The joy of Shrimat! | Sakar Murli Churnings 30-09-2019

The joy of Shrimat! | Sakar Murli Churnings 30-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

याद से पाप-कट हो पावन-सतोप्रधान बनते, श्रीमत पर चलने वालो को यह राय बहुत अच्छी लगेंगी (जो आज्ञाकारी-फरमानवरदार है, बाबा को फॉलो करते)… उनका दीप जागृत हो (21 जन्मों के लिए ज्ञान-घृत भर जाता, सुधर जाते, क्रोध भूत से परे), और ऊँच पद पाते सुखधाम में, यह कल्प-कल्पान्तर की बाजी़ है … बाबा पर कुर्बान हो, सब की सेवा करते रहते

चिन्तन

जबकि हमें सर्वश्रेष्ठ बाबा की श्रीमत मिल गई है, तो सदा माया-व्यर्थ को डोंट केयर कर… सदा बाबा की दी हुई श्रेष्ठ दिनचर्या और मनचर्या (ज्ञान-योग युक्त जीवन) को फॉलो कर, समस्याओं को बाबा पर अर्पण कर, सहज शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर, सर्व-प्राप्ति-सम्पन्न बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति! 


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Illuminating Baba’s name! | (74th) Avyakt Murli Revision 01-11-70

Illuminating Baba’s name! | (74th) Avyakt Murli Revision 01-11-70

1. बाबा कितनी दूर से हमारे लिए आते, फिर भी कहते बच्चों का स्नेह ज्यादा है… जबकि दुनिया में सबकुछ पुराना है (सम्बन्ध-सम्पत्ति-पदार्थ), तो अभी सिर्फ अपने-बाप के गुप्त रूप को प्रत्यक्ष करना है… इसके लिए अन्तर शब्द याद रखना:

  • अन्तर (compare) करना बाबा से
  • अन्तर रहना (अन्तर्मुखी)

2. फरिश्ते अर्थात सदा धरती के आकर्षण से ऊपर, जबकि बाबा के साथ जाना है, समान बनना है… यह है भी सहज, जबकि सर्व समर्पण हो गए

सार

जबकि बाबा हमारे लिए दूर से आये, तो सदा सर्व समर्पण के भाव द्बारा अन्तर्मुखी बन फरिश्ता स्वरुप का अभ्यास करते बाबा को साथ रखे… सदा बाबा से compare करते, बाप-समान बन उनको प्रत्यक्ष करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The most fortunate birth! | Avyakt Murli Churnings 29-09-2019

The most fortunate birth! | Avyakt Murli Churnings 29-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. भोलेनाथ भोला-भण्डारी बाबा हम स्नेही-सहयोगी-सहजयोगी… बालक सो सर्व ख़ज़ानों के मालिक (अभी सो भविष्य 21 जन्मों के लिए) को देख हर्षित-बढ़ाईयां देते… हम भी सदा सम्पन्न, मिलन-मौज में, हर श्वास में खुशी का साज अनुभव करते रहते

2. बाबा के अवतरित होते ही, ब्रह्मा-बाप सो हम ब्रह्माणों का जन्म हो जाता… इसलिए समान-combined बनना हमारे लिए सहज है (बाप-दादा ओर ब्रह्मा-कुमार, नाम भी combined है)

3. स्वयं भगवान-भाग्यविधाता के साथ हमारा भाग्य है (वेला सर्वश्रेष्ठ है, स्वयं भगवान की अवतरण-वेला… और राशि भी मिलती, ब्रह्मा-ब्राह्मण!)

4. सदा अपने को अवतार (विश्व परिवर्तन-कल्याण के निमित्त), दिव्य-जीवनधारी अनुभव करना है… हम डबल-हीरो है (हीरो-पार्टधारी, और हीरे-तुल्य जीवन वाले, जिनकी ओर सब देख रहे)

5. बाबा हमें दो विशेष सौगात देते… हम बाबा के नूरे रत्न, सदा बाबा के नैनों के स्नेह में समाए हुए बिन्दु है… और सदा बाबा के हाथ (आशीर्वाद का) और साथ (सहयोग) है

दादियों से

बाबा के स्नेह की भुजाओं में समाए रहने से, मायाजीत रहते… बाबा सदा:

  • बच्चों को अपने विश्व-घर की रौनक के रूप में देखते
  • हमारी गुण-विशेषताओं की माला सदा जपते रहते (बाबा भी नौधा-भक्त है, और फल हमें देते!)
  • याद का respond देते
  • हमारी विशेषताओं की खुशबू लेते

हम आदि रत्नों की बहुत वैल्यू है… हम सबके लिए विघ्न-विनाशक है

सम्मेलन वालों से

हम बाबा के घर में आए हुए बच्चें-अधिकारी, भाग्यवान-महान है (मेहमान नहीं)… अभी सिर्फ दृढ़ता से बाबा की याद द्बारा साथ रहना है, तो हर कार्य सहज-सफल रहेगा… अनुभव प्राप्त करते-बांटते रहेंगे, तो और बढ़ता रहेगा

सार (चिन्तन)

जबकि हमारा जन्म ही सर्वश्रेष्ठ, बाबा के साथ है… तो सदा स्नेही-सहयोगी-सहजयोगी (बाबा से combined) सर्व खजा़ने-खुशी-मौज से सम्पन्न बन… अपने को हीरा-अवतार समझ, सब के विघ्न को समाप्त करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Spiritual Significance of Diwali | (73rd) Avyakt Murli Revision 29-10-70

Spiritual Significance of Diwali | (73rd) Avyakt Murli Revision 29-10-70

1. दीपमाला अर्थात दिपों की माला… दीप वह अच्छे लगते, जो अटल-अखण्ड होते, अखुट घृत के कारण

2. सफ़ाई-कमाई के आंतरिक लक्ष्य में सन्तुष्ट होने लिए, दिव्यगुणों का आह्वान करना है

3. फिर नए वस्त्र अर्थात नए संस्कार धारण करने है (हर बात में बाबा, और करके हो छोड़ेंगे)… पुराने-पन का चौपड़ा समाप्त

4. फिर ताजपोशी अर्थात अपनी नई-दुनिया के नज़ारे-स्वरूप स्पष्ट दिखाई देंगे (दिव्य-नेत्र से)… अभी-अभी यह बनें… तब ही बाबा के स्नेही, श्रेष्ठ, सम्पूर्णता के समीप कहेंगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा ज्ञान-घृत से भरपूर बन, अपनी आत्मिक ज्योत को उज्ज्वल-जागृत रख… दिव्यगुणों के नए संस्कार का आह्वान कर, नई दुनिया के नजारे देखते-दिखाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The most divine decoration! | Sakar Murli Churnings 28-09-2019

The most divine decoration! | Sakar Murli Churnings 28-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस बेहद की रात-माया से हमें छुड़ाकर… संगम पर ब्रह्मा-तन द्बारा स्वयं जादूगर-साजन-माशूक बाबा ने हमें बहुत सहज याद की यात्रा (मन्मनाभव, जो विचारों से होता, इसलिए चलते-फिरते काम-काज करते भी कर सकते) सिखाया है… जिससे हम साफ-सुन्दर बन लक्ष्मी-नारायण समान श्रृंगारे जाते (दिव्यगुण-स्वभाव भी आ जाते, paradise-अमरपुरी के मालिक बनते)

2. हम परचिन्तन, और बातों में श्रृंगार बुहारते, टाइम वेस्ट नहीं करते)… साथ में ज्ञान का चिन्तन भी करते रहना है… कैसे हम आत्माएं पार्टधारी भाई-भाई है, अब वापिस जाना है, फिर नई दुनिया में आएंगे… अभी हमारी कितनी कमाई हो रही, हम पद्मापद्म भाग्यशाली है 

चिन्तन

जबकि हमारा जन्म-जन्मांतर का सर्वश्रेष्ठ श्रृंगार हो रहा… तो सदा पास्ट-व्यर्थ से परे रह, बाबा के दिव्य ज्ञान-राजयोग का अभ्यास कर… सर्वश्रेष्ठ शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर स्थिति का अनुभव कर, सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Being the Master! | (72nd) Avyakt Murli Revision 23-10-70

Being the Master! | (72nd) Avyakt Murli Revision 23-10-70

1. रूहानी ड्रिल अर्थात रूह को जिस स्थिति में स्थित कराना चाहे, करा सकते… हम ही अपने ड्रिल-मास्टर है, ठीक न करने से हम अपने अधिकारों से डिसमिस हो जाते… हम तो सर्वशक्तिमान के बच्चे वारिस है, व्यक्त-अव्यक्त पालना लिए हुए, कच्चे नहीं बच्चें है… अब बीती सो बीती

2. महारथी अर्थात सारथी (देह का) और साथी… वायदे प्रमाण हर कर्म में बाबा को साथी रखने से, बाबा-मिलन में मग्न रहने से, शक्ति से भरपूर रहते, माया आ नहीं सकती… गफलत से ही गलतियां होती

3. रूह के बदले रूप को देखना अर्थात मुर्दों से प्रीत रखना, अर्थात मुर्दा-घाट में भविष्य निश्चिन्त करना, हर संकल्प का परिणाम होता… दुबारा गलतियां की 100 गुणा सजा से बचने लिए, बाबा को सदा सामने-साथ रखना है, हर संकल्प-कर्म उनसे verify कर, फॉलो करना (औरों को नहीं देखना, बाबा के गुण-कर्तव्य ही हमारा निशाना है, हम मर्यादा-पुरुषोत्तम है)… तो सब को परख सकेंगे, प्रभावित नही होंगे

4. हमारा रंग-रूप-रौनक बदला है… सदा एकरस रूप बनाना है, उलझन के बदले उज्ज्वलप्रतीज्ञा को सदा काल कर, पुराने को परिवर्तन करना है, जैसे पिछले जन्म की बात हो

5. तख्तनशीन बनने लिए समीप सहना है, तब समान बनेंगे… नयनों में मुक्ति-जीवनमुक्ति (त्रिमूर्ति), मस्तक से ज्योति-बिन्दु बाबा दिखे, हर कर्मेंद्रीय सेवा करे, यही serviceable का सबूत है… सुबह से हर संकल्प-बोल-कर्म-चलन-स्वप्न रेगुलर, श्रीमत प्रमाण

सार

तो चलिए आज सारा दिन…. सदा बाबा को एकरस सामने-समीप रख, हर संकल्प श्रीमत प्रमाण करते … सदा सारथी बन, बाबा से सर्व शक्तियों का अधिकार लेते, हर कर्मेन्द्रिय से सेवा करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The wonderful salvation army! | Sakar Murli Churnings 27-09-2019

The wonderful salvation army! | Sakar Murli Churnings 27-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस संगम के ईश्वरीय संसार में बाबा हम रूहानी मिलिट्री को कहते… अटेन्शन प्लीज, अर्थात एक प्राणेश्वर-मोस्ट Beloved-सतगुरु-शिवबाबा की याद में हो?… क्योंकि तब ही पावन-सतोप्रधान-विकर्माजीत-बन्धनमुक्त बनेंगे

2. हम तो सबको विकारों-पाप-दुःखधाम से लिबरेट करने का रास्ता दिखाने वाले लाइट-हाउस है, एक आँख में मुक्ति दूसरी में जीवनमुक्ति… इसके लिए पहले खुद अच्छे से पढ़कर, कांटे से फूल बनना है, तब ही गार्डन ऑफ अल्लाह-paradise के मालिक बन-बना सकेंगे

चिन्तन

जबकि बाबा ने हमें इतने महान विश्व परिवर्तन-उद्धार के कार्य के निमित्त बनाया है… तो सदा स्वयं को छोटी व्यर्थ बातों से परे रख, ज्ञान-योग द्बारा सदा अपनी ऊँची-बेहद की विश्व-कल्याणकारी स्थिति में स्थित रह, सबको शुभ भावना से सशक्त-श्रेष्ठ बनाते-बचाते, सतयुग की स्थापना करते रहें… ओम् शान्ति!


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Being Master Knowledgeful! | (71st) Avyakt Murli Revision 22-10-70

Being Master Knowledgeful! | (71st) Avyakt Murli Revision 22-10-70

1. जब बाप-समान मास्टर नॉलेजफुल बनेंगे, तब फूल-फ्लोलेस कहेंगे, नहीं तो फेल

2. बाबा हमें देख रहे, लाइट-माईट-राईट (यथार्थ और अधिकारी)… अभी तक आवाज फैला है, अब आत्माओं का आह्वान कर बाबा के समीप लाना है… इसके लिए खुद आवाज से परे जाकर अपनी सम्पूर्णता का आह्वान करना है (आवागमन में नहीं जाना, आहुति देनी है)… नॉलेज के साथ नॉलेजफुल पर आकर्षित कराना

3. शक्ति-शूरवीर अर्थात कोई भी आसुरी व्यक्ति-वाइब्रेशन-वायुमण्डल-समस्या आकर्षित न करेकारण देने से कारागार में चले जाते, अब तो प्रत्यक्ष कार्य दिखाना है… अभी तो बाबा ने सुना, स्नेह-रहम-रियासत की, फिर तुरन्त एक का सौगुणा-दण्ड मिलेगा

4. अब मास्टर रचयिता के नशे द्बारा रचना के भिन्न-भिन्न आकर्षण से परे जाना है, तब कहेंगे फूल, बचपन-बेपरवाही-आलस्य-अलबेलापन से परे, शक्ति-रूप शस्त्रधारी-रुप सदा जागती ज्योत… भक्त-आसुरी दोनों सामने आएंगे, उन्हें परखना, अब रियासत के बदले रूहानियत का समय है

5. समय की पहली सिटी बज गई है, अब ईश्वरीय मर्यादाओं में पक्के रहना है… सम्पूर्णता को समीप लाना है, समस्याओं का सामना करना है, अंश भी समाप्त… नाजुक समय का सामना करने लिए नाजुक-पन छोड़ना है… फिर गुप्त प्रत्यक्ष हो जाएँगा, सूरत-सीरत में

6. आत्मा को सदा हर्षित रखने से माया आकर्षित नहीं करेंगी… आदि-रत्नों पर आदि-देव का विशेष स्नेह है, इस सर्वशक्तिमान के स्नेह को स्मृति में साथ रखने से बचे रहेंगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… मास्टर नॉलेजफुल मास्टर रचयिता बन, लाइट-माईट शक्ति-सम्पन्न बन, मर्यादाओं में पक्के रूहानीयत से सम्पूर्णता का आह्वान करते… समस्याओं से परे रह, सब की आगे बढ़ाते, बाबा को प्रत्यक्ष करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Experiencing divine characters! | Sakar Murli Churnings 26-09-2019

Experiencing divine characters! | Sakar Murli Churnings 26-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. हमारे बुलावे पर, स्वयं बेहद का बाप परमधाम-घर से आकर ब्रह्मा-तन द्बारा (भारत-आबू में)… हमें सहज राजयोग सिखाते (अर्थात घर-गृहस्थ में रहते, चलते-फिरते भी अपने को आत्मा समझ पतित-पावन सर्वशक्तिमान बाबा को याद करना), जिससे पाप-कट हो पावन-सतोप्रधान बन वापिस घर जाते… साथ में दिव्यगुण-सम्पन्न मीठे-उत्तम-पवित्र कैरेक्टर्स भी बनते, जबकि हम नई-पावन-जीवनमुक्त दुनिया स्वर्ग का मालिक बन रहे

2. माया आए तो भी हमारी बाप से प्रीत-बुद्धि है, हम कल्प-कल्प के विजयी रत्न है… जबकि इस स्कूल में हमारी पद्मों की कमाई हो रही, हम देवता बन रहे, तो सुस्ती-उबासी आँख-बंद आदि से बचना है

चिन्तन

जबकि यही समय है दिव्य कैरेक्टर्स बनाने का… तो सदा अपने दिव्य एम-object को सामने रख, व्यर्थ बातों से अन्तर्मुखी बन, सदा ज्ञान-योग के भिन्न-भिन्न श्रेष्ठ स्मृति-अभ्यास द्बारा ऊँची सदा-खुश स्थिति का अनुभव करते रहे… तो स्वतः हमारी हर चलन दिव्यगुण-सम्पन्न श्रेष्ठ बन… हम सबको श्रेष्ठ उदाहरण द्बारा आप-समान बनाते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!


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A divine drishti! | (70th) Avyakt Murli Revision 06-08-70 (2nd)

A divine drishti! | (70th) Avyakt Murli Revision 06-08-70 (2nd)

1. बाप-समान दृष्टि-वृत्ति-संकल्प-वाणी धारण करनो है, अव्यक्त स्थिति में रहकर व्यक्त में आना है… जितना समीप, उतना समान… ऎसी दिव्य-आत्मिक-अलौकिक वृत्ति-दृष्टि बनानी है, कि सृष्टि बदल पावन बन जाए… हमारी यथार्थ दृष्टि (देही देखने की) से सबको साक्षात्कार कराना है (अपने स्वरूप-घर-राजधानी का)

2. हम विशेष आत्माएं है, इसी ईश्वरीय नशे में रहना है, तो नयनों से दिखेगा… ऎसा कोरा-कागज़ बनना है, कि उसमें स्पष्ट-श्रेष्ठ लिखत हो सके, स्पष्टता अर्थात जो बात जैसी है उसी रूप में धारण करना… समान-अल्लाह अर्थात आधार-मूर्त (जो कर्म हम करेंगे, हम देख सब करेंगे), उद्घार-मूर्त (स्व-सर्व का उद्धार)

3. टीका अर्थात:

  • जो बातें सुनाई, उसमें टिक जाना
  • injection अर्थात तन्दुरूस्ती, शक्तिशाली
  • सुहाग-भाग्य की निशानी
  • प्रतीज्ञा (सदा हर बात में पास विद आनर, संकल्पों में भी उलझेंगे नहीं, हिम्मत-वान)

4. सहयोगी बनने से स्नेह मिलता रहेगा… कोमल के साथ कमाल करना, ईश्वरीय चरित्रों पर सब को आकर्षित करना

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बाप-समान अव्यक्त-स्थिति वा आत्मिक-दृष्टि धारण कर, बाबा के समीप-स्पष्ट-श्रेष्ठ रह, शक्तिशाली-भाग्यवान बन, आधार-मूर्त उद्धार-मूर्त की स्मृति द्बारा सबको स्नेह-सहयोग देते, ईश्वरीय चरित्रों का अनुभव कराते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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