Benefit of keeping chart! | Sakar Murli Churnings 10-09-2019

Benefit of keeping chart! | Sakar Murli Churnings 10-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. संगम पर बाबा ने हमें अपना सत्य परिचय दिया है (उनका नाम-रूप है, वह हमारा बाप-टीचर है)… इसलिए अब हम बाप-वर्से की याद में बैठते हैं (जिससे ही विकर्म विनाश, कमाई होती, हम बाबा के समीप पहुँचते)… इसलिए चार्ट अवश्य रखना है (इसमें ही कल्याण है)

2. शिवबाबा की याद में ईश्वरीय सेवा जरूर करनी है, जिससे 21 जन्मों की कमाई जमा होती… हम सारे राज़ जानते हैं (ड्रामा 5000 वर्ष का है, कृष्ण, देवियाँ, आदि)

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि इस समय की पुरुषार्थ-स्थिति से ही सारे कल्प का भाग्य बनता, तो सदा चार्ट द्बारा अपनी याद की यात्रा को पक्का बनाते, सर्व प्राप्ति सम्पन्न दिव्यगुण-सम्पन्न बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Seeing our perfect form! | (56th) Avyakt Murli Revision 29-05-70

Seeing our perfect form! | (56th) Avyakt Murli Revision 29-05-70

1. जब सम्पूर्णता के समीप होंगे, तो हमारे आकारी (लाइट का फ़रिश्ता) और भविष्य देव-रूप दोनों स्पष्ट सामने दिखेंगे… ऎसे अनुभव होगा कि अभी-अभी पुराना वस्त्र उतारा, और अभी यह बनें… फिर औरों को भी अनुभव होगा

2. ऎसे देह-भान को छोड़, संकल्प को भी विल करने से, (विल पावर) शक्ति-समानता आती… बिल्कुल हल्का रहते, हम तो निमित्त है, बाबा की हर पल मदद मिलती

3. फर्स्ट बनने के लिए:

  • फास्ट (व्रत) रखना… एक बाबा दूसरा ना कोई, एक की ही स्मृति
  • फास्ट जाना… अर्थात तीव्र पुरूषार्थी

4. महारथी अर्थात माया पर सदा विजयी, उसे विदाई दे देना… इसके लिए knowledge के साथ शक्ति चाहिए, तब ही ज्ञान स्वरूप में आता, सफलता मिलती

5. तीव्र पुरूषार्थी अर्थात फरमानवरदार, एक संकल्प भी फरमान से विपरित नहीं… ज्ञान-स्नान की शक्ति से, माया (अछूत) पास भी न आए

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा अपने सम्पूर्ण आकारी और देव-रूप (और बाबा) को सामने रख, अपनी सम्पूर्णता की ओर तीव्रता से आगे बढ़ते… अपने संकल्पों को भी विल कर, हर पल बाबा के फरमान पर चलते, ज्ञान-योग की शक्ति से हल्के-मायाजीत बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The rain of spiritual knowledge! | Sakar Murli Churnings 09-09-2019

The rain of spiritual knowledge! | Sakar Murli Churnings 22-08-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. स्वयं भगवान्-बेहद के बाप ने हमें तुच्छ बुद्धि-विकारी-दुःखी से ब्राह्मण-चोटी बनाया है… अब जितना ज्ञान वर्षा-पढ़ाई को धारण कर, अपने को आत्मा समझ बाबा को याद कर, मर्यादाओं पर चलेंगे, उतना श्रेष्ठ पद बनेगा (माला का मणका, लक्ष्मी-नारायण समान देवता-पारस बुद्धि बनेंगे), नई दुनिया-स्वर्ग-सचखण्ड-सुखधाम में… बाकी थोड़े रोज है, सब बातों में कल्याण है

2. स्वदर्शन चक्रधारी बनने से अनेक व्यर्थ चक्र (देह-भान व्यक्ति-समस्या) से छूट, मायाजीत बन, ज्ञान-योग के पंख द्बारा उड़ती कला में आते… विदेही स्थिति से समस्याओं से सहज पार रहते

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हम पर रोज़ बाबा की ज्ञान-वर्षा हो रही, तो उन्हें सम्पूर्ण रीति अपने मे ग्रहण कर (चिन्तन वा उस पर योगाभ्यास द्बारा)… सदा रूहानी मोर ? बन अतिन्द्रीय सुख-आनंद में नाचते, सब को ज्ञान-दान कर आप-समान श्रेष्ठ बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The power of determination! | (55th) Avyakt Murli Revision 28-05-70

The power of determination! | (55th) Avyakt Murli Revision 28-05-70

1. अब फैसला करना है, फिर agreement-engagement होगी (सेवा), फिर समारोह (सफलता)… साहस रखा है, तो माया का सामना होगा, इसलिए हिम्मत-उत्साह द्बारा विघ्नों को हाई-जम्प देना है (इसलिए स्वयं-सम्बन्ध में हल्का रहना है)

2. काली बनना अर्थात किसी से प्रभावित नहीं, औरों को बाबा पर बलि चढ़ाने वाले, सब के विघ्न हल करने वाली… ऎसी मायाजीत-एकरस स्थिति बनाने लिए विनाश-स्थापना के नगाड़े याद रखने है

3. स्नेही-सहयोगी बनने से शक्तिशाली बनना है… कहां स्नेही, कहा शक्तिशाली बनना, इस परख द्बारा व्यर्थ से बचे रहना है… हम हारने वाले नहीं, लेकिन बाबा की गले का हार है, कोई पर संकल्प से भी अर्पण नहीं… तिलक अर्थात शिक्षाओं को स्मृति में रखना, धारण करना… सफलता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, जो संकल्प-मस्तक-नयन-चेहरे से दिखता… हम उम्मीदवार, कमाल करने वाले शोपीस है

4. प्रतिज्ञा के बीज को हिम्मत-संग का जल देने से फलीभूत होगा… खुद पर आलमाइटी गवर्नमेंट की सील लगानी है, सिर्फ वाया परमधाम-वैकुण्ठ जाएँगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हम बाबा के बन गए हैं (agreement), तो सदा अपने श्रेष्ठ टाइटल्स को स्मृति में रख, हिम्मत-उत्साह द्बारा शक्तिशाली मायाजीत स्थिति का अनुभव करते… सबके विघ्नों को हरते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The gift of divine eyes! | दिव्य नेत्र | Avyakt Murli Churnings 08-09-2019

The gift of divine eyes! | दिव्य नेत्र | Avyakt Murli Churnings 08-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

आज त्रिकालदर्शी बाप अपने त्रिनेत्री बच्चों का तीसरा नेत्र कितना स्पष्ट-शक्तिशाली है, वह देख रहे… बाबा ने 100% शक्तिशाली दिया है, हम यथाशक्ति प्रयोग करते… अब श्रीमत की दावा द्बारा फिर से 100% शक्तिशाली दिव्य-नेत्र बनाना है… यह दिव्य-नेत्र है:

  • दूरबीन… जिससे तीनों लोकों-कालों को स्पष्ट अनुभव कर सकते, अपना देवता-पूज्य-फ़रिश्ता स्वरूप सब
  • यंत्र… जिससे यथार्थ आत्मिक-स्वरूप और आत्मा के दिव्य गुण ही दिखते… यंत्र ठीक नहीं, तो ही काले अवगुण दिखते
  • टी.वी… जिससे हमारी पूरी 21 जन्मों की फिल्म, ताज-तख्त-तिलक, राज्य के नजा़रे देख सकते

सदा दिव्य-नेत्र से देखने (वा दिव्य-बुद्धि से सोचने) सेे complaint समाप्त, complete बन जाएँगे… अभी दिव्य प्राप्तियों से सम्पन्न-समर्थ बनना है

पार्टियों से

1. हम सर्व सम्बन्धों के स्नेह में समाए रहने वाली गोपिकाएं है, इसलिए सहजयोगी निरन्तर-योगी है, यही संगमयुग का अनुभव विशेष वरदान है… सम्बंध निभाते, उस शक्ति से निरन्तर लगन में रहना

2. ऊंची स्थिति में रहने से विघ्नों का प्रभाव नहीं पड़ता (जैसे स्पेस में धरती का आकर्षण नहीं)…स्नेह emerge कर मोहब्बत में रहने से मेहनत से छूट जाएँगे, शक्तिशाली रहेंगे

चुने हुए महावाक्य

1. शुभ चिन्तक बनने से सब स्वतः स्नेही-सहयोगी-समीप सम्बंध में आते, उन्हों भी सेवा का बल मिलता

2. अभी हमें माइट बन सबको माइक बनाना है (उनके अनुभव बाबा को प्रत्यक्ष करेंगे), औरों की भी एनर्जी ईश्वरीय कार्य में लगानी है… अब वारिस बनाने की सेवा करनी है, हम विश्व कल्याणकारी है, बाबा के हाथो में हाथ

3. बड़ी दिल से सेवा करनी-करानी है, संकुचित दिल नहीं रखना किसी के प्रति… बड़ी दिल से मिट्टी भी सोना, कमझोर से शक्तिशाली, असंभव भी सम्भव होता… सहयोगी भी धीरे-धीरे सहजयोगी बन जाएँगे

सार (चिन्तन)

तो चलिए आज सारा दिन… सदा दिव्य-बुद्धि से सोचते और दिव्य-नेत्र से देखते, सदा अपने श्रेष्ठ देवता-फ़रिश्ता स्वरूप अनुभव करते, बाबा के प्यार में डूबे रह… सदा श्रेष्ठ-ऊँची स्थिति का अनुभव करते, सबको सेवा में सहयोगी-सहजयोगी बनाते, सतयुग बनाए चले… ओम् शान्ति!


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Finishing the margin! | (54th) Avyakt Murli Revision 21-05-70

Finishing the margin! | (54th) Avyakt Murli Revision 21-05-70

1. बाबा हमारी मार्जिन (कितना आगे जाना बाकी है) और माइट (शक्ति) देख रहे

2. ज्ञान का बीज अविनाशी है, उसमें जितना बाबा के संग (पुरुषार्थ) का जल देते, उतना फल-स्वरूप बनते… पुरूषार्थ की भिन्नता मिटाने लिए चाहिए एकता, जिसके लिए:

  • एकनामी (एक का ही नाम लेने वाले)
  • इकॉनमी (संकल्प-समय-ज्ञान की)

तो मैं-पन बाबा-बाबा में समा जाएँगा, जो ही माया-विघ्न से बचने की ढाल है

3. स्पष्टता से आती सरलता… जो जितना सरल, उतना याद भी सरल होगी, औरों को भी सरल पुरूषार्थी बना देगा… यही यादगार दे जाना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जो भी मार्जिन बाकी है, उसे सम्पन्न करने ज्ञान से भरपूर बन बाबा के संग में रहते शक्तिशाली बन… सबके साथ सरलता-एकता से चलते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Giving Baba’s parichay! | Sakar Murli Churnings 07-09-2019

Giving Baba’s parichay | Sakar Murli Churnings 07-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. बेहद-बाप ब्रह्मा-तन में आकर हमें अपना परिचय दे, राजयोग सिखाया है, पावन बनाने … तो हमें भी अपने आत्मा-भाइयों को बाबा का परिचय जरूर देना है (कैसे वह निराकार बाप-टीचर-सतगुरु ज्ञान-सागर, कलियुग-अन्त में आकर सर्व की सद्गति करते, सतयुग स्थापन करले, देवता बनाते)… हम भी आत्मा अकाल-तख्तनशीन है (जिसमें 84 जन्मों का पार्ट नुन्धा है), अभी हम ब्राह्मण है, बाप से वर्सा ले रहे

2. बाबा धोबी बन हमें पावन बनाने आए है, फिर वहां शरीर भी पावन मिलेगा… जबकि बाबा हमें इतनी मिल्कियत देते, तो उन्हें सदा याद रखना है… कमल-फूल समान रहना है, फ़िर वहां कर्म अकर्म रहते

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा का परिचय देने लिए सदा याद रखे, बाबा का:

  • नाम है… शिव (जिसका अर्थ है बिन्दी, शान्ति, कल्याणकारी)
  • रूप… निराकर ज्योति-बिन्दु स्वरूप (यही रूप सभी धर्मों को स्वीकार है)
  • देश… ऊंच ते ऊंच परमधाम (इसलिए उसे उपर-वाला कहते)
  • गुण… ज्ञान, पवित्रता, शान्ति, प्रेम, सुख, आनंद, शक्तियों का सागर
  • कर्तव्य… ब्रह्मा तन में आकर, राजयोग सिखाकर, मनुष्य से देवता बनाकर, कलियुग को सतयुग बनाते
  • समय आने का… संगमयुग (उसके आने से ही चढ़ती कला होती, सतयुग आता… तो जरूर वह कलियुग-अन्त और सतयुग-आदि के संगम पर आएँगे)

तो सदा बाबा के याद से जो प्राप्तियों होती है (सेकण्ड में शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर हो जाते, जिस शान्ति-खुशी के लिए सारी दुनिया भाग रही है, ऎसा सहजयोग तो सिर्फ भगवान् ही सीखा सकते)… इन्हीं प्राप्तियों का अनुभव सुनाते हुए सबको बाबा का परिचय देते रहें, तो सभी भी बाबा से सहज जुड़ते, सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनतेे, सतयुग बनता रहेंगा… ओम् शान्ति!


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Getting married to God! | (53rd) Avyakt Murli Revision 14-05-70

Getting married to God! | (53rd) Avyakt Murli Revision 14-05-70

1. बाबा दर्पण लाए हैं, जिसमें अपने अर्पण-मय होने का मुखड़ा देख सकते… सम्पूर्ण अर्पण (समर्पण) अर्थात देह-भान (कर्मेंद्रीयां), स्वभाव-सम्बन्ध सब अर्पण, तब सम्पूर्ण कहेंगे… ऎसे सदा सुहागिन (बिंदु रूप) बनने से श्रेष्ठ भाग्य प्राप्त होता

2. पुरूषार्थ तेज़ करने लिए 4 बातें याद रखनी है:

  • उद्देश्य
  • बाबा का आदेश (जिससे सफलता मिलती)
  • बाबा का सन्देश (सेवा)
  • स्वदेश (अब घर जाना है)

3. हम लाॅ-मेकर्स है (जस्टिस), इसलिए हर संकल्प-कदम संभाल के उठाना है… क्योंकि वह जैसे कि लाॅ बन जाता, सब फोलो करते… ऎसी अपनी जिम्मेदारी समझने से, छोटी बातों से सहज परे रहते

4. संगम के तिलक-तख्तनशीन, सर्विस का ताज, और गुणों के गहने से हम सम्पन्न है (संगम पर ही बीजरूप बाबा द्बारा सभी दैवी रीति-रस्म के बीज पडते)… समर्पण-समारोह अर्थात मधुबन के मन्दिर में आत्मा-परमात्मा का लगन होना, लॉ-मेकर्स का (कोर्ट)

5. हम है उपकारी (भल कोई कितने भी अपकार करे), अधिकारी और निरहंकारी… तब ही ताज-तख्त कायम रहता

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा अपने को बाबा पर अर्पण, श्रेष्ठ भाग्यवान सुहागिन आत्मा समझ… सदा अपनी श्रेष्ठ लाॅ-मेकर की स्मृति द्बारा निरहंकारी बन सबकी सेवा करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The wonderful Confluence Age! | Sakar Murli Churnings 06-09-2019

The wonderful Confluence Age! | Sakar Murli Churnings 06-09-2019

मुरली सदा क्लास में पूरी सुननी चाहिए… अतः इस लेख का सिर्फ यह उद्देश्य है, कि मुरली सहज याद रहे, ताकि सारा दिन उसका अभ्यास-धारण करना सहज हो जाए… लेकिन मुरली पहले क्लास में ही सुननी है

सार

1. इस संगमयुग (कलियुग-अन्त वा सतयुग-आदि के बीच का सुहावना-कल्याणकारी समय, जहा बाबा ईश्वरीय युनिवर्सिटी खोलते, हम उत्तम पुरुष बनते) पर… बाबा (ज्ञान-सुख सागर, पतित-पावन, सर्व का सद्गति दाता, बीजरूप) की राजयोग की शिक्षाओं के अनुसार, हम याद करते है:

  • बाप को (जिससे पावन-सतोप्रधान बनते)
  • घर को (जहां जाना है)
  • नई दुनिया-स्वर्ग को (जो माल-मिलकियत-सुख मिलना है)… फ़िर वहां चले जाएंगे

फिर चक्र फिरता, झाड़ बढ़ता रहेंगा, फिर बाबा पावन बनाएंगे संगम पर… य़ह आत्मा का wonderful कुदरती पार्ट है, जो रिपीट होता रेहता

2. मुख्य बात, अपने को पवित्र ब्राह्मण बनाना है (तब ही देवता बनेंगे)… सबकुछ भूल, अपने को आत्मा समझ बाबा को याद करने से पाप भस्म होते

चिन्तन 

जबकि यह कल्याणकारी पुरुषोत्तम संगमयुग चल रहा… तो सदा बाबा के संग-combined रह शान्ति-प्रेम-आनंद की सर्वश्रेष्ठ शक्तियों से भरपूर बन… बहुत सहज अपने में परिवर्तन अनुभव करते, दिव्यगुण-सम्पन्न बनते-बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The power to pack-up! | (52nd) Avyakt Murli Revision 05-04-70

The power to pack-up! | (52nd) Avyakt Murli Revision 05-04-70

1. सभी पॉइंट का सार है पॉइंट बनना, अर्थात विस्तार को समेटना-समाना… बीज-रूप स्थिति का अभ्यास, अभी-अभी आवाज में, अभी देह से परे

2. हम उम्मीद की विशेषता वाली विशेष आत्मा है, अभी श्रेष्ठ बनना है, अलंकारी और आकारी (जिसके लिए चाहिए लाइट)… निर्भयता-एकता-एकरस (ज्योति-ज्वाला और हल्केपन-शीतलता का बैलेंस, लाइट हाउस) … मेहनत कम, सफलता ज्यादा… सुनने के साथ स्वरूप बनना, सेन्स के साथ इसेन्स

3. तिलक अर्थात… आत्मिक स्मृति और भविष्य राजतिलक की निशानी-नशा

4. भक्ति में जो फूल चढ़ाए थे, उसका रिटर्न बाबा न्यारा (देह से)-प्यारा का पुष्प देते… हर्ष के साथ आकारी, यही आकर्षण-मूर्त है… हमारे पास पुरुषार्थ-सेवा दोनों का बल है… जितना बाबा के कर्तव्य में सहयोगी, उतना स्नेह मिलता… जितना बाप-समान निर्माण, उतना स्वमान

5. सम्पूर्ण अर्पण के दर्पण से बाबा का साक्षात्कार होंगा, सूरत से ही अल्लाह-समान दिखेंगे… जो ओते सो अर्जुन… तृप्त आत्मा अर्थात निर्भय-सन्तुष्ट… सहनशक्ति की कमी अर्थात सम्पूर्णता की कमी, तो अभी सदा अपने को शक्ति समझ विजयी बनना है, कमजोरी समाप्त

6. हम जादूगर बच्चे अव्यक्त को व्यक्त में लाते… अब ज्ञान-स्वरूप याद-स्वरूप बनना-बनाना है, समय के इन्तज़ार के बदले इन्तज़ाम करना है, एवर रेडी (पुरुषार्थ-संस्कार से भी)… नर्म (कोमल) और गर्म (शक्तिशाली), कोमल के साथ कमाल

7. श्रेष्ठ-मणि अर्थात सब कार्य श्रेष्ठ (सरलता-सहनशीलता… शीतल-मधुर के ज्वाला शक्ति)… मस्तक-मणि अर्थात मस्तक पर विराजमान, आस्तिक, सदा हाँ-जी… हम लक्की सफलता के समीप सितारे है

8. जितना विदेही बनेंगे (देह-भान से न्यारे), उतना स्नेह दे-ले सकेंगे, समीप रहेंगे (बाबा से भी)… कमजोरी को स्मृति में भी नहीं लाना, मास्टर सर्वशक्तिमान अर्थात सब कुछ सम्भव, मुश्किल भी आसान… अकेले है तो भी बाबा साथ है, संगठन मैं है तो भी अकेले (न्यारा-प्यारा)

9. जितना स्थिति एकरस, उतना पूजन-योग्य… तीव्र पुरूषार्थी अर्थात कब के बदले अब दिखाना… सम्पूर्ण अर्थात सर्वशक्ति-सम्पन्न, फिर वहां सर्वगुण-सम्पन्न

10. स्नेह-सहयोग-सम्बन्ध-सहन, सभी शक्तियां धारण करनी है… साहस-हिम्मत से मदद मिलती है (बाबा-परिवार की)… शक्ति (माया पर विजयी बनने लिए) और स्नेह (सम्बन्ध में), दोनों चाहिए

सार

तो चलिए आज सारा दिन… विस्तार को समेटकर बीजरूप विदेही बन, सदा अव्यक्त को साथ रख याद-स्वरूप बन… सबके स्नेही-प्यारे बन, हर कार्य में सहज सफलता पाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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