Answers from Sakar Murli 07-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 07-10-2020*

1. _____ पर पूरा-पूरा अटेन्शन दो तो फर्स्ट 1️⃣ डिवीजन में नम्बर आ जायेगा।
° _अभ्यास_

2. स्व और सर्व प्रति *सदा विघ्न विनाशक* बनने लिए क्या करना है? (5)
° क्वेश्चन मार्क ❓को विदाई देना और *फुल स्टॉप द्वारा सर्व शक्तियों का फुल स्टॉक* करना।
° सदा विघ्न प्रूफ *चमकीली फरिश्ता ड्रेस पहनकर रखना*, मिट्टी की ड्रेस नहीं पहनना।
° साथ-साथ *सर्व गुणों के गहनों से सजे* रहना।
° सदा *अष्ट शक्ति शस्त्रधारी* सम्पन्न मूर्ति बनकर रहना और *कमल पुष्प के आसन* पर अपने श्रेष्ठ जीवन के पांव रखना।

3. बाप ही *ऊंच ते ऊंच समझदार ते समझदार, ज्ञान सागर* पतित-पावन है। कई बार हंसी में कहते की समझाया उनको जाता है जो बेसमझ होते हैं। तो हम किन-किन बातों से बेसमझ थे? (3)
° मैं आत्मा अविनाशी हूँ, शरीर विनाशी है। फिर भी *आत्म-अभिमान छोड़ देह-अभिमान में फँस पड़े* । तो बेसमझ ठहरे ना। (बाप कहते हैं सब बच्चे बेसमझ हो पड़े हैं, देह-अभिमान में आकर। फिर तुम बाप द्वारा देही-अभिमानी बनते हो तो बिल्कुल समझदार बन जाते हो।)
° फिर भी पुरूषार्थ बहुत करना है क्योंकि बच्चों में दैवीगुण भी चाहिए। बच्चे जानते हैं हम सर्वगुण सम्पन्न, 16 कला सम्पूर्ण…… थे। फिर इस समय *निर्गुण बन पड़े हैं। कोई भी गुण नहीं रहा* है। (हम पूज्य थे तो समझदार थे फिर हम ही पुजारी बन बेसमझ बने हैं। आदि सनातन देवी-देवता धर्म प्राय: लोप हो गया है। इनका दुनिया में किसको पता नहीं है। यह लक्ष्मी-नारायण कितने समझदार थे, राज्य करते थे। तत् त्वम्।
° तुम बच्चों में भी नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार इस *खेल को समझते* हैं। (समझते-समझते भी कितने वर्ष हो गये हैं। फिर भी जो नये हैं वह अच्छे समझदार बनते जाते हैं। औरों को भी बनाने का पुरूषार्थ करते हैं।)

4. अब *पावन* बनना है, तो इसके लिए बाप कौन-सी *दवाई* देते हैं?
° कहते हैं – *योग से तुम भविष्य 21 जन्म निरोगी* बन जायेंगे। तुम्हारे सब रोग, दु:ख खत्म हो जायेंगे। तुम मुक्तिधाम में चले जायेंगे। (अविनाशी सर्जन के पास *एक ही दवाई* है। एक ही इन्जेक्शन आत्मा को आए लगाते हैं।)
° बाप तो *सीधी बात* बताते हैं – बच्चे, तुम मुझे याद करो तो तुम पावन बन जायेंगे। तुम्हारे सब दु:ख दूर हो जायेंगे।(मुख्य बात है याद की। सभी कहते हैं याद में रहना बड़ा मुश्किल है। हम जितना चाहते हैं, याद में रह नहीं सकते हैं। कोई *सच्चाई से अगर चार्ट लिखे* तो बहुत फायदा हो सकता है।)

5. बाप को कहते हैं आकर पतित से *पावन बनाओ*, क्यों?
° क्योंकि *पतितपने में दु:ख* है। (शान्तिधाम को पावन दुनिया नहीं कहेंगे। स्वर्ग को ही पावन दुनिया कहेंगे।)

6. सच्ची-सच्ची शान्ति तो वहाँ है जहाँ शरीर नहीं, उसको कहा जाता है शान्तिधाम। इसलिए बहुत कहते हैं शान्तिधाम में रहें, परन्तु………… क्या? *_(एक लॉ (नियम) है)_*
° यह *अविनाशी नाटक* हैं, इसमें हर एक पार्टधारी को पार्ट बजाने अपने *समय पर आना ही है*। (कोई कहे हम सदा शान्तिधाम में ही बैठ जाएं – तो यह लॉ नहीं है। उसे तो पार्टधारी ही नहीं कहेंगे। यह बेहद की बातें बेहद का बाप ही तुम्हें सुनाते हैं।)

7. सर्व के सद्गति दाता पतित-पावन हैं। सर्व को पावन बनाने वाले ____ नहीं हो सकते। ____ आदि सब तत्व हैं, वह कैसे सद्गति करेंगे। ____ ही पार्ट बजाती है।
° _तत्व_, _पानी_, _आत्मा_

8. बाप ने कितना समझाया है – कोई ऐसी युक्ति रचो जो मनुष्य समझें – पूज्य हैं नई दुनिया में, ____ हैं ____ दुनिया में। पावन को पूज्य, ____ को पुजारी कहा जाता है। वहाँ हैं श्रेष्ठ। गाते भी हैं सम्पूर्ण श्रेष्ठाचारी। अभी तुम बच्चों को ऐसा बनना है। तुम जानते हो हम आत्मा शरीर सहित पावन थी। अभी वही आत्मा शरीर सहित ____ बनी है। 84 जन्मों का हिसाब है ना।
° _पुजारी_, _पुरानी_, _पतित_, _पतित_

9. बाप बच्चों को यह ज्ञान देते हैं कि मनमनाभव। तुम ____ सहित कहते हो, तुम्हें बाप हर बात यथार्थ रीति ____ सहित समझाते हैं। बाप कहते हैं मेरा काम ही है पतित से _____ बनाना। मुझे तो बुलाते ही इसलिए हो।
° _अर्थ_, _अर्थ_, _पावन_

10. परमात्मा किन चीजों का *दाता* है? (3)
° सर्व का *सद्गति* दाता, *मुक्ति-जीवनमुक्ति* का दाता, एक ही ज्ञान सागर बाप है इसलिए उनको *ज्ञान दाता* कहा जाता है। (भगवान ने ज्ञान दिया था परन्तु कब दिया, किसने दिया, यह किसको पता नहीं है।)

11. तुम जानते हो – अभी यह दुनिया ____ का जंगल बन गई है। यह लक्ष्मी-नारायण तो _____ हैं ना। उन्हों के आगे कांटे जाकर कहते हैं आप सर्वगुण सम्पन्न…… हम पापी कपटी हैं। सबसे बड़ा कांटा है – _____का। बाप कहते हैं इस पर जीत पहन ___ -जीत बनो।
° _कांटों_, _फूल_, _काम विकार_, _जगत_

12. मनुष्य कहते हैं भगवान को कोई न कोई रूप में आना है, ____ -रथ पर विराजमान हो आना है। भगवान को आना ही है पुरानी दुनिया को ____ बनाने। नई दुनिया को सतोप्रधान, पुरानी को _______ कहा जाता है। जबकि अभी पुरानी दुनिया है तो जरूर ____ को आना ही पड़े। बाप को ही रचयिता कहा जाता है। तुम बच्चों को कितना सहज समझाते हैं। कितनी ____ होनी चाहिए।
° _भागी_, _नया_, _तमोप्रधान_, _बाप_, _खुशी_

13. सिर्फ शिवजयन्ती नहीं है परन्तु ____ शिव जयन्ती है। जरूर जब शिव की जयन्ती होगी तो ____ की भी जयन्ती होगी। लौकिक, पारलौकिक और यह है ____ बाप। यह है प्रजा- _____ ब्रह्मा।
° _त्रिमूर्ति_, _ब्रह्मा_, _अलौकिक_, _पिता_

14. *शिवरात्रि* का अर्थ भी नहीं जानते। अभी तुम जानते हो (कलियुग रात्री को सतयुग दिन बनाते), बाप आते ही हैं – सबकी ज्योत जगाने। तो हमें *कैसे मनाना* है?
° तुम यह *बत्तियां आदि जगायेंगे* तो समझेंगे इनका कोई बड़ा दिन है। (अब तुम जगाते हो अर्थ सहित।)

15. जब इस मनुष्य सृष्टि झाड़ का बीज रूप परमात्मा है, तो उस परमात्मा द्वारा जो नॉलेज प्राप्त हो रही है वो सब मनुष्यों के लिये जरूरी है। सभी धर्म वालों को यह नॉलेज लेने का अधिकार है। भल हरेक धर्म की _____ अपनी-अपनी है, हरेक का ____ अपना-अपना है, हरेक की ____ अपनी-अपनी है, हरेक का ____ अपना-अपना है लेकिन यह नॉलेज सबके लिये हैं।
° _नॉलेज_, _शास्त्र_, _मत_, _संस्कार_

16. भल वो इस ज्ञान को न भी उठा सके, हमारे घराने में भी न आवे परन्तु सबका ____ होने कारण उनसे ____ लगाने से फिर भी ____ अवश्य बनेंगे। इस कारण अपने ही सेक्शन में ____ अवश्य पायेंगे। बहुत मनुष्य ऐसे कहते हैं हमें भी मुक्ति चाहिए, मगर सजाओं से छूट मुक्त होने की ____ भी इस योग द्वारा मिल सकती है।
° _पिता_, _योग_, _पवित्र_, _पद_, _शक्ति_

Answers from Sakar Murli 06-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 06-10-2020*

1. सुखदाता द्वारा सुख का भण्डार प्राप्त होना – यही उनके ____ की निशानी है।
° _प्यार_

2. जैसे आजकल स्थूल खुशबू के साधनों से गुलाब 🌹, चंदन व भिन्न-भिन्न प्रकार की खुशबू फैलाते, ऐसे हमे *कौन-सा आटोमेटिक स्विच आन* करनी है? _(जिससे विश्व में अशुद्ध वृत्तियों की बदबू समाप्त हो)_
° *संकल्प का!* (आप शिव शक्ति कम्बाइन्ड बन मन्सा संकल्प व वृत्ति द्वारा *सुख-शान्ति, प्रेम, आनंद की खुशबू* फैलाओ। रोज़ अमृतवेले भिन्न-भिन्न श्रेष्ठ वायब्रेशन के *फाउन्टेन* ⛲के माफिक आत्माओं के ऊपर *गुलावाशी* डालो।)

3. ___ है सुख का रास्ता, ____ से सतयुग की राजाई मिलती है।
° _ज्ञान_, _ज्ञान_

4. ____ की यात्रा बिगर कल्याण होना नहीं है। वर्सा देने वाले बाप को तो जरूर _____ करना है तो विकर्म विनाश होंगे। बाबा को तो घड़ी-घड़ी _____ करना है। नेष्ठा में एक जगह बैठने की बात नहीं। चलते-फिरते ____ करना है।
°याद, _याद_, _याद_, _याद_

5. तमोप्रधान से _____ बनना है। बाप श्रीमत देते हैं ऐसे-ऐसे करो, ______ धारण करो। जो करेंगे वह पायेंगे। तुम्हारे तो खुशी में _____ खड़े हो जाने चाहिए। बेहद का बाप मिला है, उनकी सर्विस में ____ बनना है। अन्धों की _____ बनना है। जितना जास्ती बनेंगे, उतना अपना ही कल्याण होगा।
°सतोप्रधान, _दैवीगुण_, _रोमांच_, _मददगार_, _लाठी_

6. एक-दो से नफ़रत-विरोध के बदले, *एक-दो से प्यार से रहना* हैं। इसके लिए बाबा ने कौन-से दिव्य कारण / समझानी दी? (6)
° बाप कहते हैं *तुम आत्मा रूप-बसन्त बनते* हो। (तुम्हारे मुख से रत्न ही निकलने चाहिए। अगर पत्थर निकलते हैं तो गोया आसुरी बुद्धि ठहरे।)
° तुम कहते हो ना – बाबा हम तो *लक्ष्मी-नारायण* बनेंगे। तुमको तो यहाँ *दैवीगुण* ही धारण करने हैं। (आसुरी चलन तो नहीं होनी चाहिए।)
° जानते हो हम सब भाई-बहन, *ईश्वरीय सन्तान* हैं। (ईश्वर की महिमा है वो ज्ञान का सागर, प्रेम का सागर है, यानी सबको सुख देते हैं। तुम सब दिल से पूछो – जैसे बाप भविष्य 21 जन्मों के लिए सुख देते हैं वैसे हम भी वह कार्य करते हैं?)
° तुम हो ही *दु:ख हर्ता, सुख कर्ता बाप के बच्चे* । (दु:ख देने का ख्याल भी तुमको नहीं आना चाहिए।)
° बच्चों को बहुत-बहुत मीठा बनना है। जो सर्विस करेंगे वही प्यारे लगेंगे। *भगवान बाप आये हैं* बच्चों के पास, उनकी श्रीमत पर चलना पड़े। (श्रीमत पर नहीं चलते हैं तो तूफान लगने से गिर पड़ते हैं।)
° विप्रीत बुद्धि होना असुरों का काम है। अपने को *ईश्वरीय सम्प्रदाय* कहलाकर फिर एक-दो को दु:ख देना उनको असुर कहा जाता है। (ऩफरत करने वाले कलियुगी नर्कवासी हैं।)

7. ऐसा *मीठा प्यारा दिव्यगुण-सम्पन्न* बनने लिए बाबा ने कौन-सी विधियां सुनाई? (4)
° बाबा कहते हैं *अपना चार्ट रखो*। चार्ट रखने से मालूम पड़ेगा – हमारा रजिस्टर सुधरता जाता है या वही आसुरी चलन है? (बाबा सदैव कहते हैं कभी किसको दु:ख न दो। निंदा-स्तुति, मान-अपमान, ठण्डी-गर्मी सब सहन करना है। चार्ट लिखते रहो तो डर रहेगा। कोई-कोई लिखते भी हैं, बाबा देखेंगे तो क्या कहेंगे। चाल-चलन में बहुत फ़र्क रहता है।)
° कोई ने कुछ कहा तो *शान्त रहना* चाहिए। ऐसे नहीं कि उनके लिए दो वचन और कह देना है। (कोई किसको दु:ख देते हैं तो उनको बाप समझायेंगे ना। बच्चे, बच्चे को कह नहीं सकते। *अपने हाथ में लॉ नहीं लेना* है। कुछ भी बात है तो बाप के पास आना है।)
° *जांच करनी है* कि हम किसको दु:ख तो नहीं देते हैं? आसुरी चलन तो नहीं चलते हैं? (माया ऐसे काम कराती है, बात मत पूछो।)
° बाप बच्चों को समझाते हैं बच्चे माया बड़ा जोर से थप्पड़ लगाती है, विकर्म करा देती है इसलिए *रोज़ कचहरी करो, आपेही अपनी* कचहरी करना अच्छा है। (यह भी समझते नहीं हैं – शिवबाबा ऑर्डर करते हैं। बाबा ने कहा है हमेशा समझो शिवबाबा सुनाते हैं। तो तुम सेफ रहेंगे, उनके साथ कितना रिगार्ड, रायॅल्टी से चलना चाहिए।)

8. सच बताते तो आधा माफ, कोई सच नहीं बताने से सौगुणा दण्ड। तो *सच सुनाना इतना जरूरी क्यों* है?
° नहीं तो फिर वह *आदत बढ़ती जायेगी* । (बाप को सुनायेंगे तो बाबा सावधान करेंगे।)
° सुनाते नहीं, छिपा लेंगे तो फिर *करते ही रहेंगे* । न बतलाने से एक बार के बदले *100 बार* करते रहेंगे। (बाबा कितनी अच्छी राय देते हैं परन्तु कोई-कोई को ज़रा भी असर नहीं होता है। अपनी तकदीर को जैसे लात मारते रहते हैं। बहुत-बहुत नुकसान करते हैं।)

9. बाप कहते तुम अपने को *आत्मा* समझ बाप को याद करो। *देही-अभिमानी* बनेंगे तब ही इतना ऊंच पद पायेंगे। कई बच्चे फालतू बातों में बहुत टाइम वेस्ट करते हैं। ज्ञान की बात ही ध्यान में नहीं आती। यहां बाबा ने कौन-सा (भक्ति का) *मिसाल* दिया?
° यह भी गायन है *घर की गंगा का मान नहीं रखते* । घर की चीज़ का इतना मान नहीं रखते हैं। (जबकि कृष्ण आदि का चित्र घर में भी है फिर श्रीनाथ द्वारे आदि इतना दूर-दूर क्यों जाते हो। भिन्न-भिन्न लिंग, गंगाजल आदि। यह भी ड्रामा में पार्ट है जो तुमको धक्का खाना पड़ता है। यह है ही ज्ञान और भक्ति का खेल।)

10. गीत 🎵:-तू प्यार का सागर है… वो तो ऐसे ही सिर्फ महिमा गाते रहते हैं। इतना प्यार नहीं है क्योंकि पहचान नहीं। *और हमें?*
° तुमको *बाप ने पहचान दी है* मैं प्यार का सागर हूँ और तुमको प्यार का सागर बना रहा हूँ। (बाप प्यार का सागर कितना सबको प्यारा लगता है। वहाँ भी सब एक-दो को प्यार करते हैं।)

11. और सब सतसंगों आदि में, और इस पढ़ाई में क्या *अन्तर* है?
° वह है कनरस, जिससे अल्पकाल सुख मिलता है। यह *बाप द्वारा तो 21 जन्मों का सुख* मिलता है। बाबा *सुख-शान्ति का सागर* है, हमको भी बाप से *वर्सा* मिलना है। (सेवा करेंगे तब तो मिलेगा, इसलिए बैज सदा पड़ा रहे। हमको ऐसा सर्वगुण सम्पन्न बनना है, जांच करनी है।)

12. जब कोई मरता है तो कहते हैं *स्वर्गवासी* हुआ। इन बातों को अभी तुमने समझा है। और हम क्या कहते? _(स्वर्गवासी के विषय पर)_
° अभी तुम कहते हो *हम स्वर्गवासी बनने के लिए स्वर्ग की स्थापना करने वाले बाप के पास* बैठे हैं। (ज्ञान की बूंद मिलती है। थोड़ा भी ज्ञान सुना तो स्वर्ग में जरूर आयेंगे, बाकी है पुरूषार्थ पर।)

13. *ट्रेन में भी तुम सर्विस* कर सकते हो। क्या समझाना है?
° तुम कोई को भी समझा सकते हो कि *ऊंच ते ऊंच कौन* है? उनको *याद* करो। वर्सा उनसे ही मिलेगा। आत्मा को बाप से *बेहद का वर्सा* मिलता है। (कोई दान-पुण्य करने से राजा के पास जन्म लेते हैं सो भी अल्पकाल के लिए। सदा तो राजा नहीं बन सकते। तो बाप कहते हैं यहाँ तो 21 जन्मों की गैरन्टी है। वहाँ यह पता नहीं पड़ेगा कि हम बेहद के बाप से यह वर्सा ले आये हैं। यह ज्ञान इस समय तुमको मिलता है तो कितना अच्छी रीति पुरूषार्थ करना चाहिए।)

14. बच्चों को युक्तियां भी बहुत समझाई जाती हैं, अपने *पति को* पवित्रता के लिए क्या समझा सकते?
° बोलो, *बाबा कहते हैं* बच्चे काम महाशत्रु है, इन पर जीत पहनो। माया जीते *जगतजीत* बनो। अब हम *स्वर्ग के मालिक* बनें या तुम्हारे कारण अपवित्र बन नर्क में जायें। *बहुत प्यार, नम्रता* से समझाओ। (मुझे नर्क में क्यों ढकेलते हो। ऐसी बहुत बच्चियां हैं – समझाते-समझाते आखिर पति को ले आती हैं। फिर पति कहता कि यह हमारा गुरू है, इसने हमको बहुत अच्छा रास्ता बताया। बाबा के आगे चरणों में आए गिरते हैं।)

15. अभी कुछ न कुछ विकर्म रहे हुए हैं, हिसाब-किताब है इसलिए ____ पूरा नहीं लगता है। ____ नहीं करते हैं तो गोया अपने पांव पर कुल्हाड़ा ⛏️ मारते। अभी कोई भी नहीं कह सकते कि हम ______ अवस्था में हैं। नज़दीक आने से फिर बहुत निशानियाँ दिखाई पड़ेंगी। सारा मदार तुम्हारी अवस्था पर और _____ पर है। तुम्हारी पढ़ाई पूरी होने पर होगी तो फिर देखेंगे _____ सिर पर खड़ी है। अच्छा!
°योग, _पुरुषार्थ_, _कर्मातीत_, _विनाश_, _लड़ाई_

16. बाबा ने *अन्त में साक्षात्कार द्वारा सजाओं* का वर्णन कैसे किया? (2)
° बाप कहते हैं ग़फलत छोड़ो। नहीं तो बहुत *पछताना* पड़ेगा। अपने पुरूषार्थ का फिर पिछाड़ी में साक्षात्कार जरूर होगा फिर बहुत *रोना* पड़ेगा। क्या *कल्प-कल्प* यही वर्सा मिलेगा। *दास-दासी* जाकर बनेंगे। (पिछाड़ी में फिर तुम बच्चों को साक्षात्कार होंगे। साक्षात्कार बिगर सज़ा कैसे मिल सकती। कायदा ही नहीं।)
° अन्त में सबको साक्षात्कार होगा। यह-यह बनेंगे, क्लास में ट्रांसफर होते हैं तो मार्क्स निकलती हैं ना। *ट्रांसफर होने पहले रिजल्ट निकलती* है। तुम भी अपने क्लास में जाते हो तो मार्क्स का पता पड़ेगा फिर बहुत *ज़ार-ज़ार रोयेंगे*। (फिर क्या कर सकेंगे? रिजल्ट तो निकल गई ना। जो तकदीर में था वो ले लिया। बाप सब बच्चों को सावधान करते हैं। कर्मातीत अवस्था अभी हो न सके।)

Answers from Sakar Murli 05-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 05-10-2020*

1. परमात्म प्यार ❤️ में खो जाओ तो दु:खों की _____ भूल जायेगी।
°दुनिया

2. ब्राह्मण परिवार की विशेषता है *अनेक होते भी एक* । इस एकता द्वारा ही सारे विश्व में *एक धर्म, एक राज्य की स्थापना* होती है। तो अब क्या करना है?
° इसलिए विशेष अटेन्शन देकर *भिन्नता को मिटाओ* और *एकता को लाओ* तब कहेंगे सच्चे सेवाधारी। (सेवाधारी स्वयं प्रति नहीं लेकिन सेवा प्रति होते हैं। स्वयं का सब कुछ सेवा प्रति स्वाहा करते हैं, जैसे साकार बाप ने सेवा में हड्डियां भी स्वाहा की ऐसे आपकी हर कर्मेन्द्रिय द्वारा सेवा होती रहे।)

3. शिवबाबा हमारे साथ *कौन-सा व्यापार* करते?
° *पुराने शरीर आदि लेकर नया देते* हैं, सबको रास्ता बताते हैं। (यह भी धन्धा उनको करना है। यह व्यापार तो बहुत बड़ा है।)

4. और *हमे इस व्यापार में* क्या करना है? (3)
° जितना तुम *बाप की याद* में रहेंगे, *कमाई* में आत्मा को बहुत मज़ा आयेगा। (कमाई के लिए मनुष्य रात में भी जागते हैं। सीज़न में सारी रात भी दुकान खुला रहता है। तुम्हारी कमाई रात को और सवेरे को बहुत अच्छी होगी।)
° *स्वदर्शन चक्रधारी* बनेंगे, *त्रिकालदर्शी* बनेंगे। *21 जन्म के लिए धन* इकट्ठा करते हैं। (मनुष्य साहूकार बनने के लिए पुरूषार्थ करते हैं। तुम भी बाप को याद करेंगे तो विकर्म विनाश होंगे, बल मिलेगा। याद की यात्रा पर नहीं रहेंगे तो बहुत घाटा पड़ जायेगा क्योंकि सिर पर पापों का बोझा बहुत है। अब जमा करना है।)
° *विचार सागर मंथन कर रत्न निकालने* हैं। (बाबा कहते हैं जितना हो सके अपनी कमाई करनी है, यही काम आनी है। *एकान्त में* बैठ बाप को याद करना है।)

5. बाप पहले-पहले समझाते मीठे-मीठे बच्चों जब यहाँ बैठते हो, तो अपने को आत्मा समझ बाप को याद करते रहो और कोई तरफ बुद्धि नहीं जानी चाहिए। *आत्मा क्यों समझना* है? (3)
° तुम बच्चे जानते हो *हम आत्मा हैं* । (पार्ट हम आत्मा बजाती हैं इस शरीर द्वारा। आत्मा अविनाशी, शरीर विनाशी है। तो तुम बच्चों को देही-अभिमानी बन बाप की याद में रहना है।)
° हम आत्मा हैं *चाहें तो इन आरगन्स से काम लेवें वा न लेवें*। (अपने को शरीर से अलग समझना चाहिए। बाप कहते हैं अपने को आत्मा समझो। देह को भूलते जाओ। *हम आत्मा इन्डिपिन्डेंट हैं*।)
° यह पढ़ाई है, अपने को आत्मा न समझने से *बाप-टीचर-गुरू सबको भूल जाते* हैं।

6. *शरीर का भान* छोड़ो। क्यों? (2)
° यह पुराना शरीर है ना। *पुरानी चीज़ को छोड़ा जाता है ना*। अपने को अशरीरी समझो।
° अभी तुमको बाप को याद करते-करते बाप के पास जाना है। ऐसे करते-करते फिर तुमको आदत पड़ जायेगी। अभी तो तुमको *घर जाना है फिर इस पुरानी दुनिया को याद क्यों* करें।

7. भक्ति मार्ग में भी ब्रह्म तत्व को या कोई शिव को भी याद करते हैं। परन्तु वह याद कोई *यथार्थ नहीं* है। _(सही / गलत)_
° सही ( *बाप का परिचय ही नहीं* तो याद कैसे करें। तुमको अब बाप का परिचय मिला है।)

8. हमको सिवाए एक बाप के और कोई को ____ नहीं करना है। हम आत्मा का ___ रहना है अब बाप के साथ। ____ में बैठ ऐसे अपने साथ मेहनत करनी है। इसमें है ___ की बात। _____ तो है सिखलाने वाला। उनको तो पुरूषार्थ नहीं करना है। यह बाबा पुरूषार्थ करते हैं, वह फिर तुम बच्चों को भी समझाते हैं। गृहस्थ व्यवहार में तो रहना ही है। बाकी ____ निकालना है। स्टूडेण्ट को पढ़ाई का ____ होता है ना।
°याद , योग, _एकान्त_, _बुद्धि_, _शिवबाबा_, _टाइम_, _शौक_

9. बाबा ने कहा सवेरे-सवेरे उठकर *एकान्त में अपने साथ बातें* करते रहो। *विचार सागर मंथन* करो, बाप को याद करो, इससे तुमको खुशी भी रहेगी। तो कैसी-कैसी बातें कर सकते? (4)
° जितना हो सके ऐसे बैठकर विचार करो। *अभी हमको जाना है अपने घर*। इस शरीर को तो यहाँ छोड़ना है।
° बाप को *याद करने से ही विकर्म विनाश होंगे* और आयु भी बढ़ेगी। अन्दर यह चिन्तन चलना चाहिए।
° बाबा हम *अभी आया कि आया आपकी सच्ची गोद में*। वह है रूहानी गोद।
° तो ऐसे-ऐसे अपने साथ बातें करनी चाहिए। बाबा आया हुआ है। *बाबा कल्प-कल्प आकर हमको राजयोग सिखलाते* हैं। (बाप कहते हैं – मुझे याद करो और चक्र को याद करो। स्वदर्शन चक्रधारी बनना है।)

10. *एकान्त का अर्थ* क्या है? एकान्त में बैठ तुमको *कौन-सा अनुभव* करना है?
° *एकान्त* का अर्थ है *एक* की याद में इस शरीर का *अन्त* हो अर्थात् एकान्त में बैठ ऐसा अनुभव करो कि मैं आत्मा इस शरीर (चमड़ी) को छोड़ बाप के पास जाती हूँ। (कोई भी याद न रहे। बैठे-बैठे अशरीरी हो जाओ। जैसेकि हम इस शरीर से मर गये। बस हम आत्मा हैं, शिव बाबा के बच्चे हैं, इस प्रैक्टिस से देह भान टूटता जायेगा।)

11. *जीते जी मरना* किसे कहा जाता है?
° एकान्त में बैठ अब ऐसा अभ्यास करो जो *अनुभव हो मैं शरीर से भिन्न आत्मा हूँ* , इसको ही जीते जी मरना कहा जाता है।

12. फुर्सत है तो मन्दिरों में भी बैज सहित बहुत सर्विस कर सकते। ( *रूहानी मिलट्री*!)। क्या समझा सकते?
° तुम लिखते भी हो – हम *स्वर्ग* की स्थापना कर रहे हैं। *आदि सनातन देवी-देवता धर्म* था, अब नहीं है जो फिर स्थापन करते हैं। यह *लक्ष्मी-नारायण* एम-ऑब्जेक्ट है ना। (लक्ष्मी-नारायण सिर्फ एक तो नहीं थे, उन्हों की राजधानी थी ना। यह *स्वराज्य* स्थापन कर रहे हैं। अब बाप कहते हैं मन-मनाभव। बाप को याद करो तो विकर्म विनाश होंगे।)

13. एम ऑब्जेक्ट कितनी ___ है। एक राज्य, एक धर्म था, बहुत साहूकार थे। मनुष्य चाहते हैं एक राज्य, एक धर्म हो। मनुष्य जो चाहते हैं सो अब _____ दिखाई पड़ते हैं फिर समझेंगे यह तो ठीक कहते हैं। 100 प्रतिशत पवित्रता, सुख, शान्ति का राज्य फिर से _____ कर रहे हैं फिर तुमको खुशी भी रहेगी। याद में रहने से ही ____ लगेगा। शान्ति में रह थोड़े ____ ही बोलने हैं। जास्ती आवाज़ नहीं।
°क्लीयर,आसार,स्थापन,तीर,_अक्षर_

14. कोई समय यह ट्रांसलाइट का चित्र बैटरी सहित उठाकर _____ देंगे और सबको कहेंगे, यह राज्य हम स्थापन कर रहे हैं। यह चित्र सबसे फर्स्टक्लास है। यह चित्र बहुत ______ हो जायेगा। यह गोला, झाड़ आदि के चित्र कम थोड़ेही हैं। एक दिन तुम्हारे पास यह सब चित्र _______ के बन जायेंगे। फिर सब कहेंगे हमको ऐसे चित्र ही चाहिए। इन चित्रों से फिर _____ मार्ग की सर्विस हो जायेगी।
°परिक्रमा, _नामीग्रामी_, _ट्रांसलाइट_, _विहंग_

15. ____ भी तुम सौगात देते रहो। शिवबाबा का भण्डारा तो सदा भरपूर है। आगे चलकर बहुत सर्विस होगी। ____ भी अच्छे हों जो मनुष्य पढ़कर जागें। बच्चे वृद्धि को पाते रहते हैं। इस लक्ष्मी-नारायण के चित्र को देखने से ही समझ में आ जाता है – शिव-बाबा यह ____ दे रहे हैं। _____ की स्थापना करने वाला बाप ही है।
°लिटरेचर, _स्लोगन_, _वर्सा_, _सतयुग_

16. तुम्हारे पास बच्चे इतने आयेंगे जो ____ नहीं रहेगी। ढेर आयेंगे। बहुत खुशी होगी। दिन-प्रतिदिन तुम्हारा ____ बढ़ता जायेगा। ड्रामा अनुसार जो फूल बनने वाले होंगे उनको ___ होगा।
°फुर्सत, _फोर्स_, _टच_

17. तुम खुदाई ______ हो ना। सच्ची-सच्ची बात बाबा पहले से ही बता देते हैं – क्या-क्या करना है। ऐसे ____ ले जाने पड़ेंगे। सीढ़ी का भी ले जाना पड़े। ड्रामा अनुसार स्थापना तो होनी ही है। बाबा सर्विस के लिए जो _____ देते हैं, उस पर ध्यान देना है। बाबा कहते हैं ____ किस्म-किस्म के लाखों बनाओ। ट्रेन की टिकेट लेकर 100 माइल तक सर्विस करके आओ। एक ____ से दूसरे में, फिर तीसरे में, बहुत सहज है। बच्चों को सर्विस का ____ रहना चाहिए।
°खिदमतगार, _चित्र_, _डायरेक्शन_, _बैजेस_, _डिब्बे_, _शौक_

18. बाप भी है ____ आत्मा। उनको शरीर तो है नहीं। अभी इस ____ में बैठ तुमको समझाते हैं। यह वन्डरफुल बात है। भागीरथ पर विराजमान होंगे तो जरूर दूसरी ____ है। बहुत जन्मों के अन्त का जन्म इनका है। नम्बरवन पावन वही फिर नम्बरवन पतित बनते हैं।
°परम, _शरीर_, _आत्मा_

19. *ब्रह्मा बाबा* अपने को भगवान, विष्णु आदि तो कहते नहीं। _(सही / गलत)_
° सही ( *यहाँ एक भी आत्मा पावन है नहीं*, सब पतित ही हैं।)

20. बाबा इनकी *बुद्धि को टच* करो। _(सही / गलत)_ (2)
° टच कोई *बाबा थोड़ेही करते* हैं। (समय पर आपेही टच होगा। बाप तो रास्ता बतायेंगे ना।)
° बहुत बच्चियां लिखती हैं – हमारे पति की बुद्धि को टच करो। ऐसे सबकी बुद्धि को टच करेंगे *फिर तो सब स्वर्ग में* इकट्ठे हो जायें। पढ़ाई की ही मेहनत है।

21. और धर्मों की स्थापना और *दैवी झाड़ की स्थापना 🌱* में क्या अन्तर है?
° और धर्मों में *ऊपर से आते* हैं। (जैसेकि झाड़ स्थापन हुआ ही पड़ा है, इसमें फिर नम्बरवार आते जायेंगे, वृद्धि को पाते जायेंगे। तकलीफ महिमा कुछ नहीं। धर्म स्थापक के पिछाड़ी आते रहते हैं।)
° यहाँ तो बाप भविष्य देवी-देवता धर्म की स्थापना कर रहे हैं। *संगमयुग पर नया सैपलिंग 🌱लगाते* हैं ना। (पहले पौधों को गमले में लगाकर फिर नीचे लगा देते हैं। वृद्धि होती जाती है।) तुम भी *अब पौधा लगा रहे हो फिर सतयुग में वृद्धि को पाए राज्य-भाग्य* पायेंगे। तुम नई दुनिया की स्थापना कर रहे हो।

22. समझते हैं हम बहुत सुधार कर रहे। *5 वर्ष के अन्दर इतना अनाज* होगा जो अनाज की कभी तकलीफ नहीं होगी। और तुम क्या जानते हो?
° ऐसी हालत होगी जो अन्न खाने के लिए नहीं मिलेगा। ऐसे नहीं अनाज कोई सस्ता होगा।
(तुम बच्चे जानते हो हम 21 जन्म के लिए अपना राज्य-भाग्य पा रहे हैं। यह *थोड़ी बहुत तकलीफ* तो सहन करनी ही है। कहा जाता है *खुशी जैसी खुराक नहीं*। अतीन्द्रिय सुख गोप-गोपियों का गाया हुआ है।)

Answers from Sakar Murli 03-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 03-10-2020*

1. ______ रूपी पहरेदार ठीक हैं तो ______ सुख का खजाना खो नहीं सकता।
°अटेन्शन, _अतीन्द्रिय_

2. अपने श्रेष्ठ पवित्र जीवन द्वारा स्वयं को *परमात्म ज्ञान का प्रत्यक्ष प्रमाण*-प्रूफ समझने से ही माया प्रूफ बनेंगे। तो *सम्पूर्ण पवित्र जीवन में चलना* किसे कहेंगे? (3)
° सबसे बड़ी असम्भव से सम्भव होने वाली बात *प्रवृत्ति में रहते पर-वृत्ति* में रहना। (देह और देह की दुनिया के संबंधों से पर (न्यारा) रहना।)
° पुराने शरीर की आंखों से पुरानी दुनिया की वस्तुओं को *देखते हुए न देखना* अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र जीवन में चलना। (यही परमात्मा को प्रत्यक्ष करने वा माया प्रूफ बनने का सहज साधन है।)

3. कई फिर ____ तू आत्मा बच्चे भी हैं। बाप तो बच्चों की बहुत _____ करते हैं। बाप कहते हैं – बच्चे, तुम बहुत-बहुत _____ हो। तुमको तो इतने झंझट नहीं।बाबा को भी _____ करना है। माशूक की याद तो बिल्कुल _____ होनी चाहिए।
°योगी, _महिमा_, _भाग्यशाली_, _याद_, _पक्की_

4. *परमधाम* सम्बंधित कौन-सी बातें बाबा ने सुनाई? _(यह योग में बहुत उपयोगी रहता)_ (2)
° ऊंच ते ऊंच नाम है, *ऊंच उनका गांव*। (बाप सभी आत्माओं सहित वहाँ निवास करते हैं। बैठक भी ऊंच है। (वास्तव में कोई बैठने की जगह नहीं है। जैसे स्टॉर ⭐ कहाँ बैठे हैं क्या? खड़े हैं ना।)
° तुम *आत्मायें भी* अपनी ताकत से *वहाँ खड़ी* हो। (ताकत ऐसी मिलती है जो वहाँ जाकर खड़े होते हैं। बाप का नाम ही है सर्वशक्तिमान्, उनसे शक्ति मिलती है।)

5. *परमात्मा* बाप ने अपनी कौन-सी *महिमा* सुनाई? _(योग में यह एक-एक *टाइटल* बहुत काम आते।)_ (4)
° *रूहानी बाप* का नाम क्या है? *शिवबाबा* । वह है ही *भगवान*, *बेहद का बाप*। (मनुष्य को कभी बेहद का बाप अथवा *ईश्वर* वा भगवान नहीं कहा जा सकता।)
° *ऊंच ते ऊंच* है ही भगवान, *परमपिता*। (ऊंच ते ऊंच नाम है, ऊंच उनका गांव।)
° बाप का नाम ही है *सर्वशक्तिमान्*, उनसे शक्ति मिलती है। (आत्मा उसको याद करती है, बैटरी चार्ज हो जाती है।)
° पहले भक्ति शुरू होती है तो *पहले एक ही शिव की पूजा* करते। (यथा राजा-रानी तथा प्रजा। ऊंच ते ऊंच है ही भगवान, उनको ही याद करना है।)

6. बाप खुद अपना परिचय देते हैं कि मैं क्या हूँ, कैसा हूँ। कैसे तुम्हारी आत्मा की बैटरी डल हो जाती है। *अब तुमको राय देता हूँ*……….कौन-सी?
° *मेरे को याद करो तो बैटरी सतोप्रधान फर्स्टक्लास हो जायेगी*। (पवित्र बनने से आत्मा 24 कैरेट बन जाती है। अभी तुम मुलम्मे के बन गये हो। ताकत बिल्कुल खत्म हो गई है। वह शोभा नहीं रही है। अब बाप तुम बच्चों को समझाते हैं बच्चे मुख्य बात है योग में रहना, पवित्र बनना।)

7. सर्वशक्तिमान बाप की याद से ही *बैटरी चार्ज* हो जाती है। तो यहां बाबा ने कौन-सा *मिसाल* दिया? _(बैटरी)_
° *जैसे मोटर 🚗 में बैटरी* होती है, उसके ज़ोर से ही मोटर चलती है। बैटरी में *करेन्ट भरी हुई* होती है फिर चलते-चलते वह खाली हो जाती है फिर बैटरी *मेन पावर से चार्ज* कर मोटर में डालते हैं। (वह होती हैं हद की बातें। यह है बेहद की बात। तुम्हारी बैटरी तो 5 हज़ार वर्ष चलती है। चलते-चलते फिर ढीली हो जाती है।)

8. आत्मा उसको याद करती है, बैटरी चार्ज हो जाती है।
मालूम पड़ता है – *एकदम खत्म नहीं होती* है, कुछ न कुछ रहती है। यहां बाबा ने कौन-सा मिसाल दिया?
° जैसे *टार्च 🔦 में डिम हो जाती* है ना। (आत्मा तो है ही इस शरीर की बैटरी। यह भी डल हो जाती है। बैटरी इस शरीर से निकलती भी है फिर दूसरी, तीसरी मोटर में जाकर पड़ती है। 84 मोटरों में उनको डाला जाता है तो अब बाप कहते हैं तुम कितने डलहेड पत्थरबुद्धि बन गये हो। अब फिर अपनी बैटरी को भरो। सिवाए बाप की याद के आत्मा कभी पवित्र हो नहीं सकती। एक ही सर्वशक्तिमान् बाप है, जिनसे योग लगाना है।)

9. तुम ईश्वरीय ____ में लग जाओ। कभी भी आपस में _____ में नहीं आना है। _____ बन सर्विस करनी है। अपने तन-मन धन से, बहुत-बहुत _____ से सेवा कर सबको बाप का परिचय (पैगाम) देना है।
°सर्विस, मतभेद, _फ्राकदिल_, _नम्रता_

10. तुम बच्चों से कई पूछते हैं – तुम *इनको* भगवान क्यों कहते हो? तो क्या उत्तर देना है? _(हम तो उनको भगवान नहीँ कहते!)_
° बाप पहले से ही समझाते हैं – *कोई भी स्थूल वा सूक्ष्म देहधारी को भगवान नहीं कह सकते*। (सूक्ष्म देहधारी सूक्ष्मवतनवासी ही ठहरे। उन्हों को देवता कहा जाता है। ऊंच ते ऊंच है ही भगवान, परमपिता। ऊंच ते ऊंच नाम है, ऊंच उनका गांव।)

11. *मुख्य बात है योग* में रहना, *पवित्र* बनना। नहीं तो क्या परिणाम होगा? _(कुक्कड़ ज्ञानी)_
° *बैटरी* भरेगी नहीं। *योग* लगेगा नहीं। भल कुक्कड़ ज्ञानी तो बहुत हैं। ज्ञान भल देते हैं परन्तु वह *अवस्था* नहीं है। (यहाँ बड़े भभके से अनुभव सुनाते हैं। *अन्दर खाता रहता* है। मैं जो वर्णन करता हूँ ऐसी अवस्था तो है नहीं।)

12. हर बात आदि से अन्त तक ऊपर से नीचे तक बाप समझाते हैं।अभी तुम फिर पवित्र सतोप्रधान बन रहे हो, इसमें ही मेहनत है। और आपस ब्राह्मण भाई-बहन में तो बिलकुल शुद्ध दृष्टि चाहिए (सब देवता बनते हैं!)। तो *दृष्टि को शुद्ध करने लिए कौन-सी युक्तियां* बाबा ने सुनाई? (6)
° *अपने को देखना* है (माया धोखा तो नहीं देती? क्रिमिनल आई तो नहीं बनती? कोई पाप का ख्याल तो नहीं आता?)
° कुदृष्टि कभी नहीं जानी चाहिए। उनको रोकना है। (यह भी *हमारी मीठी बहन वा भाई* है। वह *रूहानी लव* रहना चाहिए। इसमें बहुत-बहुत मेहनत है।)
° है भी सहज याद। अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना है। बाबा ने समझाया है – यह आंखें बहुत धोखा देने वाली हैं, उनको बदलना है। (हम *आत्मा* हैं। अभी तो हम *शिवबाबा के बच्चे* हैं। *एडाप्ट* किये हुए *भाई-बहन* हैं। हम अपने को *बी.के.* कहलाते हैं।)
° *सच्चे बाप के आगे सच्चा* रहना, झूठ बोला तो बहुत दण्ड पड़ जायेगा। (कोर्ट में कसम उठाते हैं ना। सच्चे ईश्वर बाप के आगे सच कहेंगे। सच्चे बाप का बच्चा भी सच्चा होगा। बाप ट्रूथ है ना। वह सत्य ही बतलाते हैं। बाकी सब हैं गपोड़े।)
° अपनी *अवस्था का वर्णन* करना चाहिए। *अनुभव सुनाना* चाहिए। (हम घर में कैसे रहते हैं? अवस्था पर क्या असर पड़ता है?)
° *डायरी* रखो – कितना समय इस अवस्था में रहता हूँ? (बाप समझाते हैं रूसतम से माया भी रूसतम होकर लड़ती है।)

13. श्री श्री 108 अपने को कहलाते हैं, वास्तव में यह तो माला है ना, जो सिमरते हैं। तुम बच्चों को अब ज्ञान मिला हुआ है। तो *108 की माला* पर क्या समझा सकते? (2)
° बोलो, 108 की जो माला है उसमें *ऊपर में फूल तो है निराकार*। उनको ही सब याद करते हैं।
° उनकी याद से ही हम (माला का दाना) *स्वर्ग की पटरानी* अर्थात् महारानी बनते हैं। *नर से नारायण, नारी से लक्ष्मी* बनना – यह है सूर्यवंशी मखमल की पटरानी बनना फिर खादी की हो जाती है। (तो ऐसी-ऐसी प्वाइंट्स बुद्धि में रख फिर समझाना चाहिए। फिर तुम्हारा नाम बहुत बाला हो जायेगा। बात करने में शेरनी बनो। तुम शिव शक्ति सेना हो ना।)

14. *भक्ति मार्ग में तो तुम बाप को कितना याद करते* आये हो – हे भगवान, पूजा भी पहले-पहले उस निराकार भगवान की ही करते हैं। परन्तु यथार्थ परिचय न होने के साथ और कौन-सी बात नहीं थी? _(जिस कारण उतरते आये।)_
° ऐसे नहीं कि उस समय तुम *आत्म-अभिमानी* बनते हो। (आत्म-अभिमानी फिर पूजा थोड़ेही करेंगे।)

15. *वेश्याओं* को क्या समझा सकते? (3)
° तुम्हारे नाम के कारण भारत की इतनी आबरू (इज्जत) गई है (वैश्यालय)। अब *बाप आये हैं शिवालय में ले चलने* । (हम श्रीमत पर आये हैं तुम्हारे पास। अभी तुम विश्व की मालिक बन जाओ। भारत का नाम बाला करो, हमारे मुआफिक। हम भी बाप को याद करने से पवित्र बन रहे हैं। तुम भी यह एक जन्म छी-छी काम छोड़ दो।)
° कोई नया युगल हो, बोले *हम पवित्र रहते हैं* । पवित्र रहने से ही विश्व के मालिक बनते हैं। तो क्यों नहीं पवित्र बनेंगे। (रहम तो करना है ना। फिर तुम्हारा नाम बाला बहुत हो जायेगा। कहेंगे इनमें तो ऐसी ताकत है जो ऐसा गन्दा धंधा इनसे छुड़ा दिया।)
° बड़ी नम्रता से जाकर कहना है, हम आपको परमपिता परमात्मा का पैगाम देने आये हैं। अब विनाश सामने खड़ा है। बाप कहते हैं मैं सबका उद्धार करने आया हूँ। *तुम भी यह एक जन्म विकार में मत जाओ*। (ऐसा काम करो जिसमें वाह-वाह हो। हज़ारों मदद देने वाले निकल आयेंगे। यह अपना संगठन बनाओ। मुख्य-मुख्य को चुनो, सेमीनार करो।)

Answers from Sakar Murli 02-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 02-10-2020*

1. ब्राह्मणों का श्वांस ______ है, जिससे कठिन से कठिन कार्य भी _____ हो जाता है।
°हिम्मत, _आसान_

2. *परमात्म मिलन-ज्ञान की विशेषता* है – *अविनाशी प्राप्तियां* होना। यह सब प्राप्तियां भविष्य में ही होंगी। _(सही / गलत)_
° नहीं। अभी संगमयुग की विशेषता है एक कदम उठाओ और *हजार कदम प्रारब्ध* में पाओ। (तो सिर्फ पुरूषार्थी नहीं लेकिन *श्रेष्ठ प्रारब्धी* हैं – इस *स्वरूप को सदा सामने* रखो। प्रारब्ध को देखकर सहज ही चढ़ती कला का अनुभव करेंगे।)
° “ *पाना था सो पा लिया* ” (यह गीत गाओ तो घुटके और झुटके खाने से बच जायेंगे।)

3. यह है ईश्वरीय युनिवर्सिटी, *ईश्वरीय विश्व विद्यालय* । कैसे?
° (ईश्वरीय विश्व विद्यालय) एक ही होता है, जो *ईश्वर* आकर खोलते हैं, जिससे *सारी विश्व का कल्याण* हो जाता है।
° (ईश्वरीय विश्व विद्यालय, वर्ल्ड युनिवर्सिटी।) *सारी युनिवर्स को चेंज किया जाता* है।

4. ____ होते हुए भी फिर भी बाप को भूल जाते हैं। बाप की ____, यह है पढ़ाई का तन्त। याद की यात्रा से _____ अवस्था को पाने में मेहनत लगती है, इसमें ही माया के विघ्न आते हैं।
°निश्चय, _याद_, _कर्मातीत_

5. बाप कहते हैं मैं इनका लोन लेता हूँ, इसलिए मेरा ____ अलौकिक जन्म कहा जाता है।अभी पार्ट है – विश्व को ____ बनाना। उनका नाम बड़ा अच्छा है – ____ गॉड फादर। बाप रचयिता है _____ का।
°दिव्य, _नया_, _हेविनली_, _स्वर्ग_

6. राइट रांग को समझाने वाला एक ही ______ होता है, जिसको ____ कहते हैं। बाप ही आकर हर एक को राइटियस बनाते हैं। राइटियस बनेंगे तो फिर मुक्ति में जाकर _____ में आयेंगे।
°राइटियस, _ट्रूथ_, _जीवनमुक्ति_

7. बाप ही आकर समझाते हैं, बाप को ज्ञान का सागर कहा जाता है तो जरूर ज्ञान देंगे ना। *प्रेरणा की तो बात होती नहीं*। _(सही / गलत)_
° *सही* (भगवान कोई प्रेरणा से समझाते हैं क्या। तुम जानते हो उनके पास सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान है। वह फिर तुम बच्चों को सुनाते हैं।)

8. *सच्चा श्री श्री 108 का टाइटिल* कईयों को मिल सकता। _(सही / गलत)_
° नहीं। *बाप को ही* श्री श्री 108 जगतगुरू कहा जाता है, जो 108 रत्नों को पास कराते। (8 रत्न गाये जाते हैं। वह पास विद् ऑनर होते हैं इसलिए उनको जपते हैं। फिर उनसे कम 108 की पूजा करते हैं।)

9. हर एक आत्मा की अपने ____ पर सवारी है। अभी तुम्हारी बुद्धि में 84 का ____ है। जानते हो अभी हम ____ जाते हैं, फिर ____ में आयेंगे।
°रथ, चक्र, _घर_, _स्वर्ग_

10. ड्रामा को भी तुम बच्चे जानते हो। तो *ड्रामा की कौन-सी विशेषताएं* आज बाबा ने सुनाई? (4)
° आदि से लेकर अन्त तक पार्ट बजाने नम्बरवार आते हो। यह *खेल चलता ही रहता* है। (ड्रामा शूट होता जाता है।)
° यह *एवर न्यु* है। (यह ड्रामा कभी पुराना नहीं होता है।)
° और सब नाटक आदि विनाश हो जाते हैं। (यह बेहद का *अविनाशी ड्रामा* है। इनमें सब *अविनाशी पार्टधारी* हैं। *अविनाशी खेल* वा माण्डवा देखो कितना बड़ा है।)
° बाप आकर पुरानी सृष्टि को फिर नया बनाते हैं। वह सब तुमको साक्षात्कार होगा। जितना नज़दीक आयेंगे फिर तुमको खुशी होगी। साक्षात्कार करेंगे। (कहेंगे अब पार्ट पूरा हुआ। *ड्रामा को फिर रिपीट* करना है। फिर *नयेसिर पार्ट बजायेंगे*, जो कल्प पहले बजाया है। इसमें ज़रा भी *फ़र्क नहीं हो सकता* है, इसलिए जितना हो सके तुम बच्चों को ऊंच पद पाना चाहिए।)

11. बाबा हम पढ़े-लिखे नहीं हैं। *मुख से कुछ निकलता नहीं*। यह कहना ठीक है। _(सही / गलत)_
° ऐसा तो होता नहीं। *मुख तो जरूर चलता ही है*। खाना खाते हो मुख चलता है ना। वाणी न निकले यह तो हो नहीं सकता। (बाबा ने बहुत सिम्पुल समझाया है। कोई *मौन में रहते तो भी ऊपर में इशारा देते* हैं कि उनको याद करो। दु:ख हर्ता सुख कर्ता वह एक ही दाता है।)

12. जबकि *इस पुरूषोत्तम संगमयुग पर ही* ज्ञान सागर परमात्मा शिवबाबा हमें उत्तम ते उत्तम पुरुष लक्ष्मी-नारायण बनाते (स्वर्ग के मालिक)। इसका भक्ति में कौन-सा *यादगार त्योहार* है?
° *पुरूषोत्तम मास* भी होता है। (सतयुग-त्रेता-द्वापर-कलियुग…… यह 4 युग तो हैं। पांचवा फिर है पुरूषोत्तम संगमयुग। इस युग में मनुष्य चेंज होते हैं। कनिष्ट से सर्वोत्तम बनते हैं।)

13. शास्त्रों में दिखाते – बड़ी प्रलय हुई। फिर नम्बरवन *श्रीकृष्ण पीपल के पत्ते पर अगूंठा चूसता सागर में* आया। इसका आध्यात्मिक रहस्य क्या है?
° *पहले-पहले ज्ञान सागर से निकला हुआ उत्तम ते उत्तम पुरूष श्रीकृष्ण* है। (ज्ञान सागर से स्वर्ग की स्थापना होती है। उनमें नम्बरवन पुरूषोत्तम यह श्रीकृष्ण है और यह है ज्ञान का सागर, पानी का नहीं। प्रलय भी होती नहीं।)

14. यज्ञ में कोई लाख *सालिग्राम* (हम आत्माओं का यादगार) भी बनाते हैं। इसका *आध्यात्मिक रहस्य* क्या है?
° क्योंकि *तुम सभी भारत की सेवा कर रहे* हो बाप के साथ। बाप की पूजा होती है तो बच्चों की भी पूजा होनी चाहिए। (यह नहीं जानते कि रूद्र पूजा क्यों होती है। बच्चे तो सब शिवबाबा के हैं। इस समय सृष्टि की कितनी आदमशुमारी है इसमें सब आत्मायें शिवबाबा के बच्चे ठहरे ना। परन्तु *मददगार सिर्फ तुम बनते*।)

15. यह पुरानी प्वाइंट बाबा फिर क्यों *रिपीट* करते?
° कई *बच्चे नये-नये आते* हैं तो बाप को फिर पुरानी प्वाइंट रिपीट करनी पड़ती हैं।

16. कौन-सी बात सोचने वा बोलने से *कभी भी उन्नति* नहीं हो सकती?
° *ड्रामा में होगा तो पुरूषार्थ कर लेंगे*। ड्रामा करायेगा तो कर लेंगे। (यह कहना ही रांग है। तुम जानते हो अभी जो हम पुरुषार्थ कर रहे हैं, यह भी ड्रामा में नूँध है। पुरुषार्थ करना ही है।)

17. कोई कुछ *खाते-पीते नहीं* हैं, *आग-पानी से चले जाते*। यह तो बहुत अच्छी बात है। _(सही / गलत)_
° नहीं (कोई सारी आयु खाता-पीता नहीं फिर भी क्या? *प्राप्ति तो कुछ नहीं* है ना। झाड़ को भी खाना तो मिलता है ना नेचुरल।)
° हमको तो इस सहज *राजयोग से जन्म-जन्मान्तर* का फायदा है। जन्म-जन्मान्तर के लिए *दु:खी से सुखी* बनाते। बाप कहते हैं – बच्चे, ड्रामा अनुसार हम तुमको गुह्य बातें सुनाता हूँ।)

18. कई मुक्ति को ही मोक्ष कहते, इसको ही ऊंच पद समझते (और जीवन-मुक्ति समझते जो जीवन में रहकर अच्छा कर्म करते)। बाकी *कर्मबन्धन से मुक्त हो जाना* वो तो *कोटों में से कोई विरला* ही होता। _(सही / गलत)_
° *नहीं* , यह है उन्हों की अपनी मत। *हम तो परमात्मा द्वारा जान चुके हैं* पहले विकारी कर्मबन्धन से मुक्त होने के बाद ही आदि-मध्य-अन्त दु:ख से छूट सकेंगे। (पहले *जब ईश्वरीय नॉलेज को धारण करे* तब ही उस स्टेज पर पहुँच सके, और उस *स्टेज पर पहुँचाने वाला स्वयं परमात्मा* चाहिए क्योंकि मुक्ति जीवनमुक्ति देते वह हैं।)

19. बाप ही *पुरानी दुनिया* नर्क रचेंगे। _(सही / गलत)_
° गलत ( *मकान 🏡 हमेशा नया बनाया जाता* है। शिवबाबा नई दुनिया रचते हैं ब्रह्मा द्वारा।)

20. वानप्रस्थी बनना अर्थात् गुरू द्वारा वाणी से परे जाने का पुरूषार्थ करना। परन्तु *वापिस कोई जा नहीं सकते*। _(सही / गलत)_
° *सही* (क्योंकि विकारी भ्रष्टाचारी हैं। यह लक्ष्मी-नारायण निर्विकारी श्रेष्ठाचारी हैं। कुमारियां भी निर्विकारी हैं – इसलिए उनके आगे माथा टेकते हैं।)

21. शंकर *आंख खोलते हैं तो विनाश* होता है। _(सही / गलत)_
° यह कहना भी ठीक *नहीं* है। (बाप कहते हैं – न मैं विनाश कराता हूँ, न वह करते हैं, यह रांग है। देवतायें थोड़ेही पाप करेंगे। अब शिवबाबा बैठ यह बातें समझाते हैं।)

Answers from Sakar Murli 01-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 01-10-2020*

1. सुने हुए को ____ करो, इससे ही शक्तिशाली बनेंगे।
°मनन

2. जैसे बाप का भण्डारा सदा चलता रहता है, रोज़ देते हैं ऐसे *आपका भी अखण्ड लंगर चलता रहे*। क्यों? (3)
° क्योंकि आपके पास *ज्ञान* का, *शक्तियों* का, *खुशियों का भरपूर भण्डारा* है। (इसे साथ में रखने वा यूज़ करने में कोई भी खतरा नहीं है। यह भण्डारा खुला होगा तो चोर नहीं आयेगा।)
° भण्डारा *बंद रखेंगे तो चोर (माया के) आ जायेंगे!* (इसलिए रोज़ अपने मिले हुए खजानों को देखो और स्व के प्रति और औरों के प्रति यूज करो।)
° तो *अखण्ड महादानी* बन जायेंगे।

3. *यहाँ तुम आते हो रिफ्रेश होने*। बाबा किस स्थान की बात कर रहे हैं?
° इसका नाम ही पड़ा है *मधुबन* । तुम्हारे कलकत्ता वा बाम्बे में थोड़ेही मुरली चलाते हैं। *मधुबन में ही मुरली बाजे* । (मुरली सुनने के लिए बाप के पास आना होगा रिफ्रेश होने। नई-नई प्वाइंट्स निकलती रहती हैं। सम्मुख सुनने में तो फील करते हो, बहुत फर्क रहता है।)

4. पहला नम्बर विश्व का प्रिन्स *श्रीकृष्ण के माथे में मोर 🦚का पंख* लगाते हैं। इसका आध्यात्मिक रहस्य क्या है?
° क्योंकि सतयुग में भी *विकार का नाम नहीं*। (तुमको मालूम है – मोर-डेल है वह विकार से बच्चा पैदा नहीं करते। उनको आंसू गिरता है, उसे डेल धारण करती है। नेशनल बर्ड कहते हैं।)

5. हमें किस बात का *नशा* होना चाहिए? (2)
° तुम्हारा नाम है बी.के.। तुम *महिमा लायक बन फिर पूजा लायक* बनते हो।
° *बाप ही तुम्हारा टीचर* भी है। तो तुम बच्चों को नशा रहना चाहिए, हम स्टूडेन्ट हैं। भगवान *जरूर भगवान-भगवती ही बनायेंगे*।

6. हम बच्चों को *बहुत खुशी* क्यों होनी चाहिए?
° हम *बेहद के बाप के सम्मुख बैठे हैं* जिसको कोई भी नहीं जानते हैं। (ज्ञान का सागर वह शिवबाबा ही है। देहधारी से बुद्धि योग निकाल देना चाहिए।)

7. हम रूहानी-चैतन्य-अविनाशी पार्टधारी आत्माओं को इस बेहद नाटक- *ड्रामा के सब राज़* मालूम है। जैसे कि? (3)
° तुम इस सृष्टि चक्र को जानते हो, इसमें *सब एक्टर्स का पार्ट नूँधा हुआ* है। बदल नहीं सकता। न कोई छुटकारा पा सकता। हाँ, थोड़ा समय मुक्ति मिलती है। (बाप कहते हैं मेरी आत्मा में भी यह ज्ञान नूँधा हुआ है। हूबहू तुम को वही बोलेंगे जो कल्प पहले ज्ञान दिया था।)
° तुम तो *आलराउण्ड* हो। *84 जन्म लेते* हो। बाकी सब अपने घर में होंगे फिर पिछाड़ी में आयेंगे। तुम तो *ड्रामा अनुसार पढ़ते* हो। जानते हो बाबा ने *5 हज़ार वर्ष पहले भी ऐसे राजयोग* सिखाया था। तुम फिर औरों को समझाते हो कि शिवबाबा ऐसे कहते हैं। (अभी तुम जानते हो हम कितने ऊंच थे, अब कितने नींच बने हैं। फिर बाप ऊंच बनाते हैं तो ऐसे पुरूषार्थ करना चाहिए ना।)
° *आगे चल बहुत पार्ट देखने हैं* । (बाबा पहले-पहले सब सुना दे तो टेस्ट निकल जाए। आहिस्ते-आहिस्ते इमर्ज होता जाता है। एक सेकण्ड न मिले दूसरे से।)

8. वेद-शास्त्र, शिव-पूजा से बाप कहते *कोई मेरे को प्राप्त नहीं कर सकते*। क्यों?
° क्योंकि *भक्ति है ही उतरती कला*। ज्ञान से सद्गति होती है तो जरूर कोई से उतरते भी होंगे। *यह एक खेल है* , जिसको कोई भी जानते नहीं। (पत्थरबुद्धि बन गये हैं तो पूजा भी पत्थर की करते हैं, ज्ञान बिगर। दूसरी तरफ कहते हैं नाम-रूप से न्यारा!)

9. जब ज्ञान है तो तुम पूजा नहीं करते हो। चैतन्य सम्मुख में है, उनको ही तुम _____ करते हो। जानते हो इससे विकर्म _____ होंगे।
°याद, _विनाश_

10. बाबा से हमारी *कौन-सी प्रतिज्ञा* है?
° बाप से तुम प्रतिज्ञा करते आये हो – *बाबा मेरा तो आप एक दूसरा न कोई*। हम आपको ही याद करेंगे। (भक्ति मार्ग में भल गाते हैं परन्तु उनको पता नहीं है कि याद से क्या होता है। वह तो बाप को जानते ही नहीं।)

11. जैसे हम *आत्मा बिन्दी है वैसे बाप भी* बिन्दी है। इसमें मूँझने की कोई दरकार नहीं। _(सही / गलत)_
° *सही* (कोई कहते हैं हम देखें। बाप कहते हैं देखने वालों की तो तुमने बहुत पूजा की। फायदा कुछ भी हुआ नहीं। अब *यथार्थ रीति मैं तुमको समझाता हूँ*। मेरे में सारा पार्ट भरा हुआ है। सुप्रीम सोल हूँ ना, सुप्रीम फादर।)

12. यहाँ मुख्य है याद की यात्रा। *याद भी घड़ी-घड़ी खिसक जाती*। यहां बाबा ने कौन-सी चीज़ का मिसाल दिया?
° जैसे *पारा* खिसक जाता है ना! (कितना चाहते हैं बाप को याद करें फिर और-और ख्याल आ जाते हैं। इसमें ही तुम्हारी रेस है।)

13. इस ज्ञान में कौन-से बच्चे *तीखे* जा सकते हैं? *घाटा* किन्हें पड़ता है?
° जिन्हें अपना *पोतामेल रखना आता* है वह इस ज्ञान में बहुत तीखे जा सकते हैं। घाटा उनको पड़ता है जो *देही-अभिमानी* नहीं रहते। (बाबा कहते व्यापारी लोगों को पोतामेल निकालने की आदत होती है, वह यहाँ भी तीखे जा सकते हैं।)

14. गीत 🎵:- मुखड़ा देख ले प्राणी… जबकि हमे दिव्यगुण-सम्पन्न देवता बनना है, तो अन्दर कौन-से *5 प्रकार के अवगुण* नहीं होने चाहिए?
° *गुस्सा* करना, *मारना*, *तंग* करना, *बुरा काम* करना , *चोरी* -चकारी करना यह सब महापाप है। (बाप कहते हैं तुमको देवता बनाते हैं तो अपनी जांच पूरी करो। कहाँ तक दैवीगुणों की धारणा हुई है? मेहनत बिगर विश्व का मालिक थोड़ेही बन सकेंगे।)

15. बाप आये हैं रूहानी सेवा करने तो बच्चों का भी *फ़र्ज है रूहानी सेवा* करना। *कम से कम* क्या बताना है?
° यह तो बताओ – *बाप को याद करो और पवित्र बनो* । (पवित्रता में ही फेल होते हैं क्योंकि याद नहीं करते हैं।)

16. बाबा ने *सेवा की सुन्दर युक्ति* सुनाई, कहते हैं यह भी जज करो …….. क्या?
° जज करो कि *महान् आत्मा किसको कहा जाए?* *श्रीकृष्ण* जो छोटा बच्चा स्वर्ग का प्रिन्स है, वह महात्मा है *या आजकल के कलियुगी मनुष्य?* (वह विकार से पैदा नहीं होता है ना। वह है निर्विकारी दुनिया।)

17. हमारी *कर्मातीत स्थिति* हो गई होंगी। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे नहीं कि फट से पाप मिट जायेंगे। समय लगता है। कर्मातीत अवस्था हो जाए तो *फिर यह शरीर ही न रहे*। परन्तु अभी कोई कर्मातीत अवस्था को नहीं पा सकते हैं। फिर *उनको सतयुगी शरीर चाहिए*।)

18. अभी तुम *बी.के.* बने हो। तो हमारे *कितने प्रकार के सम्बन्ध* है?
° समझाया जाता है – *भगवान एक* है। *बाकी सब भाई-भाई* । दूसरा कोई कनेक्शन नहीं। प्रजापिता ब्रह्मा से रचना होती है फिर वृद्धि होती है। (सबसे जास्ती होता है पति का प्रेम। तुम्हें तो पतियों के पति (परमात्मा) को याद करना है और सबको भूल जाना है)

19. धर्मराज द्वारा *बहुत डन्डे* कब खाने पड़ेंगे?
° *शिवबाबा का यह रथ* है। इनका *रिगार्ड नहीं रखेंगे तो* धर्मराज द्वारा बहुत डन्डे खाने पड़ेंगे। *बड़ों का* रिगार्ड तो रखना है ना। (आदि देव का कितना रिगार्ड रखते हैं। जड़ चित्र का इतना रिगार्ड तो चैतन्य का कितना रखना चाहिए।)

Answers from Sakar Murli 31-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 31-10-2020*

1. ____ असम्भव से भी सम्भव करा देती है।
° _दृढ़ता_

2. *जैसे बाप* बहुरूपी है – सेकण्ड में निराकार से आकारी वस्त्र धारण कर लेते हैं, ऐसे आप भी इस मिट्टी की ड्रेस को छोड़ *आकारी फरिश्ता ड्रेस, चमकीली ड्रेस पहन लो* । तो कौन-सी 2 प्राप्तियां होंगी?
° *सहज मिलन* भी होगा,
° और *रूहरिहान का क्लीयर रेसपान्स समझ में आ जायेगा*। (क्योंकि यह ड्रेस पुरानी दुनिया की वृत्ति और वायब्रेशन से, माया से प्रूफ है, इसमें माया इन्टरफियर नहीं कर सकती।)

3. तुम्हारे पास अनगिनत ____ होगा। तुम जानते हो बाबा हमारी ______ खूब भर रहे हैं। कहते हैं कुबेर के पास बहुत धन था। वास्तव में तुम हर एक _____ हो। तुमको ____ रूपी खजाना मिल जाता है। खुदा ______ की भी कहानी है। तुम जानते हो बरोबर हम योगबल से विश्व की बादशाही लेते हैं।
° _धन_, _झोली_, _कुबेर_,_वैकुण्ठ_, _दोस्त_,

4. अभी तुम बच्चे बाप से सम्मुख पढ़ रहे हो। अन्दर में _____ आती है – हम प्रैक्टिकल में बैठे हैं। पुरूषोत्तम संगमयुग को भी जरूर आना है। कब आता है, कैसे आता है – यह कोई भी नहीं जानते। तुम बच्चे जानते हो तो कितना _____ होना चाहिए। हम राजाओं का ____ बन रहे हैं। तो अन्दर में कितनी _______ होनी चाहिए। हम डबल _____ बहुत ऊंच बनते हैं।
° _भासना_, _गद्गद्_, _राजा_, _खुशी_, _सिरताज_

5. भगवान बाप हमको पढ़ाते हैं। कभी कोई समझ न सके कि _____ बाप कैसे आकर पढ़ाते हैं। तुम बच्चे जानते हो हमको बाबा _____ बना रहे हैं। अमरपुरी का मालिक बना रहे हैं, कितनी ____ होनी चाहिए।
° _निराकार_, _अमर_, _खुशी_

6. *सुख-शान्ति-पवित्रता का सागर* भगवान बाप 21 जन्म अर्थात् आधाकल्प 2500 वर्ष के लिए हमे *शान्ति का वर्सा-वरदान-बख़्शीश गैरन्टी देते* (शान्तिधाम-सुखधाम, मन और विश्व में भी शान्ति)। यह लेने हम अपना भी पुरूषार्थ करते हैं, साथ में हमारा क्या *फर्ज* है? (2)
° बच्चों का फर्ज है, सब बच्चों को *शान्ति देना* है। (2-4 को वर्सा मिलने से क्या होगा। कोई को रास्ता बताया जाता है, परन्तु निश्चय न होने कारण दूसरों को आपसमान बना नहीं सकते।)
° औरों को *रास्ता बताते* हैं। तुम *लिखते* भी हो बेहद के बाप से 100 प्रतिशत पवित्रता, सुख, शान्ति का वर्सा पा सकते हो। (यहाँ 100 प्रतिशत अपवित्रता, दु:ख, अशान्ति है। परन्तु मनुष्य समझते नहीं।)

7. तुम्हीं कल्प-कल्प बाप से वर्सा लेते हो अर्थात् माया पर जीत पाते हो फिर हारते हो। यह है _____ की हार और जीत। हम अभी पुरूषोत्तम बन रहे हैं। पुरूषों में उत्तम पुरूष _____ से ही बनते हैं। तुमको _____ पढ़ाते हैं। इस पढ़ाई से ही अपने _____ अनुसार पद पाते हो। जितना जो पढ़ेंगे उतना ग्रेड मिलेगी, _____ की।
हम फिर दूसरों को बताते हैं।
° _बेहद_, _पढ़ाई_, _बाप_, _पुरूषार्थ_, _राजाई_

8. हम *सबको क्या कहते* हैं? _(सेवा)_
° *बाप को याद करो। बस* । (ऊंच ते ऊंच बाप को याद करने से ही ऊंच पद मिलेगा। तुम राजाओं के राजा बनते हो।)

9. इस आसुरी दुनिया में बहुत-बहुत _____ -शील बनकर रहना है। कोई दु:ख दे तो भी _____ करना है। बाप की ____ -मत कभी नहीं छोड़नी है।
° _सहन_, _सहन_, _श्री_

10. इस 5 हज़ार वर्ष के बेहद *झाड़* की कौन-सी 2 विशेषताएं सुनाई?
° *इनकी एक्यूरेट आयु का तुमको पता है*, और जो झाड़ होते हैं उनकी आयु का किसको पता नहीं होता है, अन्दाज़ बता देते हैं।
° तूफान आया, झाड़ गिरा, आयु पूरी हो गई (उस झाड़ की)। परन्तु इस बेहद के झाड़ की आयु *पूरे 5 हज़ार वर्ष* है। इसमें एक दिन न कम, न जास्ती हो सकता है। यह *बना-बनाया* झाड़ है। इसमें *फ़र्क नहीं* पड़ सकता। ड्रामा में जो सीन जिस समय चलनी है, *उस समय ही* चलेगी। *हूबहू रिपीट* होना है। आयु भी एक्यूरेट है। (बाप को भी नई दुनिया स्थापन करने आना है। *एक्यूरेट टाइम पर आते* हैं। एक सेकेण्ड का भी उसमें फ़र्क नहीं पड़ सकता। यह भी अब तुम्हारी बेहद की बुद्धि हुई। तुम ही समझ सकते हो। पूरे 5 हज़ार वर्ष बाद बाप आकर प्रवेश करते हैं, इसलिए शिवरात्रि कहते हैं।)

11. कृष्ण के लिए जन्माष्टमी कहते हैं। *शिव की जन्माष्टमी नहीं कहते*, शिव की *रात्रि* कहते हैं, क्यों?
° क्योंकि अगर जन्म हो तो फिर मौत भी हो। मनुष्यों का *जन्म* दिन कहेंगे। (शिव के लिए हमेशा *शिवरात्रि* कहते हैं। उनका जन्म *दिव्य अलौकिक* है, जो और कोई का हो नहीं सकता। यह कोई जानते नहीं – शिवबाबा कब, कैसे आते हैं, शिवरात्रि का अर्थ क्या है। यह है बेहद की रात। भक्ति की *रात पूरी हो दिन होता* है। अब तुम जानते हो, अब दिन शुरू होना है। पढ़ते-पढ़ते जाए अपने घर पहुँचेंगे, फिर दिन में आयेंगे। आधाकल्प दिन और आधाकल्प रात गाई जाती है परन्तु किसकी भी बुद्धि में नहीं आता।)

12. कलियुग की आयु 40 हज़ार वर्ष बाकी, सतयुग की लाखों वर्ष, इस गलत *मान्यता में क्या गड़बड़* है? (2)
° फिर *आधा-आधा का हिसाब* ठहरता नहीं।
° विश्व तो है ही, उनमें पार्ट बजाते-बजाते मनुष्य ही तंग हो जाते हैं। अगर *84 लाख जन्मों का आवागमन होता तो पता नहीं क्या होता*। (न जानने के कारण कल्प की आयु भी बढ़ा दी है।)

13. इनमें पहले यह नॉलेज थोड़ेही थी। न कोई गुरू था – जिसने नॉलेज दी। इसका कौन-सा वन्डरफुल *तर्क* बाबा देते?
° अगर गुरू होता तो सिर्फ एक को ज्ञान देंगे क्या। गुरूओं के *फालोअर्स* तो बहुत होते हैं ना। *एक थोड़ेही होगा* । (यह समझने की बातें हैं ना। सतगुरू है ही एक। वह हमको रास्ता बताते हैं। हम फिर दूसरों को बताते हैं।)

14. मनुष्य समझते नहीं। कहते ऋषि-मुनि आदि तो *पवित्र* हैं। परन्तु……… क्या?
° पैदाइस तो फिर भी विष से होती है ना। मूल बात ही यह है। रावण राज्य में पवित्रता हो न सके। ( *पवित्रता-सुख आदि सबका सागर* एक ही बाप है। *सम्पूर्ण पवित्र* तो देवताओं को ही कहेंगे।)

15. तुम एक तरफ पुकारते हो कि पतित-पावन आओ, अब मैं आया हूँ कहता हूँ बच्चे ______ -पना छोड़ दो, तो तुम छोड़ते क्यों नहीं। पावन नहीं बनेंगे तो तुम्हारा ही ______ है। मेहनत कर पावन से फिर पतित बन जायेंगे, तो की कमाई ____ हो जायेगी। _____ आयेगी हम खुद ही पतित बन पड़े हैं फिर दूसरे को कैसे कहेंगे कि पावन बनो। अन्दर खायेगा कि हमने कितना फरमान का ______ किया। यहाँ तुम बाप से डायरेक्ट ______ करते हो, जानते हो बाबा हमको सुखधाम-शान्तिधाम का मालिक बना रहे हैं। कभी कोई पाप हो तो छिपाना नहीं है।
° _पतित_, _नुकसान_, _चट_, _लज्जा_, _उल्लंघन_, _प्रतिज्ञा_

Answers from Sakar Murli 30-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 30-10-2020*

1. परमात्म प्यार की पालना का स्वरूप है – ____ -योगी जीवन।
° _सहज_

2. *सेवा* करने से कौन-कौन सी प्राप्तियां होती? _(वरदान)_ (3)
° याद और सेवा का बैलेन्स है तो *हर कदम में चढ़ती कला* का अनुभव करते रहेंगे।
° हर संकल्प में सेवा हो तो *व्यर्थ से छूट जायेंगे* ।
° सेवा जीवन का एक अंग बन जाए, जैसे शरीर में सब अंग जरूरी हैं वैसे ब्राह्मण *जीवन का विशेष अंग* सेवा है। (बहुत सेवा का चांस मिलना, स्थान मिलना, संग मिलना यह भी *भाग्य की निशानी* है। ऐसे सेवा का गोल्डन *चांस लेने वाले* ही राज्य अधिकारी बनते हैं।)

3. प्वाइंट्स तो बच्चों को बहुत मिलती हैं। फिर भी बाबा कहते हैं – *और कुछ धारणा नही होती है, मुख नहीं चलता है*, तो?
° अच्छा तुम *बाप को याद करते रहो तो तुम भाषण आदि करने वालों से ऊंच पद* पा सकते हो (और मुख भी खुल जाएंगा)। भाषण करने वाले कोई समय तूफान में गिर पड़ते हैं। वह गिरे नहीं, बाप को याद करते रहें तो जास्ती पद पा सकते हैं।

4. वहाँ तो है प्रालब्ध _____ ही ____, दु:ख की बात नहीं। उनको ____ कहते हैं। ____ गॉड फादर ही हेविन का मालिक बनाते हैं। ऐसे बाप को भी कितना भूल जाते हैं। बाप आकर बच्चों को _एडाप्ट_ करते हैं।
° _सुख_, _सुख_, _हेविन_, _हेविनली_,

5. “मीठे बच्चे – तुम्हें एक बाप से एक मत मिलती है, जिसे ____ मत कहते हैं, इसी _____ मत से तुम्हें देवता बनना है”
° _अद्वेत_, _अद्वेत_

6. तुम्हारी बुद्धि में है, हूबहू कल्प पहले मुआफिक संगमयुग पर हम ज्ञान सागर भगवान (और प्रजापिता) द्वारा *राजयोग की पढ़ाई पढ़कर देवता बन रहे हैं – नई दुनिया के* । तो इसमे हमे क्या करना है? (3)
° अभी तुमको बाप समझाते हैं, यह *बुद्धि में याद रखो – हम पढ़ रहे हैं। पढ़ाने वाला है शिवबाबा* । (यह रात-दिन याद रहना चाहिए। यही माया घड़ी-घड़ी भुला देती है, इसलिए याद करना होता है। बाप, टीचर, गुरू तीनों को भूल जाते हैं। है भी एक ही फिर भी भूल जाते हैं। रावण के साथ लड़ाई इसमें है।)
° बाप कहते हैं – हे आत्मायें, तुम *सतोप्रधान पूज्य थी* , अभी तमोप्रधान बनी हो। जब शान्तिधाम में थी तो *पवित्र* थी। (प्योरिटी के बिगर कोई आत्मा ऊपर में रह नहीं सकती।)
° अभी तुम बच्चों को *घड़ी-घड़ी याद* करना है – बेहद के बाप को।

7. मनुष्य समझ लेते कि *स्वर्ग ऊपर में* है। परन्तु वास्तविकता क्या है?
° यह तो *चक्र* फिरता रहता है। आधाकल्प के बाद *स्वर्ग फिर नीचे चला जायेगा फिर आधाकल्प स्वर्ग ऊपर आयेगा* । (इनकी आयु कितनी है, कोई जानते नहीं। तुमको बाप ने सारा चक्र समझाया है। तुम ज्ञान लेकर ऊपर जाते हो, चक्र पूरा होता है फिर नयेसिर चक्र शुरू होगा। यह बुद्धि में चलना चाहिए। जैसे वह नॉलेज पढ़ते हैं तो बुद्धि में किताब आदि सब याद रहते हैं ना। यह भी पढ़ाई है। यह भरपूर रहना चाहिए, भूलना नहीं चाहिए।)

8. यह पढ़ाई बूढ़े, जवान, बच्चे आदि सबको हक है पढ़ने का। इतना सहज क्यों है?
° *सिर्फ अल्फ को जानना* है। (अल्फ को जान लिया तो बाप की प्रापर्टी भी बुद्धि में आ जायेगी।)

9. तो *पढ़ाई में उन्नति* प्राप्त करने लिए पहली मुख्य धारणा कौन-सी है? (2)
° यह बुद्धि से समझने की बातें हैं। कोई पूरी रीति समझते नहीं हैं तो फिर *झुटका* खाते रहते हैं। कमाई में कभी झुटका नहीं खाते हैं। वह कमाई तो है अल्पकाल के लिए। यह तो आधाकल्प के लिए है। परन्तु *बुद्धि और तरफ* भटकती है तो फिर *थक* जाते हैं। *उबासी* देते रहते हैं। तुमको *आंखें बन्द* करके नहीं बैठना चाहिए। (तुम तो जानते हो आत्मा अविनाशी है, शरीर विनाशी है।)
° *हम आत्मा बाप द्वारा पढ़ते* हैं। यह कोई को पता नहीं। ज्ञान सागर परमपिता परमात्मा आकर पढ़ाते हैं। हम *आत्मा सुन रही* हैं। (अपने को आत्मा समझ बाप को याद करने से विकर्म विनाश होंगे। तुम्हारी *बुद्धि ऊपर* चली जायेगी। शिवबाबा हमको नॉलेज सुना रहे हैं, इसमें बहुत रिफाइन बुद्धि चाहिए।)

10. *रिफाइन बुद्धि* करने लिए कौन-सी युक्ति हैं?
° *अपने को आत्मा* समझने से बाप जरूर याद आयेगा। अपने को आत्मा समझते ही इसलिए हैं कि *बाप याद पड़े, सम्बन्ध रहे* जो सारा कल्प टूटा है।

11. अब बाप कहते हैं बच्चे _____ याद करो और अपने ____ को याद करो। जहाँ से तुम आये हो पार्ट बजाने। आत्मा को घर बहुत _____ लगता है। कितना याद करते हैं परन्तु _____ भूल गये हैं। तुम्हारी बुद्धि में है, हम बहुत दूर रहते हैं। ____ से परे जाना है। आत्मा शरीर से निकल जाती है तो फिर आवाज़ नहीं रहता। बच्चे जानते हैं हमारा तो वह ____ होम है। फिर देवताओं की है स्वीट राजधानी, अद्वेत राजधानी।
° _मामेकम्_, _घर_, _प्यारा_, _रास्ता_, _वाणी_, _स्वीट_

12. बच्चों को समझाया है – *ओम्* का अर्थ अलग है और *सो हम* का अर्थ अलग है। क्या है अर्थ?
° ( *हम सो* ) तुम आत्मा शान्तिधाम में रहने वाली हो फिर आती हो पार्ट बजाने। देवता, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र बनते हैं।
° *ओम्* अर्थात् हम आत्मा।

13. यह भी वन्डर है जो श्री _____ है वही अन्त में आकर भाग्यशाली _____ बनते हैं। उनमें बाप की _____ होती है तो भाग्यशाली बनते हैं। ब्रह्मा सो ____ , विष्णु सो ____ , यह 84 जन्मों की हिस्ट्री बुद्धि में रहनी चाहिए। अच्छा!
° _नारायण_, _रथ_, _प्रवेशता_, _विष्णु_, _ब्रह्मा_

14. *स्त्री* को समझते हैं मेरी स्त्री। तो वह *मुख वंशावली* ठहरी। _(सही / गलत)_
° *सही*, स्त्री है ही मुख वंशावली। फिर जब बच्चे होते हैं, वह हैं कुख वंशावली।

15. सबसे जास्ती जो विकार में गिरते हैं तो _____ टूट जाते हैं। पांचवी मंजिल है – _____ । चौथी मंजिल है ____ फिर उतरते आओ। लिखते भी हैं बाबा हम गिर पड़े। क्रोध के लिए ऐसे नहीं कहेंगे कि हम गिर पड़े। _____ मुँह करने से बड़ी चोट लगती है फिर दूसरे को कह न सकें कि महाशत्रु है। बाबा बार-बार समझाते हैं – ______ आंखों की बहुत सम्भाल करनी है। वह है सिविलीयन राज्य। अभी तुम्हारी आत्मा को ________ मिलती है, जो 21 जन्म काम देती है। वहाँ कोई भी क्रिमिनल नहीं बनते।
° _हडगुड_, _देह-अभिमान_, _काम_, _काला_, _क्रिमिनल_, _सिविलाइज़_

Answers from Sakar Murli 29-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 29-10-2020*

1. अव्यक्त पालना के वरदान का अधिकार लेने के लिए ____ -वादी बनो।
° _स्पष्ट_

2. *आत्मा करावनहार है* , करनहार ये विशेष त्रिमूर्ति शक्तियां हैं (मन, बुद्धि और संस्कार), यह आप *मास्टर रचता* की रचना हैं। तो अब क्या करना है?
° इन्हें अपने *अधिकार की शक्ति से सहयोगी* बनाओ। (जैसे राजा स्वयं कार्य नहीं करता, कराता है, करने वाले राज्य कारोबारी अलग होते हैं।)
° तो *मास्टर रचयिता के वरदान को स्मृति में रख* त्रिमूर्ति शक्तियों को और साकार कर्मेन्द्रियों को सही रास्ते पर चलाओ।

3. तुम जानते हो हम देवता बनने के लिए पढ़ रहे हैं। पढ़ाई में _____ रहता है ना। तुम भी समझते हो हम बाबा द्वारा पढ़कर विश्व के मालिक बनते हैं। तुम्हारी पढ़ाई है फार _____ । बाबा को याद करते-करते आत्मा पवित्र हो जायेगी फिर यह पुराना शरीर खत्म हो जायेगा। बच्चों को अपार ____ होनी चाहिए। तुम हो कितने साधारण और बनते क्या हो! ____ के मालिक। तुम्हारा कितना ____ होगा। ____ स्पून इन माउथ।
° _नशा_, _फ्यूचर_, _खुशी_,
_विश्व_, _श्रृंगार_, _गोल्डन_

4. *पुरूषार्थ पूरा* करना चाहिए। क्यों? _(सतयुग की एक वन्डरफुल प्राप्ति)_
° तुमको *21 जन्म का वर्सा* मिलता है, बेहद के बाप से। फिर *21 पीढ़ी तुम सुखी* रहते हो। बुढ़ापे तक दु:ख का नाम नहीं रहता। फुल आयु सुखी रहते हो। ( *जितना* वर्सा पाने का पुरूषार्थ करेंगे *उतना* ऊंच पद पायेंगे। तो पुरूषार्थ पूरा करना चाहिए।)

5. निर्विकारी के पास तो पहले-पहले जन्म श्री- ____ को ही लेना है।
° _कृष्ण_

6. आगे चल देखना तुम्हारे पास बड़े-बड़े घर के बच्चे _______ कैसे आते हैं। बाप तुम्हारी कितनी महिमा करते हैं। तुमको हम अपने से भी ____ बनाता हूँ। जैसे कोई लौकिक बाप बच्चों को ____ बनाते हैं।
° _प्रिन्स-प्रिन्सेज_, _ऊंच_, _सुखी_

7. इस पुरूषोत्तम संगमयुग पर मोस्ट वैल्युबुल निराकारी-सत् बाप-टीचर-गुरू स्वर्ग-रचयिता *शिवबाबा को लव से याद* कैसे करना है?
° जिनका बाप के साथ पूरा लव है उनको *बहुत कशिश* होती है। ऐसे बाबा को तो *एकदम पकड़ लो* । बाबा आप तो *कमाल* करते हो। आप हमारी *जीवन* ऐसी बनाते हो। बहुत लव चाहिए। (लव क्यों नहीं है क्योंकि कट चढ़ी हुई है। याद की यात्रा के सिवाए कट निकलेगी नहीं, इतने लवली नहीं बनते हैं।)

8. बहुत लव रखना, कट उतारना आदि के फलस्वरूप *हम कैसे* बन जाएगे? (2)
° *लवली* बनते हैं। तुम फूलों को तो यहाँ ही खिलना है, *फूल* बनना है। तब फिर वहाँ जन्म-जन्मान्तर फूल बनते हो। कितनी *खुशी* होनी चाहिए – हम कांटे से फूल बन रहे हैं। फूल हमेशा सबको *सुख देते* हैं। (फूल को सब अपनी आंखों पर रखते हैं, उनसे खुशबू लेते हैं। फूलों का इत्र बनाते हैं। गुलाब का जल बनाते हैं।) बाबा तो वन्डर खाते हैं, शिवबाबा हमको स्वर्ग का फूल बनाते हैं! तमोप्रधान मनुष्य से सतोप्रधान देवता!)
° बाबा को याद करते-करते आत्मा *पवित्र* हो जायेगी फिर यह पुराना शरीर खत्म हो जायेगा। बच्चों को *अपार खुशी* होनी चाहिए।

9. अच्छे *फर्स्टक्लास पुरूषार्थी* बच्चे कौन से बोल खुले दिल से बोलेंगे?
° बाबा हम तो *पास विद् ऑनर* होकर दिखायेंगे। आप *बेफिक्र* रहो। उनका रजिस्टर भी *अच्छा* होगा। (उनके मुख से कभी भी यह बोल नहीं निकलेंगे कि अभी तो हम पुरूषार्थी हैं। पुरुषार्थ कर ऐसा महावीर बनना है जो माया जरा भी हिला न सके।)

10. बाबा हमे *याद की यात्रा मैं दौड़ाकर विन* कराकर कौन-सी 2 माला का मणका बनाना चाहते?
° *रूद्र* माला और *रूण्ड* माला (विष्णु के गले का हार)।

11. आज *बाबा का कौन-सा नया टाइटल* मुरली में था?
° *युद्धिष्ठिर* भी वास्तव में बाप को कहना चाहिए जो युद्ध सिखलाते हैं। (युद्धिष्ठिर बाप तुमको सिखलाते हैं – माया से तुम युद्ध कैसे कर सकते हो। इस समय युद्ध का मैदान है ना। बाप कहते हैं – काम महाशत्रु है, उन पर जीतने से तुम जगत जीत बनेंगे।)

12. और *हमे कौन-सा नया टाइटल* मिला?
° भागीरथ यह है। ऐसे *तुम सब भागीरथ हो, भाग्यशाली* हो ना।

13. बाबा जो ज्ञान का सागर है, सभी आत्माओं का बाप है, वह हमको पढ़ा रहे हैं। ____ रच रहे हैं। मैगजीन में भी अच्छी-अच्छी _____ निकलती रहती हैं। हो सकता है _____ चित्रों की भी मैगजीन निकले। सिर्फ अक्षर छोटे-छोटे हो जाते हैं। ____ तो बने हुए हैं। कहाँ भी कोई बना सकते हैं। ऊपर से लेकर हर एक चित्र का ____ तुम जानते हो।
° _युक्ति_, _प्वाइंट्स_, _रंगीन_, _चित्र_, _आक्यूपेशन_

14. ज्ञान से सर्व की ____ मैं करता हूँ। तुम्हारे निमित्त सबका ____ हो जाता है क्योंकि तुम्हारे लिए जरूर ____ दुनिया चाहिए। तुम कितने खुश होते हो। अब _____ की कान्फ्रेन्स में भी तुम बच्चों को निमंत्रण मिला हुआ है। बाबा तो कहते रहते हैं हिम्मत करो। ____ जैसे शहर में तो एकदम आवाज़ फैल जाए।
° _सद्गति_, _कल्याण_, _नई_, _वेजीटेरियन_, _देहली_

15. तुम कैसे लाइट हाउस हो। एक आंख में ____ -धाम, एक में ____ -धाम। इस चक्र को जानने से तुम ____ -वर्ती राजा, सुखधाम के मालिक बन जायेंगे।अभी तुम विष्णुपुरी क्षीरसागर के मालिक बन रहे हो – ____ की यात्रा से और ____ -दर्शन चक्र फिराने से। ___ -गुण भी यहाँ धारण करने हैं। यह है पुरूषोत्तम _____ -युग। पढ़ते-पढ़ते तुम पुरूषोत्तम बन जायेंगे।
° _मुक्ति_, _जीवनमुक्ति_, _चक्र_, _याद_, _स्व_, _दैवी_, _संगम_

16. माया के तूफानों से डरना नहीं है, ____-वीर बनना है। अपने ____ -गुणों को निकालते जाना है, सदा ____ रहना है। कभी भी हिलना नहीं है।
° _महा_, _अव_, _हर्षित_

17. भक्ति में *सर्वव्यापी* मानने का और एक नया कौन-सा कारण बाबा ने सुनाया?
° भक्ति मार्ग में *बाप तो कोई का भी साक्षात्कार करा सकते* हैं। इस कारण मनुष्यों ने सर्वव्यापी कह दिया है, यह भी ड्रामा की भावी। (तुम बच्चे बहुत ऊंच पढ़ाई पढ़ रहे हो।)

18. सारी विश्व दैवी राजस्थान थी, यही देहली *जमुना का कण्ठा* था, उनको परिस्तान कहा जाता है। और यहां की नदियाँ कैसी है?
° वहां उछलती थोड़ेही हैं। अभी तो *कितनी उछलती हैं, डैम्स फट पड़ते* हैं। (प्रकृति के जैसे हम दास बन गये हैं। फिर तुम मालिक बन जायेंगे। वहाँ माया की ताकत नहीं रहती है जो बेइज्जती करे। धरती की ताकत नहीं जो हिल सके।)

Answers from Sakar Murli 28-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 28-10-2020*

1. ____ को किनारे कर कर्म में बिजी हो जाना – यही अलबेलापन है।
° _योग_

2. विनाश के समय अन्तिम डायरेक्शन्स को कैच करने के लिए _____ बुद्धि चाहिए। इस _____ द्वारा आपको आवाज आयेगा कि इस सेफ स्थान पर पहुंच जाओ। जो बच्चे बाप की ____ में रहने वाले हैं, जिन्हें ____ बनने का अभ्यास है वे विनाश में विनाश नहीं होंगे लेकिन ____ से शरीर छोड़ेंगे।
° _वाइसलेस_, _वायरलेस_, _याद_, _अशरीरी_, _स्वेच्छा_

3. यहाँ तो फिर एक है माशूक, तुम सब हो _____ । वह _____ माशूक तो सदैव गोरा है। _____ प्योर। बाप कहते हैं मैं _____ सदैव खूबसूरत हूँ। तुमको भी खूबसूरत बनाता हूँ। इन देवताओं की ____ नेचुरल ब्युटी है।
° _आशिक_, _सलोना_, _एवर_, _मुसाफिर_, _एकरस_

4. सारे विश्व की राजाई का _____ तुमको मिलता है। तो तुमको कितनी _____ होनी चाहिए। वाह बाबा आपकी तो _____ है। नॉलेज तो आपकी ही है। बड़ी अच्छी समझानी है। आदि सनातन देवी-देवता धर्म वालों ने विश्व की ______ कैसे प्राप्त की। यह किसको भी ख्याल में होगा नहीं। उस समय और कोई _____ होता नहीं। बाप कहते हैं मैं विश्व का मालिक नहीं बनता, तुमको बनाता हूँ, ____ से।
° _माखन_, _खुशी_, _कमाल_, _बादशाही_, _खण्ड_, _पढ़ाई_

5. यह बेहद का स्कूल है। एक ही एम ऑब्जेक्ट है – स्वर्ग की _____ प्राप्त करना। स्वर्ग में भी बहुत _____ हैं। कोई राजा-रानी कोई प्रजा। बाप कहते हैं – मैं आया हूँ तुमको फिर से _____ सिरताज बनाने। सब तो बन न सकें। सतयुग-त्रेता में तो ऐसी बातें होती नहीं। वहाँ है _____ । बाद में जो राजायें होते हैं, वह भी प्रजा को बहुत ____ करते हैं। यह तो मात-पिता है।
° _बादशाही_, _पद_, _डबल_, _प्रालब्ध_, _प्यार_

6. बाबा ने आज *साक्षात्कार शब्द* को किस भिन्न रीति याद किया?
° बाबा ने *आशिक-माशूक* का भी मिसाल दिया है। *बैठे-बैठे याद किया और झट सामने* आ जाते। यह भी एक साक्षात्कार है। वह उनको याद करते, वह उनको याद करते। यहाँ तो फिर एक है माशूक, तुम सब हो आशिक। (योग में ही बहुत बच्चे फेल होते हैं। एक्यूरेट याद में कोई घण्टा डेढ़ भी मुश्किल रह सकते हैं। 8 घण्टा तो पुरूषार्थ करना है। तुम बच्चों को शरीर निर्वाह भी करना है।)

7. “मीठे बच्चे – तुम इस पाठशाला में आये हो स्वर्ग के लिए ______ लेने, आत्म-अभिमानी बनो और अपना नाम _____ में नोट करा दो तो स्वर्ग में आ जायेंगे”
° _पासपोर्ट_, _रजिस्टर_

8. कौन-सी *स्मृति* न रहने कारण बच्चे *बाप का रिगार्ड* नहीं रखते हैं?
° कई बच्चों को यही स्मृति नहीं रहती कि *जिसको सारी दुनिया पुकार-याद कर रही, वही ऊंच ते ऊंच बाप हम बच्चों की सेवा में उपस्थित* हुआ है। यह निश्चय नम्बरवार है, जितना जिसको निश्चय है उतना रिगार्ड रखते हैं।

9. गीत:- *जो पिया के साथ है*…… इसका अर्थ हमारे जैसे कोई समझ न सके। क्यों?
° वह क्या जानें, पिया कौन है, किसका पिया है? *आत्मा खुद को ही नहीं जानती तो बाप को कैसे जाने* । (सब हैं देह-अभिमानी। आत्म-अभिमानी कोई है नहीं। अगर *आत्म-अभिमानी* बनें तो आत्मा को अपने बाप का भी पता हो। यहाँ तो तुम बच्चों को *बाप बैठ सम्मुख समझाते* हैं।)

10. साथ रहने वाले *जास्ती उन्नति* को पाते हैं और दूर वाले कम उन्नति को पाते हैं। _(सही / गलत)_
° *नहीं*, प्रैक्टिकल देखा जाता है जो दूर हैं वह जास्ती पढ़ते हैं और उन्नति को पाते हैं। (इतना जरूर है बेहद का बाप यहाँ हैं। ब्राह्मण बच्चों में भी नम्बरवार हैं। बच्चों को दैवीगुण भी धारण करने हैं, अवगुण-बुरे काम न हो। बांधेलियाँ कितनी मार खाती हैं, तड़फती हैं फिर भी याद में रह अच्छा उठा लेती हैं। पद भी ऊंच बन जाता है। बाबा सबके लिए नहीं कहते हैं। नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार तो हैं ही। बांधेलियाँ आदि बाहर में रहकर भी बड़ी कमाई करती हैं।)

11. कोई *विरले* हैं जो……. क्या?
° जो *सदैव प्वाइंट्स लिखते रहते* हैं। चार्ट भी लिखते-लिखते फिर थक जाते हैं। तुम बच्चों को प्वाइंट्स लिखनी चाहिए। बहुत *महीन-महीन प्वाइंट्स* हैं। (जो सब तुम कभी याद नहीं कर सकेंगे, खिसक जायेंगी। फिर पछतायेंगे कि यह प्वाइंट तो हम भूल गये। सबका यह हाल होता है। भूलते बहुत हैं फिर दूसरे दिन याद पड़ेगा। बच्चों को अपनी उन्नति के लिए ख्याल करना है। बाबा जानते हैं कोई विरले यथार्थ रीति लिखते होंगे। बाबा व्यापारी भी है ना। वह है विनाशी रत्नों के व्यापारी। यह है ज्ञान रत्नों के।)

12. यह पुरूषोत्तम संगमयुगी *पढ़ाई* कितना ऊंच बनाने वाली है, इसमें पैसे आदि की दरकार नहीं है। पढ़ाई का शौक होना चाहिए। यहां बाबा ने *किसका मिसाल* दिया?
° एक आदमी बहुत गरीब था, पढ़ने के लिए पैसे नहीं थे। फिर पढ़ते-पढ़ते मेहनत करके इतना साहूकार हो गया जो *क्वीन विक्टोरिया का मिनिस्टर* बन गया। (तुम भी अभी कितने गरीब हो। बाप कितना ऊंच पढ़ाते हैं। इसमें सिर्फ बुद्धि से बाप को याद करना है। बत्ती आदि जगाने की भी दरकार नहीं। कहाँ भी बैठे याद करो। परन्तु माया ऐसी है जो बाप की याद भुला देती है। याद में ही विघ्न पड़ते हैं। यही तो युद्ध है ना। आत्मा पवित्र बनती ही है बाप को याद करने से।)

13. योग के लिए _____ मिलता है – ऐसे-ऐसे याद करो। और फिर सृष्टि चक्र का भी _____ है। रचयिता और रचना के आदि-मध्य-अन्त को और कोई नहीं जानते। भारत का प्राचीन _____ सिखलाते हैं। प्राचीन तो कहा जाता है _____ को।
° _ज्ञान_, _ज्ञान_, _योग_, _नई दुनिया_

14. हमारे कौन-से *दो फोटो* से सेवा कर सकते?
° बाबा ने कहा था सबका फोटो होना चाहिए, बाजू में *वैकुण्ठ के ताज-तख्त वाला फोटो* हो। हम यह बन रहे हैं।
(एक तरफ तुम साधारण, एक तरफ *डबल सिरताज*। तुम्हारा एक चित्र है ना – जिसमें पूछते हो क्या बनना चाहते हो? यह बैरिस्टर आदि बनना है या राजाओं का राजा बनना है। एम ऑब्जेक्ट सामने है। हम यह बन रहे हैं। वह बैरिस्टरी पढ़ते हैं तो योग बैरिस्टर से है। इनका योग परमपिता परमात्मा से है तो डबल सिरताज बनते हैं।)

15. *चित्रों को छपाने* लिए कौन-सी बातें बाबा ने सुनाई? (3)
° बाबा कहते *कपड़े पर* छप सकते हैं।
° अगर किसके पास बड़ी स्क्रीन प्रेस न हो तो *आधा-आधा* कर दे। फिर *जॉइंट* ऐसा कर लेते हैं जो पता भी नहीं पड़ता है। (बेहद का बाप, बड़ी सरकार कहते हैं, कोई छपाकर दिखाये तो मैं उनका नाम बाला करूँगा। यह चित्र कपड़े पर छपाए कोई विलायत ले जाए तो तुमको एक-एक चित्र का कोई 5-10 हज़ार भी दे देवे। पैसे तो वहाँ ढेर हैं।)
° बन सकते हैं, इतनी *बड़ी-बड़ी प्रेस* हैं, शहरों की सीन सीनरी ऐसी-ऐसी छपती हैं – बात मत पूछो। यह भी छप सकते हैं। (यह तो ऐसी *फर्स्टक्लास चीज़* है – कहेंगे सच्चा ज्ञान तो इनमें ही है, और कोई के पास तो है ही नहीं।)

16. विलायत में *चित्रों पर समझाने* वाले कैसे चाहिए?
° समझाने वाला भी *इंगलिश में होशियार* चाहिए। (इंगलिश तो सब जानते हैं। उन्हों को भी सन्देश तो देना है ना। वही विनाश अर्थ निमित्त बने हुए हैं।)

17. *जैसा कर्म वैसा फल* कहा जाता है। सतयुग में ऐसे नहीं कहेंगे। _(सही / गलत)_
° सही, अभी तुम जन्म-जन्मान्तर की प्रालब्ध बनाते हो। गरीब साहूकार का फ़र्क तो वहाँ रहता है ना, अभी के पुरूषार्थ अनुसार। *वह प्रालब्ध है अविनाशी 21 जन्मों के लिए*। (यहाँ अच्छे कर्म करेंगे तो एक जन्म के लिए अच्छा फल मिलेगा। कोई ऐसे कर्म करते हैं जो जन्म से ही रोगी होते हैं। यह भी कर्मभोग है ना। बच्चों को कर्म, अकर्म, विकर्म का भी समझाया है। यहाँ जैसा करते हैं तो उसका अच्छा वा बुरा फल पाते हैं। कोई साहूकार बनते हैं तो जरूर अच्छे कर्म किये होंगे। यहाँ मिलता है अल्पकाल का। यह सब बातें बुद्धि में धारण करनी है।)

18. मैं ______ तो हूँ ही अशरीरी। तुम सबको शरीर है। देहधारी हो। ब्रह्मा-विष्णु-शंकर को भी _____ शरीर है। जैसे तुम आत्मा हो वैसे मैं भी परम आत्मा हूँ। मेरा जन्म दिव्य और _____ है, और कोई भी ऐसे जन्म नहीं लेते हैं। यह मुकरर है। यह सब _____ में नूध है।
° _परमात्मा_, _सूक्ष्म_, _अलौकिक_, _ड्रामा_

19. बाप कहते हैं मैं पुराने _____ देश, पतित शरीर में आता हूँ। यहाँ पावन शरीर है नहीं। बाप कहते हैं मैं इनके बहुत जन्मों के अन्त में प्रवेश कर _____ मार्ग की स्थापना करता हूँ। आगे चल तुम ________ बनते जायेंगे। _______ करेंगे फिर समझेंगे। आगे भी ऐसा पुरूषार्थ किया था, अब कर रहे हैं। पुरूषार्थ बिगर तो कुछ भी मिल न सके। तुम जानते हो हम नर से ______ बनने का पुरूषार्थ कर रहे हैं।
° _पतित_, _प्रवृत्ति_, _सर्विसएबुल_, _पुरूषार्थ_, _नारायण_