Benefits of remembering Baba! | Sakar Murli Churnings 25-09-2019

Benefits of remembering Baba! | Sakar Murli Churnings 25-09-2019

गीत: तुम्हारी याद बाबा एक…

1. नई-दुनिया स्थापन करने वाला विदेही बाप, संगम पर ब्रह्मा तन द्बारा हमें पढ़ाकर, राजयोग सीखाते (याद की यात्रा, मन्मनाभव)… जिसमें ही safety-खुशी है, कर्मेन्द्रियां शीतल होती, मायाजीत बनते, पावन-सतोप्रधान मीठे-सुखदाई characters बनते, कोई नाराज नहीं होता, याद का जौहर-बल भरता… Battery चार्ज हो, ऊंच पद बनता

2. साथ में बाबा से निश्चयबुद्धि-सच्चा रहना है, सबकी सेवा करते रहना है… विस्मृत होना माना पुरानी दुनिया-कलियुग में चले जाना, अब तो माया के pomp का अन्त है… बाकी बहुत थोड़ा समय है, फिर हम दैवी दुनिया स्वर्ग-हेवन-paradise-अमरलोक-शिवालय के मालिक होंगे, देवता-रूप में

चिन्तन

जबकि याद में ही सर्व-प्राप्तियां समाई हुई है… तो सदा ज्ञान-मनन की शक्ति से समर्थ बन, सहज एकाग्रता का अनुभव करते, गहराई से आत्मिक स्थिति वा बाबा की याद में पवित्रता-शान्ति-प्रेम-सुख-आनंद के शक्तिशाली अनुभवों से सम्पन्न बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

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Going beyond the bondage of body-consciousness | (69th) Avyakt Murli Revision 06-08-70

Going beyond the bondage of body-consciousness | (69th) Avyakt Murli Revision 06-08-70

1. बन्धन-मुक्त अर्थात अव्यक्त ने व्यक्त का आधार लिया है, जब चाहे प्रयोग करे-छोड़े, बाप-समान… जितना बन्धन-मुक्त, उतना योगयुक्त, उतना जीवनमुक्त… जितना न्यारा, उतना बाप-सर्व का प्यारा

2. सर्विस में सफलता अर्थात सब को बनाना स्नेही (बाबा से), सहयोगी (बाबा के कर्तव्य में), शक्तिशाली (पुरुषार्थ में)…. इसके लिए साक्षी बनना है, तो स्वतः साक्षात्-रूप (ज्ञान-योग का प्रत्यक्ष प्रमाण) व साक्षात्कार-मूर्त (बाप का साक्षात्कार कराने वाले) बनेंगे… वृत्ति-दृष्टि-वाणी-कर्म में पहले आप लाने से बाप-समान बना सकते, विश्व महाराजन् बन सकते… regard देने से हमारा रिकॉर्ड ठीक रहता, सर्व के स्नेही बनते… निर्माण बनने से प्रत्यक्ष-षप्रमाण दे, विश्व का निर्माण कर सकते

3. सम्मेलन अर्थात सब को बाप से मिलाना… जितना खुद प्राप्ति-स्वरूप, उतना सब को प्राप्ति करा सकेंगे… कब के बदले अब, ऎसा परिवर्तित हो, नजदीक प्रजा बनाने लिए नाज़ुकपना-अलबेलापन छोड़ राजयुक्त बनना है… शरीर छोड़ने के अभ्यास से रूहानियत कायम रहती… जितना संकल्प-बोल-कर्म सब में रेगुलर, उतना रूलर बनेंगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… अभी से सदा रूहानीयत का अभ्यास कर बाबा से जुड़े रहने में रेगुलर रह, प्राप्ति-स्वरुप जीवनमुक्त साक्षात्-रूप बन… सब को regard देते, निर्माणता से सेवा करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Creating beautiful sanskars! | Sakar Murli Churnings 24-09-2019

Creating beautiful sanskars! | Sakar Murli Churnings 24-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस पुरुषोत्तम संगमयुग पर ब्रह्मा-तन द्बारा… हमारा सच्चा सतगुरु शिवबाबा, हम धरती के लक्की सितारों को जन्मसिद्ध-अधिकार के रूप में, सच्चा बनाकर सचखण्ड का मालिक बनाते (जीवनमुक्ति-सद्गति, स्वर्ग-हेवन, भक्ति का फल)… पहले जाएंगे घर (निराकारी-दुनिया, शान्तिधाम… लिब्रेशन, मुक्ति)

2. मुख्य बात, हमें ज्ञान-गुण-पवित्रता के संस्कार ले जाने है, इसलिए योगबल से पुराने संस्कारों को परिवर्तन करना है… यह मिलन-मेला है, जिसमें बाबा से पक्का हथियाला बाँधना है

चिन्तन

जबकि हमें संकल्प-संस्कारों का सम्पूर्ण ज्ञान मिल गया है… तो सदा ज्ञान-योग के पक्के फाउंडेशन द्बारा हर दिन कोई-न-कोई श्रेष्ठ संस्कार बनाते रहे, तो पुराने संस्कार स्वतः समाप्त हो जाएंगे… मुख्य बात, अपनी दिनचर्या के संस्कार को श्रीमत प्रमाण बनाते, श्रेष्ठ शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर जीवन का अनुभव करते-कराते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Finishing the old sanskars! | (68th) Avyakt Murli Revision 30-07-70

Finishing the old sanskars! | (68th) Avyakt Murli Revision 30-07-70

1. महारथी अर्थात संकल्प-कर्म समान महान, जिसके लिए चाहिए controlling पावर… पुराने संस्कार-कमझोरी समाप्त, इसके बदले कमाल के संकल्प… हम तो विश्व के लिए आधार-उद्धार-उदाहरण मूर्त है, सब को बाबा पर फिदा कर, वर्सा दिलाने वाले

2. हम है सर्व के सहयोगी (और स्नेही), सफलता-मूर्त… इसके लिए पुराने संस्कार को मिटाना है, बस मैं और बाबा तीसरा कुछ नहीं, यही ऊँगली देनी है… कोई न कोई स्लोगन स्वरूप में लाना है

3. माला का मणका अर्थात एकमत-एकता-एकरस स्थिति… इसके लिए भिन्नता को समाना है… विशेषताएं देखने से विशेष आत्मा बन जाएँगे, कमी देखने से ग्रहण-ग्रहचारी लगती… ऎसा सच्चा सोना बनना है, जिससे दूसरों पर प्रभाव पड़़े

सार

तो चलिए आज सारा दिन… मैं और बाबा इसी एकरस स्थिति में स्थित, controlling पावर से सम्पन्न महारथी सच्चा-सोना बन… हर कार्य में सफलता पाते, सबकी विशेषताएं देख एकमत बन, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Becoming full of happiness in a second! | Sakar Murli Churnings 23-09-2019

Becoming full of happiness in a second! | Sakar Murli Churnings 23-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. नॉलेजफुल बाप-टीचर-सतगुरू ने हमें ज्ञान (कैसे आत्मा ऊपर से आकर 84 का all-round पार्ट बजाती, पहले स्वर्ग-सुखधाम का वर्सा था) और योग (बाबा की याद, मन्मनाभव के मंत्र) द्बारा सेकण्ड में जीवनयुक्ति-सुख-खुशी से भरपूर कर दिया है… जितनी हमारी धारणा है (ज्ञान-गुण-पवित्रता की)

2. तो औरों को भी त्रिमूर्ति-गोले के बड़े चित्र द्बारा (मुख्य स्थानों पर) समझाना है, बाप से सतयुगी जीवनमुक्ति का वर्सा आपका जन्मसिद्ध अधिकार है (एसी अच्छी लिखत के साथ), बैज़ पर भी समझा सकते

3. बाकी थोड़ा समय है, फिर तो चक्र फिर जाएगा… तो विनाशी चीजों के पीछे नहीं दौड़ना है, समय-सहित सबकुछ सफल करना है 

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा ने हमें ज्ञान-मन की सम्पूर्ण समझ दी है… तो सदा दिनचर्या को accurate रख, श्रेष्ठ शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर संकल्पों को अनुभव कर, सदा खुश-शान्ति-सर्व प्राप्ति सम्पन्न रह… सबको आप-समान बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति! 


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Becoming an idol of attraction! | (67th) Avyakt Murli Revision 27-07-70

Becoming an idol of attraction! | (67th) Avyakt Murli Revision 27-07-70

1. बाबा हमारे मुखड़े पर अलौकिक-आकारी आकर्षण-हर्ष मूर्त देख रहे… तो हमें भी अपने को देख, इन्हें सम्पूर्ण-समान रूप से धारण करने है, तब प्रत्यक्षता होगी

2. अव्यक्त-मूर्त बनने लिए आठों शक्तियां धारण करनी है (विस्तार को आर, सामना, समेट, सहन, परख, निर्णय, सामना, स्नेह-सहयोग देना)… इसके लिए रूहानियत-रुहाब चाहिए, रोब-नीचपना समाप्त, भिन्न-भिन्न रूपों के बदले एक अव्यक्त-अलौकिक रूप

3. विशेष आत्मा बनने लिए आठों शक्तियां लानी है, सब से संस्कार मिलाकर चलना है… इसके लिए ज्ञान स्मृति में रखना है, स्वयं को सफलता का सितारा समझने से सामना शक्ति बढ़ (विघ्न समाप्त हो) सफलता मिलती रहेंगी… समीप रत्नों में बाप-समान गुण-कर्त्तव्य-मुखडा़ दिखेगा, स्वतः सेवा होंगी

4. जितना मन-वचन-कर्म-सम्बन्ध-सम्पर्क से उदार-चित्त रहेंगे, उतना उद्धार-मूर्त बनेंगे, आकर्षण-मूर्त, सब सहयोग देंगे… सबकी विशेषताएं देखने से, वे अपने में आ जाएंगे… स्नेह देने से सहयोग लेना है

5. योग-अग्नि अविनाशी रखने लिए, मन्सा वाणी कर्म में सम्भलना है… अभी-अभी आकारी, अभी साकारी की ड्रिल, यह भी सर्विस का साधन है… सम्पूर्ण अर्थात सभी शक्तियां समान, मास्टर सर्वशक्तिमान

सार

तो चलिए आज सारा दिन… ज्ञान को स्मृति में रख, स्वयं को विशेष आत्मा समझ बाबा से योग-अग्नि द्बारा, सर्व शक्तियों से सम्पन्न अलौकिक-आकारी-हर्षित बन… सब के उद्धार-मूर्त बन, सब की विशेषताएं देखते सेवा करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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स्वराज्य अधिकारी राजाओं की दरबार | The gathering of self-sovereign emperors! | Avyakt Murli Churnings 22-09-2019

स्वराज्य अधिकारी राजाओं की दरबार | The gathering of self-sovereign emperors! | Avyakt Murli Churnings 22-09-2019

गीत: मस्तक सिंहासन पर…

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. बाबा हम स्वराज्य-अधिकारी योगी-योग्य, स्वमान-निर्माण वाली आत्माओं की दरबार देख रहे… जो है:

  • दिव्य तिलक-धारी
  • पवित्रता के ताज-धारी… जिसमें सर्व विशेषताओं की मणियां चमक रही
  • सर्व गुणों की माला पहने
  • श्रेष्ठ स्थिति के सिंहासन पर
  • 10 दास-दासीयां सहित (5 तत्व वा 5 विकार, जो दुश्मन से परिवर्तन हो सेवाधारी बन गए)

2. सतयुग में 5 तत्व भी सेवा करेंगे:

  • सूर्य की अग्नि… भोजन बनाने वाली भण्डारी बनेंगी
  • वायु… पंखे का काम करेंगा… और जिससे वृक्ष भी भिन्न-भिन्न साज़ों से मनोरंजन करेंगा
  • आकाश… बेहद का highway बन जाएंगा (पुष्पक-विमान के लिए)… कोई एक्सीडेंट नहीं होंगे
  • जल… इत्र-फुलेल का काम करेंगा… जड़ी-बूटियाँ से सुगंधित
  • धरती… श्रेष्ठ फल देंगी (फलों में ही मिठास-नमकीन होगा… जैसे टमाटर में खटाश)
  • श्रेष्ठ सीन-scenery होंगी

3. तो अभी 5 विकारों को परिवर्तन करना है:

  • काम को शुभ-कामना में परिवर्तन
  • क्रोध अग्नि को योग-अग्नि
  • लोभ को शुभ-चाहना… मैं भी बाप-समान संकल्प-बोल-कर्म से निःस्वार्थ बेहद सेवाधारी बनूँ
  • मोह बाबा से… फिर हमारे संकल्प-बोल में बाबा ही दिखेगा
  • अभिमान को देही-अभिमानी

तो अभी दृढ़ता से विकारों को अंतिम विदाई देनी है… अंश को भी योग-अग्नि में जलाकर भस्म करना… फिर राख को भी ज्ञान-सागर में डुबो देना

कुमारीयों से

श्रेष्ठ कुमारी अर्थात विश्व-कल्याणकारी, सम्बंध-नोकरी के बंधन से न्यारी, बाप की प्यारी… खुद judge कर फैसला करना है, खुद के उमंग से सहज आगे बढ़ते, समस्याएं भी छोटी लगती… अपने भाग्य को बढ़ाकर, सेवाधारी का भी भाग्य प्राप्त करना है

सेवाधारी अर्थात!

1. सेवाधारी अर्थात सदा याद-सेवा-जीवन-युग की मोजों में रहने वाले… जिससे:

  • तन-मन सदा स्वस्थ रहता
  • मन सदा खुशी में नाचता रहता
  • हमें देख सब मूंज से मौज में आ जाएंगे

2. सेवाधारी अर्थात सदा सफलता-स्वरुप… सफलता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, इसी निश्चय-नशे से विजय प्राप्त करते रहना है

और पॉइंट

निरंतर बाबा के स्नेह में समाए रहना है… संगमयुग में वियोग हो नहीं सकता, सिर्फ मिलन की रेखा बदल सकती (व्यक्त-अव्यक्त)

सार (चिन्तन)

तो चलिए आज सारा दिन… विकारों को परिवर्तन कर, सदा स्वराज्य अधिकारी (ताज-तख्त-तिलक-माला धारी) बन, बाबा के स्नेह में समाए रह … सदा मोजों की जीवन अनुभव करते, विश्व कल्याणकारी बनते, सतयुग का सर्वश्रेष्ठ भाग्य प्राप्त करते-कराते रहे… ओम् शान्ति!


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Stabilising in point form in actions! | (66th) Avyakt Murli Revision 24-07-70

Stabilising in point form in actions! | (66th) Avyakt Murli Revision 24-07-70

1. अभी समय है चलते-फिरते बिन्दु रूप रहने की.. इसके लिए:

  • बीच में संकल्प स्टाप कर बिन्दु रूप का अभ्यास करना है
  • अव्यक्त फ़रिश्ता स्वरूप रहने से बिन्दी रूप बनना सहज है
  • संकल्पों (समय-शक्ति) की बचत करनी है… संकल्प के तूफान (वा evil स्पिरिट-सस्कार) से बचने लिए भेट करनी है, यह यथार्थ बाप-समान है, नोट या डॉट

2. शक्तियों की भुजाएं है मददगार की निशानी… पाण्डव अर्थात लम्बी बुद्धि, सबको आगे बढ़ाने वाले

सार

तो चलिए आज सारा दिन… चलते फिरते बिन्दु रूप में स्थित होने लिए, बीच-बीच में संकल्पों को स्टॉप कर, उन्हें चेक-चेंज कर बिन्दु रूप (वा फरिश्ता स्वरुप) का अनुभव करते रहे… बाबा में मददगार बनते, सबकी सेवा करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The power of truth! | Sakar Murli Churnings 21-09-2019

The power of truth! | Sakar Murli Churnings 21-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. हम परमधाम से आई हुई रूह-चैतन्य पार्टधारी को, बीज़रूप-बाबा अब सत्य-ज्ञान सुनाकर नई-दैवी दुनिया-सुखधाम का मालिक बनाते, पवित्र-सतोप्रधान-देवता रूप में… फिर वृद्धि होती रहेंगी (धर्म-शास्त्र-मन्दिर, आदि), हमारी बुद्धि में सारा ज्ञान नाच रहा, जो कमाई 21 जन्म चलेंगी, हम सचखण्ड के मालिक बन जाते

2. मुख्य बात… घर-गृहस्थ में रहते भी पवित्र बन, अपने को आत्मा समझ, बाबा को बहुत प्यार से याद करते रहना है… बुद्धि से कहीं अटकना नहीं

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि सत्य-बाबा हमारे साथ है, तो सदा अपने सत्य आत्मिक-स्वरूप में टिक, बाबा को यथार्थ रीति याद करते रहे… तो हम स्वतः शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर, सर्व प्राप्ति सम्पन्न रह, समस्याओं से परे रहते-करते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!


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The degree of complete angelic stage! | (65th) Avyakt Murli Revision 11-07-70

The degree of complete angelic stage! | (65th) Avyakt Murli Revision 11-07-70

1. संगमयुग की डिग्री है सम्पूर्ण अव्यक्त फ़रिश्ता, जिसके क्वालिफिकेशन है… जितना नॉलेजफुल-फैथफुल (स्वयं-बाप-परिवार में), उतना सक्सेसफुल-सर्विसएबुल… संकल्प-बोल-कर्म में पावरफुल… हर गुण के पीछे फूल… तब ही वैल्यूएबुल कहेंगे, औरों को भी क्वालिफाइड बना सकते… डिग्री या तो डिक्री (धर्मराज की)

2. अब नाजु़क समय में नाज़ नहीं करना, मास्टर ब्रह्मा बने, श्रृंगार किया, अब विकराल-संहारी रूप धारण करना है, सेकण्ड में विकर्म-विकारी को भस्म कर दे… शक्तियों अर्थात स्नेह, रूहानियत और शक्ति (वज्र, घुँघरू की झंकार)… ऎसे शूरवीर बन मैदान में आने से ही बाबा को प्रत्यक्ष-प्रख्यात कर सकेंगे… अपनी कमझोरी को विदाई देने से ही सृष्टि के कल्याणकारी बन सकेंगे

3. विशेष आत्माओं की सेवा करनी है (तो व्यर्थ संकल्प-कर्म-समय नहीं जाएंगा, शक्ति बचेंगी)… इसलिए पुराना चौपड़ा समाप्त कर सेंट-पर्सेंट बनना है (तो सेंट भी झुकेंगे)… अभी पुरुषार्थ अभी प्रालब्ध, इसमे फूल बनना है कमाल करना है, नहीं तो कमान मिलेगा

4. दिल्ली-दर्पण है बाबा की दिल, यहां के आवाज़ से ही समाप्ति की समीपता समझ सकते… ऎसे बेहद जिम्मेदारी वाले बेहद सेवाधारी है (बेहद सोच-स्नेह-सम्बन्ध-स्थान), इन्हें ताज मिलता

5. हम मधुबन के सेफ की मस्तक-मणि है…योगयुक्त निश्चय-बुद्धि संकल्प द्बारा आगे बढ़ने से सफलता मिलती, विघ्न समाप्त होते

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा अपनें को सम्पूर्ण अव्यक्त फ़रिश्ता समझ नॉलेजफुल-पावरफुल-विजयी बन… स्नेह-रूहानियत-शक्ति से बेहद सेवा करते, सफलता पाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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