योग कमेंटरी | मैं सतयुगी प्रिंस हूँ

योग कमेंटरी | मैं सतयुगी प्रिंस हूँ

मैं सतयुगी प्रिंस हूँ… सम्पूर्ण सतोप्रधान… सर्वगुण सम्पन्न

स्वर्ग का राज्य अधिकारी… पद्मापद्म भाग्यशाली… सर्व प्राप्ति सम्पन्न हूँ

मैं दिव्यता से भरपूर… शीतल दृष्टि, मीठे बोल, रॉयल चलन से सुशोभित… दिव्य दर्शनीय मूर्त हूँ

बाबा मुझे नर से नारायण… मनुष्य से देवता… पावन-पूज्य-सतोप्रधान बना रहे हैं

बाबा ने दिव्यगुणों से श्रृंगारकर… मुझे दिव्य फूलअलौकिक फ़रिश्ता बना दिया है… ओम् शान्ति!


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Having spiritual love for all! | Sakar Murli Churnings 22-06-2019

Having spiritual love for all! | Sakar Murli Churnings 22-06-2019

हम अपने को आत्मा समझते, जिससे देवता बनते जाते (सतयुग में आत्म-अभिमानी होते, सर्प का मिसाल)… ऎसे श्रेष्ठ बनाने वाले बाबा को तो कितना याद करना चाहिए, जो ब्रह्मा तन में आकार हमें रौशनी दे पवित्र गुल-गुल बनाए साथ ले जाते, फिर अमरलोक में भेजते… एक बाप के हम सभी बच्चें भाई-भाई है, तो सबसे रूहानी प्यार चाहिए

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमारे सभी आत्मा-भाइयों में विशेषताएं हैं, तो सदा बाबा से combined सर्व प्राप्ति सम्पन्न रह, सबको सम्मान-प्यार देते, क्षीरखण्ड दुनिया सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The personality of purity! | Avyakt Murli Churnings 06-04-95

The personality of purity! | Avyakt Murli Churnings 06-04-95

1. हम सर्व स्नेही बच्चों की सूरत-चेहरे-चलन में रूहानी पर्सनालिटी (प्योरिटी की पर्सनालिटी) दिखाई देती वा अनुभव होती (भल बाहर से साधारण है, और बाकी सब की शरीर-विशेषता-position की पर्सनालिटी है)… हमारी सारे कल्प में सर्वश्रेष्ठ-महान पर्सनालिटी है:

  • अनादि… हमारी चमक सब से न्यारी-प्यारी है
  • आदि… हमारी सबसे श्रेष्ठ पर्सनालिटी है, तन-मन-धन-सम्बन्ध सेे… सुन्दर, सजे हुए, सुख-शान्ति-प्रेम-आनन्द स्वरूप
  • मध्य… हमारी पूजा विधिपूर्वक होती (किसी धर्मात्मा, महात्मा, नेता की ऎसे नहीं होती)… हम कैसे श्रृंगारे जाते!
  • अन्त… हम ब्राह्मण है, जिनकी महिमा कारण आज भी नामधारी ब्राह्मण से श्रेष्ठ कार्य कराते… हमारा नाम शास्त्रों में आता, जिसको सच्चे भक्त कितना विधिपूर्वक संभालते-रखते-पढ़ते, पूज्य समझते

इसलिए सदा अपने श्रेष्ठ प्योरिटी की पर्सनालिटी को स्मृति में रखना है, तो समर्थी आएंगी, माया दूर से ही भाग जाएंगी… आए और भागे नहीं, हम सदा ही मायाजीत रहे… ऎसा बहुतकाल का अभ्यास चाहिए, यह अन्त में नहीँ हो पाएगा, इसलिए अभी से स्मृति-स्वरूप बनना है..

2. रूहानी पर्सनालिटी वाले सर्व प्राप्ति सम्पन्न (स्वभाव-संस्कार सम्बन्ध-सम्पर्क सब में सम्पन्न-सन्तुष्ट) होने कारण, उनकी आंखें कहीं डूबेंगी नहीं, औरौं को देखने वा परचिन्तन में

3. प्योरिटी अर्थात सत्यता-स्वच्छता… अर्थात:

  • विधि में थोड़ा भी अन्तर न हो
  • समय-संकल्प जरा भी व्यर्थ न जाएं
  • संकल्प-बोल-कर्म के मालिक होंगे (बोलना नहीँ चाहिए, मुह से निकल गया ऎसे नहीँ होंगा)

इसके लिए चाहिए महीनता से चेकिंग (सूर्यवंशी की निशानी मुरली महीन है, नाचो, गाओ, हंसो, खेलो, और चन्द्रवंशी का तीर-कमान भारी है, निशाना भी लगाना पड़ता)… डायमणड जुबली मनाने के साथ स्वयं भी डायमणड बनना है

4. सेकण्ड में एवर रेडी-अशरीरी होने का अभ्यास करना है… यह अभ्यास कोई भी कर सकते (सिर्फ सेकण्ड लगता, और संबंध-संपर्क में भी करा सकते)… जितना करेंगे, बहुतकाल के प्रालब्ध में एड होगा, बीच-बीच में करने से स्थिति स्वतः शक्तिशाली रहेंगी, छोटी­-छोटी बातों में पुरुषार्थ नहीं करना पड़ेगा … अन्त समय बता कर नहीँ आएँगा, इस अभ्यास से हमें समय की समाप्ति के वाइब्रेशन भी पहले से टच होंगे…

5. हम खुशराजी है, खुला निमन्त्रण मिला है… लंबी लाइन में भी सोंचते, हमारा कितना बेहद का परिवार है… यह मेला भक्ति के मेलों से तो अच्छा है, नवीनता

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… सदा अपनी सर्वश्रेष्ठ रुहानी प्योरिटी की पर्सनालिटी को स्मृति में रख, समर्थ मायाजीत रहे… महीनता से स्वयं को चेक कर, सम्पूर्ण पवित्र सर्व प्राप्ति सम्पन्न बन… सूर्यवंशी बन, सबको बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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The wonderful Confluence Age! | Sakar Murli Churnings 21-06-2019

The wonderful Confluence Age! | Sakar Murli Churnings 21-06-2019

हम परमधाम-निवासी आत्माएं पहले देवता थे, 84 जन्मों का आल-राउंड सुख-दुःख का पार्ट बजाया… अब पार्ट समाप्त हो कब्रिस्तान बनना है, घर जाना है, इसलिए हम अपने निराकार बाप-टीचर-सतगुरु-अकालमूर्त-महाकाल-लिबरेटर बाबा की अव्यभिचारी याद में रहते, जिससे हम विकार-मुक्त पवित्र दिव्यगुण-सम्पन्न सदा-सुखी देवता बनते सतयुग में… औरों को भी ज्ञान सुनाकर कल्याण करना है, अभी हम पुरुषोत्तम संगमयुग पर है सबकुछ जानते (आत्मा, परमात्मा, आदि), भगवान् आए है ब्रह्मा तन में

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हम संगम की टॉप-पॉइन्ट पर खड़े हैं, तो सदा ड्रामा को साक्षी हो देख, सदा अपने परम साथी बाबा को साथ रख… सदा सर्वश्रेष्ठ योगयुक्त शान्ति-प्रेेम-आनंद से सम्पन्न रह, सबको करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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योग कमेंटरी | मैं हनुमान हूँ

योग कमेंटरी | मैं हनुमान हूँ

बाबा मुझे बन्दर से… मन्दिर-लायक देवतापूज्य बना रहे हैं

मैं हनुमान… सदा एक राम की याद में मग्न… योगबल से भरपूर… सम्पूर्ण पवित्र हूँ

सर्व शक्तियों से सम्पन्न, महावीर… मायाजीत… मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ

मैं वायु-समान हल्का… पर्वत-समान शक्तिशाली… पहाड़ को भी राई-रुई बनाता हूँ

सबको संजीवनी बुत्ती से सुरजीत कर… सभी सिताओं को रावण की जंजोरों से छुड़ाता… बाबा के महान स्वर्ग स्थापना के कार्य में सच्चा सहयोगी हूँ… ओम् शान्ति!


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Becoming victorious over the ghosts within! | Sakar Murli Churnings 20-06-2019

Becoming victorious over the ghosts within! | Sakar Murli Churnings 20-06-2019

अन्तर्मुखी हो चुपचाप अपने को आत्मा समझ बाबा को याद करना है, Silence में घर-ऑफिस में कार्य करना है… क्रोध (जो खुद-सर्व को जलात, घर के मटके सुखाता, भारत को कंगाल किया है), लड़ना, मारामारी, दुःख देना (और सभी विकार) भूत है, जो बाबा का नाम बदनाम करते, इसको छोड़ने है… इसके लिए दिल कहीं नहीँ लगानी है, सबकुछ भूल अपने को आत्मा समझना है, बाबा को याद कर सम्पूर्ण पवित्र बनना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि भूतनाथ बाबा आए है आधाकल्प के 5 बड़े भूतों को भगाने, तो सदा ज्ञान-योग की वास-धूप जलाए रख सम्पूर्ण फ़रिश्ता-परी बन, सबको शान्ति-प्रेम-खुशियां बांटते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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योग कमेंटरी | पानी के नीचे

योग कमेंटरी | पानी के नीचे

मैं आत्मा, सागर के नीचे हूँ… चारों ओर पानी है… मछलियों की दुनिया… जो अपने नियमों पर चलती

ऊपर सूरज का प्रकाश दिख रहा… मैं उस दुनिया से बिल्कुल दूर हूँ… यहां कोई देहधारी भी नहीं

मैं आसपास घूम रही हूँ… सभी पौधों को देख… बिल्कुल हल्की हूँ

मैं मास्टर सागर की स्थिति में स्थित हूँ… जितना सम्पन्न… उतना ही शान्त-चित्त… प्रेमसुखआनंद से भरपूर

गुणों के सागर के साथ सदा combined… ज्ञान-गुण-शक्तियों से सम्पन्न हूँ… सबको भी करती… ओम् शान्ति!


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Becoming a shining needle! | Sakar Murli Churnings 19-06-2019

Becoming a shining needle! | Sakar Murli Churnings 19-06-2019

1. इसी अनोखे सत्संग में हम आत्माओं को बाप का रूहानी प्यार मिलता (जितना सर्विसएबुल बनते, उतना जास्ती प्यार कैच कर सकते, इसलिए सबको अंधकार से निकाल सुख का रास्ता बताना है, बाबा का पैगाम देना है)…

2. ड्रामा wonderful है, कैसे आत्माएं परमधाम से नीचे आती, पहले सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी (वहां की अपनी रस्म- होंगी, जितना ज्ञान-योग में पक्के होंगे सब साक्षात्कार करेंगे वा नज़दीक अनुभव करेंगे, इसलिए भी योग से आयु बढ़ानी है), फिर और धर्मों की आत्मा आती

3. ज्ञान-योग से ही आत्मा रूपी दीपक पवित्र-प्रज्ज्वलित होता, जिसमें माया विघ्न डालती… आत्मा को देखने से कट उतरती, शरीर देखने से कट चढ़ती… इसलिए सदा आत्मा को देखना है, शुद्ध भोजन खाने से सब अभ्यास सहज हो जाते

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमें सर्वश्रेष्ठ रूहानी पवित्र चुम्बक मिला है, तो सदा ज्ञान-तेल और योग-अग्नि द्बारा सारी माया की कट उतार… अपने रुहानी माशुक बाबा के साथ सदा combined, सर्व खज़ानों से सम्पन्न बन, सबको बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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योग कमेंटरी | अंतरिक्ष में

योग कमेंटरी | अंतरिक्ष में

अंतरिक्ष के सितारों जैसा… मैं रूहानी सितारा हूँ… चैतन्य प्रकाश से चमकता

बिल्कुल हल्का… स्थिर… शान्ति, प्रेम, आनंद से भरपूर हूँ 

नीचे ग्लोब दिखाई दे रहा… इसे फिर से पावन-सतोप्रधान-दैवी बनाना है… इसमें अवतरित होकर

ऊपर सूक्ष्मवतनपरमधाम है… जहां बाबा बैठे… मुझे बुला रहे हैं

कुछ समय इसी अवस्था में स्थिर रह… अपनी आत्मिक स्थिति मजबूत कर… फिर बाबा के पास जाते हैं… ओम् शान्ति!


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Getting decorated with divine virtues! | Sakar Murli Churnings 18-06-2019

Getting decorated with divine virtues! | Sakar Murli Churnings 18-06-2019

1. ओम् शान्ति कहने से ही झाड और इसके चैतन्य बीज की स्मृति आ जानी चाहिए… हम कितने पद्मापद्म भाग्यशाली है, स्वयं बेहद का बाप (जो हमें बच्चें-बच्चें कहते) पतित-पावन सुख-शान्ति का सागर संगम पर ब्रह्मा तन में आकर हमें राजयोग का ज्ञान सुनाकर वर्सा देते, पुरुषोत्तम बनाते, दिव्यगुणों से श्रृंगारकर गुल-गुल बनाकर साथ ले जाते और पवित्र राज्य में भेजते

2. तो ऎसे लवली बाप को तो निश्चयबुद्धि बन कितना याद करना चाहिए… जिससे श्रीकृष्ण समान पवित्र-मीठा बनते, सजाओं से छूटते

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि स्वयं भगवान् हमारा साजन बन हमें दिव्यगुणों से शृंगारते, तो सदा ज्ञान-चिन्तन और बाबा की प्यार भरी यादों में डूबे, सजे सजाए रह… दिव्य दर्शनीय मूर्त बन, सबको बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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