Becoming a light-house full of newness! | Avyakt Murli Churnings 14-07-2019

Becoming a light-house full of newness! | Avyakt Murli Churnings 14-07-2019

नवीनता की बढ़ाई!

1. बाबा ने हमें नया ज्ञान-जीवन-युग देकर, पुरानी बातें-स्मृति-वृत्ति-संस्कार से परे स्वराज्य अधिकारी बना दिया है… बाप के साथ-समान-दिलतख्तनशीन बनने के वरदान दिये है, जिससे पुराने-पन को विदाई दे नये की बढ़ाई ले सकते (नये युग-संसार-सम्बन्ध-परिवार की)… वरदाता-विधाता के साथ न्यू ईयर मनाने कारण हम सदा वरदानों-प्राप्तियों से भरपूर एवर-हैप्पी रहते, औरों को भी सुख-शान्ति की किरणें अनुभव हो नई ज्ञान-युग-जीवन की आशा की किरण जागृत करते

2. नये उमंग-उत्साह को कायम रखने, हर संकल्प-कर्म नये हो… अविनाशी-बाप से अविनाशी-प्राप्ति करने का दृढ़-संकल्प सदा कायम रखना है

बाबा का प्यार!

1. जैसे हम बाबा के स्नेह-गीत में लवलीन होते, बाबा भी हमारी विशेषताओं पर आशिक है… हम थोड़ी आत्माओं के प्रति सदा मन में खुशी के गीत गाते… विशेष आत्मा अर्थात हर संकल्प-बोल-कर्म में विशेषता हो, सदा उड़ती कला में उड़ते रहे, विघ्नों से परे, सब को भी आगे बढ़ाते

2. याद में लिए हुए हर कदम में, पद्मों की कमाई करने वाले हम पद्मपद्म भाग्यशाली आत्माएं है, हमारी यह खुशी से औरों को भी प्रेरणा मिलती… याद-सेवा के बैलेंस से सदा सैफ रहते, आगे बढ़ाते, blessings, बाबा की मदद मिलती रहती

प्रत्यक्षता का लाइट-हाउस!

1. पहले स्वयं को प्रत्यक्ष करना है, powerful ज्ञान-योग द्बारा ज्वाला-स्वरूप लाइट-हाउस माइट-हाउस स्थिति बनाकर… अर्थात स्वरूप-स्टेज-सम्बन्ध में हल्कापन-न्यारापन

2. तो इस शान्ति-कुण्ड के पास सब दौडते आएँगे, हमारे नयनों में बाबा की लाइट, लाइट का गोला दिखाई देगा… सबको (प्रकृति-सहित) आशा मिलेंगी, हमारी ओर देखेंगे… Silence से ही प्रत्यक्षता के नगाड़े बजेंगे, बड़े-बड़े हम शक्तियों सो शिव को प्रत्यक्ष करेंगे…

3. powerful वृत्ति-वायुमण्डल-वातावरण बनाने negative से बिल्कुल मुक्त बनना है… तब ही निर्विघ्न-शुभ भावना-कामना-सम्पन्न वातावरण बनेगा

सार

तो चलिए आज सारा दिन… हर संकल्प-कर्म में नित-नये बाबा के साथ के अनुभव करते, सदा शक्तिशाली लाइट-हाउस एवर-हैप्पी स्थिति का अनुभव करे… सबको सुख-शान्ति की किरणें अनुभव कराए, आशा जागृत कर, सबके साथ सतयुग बनाने के निमित्त बन जाएं… ओम् शान्ति!


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The power of incorporeal stage! | (13th) Avyakt Murli Churnings 08-05-69

The power of incorporeal stage! | (13th) Avyakt Murli Churnings 08-05-69

1. निश्चय में कोई भी पर्सेंटेज नहीं, जरा भी मन्सा-वाचा-कर्मणा में संशय है तो संशय-बुद्धि कहेंगे… निश्चय-बुद्धि की परख है उनका चेहरा निशाने-बाज जैसा होगा (बिन्दु के निशाने पर एकाग्र) और चेहरे में नशा

2. मन्सा को ठीक करने चाहिए निराकारी स्थिति, वाचा में निरहंकारी, कर्मणा में निर्विकारी… निराकारी से स्वतः निर्विकारी-निरहंकारी रहते… यह तीनों होगा तो त्रिलोकीनाथ-त्रिकालदर्शी और भविष्य विश्व के मालिक बन जाएँगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… निश्चय-बुद्धि बन निराकारी स्थिति का अभ्यास पक्का करते रहे… तो स्वतः विकारों से मुक्त, नम्रता से सम्पन्न बन, योग के विभिन्न अनुभवों से सम्पन्न-खुश-रूहानी नशे में रहेंगे… औरों को भी सम्पन्न करते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!


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Hear no evil! | Sakar Murli Churnings 13-07-2019

Hear no evil! | Sakar Murli Churnings 13-07-2019

1. हमारी डबल कमाई है, ज्ञान से (जिससे सद्गति) और मामेकम् माशुक की याद से (जिससे आयु बढ़ती, पवित्र-पूज्य बनते, दुःख-अशान्ति से मुक्त), हमें सम्पूर्ण निश्चय है…

2. साथ में रहमदिल-कल्याणकारी बन औरों को भी आप समान बनाने की सर्विस करनी है, आत्मा-रचता-रचना-समय का refine रूप से समझाना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा रोज़ हमें ज्ञान रत्नों से इतना सम्पन्न-शक्तिशाली करते, तो व्यर्थ बातें सुनने-देखने से तो बिल्कुल कान बन्द कर दे… तो हमारी frequency सदा ऊँची रह, हम हर दिन बहुत-बहुत तेज उन्नति अनुभव करते… सदा शक्तिशाली शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर स्थिति में स्थित रह, सबको करते, सतयुग बनाते रहेेंग… ओम् शान्ति!


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The magic of Avyakt stage! | Avyakt Murli Churnings 07-05-69

The magic of Avyakt stage! | (12th) Avyakt Murli Churnings 07-05-69

1. अव्यक्त मिलन का मूल्य है व्यक्त भाव छोड़ना, जिससे अव्यक्त मिलन का आनंद ले सकते… इसके लिए अर्पण होने का दर्पण सदा साथ रखना है, जिससे स्वयं को चेक-चेंज कर सकते… तो इस अव्यक्त स्थिति से हर कर्म में अलौकिकता, हर कर्मेंद्रीयां-नैन-चैन-चलन से अतिन्द्रीय सुख की अनुभूति होगी

2. सर्व खज़ाने के अधिकारी की खुशी-सुख में रहने से कभी अधीन-दुःखी नहीं होंगे… अभी तीव्र पुरुषार्थ का समय है

3. सबके बीच सर्विस का तिलक लिया है, तो हिम्मत-वान बन ब्राह्मण कुल की लाज रखनी है, पुरुषोत्तम बनकर… ऑल-राउन्ड सेवा की सफलता है एकरस स्थिति में … दूर होते भी स्नेह से बाबा के समीप, नैनों के नूर है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… अव्यक्त स्थिति में स्थित रह अव्यक्त मिलन मनाते, सदा अलौकिक-अतीन्द्रिय सुख से भरपूर, सर्व खज़ाने से सम्पन्न रहे… बाबा के नैनों के नूर, सदा श्रेष्ठ एकरस स्थिति में स्थित रह, सबको करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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A divine Intellect! | Sakar Murli Churnings 12-07-2019

A divine Intellect! | Sakar Murli Churnings 12-07-2019

1. हम निराकार आत्माएं ऊपर से यहां अकाल-तख्त पर आती, अब अन्त में पतित-दुःखी-रोगी बन गई है… अब फिर बाबा आकर हमें स्वीट-silence-home में ले जाते, फिर नई सुख की दुनिया स्वर्ग में भेज देते

2. हमें सम्पूर्ण निश्चय है, इसलिए हम श्रेष्ठ पुरूषार्थ करते-कराते… बाबा के संग में रह, हम पारसबुद्धि बन पवित्रता-सुख-शान्ति के सागर बनते… सबको सुनाते की बेहद के बाप (परमपिता) से बेहद का वर्सा मिलता (जहां सबकुछ नया है), जिसके लिए वह आए हैं वायदे अनुसार

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा ने हमें दिव्य-पारस बुद्धि का वरदान दिया है, तो सदा अपने ज्ञान-योग-धारणा-सेवा को फर्स्ट priority देते रहे… तो स्वतः हमारे सभी कार्य-सम्बन्ध श्रेष्ठ-सहज-सुन्दर होते, हम सतयुग स्थापन करते रहेंगे… ओम् शान्ति!


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Success in the Gathering! | संगठन की सफलता | (11th) Avyakt Murli Churnings 17-04-69 (2/2)

Success in the Gathering! | संगठन की सफलता | Avyakt Murli Churnings 17-04-69 (2/2)

1. संगठन की सफलता की लिए चाहिए:

  • स्नेह
  • नजदीक सम्बन्ध 
  • सर्विस की जिम्मेदारी
  • ज्ञान-योग का सबूत

2. स्नेह के लिए चाहिए ब्रह्मा-बाप समान सर्वस्व-त्यागी, तब ही सर्व-गुण आएँगे… सरलता, सहनशीलता, निरहंकारी, अवगुण न देखना… सरलता (बालक जैसे) के लिए स्तुति के आधार पर स्थित न हो, कोई भल महिमा करे हमें फल यहां नहीं स्वीकार करना है

3. सर्विस में… चलन में सदा बाबा का चित्र दिखाई देता, तब हमारी वाणी-सूरत से समझेंगे, हमको पढ़ाने वाला कौन है… चलन कैमरा का काम करें… पुरूषार्थी अर्थात एक गलती दुबारा रिपीट नहीं

4. किसी भी बात के बीच (संगम) पर रहकर judgement करनी है… तो यह बीच, बीज है (सूक्ष्म-शक्तिशाली)… बालक (नीर्संकल्प, स्वीकार करना) और मालिक (राय देना) के भी बीच रहना है, नहीं तो टक्कर होगी

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा ने हमें इतना श्रेष्ठ ईश्वरीय परिवार दिया है, तो सदा संगठन में स्नेह-पूर्वक बैलेंस से चलते रहे… इसलिए सर्वस्व-त्यागी बन ज्ञान-योग-गुणों-सेवा के पुरुषार्थ द्बारा सर्वश्रेष्ठ चलन का सबूत दे… सदा श्रेष्ठ स्थिति का अनुभव करते-करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Remembering the somersault! | बाजोली का खेल | Sakar Murli Churnings 11-07-2019

Remembering the somersault! | बाजोली का खेल | Sakar Murli Churnings 11-07-2019

1. यह सतगुरूवार, ब्रहस्पति-वार, वृक्षपति-डे है… बाबा है मनुष्य सृष्टि का बीज है, जो ब्रह्मा के रथ में आकर हमें adopt कर ब्राह्मण बनाते, सत्य ज्ञान वा राजयोग सिखाकर, मनुष्य से देवता बनाते, सतयुग का वर्सा देते (जहां सबकुछ नया होगा), यह सारी बाजोली है

2. हमें ईश्वरीय बुद्धि मिली है, जिससे सारे खज़ाने-गुण हम स्वयं में समाते, सदा ज्ञान रत्नों से भरपूर रहते… मामेकम् पतित-पावन बाबा को याद करना है, तब ही सुखी-एवर हेल्थी बनेंगे, 21 जन्मों के लिए

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा ने हमें सर्वश्रेष्ठ स्मृति दिलाई है कि, हम ही देवता थे अब फिर बनना है… तो इसी दृढ निश्चय द्बारा ज्ञान-योग की तीव्र दोड़ी लगाए फिर से दिव्यगुणों-दिव्यता से भरपूर, सर्व प्राप्ति सम्पन्न बन… सबको बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The love for Purusharth! | (10th) Avyakt Murli Churnings 17-04-69 (1/2)

The love for Purusharth! | (10th) Avyakt Murli Churnings 17-04-69 (1/2)

1. पुरुषार्थ से स्नेह सबसे श्रेष्ठ है, क्यूंकि:

  • बाबा से भी स्नेह है, क्यूंकि वह पुरुषार्थ कराते
  • प्रालब्ध से स्नेह के पहले है, पुरूषार्थ से स्नेह
  • जब पुरुषार्थ से स्नेह है, तो परिवार के भी प्यारे बनते

2. पुरुषार्थ के स्नेह से अनेक प्राप्तियां है:

  • कल्प-कल्पान्तर का भाग्य बनता
  • बाबा का स्नेह मिलता

3. अव्यक्त स्नेह से याद की यात्रा सहज होती… अब यही पाठ पक्का कर सर्विस का सबूत देना है… इसके लिए परिस्थिति (तन-सम्बन्ध-मन-धन-समय की समस्या) के आधार पर स्व-स्थिति नहीं बनानी (यह कमझोरी है), लेकिन स्व-स्थिति के आधर पर परिस्थिति (यह है शक्तिशाली), इतनी स्व-स्थिति में शक्ति है

4. रिजल्ट है:

  • महारथी शेर से नहीं घबराते, चिति से घबराते
  • घोड़ेसवार साइडसीन देखते (औरों को)
  • और प्यादे राय को पहाड़ बनाकर घबराते

फिर भी आधे से ज्यादा को चेंज होने की लगन है, बाबा खुश हैं … यदि हम भी ऊँची स्थिति में स्थित होंगे, तो सबकुछ खेल अनुभव करेंगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… कैसी भी परिस्थिति हो, सदा पुरुषार्थ से स्नेह रख अपनी स्व-स्थिति को मजबुत करते रहे… इसको भी और सहज करने बाबा से स्नेह बढ़ाते रहे, तो स्वतः हमारी स्थिति ऊँची-श्रेष्ठ रहेंगी… सबको भी श्रेष्ठ बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The wholesale business of Baba’s yaad! | Sakar Murli Churnings 10-07-2019

The wholesale business of Baba’s yaad! | Sakar Murli Churnings 10-07-2019

1. बाबा नई दुनिया के लिए राजयोग सिखाते… अर्थात सबकुछ करते सिर्फ अपने को आत्मा समझ… अपने बाप-टीचर-सतगुरु सद्गति-दाता ज्ञान-शान्ति के सागर बाबा… और शान्तिधाम-सुखधाम को याद करना है

2. ऎसे:

  • अपने वायदे अनुसार बाबा पर वारी जाने वाले
  • श्रीमत पर चलने वाले
  • सबकुछ भूलने वाले

बच्चों को बाबा स्वयं receive करते!

3. पुरुषार्थ कर माया पर सम्पूर्ण विजयी बन, ऊंच पद पाना है… जब हम सुखी-देवता-विश्व के मालिक थे, तभी विश्व में शान्ति थी… बाबा की याद-मन्मनाभव है होलसेल, बाकी सब है रीटेल

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा ने हमें याद का होलसेल व्यापार सिखाया है… तो सदा मुरली में से नई-नई योग की विधियां उठाते, रोज़ एक स्वमान व बाबा के title पर 5 पॉइंट्स लिखते रहे… तो स्वतः हमारे योग में रुचि-प्राप्तियां बढ़ते, हम सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनते-बनाते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!

The easiest Purusharth, Follow Father | Avyakt Murli Churnings 20-03-69

The easiest Purusharth, Follow Father | Avyakt Murli Churnings 20-03-69

1. हमारे निमन्त्रण पर बाबा आए है व्यक्त में अव्यक्त मुलाकात करने, तो हमें भी बाप-समान सम्पूर्ण जल्दी बनना है… दर्पण सामने है, हमें साकार समान गुण-स्थिति बनानी है, इसलिए अपने हर बोल-कर्म-स्मृति-स्थिति को बाबा से भेंट करते रहना है

2. 7 बातें छोड़नी है… 5 विकार, आलस्य, भय (शक्तियां निर्भय होती)

3. 7 बातें धारण करनी है:

  • स्वरूप-स्वधर्म (मैं आत्मा शान्त-स्वरूप)
  • स्वदेश, स्व-लक्ष्य, स्वदर्शन चक्र (परमधाम, फिर देवता बनना है, फिर चक्र)
  • स्व-लक्षण (दिव्यगुणों की धारणा)
  • सुकर्म (सेवा)

स्वयं के संस्कारों पर काली, और परिवार के साथ शीतला बनना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बाप-समान श्रेष्ठ ज्ञान-योग-धारणा-सेवा की दिनचर्या धारण कर, बार-बार अपने संकल्पों को बाबा से भेंट करते… तीव्र रूप से बाप समान सम्पन्न-सम्पूर्ण बनते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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