The beauty of Mansa Seva! | Avyakt Murli Churnings 15-09-2019

The beauty of Mansa Seva! | Avyakt Murli Churnings 15-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. आज सर्वशक्तिमान बाबा अपनी रूहानी शक्ति-सेना की 3 शक्तियां देख रहे, मन्सा-वाचा-कर्मणा… तीनों सम्पन्न हो तब कहेंगे विजयी, विश्व सेवाधारी, विश्व राज्य-अधिकारी

2. मन्सा सेवा:

  • से शुभ भावना-कामना द्बारा दूर बैठी आत्मा को भी प्राप्ति करा कर अचल-हिम्मतवान, समर्थ भाव-स्वभाव वाला, बाबा के समीप, भाग्यवान बना सकते… इसके लिए खुद की मन्सा को श्रेष्ठ-निःस्वार्थ-परोपकारी-प्रेरणादायी बनाना है
  • वायरलेस सेट है… जिससे दूर से भी बाबा का बनने का उमंग-उत्साह, महान शक्ति, अनमोल प्रेरणा दे सकते
  • अन्तर्मुखी-यान है… जिससे बिना ख़र्चे डबल-लाइट बन, चरित्रवान बनने की प्रेरणा दे सकते
  • उड़न तश्तरी समान लाइट दिखेंगे… सबकी नज़र धरती के सितारों पर आएंगी

कुमारों प्रति

1. अब ब्रह्माकुमार से शक्तिशाली-विजयी-समीप कुमार बनना है… माया के भी नॉलेजफुल (दूर से ही उसको भगा सके, नहीं तो समय जाता, कमजोरी के संस्कार बनते)… ऎसे नॉलेजफुल ही पावरफुल है (शस्त्र-समान)… सदा प्राप्तियों के अनुभव में, सदा खुश

2. हम स्वतंत्र-हल्के है, तो पुरुषार्थ में तीव्र-गति होने चाहिए… कल्याणकारी अर्थात संकल्प-स्वप्न में भी कल्याण भाव… संकल्प-कर्म समान

अन्य पॉइंट्स

1. सम्मेलन अर्थात सम-मिलन, सब को आप-समान निश्चयबुद्धि बनाना है… इसलिए सदा दृष्टि-सम्बन्ध-वायुमणडल में मास्टर दाता की स्मृति हो… सबको कुछ न कुछ देना है, बाबा पर रिगार्ड बिठाना है

2. वैसे तो संगम का हर दिन शुभ-श्रेष्ठ उमंग-उत्साह सम्पन्न है… फिर भी आज को विशेष वरदान है, हर संकल्प (बोल-कर्म) मंगलम्-सफल हो, अर्थात शुभ-चिन्तन शुभ-भावना खुशी से भरपूर हो… हर पल बाबा का यादप्यार लेना अर्थात, हर संकल्प-बोल में उसके प्यार में लहराते रहना

सार (चिन्तन)

तो चलिए आज सारा दिन… सदा तीव्र-पुरूषार्थ द्बारा शक्तिशाली-विजयी सर्व प्राप्ति सम्पन्न, सदा खुश बन… कल्याणकारी, मास्टर दाता बन, सब को मन्सा द्बारा शक्तिशाली-समीप-भाग्यवान बनाते, श्रेष्ठ प्रेरणाएं देते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Becoming world maker! | (61st) Avyakt Murli Revision 25-06-70

Becoming world maker! | (61st) Avyakt Murli Revision 25-06-70

1.

  • जितना स्वयं के चेकर बनते
  • उतना मेकर बनते (लॉ मेकर, न्यू वर्ल्ड मेकर, पीस मेकर… सेवा में भी, हमारे सामने सब realize करेंगे)
  • तब रूलर बनेंगे

2. माया-समय के अधीन होने के बजाय… अधिकारी-रूलर समझने से उदार-चित्त बन उदाहरण स्वरूपउद्धार करेंगे

3. माया पहले सूक्ष्म आलस्य-सुस्ती के रूप में आती (फिर विकराल रूप लेती), जिसके चेकर बनना है… सूक्ष्म रूप-संकल्प जैसे कि:

  • श्रीमत से verify न कराना
  • 6-8 घंटा अव्यक्त स्थिति नहीं रह सकती
  • कम सीट है, हम नहीं बन पाएंगे
  • तन-मन की सुस्ती
  • फिर कर लेंगे
  • प्रवृत्ति में रहते, वैराग भूल जाना
  • हमें ईश्वरीय सम्बन्ध (साकार से बुद्धि द्बारा सहयोग लेने का सम्बन्ध) से दूर करते

तीव्र पुरूषार्थी बन इस सुस्ती को हाई जम्प देना है, तो बहुत बातों से बच जाएंगे… प्रतीज्ञा से परिपक्वता आती… अब नहीं तो कब नहीं

4. हम पुराने स्नेही है… बाबा हमें इशारों की अव्यक्त भाषा तरफ ले जाते, जिससे परख-शक्ति दूरांदेशी-बुद्धि बनती, शक्तिशाली बनते… जितना बुद्धि-समय-सीट का प्रोग्राम फिक्स, तो प्रोग्रेस-कार्य भी फिक्स… सम्पूर्ण बन सबकी सम्पूर्ण बनाने का सबूत देना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा अपने को अधिकारी-सम्पूर्ण स्थिति में स्थित कर, बाबा की स्नेह भरी यादों में रह… स्वयं के चेकर बन, माया-सुस्ती से परे रह, विश्व के मेकर-रूलर बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Making God our child! | Sakar Murli Churnings 14-09-2019

Making God our child! | Sakar Murli Churnings 14-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. निराकार:

  • बाप… (जो बेहद का वर्सा देते, सुख-धन-आयुश्य सम्पन्न)
  • टीचर… (बेहद की सृष्टि-चक्र की पढ़ाई पढ़ाते)
  • सतगुरु… (साथ ले जाते)

की एकान्त में मामेकम्-याद से पाप-कट हो पवित्र-सतोप्रधान बनते

2. य़ह राजयोग, बाबा अभी कल्याणकारी-संगमयुग पर ही सीखाते, नई दुनिया-स्वर्ग-सुखधाम के लिए… हम सारे ड्रामा को जानते, तो अच्छे से समझकर औरों को भी समझाना है, बाबा को अपना वारिस बनाना है, पवित्र जरूर बनना है

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा को अपने बच्चे के रूप में अनुभव करते, हर पल बुद्धि से उसके ही बारे में सोचते-देखते, सम्पूर्ण बलिहार हो… उसके ज्ञान-गुण-शक्तियों से भरपूर-सम्पन्न बन, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Becoming a light-house! | (60th) Avyakt Murli Revision 19-06-70

Becoming a light-house! | (60th) Avyakt Murli Revision 19-06-70

1. हम भी त्रिमूर्ति है, जिनसे 3 प्रकार की लाइट निकालती… नयन से (बल्ब-समान ज्योति, हीरा), मस्तक से (सर्चलाइट जैसे), और माथे पर (लाइट का क्राउन)… तब ही फ़रिश्ता कहेंगे

2. सब हमारे पास हल्के हो जाएँगे… हमारा स्थान (मधुबन) लाइट का स्थान बन जाएँगा, ऎसा लाइट-हाउस बनना है… बाबा-मिलन अर्थात उनके गुण-कर्तव्य से मिलन 

3. कार्य करने पहले सोचना, बाबा ने निमित्त बनाया… और अन्त में भी सबकुछ समर्पण-स्वाहा कर देना, तो कोई संकल्प नहीं चलेगा… किसी से सहयोग मिला हो, तो उसे एक्स्ट्रा सहयोग देना है, शुभ भावना-वृत्ति द्बारा, जिसका प्रभाव सदाकाल रहता, उन्हें भी अनुभव होता

4. बाबा का हमसे अविनाशी स्नेह है, तो हमें भी ऎसा अटूट स्नेह उनसे जोड़ना है, फिर यही स्नेह 21 जन्म चलेगा… यही बैंक है, 21 जन्म चलने वाली, तो संकल्प भी व्यर्थ न जाए, हमारी ऎसी ऊँची मंजिल है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा अपने को हल्का लाइट-हाउस फ़रिश्ता समझ, बाबा से अविनाशी स्नेह जोड़… सबको शुभ भावना से सम्पन्न करतेे, निमित्त भाव से सेवा करतेे, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The hot halwa! | Sakar Murli Churnings 13-09-2019

The hot halwa! | Sakar Murli Churnings 13-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. हम आत्मा शान्त-स्वरूप परमधाम-निवासी हैं, यहां शरीर धारण कर पार्ट बजाते, 84 जन्मों का… अभी हम पवित्र बन पढाई पढ़, अपने को (चमकीली) आत्मा समझ (पतित-पावन सर्वशक्तिमान बाप-टीचर-सतगुरू) बाबा की याद द्बारा पुण्य-आत्मा देवता बन रहे, नई दुनिया स्वर्ग-हेवन-paradise सुखधाम में

2. आबू सबसे महान तीर्थ है, क्योंकि भगवान् यहा आकर सारे विश्व की सद्गति करते… हम सारे ड्रामा को जानते हैं

3. याद की मेहनत अवश्य करनी है, भल माया तूफान लाएं हमें विजयी बनना हैआत्मा भाई-भाई की दृष्टि पक्की करनी है

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा हमें रोज़ गरम-गरम हलवा मुरली खिलाते… तो सदा इस ज्ञान-भोजन को रूहानी गाई बन उगारते (चिन्तन-योगाभ्यास द्बारा), उसकी शक्ति से श्रेष्ठ तन्दुरस्ती (शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर, सर्व-प्राप्ति-सम्पन्न स्थिति) का अनुभव करते-कराते, सतयुग बनाए चले… ओम् शान्ति!


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The Art of keeping a Time Table! | (59th) Avyakt Murli Revision 18-06-70

The Art of keeping a Time Table! | (59th) Avyakt Murli Revision 18-06-70

1. जैसे जब चाहे तब बोलते, वैसे एक सेकण्ड में व्यक्त से अव्यक्त हो सके, इस ड्रिल से स्थिति की मजबूती की वृद्धि होती… अव्यक्त स्थिति बढ़ाने लिए, सार में लाने की शक्ति बढ़ानी है

2. हम बड़े है, इसलिए आत्मा की उन्नति (अव्यक्त स्थिति) के लिए भी मन का टाईम-टेबल बनाना है… फिर चेक करना सफल हुए, क्यों नहीं, फिर चेंज लाना है, और बिंदी लगाना… प्रतीज्ञा, फिर प्लान, प्रैक्टिकल, फिर चेकिंग… समय से पहले सम्पूर्ण बनना (वा निरन्तर अतिन्द्रीय सुख की अनुभूति करना) है

3. sensible अर्थात सेन्स के साथ इसेन्स भी… अपनी नेचर (संस्कार) cure करने लिए फास्ट रखना है (टाईम टेबल और नुकसानकारक बातों का), पुराने संस्कारों को समेटना-समाना है.. भिन्न-भिन्न स्लोगन सामने रखने है:

  • कर के ही छोड़ेंगे, ऎसे निश्चयबुद्धि ही विजयी बनते, फिर समस्याएं भी खेल लगती
  • अब नहीं तो कब नहीं, अलबेलापन समाप्त
  • जो कर्म में करूँगा, मुझे देख सब करेंगे
  • सफलता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है
  • मिटेंगे, लेकिन हटेंगे नहीं

4. हम बड़े है, तो स्थिति-सेवा भी बड़ी चाहिए… 8 घंटे अव्यक्त स्थिति का चार्ट अवश्य चाहिए… जबकि हम बाबा के स्नेह-सम्पर्क में है, तो उन जैसे संस्कार भी होने चाहिए

5. फ़रिश्ता अर्थात अभी-अभी नीचे और अभी ऊपर, फर्श का कोई आकर्षण नहीं

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमारा लक्ष्य है सेकण्ड में व्यक्त से अव्यक्त होना, 8 घंटा याद करना… तो सदा अपना श्रेष्ठ मन का timetable रख, शक्तिशाली स्लोगन्स सामने रख, तेज़ उन्नति अनुभव करते, समय से पहले सम्पूर्ण बनतेे-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The key of spiritual knowledge! | Sakar Murli Churnings 12-09-2019

The key of spiritual knowledge! | Sakar Murli Churnings 12-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. परमात्मा (जो जन्म-मरण रहित, परमधाम में रहते, कलियुग-अन्त में दिव्य-अलौकिक रीति ब्रह्मा-तन में प्रवेश कर, ज्ञान देकर, सद्गति-स्वर्ग का मालिक लक्ष्मी-नारायण बनाते… हमारे पास उनका पूरा परिचय है)… वह हमारा बाप है, इसलिए हम उन्हें बाबा-बाबा कहते… साथ में वह हमारा टीचर (आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान सुनाते), सतगुरू, खुदा दोस्त (हमारे साथ खेलते) भी है

2. नम्बर-वन honest फूल बनने लिए… अपने को आत्मा समझ मामेकम् याद द्बारा खामियां (ईर्षा, आदि) निकाल सदा खुश रहना है, देह-दुनिया को भूले

3. मेरे को तेरे में परिवर्तन कर बेफिक्र, खुशी के अटल-अखण्ड खजाने से भरपूर रहना है… ख़ज़ानों को सेवा में लगाकर, जमा के खाते को बढ़ाते जाना है

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमें सर्वश्रेष्ठ ज्ञान की चाबी मिली है, तो सदा ज्ञान के स्मृति-चिन्तन में रह… सारे लॉक खोल, सदा-खुश सर्व-प्राप्ति-सम्पन्न बन… सब को भी सर्व खजा़नों से भरपूर करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The easy way of becoming world emperor! | (58th) Avyakt Murli Revision 11-06-70

The easy way of becoming world emperor! | (58th) Avyakt Murli Revision 11-06-70

1. विश्वपति (विश्व की सेवा करनेे वाले शूरवीर) बनने लिए चाहिए ताज (त्याग), तख्त (सेवा) और तिलक (तपस्या)… सेवा में मुख्य है मैं-पन का त्याग, सबकुछ बाबा, यही दृष्टि-वृत्ति चेहरे पर छलके

2. हमें बनना है सिम्पल और sample (तब सब आप-समान बनेंगे)… इसके दो ठप्पे लगाने है:

  • शिव शक्ति (संस्कार-सर्विस-सम्बन्ध में मिटेगे, पर हटेंगे नहीं)
  • ब्रह्माकुमारी (सम्पूर्ण स्नेही-सहयोगी-स्वाहा होने लिए सर्व शक्तियों को धारण करना है… तब ही कर्म-बन्धन समाप्त कर सकेंगे)

सार

तो चलिए आज सारा दिन… विश्वपति बनने लिए सदा अपनी श्रेष्ठ शिव-शक्ति वा ब्रह्माकुमारी की स्मृति में रह, simple-sample बन त्याग-tapasya द्बारा बाबा-बाबा करते, सेवा में लगे रह, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Winning the scholarship! | Sakar Murli Churnings 11-09-2019

Winning the scholarship! | Sakar Murli Churnings 11-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. ओम् शान्ति अर्थात मैं (छोटी-अविनाशी) आत्मा हूँ, यह मेरा शरीर है (एक शरीर छोड़ दूसरा लेती हूँ)… स्वयं निराकार बाप (जिनका पूरा परिचय हमारे पास है, वह पतित-पावन सर्वशक्तिमान शान्ति-प्रेम-सुख के सागर है, संगम पर आते, अपने को servant कहलाते), हमें राजयोग सिखाते, पवित्र-पावन-सतोप्रधान-पूज्य-पारसबुद्धि-देवता डबल-सिरताज लक्ष्मी-नारायण बनाने, स्वर्ग-paradise-सुखधाम में

2. तो हमें यह lottery-scholarship लेने लिए, सिर्फ एक बाबा की याद द्बारा दिव्यगुण-सम्पन्न बनना है, सबकी सेवा करनी है… सदा खुश रहने लिए:

  • ज्ञान बुद्धि में रखना है (बाबा हमें विश्व का मालिक बनाते)
  • बाबा को यथार्थ रीति याद करना है

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमें scholarship लेने का सर्वोत्तम चान्स मिला है, तो सदा श्रीमत को सिर-माथे रख, ज्ञान में फुल बन (ज्ञान-चिन्तन द्बारा) और गुण-शक्तियों में फुल बन (बाबा की याद द्बारा) सदा खुश दिव्यगुण-सम्पन्न बनतेे-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The mirror of Avyakt stage! | (57th) Avyakt Murli Revision 07-06-70

The mirror of Avyakt stage! | (57th) Avyakt Murli Revision 07-06-70

1. सम्पूर्णता के समीप अर्थात, अव्यक्त भाव द्बारा दूसरों के मन के भावों को भी तुरन्त परख सके… तो हम भी व्यर्थ से परे, एकरस रहेंगे… दर्पण को साफ-स्पष्ट करने लिए चाहिए सरलता-श्रेष्ठता-सहनशीलता… स्मृति-वाणी-कर्म-सम्बन्ध सब प्लेन, तब प्लान-प्रैक्टिकल एक होंगे, प्लेन (एरोप्लेन) समान सफलता मिलेंगी… सफलता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है

2. दिव्य-मूर्त (वा सम्पूर्णता के समीप) अर्थात सबको सम्मान देने वाले, तब ही विश्व सम्मान देगा… औरों के समीप अर्थात उनके संस्कारों के समीप, सदा हाँ जी (तो उनके संस्कार भी सरल हो जाएंगे)

3. हम संकल्प-बोल-कर्म द्बारा लाॅ-मेकर्स है… विधाता याद रहने से विधि-विधान दोनों ठीक रहते, सफलता सहज मिलती… साहस-शक्ति का पेपर भी क्रॉस करना है

4. बंधन होते हुए भी, अपने को ईश्वरीय सेवा के बंधन में बांधने के बल से, बंधन समाप्त होते… सम्पर्क में आने से औरों को भी बचा सकते, आप-समान बना सकते, ऎसी कमाल की सर्विस करनी है

5. व्यक्त भाव से परे, एक सेकण्ड की शक्तिशाली अव्यक्त स्थिति भी लम्बा समय चलती… जिसमें सर्व प्राप्तियां है, मेहनत कम, सफलता अधिक मिलती

6. अव्यक्त-मूर्त बाबा से जो अन्तर है, उसे अन्तर्मुखी हो मिटाना है, संस्कारों को समीप लाना अर्थात समीप बनना… बाप-समान विघ्नों से पार होने, स्नेह में डूब जाना है (अपने को मिटा देना, बाबा से मिलाना)… अपने गुप्त स्नेह-सफलता के संस्कार को प्रत्यक्ष में लाना है, फिर अपने अव्यक्त वा भविष्य रूप को सामने रखना है

7. स्नेह का रिटर्न सहयोग देना है, मास्टर सर्व समर्थ बन… बिन्दु रूप (ब्रेक) सहज करने, शुद्ध संकल्पों में रमण करना है (मोड़ने की शक्ति)… तो बिन्दु रूप सहज हो जाएँगा

सार

तो चलिए आज सारा दिन… अपनी शक्तिशाली अव्यक्त स्थिति के दर्पण को स्पष्ट रख, सदा बाबा के प्यार में डूबे रह… अपनी श्रेष्ठ लाॅ-मेकर्स की स्मृति द्बारा सबको सम्मान देते, सबके संस्कारों के समीप रहते, ईश्वरीय सेवा करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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