रता स्त्री* होती है तो पति पर कितना न्योछावर जाती है। (आगे चिता पर चढ़ती थी। बाबा तो ऐसी कोई तकलीफ नहीं देते। भल नाम ज्ञान चिता है परन्तु जलने करने की कोई बात नहीं। बाप बिल्कुल ऐसे समझाते हैं जैसे मक्खन से बाल।)
° यह *बाप तो ऐसा बील्वेड है* जिस पर कहते हैं जीते जी न्योछावर जायें क्योंकि *पतियों का पति* , बापों का बाप सबसे ऊंच है। (भूले-चूके भी बाप को नहीं भूलना है। कुछ भी हो जाये। गीत भी है तुम्हारे दर को कभी नहीं छोड़ेंगे। चाहे कुछ भी कहो। बाहर में रखा ही क्या है?)

5. थोड़ा भी कुछ समझकर जाते हैं तो *स्वर्ग में जरूर आ जायेंगे* । इसलिए पुरुषार्थ करने की कोई आवश्यकता नहीं। _(सही / गलत)_ _(2)_
° गलत (भल बाबा कहते हैं थोड़ा भी सुना है तो स्वर्ग में आ जायेंगे। परन्तु हर एक मनुष्य पुरूषार्थ तो ऊंच बनने का ही करते हैं ना। तो *पुरूषार्थ है फर्स्ट।*)
° राजाई में भी पोजीशन तो होती हैं ना। हर एक के *पुरुषार्थ अनुसार मर्तबा* होता है। (पुरुषार्थ बच्चों को करना है और प्रारब्ध भी बच्चों को पानी है।)

6. *सच्ची शान्ति* किसे कहेंगे?
° बाप कहते हैं बच्चे, तुम्हारा *स्वधर्म ही है शान्त*, इस शरीर से तुम कर्म करते हो। (जब तक शरीर धारण न करे तब तक आत्मा शान्त रहती है।)

7. रूहानी बाप आकर स्वर्ग नई दुनिया की स्थापना करते हैं। तो बाबा से *सब कुछ मांगना / पुछ लेना* है। _(सही / गलत)_ (4)
° गलत (तुम बाप से कोई भी प्रकार की *मांगनी नहीं* कर सकते हो। बाप सब कुछ समझाते हैं।)
° कुछ भी *पूछने की दरकार नहीं* रहती, सब कुछ आपेही समझाते रहते हैं। (बाप कहते हैं मुझे कल्प-कल्प इस भारत खण्ड में आकर क्या करना है, सो मैं जानता हूँ। रोज़-रोज़ समझाते रहते हैं। कोई भल एक अक्षर भी न पूछे तो भी सब कुछ समझाते रहते हैं!)
° बाप समझाते मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों तुम 5 हज़ार वर्ष बाद फिर से मिले हो। बाबा आपसे क्या मिलना है, यह तो *प्रश्न ही नहीं। आप तो हो ही हेविनली गॉड फादर।* (नई दुनिया के रचयिता। तो जरूर आपसे बादशाही ही मिलेगी।)
° तुमसे भी प्रश्न पूछते हैं, बाप सब कुछ बतलाते रहते हैं। सिर्फ उस पर *पूरा ध्यान देना है।*

8. ऐसा बापदादा जो स्वर्ग का मालिक बनाते हैं, *कितना साधारण* है। यहां यज्ञ इतिहास की कौन-सी वन्डरफुल सीखने योग्य बात सुनाई?
° शुरू में बच्चियाँ जब बीमार पड़ती थी तो *बाबा खुद उन्हों की सेवा करते थे* । अहंकार कुछ भी नहीं। (बापदादा ऊंच ते ऊंच है। कहते हैं जैसे कर्म मैं इनसे कराऊंगा, या करूंगा।)

9. बड़े से बड़ा आसामी है ______ और _______ । फिर तुम जानते हो _____ कौन है? तुम तो कहेंगे हम इनके घराने के हैं, यह लक्ष्मी-नारायण तो सतयुग में राज्य करते हैं। बच्चे समझ गये हैं, हमको तो यह ______ शोभते नहीं। हम अभी शिक्षा पा रहे हैं। पुरूषार्थ कर रहे हैं। फिर ऐसे बन जायेंगे। ______ फिराते-फिराते हम देवता बन जायेंगे। बच्चों को अभी बाप _____ रहे हैं।
°भगवान, प्रजापिता ब्रह्मा, विष्णु, अलंकार, स्वदर्शन चक्र, जगा

10. अभी तुम बच्चे जानते हो बाबा आया हुआ है। _______ भी कहती हैं – बाबा हर 5 हज़ार वर्ष के बाद हम आपसे स्वर्ग का वर्सा लेते हैं। हम अभी आये हैं स्वर्ग की _____ लेने। तुम जानते हो कि सभी एक्टर्स का अपना _____ है। तुम फिर इसी ही नाम रूप में आकर इसी समय बाप से वर्सा लेने का पुरूषार्थ करेंगे। कितनी अथाह ______ है। अच्छा, तुम तो ऐसे बने हो। फिर कोई को ______बनाते हो?
° बुढ़ियाँ, राजाई, पार्ट, कमाई, आप समान

11. माया उल्टा काम कराने की कोशिश करेंगी, परन्तु बच्चों को *दैवीगुण धारण करने हैं*। क्यों?
° *हम ईश्वरीय सन्तान हैं* वह है सबका बाप, सबके लिए शिक्षा यह एक ही देंगे। बाप शिक्षा देते हैं-बच्चे *स्वर्ग का मालिक बनना है।*

12. तो *पुलिस* वालों को क्या करना है?
° अपना पुलिस आदि का *काम भी करो* , नहीं तो डिसमिस कर देंगे। अपना काम तो करना ही है, आंख दिखानी पड़ती है। *जितना हो सके प्रेम से काम लो।* नहीं तो युक्ति से आंख दिखाओ। हाथ नहीं चलाना है। (मूल बात है पवित्र रहना।)

13. *बहुत नम्रता से* चलना है (क्रोध पर भी *फूलों की वर्षा* करो)। साथ-साथ पवित्रता के लिये कैसे समझा सकते? (2)
° बोलो, *आप तो भगवान (समान) हो* फिर यह क्या मांगते हो? (हथियाला बांधते समय कहते हैं – मैं तुम्हारा पति ईश्वर गुरू सब कुछ हूँ।)
° अब मैं पवित्र रहना चाहती हूँ, तो तुम रोकते क्यों हो। *भगवान को तो पतित-पावन कहते* है ना। *आप ही पावन बनाने वाले बन जाओ।* (ऐसे प्यार से नम्रता से बात करनी चाहिए।)

14. बाप आया है स्वर्ग की बादशाही फिर से देने। तो इनको *रिफ्यूज़ नहीं करना* है। विश्व की बादशाही रिफ्यूज़ की तो क्या होगा?
° खत्म। फिर *रिफ्यूज़ (किचड़े के डिब्बे) में जाकर पड़ेंगे*। यह सारी दुनिया है किचड़ा। तो इनको रिफ्यूज़ ही कहेंगे। दुनिया का हाल देखो क्या है।)

15. इस समय (कलियुग अन्त में) *पुण्य आत्मा* कौन-कौन हैं?
° वास्तव में *पुण्य आत्मा एक भी नहीं* है। सब हैं पाप आत्मायें। पुण्य करें तो पुण्य आत्मा बन जायें। पुण्य आत्मायें होती हैं सतयुग में। (हॉस्पिटल आदि बनाई सो क्या हुआ। सीढ़ी उतरने से थोड़ेही बच जायेगा। गिरते ही जाते हैं।)

Answers from Sakar Murli 08-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 08-09-2020*

1. देह-अभिमान का *दरवाजा*🚪 कौन-सा है, जिसे बन्द करना है?
° *मैं पन और मेरा पन”

2. जैसे बाप के संकल्प-बोल-नयनों में *सदा ही कल्याण की भावना*-कामना है, ऐसे हम बच्चों को क्या करना है?
° हमारे *संकल्प में* भी विश्व कल्याण की भावना-कामना भरी हुई हो। (कोई भी *कार्य करते* विश्व की सर्व आत्मायें इमर्ज हों।)
° *मास्टर ज्ञान सूर्य* बन शुभ भावना वा श्रेष्ठ कामना के आधार से *शान्ति व शक्ति की किरणें* देते रहो तब कहेंगे *विश्व कल्याणकारी* ।
° लेकिन इसके लिए सर्व *बन्धनों से मुक्त, स्वतंत्र* बनो।

3. अपनी दिल पर हाथ रखकर पूछो कि बाबा जो सुनाते हैं क्या हम सब पहले जानते थे। अभी जानते हो बाबा फिर से आकर हमको विश्व की _____ देते हैं। जो हमसे आधाकल्प तक कोई छीन नहीं सकते। तो बच्चों को कितनी _____ होनी चाहिए। बाप से कितना बार _____ लिया है। बाप _____ है, सत्य शिक्षक भी है, सतगुरू भी है। कब सुना ही नहीं।
°बादशाही, खुशी, राज्य, सत्य

4. बाप के पास आते हैं, _____ होने। सम्मुख बैठने से याद पड़ती है। बाबा आया है ले जाने के लिए। बाप सम्मुख बैठे हैं तो जास्ती _____ आनी चाहिए। अपनी ____ की यात्रा को वहाँ भी तुम रोज़ बढ़ा सकते हो। ज्ञान में इतना समय नहीं लगता है, जितना ____ की यात्रा में लगता है। 84 जन्मों की कहानी तो जैसे एक _____ है, आज से 5 वर्ष पहले किन्हों का राज्य था, वह राज्य कहाँ गया?
°रिफ्रेश, याद, याद, याद, कहानी

5. अपने को देखना है कि हमारे में कोई ______ तो नहीं हैं! जैसे देवतायें _____ हैं, ऐसा बना हूँ?
°अवगुण, मीठे

6. तुम्हारे इस *ब्राह्मण धर्म में सबसे अधिक ताकत* है – कौन-सी और कैसे?
° (कौन-सी) तुम्हारा यह ब्राह्मण धर्म ऐसा है जो *सारे विश्व की सद्गति* श्रीमत पर कर देते हैं। ब्राह्मण ही *सारे विश्व को शान्त* बना देते हैं। तुम ब्राह्मण कुल भूषण देवताओं से भी ऊंच हो,
° (कैसे) तुम्हें *बाप द्वारा* यह ताकत मिलती है। तुम ब्राह्मण *बाप के मददगार* बनते हो, तुम्हें ही *सबसे बड़ी प्राइज* मिलती है। (तुम ब्राह्माण्ड के भी मालिक और विश्व के भी मालिक बनते हो।)

7. तुम बच्चों को अब सारी नॉलेज है। तुम हो कितने साधारण अजामिल जैसे पापी, अहिल्यायें, कुब्जायें, भीलनियाँ उनको कितना _____ बनाते हैं। बाप समझाते हैं – तुम क्या से क्या बन गये हो। बाप खुद कहते हैं मैं तुमको अपने से भी ______ बनाता हूँ। बाबा लिखते हैं _____ ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण।
°ऊंच, ऊंच, सर्वोत्तम

8. बेहद का बाप है तो जरूर उनसे वर्सा भी मिलता होगा। इस बात को समझने लिए कौन-सा *एक वन्डरफुल अंग्रेजी शब्द* है?
° *हेविनली गॉड फादर* (यह अक्षर बहुत मीठा है और हेविन मशहूर भी है। तुम बच्चों की बुद्धि में हेविन और हेल का सारा चक्र फिरता है, जो-जो सर्विसएबुल हैं।)

9. तुम कहेंगे हम रूहानी बच्चे बाप की श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ ____ पर चल रहे हैं। ऊंच ते ऊंच बाप की ही _____ है। _____ भगवद् गीता भी गाई हुई है। अभी तुम समझते हो बाप ने ही ______ -योग सिखाया, जिससे सब मुक्ति-जीवनमुक्ति को पाते हैं।
°मत, श्रीमत, श्रीमद्, राज

10. कोई को पता नहीं गॉड वा ईश्वर कौन है, बाप ही बच्चों को बैठ अपना _____ देते हैं।
रूहानी बाप एक ही बार हर 5 हज़ार वर्ष के बाद आते हैं जरूर।
हम सभी आत्माओं का बाप वह ____ है। यह भी समझते हो कि भारत में ही शिवबाबा आया था, उनकी ______ भी मनाते हैं। कृष्ण की आत्मा के _____ में बाप ने प्रवेश किया है। कितनी वन्डरफुल बात है। कभी किसकी बुद्धि में आयेगा नहीं।
°परिचय, एक, जयन्ती, रथ

11. *बैज लगाने का उमंग बढ़ाने* लिए बाबा ने कौन-सा वन्डरफुल मिसाल दिया? (2)
° तुम *रूहानी सेना* हो। तुम यह बैज नहीं लगायेंगे तो मनुष्य कैसे समझेंगे कि यह भी रूहानी मिलेट्री है। मिलेट्री वालों को हमेशा बैज लगा हुआ होता है। (बैज में, *शिवबाबा* है नई दुनिया का रचयिता। वहाँ इन *देवताओं का राज्य* था, अब नहीं है। फिर बाप कहते हैं मनमनाभव। देह सहित सब सम्बन्ध छोड़ *मामेकम् याद* करो तो कृष्ण की डिनायस्टी में आ जायेंगे।) इसमें लज्जा की तो बात ही नहीं।
° अभी तुम बच्चों को ज्ञान है, बैज तो जरूर लगा रहना चाहिए। तुम हो *नर को नारायण बनाने वाले* । *राजयोग भी तुम ही सिखलाते* हो।

12. तुमसे पूछेंगे *क्या पढ़ते हो?* (2)
° बोलो, हम *नई दुनिया में राजाई प्राप्त करने लिए राजयोग* पढ़ते हैं। (यह है ही राजयोग। टीचर को जरूर याद तो करेंगे ना।)
° तुम कहेंगे हम स्वर्ग की राजाई प्राप्त करने के लिए ही पढ़ते हैं। *कौन पढ़ाते हैं? शिवबाबा भगवान* । (उनका नाम तो एक ही है जो चला आया है। मेरा नाम है ही शिव। बाप शिव और रथ ब्रह्मा कहेंगे।)

13. आजकल छोटेपन में ही *गुरू* करते हैं। गुरू का चित्र बनाए भी गले में डालते वा घर में रखते। और यहां कौन-सी वन्डरफुल बात है?
° यहाँ तो वन्डर है-बाप, शिक्षक, सतगुरू *सब एक शिवबाबा ही है।* बाप कहते हैं मैं साथ में ले चलूँगा।)

14. जिनको *धन मोटर आदि* हैं, वह स्वर्ग में है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (स्वर्ग कहा जाता है नई दुनिया को। यह साइंस भी वहाँ सुख देती है। यहाँ तो इन सबसे है अल्पकाल का सुख। वहाँ तुम बच्चों के लिए यह स्थाई सुख हो जायेगा।)
° अभी है *अल्पकाल का सुख*। (फिर यह बॉम्ब्स आदि ही सबको खलास कर देंगे। यहाँ तो अशान्ति का राज्य है। यह भी तुम्हारे में नम्बरवार हैं जो समझते हैं, हम पहले-पहले अपने घर जायेंगे फिर सुखधाम में आयेंगे।)

15. यह है *एकज़ भूल* का नाटक। कौन-सी है यह बड़े ते बड़ी भूल? (3)
° *गीता में नाम गुम* होने से महिमा भी गुम हो गई है।
° जिससे सारी दुनिया को सुख-शान्ति मिलती है, उस *बाप को भूल गये* हैं। इनको कहा ही जाता है एकज़ भूल का नाटक।
° बड़े ते बड़ी भूल यह है जो *बाप को नहीं जानते* । कभी कहते वह *नाम-रूप से न्यारा* है फिर कहते *कच्छ-मच्छ* अवतार है। *ठिक्कर-भित्तर* में है। भूल में भूल होती जाती है। (सीढ़ी नीचे उतरते जाते हैं। कला कम होती जाती है, तमोप्रधान बनते जाते हैं।)
° ड्रामा के प्लैन अनुसार जो बाप स्वर्ग का रचयिता है, *जिसने भारत को स्वर्ग का मालिक बनाया*, उनको ठिक्कर-भित्तर में कह देते हैं।

16. इनको *भाग्यशाली रथ* क्यों कहते हैं?
° क्योंकि *शिवबाबा की प्रवेशता* है तो जरूर दो आत्मायें ठहरी। यह भी तुम जानते हो। (दिखाते हैं भागीरथ ने गंगा लाई। क्या पानी लाया? किसने लाया है? किसने प्रवेश किया है? बाप ने किया ना। मनुष्य में पानी थोड़ेही प्रवेश करेगा। जटाओं से पानी थोड़ेही आयेगा। इन बातों पर मनुष्य कभी ख्याल भी नहीं करते हैं।)

17. *विराट रूप* भल बनाया है परन्तु वह भी *आधा है* । कैसे?
° *मुख्य रचता और उनकी पहली रचना* को कोई नहीं जानते। बाप ( *बिन्दी* ) है रचता, फिर ब्राह्मण हैं *चोटी* , इसमें ताकत है।

18. *अज्ञान अन्धियारा* किसे कहा जाता है?
° ड्रामा क्या है, पूछते रहते हैं। यह दुनिया कब से बनी है? नई सृष्टि कब थी तो कहेंगे *लाखों वर्ष आगे* । समझते हैं पुरानी दुनिया में तो अभी *बहुत वर्ष पड़े* हैं, इसको अज्ञान अन्धियारा कहा जाता है। (गायन भी है ज्ञान अजंन सतगुरू दिया, अज्ञान अन्धेर विनाश।)

Answers from Sakar Murli 07-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 07-09-2020*

1. स्वभाव, संस्कार, सम्बन्ध, सम्पर्क में _____ रहना अर्थात् फरिश्ता बनना।
°लाइट

2. संकल्प और बोल के विस्तार को सार में लाने वाले *अन्तर्मुखी भव*। ऐसे अन्तर्मुखी बच्चे *साइलेन्स की शक्ति* द्वारा क्या-क्या कर सकते? (3)
° भटकती हुई आत्माओं को *सही ठिकाना दिखा सकते* हैं।
° यह साइलेन्स की शक्ति *अनेक रूहानी रंगत* दिखाती है।
° साइलेन्स की शक्ति से हर आत्मा के *मन का आवाज* इतना समीप सुनाई देता जैसे कोई सम्मुख बोल रहा।

3. बाबा ने आज आते ही *आत्म-अभिमानी* बनने लिए कौन-से संकल्प दिये? (2)
° रूहानी बच्चे समझते हैं *हम आत्मा हैं, न कि शरीर* । आत्मा ही *शरीर में प्रवेश* करती है। *एक शरीर छोड़ दूसरा* लेती रहती है। आत्मा नहीं बदलती, शरीर बदलता है। आत्मा तो *अविनाशी* है, तो अपने को आत्मा समझना है।
° यह ज्ञान कभी कोई दे न सके। यह *ज्ञान अभी ही मिलता-परमपिता परमात्मा से* । बाप कहते हैं जबकि मैं आया हूँ तो तुम अपने को आत्मा निश्चय करो।

4. पुराने संस्कार पलटने में मेहनत लगती। याद करने में ही माया विघ्न डालती। तो बाबा ने *सहज याद* की कौन-सी 2 युक्तियां सुनाई?
° बाप कहते हथ कार डे दिल यार डे ( *कर्मयोगी* बनो)। यह है बहुत सहज।
° *जैसे आशिक-माशूक* होते हैं जो एक-दो को देखने बिगर रह न सके। (तुम भक्ति मार्ग से लेकर मुझ माशूक के सब आशिक हो। बुलाते भी हो कि आकर दु:ख से लिबरेट कर पावन बनाओ। तुम सब हो ब्राइड्स, मैं हूँ ब्राइडग्रूम। तुम सब आसुरी जेल में फंसे हुए हो, मैं आकर छुड़ाता हूँ।)

5. परमात्मा तो एक ही है ऊंच ते ऊंच _____ , फिर सब हैं आत्मायें बच्चे। सर्व का _____ दाता एक है फिर हैं देवतायें। उनमें भी नम्बरवन है ____ क्योंकि आत्मा और शरीर दोनों पवित्र हैं। तुम हो संगमयुगी।
°भगवान, सद्गति, कृष्ण

6. बाबा को *क्रियेटर, डायरेक्टर और मुख्य एक्टर* क्यों कहते?
° बाप क्रियेटर भी है, तुम बच्चों को क्रियेट करते हैं। *अपना बनाया है*।
° डायरेक्टर बन डायरेक्शन भी देते हैं। *श्रीमत देते* ।
° फिर एक्ट भी करते हैं। *ज्ञान सुनाते* हैं। यह भी उनकी ऊंच ते ऊंच एक्ट है ना।

7. *बाबा का आना* कब होता है?
° बाप आकर समझाते हैं मेरा आना होता है कल्प के *पुरूषोत्तम संगमयुग पर जबकि सारा विश्व पुरूषोत्तम बनता* है। (इस समय तो सारा विश्व कनिष्ट पतित तमोप्रधान जड़जड़ीभूत है, 5 विकारों से दुःखी। उसको कहा जाता है अमरपुरी, यह है मृत्युलोक। मृत्युलोक में आसुरी गुण वाले मनुष्य होते हैं, अमरलोक में दैवीगुण वाले मनुष्य हैं इसलिए उनको देवता कहा जाता है।)

8. बाप आये हैं तुम पुराने भक्तों को भक्ति का _____ देने। भक्ति का फल है _____ , जिससे ही तुम्हारी सद्गति होती है। भक्ति करने वालों को सीता कहा जाता, भगवान को _____ कहा जाता। इस बेहद के _____ राज्य में सारी दुनिया फंसी हुई है। उन्हों को लिबरेट कर राम राज्य में ले जाते हैं। बुलाते भी हैं हम आत्माओं को अपने घर ले जाओ। यह किसको पता नहीं है कि बाप _____ का भी राज्य-भाग्य देते हैं।
°फल, ज्ञान, राम, रावण, स्वर्ग

9. *सबसे ऊंचा धर्म / अमूल्य जीवन* किसका कहेंगे? देवताओं का?
° सब धर्मों में ऊंच तो तुम्हारा ब्राह्मण धर्म है, *प्रजापिता ब्रह्मा के मुख वंशावली ब्राह्मण*, वह तो सब भाई-बहन होने चाहिए।
° वास्तव में *देवताओं से भी ऊंच* ब्राह्मणों को कहेंगे, चोटी हैं ना। (क्योंकि यह ब्राह्मण ही मनुष्यों को *देवता बनाते* हैं। *पढ़ाने वाला है परमपिता परमात्मा* , स्वयं ज्ञान का सागर।)
° तुम हो संगमयुगी। देवताओं का नहीं, *ब्राह्मणों का अमूल्य जीवन* है। (बाप तुमको बच्चा बनाए तुम्हारे पर कितनी मेहनत करते, देवतायें थोड़ेही इतनी मेहनत करेंगे। वह पढ़ाने लिए बच्चों को स्कूल भेज देंगे। तो कितना रिगॉर्ड होना चाहिए।)

10. सर्विसएबुल बच्चों को *सर्विस का बहुत शौक* होना चाहिए। तो बाबा ने उमंग बढ़ाने लिए किन्हों का मिसाल दिया?
° लड़ाई के मैदान में जाने के लिए *मिलेट्रीके* पास लिस्ट रहती। ड्रिल सिखलाते हैं कि जरूरत पर बुला लेंगे। यहाँ तो वह बात नहीं है (तो आपेही सर्विसएबुल बनना चाहिए ना!)

11. कई बच्चे चलते-चलते *तकदीर को आपेही शूट* करते हैं। कैसे?
° अगर बाप का बनकर *सर्विस* नहीं करते, अपने पर और दूसरों पर *रहम* नहीं करते तो वह अपनी तकदीर को शूट करते हैं अर्थात् *पद* भ्रष्ट हो जाते हैं। अच्छी रीति *पढ़ें* , *योग* में रहें तो पद भी अच्छा मिले। सर्विसएबुल बच्चों को तो *सर्विस* का बहुत *शौक* होना चाहिए।

12. कॉन्फ्रेन्स में टॉपिक रखी है ”मानव जीवन में *धर्म की आवश्यकता*।” इस पर क्या समझानी बाबा ने दी? (3)
° समझाना चाहिए धर्म की तो आवश्यकता है ना। *पहले-पहले कौन-सा धर्म था*, फिर कौन-से धर्म आये हैं! (वास्तव में *डायरेक्ट ऑलमाइटी अथॉरिटी से योग लगाकर ऑलमाइटी बनना* है, विश्व के मालिक बन जाते हो। तुम्हारे राज्य को कोई छीन न सके। उस समय और कोई खण्ड होते नहीं।)
° सारा चक्र बना ही है धर्मों पर। यह है ही *वैराइटी धर्मों का झाड़*, यह झाड़ है अन्धों के आगे आइना।
° बोलो, धर्म स्थापक फिर *अपने समय पर आयेंगे*। (हर एक को सतोप्रधान से सतो-रजो-तमो में आना ही है। अभी है रावण राज्य। तुम्हारी है सच्ची गीता, जो निराकार गॉड फादर सुनाते हैं।)

13. औरों की भेंट में यहाँ तुम्हारी *स्थापना बड़ी वन्डरफुल* है। कैसे?
° तुम अभी बाहर सर्विस पर निकले हो, *आहिस्ते-आहिस्ते वृद्धि* होती जाती है। *तूफान लगने से बहुत पत्ते गिरते* भी हैं ना। और धर्मों में तूफान लगने की बात नहीं रहती। उनको तो ऊपर से आना ही है, यहाँ मेहनत बहुत है। ( *क्रिमिनल आई* धोखा देती है, सिविल आई बनने में मेहनत लगती है। देवताओं के कितने अच्छे कैरेक्टर्स हैं।)

14. इस समय (कलियुग अन्त में) *पूज्य* किनको कह सकते?
° इस समय कोई *एक भी पूज्य नहीं* हो सकता। (ऊंच ते ऊंच भगवान पूज्य फिर है सतयुगी देवतायें पूज्य। इस समय तो सब पुजारी हैं, अव्यभिचारी पूजा फिर सतो फिर देवताओं से भी उतर कर जल की, मनुष्यों की, पक्षियों आदि की पूजा करने लग पड़ते। दिन-प्रतिदिन अनेकों की पूजा होने लगती है।)

15. *मोक्ष* पर बाबा ने कौन-सी 2 अच्छी पॉइंट्स सुनाई?
° मोक्ष को *वर्सा* नहीं कहा जाता। (बाप से तो वर्सा मिलना चाहिए!)
° खुद *शिवबाबा को भी पार्ट बजाना पड़ता* है। (तो फिर और किसको मोक्ष में कैसे रख सकते।)

16. भगवानुवाच हैं ____ अर्थात् अशरीरी आये थे, फिर अशरीरी बनकर जाना है। भगवानुवाच के अर्थ को नहीं समझते हैं। बाप कहते हैं तुम आत्मायें यहाँ यह _____ धारण कर पार्ट बजाने आई हो, फिर वापिस जाना है। नये-नये किस्म के धर्म इमर्ज होते रहते हैं, इसलिए इनको _____ धर्मों का झाड़ कहा जाता।
°नंगे, शरीर, वैराइटी

Answers from Sakar Murli 05-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 05-09-2020*

1. सर्व शक्तियों से सम्पन्न रहना यही ब्राह्मण स्वरूप की ______ है।
°विशेषता

2..हर समय *बाप के भिन्न-भिन्न सम्बन्धों को अनुभव* करने पर कौन-सी वन्डरफुल बातें वरदान में सुनाई? (4)
° यही *सहज योग* है।
° बाप सदा *सम्बन्ध निभाने लिए बंधे हुए* हैं।
° सारे कल्प में *अभी ही* सर्व अनुभवों की खान प्राप्त होती है (इसलिए सदा सर्व सम्बन्धों का सहयोग लो और निरन्तर योगी, सहजयोगी बनो।)
° जो सर्व सम्बन्धों की अनुभूति वा प्राप्ति में मग्न रहता है, वह पुरानी *दुनिया के वातावरण से सहज ही उपराम* हो जाता।

3. *नई दुनिया की देहली* कैसी थी? (3)
° देहली *परिस्तान* थी, *जमुना का कण्ठा* था। *लक्ष्मी-नारायण का राज्य* था। (चित्र भी हैं। लक्ष्मी-नारायण को स्वर्ग का ही कहेंगे। तुम बच्चों ने साक्षात्कार भी किया है कि कैसे स्वंयवर होता है। यह सब प्वाइंट्स बाबा रिवाइज़ कराते हैं।)

4. हमे इस पुरानी दुनिया से निकल फिर नई दुनिया में आना है। तो इस नई दुनिया को *हद की दुनिया* भी कह सकते। _(सही / गलत)_
° *सही* (क्योंकि वह *बहुत छोटी* है, वहाँ है एक धर्म। अनेक धर्म, अनेक मनुष्य होने से बेहद हो जाती। *वहाँ तो है एक धर्म*, थोड़े मनुष्य। एक धर्म की स्थापना के लिए आना पड़ता है।)

5. देवताओं को सब जानते, वो सम्पूर्ण ______ होने के कारण सम्पूर्ण विश्व के मालिक बनते हैं। 2500 वर्ष में जो आये हैं, उनको जानते हैं परन्तु उनसे पहले जो _________ थे, उनको कितना समय हुआ, कुछ नहीं जानते। हर एक को अपना धर्म _____ लगता है। तुम समझते हो यह बेहद के बाप की ______ है।
°निर्विकारी, आदि सनातन देवी-देवता, प्यारा, फैमिली

6. इस *अन्तिम शरीर* वा जन्म की कौन-सी *विशेषताएं* है? (3)
° तुम्हारी स्टूडेन्ट लाइफ है ना। यह अन्तिम जन्म *बहुत वैल्युबल* है फिर शरीर बदल हम देवता बन जायेंगे।
° तुम्हारी आत्मा इस रथ में बैठ पढ़ती है। आत्मा पवित्र बन जाती इसलिए *बलिहारी इस तन की* है।
° इस पुराने शरीर द्वारा ही तुम शिक्षा पाते हो। *शिवबाबा के बनते* हो। तुम जानते हो हमारी *जीवन अब वर्थ पाउण्ड बन रही* है। (जितना पढ़ेंगे उतना ऊंच पद पायेंगे।)

7. तुम बेहद के स्कूल में बैठे हो। तुम ही फिर ______ बनेंगे। तुम समझ सकते हो ऊंच ____ कौन पा सकते हैं। उनकी ________ क्या होनी चाहिए। याद की यात्रा है मुख्य। इनको ही भारत का प्राचीन _____ कहते हैं जिससे तुम पतित से ______ बनते हो, स्वर्गवासी तो सब बनते हैं फिर है पढ़ाई पर मदार।
°देवता, पद, क्वालिफिकेशन, योग, पावन

8. *आसुरी मत और ईश्वरीय मत* में क्या अन्तर है? (3)
° आसुरी मत से हम उतरती कला में जाते हैं। ईश्वरीय मत से *चढ़ती कला* में जाते हैं।
° ईश्वरीय मत *देने वाला एक* है, आसुरी मत देने वाले अनेक हैं। (माँ-बाप, भाई-बहन, टीचर-गुरू कितनों की मत मिलती है।)
° अभी तुमको एक की मत मिलती है जो *21 जन्म काम आती* है। (तो ऐसे श्रीमत पर चलना चाहिए ना। जितना चलेंगे उतना *श्रेष्ठ पद* पायेंगे।)

9. *अच्छा प्वाइंट्स याद नहीं* पड़ती, तो क्या करना है? (2)
° *बाबा को याद* करो।
° बाप भूल जाता है तो *टीचर को याद* करो। (टीचर जो सिखलाते हैं वह भी जरूर याद आयेगा ना। टीचर भी याद रहेगा, नॉलेज भी याद रहेगी। उद्देश्य भी बुद्धि में है।)

10. हम इस बेहद नाटक के राज़ को समझते है। इस समय जो कुछ प्रैक्टिकल में होता है उसका ही फिर भक्ति मार्ग में त्योहार मनाते हैं। बाबा ने कहा विचार कर *त्योहारों को नम्बरवार लिखो*, सही क्रम में। _(गीता जयंती, शिव जयंती, नारायण जयंती)_
° ऊंच ते ऊंच भगवान *शिवबाबा की जयन्ती* कहेंगे। (वह जब आये तब फिर और त्योहार बनें।)
° शिवबाबा पहले-पहले आकर गीता सुनाते हैं अर्थात् आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान सुनाते हैं। योग भी सिखाते हैं। तो पहले-पहले बाप आया शिवजयन्ती हुई *फिर कहेंगे गीता जयन्ती*। (आत्माओं को ज्ञान सुनाते हैं तो गीता जयन्ती हो गई।)
° पहले बाप आते हैं, वही आकर राजयोग सिखलाते हैं तो कहेंगे शिवजयन्ती सो फिर गीता जयन्ती *फिर नारायण जयन्ती*। (वह तो हो जाता सतयुग।)

11. रचता बाप ने समझाया है कि तुम बच्चों ने ऐसे _____ बजाया है। अभी तुमको बेहद के नाटक की ______ मिलती है। यहाँ तुम आत्माओं को घर से _______ आना होता है। यहाँ आकर यह शरीर रूपी ______ पहनते हो। हर एक को अपना-अपना ______ मिला हुआ है।
°पार्ट, नॉलेज, अशरीरी, कपड़े, पार्ट

12. निराकार-रूहानी बाप हमें शरीर द्वारा समझाते, हम निराकारी-रूहानी बच्चे भी शरीर द्वारा बाप के सम्मुख बैठी हैं।(आत्मा-परमात्मा अलग रहे…..।) तो हम जिस बाप के सामने बैठे हैं, उनकी *महिमा* क्या है? उनको *परमपिता* वा *दु:ख हर्ता सुख कर्ता* क्यों कहते?
° ऊंच ते ऊंच बाप को ही *भगवान, ईश्वर, प्रभु, परमात्मा* भिन्न नाम दिये हैं।
° बाप है मुख्य क्रियेटर, *डायरेक्टर* , डायरेक्शन भी देते हैं। श्रीमत देते हैं।
° *परमपिता* अर्थात् वह सभी का पिता है एक।
° बाबा *दु:ख हर्ता सुख कर्ता* है। सुख मिलता है सुखधाम में। शान्ति मिलती है शान्तिधाम में। यहाँ है ही दु:ख। (यह ज्ञान तुमको मिलता है संगम पर।)

13. बाप *प्रेरणा* से कार्य नहीं करते उनका अवतरण होता है, यह किस बात से सिद्ध होता है?
° बाप को कहते ही हैं *करनकरावनहार*। प्रेरणा का तो अर्थ है विचार। प्रेरणा से कोई *नई दुनिया की स्थापना* नहीं होती है। बाप बच्चों से स्थापना कराते हैं, कर्मेन्द्रियों बिगर तो कुछ भी करा नहीं सकते इसलिए उन्हें *शरीर का आधार* लेना होता है।

14. ऊंच ते ऊंच भगवान ही है, जिसने _____ को ऊंच ते ऊंच बनाया फिर नीच ते नीच रावण ने बनाया। बाप _____ बनाते फिर रावण सांवरा बनाते। बाप _____ देते हैं। वह तो है ही वाइसलेस। ______ की महिमा गाते हैं सर्वगुण सम्पन्न……
°कृष्ण, गोरा, वर्सा, देवताओं

15. लौकिक बाप से वर्सा मिलता है। पारलौकिक बाप को भी दु:ख व सुख में याद करते हैं। तो *प्रजापिता ब्रह्मा (अलौकिक बाप)*) को क्यों याद करें?
° तुम जानते हो हम *ब्रह्मा द्वारा* शिवबाबा से वर्सा ले रहे हैं। (जैसे हम पढ़ते हैं, यह रथ भी निमित्त बना हुआ है। बहुत जन्मों के अन्त में इनका शरीर ही *भाग्यशाली रथ* बना है।)

16. बाप संगमयुग पर आते। ब्रह्मा के द्वारा ब्राह्मण। ब्रह्मा के बच्चे तो सब ठहरे। वह है ग्रेट ग्रेट ग्रैन्ड फादर। तो ब्रह्मा बाबा की पॉइंट *कैसे समझा सकते?*
° बोलो, *प्रजापिता ब्रह्मा का नाम नहीं सुना है?* परमपिता परमात्मा ब्रह्मा द्वारा ही सृष्टि रचेंगे ना। (ब्राह्मण कुल है। ब्रह्मा मुख वंशावली भाई-बहिन हो गये। यहाँ राजा-रानी की बात नहीं। यह ब्राह्मण कुल तो संगम का थोड़ा समय चलता है।)

17. बाप आते ही तब हैं जब नई दुनिया की *स्थापना* और पुरानी दुनिया का *विनाश* होना है। इसमें *पहले क्या कहेंगे?*
° पहले हमेशा कहना चाहिए *नई दुनिया की स्थापना*। (पहले पुरानी दुनिया का विनाश कहना रांग हो जाता है। अभी तुमको बेहद के नाटक की नॉलेज मिलती है।)

18. शिव जयन्ती कब हुई वह भी पता नहीं है, ज्ञान सुनाया, जिसको गीता कहा जाता है फिर _____ भी होता है। इसके लिए यह _______ लड़ाई है।
°विनाश, महाभारत

Answers from Sakar Murli 04-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 04-09-2020*

1. स्नेह ही सहज _____ का साधन है इसलिए सदा स्नेही रहना और स्नेही बनाना।
°याद

2. *स्वमान में रहने वालो* की कौन-सी वन्डरफुल निशानियाँ हैं? (4)
° उन्हें कभी भी अभिमान नहीं आ सकता, वे *सदा निर्मान* होते हैं।
° जितना बड़ा स्वमान उतना ही *हाँ जी* में निर्मान।
° छोटे बड़े, ज्ञानी-अज्ञानी, मायाजीत या माया-वश, गुणवान या पुरूषार्थी हो लेकिन स्वमान वाले *सभी को मान देने वाले दाता* होते हैं अर्थात् स्वयं सम्पन्न होने के कारण *सदा रहमदिल* होते हैं।

3. बाबा आया है तुम्हें _____ बनाने, तब ही यह भारत काँटों के जंगल से सम्पूर्ण _____ बनेगा। बागवान भी ______, माली भी ______ आत्मा है। वहां यह देवतायें रहते थे। सब प्रार्थना करते हैं, हमको ऐसा _____ आत्मा बनाओ।
° फूल, बगीचा, निराकार, निराकार, पुण्य

4. लक्ष्मी-नारायण के लिए सब कहेंगे स्वर्ग के ______ थे। कोई ______ की बात नहीं लिखते।शिव का बड़ा लिंग बना देते। कहते भी हैं कि आत्मा _____ मिसल है, तो जरूर बाप भी ऐसा होगा ना। परन्तु उनकी पूरी पहचान नहीं है।
°मालिक, ग्लानि, स्टार

5. *मन्दिर लायक बनने* लिए किन बातों पर विशेष ध्यान देना है? (2)
° *चलन बहुत मीठी रॉयल* होनी चाहिए। (इतना मीठापन हो जो दूसरों को उसकी महसूसता आये।)
° अनेकों को बाप का परिचय दो। अपना कल्याण करने लिए अच्छी रीति पुरुषार्थ कर *सर्विस पर लगे रहो।*

6. *प्रजा* को भी मन्दिर लायक वा जगतजीत कहेंगे। _(सही / गलत)_
° *गलत* (बाप कहते हैं मैं आकर सबको मन्दिर लायक बनाता हूँ, परन्तु *सब मन्दिर लायक नहीं बनते* हैं। प्रजा को तो मन्दिर लायक नहीं कहेंगे ना। जगतजीत अर्थात् राजा-रानी, प्रजा को जगतजीत नहीं कहेंगे।)

7. यह ड्रामा का *खेल बना हुआ* है। सब आत्मायें जो भी *पार्ट* बजाती हैं, वह *सब नूंधा* हुआ है। इसके लिए बाबा ने कौन-से 2 जबरदस्त मिसाल सुनायै?
° *जैसे कठपुतलियाँ होती हैं* ना, ऐसे नाचती रहती हैं। यह भी ड्रामा है, हर एक का इस ड्रामा में पार्ट है। पार्ट बजाते-बजाते तुम तमोप्रधान बने हो। फिर अब ऊपर जाते हो, सतोप्रधान बनते हो। बाप ऊपर ले जाते।
° वास्तव में वह *मछलियाँ तार में लटकती* हैं (ऐसा एक खेल है), इस तार में मनुष्यों को डालना चाहिए। ऐसे उतरती कला फिर चढ़ती कला होती है। 5 हज़ार वर्ष लगते हैं ऊपर जाकर फिर उतरने में।

8. अगर *छोटेपन से ही नॉलेज में* लग जाएं, तो क्या प्राप्तियां है? (2)
° *धारणा* होती जायेगी। समझेंगे इसने बहुत भक्ति की हुई है, *बहुत होशियार* हो जाए, क्योंकि आरगन्स बड़े होने से फिर *समझ भी जास्ती आती* है। (परन्तु जब वह लगन भी लगे)

9. हमने कौन-सी 2 जबरदस्त *प्रतिज्ञाएं* की है?
° हम यह प्रतिज्ञा करते हैं कि श्रीमत पर हम इस *भारत की भूमि (और विश्व) को पतित से पावन बनायेंगे* (पावन बनने का रास्ता बताते। अच्छा पुरूषार्थ थोड़े करते हैं, पवित्र तो सारी दुनिया बन जाती है।)
° *पवित्रता की प्रतिज्ञा* करते हैं (बता सकते हम कैसे बाप की श्रीमत से पवित्र रहते हैं। फिर पवित्र दुनिया सतयुग का मालिक जगतजीत बनेंगे। लक्ष्मी-नारायण, सबसे ऊँच पद!)

10. प्रदर्शनी म्युज़ियम में पूछते हैं तुम *भारत की क्या सेवा करते* हो?
° हम भारत की बहुत अच्छी सर्विस करते हैं, *जंगल से बगीचा बना रहे* हैं। (सतयुग है गार्डन। यह है काँटों का जंगल। एक-दो को दु:ख देते रहते हैं। यह तुम अच्छी रीति समझा सकते हो।)
° हम सब बच्चे बाप की श्रीमत पर *भारत की रूहानी सर्विस* करते हैं अपने ही तन-मन-धन से।

10. तुम बच्चों को _____ सोशल सर्विस भी करनी है, इस सेवा में अपना जीवन ______ करना है। अपने ______ के लिए अच्छी रीति पुरूषार्थ कर सर्विस में लगे रहो। बाप भी सर्विस पर है ना। तुम बच्चे भी ______ सर्विस पर रहो। बाप द्वारा समझते हैं, वह समझाने लायक भी बनते हैं। _______ धारण करते।
°रूहानी, सफल, कल्याण, दिन-रात, दैवीगुण

11. लक्ष्मी-नारायण का ____ भी बहुत अच्छा बनाना चाहिए। _____ भी इसलिए करते हैं कि क्या-क्या सर्विस करें जो बहुतों को बाप का परिचय मिले।
°चित्र, सेमीनार

12. हमारे सेवा से किसको *तीर* कब लगेगा? (3)
° *याद में रहें तब* किसको तीर भी लगे। घड़ी-घड़ी देह-अभिमान में आ जाते हैं। बाप कहते हैं *आत्म-अभिमानी बनो*। (आत्मा ही शरीर धारण कर पार्ट बजाती। आत्माओं में जो पार्ट की नूंध है उसको हम साक्षी हो देखते हैं।)
° जब *खुद फूल बने होंगे*। (खुद ही कांटा होगा तो किसको फूल कैसे बनायेंगे, उनका तीर पूरा लगेगा नहीं।)

13. *शिवजयन्ती की चिट्ठियों* में ऐसी लिखत हो, जो किसको भी दिखायें तो समझ जाएं। जैसे लिखते हैं *शिवबाबा केयरऑफ ब्रह्मा* वा बापदादा, इस पर क्या समझानी है?
° वह रूहानी पिता (शिवबाबा), वह जिस्मानी (प्रजापिता ब्रह्मा)। उनसे जिस्मानी रचना रची जाती। बाप है मनुष्य सृष्टि का रचता। *बाप ब्रह्मा द्वारा अब नई रचना रच रहे हैं*। ब्राह्मण हैं चोटी फिर देवता, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।
° (बापदादा) शिवबाबा को बाप, ब्रह्मा को दादा कहते हैं। (एक को कभी कोई बापदादा कहते हैं क्या? यह तो *वन्डरफुल बात* है, इसमें सच्चा-सच्चा ज्ञान है।)

14. कईयों की *बुद्धि में ठहरता ही नहीं* इसलिए किसको समझा नहीं सकते। बाबा ने उन्हों के लिए कौन-सा मिसाल दिया?
° आत्मा बिल्कुल ही *गर्म तवा*, तमोप्रधान पतित है। उन पर ज्ञान अमृत डाला जाता तो भी ठहरता नहीं। (जिसने बहुत भक्ति की है, उनको ही तीर लगेगा, झट धारणा होगी। हिसाब ही वन्डरफुल है – पहले नम्बर में पावन, वही फिर पतित बनते हैं।)

15. तुम हो रूहानी _____ । तुम 5 विकारों पर जीत पाने से जगत जीत बनने वाले हो। जन्म-जन्मान्तर के पाप कटने लिए बाबा युक्तियाँ बताते हैं। तुम बहुत ______ वारियर्स हो। जब तक राजधानी स्थापन न हो जाए तब तक _____ नहीं होगा। फिर सतयुग में कभी _______ होती नहीं।
°मिलेट्री, गुप्त, विनाश, लड़ाई

16. इस प्रवृत्ति मार्ग (जोड़ी की दौड़ी) में *दूसरे ने* काम महाशत्रु में गिराया। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे थोड़ेही उसने गिराया। गिरना, न गिरना *अपने हाथ में है*। कोई धक्का थोड़ेही देते हैं, हम गिरें क्यों? *कुछ भी हो जाए हम गिरेंगे नहीं*। गिरे तो खाना खराब, जोर से चमाट लगती है। फिर पछताते भी हैं, *हड्डी-हड्डी टूट जाती है*। बहुत चोट लगती है।)

Answers from Sakar Murli 03-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 03-09-2020*

1. जिसका बाप और सेवा से प्यार है, उसे ________ का प्यार स्वत: मिलता है।
°परिवार

2. *सतयुग* की कौन-सी नई-नई बातें आज बाबा ने सुनाई? (4)
° वहाँ *घी* आदि खरीद करना नहीं पड़ेगा। सबके पास *अपनी गायें फर्स्टक्लास* होती हैं।
° वहाँ *सब कुछ नया* होगा। *खानियाँ* जो अब खाली हो गई हैं वह सब फिर से अब *भरतू* हो जाती है। खानियों से खोद कर ले आते हैं।
° *लाइट* आदि भी जैसे *नैचुरल* रहती है, साइंस से यहाँ सीखते रहते हैं। वहाँ यह भी काम में आती हैं।
° *हेलीकाप्टर खड़े* होंगे, बटन दबाया यह चला। कोई तकलीफ नहीं। वहाँ सब *फुलप्रूफ* होते हैं, कभी मशीन आदि खराब हो न सके। घर में बैठे सेकण्ड में स्कूल में वा घूमने-फिरने पहुँचते हैं। (तुम्हारे लिए वहाँ *सब सुख* होते।)

3. जैसे बाप में निश्चय है, वैसे *स्वयं और ड्रामा में भी सम्पूर्ण निश्चय* रखना क्यों जरूरी है? (2)
° स्वयं में यदि कमजोरी का संकल्प उत्पन्न होता है तो *कमजोरी के संस्कार* बन जाते हैं, इसलिए व्यर्थ संकल्प रूपी कमजोरी के जर्म्स अपने अन्दर प्रवेश होने नहीं देना।
° साथ-साथ हलचल की सीन में भी कल्याण का अनुभव हो, तो *विकराल समस्या भी शीतल* हो जायेगी।

4. अभी तुम बाप से योग लगाते हो। सतयुग से लेकर तुम _____ थे अर्थात् बाप से योग नहीं था। अभी तुम _____ बनते हो, बाप के समान। अभी तुम्हारी बुद्धि लगी है उस अपने पतियों के पति शिव ______ के साथ। योग सिखलाने वाला है ईश्वर इसलिए उनको कहा जाता है ______ ।
°वियोगी, योगी, साजन, योगेश्वर

5. जितना तुम याद में रहेंगे उतना _____ में रहेंगे। योग से _____ बढ़ती है। सिवाए याद के ______ वश होना मुश्किल है। याद से ही _____ पार होना है।
°खुशी, आयु, कर्मेन्द्रियाँ, बेड़ा

6. बाबा ने आज आते ही कौन-सी वन्डरफुल युक्ति सुनाई, जिसमें *याद और पढ़ाई दोनों* समाए हुए हैं?
° जब सामने बैठते, तो समझ हैं *हमको पढ़ाने वाला ज्ञान-सागर नॉलेजफुल बाबा है* (स्टूडेन्ट अपने स्कूल में बैठे होंगे तो टीचर याद आयेगा ना।) ध्यान में रखना है – *हम आत्मा हैं, बाप से सुन रहे हैं* । हमारा बाप इस समय टीचर है क्योंकि पढ़ाते हैं, दोनों काम करने पड़ते। पढ़ती आत्मा है, पढ़ाता परमात्मा है।
° यह तो पक्का निश्चय है वह हमारा बाप भी है, जब पढ़ते हैं तो *पढ़ाई पर अटेन्शन* रहता है। अपने को आत्मा जरूर समझना है। *बुद्धि भागनी नहीं चाहिए*।

7. यह *योग भी है, कमाई भी है*। कैसे?
° आत्मा को ही *सतोप्रधान* बनना है। कर्मातीत अवस्था में पहुँचेंगे तो वह भी जैसे *पवित्रता की ताकत* मिलती है।
° तुम सतोप्रधान भी बन रहे हो, *(ज्ञान) धन भी* ले रहे हो।

8. जैसे बाप को _____ उठा कि मैं जाऊं तो बाप कहते हैं मैं आता हूँ और मेरी ______ चलनी शुरू हो जाती है। वहाँ तो शान्ति में हैं। फिर ड्रामा अनुसार उनका _____ शुरू होता है। बाप कहते हैं मेरे में जो ____ भरा हुआ है वह खुलता जायेगा। बच्चों को बताते रहेंगे।
°संकल्प, वाणी, पार्ट, पार्ट

9. हम डबल अहिंसक, अननोन वारियर्स की *विजय निश्चित* क्यों है?
° हम बच्चे जो माया पर जीत पाने का पुरूषार्थ कर रहे, विजय निश्चित है क्योंकि *हमारे साथ साक्षात् परमपिता परमात्मा* है। हम *योगबल* से विजय पाते है।

10. हम आधाकल्प राज्य करेंगे। तो अब हमे *दैवीगुण धारण* करने और कराने हैं। इसके लिए बाबा कौन-सी *राय* देते हैं?
° अपना *चार्ट रखने से बहुत मज़ा आयेगा*। (रजिस्टर में गुड, बेटर, बेस्ट होते हैं ना। खुद भी फील करते हैं। कोई अच्छा पढ़ते हैं, कोई का अटेन्शन नहीं रहता है तो फेल हो जाते हैं। यह फिर है बेहद की पढ़ाई।)

11. हम *लाइट हाउस* भी हैं। कैसे?
° एक ऑख में शान्तिधाम, एक ऑख में जीवनमुक्ति-धाम है। (इन आंखों की बात नहीं है, *आत्मा का तीसरा नेत्र* कहा जाता है।)

12. दिन-प्रतिदिन _____ को भी पाते जायेंगे। एक दिन तुमको बड़े रॉयल _____ भी मिलेंगे, जिसमें ______ लोग भी आयेंगे। सब इकट्ठे बैठ सुनेंगे। बाबा ने कहा यह भी लिख दो वर्ल्ड की हिस्ट्री-जाग्राफी कैसे _____ होती है, आकर समझो। जो ________ होगा कहेगा अभी आइरन एज है तो जरूर गोल्डन एज रिपीट होगी। तुम्हारे द्वारा सबको ______ का पैगाम मिलेगा। यह है महामंत्र।
°वृद्धि, हाल, बड़े-बड़े, रिपीट,सेन्सीबुल, मनमनाभव

13. इस सृष्टि चक्र में *आधा* हिस्सा सुख है, *आधा* हिस्सा है दु:ख। _(सही / गलत)_
° गलत ( *पौना हिस्सा सुख* है, बाकी क्वार्टर है दु:ख। आधा-आधा हो फिर तो मज़ा न रहे। भक्ति में भी तुम बहुत सुखी रहते। पीछे मन्दिरों आदि को लूटते हैं। सतयुग में तुम कितने साहूकार थे तो तुम बच्चों को *बहुत खुशी* होनी चाहिए। एम ऑब्जेक्ट तो सामने खड़ा है। गाया जाता है खुशी जैसी खुराक नहीं।)

14. शिवबाबा के रथ ब्रह्मा बाबा की एक्टिविटी वन्डरफुल है। (सिखाते, शिवबाबा रेसपान्ड देते वह सुनते, याद में रहते, बाबा हमको खिलाते आदि)। तो जबकि याद से ही फायदा है, तो *भण्डारे में भोजन बनाते समय* क्या याद रखना है?
° हम *शिवबाबा के बच्चों के लिए* बनाते हैं। खुद भी शिवबाबा के बच्चे हैं तो ऐसे याद करने से भी *फायदा* ही है। सबसे जास्ती पद उनको मिलेगा जो *याद* में रह कर्मातीत अवस्था को पाते हैं *और सर्विस* भी करते हैं।

15. अभी आत्मा को स्व का दर्शन हुआ है कि हम 84 का चक्र लगाते ( *स्वदर्शन चक्रधारी* )। अब बाप सबको ले जायेंगे (आत्मा संस्कारों के साथ जायेंगी शान्तिधाम, फिर नया पार्ट प्रालब्ध का इमर्ज होगा)।
परन्तु इसके पहले जो नैचुरल कैलामिटीज़ और बॉम्बस से विनाश होंगा, उसका *सहज सामना* करने लिए क्या करना है?
° उसमें *बड़ी हिम्मत* चाहिए। अंगद का भी मिसाल है ना, उनको कोई हिला न सका। यह *अवस्था पक्की करनी है-मैं आत्मा हूँ, शरीर का भान टूटता जाए।* (सतयुग में तो जब ऑटोमेटिकली समय पूरा होता है तो साक्षात्कार होता। अभी हमको यह शरीर छोड़ जाए बच्चा बनना है। एक शरीर छोड़ जाए दूसरे में प्रवेश करते, सज़ायें आदि तो वहाँ कुछ हैं नहीं। दिन-प्रतिदिन तुम नज़दीक आते जायेंगे।)

16. बाप ही कहते ______ बनो। तुम अपने को _______ समझ बाप को याद करो। अब बाप के पास जाना है घर। बाप कहते हैं मैं तुम्हारा _____ हूँ। _______ के बाद फिर जयजयकार होगी। _____ की नदियाँ बहेंगी।
°मरजीवा, आत्मा, बाप, हाहाकार, घी

17. एक तरफ समझते हम स्वर्ग में बैठे हैं, यह सुखधाम बन गया है, दूसरी तरफ फिर ____ में भी भारत की हालत सुनाते हैं। तुम जानते हो यह तो और ही _____ हो गये हैं। माया का भी बहुत ज़ोर है। यह है माया का अन्तिम ______।
°गीत, तमोप्रधान, पाम्प

Answers from Sakar Murli 02-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 02-09-2020*

1. सर्व प्रति _____ -ग्राहक बनो लेकिन फालो _______ को करो।
°गुण, ब्रह्मा बाप

2. हम बाप समान विश्व सेवाधारी आत्माओं को *कौन-सी डबल सेवा* का अभ्यास निरन्तर-नेचुरल करना है? (जिससे देखने वालों को अनुभव- साक्षात्कार हो कि यह कोई अलौकिक शक्ति है।)
° शरीर द्वारा *स्थूल सेवा करते हुए मन्सा से विश्व परिवर्तन* की सेवा पर तत्पर रहो। (एक ही समय पर *तन और मन* से इक्ट्ठी सेवा। *मन्सा और कर्मणा* दोनों साथ-साथ।)
° मन्सा सेवा के लिए विशेष *एकाग्रता* का अभ्यास बढ़ाओ।

3. रोज़ सुबह-शाम यह विचार करना चाहिए-यह ______ रत्न _____ जीवन के लिए रूहानी बाप से मिलते हैं। पुरूषोत्तम बनने के लिए पढ़ रहे हैं। हम पुरूषोत्तम ______ पर हैं।बाबा अनेक प्रकार से समझाते रहते हैं। तुम भी स्लोगन लिखते हो ‘बी होली एण्ड ______ ‘।सर्विस की युक्तियाँ तो बाबा बहुत बतलाते हैं, बच्चों को _______ में लाना चाहिए।
° अमूल्य, अमूल्य, संगमयुग, राजयोगी, अमल

4. बाबा ने कहा सबके दु:ख दूर करने वाले हम *रूहानी पण्डे* -गाइड्स, सबको *मुक्ति-जीवनमुक्ति की राय* -एडवाइज देते। तो मुक्ति-जीवनमुक्ति में जाने लिये क्या करना है? (2)
° अमरपुरी में जाने के लिए तुम *पवित्र* बन रहे हो। (पतित-पावन आकर राय देते *पावन* बनने की। मुक्तिधाम में कोई भी जा नहीं सकते, जब तक बाप एडवाइज़ न करे, श्रीमत न दे।)
° *मामेकम् याद करो* तो तुम्हारे जन्म-जन्मान्तर के पाप कट जायेंगे। (याद से ही बेड़ा पार है।)

5. बाबा ने आज *परमधाम* को कौन-कौन से नाम दिये? (6)
° मुक्तिधाम, *आत्माओं की अमरपुरी*, परमधाम, शान्तिधाम, शिव नगरी, मूलवतन

6. और *सतयुग* को कौन-से नाम दिये? (7)
° अमरपुरी, *अमरनाथ पुरी*, स्वर्ग, फूलों का बगीचा, नई दुनिया, वाइसलेस वर्ल्ड, सुखधाम, (वर्सा, सद्गति)

7. स्वर्ग *ऊपर में* है _(सही / गलत)_
° *गलत* (मुक्तिधाम ऊपर में है। जीवनमुक्ति में तो यहाँ ही आना है। यह बाप तुम्हें समझाते हैं, उनको अच्छी रीति धारण कर नॉलेज का ही मंथन करना है।)

8. याद को सहज करने लिए *परमपिता परमात्मा शिवबाबा* की कौन-कौन सी *महिमा* आज की मुरली में है? (5)
° वह भी आत्मा ही है। सिर्फ उनको परमपिता परमात्मा कहते हैं, वह हमको समझा रहे हैं। वही *ज्ञान का सागर है, पवित्रता का सागर* है। अब बच्चों को पवित्र बनाने लिए श्रीमत देते।
° यह तो सब कहते हैं *पतित-पावन*।
° *सद्गति दाता* ज्ञान का सागर है ही एक।
° ज्ञान का सागर है, *प्रेम का सागर* है।
° *गीता का भगवान* शिव

9. हमे कौन-सा *नशा* सदा चढ़ा रहना चाहिए, धन्धा आदि करते भी? (2)
° तुम बच्चों को यह नशा रहना चाहिए कि *हम बाप को याद कर जन्म-जन्मान्तर के लिए पवित्र बनते* हैं। तुम जानते हो भल कितने भी विघ्न पड़ें *स्वर्ग की स्थापना तो जरूर होनी है*। नई दुनिया की स्थापना और पुरानी दुनिया का विनाश होना ही है। यह बना-बनाया ड्रामा है, इसमें संशय की बात ही नहीं।
° बुद्धि में रहे – *बाप हमको पढ़ा रहे* हैं। जिस पढ़ाई से हम *मनुष्य से देवता बन जायेंगे*। इसमें तकलीफ की कोई बात नहीं। (धन्धे आदि से भी कुछ टाइम निकाल याद कर सकते हो। छुट्टी लेकर जाए बाबा को याद करो। सारा दिन ऐसे ही थोड़ेही गंवाना है। हम भविष्य का तो कुछ ख्याल करें। युक्तियाँ बहुत हैं, जितना हो सके टाइम निकाल बाप को याद करो।)

10. मातायें तो बिचारी अबोध होती हैं। कहती हैं हम *पढ़ी-लिखी नहीं हैं*। तो बाबा ने कौन-सा वन्डरफुल उत्तर दिया?
° बाप कहते हैं नहीं पढ़े तो *अच्छा है* । वेद-शास्त्र जो कुछ पढ़े हैं वह *सब यहाँ भूल जाना* है। अभी मैं जो सुनाता हूँ, वह सुनो।

11. *स्टूडेन्ट* घर में यही ख्याल करते-यह पेपर भरकर देना है, आज यह करना है। तो हम बच्चों को *अपने कल्याण* के लिए क्या ख्याल करते रहना है?
° आत्मा को *सतोप्रधान* बनाना है। *पवित्र* बन मुक्तिधाम में जाना है और *नॉलेज* से फिर देवता बनते हैं।

12. बाबा अनेक प्रकार से समझाते रहते। फिर भी देह-अभिमान में आने से भूल जाते। तो इस *देह-अभिमान को मिटाने* लिए कौन-सी युक्ति है? (2)
° *जितना याद करते रहेंगे* उतना देह-अभिमान टूटता जायेगा।
° अपनी *सम्भाल करते रहो। देखो*, हमारा देह-अभिमान टूटा है? (हम अभी जा रहे हैं फिर हम विश्व के मालिक बनेंगे। हमारा पार्ट ही हीरो-हीरोइन का है।)

13. आत्मा ही पुरूषार्थ करती विश्व का मालिक बनने। बाप कहते यह पक्का याद कर लो हम आत्मा हैं। यह पुरूषार्थ *देवता बनने के बाद* भी करना पड़ेगा। _(सही / गलत)_
° *गलत* (देवताओं को याद नहीं करना पड़ता क्योंकि वह तो है ही पावन। प्रालब्ध भोग रहे हैं, पतित थोड़ेही हैं जो बाप को याद करें। तुम आत्मा अभी पतित हो इसलिए बाप को याद करना है।)

14. यह ड्रामा है। इसमे *हर दिन एक समान* है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (एक भी दिन एक समान नहीं होता। यह ड्रामा चलता रहता। सारे दिन का पार्ट सेकण्ड बाई सेकण्ड बदलता रहता। शूट होता रहता। तो बाप बच्चों को समझाते हैं, कोई भी बात में हार्टफेल मत हो।)

15. प्रदर्शनी वा *म्युज़ियम* में हमारे कौन-से नाम रख सकते? (2)
° लिखो *गाइड टू हेविन*
° वा *नई विश्व की राजधानी के गाइड्स* ।

16. _____ वा _____ है तो उनको भी युक्ति से यह रूहानी पढ़ाई पढ़ानी चाहिए, जिससे कल्याण हो। बाकी इस जिस्मानी पढ़ाई से क्या होगा। हम यह पढ़ाते हैं। बाकी थोड़े दिन हैं।
अन्दर _____ आती रहेगी – कैसे मनुष्यों को रास्ता बतायें।
°टीचर, प्रोफेसर, उछल

17. *गीता का भगवान् शिव* लिखने से फेल कर दिया। तो क्या यह सत्य बात वे कभी समझेंगे?
° *हाँ* (आगे चलकर समझेंगे बरोबर इस बच्ची ने जो लिखा था वह सत्य है। जब प्रभाव निकलेगा वा प्रदर्शनी अथवा म्युज़ियम में उनको बुलायेंगे तो पता चलेगा और बुद्धि में आयेगा यह तो राइट है।)

18. क्षत्रियपने की निशानी _____ दिया है। परन्तु हमारा तो पार्ट है ऊंच ते ऊंच हीरो-हीरोइन का। यह नाम तब पड़ता है जब कोई ______ पाते हैं। _______ कन्या उनको कहा जाता है जो अपवित्र बनने के बाद फिर पवित्र बनती है।
°बाण, विजय, अधर

19. भल कोई कितने भी लखपति वा करोड़पति हो परन्तु तुम जानते हो यह सब ____ हो जायेंगे। तुम आत्मायें धनवान बनती जाती हो। बाकी सब _____ में जा रहे हैं।
°विनाश, देवाले

20. भक्ति में भी बहुत दानी होते हैं। (सुबह को उठकर अन्न की मुट्ठी निकालते, गरीबों को दान करते।) परन्तु बाबा कहते *पात्र को दान* देना चाहिए। (इस समय तो यह बहुत जरूरी है ध्यान रखना)। तो बाहर में एसे ही भीख में पैसे देना, यह क्यों ठीक नहीं है?
° उन्हों का तो यह धन्धा हो जाता। (और यदि दुरुपयोग करते, तो हमारा भी कर्मों का खाता बनता।)

Answers from Sakar Murli 01-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 01-09-2020*

1. _______ ही ब्राह्मण जीवन के कदम हैं, कदम पर कदम रखना माना ______ के समीप पहुंचना।
°मर्यादायें, मंजिल

2. सर्व _____ के अनुभव द्वारा _____ बनने वाले सदा ______ -मूर्त भव। सर्व आत्मायें ढूंढेगी कि सुख-शान्ति के मास्टर ______ कहाँ हैं। तो जब आपके पास सर्वशक्तियों का ______ होगा तब तो सबको सन्तुष्ट कर सकेंगे। जैसे आजकल एक ही ______ से सब चीजें मिल जाती हैं, ऐसे आपको भी बनना है।
°प्राप्तियों, पावरफुल, सफलता, दाता, स्टॉक, स्टोर

3. सतयुग में *घर-घर में सोझरा* होता। अर्थात्‌ क्या?
° *हर एक आत्मा पवित्र* बन जाती है। उसको कहा जाता है – घर-घर में सोझरा। (तुम्हारी ज्योत जगी हुई है। ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है।)

4. *योग अग्नि* से क्या प्राप्तियां होती? (3) और *ज्ञान धन* से क्या प्राप्तियां है?
° योग अग्नि द्वारा पतित से *पावन* बनेंगे। योग से *एवर हेल्दी* पवित्र। योगी की *आयु बड़ी* होती है।
° नॉलेज से धन मिलता है। , ज्ञान से *एवर वेल्दी* धनवान बनते हैं।

5. *ओम् शान्ति* कहने से ही क्या निश्चय हो जाता? (2)
° *हमारा स्वधर्म शान्त* है, जब घर में रहते हैं।
° हम आत्मायें यहाँ की रहवासी नहीं हैं। हम तो *शान्तिधाम की रहवासी* हैं। (फिर यहाँ आकर पार्ट बजाते, शरीर के साथ कर्म करते।)

6. हम *सेना* क्या करती? किन बातों का हमे *नशा* होना चाहिए? (3)
° (सेना) तुम जानते हो *याद के बल से पवित्र बन हम राजा रानी* बन रहे हैं। फिर दूसरे जन्म में गोल्डन स्पून इन माउथ होगा।
° *बड़ा इम्तहान पास* करने वाले मर्तबा भी बड़ा पाते हैं। जितनी पढ़ाई उतना सुख। यह तो *भगवान पढ़ाते हैं* । यह नशा चढ़ा हुआ रहना चाहिए। चोबचीनी ( *ताकत का माल* ) मिलता है। भगवान बिगर ऐसा *भगवान-भगवती* कौन बनायेंगे। तुम अभी पतित से पावन बन रहे हो फिर *जन्म-जन्मान्तर के लिए सुखी* बन जायेंगे। *ऊंच पद* पायेंगे।

7. जो चढ़ेंगे फिर भी गिरेंगे फिर इतना *पुरुषार्थ ही क्यों करें?* _(सही / गलत)_ (4)
° नहीं, फिर तो ऐसे भी समझें अगर *खाना* मिलना होगा तो *आपेही मिलेगा*, फिर इतनी मेहनत कर कमाते ही क्यों हो? वैसे हम भी देख रहे हैं अब *चढ़ती कला* का समय आया है, वही *देवता घराना* स्थापन हो रहा है तो क्यों न अभी ही वो *सुख* ले लेवें।
° जैसे देखो अब कोई *जज बनना* चाहता है तो जब *पुरुषार्थ* करेगा तब उस *डिग्री* को हांसिल करेंगे ना।
° इस अविनाशी ज्ञान का विनाश नहीं होता। करके इतना पुरुषार्थ न कर *दैवी रॉयल घराने* में न भी आवे परन्तु अगर कम पुरुषार्थ किया तो भी उस *सतयुगी दैवी प्रजा* में आ सकते हैं।
° पुरुषार्थ करना अवश्य है क्योंकि *पुरुषार्थ से ही प्रालब्ध* बनेगी, बलिहारी पुरुषार्थ की ही गाई हुई है।

8. नई दुनिया में एक भी ____ हो न सके। नई दुनिया का _____ है परमपिता परमात्मा, वही पतित-पावन है, उनकी ______ भी जरूर पावन होनी चाहिए। पतित सो पावन, पावन सो पतित, यह बातें दुनिया में किसकी _____ में बैठ न सकें।
°पतित, रचयिता, रचना, बुद्धि

9. मीठे-मीठे सिकीलधे नूरे _____ , श्याम से _____ बनने वाली आत्माओं प्रति मात-पिता बापदादा का दिल व ____ , _____ व प्रेम से याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
°रत्न, सुन्दर, जान, सिक

10. निश्चयबुद्धि बनने के बाद फिर कभी किसी भी बात में _____ नहीं उठाना है। विकर्मों से बचने के लिए कोई भी कर्म अपने _____ में स्थित होकर बाप की ____ में करना है। कहते हैं ना ____ की बेड़ी हिलती है परन्तु डूबती नहीं।
°संशय, स्वधर्म, याद, सच

11. पुरुषार्थ और ______ दो चीज़ें हैं, पुरुषार्थ से ____ बनती है। यह अनादि सृष्टि का चक्र फिरता रहता है, जो आदि सनातन भारतवासी पूज्य थे, वही फिर ____ बनें फिर वही पुरुषार्थ कर पूज्य बनेंगे, यह उतरना और _____ अनादि ड्रामा का खेल बना हुआ है।
°प्रालब्ध, प्रालब्ध, पुजारी, चढ़ना

12. यह *ड्रामा हूबहू रिपीट* होता है, तो क्या आलमाइटी परमात्मा सदा ऐसे खेल को देख खुद *थकता नहीं* है? जैसे 4 ऋतुओं में सर्दी, गर्मी आदि का फर्क रहता है तो क्या इस *खेल में फर्क* नहीं पड़ेगा?
° यही तो *खूबी है* इस ड्रामा की, हूबहू रिपीट होता है।
° इस ड्रामा में और भी खूबी है जो *रिपीट होते हुए भी नित्य नया* लगता है। (साक्षी हो देखने से)

13. साधू-सन्यासी आदि से *विकर्म नहीं हो सकता* क्योंकि वह पवित्र रहते हैं। सन्यास किया हुआ है। _(सही / गलत)_
° गलत (वास्तव में पवित्र किसको कहा जाता, यह नहीं जानते। कहते भी हैं हम पतित हैं। *पतित-पावन* को बुलाते हैं। वह जब तक वह *न आये तब तक दुनिया पावन नहीं* बन सकती। और फिर *मन्सा-वाचा कर्मणा विकारों के अंश से भी परे* जाना हैं।)

14. विकारों की *कट* चढ़ी हुई है, उसकी *निशानी* क्या होगी?
° उन्हें *पुरानी दुनिया की कशिश* होती रहेगी। *बुद्धि* क्रिमिनल तरफ जाती रहेगी। याद में रह नहीं सकेंगे।

15. रावण राज्य में सब कर्म विकर्म बनने का मूल बीज़ है – विकार। जिन पुराने संस्कारों कारण ही अच्छे-अच्छे फर्स्टक्लास बच्चे गिर कर सौ गुणा चढ़ाकर नाम बदनाम करते। तो *इस पुराने-पन से परे जाने* की कौन-सी *जबरदस्त युक्ति* बाबा ने आज सुनाई (3)
° *आत्मायें सब भाई-भाई* हैं। *भगवान की सन्तान* होकर फिर क्रिमिनल एसाल्ट कैसे करते हैं। हम बी.के. विकार में जा नहीं सकते। इस युक्ति से ही पवित्र रह सकते हैं।
° (नहीं तो) जैसे *शूद्र* समान पतित हो गया।
° (स्लोगन) गाया भी हुआ है- *अमृत पीकर* विष क्यों खाये! (फिर बाहर में जाए दूसरों को सताते)।

16. यह *ईश्वरीय नॉलेज सर्व मनुष्य आत्माओं के लिये* है (सर्व धर्म लिए, भल हरेक के अपने नॉलेज-शास्त्र-मत-संस्कार है)। इसके लिए मम्मा ने कौन-सा श्रेष्ठ *तर्क* दिया? (2)
° जब इस *मनुष्य सृष्टि झाड़ का बीज रूप परमात्मा है* तो उस परमात्मा द्वारा जो नॉलेज प्राप्त हो रही है वो सब मनुष्यों के लिये जरुरी है।
° सभी को यह नॉलेज लेने का अधिकार है। भल ज्ञान न भी उठा सके, परन्तु सबका पिता होने कारण उनसे *योग लगाने से* फिर भी पवित्र अवश्य बनेंगे। इस *पवित्रता के कारण अपने सेक्शन में पद अवश्य पायेंगे* (योग को तो सभी मानते, और मुक्ति लिए भी सजाओं से मुक्त होने की शक्ति इस योग द्वारा ही मिल सकती।)

17. ज्ञान अमृत है ही ज्ञान _____ के पास। शास्त्र पढ़ने से तो कोई पतित से पावन बन नहीं सकते। दूसरो को समझाने की बच्चों में नम्बरवार _____ रहती है। नम्बरवार में रहते हैं।
°सागर, ताकत, याद

18. महारथियों को भाषण पर बुलाते। तो *महाराजाओं* को क्या समझा सकते? (2)
° तुम ही पहले *पावन पूज्य* थे, अभी तो यह है ही पतित दुनिया। पावन दुनिया में तुम भारतवासी *आदि सनातन देवी-देवता धर्म के डबल सिरताज* सम्पूर्ण निर्विकारी थे। महारथियों को तो ऐसे समझाना होगा ना।
° इस नशे से समझाना होता है। भगवानुवाच-काम चिता पर बैठ सांवरे बन जाते हैं फिर *ज्ञान चिता पर बैठने से गोरा* बनेंगे।

19. *चित्र* तो बहुतों के काले बनाते हैं (रामचन्द्र, श्रीनाथ आदि) उनसे पूछना चाहिए- *काला क्यों बनाया है?* कह देंगे यह तो ईश्वर की भावी। यह तो चलता आता है। तो उन्हें क्या समझा सकते? (4)
° बाप समझाते हैं *काम चिता* पर बैठने से पतित दु:खी वर्थ नाट ए पेनी बन जाते हैं। वह है *निर्विकारी* दुनिया। यह है विकारी दुनिया।
° ऐसे-ऐसे समझाना चाहिए। यह *सूर्यवंशी* , यह चन्द्रवंशी फिर *वैश्य वंशी* बनना ही है (वाम मार्ग)।
° जो *सतोप्रधान गोरे थे* , वही काम चिता पर बैठने से काले तमोप्रधान बने हैं।
° वह है *गोल्डन एज* , यह है *आइरन एज*। कट चढ़ जाती है ना। अभी तुम्हारी *कट उतर रही* है। (जो याद करते)

20. वास्तव में पावन बन फिर पावन दुनिया में जाना है। परन्तु कई समझते हैं फलाने ने *मोक्ष* को पाया। इसके लिए बाबा ने कौन-सा तर्क सुनाया?
° उनको *क्या पता* , अगर मोक्ष को पा लिया फिर तो उनका *क्रियाकर्म* आदि भी नहीं कर सकते। (यहाँ ज्योत आदि जगाते हैं कि उनको कोई तकलीफ न हो। अंधियारे में ठोकरें न खायें। आत्मा तो एक शरीर छोड़ दूसरा जाकर लेती है, एक सेकण्ड की बात है। अंधियारा फिर कहाँ से आया?)

21. *रिद्धि-सिद्धि* की बातों में कुछ रखा नहीं। इसके लिए बाबा ने कौन-सी वन्डरफुल बात सुनाई?
° समझो कोई को *पंख* आ जाते हैं, उड़ने लगते हैं – फिर क्या, *उससे फायदा क्या* मिलेगा? बाप तो कहते हैं मुझे *याद करो तो विकर्म विनाश होंगे* (और अनादि गुण जागृत होंगे!)

22. कृष्ण को *योगेश्वर* क्यों कहते?
° *ईश्वर* की याद ( *योग* ) से कृष्ण बना है। (उनको स्वर्ग में योगेश्वर नहीं कहेंगे। वह तो प्रिन्स है। पास्ट जन्म में ऐसा कर्म किया है, जिससे यह बना है।)