*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 14-11-2020*
1. स्वमान की ___ पर सदा सेट रहना है तो दृढ़ संकल्प की ____ अच्छी तरह से बांध लो।
° _सीट_, _बेल्ट_
2. जैसे दीपावली पर विशेष *सफाई और कमाई* का ध्यान रखते हैं। ऐसे……… क्या?
° आप भी सब प्रकार की सफाई और कमाई का लक्ष्य रख *सन्तुष्ट आत्मा* बनो। सन्तुष्टता द्वारा ही *सर्व दिव्य गुणों का आह्वान* कर सकेंगे। फिर अवगुणों की आहुति स्वत: हो जायेगी। अन्दर जो कमजोरियाँ, कमियां, निर्बलता, कोमलता रही हुई है, उन्हें समाप्त कर अब *नया खाता* शुरू करो और *नये संस्कारों के नये वस्त्र* धारण कर सच्ची दीपावली मनाओ।
3. *तुमको तो खुशी है* – किस बात की?
° हम *बाप के बने* हैं, उनसे *वर्सा पाते* हैं।
4. तुम पूछ सकते हो जो लक्ष्मी का त्योहार आप मनाते हो, यह कब _____ पर बैठी? तख्त पर बैठने का ही _____ मनाते हैं, उनका जन्म नहीं मनाते। मनुष्य पैसा मांगेंगे, अल्पकाल सुख। कहाँ तो ____ सुख भी होगा ना। ____ का तो उन्हों को पता ही नहीं है। यहाँ स्वर्ग की ____ में कोई खड़ा हो नहीं सकता। नई दुनिया ____ को कहते हैं, उसको हेविन, पैराडाइज़ कहा जाता है।
° _तख्त_, _कारोनेशन_, _स्थाई_, _स्वर्ग_, _भेंट_, _बैकुण्ठ_
5. रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप समझा रहे हैं। पहले-पहले तो बच्चों को समझाते हैं कि अपने को ____ निश्चय करो। पहले ____ है, पीछे शरीर है। जहाँ-तहाँ प्रदर्शनी अथवा म्युज़ियम में, क्लास में पहले-पहले यह सावधानी देनी है कि अपने को _____ समझ बाप को याद करो। बच्चे जब बैठते हैं, सब ____ -अभिमानी होकर बैठो। तुम जानते हो बेहद का बाप बेहद का ज्ञान समझा रहे हैं हम ____ को। आत्मा है ही ____ । एक सितारा है। उनका और कोई नाम रख नहीं सकते।
° _आत्मा_, _आत्मा_, _आत्मा_, _देही_, _आत्माओं_, _बिन्दी_
6. (दीपमाला) बाप ने समझाया है – ज्ञान का तीसरा नेत्र खुलना चाहिए तो घर-घर में ____ हो। तुम अपनी ज्योति जगाने बिल्कुल ____ में बैठते हो। बच्चे जानते हैं ____ -धर्म में रहने से पाप कट जाते हैं। जन्म-जन्मान्तर के पाप इस ____ की यात्रा से ही कटते हैं। आत्मा की ज्योत बुझ गई है ना। शक्ति का ____ सारा खत्म हो गया है। वह फिर भर जायेगा क्योंकि आत्मा ____ बन जाती है।
° _सोझरा_, _शान्त_, _स्व_, _याद_, _पेट्रोल_, _पवित्र_
7. “मीठे बच्चे – तुम सच्चे-सच्चे ____ -ऋषि हो, तुम्हारा कर्तव्य है ____ करना, तपस्या से ही ____ लायक बनेंगे”
° _राज_, _तपस्या_, _पूजन_
8. अभी तुम बच्चे जानते हो – विश्व का ____ कौन है? खुद कहते हैं मैं सभी आत्माओं का ____ हूँ। तुम सब मेरे बच्चे हो। अब शिवबाबा तो है निराकार, _____ सोल। उस आत्मा पर नाम है ____ । वह है ____ आत्मा, परमात्मा, उनका नाम है शिव। शिवबाबा यहाँ रहता नहीं है, वह तो ____ -धाम से आते हैं।
° _बाप_, _बाप_, _सुप्रीम_, _शिव_, _परम_, _परम_
9. शिव अवतरण भी है। अभी बाप ने तुमको समझाया है – सभी आत्मायें यहाँ आती हैं पार्ट बजाने। बाप का भी ____ है। बाप तो बहुत बड़ा काम यहाँ करते हैं। _____ मानते हैं तो उनकी तो हॉलीडे और स्टैम्प आदि होनी चाहिए। सब देशों में ____ डे होनी चाहिए क्योंकि बाप तो सबका ____ दाता है ना। उनका जन्म दिन और चले जाने का दिन, डेट आदि का भी पता नहीं पड़ सकता क्योंकि यह तो न्यारा है ना इसलिए सिर्फ शिव- ____ कह देते हैं। यह भी तुम बच्चे जानते हो – आधाकल्प है बेहद का दिन, आधाकल्प है बेहद की रात। रात पूरी होकर फिर दिन होता है। उसके _बीच_ में बाप आते हैं। यह तो एक्यूरेट टाइम है।
° _पार्ट_, _अवतार_, _हॉली_, _सद्गति_, _रात्रि_
10. बाबा *सुख ही देते* , दुःख नहीं। यह समझाने लिए बाबा ने कौन-कौन सी पॉइंट्स सुनाई? (2)
° *बाप सदैव बच्चों के सुखदाई* ही होते हैं। (मिलकियत देकर जायेंगे, वारिस बनायें। तो बाप कभी बच्चों को दु:ख थोड़ेही देंगे। इम्पॉसिबुल है। तुम मात-पिता कहकर कितनी रड़ियाँ मारते रहते हैं। तो बच्चों का रूहानी बाप सबको *सुख का ही रास्ता बताते* हैं।)
° *सुख देने वाला* एक ही बाप है। *दु :ख हर्ता* सुख कर्ता एक रूहानी बाप है। (यह विनाश भी सुख के लिए ही है। नहीं तो मुक्ति-जीवनमुक्ति कैसे पायेंगे? परन्तु यह भी कोई समझेंगे थोड़ेही।)
11. अभी तुम मीठे-मीठे बच्चों को सिर्फ बाप को ही ____ करना है। चलते-फिरते काम करते बाप को याद करने में ही ____ है। फिर माया चमाट लगा देगी। तुम हो ब्राह्मण, _____ मिसल कीड़े को आपसमान ब्राह्मण बनाना है। तुम हो सच्चे-सच्चे ब्राह्मण। ब्राह्मणों को ही फिर देवता बनना है इसलिए तुम्हारा यह है _____ बनने के लिए संगमयुग। यहाँ तुम आते ही हो पुरूषोत्तम बनने के लिए। पहले ब्राह्मण जरूर बनना पड़े। ब्राह्मणों की ____ है ना।
° _याद_, _कल्याण_, _भ्रमरी_, _पुरूषोत्तम_, _चोटी_
12. अब फिर तुमको ज्ञान चिता पर चढ़ाता हूँ। आत्मा को ही ____ बनाना होता है। अब पतित-पावन बाप आकर पावन बनने की ____ बताते हैं। तुमको तो राखी उनको बांधनी है जो पवित्रता की ____ करें। प्रतिज्ञा जरूर करनी पड़े। भारत को फिर से _____ बनाने लिए हम यह प्रतिज्ञा करते हैं। तुम भी पावन बनो, औरों को भी पावन बनाओ। और किसकी ताकत नहीं जो ऐसे कह सके। तुम जानते हो यह अन्तिम जन्म पावन बनने से हम पावन दुनिया के ____ बनते हैं। तुम्हारा धंधा ही यह है। ऐसे मनुष्य कोई होते ही नहीं। तुमको जाकर यह _____ उठवाना है। बाप कहते हैं काम महाशत्रु है, इस पर विजय पानी है। इस पर जीत पाने से ही तुम जगतजीत बनेंगे। इन लक्ष्मी-नारायण ने जरूर आगे जन्म में पुरुषार्थ किया है तब तो ऐसा बने हैं ना। अभी तुम बता सकते हो – किस कर्म से इनको यह पद मिला, इसमें मूंझने की तो कोई बात ही नहीं।
° _पवित्र_, _युक्ति_, _प्रतिज्ञा_, _पावन_, _मालिक_, _कसम_
13. अब यह तो बच्चे समझते हैं, कल्प-कल्प _____ जो होती आई है वह होनी ही है। हम ब्राह्मण नम्बरवार _____ करते रहते हैं। जो-जो सेकेण्ड गुजरता है उसको ____ ही कहा जाता है। सारी दुनिया का चक्र फिरता रहता है। यह 5 हजार वर्ष का चक्र, ____ मिसल फिरता रहता है। ____ – ___ होती रहती है।
° _स्थापना_, _पुरूषार्थ_, _ड्रामा_, _जूँ_, _टिक_, _टिक_
14. इस ड्रामा में पार्टधारी भी अविनाशी हैं। तुम बच्चों को मालूम पड़ा है कि हम आत्मा ___ कैसे बजाती हैं। तुम जानते हो अभी हम फिर से अपने नये घर जाने वाले हैं। चक्र फिर हूबहू ____ होगा ना। यह बेहद की _फिल्म_ है। बेहद का ____ है। बेहद बाप के बने हैं तो कापारी _____ होनी चाहिए। हम बाप से स्वर्ग का वर्सा जरूर लेंगे। बाप कहते हैं ____ से जो चाहिए सो लो। यह बाबा (बूढ़ा) इतना ऊंच बन सकते हैं तो तुम क्यों नहीं बन सकते हो।
° _पार्ट_, _रिपीट_, _स्लाइड_, _खुशी_, _पुरूषार्थ_,
15. बाबा ने समझाया है – किसको भी प्रदर्शनी आदि दिखाना है तो पहले-पहले यह एम ऑब्जेक्ट समझानी है। सेकण्ड में ____ कैसे मिलती है! रावणराज्य में ही _____ शुरू होती है, सतयुग में तो नाम-निशान नहीं होता। ज्ञान और भक्ति दोनों अलग-अलग हैं ना। अभी तुमको इस पुरानी दुनिया से ______ है। तुम जानते हो यह पुरानी दुनिया अब खत्म होनी है। परन्तु तुम किसको समझाओ तो कोटो में कोई ही समझकर पद पाते हैं। अभी तुम बाप से अपना _____ लेने आये हो – 21 जन्मों के लिए।
° _जीवनमुक्ति_, _भक्ति_, _वैराग्य_, _ऊंच_, _वर्सा_
16. लौकिक *ब्राह्मणों को* क्या समझा सकते?
° तुम्हारा यह कुल *किसने स्थापन* किया? तुम्हारा *बड़ा कौन* है? फिर तुम जब समझायेंगे तो *बहुत खुश होंगे*। (ब्राह्मणों को मान देते हैं क्योंकि वह शास्त्र आदि सुनाते हैं। पहले राखी बांधने के लिए भी ब्राह्मण जाते थे।)
17. कौन-सा पुरूषार्थ *सदाकाल के लिए पूजने लायक* बना देता है?
° *आत्मा की ज्योति जगाने* वा तमोप्रधान आत्मा को *सतोप्रधान बनाने* का पुरूषार्थ करो तो सदाकाल के लिए पूजन लायक बन जायेंगे। (जो अभी ग़फलत करते हैं वह बहुत रोते हैं। अगर पुरूषार्थ करके पास नहीं हुए, धर्मराज की सज़ायें खाई तो सज़ा खाने वाले पूजे नहीं जायेंगे। सज़ा खाने वाले का मुँह ऊंचा नहीं हो सकता।)
