Having full regard for Gyan! | Sakar Murli Churnings 09-07-2019

Having full regard for Gyan! | Sakar Murli Churnings 09-07-2019

इस समय गरीब-साहूकार-नेता सब दुःखी है (बीमारी, अकाले मृत्यु, मच्छर, आदि), सम्पूर्ण सतोप्रधान स्वर्ग आया कि आया, यह संगमयुग है जबकि विदेही बाप हमें पढ़ते (बहुत प्यार से)… मुख्य रास्ता देते, सबकुछ विनाशी भूल अपने को आत्मा समझ बाबा को याद करना है, बाकी पार्ट से छूट नहीं सकते, हमें सारे झाड़ का ज्ञान है… जैसे पहले पुरुषार्थ-सेवा कर रहे थे, ऎसे ही अब भी कर रहे हैं

2. गीता-पाठशालाएं खोल बैज आदि पर समझाते रहना है… ज्ञान का पूरा regard रखना है, शरीर छोड़ने से पहले अवस्था श्रेष्ठ-शान्त अवश्य बनानी है

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा हमें इतना अमूल्य सर्वश्रेष्ठ ज्ञान देते, तो इसका पूरा regard रखे… अर्थात अपने जीवन के हर पहलू को श्रीमत-अनुसार सेट करते, हर पल उन्नति को प्राप्त करते, सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनते रहे… सबको भी आप-समान श्रेष्ठ बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Remembering Baba powerfully! | (8th) Avyakt Murli Churnings 13-03-69

Remembering Baba powerfully! | (8th) Avyakt Murli Churnings 13-03-69

याद की यात्रा में प्रेम-स्वरूप के साथ चाहिए शक्ति-स्वरूप (देवी के चित्रों में आंखें में प्रेम-करुणा-शीतलता और चेहरे-अस्त्र शास्त्र-वाहन से शक्ति-स्वरूप दिखता), तब ही सम्पूर्णता के समीप होंगे… हमारे मस्तक पर तीनों सितारें का त्रिशूल चाहिए (वर्तमान सौभाग्य का, सम्पूर्ण परमधाम का, और भविष्य का), सितारों की जगह ऊपर-नीचे न हो

कुमारियों से

1. योग के अनुभव-महसूशता की कमी है, जिस योग से ही जीवन में अतीन्द्रिय सुख का अनुभव होता… इसलिए एकान्त में भिन्न-भिन्न स्थानों पर सैर करना है (बाबा के साथ), संगठन में योग करना है (अमृतवेला-नुमाशाम का समय बहुत अच्छा है)… यह अव्यक्त स्थिति का प्रभाव नयन-चलन द्बारा प्रत्यक्ष होता

2. औरों के संस्कारों को जान, उनसे स्नेह से adjust होना है… इस गुणदान से औरों को भी उमंग-उत्साह में लाकर, निमित्त बनाकर उनकी उन्नति के निमित्त बनेंगे… उन्हें बचा सकेंगे, परम-पवित्र बाबा को पवित्र कुमारियाँ खींचती है

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… याद में प्रेम-स्वरूप के साथ शक्ति-स्वरूप रहे… तो सदा जीवन में अतिन्द्रीय सुख से भरपूर रहेंगे, इसलिए थोड़ा समय अवश्य निकाले… और अनेकों को प्राप्तियों से भरपूर करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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How to be peaceful | शान्त रहने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 08-07-2019

How to be peaceful | शान्त रहने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 08-07-2019

1. इस पुरुषोत्तम संगमयुग पर बाबा आकर हम रूहों को रूहानी ज्ञान देते, अथवा शान्ति का रास्ता बताते… कामकाज करते भी अन्तर्मुखी देही-अभिमानी बन बाबा को याद करे (जो हमें सुख का वर्सा दे, स्वर्ग का महाराजा बनाते, ऊंच पद दिलाते, पावन बनाए साथ ले जाते)… तो बाबा के समीप रहेंगे, ताकत मिलेंगी, विकर्म विनाश हो शीतल बनेंगे

2. नहीं याद करेंगे तो माया देह-अभिमान में लाए उल्टा कर्म, क्रोध, लडना, बुरी दृष्टि लाए, निंदा कराएंगी… इसलिए घर में बहुत शान्त हो रहना है (हम शान्त-स्वरूप, शान्ति के सागर की सन्तान, शान्तिधाम के वासी, विश्व में शान्ति स्थापन करते हैं), भले कोई कुछ भी कहे, व्यर्थ बातें आदि, हमें तो सुख-शान्ति का वरदान मिला हुआ है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा अन्तर्मुखी रह अपनी आंतरिक सुख-शान्ति-खुशी का अनुभव करते रहे… पूराने संस्कार से बचे रहने, बाबा को बहुत प्यार से याद करते रहे… इस आंतरिक सम्पन्नता को सबके साथ बांटते (भल कोई कुछ भी कहे, हमें उन्हें देना है), सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Benefit of putting a full-stop! | (7th) Avyakt Murli Churnings 04-03-69

Benefit of putting a full-stop! | Avyakt Murli Churnings 04-03-69

1. सच्ची होली में जलाना-मिटाना और रंगना-श्रृंगारना होता… तो जैसे सांग में मस्तक पर बल्ब लगाया जाता, इसका आध्यात्मिक रहस्य है कि हमारा मुख्य श्रृंगार है आत्मा का दीपक जगाना

2. जब हो ली (अर्थात हो गया) पक्का करेंगे… ड्रामा की सीन पर मंथन (अर्थात पानी का मंथन) नहीं करेंगे, तब पक्का संग लगेगा

3. अव्यक्त आकर्षण का घेराव डालना है… सेवा के बंधन में स्वयं को आपेही बाँधना है, तो पूरा हिस्सा मिलेगा… ऎसे मालिक के साथ-साथ बालक भी बनना है, इसकी निशानी है निर्माण-नम्र और प्रेम स्वरूप

सार

तो चलिए आज सारा दिन… हो ली का मंत्र याद रख पास्ट को भूल, सदा अपने आत्मिक स्थिति के स्मृति-स्वरूप बन… अव्यक्त वातावरण वा सम्बन्ध-सम्पर्क द्बारा… सतयुग स्थापन करने के निमित्त बन जाएं… ओम् शान्ति!


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The power of Volcanic Yoga & Truth | ज्वालामुखी योग और सत्यता की शक्ति | Avyakt Murli Churnings 07-07-2019

The power of Volcanic Yoga & Truth | ज्वालामुखी योग और सत्यता की शक्ति | Avyakt Murli Churnings 07-07-2019

सत्यता की शक्ति!

सर्वशक्तिमान बाबा देख रहे, कि राज सत्ता हलचल में है, और ईश्वरीय सत्ता सदा अचल है… क्यूंकि सत-बाप सत-टीचर सतगुरु से सत्यता की शक्ति प्राप्त है, जिससे:

  • सतयुग स्थापन होता
  • अविनाशी वर्सा-पद इस अविनाशी पढ़ाई-वरदान से प्राप्त होता
  • भक्ति में भी गायन-योग्य पूजन-योग्य बनते
  • अज्ञान का अंधकार समाप्त हो जाता
  • प्रकृतिजीत-मायाजीत बनते

सत्यता की शक्ति वाला सदा निर्भय-निश्चिंत (चाहे कैसे भी वातावरण-परिस्थितियां हो) खुशी में नाचता रहता… कैसी भी माया-वायुमण्डल का शेष हो उस पर सदा विजयी-नाचते… शेष को शेया बना देना…

योग की शक्ति!

योगयुक्त रहने से बाबा की छत्रछाया के नीचे सदा सेफ-अचल रहते… और ही शान्ति के वाइब्रेशन फैलाते, असहारे को सहारा देते… ऎसी आवश्यकता पर शान्ति देने से ही प्रत्यक्षता होती

ज्वालामुखी योग की शक्ति!

अब घर जाना है, इस स्मृति से सदा उपराम-साक्षी-साथी-समान रहते… ज्वाला-स्वरूप योग से विकर्म-विनाश पाप-कट हिसाब-किताब चुक्तू हो दिव्य-दर्शनीय-मूर्त बनते… वातावरण शुद्ध हो, निर्बल को बल मिलता… मास्टर सर्वशक्तिवान लाइट-हाउस might-हाउस स्थिति से सबको प्राप्ति होती, आकर्षित होते… योग-अग्नि से हम परिवर्तन हो फ़रिश्ता-देवता बन जाते 

संकल्प को ब्रेक-मोड़ने की शक्ति चाहिए, जिससे एनर्जी बच परख-निर्णय शक्ति बढ़ती… बीच-बीच में 1 मिनट ब्रेक लेने से स्थिति शक्तिशाली-बीजरूप बनती… सबकुछ करते सार-स्वरूप न्यारे-निरन्तर योगी बनते

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा बाबा के सत्य ज्ञान का स्वरूप बन, शक्तिशाली योगयुक्त शान्ति-प्रेम-आनंद स्थिति का अनुभव करते रहे… सबको सुख-शान्ति की अंचली देते, सतयुग बनाने के निमित्त बन जाएँ… ओम् शान्ति!


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The power of conviction! | निश्चय-बुद्धि विजयन्ती | (6th) Avyakt Murli Churnings 15-02-69

The power of conviction! | निश्चय-बुद्धि विजयन्ती | (6th) Avyakt Murli Churnings 15-02-69

1. पूरा निश्चय चाहिए, जब तक पढ़ाई चल रही, तब तक सारा कार्य चलता रहेगा (अभी तो बच्चे-भक्त सबकी सेवा करनी है, बाबा रोज़ सुख की सर्चलाइट देते)… हमें स्वयं-बाबा का परिचय मिला है (जो खज़ाना-lottery है), उसमें स्थित रह उसका सबूत देना है… सम्भल कर चलना है, हिम्मतवान बन, आगे तो बहुत कुछ देखना है

2. सौभाग्यशाली अर्थात बाप-टीचर-सतगुरु से पूरा कनेक्शन… सदा सुहागिन अर्थात परमात्मा से सदा के लिए पूरी लगन

3. चित्रों-Museum द्बारा बाबा का परिचय देने की सेवा करते हुए, सबका उद्घार करते रहना है, जिससे पहाड़ उठ जाता (फिर सब साथ जाएँगे)… सवेरे उठ बाबा को याद करते रहना है (संगठन में भी), तो बाबा के नजदीक रहेंगे, मूंझेंगे नहीं

सार

तो चलिए आज सारा दिन… निश्चयबुद्धि बन अपने सत्य स्वरूप में टिक, बाबा को यथार्थ रीति याद करते, स्वयं को सदा सुहागिन-सौभाग्यशाली अनुभव करते रहे… सब का उधार करते, कलियुगी पहाड़ को उठाकर फिर से सतयुग स्थापन कर ले… ओम् शान्ति!


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The power of churning! | चिन्तन की शक्ति | Sakar Murli Churnings 06-07-2019

The power of churning! | Sakar Murli Churnings 06-07-2019

1. विचार करना है, बाबा ने हमें कितना ऊंच-सतोप्रधान-विश्व का मालिक-सुखी बनाया था शिवालय-स्वर्ग-हेवन में, फिर रावण-वश हम कितने विकारी-पापी-दुःखी बन भटक गए… अब फिर से पुरूषोत्तम संगमयुग पर बाबा राजयोग का ज्ञान देकर हमें सिखाते घर गृहस्थ में रहकर पवित्र बन अपने को आत्मा समझ बाबा को याद-संग में रहने का पुरुषार्थ करना, जिससे पाप नष्ट हो फिर से निर्विकारी फूल बन जाते

2. इसको सहज करने पढ़ाई अच्छे से पढ, ड्रामा पर अचल रहना है… औरों को भी सुनाते रहना है, जो समझने वाले होंगे वह समझेंगे, बाकी हमारी सेवा निष्फल नहीं जाती

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा ने हमें विचार सागर मंथन करने की इतनी सुन्दर कला सिखाई है, तो रोज की मुरली में से कम-से-कम 5 पॉइन्ट लिखने की आदत डाले… फिर धीरे-धीरे हम सारा दिन मुरली पढ़ते-चिन्तन करते सदा श्रेष्ठ स्थिति में स्थित शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर-सम्पन्न रहते… सबको करते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!


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The Art of doing service! | (5th) Avyakt Murli Churnings 06-02-69

The Art of doing service! | (5th) Avyakt Murli Churnings 06-02-69

1. ज्ञान-पढ़ाई के सार का स्वरूप बन, फिर सेवा करनी है:

  • आँखों में बाबा दिखाई दे
  • वाणी से बाबा का ज्ञान
  • हमारी चलन में बाबा का चरित्र समाया हुआ हो
  • हमारे चित्र में बाबा का अलौकिक चित्र दिखाई दे
  • व्यक्त रूप में अव्यक्त-मूर्त देखे

यह ही बाबा की मेहनत का फल-स्वरूप है… इसके लिए याद की यात्रा अव्यक्त स्थिति में स्थित हो (जो आंतरिक अवस्था है), फिर कर्म करना है

2. सदा त्रिमूर्ति याद रखना है, अर्थात तीन बातें छोड़ना (बहाना-कहलाना-मुरझाना) और तीन बातें धारण करना (त्याग-tapasya-सेवा)… इसके लिए ज्ञान के तीसरे नेत्र को use करना… विघ्नों का सामना करना सहज है क्यूंकि समर्थ साथ है, सिर्फ मैं-मैं की कामना छोड़ना है… महिमा छोड़ मेहमान समझना है, तब महान स्थिति (अव्यक्त स्थिति) बनेंगी

3. शिव जयन्ती पर और धूमधाम-उमंग-उत्साह से बाप का परिचय देना है, तो बाबा हमारा भी साक्षात्कार कराएंगे… शक्ति रूप से ललकार करनी है, अर्थात बीजरूप स्थिति में स्थित रह, बीजरूप बाबा की याद में सेवा करना, समय का परिचय देना है… तो सहज-अच्छा फल निकलेगा

4. जैसे बाबा शरीर को न देखते सर्चलाइट देते स्नेह का सबूत दिया… ऎसे हमें भी अमृतवेला रूहाब-शक्ति रूप हो बैठना है (सुस्ती से लाइन clear नहीं रहती)… यही स्नेह में sacrifice है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा बीजरूप-शक्तिशाली-महान-अव्यक्त स्थिति में स्थित बीज बाबा की याद में रह, फिर उमंग-उत्साह से सेवा करे… तो स्वतः हमारे चेहरे-चलन-बोल में बाबा दिखते, हम सर्वश्रेष्ठ सेवा करते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!


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Decorating ourselves with Baba’s remembrance! | Sakar Murli Churnings 05-07-2019

Decorating ourselves with Baba’s remembrance! | Sakar Murli Churnings 05-07-2019

1. हमने बाबा को बुलाया ही था पावन-सुखी बनाने, अब बाबा आया है नई दूनिया-सुखधाम बनाने, पुरानी दुनिया को थोड़ा समय है

2. तो डबल सिरताज बनने लिए, श्रीमत पर:

  • पवित्र बन
  • अपने को आत्मा समझ बाबा को याद करना है (योग से अपने श्रृंगार करना है, जिससे पुराने पाप भी भस्म होतेे… बाकी दुनिया का तो कुछ भी रहना नहीं है)
  • सेवा में लग-बिजी रहना है (जबकि हमें सत्य ज्ञान मिला हैै… और देेह-अभिमानी बन योग में रहकर समझाना है)..

3. जबकि बाबा हमें अमरलोक-स्वर्ग में ले जाते, तो बहुत खुशी में रहना है… इसी रुहानी कमाई में लगना है, सबको भी खुशी से भरपूर करने के निमित्त बनना है

चिन्तन

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा की प्यार-भरी यादों में रह, अपनी आंतरिक अवस्था को शक्तिशाली शान्ति-प्रेम-आनंद से भरपूर-सम्पन्न अनुभव करते रहे… यही सच्चा श्रृंगार है, जो चेहरे-चलन की दिव्यता-रॉयलती-अलौकिकता के रूप में प्रत्यक्ष होता… और हम सबको आप समान श्रृंगारते, सतयुग बनाते रहते… ओम् शान्ति!


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The power of experience! | (4th) Avyakt Murli Churnings 02-02-69

The power of experience! | (4th) Avyakt Murli Churnings 02-02-69

अव्यक्त मिलन मनाने की सहज विधि!

1. हमारा शुद्ध ज्ञान-सहित प्यार बाबा को भी खिंच लाता (बाबा का भी हमसे शुद्ध प्यार है, साथ में निर्मोही है, जानते हैं ड्रामा accurate-कल्याणकारी है)… दिव्य-बुद्धि (पुरूषार्थ) से अव्यक्त-वतन (वा सूक्ष्मवतन-वासी बनने) का अनुभव करने में अनोखी-अलौकिक-लाभदायी कमाई है, इसकी सहज बिधि है अमृतवेले याद में इस संकल्प से बैठना हमें अव्यक्त मिलन मनाना है, और अव्यक्त स्थिति में स्थित हो रूहरूहान करना, जिसके लिए सारा दिन अन्तर्मुखी-अव्यक्त रहना है… हमारे में इतनी ताकत है जो अव्यक्त-वतन को नीचे ला सकते, हमें अलौकिक फ़रिश्ता बन पढ़ाई का शो करना है 

2. हमारा अविनाशी स्नेह बाबा को पहुंचता है, वह भी respond करते… इसे कैच करने व्यक्त भाव छोड़ना पड़ेगा

प्रैक्टिकल सेवाओं में!

1. सेवा में मैं-पन के ज्ञान-बुद्धि-सेवा का अभिमान से मायूसी-मुरझाईश-मगरूरी-पन आता, और निमित्त भाव से निराकारी-निरहंकारी-नम्रचित-निःसंकल्प बनते… मतभेद के बजाए स्वादर्शन चक्रधारी बनना है… बाबा की शिक्षा है निर्माण-चित्त हो सबसे प्यार से चलना

2. ड्रामा के silence से शक्ति आती, हमें देख सब सीखेंगे… अभी ज्वाला-रूप ज्वाला-देवी बनना है, माताओं का संगठन 

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बुद्धि-बल के अनुभवों में ही सच्ची कमाई है, तो सदा ड्रामा की पट्टी पर अन्तर्मुखी-silent रह अव्यक्त फ़रिश्ता बन बाबा को प्यार से साथ रख, सूक्ष्मवतन को ही नीचे लाए… अपने संस्कारों पर शक्तिशाली ज्वाला-रूप बन, औरों के साथ नम्र-चित्त बन बहुत प्यार से चलते… सतयुगी बन-बनाते रहे, ओम् शान्ति!


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