Answers from Sakar Murli 20-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 20-10-2020*

1. व्यर्थ को फुल ____ दो और शुभ भावना का _____ फुल करो।
° _स्टॉप_, _स्टॉक_

2. यहां रहते *वतन की सभी सीन-सीनरियां स्पष्ट* अनुभव करने लिए क्या करना है? (3)
° सिर्फ संकल्प शक्ति अर्थात् *मन और बुद्धि को सदा मनमत से खाली* रखो।
° कोई भी बोझ अपने ऊपर नहीं रखो, *सब बोझ बाप को देकर डबल लाइट* बनो।
° मन-बुद्धि से *सदा शुद्ध संकल्प का भोजन* 🍲 करो। (कभी भी व्यर्थ संकल्प व विकल्प का अशुद्ध भोजन न करो तो बोझ से हल्के होकर ऊंची स्थिति का अनुभव कर सकेंगे।)

3. बाबा हम आत्माओं का ____ कर रहे हैं। उनके साथ शरीरों का भी हो जायेगा। आत्मा ____ होने से फिर शरीर भी सतोप्रधान मिलेंगे। सतोप्रधान तत्वों से शरीर बनेंगे। इन्हों का सतोप्रधान शरीर है ना इसलिए नेचरल ____ रहती है। एक ही देवी-देवताओं का रिलीजन है जिससे ____ मिलती है। आत्मा में ताकत कैसे आती है, यह भी तुम अभी समझते हो। घड़ी-घड़ी अपने को ____ समझो। हम आत्मा सतोप्रधान थी तो _____ थी।
° _श्रृंगार_, _पवित्र_, _ब्युटी_,
_माइट_, _आत्मा_, _पवित्र_

4. _____ राजाओं की ड्रेस ही अलग होती है। सतयुग का तो नाम लेते ही दिल ____ हो जाती है। कहते ही हैं स्वर्ग, पैराडाइज़।
° _सतयुगी_, _खुश_

5. आज बाबा ने हमे सारी मुरली में *विशेष कौन-सा टाइटल* दिया?
° तुम हो *स्प्रीचुअल* , रूहानी इनकागनीटो *सैलवेशन आर्मी* (तुम्हें सारी दुनिया को सैलवेज करना है, डूबे हुए बेडे को पार लगाना है। विषय सागर दुःखधाम से क्षीरसागर सुखधाम!)

6. तो विकारों की दुबन में फंसी हुई आत्माओं को *पार जाने के लिए* विशेष कौन-सी युक्ति है? (2)
° यहाँ आकर जब बैठते हो तो अपने को *आत्मा समझ बाप को याद* करते हो, इससे तुम्हारा बेडा पार होगा। (तुम यह विचार करके आते हो कि हम बेहद के बाप से मिलने जाते हैं। आत्मा शरीर द्वारा बोलती। पारलौकिक बाप ने यह शरीर उधार पर लिया है, इनसे समझाते हैं। तुम्हारा है *योग बाण* 🏹। बाप कहते हैं मामेकम् याद करोगे तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। )
° *काम महाशत्रु* है, इस पर *जीत पाने से तुम जगतजीत* बनेंगे। यह है मुख्य विकार। (भक्ति-मार्ग में भी इस वाम-मार्ग के चित्र है, जिससे आइरन एजड बने।)

7. बाबा ने कहा तुम श्रीमत पर सबको रास्ता बताते हो। तो *दूसरों का बेड़ा पार* कराने के लिए हमें पहले-पहले *बाप का परिचय* देना होगा। यह कैसे देना है?
° हर एक को समझाते हो – *दो बाप हैं, एक हद का, दूसरा बेहद का* । (लौकिक बाप होते हुए भी सब पारलौकिक बाप को याद करते हैं परन्तु उनको जानते बिल्कुल नहीं हैं। मैगजीन में भी निकाला है, मनुष्य क्या कहते और भगवान क्या कहते हैं।)

8. सिर्फ ईश्वर वा भगवान कहने से इतना ____ नहीं आता है। सबसे अच्छा अक्षर है ____ । मनुष्य बेहद के ____ को नहीं जानते तो जैसे आरफन हैं।
° _लव_, _बाप_, _बाप_

9. बाप एक ही बार आकर तुमको ____ -अभिमानी बनाते हैं। वहाँ यह ज्ञान नहीं रहता कि मैं _____ परमपिता परमात्मा की सन्तान हूँ।
° _देही_, _आत्मा_

10. संगम पर बाप *कौन-सी युनिवर्सिटी* खोलते हैं जो सारे कल्प में नहीं होती?
° राजाई प्राप्त करने के लिए पढ़ने की *गॉड फादरली युनिवर्सिटी वा कॉलेज* संगम पर बाप ही खोलते हैं। (ऐसी युनिवर्सिटी सारे कल्प में नहीं होती। इस युनिवर्सिटी में पढ़ाई पढ़कर तुम *डबल सिरताज राजाओं का राजा* बनते हो।)

11. आत्मा अपने बाप को याद करती है – हे बाबा, आकर ____ दो। विश्व में ____ थी जबकि इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य था।
° _शान्ति_, _शान्ति_

12. इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य था, तो *विश्व में शान्ति* थी। विश्व में शान्ति क्यों थी?
° क्योंकि *एक राज्य एक धर्म* था। (तुम्हारी आत्मा जानती है अब हम एक राज्य स्थापन कर रहे हैं। बाप हमको सब कुछ दे देते हैं। कोई भी हमसे राजाई छीन नहीं सकते। और कोई खण्ड में ऐसे नहीं कहते कि एक धर्म एक राज्य हो।)

13. इन संन्यासियों और देवताओं की *पवित्रता में रात-दिन का फ़र्क* है। बाबा ने कौन-सा एक मुख्य अन्तर सुनाया?
° देवताओं का तो *जन्म भी योगबल से* होता है!

14. *होलिका* 🔥 का वास्तविक अर्थ क्या है?
° *सारी दुनिया इसमें स्वाहा* होनी है। यह ज्ञान यज्ञ है। (ज्ञान अक्षर निकाल बाकी रूद्र यज्ञ कह देते हैं। वास्तव में यह है रूद्र ज्ञान यज्ञ।)

Answers from Sakar Murli 17-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 17-10-2020*

1. समय की समीपता का फाउन्डेशन है – बेहद की ____ वृत्ति।
° _वैराग्य_

2. यह दिव्य जन्म _______ जन्म नहीं, यह कर्मयोगी जन्म है। इस अलौकिक दिव्य जन्म में ब्राह्मण आत्मा स्वतंत्र है न कि ______ । यह देह लोन में मिली हुई है, सारे विश्व की सेवा के लिए पुराने शरीरों में बाप शक्ति भरकर चला रहे हैं, जिम्मेवारी बाप की है, न कि _____ की। बाप ने डायरेक्शन दिया है कि कर्म करो, आप स्वतंत्र हो, _____ वाला चला रहा है। इसी विशेष _____ से कर्मबन्धनों को समाप्त कर कर्मयोगी बनो।
° _कर्मबन्धनी_, _परतंत्र_, _आप_, _चलाने_, _धारणा_

3. वहाँ सब चीजें, 5 तत्व भी ______ बन जाते हैं। हर चीज़ फल आदि दी _____ होते हैं। सतयुग को कहा ही जाता है _____। वहाँ बहुत साहूकार ____ -वान थे। इन जैसा _____ विश्व का मालिक कोई हो न सके। अभी तुम जानते हो हम ही यह थे, तो कितनी ____ होनी चाहिए।
° _सतोप्रधान_, _बेस्ट_, _स्वर्ग_, _धन_, _सुखी_, _खुशी_

4. सुखधाम में कभी काल आता नहीं है, अमरपुरी बन जाती है। तुम मृत्यु पर जीत पाते हो।(सर्वशक्तिमान, सर्प 🐍का मिसाल, एक चोला बदलकर दूसरा)। *इससे सम्बंधित कौन-सी कहानी* बाबा ने याद की?
° कोई ने पूछा *पहले तुमको सुख चाहिए या दु:ख?* तो बोला सुख चाहिए। सुख में जायेंगे फिर तो वहाँ कोई जमदूत 😈(दुःख) आदि आ नहीं सकेंगे। यह भी एक कहानी है।

5. बाबा कहते हैं तुम समझो हमको _____ पढ़ाते हैं। हम पतित-पावन गॉड फादरली _____ हैं, इसमें सब आ गया। पतित-पावन भी हो गया, गुरू टीचर भी हो गया। _____ भी हो गया। सो भी निराकार है। यह है _____ गॉड फादरली वर्ल्ड युनिवर्सिटी। कितना अच्छा नाम है। ईश्वर की कितनी महिमा करते हैं, और चीज़ क्या है! ____ । उनमें पार्ट कितना भरा हुआ है।
° _भगवान_, _स्टूडेन्ट_, _फादर_, _इनकारपोरियल_, _बिन्दी_

6. बाप कहते हैं पुरूषार्थ ऐसा करो जो नम्बर- ____ में जाओ। टीचर का काम है सावधान करना। पास विद् _____ होना है। यह बेहद की पाठशाला है। यह है ही _____ स्थापन करने के लिए राजयोग। अब बाप कहते हैं देह होते हुए, गृहस्थ व्यवहार में रहते हुए ______ याद करो। अब फिर तेज रफ्तार चाहिए – ______ की। तेज याद करने वाले का ही ऊंच नाम होगा। _____ माला का दाना बनेंगे।
° _वन_, _ऑनर_, _राजाई_, _मामेकम्_, _याद_, _विजय_

7. _____ होता ही है सत द्वारा, सत बनने के लिए। सत्य एक ही बाप है। बाप बैठ नर से नारायण बनने की _____ सुनाते हैं, जिससे तुम नारायण बन जाते हो। फिर ____ मार्ग में (यादगार) सत्य नारायण की कथा बड़े प्यार से सुनते हैं।
° _सतसंग_, _कथा_, _भक्ति_

8. आत्मा भी है, देह भी है। ऐसे नहीं कि बिगर देह बैठे हो। परन्तु बाप कहते हैं देह-अभिमान छोड़ *देही-अभिमानी बनकर बैठो*। अपने को आत्मा समझो। क्यों?
° देही-अभिमान है *शुद्ध* , देह-अभिमान है अशुद्ध। तुम जानते हो *देही-अभिमानी बनने से हम शुद्ध पवित्र बन रहे* हैं। (देह-अभिमानी बनने से अशुद्ध, अपवित्र बन गये थे। पुकारते भी हैं हे पतित-पावन आओ। पावन दुनिया थी। अभी पतित है फिर से पावन दुनिया जरूर होगी। सृष्टि का चक्र फिरेगा। सुप्रीम रूह ने हमे आप समान स्वदर्शन चक्रधारी बनाया है। सतयुग में यह ज्ञान देने की दरकार नहीं रहेगी। ज्ञान से वर्सा मिल गया। बाप श्रीमत देते हैं ऐसे तुम श्रेष्ठ परिस्तानी बनेंगे।)

9. *धारणा* की कौन-सी पॉइंट्स आज बाबा ने सुनाई? _(डबल अहिंसक, दुःख ने देना)_ (2)
° तुम अभी डबल अहिंसक बनते हो। *अहिंसा परमो देवी-देवता धर्म* डबल अहिंसक गाया हुआ है।
° किसको हाथ लगाना, दु:ख देना वह भी हिंसा हो गई। बाप रोज़-रोज़ समझाते हैं – *मन्सा-वाचा-कर्मणा किसको दु:ख नहीं देना* है। मन्सा में आयेगा जरूर। (सतयुग में मन्सा में भी नहीं आता। यहाँ तो मन्सा-वाचा-कर्मणा आता है। यह अक्षर तुम वहाँ सुनेंगे भी नहीं।)

10. बाप का कौन-सा *नाम भल साधारण* है लेकिन कर्तव्य बहुत महान है? (2)
° बाबा को कहते हैं *बागवान-खिवैया*। यह नाम कितना साधारण है लेकिन डूबने वाले को पार ले जाना, यह कितना *महान कर्तव्य* है। (जैसे तैरने वाले *तैराक* 🏊‍♂️ एक-दो को हाथ में हाथ दे पार ले जाते हैं, ऐसे बाप का हाथ मिलने से तुम स्वर्गवासी बन जाते हो। अभी तुम भी मास्टर खिवैया हो। तुम हरेक की नईया को पार लगाने का रास्ता बताते हो।)

11. माला के दाने तो बहुत हैं। ऊपर में बाबा है फूल, फिर है युगल मेरू। फूल को सब नमस्ते करते हैं। एक-एक दाने को नमस्ते करते। परन्तु *रूद्र यज्ञ रचते हैं तो उनमें भी जास्ती पूजा शिव की करते* हैं। सालिग्रामों की इतनी नहीं करते। क्यों?
° *शिवबाबा द्वारा ही सालिग्राम ऐसे तीखे* बने हैं, जैसे अब तुम पावन बन रहे हो।

12. कोई भी बुजुर्ग को बापू जी कह देते हैं। यह (शिवबाबा) तो सबका _____ है। सबका फादर वह एक है। ______ को फादर थोड़ेही कह सकते। गाते भी हैं _____ -हुड। ईश्वर को सर्वव्यापी कहने से ______ -हुड हो जाता है।
° _बाप_, _बच्चे (कृष्ण)_, _ब्रदर_, _फादर_

13. उन्हों (लक्ष्मी-नारायण) को *भगवान-भगवती* भी कहते हैं, यह ठीक है। _(सही / गलत)_
° नहीं, बाप कहते भगवान-भगवती नहीं कह सकते। *भगवान तो एक ही मैं हूँ!*

14. वह भी परम आत्मा है। उस आत्मा का नाम शिव है, वह है निराकार। न सूक्ष्म, न स्थूल शरीर है। *उनका कोई भी आकार वा रूप नहीं* है। _(सही / गलत)_
° गलत (जिसका नाम है, आकार भी जरूर है। नाम-रूप बिगर कोई चीज़ है नहीं। परमात्मा बाप को नाम-रूप से न्यारा कहना कितना बड़ा अज्ञान है। बाप भी नाम-रूप से न्यारा, बच्चे भी नाम-रूप से न्यारे फिर तो कोई सृष्टि ही न हो।)

15. मीठे बच्चे – तुम्हें एक-एक को ____ -स्तानी बनाना है, तुम हो सबका _____ करने वाले, तुम्हारा कर्तव्य है गरीबों को _____ बनाना। जब तक तुम्हारे हाथ में _____ न मिले तब तक स्वर्गवासी बन न सकें।
° _परि_, _कल्याण_, _साहूकार_, _हाथ_

16. तुम बच्चों को बड़ी-बड़ी सभाओं में समझाना पड़ेगा। हमेशा *कहाँ भी भाषण पर जाओ तो* जिस टॉपिक पर भाषण करना है, उस पर क्या पूर्व तैयारी करनी है? (2)
° *विचार सागर मंथन कर लिखना* चाहिए। तुमको तो टॉपिक पर समझाना है। पहले लिखकर *फिर पढ़ना* चाहिए। (नहीं तो भाषण करने के बाद फिर स्मृति में आता है – यह-यह प्वाइंट्स नहीं बताई। यह समझाते थे तो अच्छा था।)

17. भाषण में *पहले-पहले* क्या बोलना चाहिए? (2)
° *भाई-बहनों आत्म-अभिमानी होकर बैठो*। (तुम आत्मा अविनाशी हो। अभी बाप आकर ज्ञान दे रहे। बाप कहते हैं मुझे याद करने से विकर्म विनाश होंगे। कोई भी देहधारी को मत याद करो। अपने को आत्मा समझो, हम वहाँ के रहने वाले हैं। हमारा बाबा कल्याणकारी शिव है, हम आत्मायें उनके बच्चे हैं। बाप कहते हैं आत्म-अभिमानी बनो। मैं आत्मा हूँ।)
° *शिवबाबा कहते हैं* अपने को आत्मा समझ शिवबाबा को याद करो। जितना मुझे याद करेंगे उतना सतोप्रधान बन ऊंच पद पायेंगे। एम ऑब्जेक्ट भी सामने है। पुरूषार्थ से ऊंच पद पाना है। (वह भी जानते हैं हमसे पहले पैराडाइज था। भारत सबसे प्राचीन है। परन्तु कब था, वह कोई नहीं जानते।)

18. तुम्हारे यादगार सामने खड़े हैं। नीचे राजयोग की तपस्या, ऊपर में राजाई खड़ी है। *नाम भी देलवाड़ा बहुत अच्छा* है। क्यों?
° *बाप सबकी दिल लेते हैं*। सबकी सद्गति करते हैं। (दिल लेने वाला कौन है। यह थोड़ेही किसको पता है। ब्रह्मा का भी बाप शिवबाबा। सबकी दिल लेने वाला बेहद का बाप ही होगा। तत्वों आदि सबका कल्याण करते हैं।)
° तुम्हारा यादगार देलवाड़ा मन्दिर देखो कैसा अच्छा है। जरूर *संगमयुग पर दिल ली होगी*। (आदि देव और देवी, बच्चे बैठे हैं। यह है रीयल यादगार। उनकी हिस्ट्री-जॉग्राफी कोई नहीं जानते सिवाए तुम्हारे। लक्ष्मी-नारायण के मन्दिर में जायेंगे तो भी तुम कहेंगे यह हम बन रहे हैं।)

19. बाबा ने समझाया है – सारी सृष्टि पर इस समय _____ का राज्य है। ____ भी मनाते हैं, कितना खुश होते हैं। बाप कहते हैं सब बच्चों को दु:ख से छुड़ाने मुझे भी पुरानी _____ की दुनिया में आना पड़ता है।
° _रावण_, _दशहरा_, _रावण_

20. और धर्म वालों के शास्त्र आदि कायम हैं। तुम्हारे ज्ञान का कुछ नहीं रहता। क्यों?
° *तुमको ज्ञान मिलता ही है संगम पर, फिर विनाश हो जाता* है तो कोई शास्त्र नहीं रहता। (शास्त्र हैं भक्ति मार्ग की निशानी। यह है ज्ञान।)

21. गंगा *पतित-पावनी* है। _(सही / गलत)_
° नहीं, बाप कहते हैं *इस समय 5 तत्व सब तमोप्रधान* पतित हैं। (सारा किचड़ा आदि वहाँ जाए पड़ता है। मछलियां आदि भी उसमें रहती हैं। पानी की भी एक जैसे दुनिया है। पानी में जीव कितने रहते हैं। तो गांव हो गया ना। गांव को फिर पतित-पावन कैसे कहेंगे। बाप समझाते हैं – मीठे-मीठे बच्चे, पतित-पावन एक बाप है। तुम्हारी आत्मा और शरीर पतित हो गया है, अब मुझे याद करो तो पावन बन जायेंगे। तुम विश्व के मालिक, खूबसूरत बन जाते हो।)

22. भक्ति अथाह है, देवियों आदि की पूजा में कितना खर्चा करते हैं। बाप कहते हैं इनसे *सिर्फ अल्पकाल का सुख* है। क्यों?
° जैसी-जैसी भावना रखते हैं वह पूरी होती है। देवियों को सजाते-सजाते कोई को साक्षात्कार हुआ बस बहुत खुश हो जाते। फायदा कुछ भी नही, *मुक्त-जीवनमुक्ति वा श्रेष्ठ जीवन बनाने की बात नहीं*।)

Answers from Sakar Murli 16-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 16-10-2020*

1. यथार्थ _____ वृत्ति का सहज अर्थ है – जितना न्यारा उतना प्यारा।
° _वैराग्य_

2. *रहमदिल बाप के रहमदिल बच्चो* की क्या निशानियाँ है? (2)
° किसी को भी भिखारी के रूप में देखेंगे तो उन्हें रहम आयेगा कि *इस आत्मा को भी ठिकाना मिल जाए, इसका भी कल्याण हो जाए*।
° उनके *सम्पर्क में जो भी आयेगा उसे बाप का परिचय* जरूर देंगे। (जैसे कोई घर 🏡 में आता है तो पहले उसे पानी 💧पूछा जाता है, ऐसे ही चला जाए तो बुरा समझते हैं, ऐसे जो भी सम्पर्क में आता है उसे बाप के परिचय का पानी जरूर पूछो अर्थात् *दाता के बच्चे दाता बनकर कुछ न कुछ दो* ताकि उसे भी ठिकाना मिल जाए।)

3. “मीठे बच्चे – तुम्हें संगम पर सेवा करके _____ लायक बनना है फिर भविष्य में पुरूषोत्तम बनने से तुम ____ लायक बन जायेंगे”
° _गायन_, _पूजा_

4. *बाप की दिल* ♥️ पर कब चढ़ेंगे? (2)
° जब यह *देह-अभिमान की बीमारी समाप्त* हो जाए। (जिस कारण ही सभी विकारों ने महारोगी बनाया)
° दिल पर चढ़ना है तो *विशाल बुद्धि* बनो, *ज्ञान चिता* पर बैठो। *रूहानी सेवा* में लग जाओ और वाणी चलाने के साथ-साथ *बाप को अच्छी रीति याद* करो।

5. *अपनी दिल ❤️ से* क्या पूछ सकते? (2)
° हम कितनों को *आपसमान* बनाते हैं? मास्टर पतित-पावनी बन सबको पावन (राज़-राज़ेश्वर) बनाने की सेवा कर रहे हैं?
° हमारे में कोई अवगुण तो नहीं है? *दैवीगुण* कहाँ तक धारण किये हैं?

6. छोटे बच्चे अल्फ बे पढ़ते हैं ना। तुम बैठे हो तुमको भी *अल्फ बे* पढ़ा रहे हैं। कैसे?
° अल्फ (शिवबाबा) और बे (बादशाही का वर्सा)। बाप कहते हैं मुझे *याद करो तो तुम विश्व के मालिक* बनेंगे। (कोई भी आसुरी काम नहीं करना है। दैवीगुण धारण करने हैं।)

7. बाप तुम्हें विश्व का मालिक बनाते हैं, मंजिल बहुत बड़ी है। तो इस अन्तिम समय में बाप कौन-सा *फरमान* करते?
° *मामेकम् याद करो*। देहधारियों को याद नहीं करना है। (मैं तो विदेही हूँ, इसमें बैठ तुमको ज्ञान देता हूँ।)

8. बाप कहते हैं मुझे *पुराने तन में पुरानी राजधानी में* आना पड़ता। _(सही / गलत)_
° *सही* (अभी यह रावण की राजधानी है। तन भी पराया है क्योंकि इस शरीर में तो पहले से ही आत्मा है। मैं पराये तन में प्रवेश करता हूँ। नहीं तो नाम पड़ता, बदलता। मुझे तो कहते ही हैं शिवबाबा।)

9. गीत 🎼:-जाग सजनियां जाग…….. नवयुग अर्थात् नई दुनिया सतयुग आया। अब *किसको कहते हैं जागो?*
° *आत्माओं को।* (क्योंकि आत्मायें घोर अन्धियारे में सोई पड़ी हैं। कुछ भी समझ नहीं। बाप को ही नहीं जानते। अब बाप जगाने आये हैं। अभी तुम बेहद के बाप को जानते हो। उनसे बेहद का सुख मिलना है नये युग में। सतयुग-स्वर्ग को नया, कलियुग नर्क को पुराना युग कहेंगे। नया युग फिर पुराना होता, रावण आता, 5000 वर्ष का चक्र आदि)

10.बाबा ने कहा जगत अम्बा वा लक्ष्मी की बायोग्राफी के *कान्ट्रास्ट* पर समझा सकते। तो क्या है कान्ट्रास्ट? (5)
° लक्ष्मी को *सतयुगी* देवी और जगत अम्बा को *संगमयुगी* ब्राह्मणी कहेंगे। (ब्राह्मण संगम पर ही होते हैं। इस संगमयुग को कोई नहीं जानते। प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा नयी पुरूषोत्तम सृष्टि रची जाती है।)
° वही *जगत अम्बा* फिर लक्ष्मी बनती है। फिर *लक्ष्मी* सो 84 जन्मों के बाद जगत अम्बा होगी।
° जैसे ब्रह्मा को इतनी भुजायें देते हैं (बच्चों का प्रतीक), *अम्बा के तो सब बच्चे हैं*। माँ-बाप ही प्रजापिता बनते हैं। (लक्ष्मी-नारायण को कभी सतयुग में जगतपिता जगत माता नहीं कहेंगे।)
° *जगत अम्बा* सरस्वती है एक। *नाम कितने रख दिये* हैं – दुर्गा, काली आदि।
° *प्रजापिता ब्रह्मा की बेटी* है सरस्वती, उनको अम्बा कहते हैं। (बाकी हैं बच्चे और बच्चियां। हैं सब एडाप्टेड, मुख वंशावली, मेरे है कहकर एडाप्टेड)

11. शिवबाबा बेहद का बाप है, *आत्माओं को एडाप्ट* करते हैं। _(सही / गलत)_
° गलत ( *आत्मायें तो हैं ही* । उनको एडाप्ट नहीं किया जाता है। बाप कहते हैं तुम आत्मायें सदैव मेरे बच्चे हो। फिर अभी मैं आकर *प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा बच्चों को एडाप्ट* करता हूँ। आत्माओं को नहीं एडाप्ट करते, बच्चे और बच्चियों को करते हैं। यह भी बड़ी सूक्ष्म समझने की बातें हैं।)

12. इन (ब्रह्मा-सरस्वती की) बातों को समझने से *क्या प्राप्ति* है?
° तुम यह लक्ष्मी-नारायण बनते हो। कैसे बनें, यह हम समझा सकते हैं। *क्या ऐसे कर्म किये जो यह विश्व के मालिक बनें।* तुम प्रदर्शनी आदि में भी पूछ सकते हो। तुमको मालूम है इन्हों ने यह *स्वर्ग की राजधानी कैसे ली* ।

13. *भारत और बाप* की इतनी अपरमअपार महिमा क्यों हैं?
° बेहद का बाप कहते हैं मैं यहाँ भारत में आता हूँ। यहाँ *आकर नर्क को स्वर्ग बनाते हैं, सबको शान्ति देते* हैं।

14. यह है भी गीता का युग। _______ लड़ाई भी बरोबर हुई थी। _____ एक को सिखाया होगा क्या, यहाँ तो ढेर पढ़ते हैं। तुम कहते हो ज्ञान सागर बाप द्वारा हम ज्ञान सीख रहे हैं, राज-राजेश्वरी बनने के लिए। ज्ञान सागर _____ भी सिखलाते हैं, राज- _____ भी सिखलाते हैं।
° _महाभारत_, _राजयोग_, _ज्ञान_, _योग_

15. सतयुग में इतने *थोड़े मनुष्य*, कलियुग में इतने *बहुत मनुष्य* हैं। यह कैसे समझाएं? _(कौन-सा चित्र)_
° इसके लिए फिर *गोला* भी जरूर चाहिए।

16. प्रदर्शनी में इतने सबको बुलाते हैं। ______ को तो कभी कोई ने निमंत्रण नहीं दिया है। तो ऐसे-ऐसे विचार चलाने पड़ें, इसमें बड़ी _____ -बुद्धि चाहिए।
° _कस्टम कलेक्टर_, _विशाल_

17. ब्रह्मा बाप का *रिगार्ड बढ़ाने* लिए बाबा ने कौन-सी बातें सुनाई? (2)
° *हुसेन के घोड़े को कितना सजाते* हैं। (पटका कितना छोटा होता, घोड़ा कितना बड़ा होता है। आत्मा भी कितनी छोटी बिन्दी है, उनका श्रृंगार कितना बड़ा है।)
° यह *अकालमूर्त का तख्त* है ना।

18. *सर्वव्यापी* की टॉपिक पर बावा ने कौन-सी पॉइंट सुनाई?
° बाप कहते हैं मैं आत्माओं को राजयोग *सिखलाता हूँ फिर सर्वव्यापी कैसे* होंगे। ( *बाप-टीचर-गुरू सर्वव्यापी कैसे* होंगे। बाप कहते हैं मैं तो तुम्हारा बाप हूँ फिर ज्ञान सागर हूँ। तुमको बेहद की हिस्ट्री-जॉग्राफी समझने से बेहद का राज्य मिल जायेगा।)

19. माया एकदम ____ से पकड़ लेती है। काला _____ कर लिया। तुम औरों को शिक्षा देकर खुद गिरते हो तो हज़ार गुणा _____ चढ़ जाता है। कहते हैं माया ने ____ मार दिया। माया ऐसा ____ मारती है जो एकदम अक्ल ही गुम कर देती है।
° _नाक_, _मुँह_, _पाप_, _थप्पड़_, _घूँसा_

20. समझदार बन _____ के तूफानों से कभी हार नहीं खाना है। ____ धोखा देती हैं इसलिए अपनी सम्भाल करनी है। कोई भी विकारी बातें इन _____ से नहीं सुननी हैं। हम आत्मा हैं। बाप हम _____ को पढ़ाते हैं।
° _माया_, _आंखें_, _कानों_, _आत्माओं_

21. पुरानी दुनिया में इतने अनेक प्रकार के *बॉम्ब्स* 💣 क्यों बनाये हैं?
° पुरानी दुनिया के *विनाश* लिए यह बॉम्ब्स काम आयेंगे।(रखने के लिए थोड़ेही बनाये हैं। यह पुरानी दुनिया गई कि गई।)

Answers from Sakar Murli 15-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 15-10-2020*

1. *लवलीन स्थिति* 💛 का अनुभव करने के लिए _____ की युद्ध समाप्त करो।
° _स्मृति-विस्मृति_

2. आप बच्चे *जग की ज्योति* हो, आपके सेकण्ड के *स्व-परिवर्तन से विश्व-परिवर्तन* होता, इतना महत्व है। तो अब क्या करना है? (2)
° इसलिए अपने महत्व वा कर्तव्य को जानकर *बीती सो बीती* कर सदा जागती-ज्योत बनो।
° सिर्फ प्रैक्टिस करो *अभी-अभी कर्मयोगी, अभी-अभी कर्मातीत स्टेज*। (जैसे आपकी रचना कछुआ 🐢 सेकण्ड में सब अंग समेट लेता है। ऐसे आप मास्टर रचता समेटने की शक्ति के आधार से *सेकण्ड में सर्व संकल्पों को समाकर एक संकल्प में स्थित* हो जाओ।)

3. सर्व का सद्गति दाता निराकार रूहानी बाप बैठ रूहानी बच्चों को पहले समझाते अपने को आत्मा निश्चय कर *देही-अभिमानी बनो, तब बाप को याद कर सकेंगे*। इसका वापिस घर जाने से क्या सम्बंध है?
° बाप कहते हैं तुमको वापिस जाना है। अपने को आत्मा समझो, आत्मा समझ बाप को याद करो *तब जन्म-जन्मान्तर के पाप भस्म हों, और कोई उपाय नहीं।* आत्मा ही पतित, आत्मा ही पावन बनती है। (शान्तिधाम ओर सतयुग में आत्मा पावन थी, कलियुग में पतित बन चिल्लाते – हे पतित-पावन आओ।)

4. दैवीगुण भी धारण करने हैं। बहुत मीठे, शान्त, अति ____ स्वभाव का बनना है। कभी भी क्रोध नहीं करना। मुख से सदैव ____ ही निकलें, कांटा नहीं। _____ -पना भी देह-अभिमान है, रूसना, रोना यह सब _____ संस्कार तुम बच्चों में नहीं होने चाहिए। दु:ख-सुख, मान-अपमान सब ____ करना है। अपनी आंखों 👀 को बहुत-बहुत _____ बनाना है।
° _मीठे_, _फूल_, _नाज़ुक_, _आसुरी_, _सहन_, _सिविल_

5. देह-अभिमान होने कारण एक दो की खामियां देखते खुद में अनेक प्रकार की ______ रह जाती हैं।
° _खामियां_

6 *सर्विस में ढीलापन* आने का मुख्य कारण क्या है? (2)
° जब देह-अभिमान के कारण एक दो की *खामियां देखने* लगते हैं। *आपस में अनबनी* होना भी देह-अभिमान है। मैं फलाने के साथ नहीं चल सकता, मैं यहाँ नहीं रह सकता…… यह सब *नाज़ुकपना* है। यह बोल मुख से निकालना माना कांटे बनना, *नाफरमानबरदार* बनना। (बाबा कहते बच्चे, तुम रूहानी मिलेट्री हो इसलिए ऑर्डर हुआ तो फौरन हाज़िर होना चाहिए। कोई भी बात में आनाकानी मत करो।)

7. बाबा का *हुक्म-आज्ञा-श्रीमत* क्यों माननी है?
° श्रीमत मिलती है ऐसा-ऐसा करना है तो समझना चाहिए कि *शिवबाबा की श्रेष्ठ मत* है। (वह है ही सद्गति दाता। दाता कभी उल्टी मत नहीं देंगे।)
° बड़े से बड़ी गवर्मेन्ट बेहद के बाप का ऑर्डर मिलता है, जिसका *राइट हैण्ड फिर धर्मराज* है। उनकी श्रीमत पर न चलने से फिर गिर पड़ते हैं।
° बाबा का हुक्म है, अगर हम नहीं मानेंगे तो *एकदम चकनाचूर* हो जायेंगे। 21 जन्मों की *राजाई में रोला* पड़ जायेगा।

8. मुझे ____ के बिगर तो कभी कोई जान न सके। कल्प पहले वाले ही _____ – ____ निकलते रहेंगे। यह हैं बिल्कुल ____ – ____ बातें। _____ भी जरूर रोज़ पढ़नी है अथवा सुननी है। मुरली नहीं पढ़ी गोया _____ पड़ गई।
° _बच्चों_, _आहिस्ते_, _आहिस्ते_, _नई_, _नई_, _मुरली_, _अबसेन्ट_

9. यह है गीता का युग। परन्तु शास्त्रों में इस *संगमयुग का वर्णन नहीं* है। _(सही / गलत)_
° *सही* , क्योंकि गीता को ही द्वापर में ले गये हैं। (जब राजयोग सिखाया तो जरूर संगम होगा ना। परन्तु किसकी भी बुद्धि में यह बातें नहीं हैं। अभी तुम्हें ज्ञान का नशा चढ़ा हुआ है।)

10. बाप कहते हैं मैं इनके बहुत जन्मों के अन्त में प्रवेश करता हूँ। इनसे भी देखो _____ ऊंच चली जाती है। गायन भी है – ____ को आगे रखा जाता है। पहले ____ फिर नारायण, यथा राजा रानी तथा प्रजा हो जाती है। तुमको भी ऐसा ____ बनना है।
° _लक्ष्मी_, _फीमेल_, _लक्ष्मी_, _श्रेष्ठ_

11. यह रूहानी नॉलेज, रूहानी बाप ही रूहों को देते हैं, राजयोग सिखाते। यह भी लिखते – रूहानी बाप स्प्रीचुअल नॉलेज रूहानी बच्चों को देते हैं। और दुनिया में सभी *कौन-से घोर अन्धियारे* में हैं?
° समझते हैं – *कलियुग* तो अभी *छोटा बच्चा*, रेगड़ी पहन रहा है। तो मनुष्य और ही नींद में सोये हुए हैं। (इस समय तो सारी दुनिया में रावण राज्य है। सभी कहते हैं रामराज्य चाहिए। अब है संगम। जब इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य था तो रावण राज्य नहीं था, फिर चेन्ज कैसे होती है, यह कोई नहीं जानते।)

12. अभी तुम पारसबुद्धि बनते हो तो पत्थर की _____ नहीं कर सकते हो। चित्रों के आगे जाकर ____ टेकते हैं। कुछ भी समझते नहीं। अब तुमको ज्ञान मिलता है तो _____ से वैराग्य आ जाता है। यह दुनिया ही बदलती है। वहाँ है ही ____। मनुष्य बन्दरबुद्धि 🐒 बन गये हैं, उनको मैं आकर _____ लायक बनाता हूँ।
° _पूजा_, _माथा_, _भक्ति_, _पूज्य_, _मन्दिर_

13. बाबा से कोई *माथा टेकते* 🛐, तो बाबा को बड़ा अच्छा लगता। _(सही / गलत)_
° गलत (बाप कहते हैं – *बच्चे, तुम माथा क्यों टेकते हो*। आधाकल्प तुमने माथा भी घिसाया, पैसे भी गँवाये, मिला कुछ नहीं। माया ने एकदम माथा मूड लिया है। कंगाल बना दिया है। फिर बाप आकर सबका माथा ठीक कर देते हैं।)

14. जो पीछे आते हैं तो सुख भी थोड़ा, दु:ख भी थोड़ा मिलता है। ____ -वासियों को सुख बहुत तो दु:ख भी बहुत है। शुरू में ही कितने धनवान एकदम विश्व के _____ होते हैं। और धर्म वाले कोई पहले थोड़ेही ____ -वान होते हैं। _____ -श्रद्वालू भी भारत है। यह भी ड्रामा बना हुआ है। बाप कहते हैं मैंने जिसको हेविन बनाया, वह ____ बन गया है।
° _भारत_, _मालिक_, _धन_, _अन्ध_, _हेल_

15. बाप कहते हैं मैं आया हूँ तुमको नर से नारायण बनाने। परन्तु *कोटो में कोई* ही निकलते – राजाई पद पाने वाले। उसमें भी 8 रत्न मुख्य गाये जाते हैं। *8 हैं पास विद् ऑनर्स*, सो भी नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार। ऐसा क्यों?
° क्योंकि *देह-अभिमान को तोड़ने में बड़ी मेहनत लगती* है। देह का भान बिल्कुल निकल जाए। (कोई-कोई पक्को का भी ऐसे होता। बैठे-बैठे देह का त्याग कर देते हैं। बैठे-बैठे ऐसे शरीर छोड़ते हैं, वायुमण्डल एकदम शान्त हो जाता है।)

16. प्रदर्शनी 🎪 आदि में भी *पहले-पहले क्या समझाना* है?
° तुम *अल्फ (बाप) का परिचय दो*। (पहले अल्फ और बे। बाप तो एक ही निराकार है। बाप रचयिता ही बैठ रचना के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान समझाते हैं। वही बाप कहते हैं मामेकम् याद करो। देह के सम्बन्ध छोड़ *अपने को आत्मा समझ मामेकम् याद करो*। बाप का परिचय तुम देंगे फिर किसको हिम्मत नहीं रहेगी प्रश्न-उत्तर करने की।)
° *पहले बाप का निश्चय पक्का* हो जाए तब बोलो 84 जन्म ऐसे लिये जाते हैं। चक्र को समझ लिया, बाप को समझ लिया फिर कोई प्रश्न उठेगा नहीं। (बाप का परिचय देने बिगर बाकी तुम तिक-तिक करते हो तो उसमें तुम्हारा टाइम ⌚बहुत वेस्ट हो जाता है। गले ही घुट जाते हैं। सिम्पुल रीति और धीरे से समझाओ।)

17. जो ____ -अभिमानी होंगे वही अच्छा समझा सकेंगे। बड़े-बड़े म्युज़ियम में अच्छे-अच्छे समझाने वालों को _____ देनी पड़े। थोड़े रोज़ अपना _____ छोड़ मदद देने आ जाना है।
° _देही_, _मदद_, _सेन्टर_

18. पिछाड़ी में सेन्टर सम्भालने कोई को बिठा दो। अगर गद्दी सम्भालने लायक *कोई को आपसमान नहीं बनाया है* , तो बाबा क्या समझेंगे? (4)
° बाप समझेंगे कोई काम के नहीं, *सर्विस नहीं की*। (बाबा को लिखते हैं सर्विस छोड़ कैसे जायें! अरे बाबा हुक्म करते हैं फलानी जगह प्रदर्शनी है सर्विस पर जाओ।)
° अगर गद्दी लायक किसको नहीं बनाया है तो *किस काम के*। (बाबा ने हुक्म किया – झट भागना चाहिए।)
° महारथी ब्राह्मणी उनको कहा जाता है। बाकी तो सब हैं *घोड़ेसवार, प्यादे* ।
° सबको सर्विस में मदद देनी है। इतने वर्ष में तुमने किसको आपसमान नहीं बनाया है तो *क्या करते थे* । (इतने समय में मैसेन्जर नहीं बनाया है, जो सेन्टर सम्भालें।)

19. तुम सारे विश्व की सेवा करते हो ना। तुम बच्चों को सारे विश्व पर *घेराव* डालना है। किस बात का?
° *पतित दुनिया को पावन* बनाना यह घेराव डालना है ना। *सभी को मुक्ति-जीवनमुक्ति* धाम का रास्ता बताना है, *दु:ख से छुड़ाना* है। अच्छा!

Answers from Sakar Murli 14-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 14-10-2020*

1. निर्मल स्वभाव _____ की निशानी है। निर्मल बनो तो _____ मिलेगी।
° _निर्मानता_, _सफलता_

2. *सम्पूर्णता की आंख* खोलना अर्थात् क्या?
° *सम्पूर्ण स्टेज तक पहुंचना* अर्थात् सम्पूर्णता की आंख खोलना!

3. जब आप जहान के ___ अपनी सम्पूर्णता की आंख खोलेंगे तब सेकण्ड में विश्व परिवर्तन होगा। फिर आप _____ मूर्त आत्मायें अपनी नज़र से भक्त आत्माओं को निहाल कर सकेंगी, जिनकी लम्बी क्यू है। इसलिए सम्पूर्णता की आंख खुली रहे। आंखों का मलना और संकल्पों का _____ व ______ खाना बन्द करो तब दर्शनीय _____ बन सकेंगे।
° _नूर_, _दर्शनीय_, _घुटका_, _झुटका_, _मूर्त_

4. बुद्धि को पवित्र बनाने के लिए याद की यात्रा में ____ रहना है। कर्म करते भी एक _____ याद रहे – तब विकर्माजीत बनेंगे। बाबा _____ पर जाते तो भी ख्याल रहता, हम याद में नहीं रहेंगे तो बाबा क्या कहेंगे। याद से आत्मा पवित्र होगी, अविनाशी ज्ञान _____ भी जमा होगा। फिर अगर अपवित्र बन जाते तो सारा ज्ञान बह जाता। ______ ही मुख्य है। बाप तो अच्छी-अच्छी बात ही समझाते हैं।
° _मस्त_, _माशूक_, _पिकनिक_, _धन_, _पवित्रता_

5. बाप तो है ही टीचरों का ______ , बापों का _____ । यह तो तुम बच्चे जानते हो हमारा बाबा बहुत _____ है। ऐसे बाप को तो बहुत _____ करना है। पढ़ना भी पूरा है। बाप को याद नहीं करेंगे तो ____ नष्ट नहीं होंगे। बाप सभी आत्माओं को साथ ले जायेंगे।
° _टीचर_, _बाप_, _प्यारा_, _याद_, _पाप_

6. 5 हज़ार वर्ष बाद एक ही बार संगम पर बाप आकर बच्चों को पढ़ाकर पावन बनाकर नई पावन खूबसूरत दुनिया बनाते (लक्ष्मी-नारायण का राज्य)। तो आत्म-अभिमानी जरूर बनना है। अपने को आत्मा समझो, *आत्मा सो परमात्मा*। _(सही / गलत)_
° नहीं, अपने को आत्मा समझ परमपिता *परमात्मा शिव को याद* करना है। (याद की यात्रा मुख्य है, जिससे ही तुम पतित से पावन बनते हो। पहले अपने को आत्मा समझेंगे तब पारलौकिक बाप को याद कर सकेंगे।)

7. सतयुग में *एक ही* लौकिक दैवी *बाप* कहेंगे। ऐसे क्यों? _(परलौकिक बाप?)_
° वहाँ पारलौकिक बाप को याद नहीं करते हैं क्योंकि *सुख* है। (भक्ति मार्ग में फिर दो बाप बन जाते हैं। लौकिक और पारलौकिक। दु:ख में सब पारलौकिक बाप को याद करते हैं। सतयुग में भक्ति होती नहीं। वहाँ तो है ही ज्ञान की प्रालब्ध, आधाकल्प सुख का वर्सा!)

8. ज्ञान मार्ग है ____ का मार्ग, जिससे तुम 21 जन्म समझदार बन जाते हो। तुम संगमयुगी हो शुद्ध ____ भोजन खाने वाले। देवतायें कभी _____ आदि थोड़ेही खाते हैं। इन देवताओं को कहा ही जाता है निर्विकारी। इस संगम पर ही तुम _____ देवी-देवता बनने की मेहनत करते हो। यह राजाई स्थापन हो रही है। बाप कहते हैं – मैं तुमको राजाओं का राजा बनाता हूँ तो ____ जरूर बनानी पड़े। अभी भी तुम गुल-गुल (फूल) बन अच्छे घर में ____ लेते रहेंगे।
° _समझ_, _पवित्र_, _प्याज़_, _पुरूषोत्तम_, _प्रजा_, _जन्म_

9. जब तक यहाँ न आयें तब तक कुछ भी समझ न सकें कि अभी ____ है वा कलियुग है। बाप कहते हैं ज्ञान सागर मैं ही हूँ, जो इस देवी-देवता धर्म के होंगे वह सब आकर फिर से अपना ____ लेंगे। अभी _____ लग रही है – तुम समझ जायेंगे। मीठे बच्चे – संगमयुग पर ही तुम्हें ______ बनने की मेहनत करनी पड़ती सतयुग अथवा कलियुग में यह मेहनत होती नहीं।
° _संगम_, _वर्सा_, _सैपलिंग_, _आत्म-अभिमानी_

10. सतयुग में कभी कोई ऐसे नहीं कहेंगे कि *हमको शान्ति चाहिए।* _(सही / गलत)_
° *सही* (बाप तुमको ऐसा साहूकार बना देते हैं जो देवताओं को भगवान से कोई चीज़ मांगने की दरकार नहीं रहती। यहाँ तो दुआ भी मांगते हैं ना।)

11. यह है बहुत छोटा युग इसलिए इनको _____ युग कहा जाता है। इनको कहा ही जाता है गीता का युग। तुम ____ -योग सीख रहे हो – जानते हो आदि सनातन देवी-देवता ____ का फाउन्डेशन लग रहा है। सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी दोनों _____ स्थापन हो रही हैं। ब्राह्मण ____ स्थापन हो चुका है। ब्राह्मण ही फिर सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी बनते हैं। जो अच्छी रीति मेहनत करेंगे वह सूर्यवंशी बनेंगे।
° _लीप_, _राज_, _धर्म_, _राजाई_, _कुल_

12. हमारा *बीजरूप* कौन है?
° परमात्मा *बाप* , क्योंकि बाप ही आकर स्वर्ग की स्थापना करते हैं ब्रह्मा द्वारा। (ब्रह्मा को प्रजापिता कहा जाता है। रचता नहीं कहेंगे। इन द्वारा बच्चे एडाप्ट किये जाते हैं। ब्रह्मा को भी तो क्रियेट करते हैं ना। बाप आकर प्रवेश कर यह रचते हैं। *शिवबाबा कहते हैं तुम मेरे बच्चे हो*।)

13. *श्रीकृष्ण का नाम* उनके माँ बाप से भी अधिक बाला है, क्यों? (3)
° क्योंकि श्रीकृष्ण से पहले जिनका भी जन्म होता है वो जन्म योगबल से नहीं होता। (कृष्ण के माँ बाप ने कोई *योगबल से जन्म* नहीं लिया है।)
° *पूरी कर्मातीत अवस्था* वाले राधे-कृष्ण ही हैं, वही सद्गति को पाते हैं। (जब सब पाप आत्मायें खत्म हो जाती हैं तब गुलगुल (पावन) नई दुनिया में श्रीकृष्ण का जन्म होता है, उसे ही वैकुण्ठ कहा जाता है।)
° संगम पर श्रीकृष्ण की आत्मा ने, *सबसे अधिक पुरुषार्थ* किया है इसलिए उनका नाम बाला है।

14. तुम कृष्ण को रिसीव करने वाले रहेंगे। भल तुम्हारा *छी-छी जन्म* होगा क्योंकि रावण राज्य है ना। _(सही / गलत)_
° *सही* , शुद्ध जन्म तो हो न सके। गुल-गुल (पवित्र) जन्म कृष्ण का ही पहले-पहले होता है। उसके बाद नई दुनिया बैकुण्ठ कहा जाता है। (कृष्ण बिल्कुल गुल-गुल नई दुनिया में आयेंगे।)

15. तुम किसको भी समझा सकते हो – हम यह बनने के लिए पढ़ रहे हैं। विश्व में इनका _____ अब स्थापन हो रहा है। हमारे लिए तो नई _____ चाहिए।
° _राज्य_, _दुनिया_

16. अभी तुमको *दैवी सम्प्रदाय* नहीं कहेंगे। _(सही / गलत)_
° *सही* (तुम हो ब्राह्मण सम्प्रदाय। देवता बनने वाले हो। दैवी सम्प्रदाय बन जायेंगे फिर तुम्हारी आत्मा और शरीर दोनों स्वच्छ होंगे। अभी तुम संगमयुगी पुरूषोत्तम बनने वाले हो।)

17. तुम्हारे में तो कितनी _____ रहती है। घर बैठे तुमको ____ मिल जाता है। _______ बाप से तुम इतनी ताकत लेते हो। तुम्हारे में भी पहले सुख की ताकत रहती है। फिर ____ हो जाती है।
° _ताकत_, _सुख_, _सर्वशक्तिमान्_, _गुम_

18. उन्हों _(साधु-सन्यासी)_ में भी पहले शान्ति की ताकत थी, *अब वह ताकत नहीं रही* है। बाबा ने यहां कौन-सा अच्छा तर्क सुनाया?
° *आगे तो सच कहते थे* कि रचता और रचना को हम नहीं जानते। अभी तो अपने को भगवान शिवोहम् कह बैठते हैं। (बाप समझाते हैं – इस समय सारा झाड़ तमोप्रधान है इसलिए साधुओं आदि का भी उद्धार करने मैं आता हूँ। यह दुनिया ही बदलनी है। सब आत्मायें वापिस चली जायेंगी।)

19. *एक भी नहीं* जिसको यह पता हो……. क्या? (2)
° *हमारी आत्मा में अविनाशी पार्ट भरा हुआ* है जो फिर से रिपीट करेंगे। (आत्मा इतनी छोटी है, इनमें अविनाशी पार्ट भरा है जो कभी विनाश नहीं होता। इसमें बुद्धि बड़ी अच्छी पवित्र चाहिए। वह तब होगी जब याद की यात्रा में मस्त रहेंगे।)
° कोई भी ऐसा नहीं है जो समझें कि *आत्मा पहले सतोप्रधान थी* फिर तमोप्रधान बनी है। (क्योंकि वह तो आत्मा को निर्लेप समझते हैं। आत्मा सो परमात्मा है, ऐसे-ऐसे कह देते हैं।)

20 *चढ़े तो चाखे…….* यह क्यों गाया जाता?
° कहाँ ऊंच ते ऊंच राजाओं का राजा *डबल सिरताज* , कहाँ *प्रजा* । पढ़ाने वाला तो एक ही है। (इसमें समझ बड़ी अच्छी चाहिए। बाबा बार-बार समझाते हैं याद की यात्रा है मुख्य। मेहनत सिवाए पद थोड़ेही मिलता।)

Answers from Sakar Murli 13-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 13-10-2020*

1. निर्विघ्न राज्य अधिकारी 👑 बनने के लिए _____ सेवाधारी बनो।
° _निर्विघ्न_

2. एक बाप की मत पर चल सदा सन्तुष्ट रह ____ देवी बनना है। यहाँ कोई भी ____ नहीं रखनी है। बाप से सर्व प्राप्तियां कर ____ -पति बनना है।
° _सन्तोषी_, _आश_, _पद्म_

3. बाप कहते हैं सर्व का _____ दाता तो मैं ही हूँ। तुम बच्चों को ___ जन्म के लिए खुशी ही खुशी देते हैं। ऐसे बाप को ____ भी करना चाहिए। याद से ही तुम्हारे _____ भस्म होंगे और तुम ______ बन जायेंगे। यह समझने की बातें हैं। जितना औरों को जास्ती समझायेंगे उतना ____ पद पायेंगे।
° _सद्गति_, _21_, _याद_, _पाप_, _सतोप्रधान_, _ऊंच_

4. *फाइनल पेपर* 📄के प्रकृति और पांच विकार (पुराने संस्कारों) के विकराल लास्ट रूप में पास होने लिये क्या जरूरी है? (2)
° ऐसे समय पर *समेटने की शक्ति* द्वारा अभी-अभी साकारी, अभी-अभी आकारी और अभी-अभी निराकारी *स्थिति में स्थित होने का अभ्यास* चाहिए।
° *देखते हुए न देखो*, सुनते हुए न सुनो। जब ऐसी *फुलस्टॉप की स्टेज* हो तब प्रकृतिपति बन प्रकृति की हलचल को स्टॉप कर सकेंगे।

5. “मीठे बच्चे – बाबा आये हैं तुम्हें मुक्ति-जीवनमुक्ति की राह बताने, तुम _____ होकर रहो तो यह राह सहज देखने में आयेगी”
° _आत्म-अभिमानी_

6. सच्ची शान्ति (वा मुक्ति) कहा जाता है *शान्तिधाम* को। क्यों?
° क्योंकि आत्मा शरीर बिगर कुछ भी बोल नहीं सकती। *कर्मेन्द्रियों द्वारा ही आवाज़ होता* है। मुख न हो तो आवाज़ कहाँ से आयेगा।

7. यहां स्टेज पर आत्मा को *कर्मेन्द्रियां मिली हैं कर्म करने* लिए। तो इस सन्दर्भ में सतयुग और कलियुग के बीच मुख्य अन्तर क्या है?
° रावण राज्य में *विकर्म* (विकार, दु:ख) होते। यह विकर्म छी-छी कर्म हो जाते हैं।
° सतयुग में रावण 5 विकार ही नहीं तो कर्म *अकर्म* हो जाते हैं। उसको कहा जाता है – स्वर्ग।

8. कहते हैं बाबा *ऐसी जगह* ले चलो जहाँ दु:ख का नाम न हो। वह कहां कहेंगे?
° वह तो *भारत जब स्वर्ग था* तब दु:ख का नाम नहीं था। स्वर्ग से नर्क में आये हैं, अब फिर स्वर्ग में जाना है। यह खेल है।

9. *सच्चा-सच्चा सतसंग* यह है। कैसे?
° तुम यहाँ *सत बाप को याद करते* हो, वही ऊंच ते ऊंच भगवान परमपिता परमात्मा है। (बाबा हम सिर्फ आपको ही याद करेंगे, आपसे ही वर्सा लेंगे। बाप कहते हैं देह सहित देह के सर्व सम्बन्धों को भूल जाना है। एक बाप को याद करना है। आत्मा को यहाँ ही पवित्र बनना है। याद नहीं करेंगे तो फिर सज़ायें खानी पड़ेंगी। पद भी भ्रष्ट हो जायेगा इसलिए बाप कहते हैं याद की मेहनत करो। आत्माओं को समझाते हैं।)

10. हर एक चीज़ *पहले सतोप्रधान* फिर सतो-रजो-तमो में आती है। यहां बाबा ने किसका मिसाल दिया?
° *छोटे बच्चे* 👶 को सतोप्रधान कहेंगे। महात्मा से भी ऊंच, विकारों का पता नहीं, बिल्कुल इनोसेंट।

11. देवताओं की महिमा गाते हैं – सर्वगुण सम्पन्न….. *अहिंसा* परमोधरम। अर्थात्‌ क्या?
° बाप ने हिंसा और अहिंसा का अर्थ समझाया है। किसको मारना इसको हिंसा कहा जाता है। सबसे बड़ी हिंसा है काम कटारी चलाना। *देवतायें हिंसक नहीं होते। काम कटारी नहीं चलाते*। बाप कहते हैं अब मैं आया हूँ तुमको मनुष्य से देवता बनाने।

12. यहाँ कोई भी *अपने को देवता* नहीं कह सकते। क्यों?
° *समझते हैं* हम नीच पापी विकारी हैं। फिर अपने को देवता कैसे कहेंगे।

13. एक बाप से ही *सुख-शान्ति का वर्सा* मिलता है। ऐसा क्यों?
° क्योंकि *सर्व के शान्ति का, सुख का दाता* तो एक ही बाप है। (तुम जानते हो शान्तिधाम, सुखधाम में ले जाने वाला एक ही बाप है।)

14. और कोई भी सतसंग आदि नहीं होगा जहाँ कहे – हे रूहानी _____ । यह है रूहानी _____ , जो रूहानी _____ से ही बच्चों को मिलता है। रूह अर्थात् निराकार। शिव भी निराकार है ना। तुम्हारी आत्मा भी _____ है, बहुत छोटी।
° _बच्चों_, _ज्ञान_, _बाप_, _बिन्दी_

15. बहुत भक्ति करते हैं तो फिर मैं ही उनको *साक्षात्कार* कराता हूँ। यह तो *बहुत अच्छी बात* है। _(सही / गलत)_
° इससे फायदा कुछ भी *नहीं* । सिर्फ खुश हो जाते हैं। पाप तो फिर भी करते हैं, *मिलता कुछ भी नहीं। पढ़ाई बिगर* कुछ बन थोड़ेही सकेंगे। (देवतायें सर्वगुण सम्पन्न हैं। तुम भी ऐसे बनो ना। बाकी तो वह है सब भक्ति मार्ग का साक्षात्कार। *सचमुच कृष्ण से झूलो, स्वर्ग में उनके साथ रहो। वह तो पढ़ाई पर है।* जितना श्रीमत पर चलेंगे उतना ऊंच पद पायेंगे। परमपिता परमात्मा की श्रीमत से कृष्ण की आत्मा ने यह पद पाया है।)

16. तुम हो ____ वंशावली, वह हैं कुख वंशावली। वह हथियाला बांधते हैं ____ चिता पर बिठाने का। अभी तुम सच्ची-सच्ची ब्राह्मणियां _____ चिता पर बिठाने हथियाला बांधते हो।
° _मुख_, _काम_, _ज्ञान_

17. सबसे गन्दी *बीमारी* कौन-सी है?
° *बाइसकोप* । अच्छे बच्चे भी बाइसकोप में जाने से खराब हो पड़ते हैं इसलिए तुम्हें बाइसकोप में जाना मना है।

18. अभी तुम बच्चों को समझाया है – मूलवतन सूक्ष्मवतन साकार-वतन। खेल सारा यहाँ चलता है। यह चक्र फिरता ही रहता है। *तुम ब्राह्मण बच्चों को ही ऐसे स्वदर्शन चक्रधारी* बनना है। देवताओं को नहीं। _(सही / गलत)_
° *सही* (परन्तु ब्राह्मणों को यह अलंकार नहीं देते हैं क्योंकि पुरूषार्थी हैं। आज अच्छे चल रहे हैं, कल गिर पड़ते हैं इसलिए देवताओं को दे देते हैं।)

19. संगम पर *कौन-सी ऐसी नॉलेज* मिली है, जिससे सतयुगी देवतायें मोहजीत कहलाये?
° संगम पर तुम्हें बाप ने *अमरकथा सुनाकर अमर आत्मा की नॉलेज* दी। ज्ञान मिला – यह अविनाशी बना-बनाया *ड्रामा* है, हर एक आत्मा अपना-अपना *पार्ट* बजाती है। (वह एक शरीर छोड़ दूसरा लेती है, इसमें *रोने की बात नहीं*। इसी नॉलेज से सतयुगी देवताओं को मोहजीत कहा जाता। वहाँ मृत्यु का नाम नहीं। खुशी से पुराना शरीर छोड़ नया लेते हैं।)

20. मनुष्यों ने अनेक प्रकार के व्रत बनाये हैं। परन्तु बाप ने कौन-सा *व्रत* सिखाया था?
° अभी तुमको व्रत रखना चाहिए – *सदैव पवित्र रहने का* क्योंकि पावन दुनिया में जाना है तो पतित नहीं बनना है।

Answers from Sakar Murli 12-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 12-10-2020*

1. प्राप्तियों को सदा _____ रखो तो कमजोरियाँ सहज समाप्त हो जायेंगी।
° _सामने_

2. जैसे वृक्ष का पहले बीज होता है, उस बीज द्वारा दो पत्ते 🌱 निकलते हैं, ऐसे मुख्य है बीज _____ की स्मृति फिर दो पत्ते अर्थात् _____ और _____ की सारी नॉलेज। इन तीन स्मृतियों को धारण करने वाले _____ भव वा सम्पूर्ण ______ भव के वरदानी बन जाते हैं।
° _बाप_, _आत्मा_, _ड्रामा_,
_स्मृति_, _विजयी_

3. अब बाप फिर वर्थ _____ बनाते हैं। बाबा ने समझाया है – एक शिवबाबा की जयन्ती ही वर्थ _____ है। अब तुम बच्चों को ऐसा लक्ष्मी-नारायण बनना है। वहाँ पर घर-घर में ______ रहती है, सबकी ज्योत जग जाती है। मेन _____ से ज्योत जगती है। बाबा कितना सहज रीति बैठ समझाते हैं। बाप के सिवाए मीठे-मीठे _____ सिकीलधे बच्चे कौन कहेगा।
° _पाउण्ड_, _पाउण्ड_, _दीपमाला_, _पावर_, _लाडले_

4. मीठे-मीठे _____ अति ____ रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप समझाते हैं।
° _नम्बरवार_, _मीठे_

5. कोई आई.सी.एस. का इम्तहान पास करते तो समझते बहुत बड़ा इम्तहान पास किया। परन्तु यहां ऊंच ते ऊंच बाप-टीचर-सतगुरू हमे समझदार बनाकर *कितना बड़ा इम्तहान पास कराते*। इस पास होने में सबसे अनोखी बात कोन-सी है? _(और पढ़ाई की भेंट में)_
° तुमको पढ़ा करके *तुम्हारे लिए दुनिया को ही बदल देते* हैं, नई दुनिया में राज्य करने के लिए। (सिर्फ तुम बच्चे ही जानते हो – हम कितना ऊंच ते ऊंच बाप-टीचर द्वारा ऊंच वर्सा पाते हैं।)

6. यह भी तुम बच्चे जानते हो कि पुरानी दुनिया बदल रही है। (बाप आये हैं ब्रह्मा द्वारा नई दुनिया की स्थापना करने)। और बाबा कहते यह *जैसे तैरना 🏊‍♂️सीखते हो*। कैसे?
° अभी तुम्हारा तैरना देखो कैसा है, *एकदम ऊपर (परमधाम) में चले जाते हो फिर यहाँ (सतयुग) आते हो*। (वह तो दिखलाते हैं इतने माइल्स ऊपर में गये। तुम आत्मायें कितना माइल्स ऊपर में जाते हो। वह तो स्थूल वस्तु है, जिसकी गिनती करते हैं। तुम्हारा तो अनगिनत है। तुम जानते हो हम आत्मायें अपने घर चली जायेंगी, जहाँ सूर्य-चाँद आदि नहीं होते। तुमको खुशी है – वह हमारा घर है। हम वहाँ के रहने वाले हैं।जिसके लिए आधाकल्प पुरूषार्थ करते भी बन नहीं सके हैं। न कोई ज्योति में समा सके, न मुक्तिधाम में जा सके, न मोक्ष को पा सके। जो कुछ पुरूषार्थ किया वह व्यर्थ।)

7. तुमको अभी *आस्तिक* कहा जाता है। कैसे?
° *बाप* को अच्छी रीति तुम जानते हो और बाप द्वारा *सृष्टि चक्र* को भी जाना है। बाप कहते हैं *मुक्ति-जीवनमुक्ति का ज्ञान* कोई में भी नहीं है। देवताओं में भी नहीं है। (बाप को कोई नहीं जानते तो किसको ले कैसे जायेंगे। कितने ढेर गुरू लोग हैं, कितने उन्हों के फालोअर्स बनते हैं। सच्चा-सच्चा सतगुरू है शिवबाबा।)

8. *जो बाप के मददगार बनते* हैं, उन्हें मदद के रिटर्न में क्या प्राप्त होता?
° उन्हें बाप ऐसा बना देते हैं जो *आधाकल्प कोई की मदद लेने वा राय लेने की दरकार ही नहीं* रहती है। (कितना बड़ा बाप है, कहते हैं बच्चे तुम मेरे मददगार नहीं होते तो हम स्वर्ग की स्थापना कैसे करते।)

9. मीठा-मीठा बाबा आया हुआ है, हमको घर ले जाने *लायक* बनाने, बाप *बच्चों की मदद* ले रहे हैं। तो इसके लिए मुख्य कौन-सा *पुरूषार्थ* है? (2)
° कहते हैं – बच्चे, अब *छी-छी काला मुँह मत बनो*। माया से हार नहीं खाओ। नहीं तो नाम बदनाम कर देते हैं। (यह बॉक्सिंग 🥊 है। दो पार्टी हैं। एक हैं माया के मुरीद, एक हैं ईश्वर के। तुम बाप को प्यार करते हो। गायन भी है विनाश काले विपरीत बुद्धि। तुम्हारी है प्रीत बुद्धि। तो तुमको नाम बदनाम थोड़ेही करना है। अब माया को जीतना जरूर है। वाह-वाह प्राप्त करना है!)
° बाप कहते हैं देह सहित जो कुछ देखते हो, उन *सबको भूल जाओ। मामेकम् याद करो।* (माया ने तुमको सतोप्रधान से तमोप्रधान बना दिया है। अब फिर सतोप्रधान बनना है। माया जीते जगतजीत बनना है।)

10. यहाँ बाप कहते हैं तुमको *पांव पड़ने से भी छुड़ा देता* हूँ। इसके कौन-से 3 कारण सुनाये?
° वह कहते हैं *हमको तो चरण हैं नहीं*। मैं कैसे अपने को पुजवाऊं।
° बच्चे *विश्व के मालिक* बनते हैं, उनसे थोड़ेही पुजवाऊंगा।
° भक्ति मार्ग में बच्चे बाप के पांव पड़ते हैं। वास्तव में तो *बाप की प्रापर्टी के मालिक बच्चे हैं*। (यहाँ बाप कहते हैं तुमको पांव पड़ने से भी छुड़ा देता हूँ। कितना बड़ा बाप है। कहते हैं *तुम बच्चे मेरे मददगार* हो।)

11. एक लेक है, कहते हैं उसमें *डुबकी लगाने से परियां* बन जाते हैं। इसका आध्यात्मिक रहस्य क्या है?
° अभी तुम *ज्ञान सागर में डुबकी मार परीज़ादा बन जाते* हो। (बाकी मनुष्य को उड़ने के पंख आदि हो नहीं सकते।)

12. *आत्मा* की तुलना आज बाबा ने कौन-सी 2 चीजों से की?
° उड़ने वाली है ही आत्मा। आत्मा जिसको *रॉकेट* 🚀 भी कहते हैं, आत्मा कितनी छोटी है। (जब सब आत्मायें जायेंगी तो हो सकता है तुम बच्चों को साक्षात्कार भी हो।)
° कहते भी हैं *छोटा सा स्टॉर* ⭐ है जिसको इन आंखों 👀 से देख नहीं सकते। (शरीर कितना बड़ा है, जिससे कर्म करना है। आत्मा कितनी छोटी है उसमें 84 का चक्र नूँधा हुआ है। एक भी मनुष्य नहीं होगा जिसको यह बुद्धि में हो कि हम 84 जन्म कैसे लेते हैं। आत्मा में कैसे पार्ट भरा हुआ है। वण्डर है। आत्मा ही शरीर लेकर पार्ट बजाती है।)

13. तुम बच्चे जानते हो हमको बागवान मिला है, कांटे से फूल 🌸 बनने की ____ बतलाते हैं। गायन भी है ना ____ ऑफ अल्लाह। खुदा का बगीचा साक्षात्कार कराने वाला तो खुद ही _____ होगा।
° _युक्ति_, _गॉर्डन_, _खुदा_

14. अन्दर में *बहुत खुशी* होनी चाहिए – क्यों? (2)
° *अभी हम सुखधाम में जाते* हैं। वहाँ दु:ख की बात नहीं होती। (बाप कहते हैं सुखधाम, शान्तिधाम को याद करो। घर को क्यों नहीं याद करेंगे। आत्मा घर जाने के लिए कितना माथा मारती है। जप तप आदि बहुत मेहनत करती है परन्तु जा कोई भी नहीं सकते। झाड़ से नम्बरवार आत्मायें आती रहती हैं फिर बीच में जा कैसे सकती। जबकि बाप ही यहाँ है।)
° तुम अभी तक *जिस बाप को याद करते* रहते थे – हे पतित-पावन आओ, *उस बाप से तुम पढ़ रहे* हो। (तुम्हारा ओबीडियन्ट सर्वेन्ट टीचर भी है। ओबीडियन्ट सर्वेन्ट बाप भी है।)

15. *दु:खी* क्यों होते हैं? (2)
° *बाप को भूलने के कारण* ही फिर दु:खी क्यों होते हैं। (माया का मोचरा लग जाता है। अब तो ज़रा भी मोचरा नहीं खाना है। मूल है *देह-अभिमान*।)

16. यहाँ तुम कितना ऊंच काम कर रहे हो। विश्व का ____ कर रहे हो और तुमको 3 पैर ____ के भी नहीं मिलते हैं। तुम तो राजाओं को भी कहते हो – तुम ____ डबल सिरताज थे, अब _____ बन पड़े हो। अब बाप फिर से ____ बनाते हैं तो बनना चाहिए ना।
° _उद्धार_, _पृथ्वी_, _पूज्य_,
_पुजारी_, _पूज्य_

17. बाप कहते हैं _____ को आगे बढ़ाना है। ______-फेरी में भी पहले-पहले मातायें हो। ____ भी तुम्हारे फर्स्टक्लास हैं। यह _____ का चित्र तुम्हारे आगे हो। सबको सुनाओ दुनिया बदल रही है। बाप से वर्सा मिल रहा है कल्प पहले मुआफिक। बच्चों को विचार सागर मंथन करना है – कैसे _____ को अमल में लायें। टाइम तो लगता है ना।
° _माताओं_, _प्रभात_, _बैज_, _ट्रांसलाइट_, _सर्विस_

Answers from Sakar Murli 10-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 10-10-2020*

1. संगमयुग का एक-एक सेकण्ड 🕒 वर्षो के समान है इसलिए ______ में समय नहीं गंवाओ।
° _अलबेलेपन_

2. कौन-से सेवाधारी बच्चों को *आधारमूर्त बनने का वरदान* प्राप्त हो जाता? _(हमारे *स्वप्न* कैसे होने चाहिए?)_ (3)
° विश्व कल्याणकारी बच्चे *स्वप्न में भी फ्री नहीं* रह सकते। (जो दिन रात सेवा में बिजी रहते हैं उन्हें *स्वप्न में भी कई नई-नई बातें*, सेवा के प्लैन व तरीके दिखाई देते हैं।)
° वे सेवा में बिजी होने के कारण अपने *पुरूषार्थ के व्यर्थ* से और *औरों के भी व्यर्थ से बचे* रहते हैं। (उनके सामने बेहद विश्व की आत्मायें सदा इमर्ज रहती हैं। उन्हें जरा भी अलबेलापन आ नहीं सकता।)

3. *नई* देहली कब कहेंगे?
° पुरानी दुनिया सो फिर नई होगी। *देहली तो जब परिस्तान होगी तब नई देहली कहेंगे।* (नई दुनिया में नई देहली थी, जमुना घाट पर। उन पर लक्ष्मी-नारायण के महल थे। परिस्तान था। अभी तो कब्रिस्तान होना है, सब दफन हो जाने हैं इसलिए बाप कहते हैं – मुझ ऊंच ते ऊंच बाप को याद करो तो पावन बनेंगे।)

4. बाप कहते हैं मैं तुमको पढ़ाता हूँ, तुम सिर्फ _____ याद करो। देह सहित सभी सम्बन्धों से बुद्धि का ____ तोड़ो। अपनी _____ भी छोड़ी तो बाकी रही आत्मा। अपने को आत्मा समझ मुझ बाप को याद करो। जब तक मेरी ____ पर नहीं चलेंगे तो कट कैसे उतरेगी। बाबा समझाते हैं बच्चे तुमने ही _____– 84 का चक्र लगाया है तो तुमको ही आकर समझाना पड़े।
° _मामेकम्_, _योग_, _देह_, _श्रीमत_, _आलराउन्ड_

5. *ओम् शान्ति* कहने से ही क्या याद आना चाहिए? _(आज की मुरली अनुसार)_
° *बाप* जरूर याद आना चाहिए। (बाप का पहला-पहला कहना है मनमनाभव।जरूर आगे भी कहा है तब तो अभी भी कहते हैं ना। )

6. बाबा ने कहा *चींटी मार्ग की सर्विस* करते हो, ऐसा क्यों? सेवा में सबसे *मुख्य धारणा* कौन-सी है? _(जिससे तीर लगे)_
° बाबा का नाम नहीं लेते हो इसलिए तुम्हारा कोई सुनते नहीं हैं। *बाबा की याद न होने से* तुम्हारे में जौहर नहीं भरता। जिस योगबल से तुम विश्व के मालिक बनते हो। (सारा दिन बाबा को तो बिल्कुल याद ही नहीं करते। झरमुई झगमुई में लगे रहते हैं और लिखते हैं कि हमने ऐसा भाषण किया, हमने यह समझाया।)
° *”बाबा कहते हैं, बाबा कहते हैं”*, यह तो धुन 🎶 लगा देनी चाहिए। (बाबा ऐसे कहते हैं, यह कहने से तुम छूट जायेंगे। घड़ी-घड़ी बाबा का नाम लेकर समझाओ तो शिवबाबा याद रहेगा। बाबा का नाम लेंगे तब ही किसको तीर लगेगा। बाबा ऐसे कहते हैं, बाबा यह समझाते हैं, ऐसे-ऐसे तुम बोलो फिर देखो तुम्हारा कितना प्रभाव निकलता है। तुम्हारा एक ही भाषण ऐसा सुनें तो कमाल हो जाए।)

7. ______ शिवबाबा कहना है, सिर्फ शिव नहीं। ____ द्वारा स्थापना कौन कराते हैं? क्या ब्रह्मा क्रियेटर हैं? ऐसे-ऐसे ____ से बोलो तब काम कर सकते हो। नहीं तो देह-अभिमान में बैठ भाषण करते हैं।
° _त्रिमूर्ति_, _ब्रह्मा_, _नशे_

8. बाबा भारतवासी बच्चों से *विशेष कौन-से प्रश्न* पूछते हैं? (3) _(जो हम भी बाबा-बाबा कह दूसरों को सहज समझा सकते)_
° तुम भारतवासी बच्चे जो इतने साहूकार थे, सर्वगुण सम्पन्न 16 कला सम्पूर्ण देवता धर्म के विश्व के मालिकथे, तुम पवित्र थे, काम कटारी नहीं चलाते थे, बहुत धनवान थे। फिर तुमने इतना *देवाला* कैसे निकाला है – कारण का पता है? बच्चे, तुम *गुलाम* कैसे बन गये? इतना सब धन दौलत कहाँ गँवा दिया? ख्याल करो तुम पावन से *पतित* कैसे बन गये?

9. तो हम भारतवासी ऐसे *पतित*-गुलाम क्यों बने? _(आज की मुरली अनुसार)_
° *मेरे से योग न लगाने से* तुम और ही पतित बन पड़ते हो। मुझे याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। (तुम्हारा *मेरे से योग* टूटने से यह हाल हुआ है। अब फिर मेरे से योग लगाओ तो विकर्म विनाश होंगे। मुक्तिधाम में पवित्र आत्मायें रहती हैं। अभी तो सारी दुनिया पतित है। पावन दुनिया का तुमको मालूम ही नहीं है।)

10. *भाषण* में और क्या-क्या समझा सकते? (6)
° शिवबाबा कहते हैं, वही ऊंच ते ऊंच *पतित-पावन* है। जरूर पावन बनाने के लिए यहाँ आकर समझाते हैं। (शिवबाबा कहते मैं आता भी हूँ भारत में और *राजयोग सिखलाने* आता हूँ, कहता हूँ *मामेकम् याद* करो, मुझ ऊंच बाप को याद करो क्योंकि वह बाप देने *वाला* दाता है। बरोबर भारत में तुम विश्व के मालिक थे ना।)
° शिवबाबा समझाते हैं भगवान तो *एक* ही है। जो *दु:ख हर्ता सुख कर्ता* है, नई दुनिया स्थापन करने वाला है। (इसी *भारत पर स्वर्ग* था। हीरे-जवाहरातों के महल थे, एक ही राज्य था। सब क्षीरखण्ड थे। जैसे बाप की महिमा अपरमअपार है, वैसे भारत की महिमा भी अपरमअपार है। भारत की महिमा सुनकर खुश होंगे।)
° बाबा कहते हैं – हमने तो स्वर्ग, शिवालय स्थापन किया, स्वर्ग में *इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य था* ना। तुम यह भी भूल गये हो। (तुमको यह भी पता नहीं है कि राधे-कृष्ण ही स्वयंवर के बाद लक्ष्मी-नारायण बनते हैं। कृष्ण जो विश्व का मालिक था, उनको कलंक बैठ लगाते हो, मेरे को भी कलंक लगाते हो। मैं *तुम्हारा सद्गति दाता*, तुम मुझे कुत्ते बिल्ली, कण-कण में कह देते हो। बाप कहते हैं सर्व का सद्गति दाता, पतित-पावन मैं हूँ। तुम फिर पतित-पावनी गंगा कह देते हो।)
° बोलो, *हम बाप की महिमा करते हैं*, बाप खुद कहते हैं मैं कैसे साधारण पतित तन में बहुत जन्मों के अन्त में आता हूँ। (यह अपने जन्मों को नहीं जानते हैं। भागीरथ यह है, इनके भी वानप्रस्थ अवस्था में मैं आता हूँ।)
° हर बात में बोलो बाबा कहते हैं। यह हठयोगी तुमको मुक्ति थोड़ेही दे सकते हैं। जबकि *सर्व का सद्गति दाता* एक है फिर और किसी को गुरू किसलिए करते हो? (क्या तुमको संन्यासी बनना है या हठयोग सीखकर ब्रह्म में लीन होना है? लीन तो कोई हो नहीं सकता।)
° क्या हालत हो गई, इसलिये फिर मुझे (बाबा को) आना पड़ता है। तुम कितने धर्म कर्म भ्रष्ट हो गये हो। बताओ *हिन्दू धर्म किसने कब स्थापन किया?* ऐसे अच्छी ललकार से भाषण करो।

11. जिनके पास *मकान 🏢, विमान* ✈️ 🚁 आदि हैं वह स्वर्ग में हैं। _(सही / गलत)_
° गलत (बाप कहते हैं भारत जब *शिवालय* था तो उसे *स्वर्ग* कहा जाता था।)

12. “अहम् ब्रह्मस्मि” माया के हम मालिक हैं। _(सही / गलत)_
° *गलत* (बाप कहते हैं तुम यह भी नहीं जानते कि माया किसको कहा जाता और सम्पत्ति किसको कहा जाता है! तुम धन को माया कह देते हो।)

13. बाप समझाते हैं यह अनेक धर्मों का _____ वृक्ष है। पहले-पहले है _____ धर्म। अब वह कहाँ गया? लाखों वर्ष कह देते हैं यह तो ____ हज़ार वर्ष की बात है। तुम _____ भी उन्हों के बनाते रहते हो।
° _कल्प_, _देवी-देवता_, _5_, _मन्दिर_

14. दिखाते हैं पाण्डवों और कौरवों की ____ लगी। पाण्डव पहाड़ों पर गल मरे फिर क्या हुआ? मैं कैसे हिंसा करुँगा। मैं तो तुमको अहिंसक _____ बनाता हूँ। काम कटारी न चलाना, उसको ही ______ कहते हैं। वह हैं ______ की वंशावली। अच्छा!
° _लड़ाई_, _वैष्णव_, _वैष्णव_, _विष्णु_

Answers from Sakar Murli 09-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 09-10-2020*

1. _____ शक्ति द्वारा व्यर्थ संकल्पों के बहाव 🌊 का फोर्स समाप्त करो।
° _परिवर्तन_

2. *परिस्थितियों पर विजय* प्राप्त करने का साधन क्या है? कैसे?
° *स्व-स्थिति।* (यह देह भी पर है, स्व नहीं।)
° स्व स्थिति व स्वधर्म *सदा सुख का अनुभव कराता* है और प्रकृति-धर्म अर्थात् पर धर्म या देह की स्मृति किसी न किसी प्रकार के दु:ख का अनुभव कराती है। (तो जो सदा स्व स्थिति में रहता है वह *सदा सुख का अनुभव* करता है, उसके पास दु:ख की लहर आ नहीं सकती।)
° वह *संगमयुगी विजयी रत्न* बन जाते हैं।

3. ज्ञान से तुम बच्चे सालवेन्ट बनते हो, इसलिए देवताओं को _____ -पति कहते हैं। देवतायें बहुत ____ -वान बनते हैं। वहाँ तुम्हारा ____ भी बहुत समय चलता है। तुम्हारे पास बहुत ____ रहता है। तुम भारत में ही रहते थे। तुम्हारा ____ था, कल की बात है।
° _पद्म_, _धन_, _सुख_, _धन_, _राज्य_

4. ऊंच ते ऊंच की महिमा तो बहुत भारी है। *सर्वशक्तिमान्* है तो क्या नहीं कर सकते, सब कुछ उसके हाथ में है। _(सही / गलत)_
° नहीं (बाप कहते हैं ड्रामा अनुसार सब कुछ होता है, मैं कुछ भी करता नहीं हूँ। सर्वशक्तिमान इसलिए है क्योंकि *उनके सिखाए हुए याद की शक्ति द्वारा हम पवित्र-सतोप्रधान सर्वशक्तिमान् बन विश्व पर राज्य* करेंगे। कोई की ताकत नहीं जो छीन सके।)

5. कहते भी हैं यह नाटक है, हम पार्ट बजाने आये हैं। परन्तु फिर भी एक भी मनुष्य को *ड्रामा का ज्ञान* नहीं कहेंगे। क्यों?
° अगर समझते हो कि नाटक है तो *शुरू से अन्त तक* वह याद आना चाहिए। नहीं तो नाटक कहना ही रांग हो जाता है। (उस नाटक के *आदि-मध्य-अन्त* को भी जानना चाहिए ना। हम ऊपर से आते हैं तब तो वृद्धि होती रहती है। इतनी सब आत्मायें कहाँ से आई, यह कोई समझते नहीं कि यह *अनादि बना-बनाया अविनाशी ड्रामा* है। जो आदि से अन्त तक *रिपीट* होता रहता है। तुम *बाइसकोप* शुरू से अन्त तक देखो फिर दुबारा रिपीट करके अगर देखेंगे तो चक्र जरूर हूबहू रिपीट होगा। ज़रा भी फ़र्क नहीं होगा।)

6. ऐसे-ऐसे सवेरे बैठ विचार सागर ______ करना है। प्वाइंट्स निकलेंगी तो तुमको _____ होगी। ____ में घण्टा डेढ़ घण्टा बीत जाता है। जितनी प्रैक्टिस होती जायेगी उतनी ______ बढ़ती जायेगी। बहुत मज़ा आयेगा और फिर घूमते-फिरते भी _____ करना है। फुर्सत बहुत है।
° _मंथन_, _खुशी_, _खुशी_, _खुशी_, _याद_

7. *सवेरे-सवेरे उठकर बाबा (और स्वयं) से मीठी-मीठी बातें* करनी हैं। रोज़ खुशी की खुराक खाते हुए अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करना है। तो कैसी-कैसी बातें-चिन्तन कर सकते? (9)
° *बाबा, आप कितने मीठे हो* । बाबा बस, अभी तो हम चलते हैं अपने सुखधाम में।
° बाबा आप *कितनी अच्छी युक्ति बताते हो*, श्रेष्ठाचारी राज्य स्थापन करने की। (फिर हम श्रेष्ठाचारी माताओं की गोद में जायेंगे। अनेक बार हम ही उस नई सृष्टि में गये हैं।)
° अभी *हमारे खुशी के दिन आते* हैं। (यह खुशी की खुराक है इसलिए गायन भी है अतीन्द्रिय सुख पूछना हो तो गोप-गोपियों से पूछो।)
° अब *हमको बेहद का बाप मिला* है। हमको फिर से स्वर्ग का मालिक श्रेष्ठाचारी बनाते हैं। (कल्प-कल्प हम अपना राज्य-भाग्य लेते हैं। हार खाते हैं फिर जीत पाते हैं। अभी बाप को याद करने से ही रावण पर जीत पानी है फिर हम पावन बन जायेंगे।)
° अब फिर आधाकल्प हम कोई गुरू नहीं करेंगे। *शान्तिधाम, सुखधाम जायेंगे*। (बाप कहते हैं तुम सुखधाम के राही हो। अब दु:खधाम से सुखधाम में जाना है।)
° *वाह हमारा बाबा* , कैसे हमको पढ़ा रहे हैं।
° मनुष्यों को *भगवान का परिचय कैसे दें।* (सृष्टि तमोप्रधान बनती जाती है। यहाँ अब तुम सतोप्रधान बनने का पुरूषार्थ करते हो। गीता में भी अक्षर है मन-मनाभव। सिर्फ यह नहीं जानते कि भगवान कौन।)
° मीठी-मीठी बातें करनी चाहिए। *अभी हम श्रेष्ठाचारी दुनिया में जायेंगे* । (बूढ़ों के दिल में तो यह रहता है ना कि हम शरीर छोड़ गर्भ में जायेंगे। बाबा कितना नशा चढ़ाते हैं। ऐसी-ऐसी बातें बैठ करो तो भी तुम्हारा जमा हो जाए। शिवबाबा हमको नर्कवासी से स्वर्गवासी बना रहे हैं।)
° पहले-पहले हम आते हैं, सारा *आलराउन्ड पार्ट हमने बजाया* है। अब बाबा कहते हैं इस छी-छी चोले को छोड़ दो। देह सहित सारी दुनिया को भूल जाओ। यह है *बेहद का संन्यास* ।

8. हम बाबा से *राजयोग* सीखते, इसका कौन-सा यादगार बना हुआ है?
° इस *देलवाड़ा मन्दिर* की तो अपरमअपार महिमा है। (अभी हम राजयोग सीखते हैं। उसका यादगार तो जरूर बनेगा ना। यह हूबहू हमारा यादगार है। बाबा, मम्मा और बच्चे बैठे हैं। नीचे योग सीख रहे हैं, ऊपर में स्वर्ग की राजाई है। झाड़ में भी कितना क्लीयर है।)

9. अभी तुमको *ज्ञान का तीसरा नेत्र* मिलता है। बाप तीसरा नेत्र देने की कथा सुनाते हैं। इसका यादगार कौन-सी *3 कथाएं* भक्ति मार्ग में गाई हुई है?
° इसको ही फिर *तीजरी* की कथा कह दिया है। *अमरकथा* , *सत्य नारायण* की कथा भी मशहूर है। (सुनाने वाला एक ही बाप है जो फिर भक्ति मार्ग में चलती है।)

10. सारी दुनिया की ____ होने में टाइम लगता है ना। यह बेहद की दुनिया है। _____ है ही अविनाशी खण्ड। यह कभी प्राय: लोप होता नहीं। एक ही खण्ड रहता है – _____ -कल्प। फिर और खण्ड इमर्ज होंगे नम्बरवार। तुम बच्चों को कितना ____ मिलता है। बोलो – वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी कैसे ____ लगाती है – आकर समझो।
° _सफाई_, _भारत_, _आधा_, _ज्ञान_, _चक्र_

11. प्राचीन ऋषि मुनियों का कितना मान है, परन्तु वह भी सृष्टि के _______ को नहीं जानते। वह हठयोगी हैं। हाँ बाकी उनमें ______ की ताकत है जिससे भारत को थमाते हैं। नहीं तो भारत पता नहीं क्या हो जाता। मकान को _____ आदि लगाई जाती है ना – तो शोभा होती है। कुछ सुधार कर अपना नाम बाला किया है। अब वह भी सब ______ बन गये हैं।
° _आदि-मध्य-अन्त_, _पवित्रता_, _पोची_, _तमोप्रधान_

12. *पहले-पहले* क्या समझाना है?
° *बाप की पहचान* देनी है। (बाप का नाम, रूप, देश, काल जानते हो? ऊंच ते ऊंच बाप का पार्ट तो मशहूर होता है ना।)

13. अभी तुम जानते हो – वह बाप ही हमको ____ दे रहे हैं। तुम फिर से अपनी ______ स्थापन कर रहे हो। तुम बच्चे मेरे मददगार हो। तुम _____ बनते हो। तुम्हारे लिए पवित्र _____ जरूर स्थापन होनी है।
° _डायरेक्शन_, _राजधानी_, _पवित्र_, _दुनिया_

14. और हम *लिख* 📝 क्या सकते?
° *पुरानी दुनिया बदल रही* है। फिर यह सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी राज्य होगा। (फिर रावण राज्य होगा।)

15. चित्रों पर समझाना बहुत ____ लगता है, इनमें तिथि-तारीख सब लिखा हुआ है। भारत का प्राचीन ____ -योग माना याद। याद से _____ विनाश होते हैं और ____ से स्टेट्स मिलती है। ____ -गुण धारण करने हैं।
° _मीठा_, _राज_, _विकर्म_, पढ़ाई, _दैवी_

16. धन्धे में मनुष्य को नींद नहीं आती। सुस्त लोग नींद करते हैं। तुम जितना हो सके _____ को ही याद करते रहो। तुमको बुद्धि में रहता है शिवबाबा के लिए हम _____ बनाते हैं। शिवबाबा के लिए हम यह करते हैं। भोजन भी _____ से बनाना है। बाबा खुद भी _____ करते हैं। अच्छा!
° _शिवबाबा_, _भोजन_, _शुद्धि_, _याद_

17. इस *ईश्वरीय ज्ञान* की कौन-सी महिमा *मम्मा* ने सुनाई? (2)
° अपना जो ईश्वरीय ज्ञान है, वो बड़ा ही *सहज सरल और मीठा* है (क्योंकि स्वयं परमात्मा पढ़ा रहा है), इससे जन्म-जन्मान्तर के लिये *कमाई* जमा होती है। यह ज्ञान इतना सहज है जो *कोई भी* महात्मा, अहिल्या, धर्मात्मा, बालक से लेकर वृद्ध प्राप्त कर सकता। (विद्वान बनना, भाषा सीखना, हठयोग, हठक्रिया, जप तप की कोई जरुरत नहीं है।)
° यह तो नेचुरल आत्मा को *अपने परमपिता परमात्मा के साथ योग* लगाना है। (भल कोई इस ज्ञान को न भी धारण कर सके तो भी सिर्फ योग से भी बहुत फायदा होगा। इससे एक तो *पवित्र* बनते हैं, दूसरा फिर *कर्मबन्धन भस्मीभूत* होते हैं और *कर्मातीत* बनते हैं, इतनी ताकत है इस सर्वशक्तिवान परमात्मा की याद में। भल वो अपने साकार ब्रह्मा तन द्वारा हमें योग सिखला रहे हैं परन्तु याद फिर भी डायरेक्ट उस ज्योति स्वरूप शिव परमात्मा को करना है, उस याद से ही कर्मबन्धन की मैल उतरेगी।)

Answers from Sakar Murli 08-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 08-10-2020*

1. *बीती को बिन्दी* क्यों लगाना है? _(स्लोगन)_
° नहीं तो एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात् *दाग पर दाग* लगाना है।

2. एकान्तवासी बनने से एकाग्रता आती, *एकाग्रता 🎯 अर्थात् एक ही श्रेष्ठ संकल्प में स्थित रहना*। जिस एक बीज रूपी संकल्प में सारा वृक्ष रूपी विस्तार समाया हुआ है। तो इस *एकाग्रता से क्या प्राप्तियां* होती? (4)
° जहाँ एकाग्रता है वहाँ स्वत: *एकरस स्थिति* है। एकाग्रता से संकल्प, बोल और कर्म का व्यर्थ पन समाप्त हो जाता है और *समर्थ पन* आ जाता है।
° एकाग्रता को बढ़ाओ तो सर्व प्रकार की *हलचल समाप्त* हो जायेगी। सब संकल्प, बोल और कर्म सहज *सिद्व* हो जायेंगे।

3. मीठे बच्चे – डायरेक्ट बेहद का बाबा आये हैं तुम्हें बहुत ____ से पढ़ाने, तुम भी _____ से पढ़ो – नशा रहे हमको पढ़ाने वाला स्वयं भगवान है। सच्चा बाप सच्ची सेवा सिखलाते हैं, तुम विश्व का भी कल्याण करते हो। तो कितना _____ से करना चाहिए। बाबा कितनी ____ से सर्व की सद्गति करते हैं।
° _रुचि_, _रुचि_, _रुचि_, _रुचि_

4. ऐसे-ऐसे ख्यालात कई बच्चों को आते हैं। इस *आवागमन* से, दु:ख सुख से छूट जायें। यह सोचना ठीक है। _(सही / गलत)_
° नहीं (बाप कहते हैं यह कभी हो नहीं सकता। मोक्ष पाने के लिए कोशिश करना ही वेस्ट हो जाता है। बाप ने समझाया है एक भी आत्मा पार्ट से छूट नहीं सकती। *आत्मा में अविनाशी पार्ट भरा है। वह है ही अनादि अविनाशी, बिल्कुल एक्यूरेट* एक्टर्स हैं। एक भी कम जास्ती नहीं हो सकते। तुम बच्चों को सारी नॉलेज है।)

5. बाबा हर एक बात बार-बार समझाते रहते हैं क्योंकि ____ – _____ बच्चे आते रहते हैं। उनको आगे की _____ कौन पढ़ाये। तो बाप नये-नये को देख फिर _____ प्वाइंट्स ही रिपीट करते हैं।
° _नये_, _नये_, _पढ़ाई_, _पुरानी_

6. इस समय ही बाप आकर _____ की बातें सुनाते हैं। सतयुग में तो है ही _____ । यह इस समय तुमको ही समझाया जाता है। गीता में भी शुरू में फिर पिछाड़ी में यह बात आती है – ______ । पढ़ाया जाता है स्टेट्स पाने के लिए। तुम _____ बनने के लिए अब पुरूषार्थ करते हो।
° _ज्ञान_, _प्रालब्ध_, _मनमनाभव_, _राजा_

7. बड़े-बड़े तीर्थ बनाते हैं। वास्तव में *सबका तीर्थ यह भारत* ही है, कैसे?
° यहां बेहद का *बाप आते* हैं। बाप ने भारत में ही आकर *सर्व की सद्गति* की है। (बाप कहते हैं मुझे लिबरेटर, गाइड कहते हो ना। हम तुमको इस पुरानी दुनिया, दु:ख की दुनिया से लिबरेट कर शान्तिधाम, सुखधाम में ले जाते हैं। बच्चे जानते हैं बाबा हमें शान्तिधाम, सुखधाम ले जायेंगे। बाकी सब शान्तिधाम जायेंगे। दु:ख से बाप आकर लिबरेट करते हैं।)

8. यह बाप चला जायेगा तो इनका क्रियाकर्म, सेरीमनी आदि कुछ भी नहीं करना होता। क्योंकि उनको ____ ही नहीं।
° _शरीर_

9. ज्ञान कोई वहाँ सतयुग में साथ नहीं चलता। वहाँ बाप को *याद करने की दरकार ही नहीं* रहती। क्यों?
° जीवनमुक्ति में हैं। वहाँ याद करना होता है क्या? *दु:ख* की *फरियाद* वहाँ होती ही *नहीं*!

10. इस समय तुम बाप के खिदमतगार बच्चे बने हो। भारत की खास सच्ची सेवा करते हो, परन्तु गुप्त। तुम से बहुत पूछते, तुम *ब्रह्माकुमार-कुमारियों का उद्देश्य* वा शुद्ध भावना कौनसी है?
° तुम्हारा उद्देश्य है – कल्प 5 हज़ार वर्ष पहले की तरह *फिर से श्रीमत पर विश्व में सुख और शान्ति का राज्य स्थापन करना* । (तुम्हारी शुद्ध भावना है कि श्रीमत पर हम सारे विश्व की सद्गति करेंगे। तुम नशे से कहते हो हम सबको सद्गति देने वाले हैं। तुम्हें बाप से पीस प्राइज़ मिलती है। नर्कवासी से स्वर्गवासी बनना ही प्राइज़ लेना है।)

11. एकदम तीखे में तीखा नर्क है फिर बाप आकर तीखा _____ बनाते हैं। इस समय है 100 प्रतिशत _____ , फिर 100 प्रतिशत सुख-शान्ति होगी। आत्मा जाकर अपने ___ विश्राम पायेगी। समझाने में बड़ा सहज है। बाप कहते हैं मैं आता ही तब हूँ जब नई दुनिया की _____ कर पुरानी का _____ करना होता है। इतना कार्य सिर्फ एक तो नहीं करेंगे। _____ बहुत चाहिए।
° _स्वर्ग_, _दु:ख_, _घर_, _स्थापना_, _विनाश_, _खिदमतगार_

12. अभी तुम बच्चे बाबा की _____ से राज्य स्थापन करते हो। ____ -गुण धारण करते हैं इसलिए तुम्हारा ही गायन पूजन है। अभी तुम पुजारी हो फिर पूज्य बनते हो। बाप तो है ही निराकार, वह सदैव ____ है।कहते हैं – अब _____ याद करो। दूसरे कोई ______ को याद नहीं करना है।
° _श्रीमत_, _दैवी_, _पूज्य_, _मामेकम्_, _देहधारी_

13. *अब जज करो*, भक्तिमार्ग में राइट सुना है या हम राइट बताते हैं। बाबा ने यह आज किस बात के लिए कहा?
° बाप ने तुमको *हम सो का अर्थ* भी समझाया है। वह तो कह देते शिवोहम्, आत्मा सो परमात्मा। अब बाप ने करेक्ट कर बताया है। (हम सो का अर्थ बहुत लम्बा-चौड़ा है। हम सो ब्राह्मण, देवता, क्षत्रिय। हम आत्मा चक्र में ऐसे आती हैं। विराट रूप का चित्र भी है।)

14. *विराट रूप* का चित्र भी है, परन्तु उसमें कौन-सी भूल है?
° *चोटी ब्राह्मण और बाप को दिखाया नहीं* है। (देवतायें कहाँ से आये? पैदा कहाँ से हुए? कलियुग में तो है शूद्र वर्ण। सतयुग में फट से देवता वर्ण कैसे हुआ? बीच में ब्राह्मण चाहिए। कुछ भी समझते नहीं।)

15. संन्यासी कहते हैं हम ____ योगी, तत्व योगी हैं। ब्रह्म तो ____ है, जहाँ आत्मायें रहती हैं। कितनी भारी भूल कर दी है। बाप आकर सब ___ दूर कर देते हैं।
° _ब्रह्म_, _तत्व_, _भ्रम_

16. भक्ति मार्ग में कहते भी हैं हे प्रभू तेरी गति मत न्यारी है। ____ तो कोई कर न सके। _____ तो अनेकानेक की मिलती हैं। यहाँ की मत कितनी _____ कर देती है। सारे विश्व को _____ कर देती है।
° _गति_, _मतें_, _कमाल_, _चेंज_

17. *दिव्य दृष्टि की चाबी* हमको दे दो तो हम कोई को साक्षात्कार करा दें। शिवबाबा का उत्तर?
° नहीं, *यह चाबी किसको मिल नहीं सकती*। (उनके एवज में तुमको फिर विश्व की बादशाही देता हूँ। मैं नहीं लेता हूँ। मेरा ही पार्ट है साक्षात्कार कराने का। साक्षात्कार होने से कितना खुश हो जाते हैं।)

18. *साक्षात्कार* होने से कितना खुश हो जाते हैं। मिलता कुछ भी नहीं। _(सही / गलत)_
° *सही* (ऐसे नहीं कि साक्षात्कार से कोई *निरोगी* बन जाते हैं या *धन* मिल जाता है। नहीं, मीरा को साक्षात्कार हुआ परन्तु *मुक्ति* को थोड़ेही पाया। मनुष्य समझते हैं वह रहती ही वैकुण्ठ में थी। परन्तु *वैकुण्ठ* कृष्णपुरी है कहाँ। यह सब हैं साक्षात्कार।)

19. इनको भी पहले-पहले ____ का साक्षात्कार हुआ तो बहुत खुश हो गया। वह भी जब देखा कि मैं महाराजा बनता हूँ। _____ भी देखा फिर राजाई का भी देखा तब ______ बैठा ओहो! मैं तो विश्व का मालिक बनता हूँ। बाबा की _____ हो गई। बस बाबा यह सब आप ले लो, हमको तो विश्व की बादशाही चाहिए। तुम भी यह _____ करने आये हो ना।
° _विष्णु_, _विनाश_, _निश्चय_, _प्रवेशता_, _सौदा_