Answers from Sakar Murli 27-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 27-10-2020*

1. _____ स्वरूप बनो तो चेहरे से खुशनसीबी की झलक दिखाई देगी।
° _अनुभवी_

2. मुरलीधर बन *मुरली के राज़-साज़ द्वारा माया को सदा के लिए न्योछावर / सरेन्डर* करने लिए मुख्य प्रैक्टिकल पॉइंट कौन-सी ध्यान पर रखनी है?
° माया का मुख्य स्वरूप कारण के रूप में आता है। जब *मुरली द्वारा कारण का निवारण* मिल जायेगा तो *माया सदा के लिए समाप्त* हो जायेगी। कारण खत्म अर्थात् माया खत्म।

3. तुम बच्चों को बहुत _____ होना चाहिए। तुम जानते हो हम तो भगवान के बच्चे हैं। अभी हमको जरूर वर्सा मिलना चाहिए। तुम बच्चों के ____ में रोमांच खड़े हो जाने चाहिए – भगवान पढ़ाते हैं, जरूर तुमको भगवान-भगवती बनायेंगे।आपसमान _____ भी बनाते हैं। _____ सागर भी बनाते हैं फिर अपने से भी जास्ती, विश्व का ____ बनाते हैं। पवित्र, अपवित्र का कम्पलीट ____ तुमको बजाना होता है। तुम जानते हो बाबा आया हुआ है फिर से आदि सनातन देवी-देवता धर्म स्थापन करने।
° _फखुर (नशा)_, _खुशी_, _पवित्र_, _ज्ञान_, _मालिक_, _पार्ट_

4. तुम जानते हो हम पुरूषार्थ कर रहे हैं, _____ घराने में पहले-पहले आने के लिए। यह है ही नर से नारायण बनने की कथा। तीसरा _____ आत्मा को मिलता है। हम आत्मा पढ़कर नॉलेज सुन _____ बन रहे हैं। फिर सो राजाओं का राजा बनेंगे। शिवबाबा कहते हैं मैं तुमको डबल _____ बनाता हूँ। तुम्हारी अभी कितनी _____ खुल गई है, ड्रामा अनुसार कल्प पहले मुआफिक।
° _सूर्यवंशी_, _नेत्र_, _देवता_, _सिरताज_, _बुद्धि_

5. “मीठे बच्चे – भिन्न-भिन्न _____ सामने रख याद की यात्रा पर रहो, इस पुरानी _____ को भूल अपने स्वीट ____ और नई _____ को याद करो”
° _युक्तियां_, _दुनिया_, _होम_, _दुनिया_

6. *रूहानी अवस्था* में निश्चयबुद्धि होकर बैठना वा सुनना है। क्यों?
° *रूहानी बाप बैठ रूहानी बच्चों को समझाते हैं इसलिए* रूहानी बच्चों को देही-अभिमानी या रूहानी अवस्था में निश्चयबुद्धि होकर बैठना वा सुनना है। (बाप ने समझाया है – आत्मा ही सुनती है इन आरगन्स के द्वारा, यह पक्का याद करते रहो।)

7. साथ में 84 का चक्र-खेल भी बुद्घि में रखना है। तो इस *खेल* को कौन-से नाम दे सकते? (4) ( _____ और _____ का खेल)
° चलते-फिरते बुद्धि में यह रहे। *सद्गति* और दुर्गति, *ज्ञान* और भक्ति, *सुख* और दु:ख, *दिन* और रात का खेल कैसे चलता है।

8. तुमको निरन्तर बाप की याद और इस नॉलेज में रहना है। इससे तुम्हारे _____ भी विनाश होते हैं और तुम _____ भी पाते हो। जानते हो यह पुरानी ____ तो अब खलास होनी है। अन्दर में _____ रहता है – अभी हम नये मकान में जायेंगे।
° _विकर्म_, _राज्य_, _दुनिया_, _निश्चय_

9. कौन सी एक्ट अथवा पुरूषार्थ *अभी ही* चलता है, सारे कल्प में नहीं?
° याद की यात्रा में रह *आत्मा को पावन बनाने का पुरूषार्थ*, सारी दुनिया को पतित से पावन बनाने की एक्ट सारे कल्प में सिर्फ इसी संगम समय पर चलती है। (यह एक्ट हर कल्प रिपीट होती है। तुम बच्चे इस अनादि अविनाशी ड्रामा के वण्डरफुल राज़ को समझते हो।)

10. अब तुम्हारे तो हैं ____ चित्र, इसलिए तुम समझा सकते हो – रांग क्या, राइट क्या है। बाबा ने चित्रों पर भी समझाया है कि यह है ____ के चित्र। तुम्हारे इन चित्रों में ____ के आदि-मध्य-अन्त का राज़ आ जाता है। बच्चे जो सर्विस करने वाले हैं, ____ -समान बनाते जाते हैं। पढ़कर पढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। जितना जास्ती पढ़ेंगे उतना ____ पद पायेंगे। बाप कहते हैं मैं तदबीर तो कराता हूँ, परन्तु ____ भी हो ना। हर एक ड्रामा अनुसार पुरुषार्थ करते रहते हैं।
° _रीयल_, _सद्गति_, _सृष्टि_,
_आप_, _ऊंच_, _तकदीर_

11. बाबा को कहते नॉलेजफुल, बाप, टीचर, सतगुरू, पतित-पावन, *लिब्रेटर, गाइड। कहाँ का गाइड?*
° *शान्तिधाम, मुक्तिधाम का*। (वहाँ तक बाप ले जाकर छोड़ेंगे। बच्चों को पढ़ाकर, सिखलाकर, गुल-गुल बनाकर घर ले जाए छोड़ेंगे। बाप के सिवाए तो कोई ले जा नहीं सकते। तुम्हारी बुद्धि में है कि शान्तिधाम तो हमारा घर है। वहाँ जाकर फिर नई दुनिया में हम पहले-पहले आयेंगे।)

12. कहते रहते हैं एक राज्य, एक धर्म, एक भाषा, एक मत हो। वह तो ____ द्वारा ही स्थापन हो सकता है।
° _एक_

13. बोलते सब ऐसे हैं, हमको पावन बनाओ। पतित आत्मा, पावन आत्मा, महान् आत्मा आदि। हे पतित-पावन आकर मुझे पावन बनाओ। *परन्तु आत्मा कैसे पावन बनेगी*?
° उसके लिए चाहिए *अविनाशी सर्जन* । (आत्मा पुकारती उसको है जो पुनर्जन्म रहित है। आत्मा को पवित्र बनाने की दवाई उनके पास ही है।)

14. उस *फिल्म* और इस *ड्रामा के पार्ट* में क्या अन्तर है?
° वह फिल्म घिसकर पुरानी हो जाती है। *यह है अविनाशी*। (यह भी वण्डर है। कितनी छोटी आत्मा में सारा पार्ट भरा हुआ है। बाप तुम्हें कितनी गुह्य-गुह्य महीन बातें समझाते हैं। अभी कोई भी सुनते हैं तो कहते हैं यह तो बड़ी वण्डरफुल बातें समझाते हो। आत्मा क्या है, वह अभी समझा है। शरीर को तो सब समझते हैं, डाक्टर आदि। तुम्हारी बुद्धि में यह सब बातें हैं – कि यह नाटक है, सभी आत्मायें पार्टधारी हैं जिनमें अविनाशी पार्ट भरा हुआ है।)

15. वह बाप है अकाल ____ । आत्मा का यह तख्त है ना, जिससे यह पार्ट बजाते हैं। तो बाप को भी पार्ट बजाने, सद्गति करने के लिए ___ चाहिए ना। बाप कहते हैं मुझे _____ तन में ही आना है।
° _मूर्त_, _तख्त_, _साधारण_

16. ब्रह्मा बाबा ने अपना कौन-सा *अनुभव* आज सुनाया?
° हमारा अपना घरघाट मित्र-सम्बन्धी आदि कुछ भी नहीं, *हमको क्या याद पड़ेगा*, सिवाए बाप के और तुम बच्चों के कुछ नहीं है। *सब कुछ एक्सचेंज कर दिया* । बाकी बुद्धि कहाँ जायेगी। *बाबा को रथ दिया है*। जैसे तुम वैसे हम पढ़ रहे हैं। सिर्फ रथ बाबा को लोन पर दिया है।

17. हम बच्चों को किन्हो-किन्हो का *उद्धार* करना है? (3)
° यह भी समझाते रहते हैं – *वेश्याओं* की सर्विस करो। *गरीबों* का भी उद्धार करना है।
° तुम्हारे ऊपर बहुत रेसपान्सिबिलिटी है। *अहिल्यायें, कुब्जायें, भीलनियां, गणिकायें* इन सबका उद्धार करना है।
° गायन भी है *साधुओं* का भी उद्धार किया है। (अभी वह तुम्हारे बन जाएं तो रिवोलूशन हो जाए। यह पिछाड़ी में होगा।)

18. (वेश्याओं को) अभी तुम यह धंधा छोड़ _____ की मालिक बनो। होशियार हो जायेंगे तो फिर अपने _____ को भी समझायेंगे। हाल में चित्र आदि रख बैठकर समझाओ तो सब कहेंगे वाह वेश्याओं को शिवालय वासी बनाने के लिए यह ____ निमित्त बनी हैं। समझाने की युक्तियां तो सब बच्चों को बताते रहते हैं। ऐसा कार्य करके दिखाओ जो मनुष्यों के मुख से _____ निकले। गायन भी है शक्तियों में ____ बाण भगवान ने भरे थे। तुम जानते हो यह बाण 🏹 तुमको इस दुनिया से उस दुनिया में ले जाते हैं। तो तुम बच्चों को बहुत ____ बुद्धि बनना है। एक जगह भी तुम्हारा नाम हुआ, गवर्मेन्ट को मालूम पड़ा तो फिर बहुत प्रभाव निकलेगा।
° _शिवालय_, _ऑफिसर्स_, _बी.के._, _वाह-वाह_, _ज्ञान_, _विशाल_

19. तुम *धन* क्या करेंगे! _(हमे तो कुछ नहीं चाहिए)_। तो जो धन आता, उसको कैसे सफल करते?
° तुम बड़े-बड़े *सेन्टर्स* खोलेंगे। पैसे से *चित्र* आदि बनाने होते हैं। (मनुष्य देखकर बड़ा वण्डर खायेंगे। कहेंगे पहले-पहले तो तुमको प्राइज़ देनी चाहिए। गवर्मेन्ट हाउस में भी तुम्हारे चित्र ले जायेंगे। इन पर बहुत आशिक होंगे। दिल में चाहना होनी चाहिए – मनुष्य को देवता कैसे बनायें।)

20. इस सृष्टि चक्र की भेंट *बड़ के झाड़* से क्यों की जाती?
° शाखायें ढेर निकलती हैं, थुर है नहीं। यह भी कितने धर्मों की शाखायें निकली हैं, *फाउन्डेशन देवता धर्म है नहीं। प्राय:लोप* है। (बाप कहते हैं वह धर्म है परन्तु धर्म का नाम फिरा दिया है। पवित्र न होने के कारण अपने को देवता कह न सकें। न हो तब तो बाप आकर रचना रचे ना। अभी तुम समझते हो हम पवित्र देवता थे। अभी पतित बनें हैं। हर चीज़ ऐसे होती है। तुम बच्चों को यह भूलना नहीं चाहिए। पहली मुख्य मंजिल है बाप को याद करने की, जिससे ही पावन बनना है।)

21. सतयुग-त्रेता में सूर्यवंशी दैवी राजाओ का *धर्म शास्त्र* कोई कहेंगे?
° नहीं, सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी का तो एक ही शास्त्र है, परन्तु वह गीता कोई रीयल नहीं है क्योंकि तुमको जो *ज्ञान मिलता है वह तो यहाँ ही खत्म हो जाता। वहाँ कोई शास्त्र नहीं।* (द्वापर से जो धर्म आते हैं उन्हों के शास्त्र चले आ रहे हैं। अब फिर एक धर्म की स्थापना होती है तो बाकी सब विनाश हो जाने हैं।)

Answers from Sakar Murli 26-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 26-10-2020*

1. कर्म में योग का ______ होना अर्थात् कर्मयोगी बनना।
° _अनुभव_

2. अब वर्तमान लास्ट समय प्रमाण *पुरूषार्थ की गति भी बदल गई* हैं। तो अब किस बात पर विशेष अटेन्शन रखना है?
° मन्सा द्वारा ही विश्व परिवर्तन के निमित्त बनना है इसलिए अब *मन्सा का एक संकल्प भी* व्यर्थ हुआ तो बहुत कुछ गंवाया, *एक संकल्प को भी* साधारण बात न समझो, वर्तमान समय *संकल्प की* हलचल भी बड़ी हलचल गिनी जाती है तो *संकल्प में ही फुल स्टॉप* चाहिए। (जब मन्सा पर इतना अटेन्शन हो तब चढ़ती कला द्वारा विश्व परिवर्तक बन सकेंगे।)

3. वैल्यु सबसे जास्ती _____ की होती है। बाप कहते हैं विचार करो सतयुग में तुम्हारे ____ के महल कैसे थे। वहाँ तो सब _____ भरी होती हैं। ढेर का ढेर _____ होता है। तो बच्चों को कितनी _____ होनी चाहिए।
° _हीरे_, _सोने_, _खानियां_, _सोना_, _खुशी_

4. आधा-कल्प के लिए हम ____ -धाम का मालिक बनते हैं। तुमको कितना नशा रहना चाहिए – हम बेहद के बाप के _____ हैं। बाप स्वर्ग की स्थापना करते हैं, हम 21 जन्म के लिए _____ बनते हैं। कितनी _____ होनी चाहिए।
° _सुख_, _वारिस_, _वारिस_, _खुशी_

5. बाप कहते हैं तुम ____ हो ना। बच्चे भी कहते हैं बाबा आप ____ हैं। बाप कहते हैं कल्प पहले भी तुमको पढ़ाकर ____ -भाग्य दिया था। ______ ऐसे करते रहेंगे।
° _वही_, _वही_, _राज्य_, _कल्प-कल्प_

6. घड़ी-घड़ी पूछना चाहिए ____ में। बच्चों को कितनी खुशी होती है – ओहो! आज बेहद के बाप की _____ आई है। शिवबाबा ब्रह्मा द्वारा रेसपान्ड करते हैं। बच्चों को बड़ी खुशी होती है। सबसे जास्ती ______ होती हैं बांधेलियां। ओहो! हम बन्धन में हैं, बेहद का बाप हमको कैसे ____ लिखते हैं। नयनों पर रखती हैं। तुम्हारे में भी बापदादा का पत्र देख कर कई बच्चों के एकदम ____ खड़े हो जाते हैं। प्रेम के ______ आ जाते हैं। चुम्मन करेंगी, आंखों पर रखेंगी। बहुत प्रेम से पत्र पढ़ती हैं।
° _पत्र_, _चिट्ठी_, _गद्-गद्_, _चिट्ठी_, _रोमांच_, _आंसू_

7. इस समय तुमको बहुत खुशी होती है क्योंकि _____ मिलती है। तुम्हारा नाम बहुत है। वन्दे मातरम्, शिव की _____ सेना तुम हो ना। बाप कहते हैं यह ड्रामा बना हुआ है। इनमें मेरा भी पार्ट है। मैं हूँ ______ । मेरे को _____ करने से तुम पवित्र बन जाते हो। सबसे जास्ती चुम्बक है ______ , वही ऊंच ते ऊंच रहते हैं।
° _लॉटरी_, _शक्ति_, _सर्वशक्तिमान_, _याद_, _शिवबाबा_

8. तुम्हारा है अविनाशी _____ धन। तुमको कितनी बड़ी लॉटरी मिलती है। _____ अनुसार फल मिलता है ना। अभी बाप तुम बच्चों को श्रेष्ठ _____ सिखला रहे हैं। जैसा-जैसा जो कर्म करेगा, ______ करेगा तो उसका रिटर्न भी ऐसा मिलेगा। अच्छा कर्म ही करना है। कोई कर्म करते हैं, समझ नहीं सकते तो उसके लिए _____ लेनी है।
° _ज्ञान_, _कर्मों_, _कर्म_, _सर्विस_, _श्रीमत_

9. कोई समय मुरझाइस आती है तो बाबा ने समझाया है – *कई ऐसे रिकार्ड हैं जो तुमको फौरन खुशी में ला देंगे*। सारा ज्ञान बुद्धि में आ जाता है। तो आज मुरली में कौन-सा गीत 🎶 था?
° *तुम्हें पाके हमने……..* बच्चों ने गीत सुना। (अब फिर से बच्चों को स्मृति आई है – हम बेहद के बाप से बेहद का वर्सा लेते हैं, जो कोई छीन न सके, वहाँ दूसरा कोई छीनने वाला होता ही नहीं है। उसको कहा जाता है अद्वैत राज्य। बाबा हमको विश्व का मालिक बनाते हैं।)

10. जिसका वारिस बनते हैं, उनको भी जरूर याद करना है। *याद करने बिगर तो वारिस बन नहीं सकते* । क्यों?
° याद करे *तो पवित्र बनें* तब ही वारिस बन सकें। (तुम जानते हो श्रीमत पर हम विश्व के मालिक डबल सिरताज बनते हैं। जन्म बाई जन्म हम राजाई करेंगे।)

11. “मीठे बच्चे – श्रीमत पर भारत को _____ बनाने की सेवा करनी है, हम फिर से _____ बनते हैं, तो पहले स्वयं ______ बनना है फिर दूसरों को कहना है”
° _स्वर्ग_, _देवता_, _निर्विकारी_

12. तुम *महावीर बच्चों* को किस बात की परवाह नहीं करनी है? सिर्फ कौन सी *चेकिंग* करते स्वयं को सम्भालना है?
° अगर कोई *पवित्र बनने में विघ्न* डालता है तो तुम्हें उसकी परवाह नहीं करनी है।
° सिर्फ चेक करो कि मैं *महावीर* हूँ? मैं अपने आपको *ठगता* तो नहीं हूँ? बेहद का *वैराग्य* रहता है? मैं *आप समान* बनाता हूँ? मेरे में *क्रोध* तो नहीं है? जो दूसरों को कहता हूँ वह *खुद भी करता* हूँ?

13. समझाने की प्वाइंट्स बाबा अच्छी-अच्छी देते रहते। नोट कर फिर उस पर विचार सागर मंथन करना है, *ऐसा क्या-क्या लिखें जो मनुष्य समझें*। तो आज बाबा ने क्या लिखने 📝 को कहा?
° भारत जो सम्पूर्ण निर्विकारी स्वर्ग था वह अब विकारी नर्क बन गया है। फिर हम *श्रीमत पर भारत को स्वर्ग* बना रहे हैं। तुम जानते हो *पवित्र बनाने वाला पतित-पावन* एक ही बाप है।(यही भारतवासी आदि सनातन देवी-देवता धर्म वाले थे तो वाइसलेस थे फिर 84 जन्मों के बाद विशश बनें। अब फिर वाइसलेस बनना है। परन्तु पुरूषार्थ कराने वाला चाहिए। अभी तुमको बाप ने बताया है।)

14. यह 84 जन्मों की सीढ़ी बहुत अच्छी ____ है। तुम भी जो आते हैं, उनको समझाकर ऐसी-ऐसी _____ दे सकते हो। चीज़ हमेशा देने के लिए ____ रहती है। तुम्हारे पास भी ______ तैयार रहनी चाहिए।
° _चीज़_, _सौगात_, _तैयार_, _नॉलेज_

15. हमने कैसे ____ जन्म लिए हैं – यह याद रहना चाहिए। यह समझ की बात है ना। जरूर जो _____ आये हैं उन्होंने ही 84 जन्म लिए हैं। बाप 84 जन्म बताकर फिर कहते हैं इनके बहुत जन्मों के अन्त में _____ तन में प्रवेश कर, _____ करता हूँ। फिर इनका नाम रखता हूँ ____ । इन द्वारा _____ रचता हूँ।
° _84_, _पहले_, _साधारण_, _एडाप्ट_, _ब्रह्मा_, _ब्राह्मण_

16. इनको (ब्रह्मा बाबा को) तो सब _____ है। बतलाते भी हैं ____ का छोरा था और ____ का मालिक बना।
° _याद_, _गांवड़े_, _बैकुण्ठ_

17. भ्रमरी का भी _____ है। तुम ______ हो ना – बी.के., यह तो सच्चे-सच्चे ब्राह्मण हुए। प्रजापिता ____ कहाँ है? जरूर यहाँ होगा ना। बाबा का प्लैन है मनुष्य को _____ बनाने का।
° _मिसाल_, _ब्राह्मणियाँ_, _ब्रह्मा_, _देवता_

18. ____ ताज वाले सारे विश्व के मालिक तो बन न सकें। _____ ताज वाले विश्व के मालिक तुम बनते हो। उस समय दूसरी कोई ____ है ही नहीं। पहले तो सारे विश्व पर एक ही _____ था।
° _सिंगल_, _डबल_, _राजाई_, _राज्य_

19. ____ का युग चल रहा है। गीता का ही _____ युग गाया जाता है। तुम लिखो भी ऐसे – गीता का यह ____ युग है। जबकि पुरानी दुनिया बदल नई होती है। तुम्हारी बुद्धि में है – बेहद का बाप जो हमारा टीचर भी है, उनसे हम ____ सीख रहे हैं। अच्छी रीति पढ़ेंगे तो डबल सिरताज बनेंगे। कितना बड़ा ___ है। राजाई स्थापन होती है।
° _गीता_, _पुरूषोत्तम_, _पुरूषोत्तम_, _राजयोग_, _स्कूल_

20. कैसे यह सब ड्रामा के एक्टर्स हैं जो _____ बजाते आये हैं। अभी सबके कलियुगी ____ -बन्धन टूटने हैं। फिर जायेंगे शान्तिधाम। वहाँ से फिर सबका ____ सम्बन्ध जुटेगा। जैसा जो पुरूषार्थ करेंगे वह पहले आते रहेंगे। यह सब बना-बनाया _____ है। यह ड्रामा का चक्र ____ होता है ना।
° _पार्ट_, _कर्म_, _नया_, _खेल_, _रिपीट_

21. *वैराग्य* दिलाने लिए बाबा ने कौन-सी पॉइंट्स सुनाई? (2)
° तुम जानते हो यह सब *कब्रदाखिल* होने हैं इसलिए हम उनको याद क्यों करें। (ज्ञान से सब कुछ समझना है अच्छी रीति। वह भी ज्ञान से ही घरबार छोड़ते हैं।)
° मनुष्य तो बड़े-बड़े महल बिल्डिंग आदि देख समझते हैं यही स्वर्ग है। बाप कहते हैं यह तो *सब मिट्टी, पत्थर हैं, इनकी कोई वैल्यु नहीं।*

Answers from Sakar Murli 23-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 23-10-2020*

1. ईश्वरीय शक्तियों से बलवान बनो तो ____ का फोर्स समाप्त हो जायेगा।
° _माया_

2. अन्तिम विनाश लीला में हम *साक्षी दृष्टा बन शान्ति-शक्ति की किरणें* सर्व आत्माओं के प्रति कब दे सकेंगे?
° इसके लिए *विश्व कल्याणकारी की ऊंची स्टेज* चाहिए। (जिस स्टेज पर स्थित होने से *देह के सर्व आकर्षण* अर्थात् सम्बन्ध, पदार्थ, संस्कार, प्रकृति के *हलचल की आकर्षण समाप्त* हो जाती।)

3. तुमको ऐसा बाप मिला है तो बहुत ____ होनी चाहिए। यहाँ बच्चे आते हैं बाप से _____ सुनने। यहाँ ताजा-ताजा _____ बाबा चढ़ाते हैं। यहाँ तुम समझते हम बाबा के _____ में बैठे हैं। तुमको अपने से भी ____ बनाता हूँ। ऐसे बाप को तुम भूल जाते हो। दुनिया में सच्ची _____ किसको भी मिल न सके। पवित्रता, सुख, शान्ति, सम्पत्ति सिवाए बाप के कोई दे नहीं सकता।
° _खुशी_, _डायरेक्ट_, _नशा_, _परिवार_, _ऊंच_, _शान्ति_

4. *कौन-से* रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप बैठ समझाते हैं? _(मुरली की शुरूआत)_
° *नये विश्व वा नई दुनिया के मालिक बनने वाले* रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप बैठ समझाते हैं। (यह तो बच्चे समझते हैं कि बाप आये हैं *बेहद का वर्सा* देने।)

5. हमे *दिव्यगुण धारण* कर श्रेष्ठ-लायक क्यों बनना चाहिए? _(बाबा ने 2 सुन्दर कारण सुनाये)_
° क्योंकि बाप आकर *तुमको श्रेष्ठ देवता बनाते* हैं। (सच खण्ड में रहने वाले *सच्चे-सच्चे मनुष्य* लक्ष्मी-नारायण। बाकी मनुष्यों में आसुरी गुण होते हैं तो चलन जानवरों मिसल हो जाती है।)
° हमको *बेहद के बाप ने एडाप्ट किया* है। हम उनके बने हैं। (बाप है *स्वर्ग का रचयिता* । तो ऐसे स्वर्ग का मालिक बनने के लायक सर्वगुण सम्पन्न बनना पड़े। यह लक्ष्मी-नारायण सर्वगुण सम्पन्न थे। बच्चों को इस एक जन्म के लिए ही ज्ञान सागर द्वारा शिक्षा मिलती है क्योंकि अभी दुनिया को चेन्ज होना है।)

6. *देवता बनने वाले* बच्चों को विशेष किन बातों का ध्यान रखना है? (3)
° कभी कोई बात में *रूठना* नहीं, *शक्ल मुर्दे जैसी* नहीं करनी है।
° किसी को भी *दु:ख नहीं देना* है। देवता बनना है तो *मुख से सदैव फूल* निकलें। (अगर कांटे वा पत्थर निकलते हैं तो पत्थर के पत्थर ठहरे।)
° *गुण बहुत अच्छे* धारण करने हैं। ( *यहाँ ही सर्वगुण सम्पन्न* बनना है। सज़ा खायेंगे तो फिर पद अच्छा नहीं मिलेगा।)

7. तो ऐसा दिव्यगुण-सम्पन्न *श्रेष्ठ बनने की युक्ति* क्या है?
° श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ बनने के लिए बाबा *श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ मत* देते हैं। *पुरूषार्थ* कर ऐसा श्रेष्ठ बनना है। मुझे *याद* करो। (बाप बच्चों को ही कहते हैं कि मुझे याद करो। *पतित-पावन* एक ही बाप है। अभी हम उस *पावन* बनाने वाले बाप को याद करते हैं, *जीवनमुक्ति* दाता वह एक ही है।)

8. अच्छी रीति *याद* करते हो तो बाप द्वारा तुम्हें *ताकत* मिलती। परन्तु यहाँ रहते भी बहुतों की बुद्धि बाहर में भटकती रहती है। तो फिर बाबा ने कौन-सी वन्डरफुल *युक्ति* सुनाई? _(जिसका बल याद में मदद करेंगा।)_ (2)
° इसलिए बाबा कहते हैं यहाँ *चित्रों के सामने बैठ जाओ* तो तुम्हारी बुद्धि इसमें बिजी रहेगी। गोले पर, सीढ़ी पर *किसको समझाओ*। (बोलो सतयुग में बहुत थोड़े मनुष्य होते हैं। अभी तो ढेर मनुष्य हैं। बाप कहते हैं मैं ब्रह्मा के द्वारा नई दुनिया की स्थापना कराता हूँ, पुरानी दुनिया का विनाश कराता हूँ। ऐसे-ऐसे बैठ प्रैक्टिस करनी चाहिए। चित्र तो सबको मिल सकते हैं, हिम्मत रखनी चाहिए – अपने घर का कल्याण करें।)
° अपना *कमरा चित्रों से सजा दो* तो तुम बिजी रहेंगे। यह जैसे तुम्हारी *लाइब्रेरी* हो जायेगी। (दूसरों का कल्याण करने के लिए चित्र आदि लगा देना चाहिए। जो आये उनको समझाओ। तुम बहुत सर्विस कर सकते हो। बाबा इतनी उन्नति की युक्तियां बतलाते हैं।)

9. सेवा करने लिए *मुख नहीं खुलता*। तो बाबा का जबरदस्त उत्तर?
° अपना मुख *आपेही* खोल सकते हैं। अन्दर में जो चलता है वह बाहर में भी निकलना चाहिए।
(गूँगे तो नहीं हो ना। *घर में रड़ियां मारने के लिए मुख खुलता है, ज्ञान सुनाने के लिए नहीं खुलता!*)

10. कितना *मम्मा को याद करते* हैं। बाप कहते हैं याद करते हो, यह तो ठीक है, परन्तु………… क्या? (3)
° अभी सिर्फ मम्मा के नाम-रूप को याद नहीं करना है। हमको भी *उन जैसी धारणा करनी है*। (हम भी मम्मा जैसे *अच्छा बनकर गद्दी लायक* बनें। सिर्फ मम्मा की महिमा करने से थोड़ेही हो जायेंगे।)
° बाप तो कहते हैं मामेकम् याद करो, याद की यात्रा में रहना है। *मम्मा जैसा ज्ञान सुनाना* है।
° मम्मा की महिमा का *सबूत* तब हो जब तुम भी ऐसे *महिमा लायक बनकर दिखाओ* । (सिर्फ मम्मा-मम्मा कहने से पेट नहीं भरेगा। शिवबाबा को याद करने से पेट भरेगा।)

11. *हम शिवबाबा को देते* हैं। _(सही / गलत)_
° नहीं, हमने शिवबाबा से पद्म *लिया*, दिया नहीं। *बाबा तो तुमको अनगिनत देते* हैं। शिवबाबा तो *दाता* है, तुम उनको देंगे कैसे? (मैंने दिया, यह समझने से फिर देह-अभिमान आ जाता है। हम शिवबाबा से ले रहे हैं। बाबा के पास इतने ढेर बच्चे आते हैं, आकर रहते हैं तो प्रबंध चाहिए ना। गोया तुम देते हो अपने लिए। उनको अपना थोड़ेही कुछ करना है। राजधानी भी तुमको देते हैं इसलिए करते भी तुम हो।)

12. भक्ति भी पहले एक की करते हैं क्योंकि सर्व की _____ करने वाला एक है फिर दूसरे किसी की भक्ति क्यों करनी चाहिए। इन _____ को भी बनाने वाला, _____ -योग सिखलाने वालातो शिव है ना। बाप को ____ करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। बाकी गंगा में जाकर एकदम ____ जाओ तो भी विकर्म विनाश नहीं होंगे।
° _सद्गति_, _लक्ष्मी-नारायण_, _राज_, _याद_, _डूब_

13. भक्ति मार्ग में भल गाते *हे पतित-पावन* आओ। परन्तु…… क्या?
° *पावन राजायें कैसे होते* हैं फिर पतित राजायें कैसे होते हैं, यह राज़ कोई नहीं जानते। ज्ञान को तो और कोई जानता नहीं। तुम बच्चों को *बाप समझाते हैं और ऐसा बनाते* हैं। (कर्म तो यह देवतायें भी सतयुग में करते हैं परन्तु पतित कर्म नहीं करते हैं। उनमें दैवीगुण हैं, स्वर्गवासी।)
° बाबा अपना और अपनी रचना के आदि-मध्य-अन्त की सारी नॉलेज देते। *बाप कितना सहज समझाते* हैं – तुम आत्मायें पार्टधारी हो। (आत्मायें अपने घर से आकर यहाँ पार्ट बजाती हैं। उनको मुक्तिधाम कहा जाता है। स्वर्ग है जीवनमुक्ति। यहाँ तो है जीवन बंध। मोक्ष कभी होता नहीं, पार्ट से तो निकल नहीं सकते। यह अनादि बना बनाया खेल है। वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी हूबहू रिपीट होती है। सतयुग में वही देवता आयेंगे। फिर पीछे इस्लामी, बौद्धी आदि सब आयेंगे। यह ह्युमन झाड़ बन जायेगा। इनका बीज ऊपर में है। बाप है मनुष्य सृष्टि का बीजरूप।)

14. *मनुष्य सृष्टि में* धीरे-धीरे बहुत वृद्धि होती जाती है। अच्छा, फिर छोटी कैसे होती?
° क्योंकि जब बाप आकर पतित से पावन बनाते हैं, तो *कितने थोड़े पावन बनते* हैं। *कोटों में कोई* निकलते हैं। आधाकल्प बहुत थोड़े होते हैं। (सबसे जास्ती सम्प्रदाय उन देवताओं की होनी चाहिए क्योंकि पहले-पहले यह आते हैं परन्तु और-और धर्मों में चले जाते हैं क्योकि बाप को ही भूल गये हैं। यह है एकज़ भूल का खेल। भूलने से कंगाल हो जाते हैं। भूलते-भूलते एकदम भूल जाते हैं।)

15. कोई भी प्रापर्टी का झगड़ा आदि है, तो *लड़ते ही रहना* चाहिए। _(सही / गलत)_
° नहीं, *झगड़ा खलास कर दो*। झगड़ा करते-करते तो प्राण भी निकल जायेंगे। (बाप समझाते हैं इसने छोड़ा तो कोई झगड़ा आदि थोड़ेही किया। कम मिला तो जाने दो, उसके बदले कितनी राजाई मिल गई। बाबा बताते हैं मुझे साक्षात्कार हुआ विनाश और राजाई का तो कितनी खुशी हुई। हमको विश्व की बादशाही मिलनी है तो यह सब क्या है।)

Answers from Sakar Murli 24-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 24-10-2020*

1. फर्स्ट 🥇 ______ में आने के लिए कर्मेन्द्रिय जीत, मायाजीत बनो।
° _डिवीजन_

2. शरीर निर्वाह और आत्म निर्वाह (गृहस्थ व्यवहार और ईश्वरीय व्यवहार ) *दोनों सेवाओं में समानता* लाने की युक्ति क्या है? _(जिससे सदा हल्के और सफल रहेंगे)_ (2)
° यदि *श्रीमत का कांटा ठीक* है तो दोनों साइड समान होंगे।
° लेकिन गृहस्थ शब्द बोलते ही बहाने बाजी शुरू हो जाती इसलिए गृहस्थी नहीं *ट्रस्टी हैं* , इस स्मृति से दोनों में समानता रखो।

3. तुम देखते हो सारी दुनिया ______ बन जाती है। सब कुछ नया, वहाँ _____ का नाम नहीं। पांच तत्व भी तुम्हारी ____ में हाज़िर रहते हैं। बाप अभी ____ बनाते हैं।
° _सब्ज (हरी-भरी)_, _दु:ख_, _सर्विस_, _लायक_

4. तुम बच्चे जानते हो बाप _____ का मालिक बनाने आये हैं। ऐसे बाप को बहुत _____ से याद करो। बेहद के बाप के बच्चे हो ना। ______ मिलती है याद से। बाप को वर्ल्ड _____ अथॉरिटी कहा जाता है। सभी वेदों शास्त्रों का सार बताते हैं।
° _स्वर्ग_, _प्यार_, _शक्ति_, _आलमाइटी_

5 .रूप- ____ बन मुख से सदैव ____ रत्न ही निकालने हैं। _____ के उमंग में रहना है। याद में रहना और सबको बाप की याद दिलाना – यही दिव्य ____ कार्य करना है।
° _बसन्त_, _ज्ञान_, _सर्विस_, _अलौकिक_

6. तुम आकर एक माशूक पर फिदा हुए हो। तो इस *माशूक* की कौन-सी *3 अनोखी विशेषताएं* सुनाई?
° यहाँ तो *एक माशूक बाकी सब हैं आशिक*। (सब बाप को याद करते हैं, हमारे दु:ख दूर करो।)
° यह तुम्हारा माशूक *एवर गोरा* है, कभी सांवरा बनता नहीं।
° बाप *मुसाफिर आकर सबको गोरा बनाते* हैं। (तुम भी मुसाफिर हो ना। दूरदेश से आकर यहाँ पार्ट बजाते हो। तुम्हारे में भी नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार समझते हैं।)

7. “मीठे बच्चे – तुम हो सच्चे-सच्चे _____ जो अभी ____ पर फिदा होते हो, इस फिदा होने का ही ____ यह दीपावली है। सच्चा-सच्चा _____ बन एक ____ पर फिदा होना है अर्थात् बलि चढ़ना है, तभी सच्ची दीपावली होगी।
° _परवाने_, _शमा_, _यादगार_, _आशिक_, _माशूक_

8. *दीपावली* के और कौन-से 2 अर्थ बाबा ने सुनाए?
° दीपावली क्यों मनाते हैं? क्योंकि *देवताओं की ताज-पोशी* होती है। (कारोनेशन पर बत्तियां आदि बहुत जलाते हैं।)
° दूसरा फिर कहा जाता है – *घर-घर में दीपमाला* । हर एक आत्मा की *ज्योत जग जाती* है। (अभी सब आत्माओं की ज्योति उझाई हुई है। आइरन एजड है यानी अन्धियारा है। अन्धियारा माना भक्ति मार्ग। भक्ति करते-करते ज्योत कम हो जाती है। बाकी वह दीपमाला तो आर्टीफिशियल है। लक्ष्मी को बुलाते हैं। पूजा करते हैं। यह उत्सव हैं भक्ति मार्ग के।)

9. बाबा ने अपने बच्चों को कौन-सा *समाचार* सुनाया है?
° बाबा ने सुनाया – तुम आत्मायें *निर्वाणधाम से कैसे आती* हो और मैं कैसे आता हूँ। मैं *कौन* हूँ, *क्या* करता हूँ, *कैसे* रामराज्य स्थापन करता हूँ, *कैसे* तुम बच्चों को रावण पर विजय पहनाता हूँ। (अभी तुम बच्चे इन सब बातों को जानते हो। तुम्हारी ज्योति जगी हुई हैं।)

10. गीत 🎶:-तुम्हीं हो माता पिता…… इस गीत में कौन-से *अक्षर* सही नहीं?
° अब बच्चे *चरणों की धूल* थोड़ही होते हैं। यह रांग है। बाप बच्चों को राइट अक्षर समझाते हैं।

11. *रामराज्य* और *रावणराज्य* के बीच कौन-से 3 अन्तर बाबा से सुनाए?
° रावणराज्य में *कितने करोड़* हैं, रामराज्य में *थोड़े* होते हैं
° रामराज्य में *धीरे-धीरे वृद्धि* को पाते हैं। रावणराज्य में *वृद्धि बहुत* होती है
° क्योंकि रावणराज्य में मनुष्य *विकारी* बन जाते हैं। रामराज्य में हैं *निर्विकारी* । (मनुष्यों की ही कहानी है। तो राम भी बेहद का मालिक, रावण भी बेहद का मालिक है। अभी कितने अनेक धर्म हैं। गाया हुआ है अनेक धर्मों का विनाश।)

12. दिखाते हैं *लंका में रावण* राज्य करते थे, सीता को चुराकर लंका में ले गया, इसलिए *रावण को जलाते* हैं दशहरा पर। इसका *बेहद* और वास्तविक अर्थ क्या है? (2)
° अब बाप कहते हैं *सारे विश्व पर रावण का राज्य* है। रामराज्य अब नहीं है। (रामराज्य अर्थात् ईश्वर का स्थापन किया हुआ। सतयुग को कहा जाता है रामराज्य।)
° अभी तो बेहद का *विनाश*, सच्चा-सच्चा दशहरा होना है।

13. अभी तुम ____ बन गये हो। रचता और _____ के आदि-मध्य-अन्त को जानते हो। तो तुम हो गये _____ ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ। तुमको सबसे अच्छा टाइटिल मिलता है ______ ।
° _त्रिकालदर्शी_, _रचना_, _त्रिकालदर्शी_, _स्वदर्शन चक्रधारी_

14. शिवबाबा को भी *स्वदर्शन चक्रधारी* कहेंगे। _(सही / गलत)_
° हाँ, *शिवबाबा स्वदर्शन चक्रधारी न हो तो तुमको कैसे बनाये* । (वह सबसे सुप्रीम ऊंच ते ऊंच आत्मा है। देह को थोड़ेही कहा जाता। वह सुप्रीम बाप ही आकर तुमको सुप्रीम बनाते हैं। स्वदर्शन चक्रधारी आत्माओं के सिवाए कोई बन न सके।)

15. कितनी अच्छी-अच्छी बातें हैं। तुम सुनते हो और खुश होते हो। बाहर वाले यह सुनें तो आश्चर्य खायें, *ओहो! यह तो बहुत ऊंच ज्ञान है* । तो क्या उत्तर दे सकते?
° अच्छा *तुम भी ऐसा* स्वदर्शन चक्रधारी *बनो* तो फिर *चक्रवर्ती राजा विश्व का मालिक बन जायेंगे*। (परन्तु यहाँ से बाहर गये खलास। माया इतनी बहादुर है, यहाँ की यहाँ रही। जैसे गर्भ में बच्चा अन्ज़ाम (वायदा) कर निकलता है फिर भी वहाँ की वहाँ रह जाती है। तुम प्रदर्शनी आदि में समझाते हो, बहुत अच्छा-अच्छा करते हैं। नॉलेज बहुत अच्छी है, मैं ऐसा पुरूषार्थ करूँगा, यह करुँगा…..। बस बाहर निकला, वहाँ की वहाँ रही। परन्तु फिर भी कुछ न कुछ असर रहता है।)

16. बाप कहते हैं मैं तुमको ____ वैतरणी नदी से निकाल ____ -सागर में भेज देता हूँ। असुल तुम _____ -धाम के निवासी थे। फिर ___ -धाम में पार्ट बजाने आये। अभी फिर हम जाते हैं।
° _विषय_, _क्षीर_, _शान्ति_,
_सुख_

17. गाते भी हैं तुम मात-पिता…… वह सुख घनेरे तो होते ही हैं _____ में। अभी है संगम। यहाँ पिछाड़ी में त्राहि-त्राहि करेंगे क्योंकि अति ____ होता है। फिर सतयुग में अति ____ होगा। अति सुख और अति दु:ख का यह _____ बना हुआ है।
° _सतयुग_, _दु:ख_, _सुख_, _खेल_

18. ईश्वर ही आकर भारत को स्वर्ग बनाते हैं। उनका त्योहार शिवजयन्ती मनाते हैं। तो यह त्योहार *सारे विश्व में गॉड फादर का त्योहार* रूप में कब मनाएंगे?
° अगर मालूम होता कि *परमपिता परमात्मा शिव ही मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा देते* हैं तो फिर सारे विश्व में गॉड फादर का त्योहार मनाते।
° बेहद के बाप का यादगार मनायें तब *जब समझें कि शिवबाबा ही लिबरेटर, गाइड है* । (उनका जन्म ही भारत में होता है। शिव जयन्ती भी भारत में मनाते हैं। परन्तु पूरी पहचान नहीं तो हॉलीडे भी नहीं करते हैं। जो बाप सर्व की सद्गति करने वाला, उनकी जन्म भूमि जहाँ अलौकिक कर्तव्य आकर करते हैं, उनका जन्म दिन और तीर्थ यात्रा तो बहुत मनानी चाहिए, स्टैम्प भी होना चाहिए।)

19. भारत बहुत ऊंच ते ऊंच ____ है। भारत की महिमा ______ गाई हुई है। यहां ही शिवबाबा का जन्म होता है। तुम बच्चे जानते हो इसको कहा जाता है – ____ भूमि। यहाँ जितने धर्मात्मा रहते हैं उतने और कहाँ नहीं। तुम कितना दान-पुण्य करते हो। ____ को जानकर, तन-मन-धन सब इस ____ में लगा देते हो।
° _खण्ड_, _अपरमअपार_, _धर्म_, _बाप_, _सेवा_

Answers from Sakar Murli 22-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 22-10-2020*

1. परमात्म ____ का अनुभव करो तो सब कुछ सहज अनुभव करते हुए ____ रहेंगे।
° _साथ_, _सेफ_

2. लोक पसन्द सभा के मेम्बर बनना अर्थात् ला एण्ड आर्डर का राज्य अधिकार व राज्य सिंहासन प्राप्त कर लेना। तो *लोक पसन्द बनने की युक्ति* कौन-सी है? (2)
° कोई भी संकल्प करते हो तो पहले चेक करो कि *यह संकल्प बाप पसन्द है?* (जो बाप पसन्द है वह लोक पसन्द स्वत:बन जाते हैं।)
° यदि किसी भी *संकल्प* में स्वार्थ है तो मन पसन्द कहेंगे और *विश्व कल्याणार्थ है* तो लोकपसन्द व प्रभू पसन्द कहेंगे।

3. लौकिक बाप बच्चों को कहते हैं – *तुम्हारे लिए यह लाया हूँ* तो बच्चे कितना खुश होते हैं। और बाबा क्या कहते?
° बाबा भी कहते हैं *तुम्हारे लिए बहिश्त लाया हूँ*। (तुम वहाँ राज्य करेंगे तो कितनी खुशी होनी चाहिए।)

4. *सतयुग* की कौन-कौन सी बातें बाबा ने सुनाई? _(गिनने की कोशिश करे)_ (9)
° देहली *परिस्तान* बन जायेगी। एक ही परिस्तान में *लक्ष्मी-नारायण का राज्य* चलता है।
° कितने *बड़े-बड़े महल* बनते होंगे। ( *बेहद की जागीर* मिलती है। तुमको कुछ खर्चा नहीं करना पड़ता है। बाबा कहते हैं इनकी (ब्रह्मा की) लाइफ में ही कितना सस्ता अनाज था। तो सतयुग में कितना सस्ता होगा।)
° *देहली जितने तो एक-एक के घर और जमीन* आदि होगी। (मीठी नदियों पर तुम्हारा राज्य चलेगा। एक-एक को क्या नहीं होगा।)
° *सदा अन्न* मिलता रहेगा। वहाँ के कितने *बड़े-बड़े फल-फूल होते* हैं। तुम *शूबीरस* पीकर आते हो।
° वहाँ *कितने थोड़े* होंगे। कहाँ अभी इतने करोड़, कहाँ 9 लाख होंगे।
° *सब कुछ तुम्हारा होगा*। (बाप ऐसी राजाई देते हैं जो हमसे कोई छीन न सके। आसमान, धरती आदि सबके मालिक तुम रहते हो। गीत भी बच्चों ने सुना।)

5. शिव के बच्चों की बरात है। वह पतियों का ____ भी है। कहते हैं तुम सब ब्राइड्स हो। मैं हूँ ______ । तुम सब आधाकल्प से आशिक हो, मैं हूँ ____। अभी मैं आया हूँ सब ______ हैं। भक्तों की रक्षा करने वाला है भगवान। भक्ति का फल सतयुग में भोगते हो, जो अब बच्चों को दे रहे हैं। साथ ले जायेंगे फिर तुम अपने पुरूषार्थ अनुसार जाकर राज्य-भाग्य लेंगे। तुम सब हो _____ । मैं हूँ कथा सुनाने वाला अमरनाथ।
° _पति_, _ब्राइडग्रूम_, _माशूक_, _भक्तियां_, _पार्वतियां_

6. कह देते ईश्वर तो सर्वशक्तिमान् हैं, सब कुछ कर सकते हैं। परन्तु इतना लव नहीं रहता। यहाँ ईश्वर को ____ कहा जाता है, सबसे मीठा अक्षर।। कहने से ही ____ मिलने की बात हो जाती है। शिवबाबा कहते हैं हमेशा _____ – _____ कहना चाहिए। ईश्वर वा प्रभू आदि अक्षर भूल जाने चाहिए। बाबा ने कहा है – मामेकम् ____ करो। प्रदर्शनी आदि में भी जब समझाते हो तो घड़ी-घड़ी शिवबाबा का ____ दो। शिवबाबा एक ही ऊंच ते ऊंच है, जिसको गॉड फादर कहा जाता है।
° _बाबा_, _वर्सा_, _बाबा_, _बाबा_, _याद_, _परिचय_

7. बाबा को लिखते हैं *बाबा इतनी खुशी नहीं रहती* है। माया के तूफान आते हैं। तो बाबा ने कौन-सी जबरदस्त युक्ति सुनाई?
° अरे माया के तूफान आये – तुम बाजा बजा लो। *ऐसे-ऐसे गीत* 6-8 हैं जो *सुनने से ही खुशी का पारा* चढ़ जाता है। (देखो अवस्था में कुछ गड़बड़ है, तो गीत बजा लो। यह है खुशी के गीत। तुम तो अर्थ भी जानते हो। बाबा बहुत युक्तियां बतलाते हैं अपने को हर्षितमुख बनाने की।)
° इनका अर्थ तो तुम बच्चे समझते हो। यह *सुनने से भी खुशी* में आ जायेंगे। परन्तु बच्चे भूल जाते हैं।
° घर में किसको गमी होती है तो भी गीत सुनकर बड़े खुश होंगे। यह *बहुत वैल्युबुल चीज़* है।

8. सतयुग में कोई मनुष्य तो क्या जानवर भी *रोगी नहीं होते* हैं, क्यों?
° क्योंकि संगमयुग पर *बाबा अविनाशी सर्जन* सभी आत्माओं का और बेहद सृष्टि का *ऐसा ऑपरेशन कर देते हैं, जो रोग का नाम-निशान ही नहीं रहता*। (अभी जो सारी सृष्टि रोगी है, इस सृष्टि में फिर दु:ख का नाम-निशान नहीं होगा। यहाँ के दु:खों से बचने के लिए बहुत-बहुत बहादुर बनना है।)

9. छोटी सौगात देते तो कहते बाबा आप तो हमको विश्व की बादशाही देते हो, *यह सौगात क्या है* । बाबा का उत्तर?
° अरे *शिवबाबा की यादगार* साथ रहेगी तो *शिवबाबा की याद* रहेगी और तुमको *पद्म* मिल जायेंगे।

10. हम विश्व के मालिक बनेंगे फिर फूलों की वर्षा होगी, जयजयकार हो जायेगी। *सोने के स्थूल फूल बरसेंगे*। _(सही / गलत)_
° नहीं, तुम अभी कांटे से सोने के फूल बन रहे हो ना। फिर तुम्हारा अवतरण होगा, *फूल नहीं बरसते लेकिन तुम फूल बनकर आते हो*। (वास्तव में तुम फूल बनकर आते हो। *सोने के फूल तुम* ऊपर से उतरते हो। तुम बच्चों को कितनी लॉटरी मिल रही है विश्व के बादशाही की।)

11. तुम हो _____ शक्तियां। तुम्हारे ____ कमल से ____ अमृत निकलता है। तुम्हारा नाम बाला करने गऊ मुख कह दिया है। ज्ञान अमृत पिया तो फिर ____ पी नहीं सकते। अमृत पीने से तुम _____ बनते हो।
° _शिव_, _मुख_, _ज्ञान_, _विष_, _देवता_

12. *ओम् शान्ति* के कौन-से 4 प्रकार के अर्थ बाबा ने सुनाये? _(जिसे रावण राज्य में भूलने से क्रिमिनल आई-एक्ट हो दु:खी हुए)_
° मैं *आत्मा शान्त स्वरूप* हूँ।
° हमारा निवास स्थान *शान्तिधाम* में है।
° *(शान्ति के सागर) बाबा* की हम सब सन्तान हैं।
° सब *आत्मायें* ओम् कहती हैं, वहाँ हम *सब भाई-भाई* हैं फिर यहाँ *भाई-बहन* बनते हैं। और कोई सम्बन्ध नहीं। (यह तो साधारण पाई-पैसे का खेल है, रावण राज्य में क्रिमिनल आई-एक्ट हो दु:खी हुए, फिर तुम मुझे याद करते हो तो अपना राज्य-भाग्य आधाकल्प के लिए लेते हो।)

13. आज *सत* -गुरूवार है, इस विषय पर बाबा ने क्या सुनाया? (3)
° हमेशा *सत बोलना चाहिए* । (व्यापार में भी कहते हैं ना – सत बोलो। झूठ बोलते हैं इसलिए सत को याद करते हैं।)
° कहते हैं ना – सत नाम संग है। *अभी सत के साथ तुम आत्माओं का संग* हुआ है तो तुम ही साथ जायेंगे।
° तुम बच्चे जानते हो शिवबाबा आया हुआ है, *जिसको ट्रूथ कहा जाता* है। (वह हम आत्माओं को पवित्र बनाकर साथ ले जायेंगे एक ही बार।)

14. बाप कहते हैं अभी मैं तुम बच्चों के पास आया हूँ, *नयनों पर बिठाए* ले जाता हूँ। कौन-से नैन?
° यह नैन नहीं, *तीसरा नेत्र*। (तुम जानते हो इस समय बाप आये हैं – साथ ले जायेंगे।)

15. दशहरा मनाना *हद की बात* कैसे है?
° क्योंकि *रावणराज्य तो अभी सारे विश्व पर* है। सिर्फ लंका पर नहीं है। विश्व तो बहुत बड़ी है ना। (बाप ने समझाया है यह सृष्टि सारी सागर पर खड़ी है। ऐसे नहीं बैल वा गऊ 🐄 के सींग पर सृष्टि खड़ी है।)

16. कितनी इन्वेन्शन निकालते हैं कि बच्चे पैदा कम कैसे हों। फसल बहुत अच्छी होगी आदि। परन्तु *कलियुगी दुनिया की वास्तविकता* क्या है?
° *नर चाहत कुछ और* , भई कुछ औरे की और। (नैचुरल कैलेमिटीज़ को तो कोई समझ न सके। कोई बात का ठिकाना थोड़ेही है। कहाँ फसल हो और बर्फ के ओले ❄️🌨️ पड़ जाएं तो कितना नुकसान हो पड़ता। बारिश न पड़ी तो भी नुकसान, इनको कुदरती आपदायें कहा जाता है। यह तो ढेर होने वाली हैं, इनसे बचने के बहुत-बहुत बहादुर होना चाहिए।)

Answers from Sakar Murli 21-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 21-10-2020*

1. सर्वशक्तिवान बाप को _____ बना लो तो माया पेपर टाइगर बन जायेगी।
° _साथी_

2. किसी भी लौकिक-अलौकिक कार्य में सफलता प्राप्त करने लिए विशेष *कन्ट्रोलिंग पावर* और *जजमेंट पावर* की आवश्यकता होती हैं। कैसे? (2)
° क्योंकि जब कोई भी आत्मा आपके सम्पर्क में आती है तो *पहले जज* करना होता कि इसे *किस चीज़ की जरूरत* है (नब्ज द्वारा परख कर उसकी चाहना प्रमाण उसे तृप्त करना।)
° और स्वयं की कन्ट्रोलिंग पावर से दूसरे पर अपनी *अचल स्थिति का प्रभाव* होता। (यही दोनों शक्तियां सेवा के क्षेत्र में सफलतामूर्त बना देती है।)

3. सतयुग में एक _____ , एक राज्य था। कितने हीरे जवाहरों के ____ हैं। _भारत_ ऐसा था जिसको पैराडाइज कहते थे। इनकी (देवताओं की) तो महिमा सर्वगुण सम्पन्न.. है, इनमें 5 विकार नहीं हैं क्योंकि ____ -अभिमानी हैं तो बाप कहते हैं मुख्य बात है ____ की।
° _धर्म_, _महल_, _देही_, _याद_

4. इन लक्ष्मी-नारायण की जरूर _____ होगी। इन्हों ने सबसे जास्ती मेहनत की है तब ______ पाई है। जरूर इन्हों की बहुत प्रजा होगी। ऊंच ते ऊंच _____ पाया है, जरूर बहुत योग लगाया है तब ____ विद ऑनर हुए।
° _राजधानी_, _स्कालरशिप_, _पद_, _पास_

5. अपने को आत्मा निश्चय कर बाप को याद करते, इसमे पहले समझना होता भगवान कौन है?अतीन्द्रिय ____ में भी रहना है। आत्मा को बहुत ____ होनी चाहिए। हमको बेहद का बाप मिला है। बाप एक ही बार आकर मिलते हैं विश्व की ____ का वर्सा देते हैं, 5 हजार वर्ष पहले मिसल। आत्मा को आन्तरिक गुप्त _____ रहता है।यह सब ___ उनको होगी जो योग में रहते हैं। याद से ___ मिलती है जिससे विकर्म विनाश होते हैं। ज्ञान तो है सोर्स ऑफ इनकम।
° _सुख_, _खुशी_, _बादशाही_, _नशा_, _धारणा_, _शक्ति_

6. _____ ही शरीर में आकर पार्ट बजाती है। _____ जैसा तीखा रॉकेट 🚀 और कोई हो नहीं सकता। _____ का भान खत्म करना है। मेहनत करनी है – _____ -अभिमानी बनने की, फिर कर्मेन्द्रियां धोखा नहीं देंगी। ज्ञान से तीसरे ____ को धारण कर अपनी धोखेबाज आंखों को _____ बनाना है। याद से ही _____ शीतल, सतोगुणी बनेगी इसलिए यही मेहनत करनी है।
° _आत्मा_, _आत्मा_, _शरीर_, _देही_, _नेत्र_, _सिविल_, _कर्मेन्द्रियां_

7. हमारी *साइलेन्स* कैसी है? _(आज की मुरली अनुसार)_
° अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना – यह है *डेड साइलेन्स*। (मैं आत्मा शरीर से अलग हूँ। यह शरीर पुरानी जुत्ती 👟 है। सर्प 🐍 कछुए 🐢 के मिसाल भी तुम्हारे लिए हैं, तुम ही कीड़े जैसे मनुष्यों को भूँ-भूँ 🐝कर मनुष्य से देवता बनाती हो।)

8. कल्प पहले वाले *भाग्यशाली बच्चों* को बाप की कौन सी बात फौरन टच होगी?
° बाबा रोज़-रोज़ जो बच्चों को *याद की युक्तियां* बतलाते हैं, वह भाग्यशाली बच्चों को ही टच होती रहेंगी। (वह उन्हें फौरन अमल में लायेंगे।)

9. बाप ही आकर आत्माओं को रूहानी योग सिखलाते हैं। *बाबा कहते हैं यह तो बहुत सहज योग है*। तो आज बाबा ने याद को सहज करने लिये कौन-सी युक्तियां सुनाई? (3)
° बाबा कहते बच्चे कुछ टाइम *एकान्त में बगीचे में जाकर बैठो* । (बाबा से मीठी-मीठी बातें करो। धन्धे आदि से *टाइम निकाल* एकान्त में जाकर याद में बैठना है।)
° अपना *चार्ट* रखो तो उन्नति होती रहेगी। ( *डायरी* रखने से डर रहेगा, हमारा घाटा न निकल आये। बाबा देखेंगे तो क्या कहेंगे – इतने मोस्ट बिलवेड बाबा को इतना समय ही याद करते हो! लौकिक बाप को, स्त्री को तुम याद करते हो, मुझे इतना थोड़ा भी याद नहीं करते हो। चार्ट लिखो तो आपेही लज्जा आयेगी। इस हालत में मैं पद पा नहीं सकूंगा, इसलिए बाबा चार्ट पर जोर दे रहे हैं।)
° *कारण देखना है* कि हमारा योग क्यों नहीं लगता है। (धन्धे आदि के झंझट में बहुत बुद्धि चली जाती है। उनसे टाइम निकाल इस तरफ जास्ती ध्यान देना चाहिए।)

10. परमपिता परमात्मा है *नॉलेजफुल* । उनमें कौन-सी नॉलेज है?
° बाबा में *सारे सृष्टि के आदि मध्य अन्त की* नॉलेज है। (कैसे एक धर्म की स्थापना और अनेक धर्मों का विनाश होता है, यह सब जानते हैं – इसलिए उनको जानी जाननहार कह देते हैं।)
° *स्प्रीचुअल नॉलेज* एक बाप के पास है। (और वह ब्राह्मणों को ही देते हैं। और कोई के पास स्प्रीचुअल नॉलेज होती नहीं।)

11. कोई कहते हैं हम तो *सारा दिन याद में* रहता हूँ। बाबा का उत्तर?
° बाबा कहते हैं यह तो *बड़ी मुश्किल* है। (सारा दिन रात तो बांधेलियां जो मार खाती रहती वह याद में रहती होंगी, शिवबाबा कब इन सन्बन्धियों से हम छूटेंगे? अगर कोई बहुत याद में रहते हैं *तो बाबा को चार्ट भेजें*।)

12. बाप समझाते हैं कहाँ भी जाते हो तो *पहले-पहले* क्या सुनाना है? (2)
° *बाप का परिचय* दो। (हम आत्मायें सब भाई-भाई हैं। सब एक बाप को याद करते हैं। गॉड फादर कहते हैं। उनको याद करते हैं मुक्ति-जीवनमुक्ति के लिए।)
° अभी हम श्रीमत पर यह राज्य स्थापन कर रहे हैं। अब *बाप कहते हैं मामेकम् याद करो*। (पहला-पहला शब्द ही यह दो। जब तक बाप का निश्चय नहीं होगा तब तक प्रश्न पूछते रहेंगे। इसलिए पहले-पहले तो एक ही बात पर ठहर जाओ। पहले *बाप का निश्चय* करे कि बरोबर सभी आत्माओं का बाप एक ही है और वह है रचता। तो जरूर संगम पर ही आयेंगे।)

13. *स्लोगन* कौन-सा लिखना है?
° मनुष्य होकर अगर क्रियेटर और रचना के *आदि मध्य अन्त ड्युरेशन, रिपीटेशन* को नही जाना तो क्या कहा जाए.. (यह रिपीटेशन अक्षर भी बहुत जरूरी है।)

14. लाखों वर्ष की बात हो न सके। लाखों वर्ष होते तो कितनी ढेर ____ हो जाती। बाप कहते हैं अब कलियुग पूरा हो सतयुग की ____ हो रही है। इनको पुरूषोत्तम _____ कहा जाता है। तुम पुरूषोत्तम भी यहाँ बनते हो। लक्ष्मी-नारायण सबसे पुरूषोत्तम हैं। और संवत की ____ भी जरूर लिखनी चाहिए।
° _संख्या_, _स्थापना_, _संगमयुग_, _डेट_

15. बाबा ने आज *कौन-सा चित्र* याद किया?
° *गीता का भगवान कौन*… यह चित्र बड़ा फर्स्टक्लास है। (सारे वर्ल्ड में यह है सबसे नम्बरवन भूल। परमपिता परमात्मा को न जानने कारण फिर कह देते सब भगवान के रूप हैं। जैसे छोटे बच्चे से पूछा जाता है तुम किसका बच्चा? कहेंगे फलाने का। फलाना किसका बच्चा? फलाने का। फिर कह देंगे वह हमारा बच्चा। वैसे यह भी भगवान को जानते नहीं तो कह देते हम भगवान हैं।)

Answers from Sakar Murli 16-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 16-09-2020*

1. विश्व _______ की डेट नहीं सोचो, स्वयं के ______ की घड़ी निश्चित करो।
°परिवर्तन, _परिवर्तन_,

2. भाग्य विधाता बाप रोज़ अमृतवेले हम आज्ञाकारी बच्चों को *सफलता का तिलक* लगाते। तो अब हम किन बातों से बचे रहने चाहिए? (3)
° आज्ञाकारी ब्राह्मण बच्चे कभी *मेहनत वा मुश्किल* शब्द मुख से तो क्या संकल्प में भी नहीं ला सकते हैं। (वह सहजयोगी बन जाते हैं।)
° इसलिए कभी भी *दिलशिकस्त नहीं* बनो (लेकिन सदा दिलतख्तनशीन बनो।)
° रहमदिल बनो। ( *अहम* भाव और *वहम* भाव को समाप्त करो।)

3. तुम जानते हो बाबा हमको ______ बनाकर ले जायेंगे। आत्मा जितना बाप को याद करेगी तो _____ बन जायेगी। आत्मायें ब्रह्मा मुख से यह _____ पढ़ती हैं। बाप कहते हैं मैं आया हूँ और सबको कहता हूँ- ______ याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे।
°पावन, _पवित्र_, _नॉलेज_, _मामेकम्_

4. श्रीमत तो श्रीमत है ना। निश्चय में _____ है। बाप की राय पर चलने में ही _______ है। तुम्हें अपने को आपेही ______ -तिलक देना है, श्रीमत पर चलना है। इसमें अपना _____ चल न सके। मुफ्त अपने को ____ में नहीं डालना चाहिए।
°विजय, _कल्याण_, _राज_,
_हठ_, _घाटे_

5. स्टूडेन्ट को टीचर कहेंगे ना, पढ़कर ____ करो। तुमको 21 जन्मों के लिए स्वर्ग की ____ मिलती है। ____ में जाना यही बड़ी स्कालरशिप है।
°गैलप, _स्कालरशिप_, _डिनायस्टी_

6. जो भी *भारतवासी* है, उनको क्या समझा सकते?
° बोलो, *भारत स्वर्ग था*, अब तो कलियुग है। कलियुग में अनेक धर्म हैं। सतयुग में एक ही धर्म था। *भारत फिर से स्वर्ग बनना है*।

7. ”मीठे बच्चे – बाप आये हैं सबके दु:ख हर कर सुख देने, इसलिए….. क्या?
° तुम दु:ख हर्ता के बच्चे *किसी को भी दु:ख मत दो* ”

8. हमें क्यों *लड़ना-झगड़ना* नहीं चाहिए? _(बाबा ने यह बहुत सुन्दर रीति समझाया)_ (4)
° तुम बच्चे जानते हो हम पढ़ाई से अपना *स्वराज्य* स्थापन कर रहे हैं। *नई दुनिया* जरूर स्थापन होनी है, नूँध है तो कितनी *खुशी* होनी चाहिए। कोई भी चीज़ में लड़ने-झगड़ने की कोई बात नहीं।
° तुम *अंगे अक्षरे बता सकते हो देवताएं कब होते* । तो तुमको कितना *नशा* रहना चाहिए। झगड़े आदि की बात ही नहीं।
° झगड़ते वह हैं जो निधनके होते हैं। तुम अभी जो पुरूषार्थ करेंगे *21 जन्म के लिए प्रालब्ध* बन जायेगी। लड़ेंगे-झगड़ेंगे तो ऊंच पद भी नहीं मिलेगा। सज़ायें भी खानी पड़ेगी।
° कोई भी बात है, कुछ भी चाहिए तो *बाप के पास आओ* , गवर्मेन्ट भी कहती है ना तुम फैंसला अपने हाथ में नहीं उठाओ।

9. कोई कहते हैं हमको विलायत का बूट चाहिए। परन्तु बाबा कहते संगम पर *बहुत सिम्पुल साधारण* रहना है, कोई भी आश नहीं। ऐसा क्यों? (2)
° *नहीं तो देह-अभिमान आ जाता* है। (इसलिए अपनी नहीं चलानी होती है, बाबा जो कहे।)
° बाबा कहेंगे बच्चे अभी तो वनवाह में हो। *वहाँ (सतयुग में) तुमको बहुत माल मिलेंगे।*

10. *सर्विसएबुल बच्चों* को सर्विस का कितना शौक रहता है। तो उन्हें कौन से 2 टाइटल मिलते? और सर्विस न करने से कौन-सा टाइटल मिलता?
° सर्विस करते तो उनको *रहमदिल*, *कल्याणकारी* कहेंगे।
° कोई को वर्थ पाउण्ड बना नहीं सकते हैं तो *वर्थ नाट ए पेनी* ठहरे ना। (पाउण्ड बनने लायक नहीं। यहाँ वैल्यु नहीं तो वहाँ भी वैल्यु नहीं रहेगी। बाबा को याद नहीं करते तो तुच्छ काम करते रहेंगे। पद भी तुच्छ पायेंगे।)

11. हमारा तो *शिवबाबा से योग* है (ब्रह्मा की जरूरत नहीं)। _(सही / गलत)_
° गलत। यह तो है ही *बी.* के.। शिवबाबा *ब्रह्मा द्वारा ही ज्ञान* दे सकते हैं। (सिर्फ शिवबाबा को याद करेंगे तो *मुरली कैसे सुनेंगे* फिर नतीजा क्या होगा? पढ़ेंगे नहीं तो पद क्या पायेंगे। यह भी जानते हैं सबकी तकदीर ऊंच नहीं बनती है। वहाँ भी तो नम्बरवार पद होंगे। पवित्र तो सबको होना है। आत्मा पवित्र बनने बिगर शान्तिधाम जा नहीं सकती।)

12. *सर्व में परमात्मा विराजमान नहीं*, इसका कौन-सा नया तर्क आज बाबा ने सुनाया?
° आत्मा शरीर में है तो दु:ख होता है। मुझे दर्द है-यह किसने कहा? *परमात्मा कैसे दु:ख भोगेगा।* आत्मा ही भोगती है ना।

13. *युद्ध के मैदान में जो मरेंगे वह स्वर्ग में जायेंगे*, इसका अर्थ क्या है?
° *इस गुप्त माया की लड़ाई में* हारेंगे / मरेंगे तो भी स्वर्ग में जाएंगे।
° (बाकी उस युद्घ में) स्वर्ग में तो तब आ सकेंगे *जब तुम ब्राह्मणों से आकर बाप का परिचय लें* । (सबका बाप तो एक ही है – पतित-पावन। वह कहते हैं मुझे याद करने से तुम्हारे पाप कट जायेंगे और मैं जो सुखधाम स्थापन करता हूँ उसमें तुम आ जायेंगे। लड़ाई में भी शिवबाबा को याद करेंगे तो स्वर्ग में आ जायेंगे।)

14. *इस भाषा* को तो तुम बच्चे ही समझते हो और कोई नया समझ न सके। कौन-सी भाषा?
° *’हे रूहानी बच्चे”* ऐसे कभी कोई कह न सके। (तुम जानते हो हम रूहानी बच्चे *रूहानी बाप* के सामने सम्मुख बैठे हैं, उनको यथार्थ रीति पहचानकर।)

15. हम शिवकुमार नही, परन्तु हम है ब्रह्मा वंशी *ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ* । इसके कौन-से 2 कारण बाबा ने सुनाये?
° *शिव की तो सब आत्मायें हैं*। तुमको शिवकुमार व शिवकुमारी नहीं कहेंगे। यह अक्षर रांग हो जाता।
° *कुमार-कुमारी* तब कहा जाता जब मनुष्य के बच्चे बनते हैं। शिव के बच्चे तो निराकारी आत्मायें हैं ही।

16. शिवबाबा ही हमको पढ़ाते हैं। न *कृष्ण* पढ़ा सकते, न कृष्ण द्वारा बाप पढ़ा सकते हैं। कृष्ण क्यों नहीं?
° (क्योंकि) कृष्ण तो *वैकुण्ठ* का प्रिन्स है। (कृष्ण तो *स्वर्ग* में अपने माँ-बाप का बच्चा होगा। स्वर्गवासी बाप का बच्चा होगा, वो वैकुण्ठ का प्रिन्स है। *वहां ज्ञान की जरूरत नहीं* ।)

17. कृष्ण के जन्म और *क्राइस्ट* के जन्म में क्या अन्तर है?
° क्राइस्ट का जन्म कोई *छोटे बच्चे रूप में नहीं* होता है। क्राइस्ट की आत्मा ने तो कोई में जाकर *प्रवेश किया* है। (क्योंकि धर्म स्थापक को कोई ऐसे मार न सके, *सतोप्रधान आत्मा आकर दु:ख भोग न सके*। तो किसको मारा? जिसमें प्रवेश किया, उनको दु:ख मिला। )

18. मनुष्य समझते कल भी ____ हो सकती है। परन्तु तुम बच्चे समझते हो अभी हमारी राजधानी स्थापन हुई नहीं है तो ____ कैसे हो सकता है। अजुन बाप का _____ ही चारों तरफ कहाँ दिया है। पतित-पावन बाप कहते हैं मुझे याद करो तो विकर्म विनाश होंगे। यह ___ सबके कानों पर जाना चाहिए।
°लड़ाई, विनाश, _पैगाम_, _पैगाम_

Answers from Sakar Murli 15-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 15-09-2020*

1. किसी भी प्रकार से बाप के कर्तव्य में *सहयोगी बनो तो सहजयोगी* बन जायेंगे। तो बाबा ने कौन-से प्रकार सुनाये? _(स्लोगन)_
° तन-मन-धन, *मन-वाणी-कर्म*

2. जबकि साक्षात्कार मूर्त बन साक्षात्कार कराने लिए *अलबेला-पन से निद्राजीत* बनना है। तो बाबा ने इसकी कौन-सी *वन्डरफुल युक्ति* सुनाई? (2)
° जब *विनाशकाल* भूलता है तब अलबेलेपन की नींद आती है। (इसलिए *भक्तों की पुकार* सुनो, दु:खी आत्माओं के *दुख की पुकार* सुनो, प्यासी आत्माओं के *प्रार्थना की आवाज* सुनो तो कभी भी अलबेलेपन की नींद नहीं आयेगी।)
° अब *सदा जागती ज्योत* बन अलबेलेपन की नींद को तलाक दो और साक्षात्कार मूर्त बनो।

3. तुम्हारे जैसा _____ तो किसको मिल न सके। तुम अभी तैयार हो रहे हो ____ -धाम में आने के लिए। भारत जब स्वर्ग था तो उन जैसा _____ खण्ड कोई होता नहीं। जब बाप आते हैं तब ही _____ राज्य स्थापन होता है।
°सुख, सुख, पावन, ईश्वरीय

4. निर्वाणधाम में जाने के लिए _____ पावन बनना है। रचना के आदि-मध्य-अन्त को _____ समझकर नई दुनिया में ऊंच पद पाना है।
°पूरा, पूरा

5. बाबा ने कहा जिन्हे ज्ञान का अभ्यास नहीं, उनको ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए। सिर्फ *एक मुख्य बात समझानी* है। कौन-सी?
° बाबा ने समझाया है *अपने को आत्मा समझ मामेकम् याद करो*, बस, और कुछ बात ही नहीं करना चाहिए।

6. यह चित्र आदि बनाने में भी बड़ी बुद्धि चाहिए। तो उनमें *क्या लिख सकते?* (2)
° बाबा ने कहा था-हर एक चित्र के ऊपर लिखा हुआ हो *शिव भगवानुवाच*।
° यह भी लिखना चाहिए कि *भारत जो स्वर्ग था सो फिर नर्क* जैसा कैसे बना है, आकर समझो। *भारत सद्गति में था, अब दुर्गति* में है। अब सद्गति को पाने के लिए बाप ही नॉलेज देते हैं। यहा तो तुम्हें *रूहानी बाप रूहानी नॉलेज पढ़ाते* हैं और रूह पढ़ती है।

7. पुकारते हैं *तुम मात-पिता…. तुम्हारी कृपा से सुख घनेरे*, इसका अर्थ क्या है?
° अब *बाप तुमको स्वर्ग के सुख लिए पढ़ा रहे*, जिसके लिये तुम पुरूषार्थ कर रहे हो। जो करेगा वह पायेगा। (पावन दुनिया तो एक स्वर्ग ही है। सतयुग में हम सतोप्रधान थे।)

8. तुम्हारा *सबसे अच्छा यादगार* मन्दिर देलवाड़ा मन्दिर है। कैसे? (2)
° नीचे *तपस्या में बैठे* हैं। (तुम जानते हो अभी हम राजयोग सीख रहे हैं फिर नई दुनिया में जायेंगे। वह जड़ मन्दिर, तुम चैतन्य में बैठे हो।)
° मुख्य मन्दिर यह ठीक बना हुआ है। *स्वर्ग की राजाई* दिखाई है (कहाँ दिखायें, इसलिए छत में स्वर्ग को दिखाया है। इस पर बहुत अच्छा समझा सकते हो। बोलो, भारत ही स्वर्ग था फिर अब भारत नर्क है।)

9. सतयुग में लक्ष्मी-नारायण का राज्य था तो वहाँ *9 लाख* होते हैं। फिर *इतनी सब आत्मायें कहाँ गई?*
° ब्रह्म में वा पानी में तो नहीं लीन हो गई। वह सब *मुक्तिधाम में* रहती हैं। हर एक *आत्मा* अविनाशी है। उनमें *अविनाशी पार्ट* नूंधा हुआ है जो कभी मिट नहीं सकता। (आत्मा विनाश हो न सके। आत्मा तो बिन्दी है। बाकी निर्वाण आदि में कोई भी जाता नहीं, सबको पार्ट बजाना ही है।)

10. *बाप का पार्ट* पिछाड़ी में है। क्या पार्ट है? (2)
° जब सब आत्मायें आ जाती हैं तब मैं *आकर सबको ले जाता* हूँ।
° *नई दुनिया की स्थापना* फिर पुरानी दुनिया का विनाश। यह भी ड्रामा में नूंध है।

11. बरोबर यह बात तो ठीक है, परमात्मा सर्वव्यापी कैसे हो सकता। भगवान तो _____ है, उनसे _____ मिलता है। बाप जो समझाते हैं उसको _____ करना है।
° _बाप_, _वर्सा_, _धारण_

12. जो आदि सनातन देवी-देवता धर्म वाले थे, उन्हे ही टच होंगा। और इसी समय फाउन्डेशन लगाना पड़ता। उसमें मुख्य है *पवित्रता* , वह *कैसे धारण* होंगी? (2)
° बहन-भाई तो बनाना ही पड़े। (हम एक बाप के बच्चे सब *आत्मायें भाई-भाई* हैं। फिर भाई-बहन बनते हैं।)
° भगवान बाप ही पावन होने की युक्ति बताते हैं। भगवानुवाच *मामेकम् याद* करो। मैं *पतित-पावन* हूँ, मुझे याद करने से तुम्हारे *विकर्म विनाश* होंगे और *मुक्तिधाम* में आ जायेंगे। (बाप कहते देह के सब धर्म छोड़ मुझे याद करो तो तुम सतोप्रधान बन जायेंगे। मैं गुजराती हूँ, फलाना हूँ – यह सब छोड़ो। *अपने को आत्मा समझो* और बाप को याद करो। यह है योग अग्नि। पवित्र बनने बिगर घर जा न सकें।)

13. अब जैसे कि नई सृष्टि की स्थापना हो रही है, पहले-पहले हैं ____ । नई सृष्टि की स्थापना में प्रजापिता ब्रह्मा तो जरूर चाहिए। ब्रह्मा द्वारा ______ होंगे। इनको रूद्र ज्ञान यज्ञ भी कहा जाता है, इसमें _____ जरूर चाहिए। प्रजापिता ब्रह्मा की औलाद जरूर चाहिए। वह है ग्रेट-ग्रेट ग्रैन्ड फादर। _____ हैं पहले नम्बर में चोटी वाले।
°ब्राह्मण, ब्राह्मण, ब्राह्मण, ब्राह्मण

14. बाप ही बच्चों को ज्ञान का तीसरा नेत्र देते, जिससे तुमको सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान मिला है। तो *पुरानी दुनिया (भक्ति) को ब्रह्मा की रात क्यों कहते?*
° (क्योंकि) भक्ति मार्ग में *दर-दर ठोकरें* खानी होती हैं। (अनेक प्रकार के जप-तप-यज्ञ करते, शास्त्र आदि पढ़ते हैं), जिस कारण ही ब्रह्मा की रात कहा जाता है। आधाकल्प रात, आधाकल्प दिन। (तुम कल्प पहले भी ब्राह्मण थे और देवता बने थे, जो बने थे वही फिर बनेंगे। आदि सनातन देवी-देवता धर्म के तुम हो। तुम ही पूज्य और पुजारी बनते हो। फिर पूज्य पावन देवी-देवता बनना हैं।)

15. सतगुरू है ही एक – सबकी सद्गति करने वाला। बाप कहते हैं मैं तुमको सब ______ का सार समझाता हूँ। ज्ञान, भक्ति फिर भक्ति का है ____। यह पुरानी दुनिया अब खत्म होनी है इसलिए इस दुनिया का ___ करना है। दुनिया को छोड़कर कहाँ जाना नहीं है, लेकिन इसे बुद्धि से _____ है।
°वेदों-शास्त्रों, वैराग्य, _संन्यास_, _भूलना_

Answers from Sakar Murli 14-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 14-09-2020*

1. *संगमयुग पर श्रेष्ठ आत्मा* कौन है?
° जो *सदा बेफिक्र बादशाह* है।

2. जो *बाप समान वरदानी मूर्त* बच्चे हैं, उनकी निशानी क्या है? (3)
° वह कभी किसी की *कमजोरी को नहीं देखते* (वह सबके ऊपर रहमदिल होते हैं।)
° जैसे बाप किसी की कमजोरियां दिल पर नहीं रखते, ऐसे वरदानी बच्चे भी किसी की कमजोरी *दिल में धारण नहीं* करते।
° वे हरेक की *दिल को आराम देने वाले मास्टर दिलाराम* होते हैं। (इसलिए साथी हो या प्रजा सभी उनका गुणगान करते हैं। सभी के अन्दर से यही आशीर्वाद निकलती है कि यह हमारे सदा स्नेही, सहयोगी हैं।)

3. *सतयुग* में सीलॉन, बर्मा, कराची आदि होंगे?
° नहीं, कुछ भी नहीं। (सतयुग में तुम सब *मीठी नदियों के किनारे पर* रहते हो। खेती बाड़ी आदि सब होती है, सृष्टि तो बड़ी है। *मनुष्य बहुत थोड़े* रहते हैं फिर पीछे वृद्धि होती है।)

4. पढ़ा हुआ सब भूल सिर्फ *एक बात* कौन-सी धारण करनी है? और कुछ न भी समझो, सिर्फ *एक बात* कौन-सी बुद्धि में रखो?
° मीठे बच्चे बाप को *याद* करो। तुम कहते भी थे ना बाबा आप आयेंगे तो हम *वारी* जायेंगे। तुम्हें फिर हमारे पर *कुर्बान* जाना है। (लेन-देन होती है ना। बाप को कहते, हम पुराना सब कुछ आपको देते हैं। यह सब खत्म होना है। आप हमको फिर नई दुनिया में देना। बाप आते ही हैं सबको ले जाने।)
° और कुछ न समझो सिर्फ एक बात बुद्धि में रखो – *एक शिवबाबा दूसरा न कोई* । (यह आत्मा ने कहा – बाबा, हम आपको ही याद करेंगे। यह तो सहज है ना। हाथों से कर्म करते रहो और बुद्धि से बाप को याद करते रहो।)

5. जो सर्विसएबुल हैं, उनका नाम बाला है। बाबा ने यहां *देहली* के कौन-से *2 अनन्य रत्न* याद किये?
° झट नाम लेंगे *जगदीश भाई* का। तुम्हारे लिए मैगजीन भी निकालते हैं। उसमें सब कुछ आ जाता है। अनेक प्रकार की प्वाइंट्स लिखते हैं, *बृजमोहन भाई* भी लिखते हैं।

6. *लिखने* की सेवा से क्या लाभ है?
° लिखना कोई मासी का घर थोड़ेही है। जरूर *विचार सागर मंथन* करते हैं, अच्छी सर्विस करते हैं। कितने *लोग पढ़कर खुश* होते हैं। बच्चों को भी *रिफ्रेशमेंट* मिलती है।

7. तुम हो संगमयुगी, _______ बन रहे हो। जानते हो पहले नम्बर में पुरूषोत्तम यह ________ हैं ना। अब फिर स्थापना होती है। फाउन्डेशन लगता है ना। ______ कितना छोटा होता है फिर उनसे कितना बड़ा ______ बढ़ जाता है।
°पुरूषोत्तम, लक्ष्मी-नारायण, कलम, झाड़

8. इस *सच्ची-सच्ची गीता पाठशाला* की कौन-सी 3 अनोखी बातें बाबा ने सुनाई?
° पाठशाला में कभी बूढ़े आदि पढ़ते हैं क्या? यहाँ तो *बूढ़े, जवान आदि सब पढ़ते* हैं।
° और जगहों को पाठशाला नहीं कहेंगे। कोई भी जो सतसंग हैं, *एम ऑब्जेक्ट (क्या बनेंगे)* कुछ नहीं है। (सत् तो एक बाप ही है, जिसके लिए कहा जाता है संग तारे…. कुसंग बोरे…..। कुसंग कलियुगी मनुष्यों का।)
° *सत् का संग* तो एक ही है। (अभी तुमको वण्डर लगता है। सारे सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान कैसे बाप देते हैं, तुमको तो खुशी होनी चाहिए।)

9. बाप कहते हैं तुम बच्चे कितने *भाग्यशाली* हो। यहां ऋषि-मुनियों की बात करते बाबा ने हम बच्चों को *कौन-सा टाइटल दिया?*
° तुम हो *राजऋषि*। *ऋषि* अर्थात् पवित्र। तुम स्वर्ग के *राजा* बनते हो तो पवित्र जरूर बनना पड़े। (सतयुग-त्रेता में जिनका राज्य था उनका ही फिर होगा। तुम अभी कहते हो हम श्रीमत पर अपना राज्य स्थापन कर रहे हैं। सतयुग आना है, कलियुग जाना है।)

10. पुराना शरीर छोड़ फिर जाए दूसरा लेते, इसमें *रोने की बात* है। _(सही / गलत)_
° गलत (इसमे रोने की क्या दरकार है। यह तुम जानते हो- *ड्रामा अनादि बना हुआ है। हर एक को पार्ट बजाना ही है।* बाप ने समझाया है – सतयुग में हैं नष्टोमोहा। मोहजीत की भी कहानी है ना।)

11. इस *बेहद की दुनिया* (ड्रामा) को बाबा ने कौन-से 5 नाम दिये?
° यह है बेहद का *घर*, *माण्डवा* अथवा *स्टेज़* , इनको *कर्मक्षेत्र* भी कहा जाता है। (कर्म तो जरूर करना होता है। सब मनुष्यों के लिए यह कर्मक्षेत्र है। सबको कर्म करना ही है, पार्ट बजाना ही है। पार्ट हर एक आत्मा को पहले से मिला हुआ है।)
° अनेक वैराइटी धर्मों का झाड़ है मनुष्यों का। (एक सूरत न मिले दूसरे से। बना-बनाया ड्रामा है ना। एक जैसा पार्ट कोई का हो नहीं सकता। इनको कहा जाता है *कुदरती बना-बनाया बेहद का ड्रामा* ।)

12. यह जो दु:ख-सुख का खेल चलता, यह *दु:ख-सुख सब परमात्मा ही देते* हैं। _(सही / गलत)_
° गलत (यह हर एक के कर्मों के हिसाब का खेल है। बाप किसी को भी दु:ख नहीं देते। *वह तो आते ही हैं सुख का रास्ता बताने।* बाबा कहते हैं – बच्चे, मैंने किसी को भी दु:खी नहीं किया है। यह तो तुम्हारे ही कर्मों का फल है।)

13. ड्रामा प्लैन अनुसार मनुष्य तो कहेंगे हमारा (ड्रामा में) दोष क्या है। तुम्हारा भी *कोई दोष नहीं* है। _(सही / गलत)_
° *सही* (यह भी ड्रामा है। राम राज्य, रावण राज्य का खेल बना हुआ है। खेल में कोई हार जाते हैं तो उनका दोष थोड़ेही है। यह तो अनादि बना बनाया ड्रामा है। उनको कुछ कर थोड़ेही सकते हैं। कोई कहते हैं हमने गुनाह क्या किया जो ऐसा पार्ट रखा है। अब गुनाह की तो बात नहीं। यह तो पार्ट है।)

14. धनवान आदमी दुनिया का चक्र लगाते हैं। *सारी दुनिया* देख कर आते हैं। _(सही / गलत)_
° गलत (यहाँ *सारी दुनिया को कोई देख न सके।* हाँ सतयुग में देख सकते हैं क्योंकि सतयुग में है ही एक राज्य, इतने थोड़े राजायें होंगे, यहाँ तो देखो *कितनी बड़ी दुनिया है।* इतनी बड़ी दुनिया का चक्र कौन लगाये।)

15. पुकारते है बाबा आकर इस पाप की पुरानी _____ दुनिया से नई ______ पुण्य की दुनिया में ले चलो। सूर्य चांद बत्तियों के होते हुए भी _____ कहा जाता है। सतयुग त्रेता को कहा जाता है ____ और भक्ति मार्ग को कहा जाता है ____ ।
°कलियुगी, सतयुगी, अन्धियारा, दिन, रात

16. बाप कहते हैं मैं जो हूँ, जैसा हूँ, ऐसा कोई नहीं जानते हैं। अभी हम बाप को पूरी रीति जान गये। शिवलिंग की पूजा भी करते हैं। जरूर यह जड़ है तो _____ भी होगा! भगवान तो रचता है _____ में। उनकी निशानी है सिर्फ पूजा के लिए। शिव काशी के मंदिर में जाते हैं, किसको पता थोड़ेही है भगवान _____ है। हम भी उनके बच्चे हैं। बाप कहते हैं तुम हमको बुलाते हो कि दु:ख की दुनिया से ले जाओ। अब मैं आया हूँ तो मेरा ______ चाहिए ना। बाप बच्चों को बैठ समझाते हैं, अच्छी ____ मिलती है तो वह लेनी चाहिए ना।
°चैतन्य, ऊपर, निराकार, सुनना, मत

17. एक ____ ही है, जिसने किसी का भी राज्य छीना नहीं है क्योंकि _____ असुल में अहिंसक है ना। तुम _____ -वासियों को तो बाप विश्व का मालिक बनाते हैं।
°भारत, भारत, भारत

18. हमारा *गुरूद्वारा* कौन-सा है?
° तुम्हारा गुरूद्वारा है – *मुक्ति और जीवनमुक्ति धाम* , सतगुरू द्वार। (गुरू का द्वार अर्थात् घर कहेंगे ना। सतगुरू आकर *मुक्ति-जीवनमुक्ति का द्वार* खोलते हैं। अकाल-मूर्त हैं ना। जिसको काल भी खा नहीं सकता। आत्मा है ही बिन्दी, उनको काल कैसे खायेगा।)

19. ______ का गुण धारण कर माया के विघ्नों में पास होना है। अनेक आपदायें आयेंगी, अत्याचार होंगे-ऐसे समय पर _____ करते बाप की याद में रहना है, सच्ची _____ करनी है।
°सहनशीलता, सहन, कमाई

20. अभी कौन-सा *समय* आने वाला है? (आ गया है!)
° अभी तो सुबह को क्लास आदि में जाते हो, सेन्टर्स पर। वह भी समय आयेगा जो तुम *बाहर निकल भी नहीं सकेंगे।* (दिन-प्रतिदिन जमाना बिगड़ता जाता है और बिगड़ना है। दु:ख के दिन बहुत ज़ोर से आयेंगे। रक्त की नदियाँ भी बहेंगी। कहाँ भी सेफ्टी नहीं रहेगी।)

Answers from Sakar Murli 12-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 12-09-2020*

1. *ज्ञानी तू आत्मा* कौन है? _(स्लोगन)_
° वह है जो धोखा खाने से *पहले परखकर* स्वयं को *बचा ले* ।

2. हम ब्रह्माकुमार-कुमारियां भी *मास्टर आदि देव, आदि रत्न* है। यह समझने से क्या प्राप्तियां हैं? (2)
° यह समझने से ही अपने *जीवन के मूल्य को जान सकेंगे* क्योंकि आदि रत्न अर्थात् प्रभू के रत्न, *ईश्वरीय रत्न* – तो कितनी वैल्यु हो गई।
° यह समझकर हर कार्य करो तो *समर्थ भव का वरदान* मिल जायेगा। (कुछ भी व्यर्थ जा नहीं सकता।)

3. सतयुग में कौन-सी बाते *100%* है ? (5) और कौन-सी बाते *एक* है? (4)
° तुम जानते हो इन लक्ष्मी-नारायण के राज्य में *एक* देवी-देवता *धर्म* था। एक *राज्य* , एक *मत* , एक *भाषा*।
° 100 परसेन्ट *प्योरिटी* , *पीस* , *प्रासपर्टी* ( *सुख* , *सम्पत्ति* ) थी।

4. जबकि सत् शिवबाबा, सत् शिव टीचर, सत् शिव गुरू हमे *ऊंच ते ऊंच श्रीमत* पर एक मत बना रहे। तो उस पर चलना चाहिए। तो यह *श्रीमत हमे क्या कहती?* (4)
° बाप कहते हैं एक तो *देही-अभिमानी* बनो और बाप को *याद* करो। (जितना याद करेंगे, अपना कल्याण करेंगे।)
° श्रीमत क्या सिखलाती है? *सहज राजयोग* । राजाई के लिए पढ़ा रहे हैं। अपने बाप के द्वारा सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त को जानकर फिर *दैवीगुण भी धारण करने हैं* । (बाप का कभी सामना नहीं करना चाहिए,अहंकार वश। फिर नशा ही उड़ जाता।)
° बाप कहते हैं गृहस्थ व्यवहार में रहते *सिर्फ एक जन्म पवित्र* रहो। (तुम जन्म-जन्मान्तर तो पतित रहे हो। अब मैं आया हूँ तुमको पावन बनाने। यह अन्तिम जन्म पावन बनो। सतयुग-त्रेता में तो विकार होते ही नहीं।)

5. बाबा कितनी प्वाइंट्स देते हैं-सदा यही _____ रहे कि हम श्रीमत पर अपनी सतयुगी राजधानी स्थापन कर रहे हैं (हम ही देवी-देवता थे), तो _____ खुशी रहेगी। बच्चों को सदैव नशा रहना चाहिए। ______ नशा!
°स्मृति, अपार, नारायणी

6. *हमारी बात मानी नहीं गई* । तो थोड़ा बिगड़ना चाहिए। _(सही / गलत)_
° *गलत* (यह तो होता ही है। कोई किस तरफ, कोई किस तरफ, फिर *मैजारिटी* वाले को उठाया जाता है, इसमें रंज होने की बात नहीं। बच्चे रूठ पड़ते हैं। हमारी बात मानी नहीं गई। *अरे, इसमें रूठने की क्या बात है* । बाप तो सबको रिझाने वाला है।)

7. हम तो *राम-सीता* बनेंगे। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे थोड़ेही कहना चाहिए। तुम्हारी *एम ऑब्जेक्ट ही है नर से नारायण बनना*। तुम फिर राम सीता बनने में खुश हो जाते हो, *हिम्मत* दिखानी चाहिए ना।)

8. बाबा ने आज *कुमारियों-माताओं का बहुत उमंग बढ़ाया* । किन शब्दों में? (4)
° माताएं पढ़ी हुई होती तो *कमाल* कर दिखाती।
° तुमने श्रीमत पर राजाई स्थापन की थी। *नारी से लक्ष्मी बनी थी* तो कितना नशा रहना चाहिए।
° तुम *माताओं का संगठन* तो बहुत अच्छा होना चाहिए (हिम्मत भी हो)। एम ऑब्जेक्ट तो सामने हैं। (बाप कहते मैं तुमको ऐसा लक्ष्मी-नारायण बनाता तो तुम्हें भी औरों पर रहमदिल बनना चाहिए। जब अपना कल्याण तब दूसरे का भी कर सकेंगे।)
° बाप कहते हैं मैं तुम पर उपकार करता हूँ। तुम फिर *मुझ पर अपकार करते हो* । भारत का हाल देखो क्या है। (हमे श्रेष्ठ बन सबको श्रेष्ठ बनाना है।)

9. बाबा ने कहा *बूढ़ी माताओं* को भी सिखलाकर तैयार करना चाहिए (उनका भी भाग्य बन जाए)। वह *प्रदर्शनी में* क्या समझा सकते? (3)
° कोई को भी यह चित्र दिखाकर बोलो इनका राज्य था ना। अभी तो है नहीं। बाप कहते हैं-अब तुम *मुझे याद करो तो तुम पावन बनकर पावन दुनिया में* चले जायेंगे। अब पावन दुनिया स्थापन हो रही है। (कितना सहज है। बुढ़ियाँ बैठकर प्रदर्शनी पर समझायें तब नाम बाला हो।)
° कृष्ण के चित्र में भी लिखत बहुत अच्छी है। बोलना चाहिए *यह लिखत जरूर पढ़ो*। इनको पढ़ने से ही *तुमको नारायणी नशा अथवा विश्व के मालिकपने का नशा चढ़ेगा* ।(सामने एम ऑब्जेक्ट को देखकर ही खुशी होती है। हम यह शरीर छोड़ जाए विश्व के मालिक बनेंगे। जितना याद में रहेंगे उतना पाप कटेंगे।)
° *देखो लिफाफे पर छपा है* – वन रिलीजन, वन डीटी किंगडम, वन लैंगवेज….. वह जल्दी स्थापन होगी। (बुढ़ियों को ऐसा सिखलाकर होशियार बनाओ जो प्रदर्शनी पर बाबा कहे कि 8-10 बुढ़ियों को भेजो तो झट आ जाएं। जो करेगा सो पायेगा।)

10. श्रीकृष्ण, सीढ़ी वा *लक्ष्मी-नारायण के चित्र* पर क्या लिख सकते? (4)
° तुम दिखाते हो विनाश के बाद *श्रीकृष्ण आ रहा है* । क्लीयर लिख देना चाहिए।
° *सतयुगी* एक ही देवी-देवताओं का राज्य, एक भाषा, *पवित्रता, सुख, शान्ति फिर से स्थापन हो रही है।* (द्वापर-कलियुग में सब नर्कवासी हैं। अभी तुम संगमयुगी हो।)
° आदि सनातन देवी-देवता धर्म, सुख-शान्ति का राज्य स्थापन हो रहा है – *त्रिमूर्ति शिवबाबा की श्रीमत पर*
(इसमें सिर्फ लिखना है एक ही सत्य त्रिमूर्ति शिवबाबा, सत्य त्रिमूर्ति शिव टीचर, सत्य त्रिमूर्ति शिव गुरू। त्रिमूर्ति अक्षर नहीं लिखेंगे तो समझेंगे परमात्मा तो निराकार है, वह टीचर कैसे हो सकता है।)
° यह स्थापना हो रही है। (बाप आये हैं *ब्रह्मा द्वारा एक धर्म की स्थापना* बाकी सबका विनाश करा देंगे।)

11. *छोटे-छोटे अक्षर* में लिखत होनी चाहिए। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे-ऐसे बड़े-बड़े अक्षर में बड़े-बड़े चित्र हों। छोटे बच्चे छोटे चित्र पसन्द करते हैं। *अरे, चित्र तो जितना बड़ा हो उतना अच्छा।*)

12. यह लक्ष्मी-नारायण का चित्र कहां-कहां *प्रयोग* कर सकते? (2)
° *चक्कर पर जाते हैं* तो यह चित्र लक्ष्मी-नारायण का ले जाना पड़े।
° लक्ष्मी-नारायण का चित्र *टीन की सीट पर बनाकर* हर एक जगह पर रखना है।

13. यह तो बाप-टीचर-गुरू भी है। तो वो *गुरू* अच्छे की यह सतगुरू? और वह *टीचर* अच्छे की यह सुप्रीम टीचर?
° (गुरू) वो गुरू लोग शास्त्र सुनाते हैं। उनको टीचर नहीं कहेंगे वह कोई ऐसे नहीं कहते कि हम दुनिया की हिस्ट्री-जॉग्राफी सुनाते हैं। बाप तुमको *शास्त्रों का सार* समझाते हैं *और फिर वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी भी* बतलाते हैं।
° (टीचर) उस टीचर से तुम कितना भी पढ़ो, क्या कमायेंगे? सो भी नसीब। पढ़ते-पढ़ते कोई एक्सीडेंट हो जाए, मर जाए तो पढ़ाई खत्म। यहाँ तुम *यह पढ़ाई जितनी भी पढ़ेंगे, वह व्यर्थ जायेगी नहीं।*

14. बाप को याद (और सर्व प्राप्तियों का अनुभव) करने के बदले और *दुनियावी बातों में पड़ जाते* हैं, इससे ही सारी गड़बड़ होती। तो इससे बचाने लिए बाबा ने कौन-सी शिक्षायें दी? (3)
° अरे *तुम गोरे बनते हो* फिर काले, तमोप्रधान से क्यों दिल लगाते हो। (इस कब्रिस्तान से दिल नहीं लगानी है। हम तो बाप से *वर्सा ले रहे* हैं।)
° पुरानी दुनिया से दिल लगाना माना *जहन्नुम (नर्क, दोज़क)* में जाना है। (बाप आकर दोज़क से बचाते हैं फिर भी मुंह दोज़क तरफ क्यों कर देते?
° पुरानी दुनिया से बिल्कुल दिल नहीं लगानी चाहिए। *कोई से दिल लगाई और मरे।*

15. यह ज्ञान का भोजन किन्हें *हज़म* नहीं हो सकता है?
° जो भूलें करके, छी-छी ( *पतित* ) बनकर फिर क्लास में आकर बैठते हैं, उन्हें ज्ञान हज़म नहीं हो सकता। (वह मुख से कभी भी नहीं कह सकते कि भगवानुवाच काम महाशत्रु है। उनका दिल अन्दर ही अन्दर खाता रहेगा। वह आसुरी सम्प्रदाय के बन जाते हैं।)
° अमृत पीते-पीते विष खा लेते हैं तो *100 गुणा काले* बन जाते। (हड्डी-हड्डी टूट जाती। गिरने से कल्प-कल्पान्तर का घाटा बहुत-बहुत पड़ जाता है।)