Answers from Sakar Murli 16-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 16-09-2020*

1. विश्व _______ की डेट नहीं सोचो, स्वयं के ______ की घड़ी निश्चित करो।
°परिवर्तन, _परिवर्तन_,

2. भाग्य विधाता बाप रोज़ अमृतवेले हम आज्ञाकारी बच्चों को *सफलता का तिलक* लगाते। तो अब हम किन बातों से बचे रहने चाहिए? (3)
° आज्ञाकारी ब्राह्मण बच्चे कभी *मेहनत वा मुश्किल* शब्द मुख से तो क्या संकल्प में भी नहीं ला सकते हैं। (वह सहजयोगी बन जाते हैं।)
° इसलिए कभी भी *दिलशिकस्त नहीं* बनो (लेकिन सदा दिलतख्तनशीन बनो।)
° रहमदिल बनो। ( *अहम* भाव और *वहम* भाव को समाप्त करो।)

3. तुम जानते हो बाबा हमको ______ बनाकर ले जायेंगे। आत्मा जितना बाप को याद करेगी तो _____ बन जायेगी। आत्मायें ब्रह्मा मुख से यह _____ पढ़ती हैं। बाप कहते हैं मैं आया हूँ और सबको कहता हूँ- ______ याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे।
°पावन, _पवित्र_, _नॉलेज_, _मामेकम्_

4. श्रीमत तो श्रीमत है ना। निश्चय में _____ है। बाप की राय पर चलने में ही _______ है। तुम्हें अपने को आपेही ______ -तिलक देना है, श्रीमत पर चलना है। इसमें अपना _____ चल न सके। मुफ्त अपने को ____ में नहीं डालना चाहिए।
°विजय, _कल्याण_, _राज_,
_हठ_, _घाटे_

5. स्टूडेन्ट को टीचर कहेंगे ना, पढ़कर ____ करो। तुमको 21 जन्मों के लिए स्वर्ग की ____ मिलती है। ____ में जाना यही बड़ी स्कालरशिप है।
°गैलप, _स्कालरशिप_, _डिनायस्टी_

6. जो भी *भारतवासी* है, उनको क्या समझा सकते?
° बोलो, *भारत स्वर्ग था*, अब तो कलियुग है। कलियुग में अनेक धर्म हैं। सतयुग में एक ही धर्म था। *भारत फिर से स्वर्ग बनना है*।

7. ”मीठे बच्चे – बाप आये हैं सबके दु:ख हर कर सुख देने, इसलिए….. क्या?
° तुम दु:ख हर्ता के बच्चे *किसी को भी दु:ख मत दो* ”

8. हमें क्यों *लड़ना-झगड़ना* नहीं चाहिए? _(बाबा ने यह बहुत सुन्दर रीति समझाया)_ (4)
° तुम बच्चे जानते हो हम पढ़ाई से अपना *स्वराज्य* स्थापन कर रहे हैं। *नई दुनिया* जरूर स्थापन होनी है, नूँध है तो कितनी *खुशी* होनी चाहिए। कोई भी चीज़ में लड़ने-झगड़ने की कोई बात नहीं।
° तुम *अंगे अक्षरे बता सकते हो देवताएं कब होते* । तो तुमको कितना *नशा* रहना चाहिए। झगड़े आदि की बात ही नहीं।
° झगड़ते वह हैं जो निधनके होते हैं। तुम अभी जो पुरूषार्थ करेंगे *21 जन्म के लिए प्रालब्ध* बन जायेगी। लड़ेंगे-झगड़ेंगे तो ऊंच पद भी नहीं मिलेगा। सज़ायें भी खानी पड़ेगी।
° कोई भी बात है, कुछ भी चाहिए तो *बाप के पास आओ* , गवर्मेन्ट भी कहती है ना तुम फैंसला अपने हाथ में नहीं उठाओ।

9. कोई कहते हैं हमको विलायत का बूट चाहिए। परन्तु बाबा कहते संगम पर *बहुत सिम्पुल साधारण* रहना है, कोई भी आश नहीं। ऐसा क्यों? (2)
° *नहीं तो देह-अभिमान आ जाता* है। (इसलिए अपनी नहीं चलानी होती है, बाबा जो कहे।)
° बाबा कहेंगे बच्चे अभी तो वनवाह में हो। *वहाँ (सतयुग में) तुमको बहुत माल मिलेंगे।*

10. *सर्विसएबुल बच्चों* को सर्विस का कितना शौक रहता है। तो उन्हें कौन से 2 टाइटल मिलते? और सर्विस न करने से कौन-सा टाइटल मिलता?
° सर्विस करते तो उनको *रहमदिल*, *कल्याणकारी* कहेंगे।
° कोई को वर्थ पाउण्ड बना नहीं सकते हैं तो *वर्थ नाट ए पेनी* ठहरे ना। (पाउण्ड बनने लायक नहीं। यहाँ वैल्यु नहीं तो वहाँ भी वैल्यु नहीं रहेगी। बाबा को याद नहीं करते तो तुच्छ काम करते रहेंगे। पद भी तुच्छ पायेंगे।)

11. हमारा तो *शिवबाबा से योग* है (ब्रह्मा की जरूरत नहीं)। _(सही / गलत)_
° गलत। यह तो है ही *बी.* के.। शिवबाबा *ब्रह्मा द्वारा ही ज्ञान* दे सकते हैं। (सिर्फ शिवबाबा को याद करेंगे तो *मुरली कैसे सुनेंगे* फिर नतीजा क्या होगा? पढ़ेंगे नहीं तो पद क्या पायेंगे। यह भी जानते हैं सबकी तकदीर ऊंच नहीं बनती है। वहाँ भी तो नम्बरवार पद होंगे। पवित्र तो सबको होना है। आत्मा पवित्र बनने बिगर शान्तिधाम जा नहीं सकती।)

12. *सर्व में परमात्मा विराजमान नहीं*, इसका कौन-सा नया तर्क आज बाबा ने सुनाया?
° आत्मा शरीर में है तो दु:ख होता है। मुझे दर्द है-यह किसने कहा? *परमात्मा कैसे दु:ख भोगेगा।* आत्मा ही भोगती है ना।

13. *युद्ध के मैदान में जो मरेंगे वह स्वर्ग में जायेंगे*, इसका अर्थ क्या है?
° *इस गुप्त माया की लड़ाई में* हारेंगे / मरेंगे तो भी स्वर्ग में जाएंगे।
° (बाकी उस युद्घ में) स्वर्ग में तो तब आ सकेंगे *जब तुम ब्राह्मणों से आकर बाप का परिचय लें* । (सबका बाप तो एक ही है – पतित-पावन। वह कहते हैं मुझे याद करने से तुम्हारे पाप कट जायेंगे और मैं जो सुखधाम स्थापन करता हूँ उसमें तुम आ जायेंगे। लड़ाई में भी शिवबाबा को याद करेंगे तो स्वर्ग में आ जायेंगे।)

14. *इस भाषा* को तो तुम बच्चे ही समझते हो और कोई नया समझ न सके। कौन-सी भाषा?
° *’हे रूहानी बच्चे”* ऐसे कभी कोई कह न सके। (तुम जानते हो हम रूहानी बच्चे *रूहानी बाप* के सामने सम्मुख बैठे हैं, उनको यथार्थ रीति पहचानकर।)

15. हम शिवकुमार नही, परन्तु हम है ब्रह्मा वंशी *ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ* । इसके कौन-से 2 कारण बाबा ने सुनाये?
° *शिव की तो सब आत्मायें हैं*। तुमको शिवकुमार व शिवकुमारी नहीं कहेंगे। यह अक्षर रांग हो जाता।
° *कुमार-कुमारी* तब कहा जाता जब मनुष्य के बच्चे बनते हैं। शिव के बच्चे तो निराकारी आत्मायें हैं ही।

16. शिवबाबा ही हमको पढ़ाते हैं। न *कृष्ण* पढ़ा सकते, न कृष्ण द्वारा बाप पढ़ा सकते हैं। कृष्ण क्यों नहीं?
° (क्योंकि) कृष्ण तो *वैकुण्ठ* का प्रिन्स है। (कृष्ण तो *स्वर्ग* में अपने माँ-बाप का बच्चा होगा। स्वर्गवासी बाप का बच्चा होगा, वो वैकुण्ठ का प्रिन्स है। *वहां ज्ञान की जरूरत नहीं* ।)

17. कृष्ण के जन्म और *क्राइस्ट* के जन्म में क्या अन्तर है?
° क्राइस्ट का जन्म कोई *छोटे बच्चे रूप में नहीं* होता है। क्राइस्ट की आत्मा ने तो कोई में जाकर *प्रवेश किया* है। (क्योंकि धर्म स्थापक को कोई ऐसे मार न सके, *सतोप्रधान आत्मा आकर दु:ख भोग न सके*। तो किसको मारा? जिसमें प्रवेश किया, उनको दु:ख मिला। )

18. मनुष्य समझते कल भी ____ हो सकती है। परन्तु तुम बच्चे समझते हो अभी हमारी राजधानी स्थापन हुई नहीं है तो ____ कैसे हो सकता है। अजुन बाप का _____ ही चारों तरफ कहाँ दिया है। पतित-पावन बाप कहते हैं मुझे याद करो तो विकर्म विनाश होंगे। यह ___ सबके कानों पर जाना चाहिए।
°लड़ाई, विनाश, _पैगाम_, _पैगाम_

Answers from Sakar Murli 15-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 15-09-2020*

1. किसी भी प्रकार से बाप के कर्तव्य में *सहयोगी बनो तो सहजयोगी* बन जायेंगे। तो बाबा ने कौन-से प्रकार सुनाये? _(स्लोगन)_
° तन-मन-धन, *मन-वाणी-कर्म*

2. जबकि साक्षात्कार मूर्त बन साक्षात्कार कराने लिए *अलबेला-पन से निद्राजीत* बनना है। तो बाबा ने इसकी कौन-सी *वन्डरफुल युक्ति* सुनाई? (2)
° जब *विनाशकाल* भूलता है तब अलबेलेपन की नींद आती है। (इसलिए *भक्तों की पुकार* सुनो, दु:खी आत्माओं के *दुख की पुकार* सुनो, प्यासी आत्माओं के *प्रार्थना की आवाज* सुनो तो कभी भी अलबेलेपन की नींद नहीं आयेगी।)
° अब *सदा जागती ज्योत* बन अलबेलेपन की नींद को तलाक दो और साक्षात्कार मूर्त बनो।

3. तुम्हारे जैसा _____ तो किसको मिल न सके। तुम अभी तैयार हो रहे हो ____ -धाम में आने के लिए। भारत जब स्वर्ग था तो उन जैसा _____ खण्ड कोई होता नहीं। जब बाप आते हैं तब ही _____ राज्य स्थापन होता है।
°सुख, सुख, पावन, ईश्वरीय

4. निर्वाणधाम में जाने के लिए _____ पावन बनना है। रचना के आदि-मध्य-अन्त को _____ समझकर नई दुनिया में ऊंच पद पाना है।
°पूरा, पूरा

5. बाबा ने कहा जिन्हे ज्ञान का अभ्यास नहीं, उनको ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए। सिर्फ *एक मुख्य बात समझानी* है। कौन-सी?
° बाबा ने समझाया है *अपने को आत्मा समझ मामेकम् याद करो*, बस, और कुछ बात ही नहीं करना चाहिए।

6. यह चित्र आदि बनाने में भी बड़ी बुद्धि चाहिए। तो उनमें *क्या लिख सकते?* (2)
° बाबा ने कहा था-हर एक चित्र के ऊपर लिखा हुआ हो *शिव भगवानुवाच*।
° यह भी लिखना चाहिए कि *भारत जो स्वर्ग था सो फिर नर्क* जैसा कैसे बना है, आकर समझो। *भारत सद्गति में था, अब दुर्गति* में है। अब सद्गति को पाने के लिए बाप ही नॉलेज देते हैं। यहा तो तुम्हें *रूहानी बाप रूहानी नॉलेज पढ़ाते* हैं और रूह पढ़ती है।

7. पुकारते हैं *तुम मात-पिता…. तुम्हारी कृपा से सुख घनेरे*, इसका अर्थ क्या है?
° अब *बाप तुमको स्वर्ग के सुख लिए पढ़ा रहे*, जिसके लिये तुम पुरूषार्थ कर रहे हो। जो करेगा वह पायेगा। (पावन दुनिया तो एक स्वर्ग ही है। सतयुग में हम सतोप्रधान थे।)

8. तुम्हारा *सबसे अच्छा यादगार* मन्दिर देलवाड़ा मन्दिर है। कैसे? (2)
° नीचे *तपस्या में बैठे* हैं। (तुम जानते हो अभी हम राजयोग सीख रहे हैं फिर नई दुनिया में जायेंगे। वह जड़ मन्दिर, तुम चैतन्य में बैठे हो।)
° मुख्य मन्दिर यह ठीक बना हुआ है। *स्वर्ग की राजाई* दिखाई है (कहाँ दिखायें, इसलिए छत में स्वर्ग को दिखाया है। इस पर बहुत अच्छा समझा सकते हो। बोलो, भारत ही स्वर्ग था फिर अब भारत नर्क है।)

9. सतयुग में लक्ष्मी-नारायण का राज्य था तो वहाँ *9 लाख* होते हैं। फिर *इतनी सब आत्मायें कहाँ गई?*
° ब्रह्म में वा पानी में तो नहीं लीन हो गई। वह सब *मुक्तिधाम में* रहती हैं। हर एक *आत्मा* अविनाशी है। उनमें *अविनाशी पार्ट* नूंधा हुआ है जो कभी मिट नहीं सकता। (आत्मा विनाश हो न सके। आत्मा तो बिन्दी है। बाकी निर्वाण आदि में कोई भी जाता नहीं, सबको पार्ट बजाना ही है।)

10. *बाप का पार्ट* पिछाड़ी में है। क्या पार्ट है? (2)
° जब सब आत्मायें आ जाती हैं तब मैं *आकर सबको ले जाता* हूँ।
° *नई दुनिया की स्थापना* फिर पुरानी दुनिया का विनाश। यह भी ड्रामा में नूंध है।

11. बरोबर यह बात तो ठीक है, परमात्मा सर्वव्यापी कैसे हो सकता। भगवान तो _____ है, उनसे _____ मिलता है। बाप जो समझाते हैं उसको _____ करना है।
° _बाप_, _वर्सा_, _धारण_

12. जो आदि सनातन देवी-देवता धर्म वाले थे, उन्हे ही टच होंगा। और इसी समय फाउन्डेशन लगाना पड़ता। उसमें मुख्य है *पवित्रता* , वह *कैसे धारण* होंगी? (2)
° बहन-भाई तो बनाना ही पड़े। (हम एक बाप के बच्चे सब *आत्मायें भाई-भाई* हैं। फिर भाई-बहन बनते हैं।)
° भगवान बाप ही पावन होने की युक्ति बताते हैं। भगवानुवाच *मामेकम् याद* करो। मैं *पतित-पावन* हूँ, मुझे याद करने से तुम्हारे *विकर्म विनाश* होंगे और *मुक्तिधाम* में आ जायेंगे। (बाप कहते देह के सब धर्म छोड़ मुझे याद करो तो तुम सतोप्रधान बन जायेंगे। मैं गुजराती हूँ, फलाना हूँ – यह सब छोड़ो। *अपने को आत्मा समझो* और बाप को याद करो। यह है योग अग्नि। पवित्र बनने बिगर घर जा न सकें।)

13. अब जैसे कि नई सृष्टि की स्थापना हो रही है, पहले-पहले हैं ____ । नई सृष्टि की स्थापना में प्रजापिता ब्रह्मा तो जरूर चाहिए। ब्रह्मा द्वारा ______ होंगे। इनको रूद्र ज्ञान यज्ञ भी कहा जाता है, इसमें _____ जरूर चाहिए। प्रजापिता ब्रह्मा की औलाद जरूर चाहिए। वह है ग्रेट-ग्रेट ग्रैन्ड फादर। _____ हैं पहले नम्बर में चोटी वाले।
°ब्राह्मण, ब्राह्मण, ब्राह्मण, ब्राह्मण

14. बाप ही बच्चों को ज्ञान का तीसरा नेत्र देते, जिससे तुमको सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान मिला है। तो *पुरानी दुनिया (भक्ति) को ब्रह्मा की रात क्यों कहते?*
° (क्योंकि) भक्ति मार्ग में *दर-दर ठोकरें* खानी होती हैं। (अनेक प्रकार के जप-तप-यज्ञ करते, शास्त्र आदि पढ़ते हैं), जिस कारण ही ब्रह्मा की रात कहा जाता है। आधाकल्प रात, आधाकल्प दिन। (तुम कल्प पहले भी ब्राह्मण थे और देवता बने थे, जो बने थे वही फिर बनेंगे। आदि सनातन देवी-देवता धर्म के तुम हो। तुम ही पूज्य और पुजारी बनते हो। फिर पूज्य पावन देवी-देवता बनना हैं।)

15. सतगुरू है ही एक – सबकी सद्गति करने वाला। बाप कहते हैं मैं तुमको सब ______ का सार समझाता हूँ। ज्ञान, भक्ति फिर भक्ति का है ____। यह पुरानी दुनिया अब खत्म होनी है इसलिए इस दुनिया का ___ करना है। दुनिया को छोड़कर कहाँ जाना नहीं है, लेकिन इसे बुद्धि से _____ है।
°वेदों-शास्त्रों, वैराग्य, _संन्यास_, _भूलना_

Answers from Sakar Murli 14-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 14-09-2020*

1. *संगमयुग पर श्रेष्ठ आत्मा* कौन है?
° जो *सदा बेफिक्र बादशाह* है।

2. जो *बाप समान वरदानी मूर्त* बच्चे हैं, उनकी निशानी क्या है? (3)
° वह कभी किसी की *कमजोरी को नहीं देखते* (वह सबके ऊपर रहमदिल होते हैं।)
° जैसे बाप किसी की कमजोरियां दिल पर नहीं रखते, ऐसे वरदानी बच्चे भी किसी की कमजोरी *दिल में धारण नहीं* करते।
° वे हरेक की *दिल को आराम देने वाले मास्टर दिलाराम* होते हैं। (इसलिए साथी हो या प्रजा सभी उनका गुणगान करते हैं। सभी के अन्दर से यही आशीर्वाद निकलती है कि यह हमारे सदा स्नेही, सहयोगी हैं।)

3. *सतयुग* में सीलॉन, बर्मा, कराची आदि होंगे?
° नहीं, कुछ भी नहीं। (सतयुग में तुम सब *मीठी नदियों के किनारे पर* रहते हो। खेती बाड़ी आदि सब होती है, सृष्टि तो बड़ी है। *मनुष्य बहुत थोड़े* रहते हैं फिर पीछे वृद्धि होती है।)

4. पढ़ा हुआ सब भूल सिर्फ *एक बात* कौन-सी धारण करनी है? और कुछ न भी समझो, सिर्फ *एक बात* कौन-सी बुद्धि में रखो?
° मीठे बच्चे बाप को *याद* करो। तुम कहते भी थे ना बाबा आप आयेंगे तो हम *वारी* जायेंगे। तुम्हें फिर हमारे पर *कुर्बान* जाना है। (लेन-देन होती है ना। बाप को कहते, हम पुराना सब कुछ आपको देते हैं। यह सब खत्म होना है। आप हमको फिर नई दुनिया में देना। बाप आते ही हैं सबको ले जाने।)
° और कुछ न समझो सिर्फ एक बात बुद्धि में रखो – *एक शिवबाबा दूसरा न कोई* । (यह आत्मा ने कहा – बाबा, हम आपको ही याद करेंगे। यह तो सहज है ना। हाथों से कर्म करते रहो और बुद्धि से बाप को याद करते रहो।)

5. जो सर्विसएबुल हैं, उनका नाम बाला है। बाबा ने यहां *देहली* के कौन-से *2 अनन्य रत्न* याद किये?
° झट नाम लेंगे *जगदीश भाई* का। तुम्हारे लिए मैगजीन भी निकालते हैं। उसमें सब कुछ आ जाता है। अनेक प्रकार की प्वाइंट्स लिखते हैं, *बृजमोहन भाई* भी लिखते हैं।

6. *लिखने* की सेवा से क्या लाभ है?
° लिखना कोई मासी का घर थोड़ेही है। जरूर *विचार सागर मंथन* करते हैं, अच्छी सर्विस करते हैं। कितने *लोग पढ़कर खुश* होते हैं। बच्चों को भी *रिफ्रेशमेंट* मिलती है।

7. तुम हो संगमयुगी, _______ बन रहे हो। जानते हो पहले नम्बर में पुरूषोत्तम यह ________ हैं ना। अब फिर स्थापना होती है। फाउन्डेशन लगता है ना। ______ कितना छोटा होता है फिर उनसे कितना बड़ा ______ बढ़ जाता है।
°पुरूषोत्तम, लक्ष्मी-नारायण, कलम, झाड़

8. इस *सच्ची-सच्ची गीता पाठशाला* की कौन-सी 3 अनोखी बातें बाबा ने सुनाई?
° पाठशाला में कभी बूढ़े आदि पढ़ते हैं क्या? यहाँ तो *बूढ़े, जवान आदि सब पढ़ते* हैं।
° और जगहों को पाठशाला नहीं कहेंगे। कोई भी जो सतसंग हैं, *एम ऑब्जेक्ट (क्या बनेंगे)* कुछ नहीं है। (सत् तो एक बाप ही है, जिसके लिए कहा जाता है संग तारे…. कुसंग बोरे…..। कुसंग कलियुगी मनुष्यों का।)
° *सत् का संग* तो एक ही है। (अभी तुमको वण्डर लगता है। सारे सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान कैसे बाप देते हैं, तुमको तो खुशी होनी चाहिए।)

9. बाप कहते हैं तुम बच्चे कितने *भाग्यशाली* हो। यहां ऋषि-मुनियों की बात करते बाबा ने हम बच्चों को *कौन-सा टाइटल दिया?*
° तुम हो *राजऋषि*। *ऋषि* अर्थात् पवित्र। तुम स्वर्ग के *राजा* बनते हो तो पवित्र जरूर बनना पड़े। (सतयुग-त्रेता में जिनका राज्य था उनका ही फिर होगा। तुम अभी कहते हो हम श्रीमत पर अपना राज्य स्थापन कर रहे हैं। सतयुग आना है, कलियुग जाना है।)

10. पुराना शरीर छोड़ फिर जाए दूसरा लेते, इसमें *रोने की बात* है। _(सही / गलत)_
° गलत (इसमे रोने की क्या दरकार है। यह तुम जानते हो- *ड्रामा अनादि बना हुआ है। हर एक को पार्ट बजाना ही है।* बाप ने समझाया है – सतयुग में हैं नष्टोमोहा। मोहजीत की भी कहानी है ना।)

11. इस *बेहद की दुनिया* (ड्रामा) को बाबा ने कौन-से 5 नाम दिये?
° यह है बेहद का *घर*, *माण्डवा* अथवा *स्टेज़* , इनको *कर्मक्षेत्र* भी कहा जाता है। (कर्म तो जरूर करना होता है। सब मनुष्यों के लिए यह कर्मक्षेत्र है। सबको कर्म करना ही है, पार्ट बजाना ही है। पार्ट हर एक आत्मा को पहले से मिला हुआ है।)
° अनेक वैराइटी धर्मों का झाड़ है मनुष्यों का। (एक सूरत न मिले दूसरे से। बना-बनाया ड्रामा है ना। एक जैसा पार्ट कोई का हो नहीं सकता। इनको कहा जाता है *कुदरती बना-बनाया बेहद का ड्रामा* ।)

12. यह जो दु:ख-सुख का खेल चलता, यह *दु:ख-सुख सब परमात्मा ही देते* हैं। _(सही / गलत)_
° गलत (यह हर एक के कर्मों के हिसाब का खेल है। बाप किसी को भी दु:ख नहीं देते। *वह तो आते ही हैं सुख का रास्ता बताने।* बाबा कहते हैं – बच्चे, मैंने किसी को भी दु:खी नहीं किया है। यह तो तुम्हारे ही कर्मों का फल है।)

13. ड्रामा प्लैन अनुसार मनुष्य तो कहेंगे हमारा (ड्रामा में) दोष क्या है। तुम्हारा भी *कोई दोष नहीं* है। _(सही / गलत)_
° *सही* (यह भी ड्रामा है। राम राज्य, रावण राज्य का खेल बना हुआ है। खेल में कोई हार जाते हैं तो उनका दोष थोड़ेही है। यह तो अनादि बना बनाया ड्रामा है। उनको कुछ कर थोड़ेही सकते हैं। कोई कहते हैं हमने गुनाह क्या किया जो ऐसा पार्ट रखा है। अब गुनाह की तो बात नहीं। यह तो पार्ट है।)

14. धनवान आदमी दुनिया का चक्र लगाते हैं। *सारी दुनिया* देख कर आते हैं। _(सही / गलत)_
° गलत (यहाँ *सारी दुनिया को कोई देख न सके।* हाँ सतयुग में देख सकते हैं क्योंकि सतयुग में है ही एक राज्य, इतने थोड़े राजायें होंगे, यहाँ तो देखो *कितनी बड़ी दुनिया है।* इतनी बड़ी दुनिया का चक्र कौन लगाये।)

15. पुकारते है बाबा आकर इस पाप की पुरानी _____ दुनिया से नई ______ पुण्य की दुनिया में ले चलो। सूर्य चांद बत्तियों के होते हुए भी _____ कहा जाता है। सतयुग त्रेता को कहा जाता है ____ और भक्ति मार्ग को कहा जाता है ____ ।
°कलियुगी, सतयुगी, अन्धियारा, दिन, रात

16. बाप कहते हैं मैं जो हूँ, जैसा हूँ, ऐसा कोई नहीं जानते हैं। अभी हम बाप को पूरी रीति जान गये। शिवलिंग की पूजा भी करते हैं। जरूर यह जड़ है तो _____ भी होगा! भगवान तो रचता है _____ में। उनकी निशानी है सिर्फ पूजा के लिए। शिव काशी के मंदिर में जाते हैं, किसको पता थोड़ेही है भगवान _____ है। हम भी उनके बच्चे हैं। बाप कहते हैं तुम हमको बुलाते हो कि दु:ख की दुनिया से ले जाओ। अब मैं आया हूँ तो मेरा ______ चाहिए ना। बाप बच्चों को बैठ समझाते हैं, अच्छी ____ मिलती है तो वह लेनी चाहिए ना।
°चैतन्य, ऊपर, निराकार, सुनना, मत

17. एक ____ ही है, जिसने किसी का भी राज्य छीना नहीं है क्योंकि _____ असुल में अहिंसक है ना। तुम _____ -वासियों को तो बाप विश्व का मालिक बनाते हैं।
°भारत, भारत, भारत

18. हमारा *गुरूद्वारा* कौन-सा है?
° तुम्हारा गुरूद्वारा है – *मुक्ति और जीवनमुक्ति धाम* , सतगुरू द्वार। (गुरू का द्वार अर्थात् घर कहेंगे ना। सतगुरू आकर *मुक्ति-जीवनमुक्ति का द्वार* खोलते हैं। अकाल-मूर्त हैं ना। जिसको काल भी खा नहीं सकता। आत्मा है ही बिन्दी, उनको काल कैसे खायेगा।)

19. ______ का गुण धारण कर माया के विघ्नों में पास होना है। अनेक आपदायें आयेंगी, अत्याचार होंगे-ऐसे समय पर _____ करते बाप की याद में रहना है, सच्ची _____ करनी है।
°सहनशीलता, सहन, कमाई

20. अभी कौन-सा *समय* आने वाला है? (आ गया है!)
° अभी तो सुबह को क्लास आदि में जाते हो, सेन्टर्स पर। वह भी समय आयेगा जो तुम *बाहर निकल भी नहीं सकेंगे।* (दिन-प्रतिदिन जमाना बिगड़ता जाता है और बिगड़ना है। दु:ख के दिन बहुत ज़ोर से आयेंगे। रक्त की नदियाँ भी बहेंगी। कहाँ भी सेफ्टी नहीं रहेगी।)

Answers from Sakar Murli 12-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 12-09-2020*

1. *ज्ञानी तू आत्मा* कौन है? _(स्लोगन)_
° वह है जो धोखा खाने से *पहले परखकर* स्वयं को *बचा ले* ।

2. हम ब्रह्माकुमार-कुमारियां भी *मास्टर आदि देव, आदि रत्न* है। यह समझने से क्या प्राप्तियां हैं? (2)
° यह समझने से ही अपने *जीवन के मूल्य को जान सकेंगे* क्योंकि आदि रत्न अर्थात् प्रभू के रत्न, *ईश्वरीय रत्न* – तो कितनी वैल्यु हो गई।
° यह समझकर हर कार्य करो तो *समर्थ भव का वरदान* मिल जायेगा। (कुछ भी व्यर्थ जा नहीं सकता।)

3. सतयुग में कौन-सी बाते *100%* है ? (5) और कौन-सी बाते *एक* है? (4)
° तुम जानते हो इन लक्ष्मी-नारायण के राज्य में *एक* देवी-देवता *धर्म* था। एक *राज्य* , एक *मत* , एक *भाषा*।
° 100 परसेन्ट *प्योरिटी* , *पीस* , *प्रासपर्टी* ( *सुख* , *सम्पत्ति* ) थी।

4. जबकि सत् शिवबाबा, सत् शिव टीचर, सत् शिव गुरू हमे *ऊंच ते ऊंच श्रीमत* पर एक मत बना रहे। तो उस पर चलना चाहिए। तो यह *श्रीमत हमे क्या कहती?* (4)
° बाप कहते हैं एक तो *देही-अभिमानी* बनो और बाप को *याद* करो। (जितना याद करेंगे, अपना कल्याण करेंगे।)
° श्रीमत क्या सिखलाती है? *सहज राजयोग* । राजाई के लिए पढ़ा रहे हैं। अपने बाप के द्वारा सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त को जानकर फिर *दैवीगुण भी धारण करने हैं* । (बाप का कभी सामना नहीं करना चाहिए,अहंकार वश। फिर नशा ही उड़ जाता।)
° बाप कहते हैं गृहस्थ व्यवहार में रहते *सिर्फ एक जन्म पवित्र* रहो। (तुम जन्म-जन्मान्तर तो पतित रहे हो। अब मैं आया हूँ तुमको पावन बनाने। यह अन्तिम जन्म पावन बनो। सतयुग-त्रेता में तो विकार होते ही नहीं।)

5. बाबा कितनी प्वाइंट्स देते हैं-सदा यही _____ रहे कि हम श्रीमत पर अपनी सतयुगी राजधानी स्थापन कर रहे हैं (हम ही देवी-देवता थे), तो _____ खुशी रहेगी। बच्चों को सदैव नशा रहना चाहिए। ______ नशा!
°स्मृति, अपार, नारायणी

6. *हमारी बात मानी नहीं गई* । तो थोड़ा बिगड़ना चाहिए। _(सही / गलत)_
° *गलत* (यह तो होता ही है। कोई किस तरफ, कोई किस तरफ, फिर *मैजारिटी* वाले को उठाया जाता है, इसमें रंज होने की बात नहीं। बच्चे रूठ पड़ते हैं। हमारी बात मानी नहीं गई। *अरे, इसमें रूठने की क्या बात है* । बाप तो सबको रिझाने वाला है।)

7. हम तो *राम-सीता* बनेंगे। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे थोड़ेही कहना चाहिए। तुम्हारी *एम ऑब्जेक्ट ही है नर से नारायण बनना*। तुम फिर राम सीता बनने में खुश हो जाते हो, *हिम्मत* दिखानी चाहिए ना।)

8. बाबा ने आज *कुमारियों-माताओं का बहुत उमंग बढ़ाया* । किन शब्दों में? (4)
° माताएं पढ़ी हुई होती तो *कमाल* कर दिखाती।
° तुमने श्रीमत पर राजाई स्थापन की थी। *नारी से लक्ष्मी बनी थी* तो कितना नशा रहना चाहिए।
° तुम *माताओं का संगठन* तो बहुत अच्छा होना चाहिए (हिम्मत भी हो)। एम ऑब्जेक्ट तो सामने हैं। (बाप कहते मैं तुमको ऐसा लक्ष्मी-नारायण बनाता तो तुम्हें भी औरों पर रहमदिल बनना चाहिए। जब अपना कल्याण तब दूसरे का भी कर सकेंगे।)
° बाप कहते हैं मैं तुम पर उपकार करता हूँ। तुम फिर *मुझ पर अपकार करते हो* । भारत का हाल देखो क्या है। (हमे श्रेष्ठ बन सबको श्रेष्ठ बनाना है।)

9. बाबा ने कहा *बूढ़ी माताओं* को भी सिखलाकर तैयार करना चाहिए (उनका भी भाग्य बन जाए)। वह *प्रदर्शनी में* क्या समझा सकते? (3)
° कोई को भी यह चित्र दिखाकर बोलो इनका राज्य था ना। अभी तो है नहीं। बाप कहते हैं-अब तुम *मुझे याद करो तो तुम पावन बनकर पावन दुनिया में* चले जायेंगे। अब पावन दुनिया स्थापन हो रही है। (कितना सहज है। बुढ़ियाँ बैठकर प्रदर्शनी पर समझायें तब नाम बाला हो।)
° कृष्ण के चित्र में भी लिखत बहुत अच्छी है। बोलना चाहिए *यह लिखत जरूर पढ़ो*। इनको पढ़ने से ही *तुमको नारायणी नशा अथवा विश्व के मालिकपने का नशा चढ़ेगा* ।(सामने एम ऑब्जेक्ट को देखकर ही खुशी होती है। हम यह शरीर छोड़ जाए विश्व के मालिक बनेंगे। जितना याद में रहेंगे उतना पाप कटेंगे।)
° *देखो लिफाफे पर छपा है* – वन रिलीजन, वन डीटी किंगडम, वन लैंगवेज….. वह जल्दी स्थापन होगी। (बुढ़ियों को ऐसा सिखलाकर होशियार बनाओ जो प्रदर्शनी पर बाबा कहे कि 8-10 बुढ़ियों को भेजो तो झट आ जाएं। जो करेगा सो पायेगा।)

10. श्रीकृष्ण, सीढ़ी वा *लक्ष्मी-नारायण के चित्र* पर क्या लिख सकते? (4)
° तुम दिखाते हो विनाश के बाद *श्रीकृष्ण आ रहा है* । क्लीयर लिख देना चाहिए।
° *सतयुगी* एक ही देवी-देवताओं का राज्य, एक भाषा, *पवित्रता, सुख, शान्ति फिर से स्थापन हो रही है।* (द्वापर-कलियुग में सब नर्कवासी हैं। अभी तुम संगमयुगी हो।)
° आदि सनातन देवी-देवता धर्म, सुख-शान्ति का राज्य स्थापन हो रहा है – *त्रिमूर्ति शिवबाबा की श्रीमत पर*
(इसमें सिर्फ लिखना है एक ही सत्य त्रिमूर्ति शिवबाबा, सत्य त्रिमूर्ति शिव टीचर, सत्य त्रिमूर्ति शिव गुरू। त्रिमूर्ति अक्षर नहीं लिखेंगे तो समझेंगे परमात्मा तो निराकार है, वह टीचर कैसे हो सकता है।)
° यह स्थापना हो रही है। (बाप आये हैं *ब्रह्मा द्वारा एक धर्म की स्थापना* बाकी सबका विनाश करा देंगे।)

11. *छोटे-छोटे अक्षर* में लिखत होनी चाहिए। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे-ऐसे बड़े-बड़े अक्षर में बड़े-बड़े चित्र हों। छोटे बच्चे छोटे चित्र पसन्द करते हैं। *अरे, चित्र तो जितना बड़ा हो उतना अच्छा।*)

12. यह लक्ष्मी-नारायण का चित्र कहां-कहां *प्रयोग* कर सकते? (2)
° *चक्कर पर जाते हैं* तो यह चित्र लक्ष्मी-नारायण का ले जाना पड़े।
° लक्ष्मी-नारायण का चित्र *टीन की सीट पर बनाकर* हर एक जगह पर रखना है।

13. यह तो बाप-टीचर-गुरू भी है। तो वो *गुरू* अच्छे की यह सतगुरू? और वह *टीचर* अच्छे की यह सुप्रीम टीचर?
° (गुरू) वो गुरू लोग शास्त्र सुनाते हैं। उनको टीचर नहीं कहेंगे वह कोई ऐसे नहीं कहते कि हम दुनिया की हिस्ट्री-जॉग्राफी सुनाते हैं। बाप तुमको *शास्त्रों का सार* समझाते हैं *और फिर वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी भी* बतलाते हैं।
° (टीचर) उस टीचर से तुम कितना भी पढ़ो, क्या कमायेंगे? सो भी नसीब। पढ़ते-पढ़ते कोई एक्सीडेंट हो जाए, मर जाए तो पढ़ाई खत्म। यहाँ तुम *यह पढ़ाई जितनी भी पढ़ेंगे, वह व्यर्थ जायेगी नहीं।*

14. बाप को याद (और सर्व प्राप्तियों का अनुभव) करने के बदले और *दुनियावी बातों में पड़ जाते* हैं, इससे ही सारी गड़बड़ होती। तो इससे बचाने लिए बाबा ने कौन-सी शिक्षायें दी? (3)
° अरे *तुम गोरे बनते हो* फिर काले, तमोप्रधान से क्यों दिल लगाते हो। (इस कब्रिस्तान से दिल नहीं लगानी है। हम तो बाप से *वर्सा ले रहे* हैं।)
° पुरानी दुनिया से दिल लगाना माना *जहन्नुम (नर्क, दोज़क)* में जाना है। (बाप आकर दोज़क से बचाते हैं फिर भी मुंह दोज़क तरफ क्यों कर देते?
° पुरानी दुनिया से बिल्कुल दिल नहीं लगानी चाहिए। *कोई से दिल लगाई और मरे।*

15. यह ज्ञान का भोजन किन्हें *हज़म* नहीं हो सकता है?
° जो भूलें करके, छी-छी ( *पतित* ) बनकर फिर क्लास में आकर बैठते हैं, उन्हें ज्ञान हज़म नहीं हो सकता। (वह मुख से कभी भी नहीं कह सकते कि भगवानुवाच काम महाशत्रु है। उनका दिल अन्दर ही अन्दर खाता रहेगा। वह आसुरी सम्प्रदाय के बन जाते हैं।)
° अमृत पीते-पीते विष खा लेते हैं तो *100 गुणा काले* बन जाते। (हड्डी-हड्डी टूट जाती। गिरने से कल्प-कल्पान्तर का घाटा बहुत-बहुत पड़ जाता है।)

Answers from Sakar Murli 11-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 11-09-2020*

1. करनकरावनहार की _____ से भान और अभिमान को समाप्त करो।
°स्मृति

2. गृहस्थ व्यवहार में रहते कमल फूल समान, सहनशील, युक्तियुक्त रहना है। और बाबा ने कहा *योगयुक्त* बच्चे जिम्मेवारियों, माया, वा मन के *बन्धन से मुक्त* होंगे। तो ऐसी स्थिति बनानी कैसे है? (2)
° लौकिक जिम्मेवारी तो खेल हैं, इसलिए *डायरेक्शन प्रमाण खेल की रीति से हंसकर खेलो* तो कभी छोटी-छोटी बातों में थकेंगे नहीं। (अगर बंधन समझते हो तो तंग होते हो। क्या, क्यों का प्रश्न उठता है।)
° *जिम्मेवार बाप है आप निमित्त हो* । इस स्मृति से बन्धनमुक्त बनो तो योगयुक्त बन जायेंगे।

3. कोई-कोई को बहुत _____ होती है। ओहो! अब बाबा आये हैं, हम तो चले अपने ______ -धाम। बाप कहते हैं – अभी पूरी _______ स्थापन ही कहाँ हुई है। तुम इस समय हो ______ सन्तान फिर होंगे देवतायें। डिग्री कम हो गई ना। मीटर में प्वाइन्ट होती हैं, इतनी प्वाइन्ट कम।
°खुशी, सुख, राजधानी, ईश्वरीय

4. यह ड्रामा का _____ एक्यूरेट चल रहा है, जिसका जो _____ जिस घड़ी होना चाहिए, वही _____ हो रहा है, यह महीन बात यथार्थ रीति समझना है।
°खेल, पार्ट, रिपीट

5. आज मुरली में *परमात्मा* शिवबाबा की कौन-कौन सी *महिमा* सुनाई है? (3)
° *रूहानी बाप एक* को ही कहा जाता है। बाकी सब हैं आत्मायें। उनको *परम आत्मा* कहा जाता है। बाप कहते हैं मैं भी हूँ आत्मा। परन्तु मैं *परम सुप्रीम सत्य* हूँ। मैं ही *पतित-पावन, ज्ञान का सागर* हूँ। (बाप कहते हैं मैं आता ही हूँ भारत में, बच्चों को विश्व का मालिक बनाने।)
° *पारलौकिक बाप*
° बाप को कहा जाता है *रांझू रमज़बाज* । सब उनको याद करते हैं ना – हे *भगवान* दु:ख हरो, रहम करो, लिबरेट करो। वो *लिबरेटर* बाप सबका एक ही है।

6. बाबा ने कहा तुम ही मालिक थे ना। अब स्मृति आई है। बच्चों को स्मृति दिलाते हैं – तुम पहले-पहले सतयुग में आये फिर पार्ट बजाते, 84 जन्म भोग अब पिछाड़ी में आ गये हो। फिर बाबा ने हमे *आत्म-अभिमानी* कैसे बनाया? (6)
° तुम अपने को आत्मा समझो। *आत्मा अविनाशी है*, शरीर विनाशी है। आत्मा ही *देह के साथ आत्माओं से बात* करती है। (आत्म-अभिमानी हो करके नहीं रहते हैं तो जरूर देह-अभिमान है। मैं आत्मा हूँ, यह सब भूल गये हैं। कहते भी हैं पाप आत्मा, पुण्य आत्मा, महान् आत्मा।)
° *आत्मा जब शरीर में प्रवेश करती है तो नाम पड़ता* है क्योंकि शरीर से ही पार्ट बजाना होता है। (तो मनुष्य फिर शरीर के भान में आ जाते हैं, मैं फलाना हूँ।)
° अभी समझते – हाँ मैं आत्मा हूँ। हमने *84 का पार्ट* बजाया है। अभी हम आत्मा को जान गया हूँ। हम आत्मा *सतोप्रधान* थी, फिर अभी *तमोप्रधान* बनी हूँ।
° बाबा बार-बार तुम्हें कहते हैं पहले अपने को आत्मा समझो। *मैं बाबा का हूँ।*
° बाप कहते हैं – बच्चे, देह सहित देह के सब धर्मों को त्याग मुझे याद करो। अभी तुम सम्मुख बैठे हो। अपने को *देह नहीं समझना है, मैं आत्मा हूँ*।
° हम आत्मा *शान्त स्वरूप* हूँ। इस *शरीर द्वारा कर्म* करती हूँ। *शान्ति तो हमारा स्वधर्म* है। (बहुत कहते हैं मन की शान्ति हो। अरे आत्मा तो स्वयं शान्त स्वरूप है, उनका *घर ही है शान्तिधाम* । तुम अपने को भूल गये हो।)

7. हम आत्मा *सतोप्रधान* थी, फिर अभी *तमोप्रधान* बनी हूँ। इसके लिए बाबा ने कौन-सा *मिसाल* दिया?
° बाप आते ही तब हैं जब सब आत्माओं पर कट लगी हुई है। *जैसे सोने में खाद पड़ती है* ना। तुम पहले सच्चा सोना हो फिर चांदी, तांबा, लोहा पड़कर तुम बिल्कुल काले हो गये हो। (यह बात और कोई समझा न सके। सब कह देते हैं आत्मा निर्लेप है। खाद कैसे पड़ती है, यह भी बाप ने समझाया है बच्चों को। बाप कहते हैं मैं आता ही भारत में हूँ। जब बिल्कुल तमोप्रधान बन जाते हैं, तब आता हूँ।)

8. तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट ही है – यह ______ बनने की। बन गये फिर तो _____ की दरकार नहीं। बाप जो पढ़ाने वाला है, उनको _____ तो करना चाहिए। तुमको सब सहज कर दिया है। इन लक्ष्मी-नारायण ने भी ______ बनकर ही यह वर्सा लिया है, जो अभी तुम ले रहे हो।
°लक्ष्मी-नारायण, पढ़ाई, याद, आस्तिक

9. अब तुम्हारी बुद्धि में सीढ़ी का ज्ञान है। _____ कला, सर्व का भला। फिर धीरे-धीरे उतरती कला होती है। शुरू से लेकर इस चक्र को अच्छी रीति समझना है। इस समय तुम्हारी चढ़ती कला होती है क्योंकि बाप ____ है ना। बाबा _____ बच्चे कहते रहते हैं और बच्चे फिर बाबा-बाबा कहते रहते हैं।
°चढ़ती, साथ, मीठे-मीठे

10. तुम बच्चों का *प्रभाव* कब निकलेगा? अभी तक किस शक्ति की कमी है?
° जब *योग में मजबूत* होंगे तब प्रभाव निकलेगा। अभी वह जौहर नहीं है। *याद से ही शक्ति* मिलती है। ज्ञान तलवार 🗡️ में *याद का जौहर* चाहिए, जो अभी तक कम है। (अगर अपने को *आत्मा समझ बाप को याद* करते रहो तो बेड़ा पार हो जायेगा। यह सेकण्ड की ही बात है।)

11. आजकल कहते हैं एक राज्य, *एक धर्म, एक भाषा* हो। वन कास्ट, वन रिलीजन, वन गॉड। तो इस टॉपिक पर हम क्या लिख सकते?
° लिखना है। लक्ष्मी-नारायण का चित्र बनाते हो, ऊपर में लिख दो *सतयुग में जब इन्हों का राज्य था तो वन गॉड, वन डीटी रिलीजन था*

12. तुम्हारे पास कोई आते हैं, तो उन्हें *एक साथ समझा देना* है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (उनको अलग-अलग समझाओ, पहले एक-एक को अलग-अलग बैठ समझाते थे।)
° बहुत मनुष्य अटेन्शन नहीं देते। अटेन्शन उनका जायेगा जो हमारे *ब्राह्मण कुल का* होगा। और कोई नहीं समझेंगे इसलिए बाबा कहते हैं अलग-अलग बिठाओ फिर समझाओ। *फार्म भराओ* तो मालूम पड़ेगा क्योंकि कोई किसको मानने वाला होगा, कोई किसको। (सबको इकट्ठा कैसे समझायेंगे। अपनी-अपनी बात सुनाने लग पड़ेंगे।)

13. तुमसे कोई पूछे *रचयिता और रचना के आदि-मध्य-अन्त* को जानते हो? क्या कहेंगे?
° तो *तुम झट कहेंगे हाँ*, सो भी तुम सिर्फ अभी ही जान सकते हो फिर कभी नहीं। (बाबा ने समझाया है तुम ही मुझ रचयिता और रचना के आदि-मध्य-अन्त को जानते हो। लक्ष्मी-नारायण भी नहीं जानते। यह तो वण्डर है।)
° तुम कहते हो हमारे में ज्ञान है। तुम्हारी एम ऑब्जेक्ट ही है – यह लक्ष्मी-नारायण बनने की।
( *बाप ही आकर अपना परिचय देते हैं और रचना के आदि-मध्य-अन्त का राज़ समझाते* हैं। बाप है बेहद का मालिक रचता।)

14. मन्दिरों आदि को देखते सदा यह स्मृति रहे कि यह सब हमारे ही _____ हैं। अब हम ऐसा ______ बन रहे हैं। बच्चों को तो अब ______आती होगी, रावण का चित्र कैसा बनाया है।
°यादगार, लक्ष्मी-नारायण, हंसी

15. इस समय सभी मनुष्य मात्र पुकारते-हे पतित-पावन आकर हमको पावन बनाओ। दु:ख हर कर सुख का रास्ता बताओ। कहते भी हैं भगवान जरूर कोई वेष में आ जायेगा। तो *बाबा कौन-से वेष में आये हैं?*
° अब कुत्ते-बिल्ली, ठिक्कर-भित्तर आदि में तो नहीं आयेंगे। गाया हुआ है *भाग्यशाली रथ पर आते हैं* । (बाप खुद कहते हैं मैं इस साधारण रथ में प्रवेश करता हूँ। यह अपने जन्मों को नहीं जानते हैं, तुम अभी जानते हो। इनके बहुत जन्मों के अन्त में जब वानप्रस्थ अवस्था होती है तब मैं प्रवेश करता हूँ।)

16. *ब्रह्मा बाबा* के कौन-से टाइटल्स आज मुरली में आये हैं? (5)
° *प्रजापिता* ब्रह्मा,
सगंमयुगी वन्डरफुल *अलौकिक बाप*, ग्रेट-ग्रेट ग्रैण्ड फादर, आदि देव, एडम….।

Answers from Sakar Murli 10-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 10-09-2020*

1. जहाँ अभिमान होता है वहाँ ______ की फीलिंग जरूर आती है।
°अपमान

2. *सतयुग की धन-समृद्धि* का बाबा ने बहुत सुन्दर वर्णन किया। याद कीजिए। (5)
° स्वर्ग में तो *सोने के महल* बनते हैं। वहाँ तो अथाह धन है।
° दीवारों में भी *हीरे-जवाहरात* लगे रहते हैं। हीरों की *जड़त* का शौक रहता है।
° वहाँ धन की कमी है नहीं। *कारून का खजाना* रहता है। (अल्लाह अवलदीन का एक खेल दिखाते हैं। ठका करने से महल निकल आते हैं। यहाँ भी दिव्य-दृष्टि मिलने से स्वर्ग में चले जाते हैं।)
° वहाँ प्रिन्स-प्रिन्सेज के पास *मुरली आदि सब चीज़ें हीरों की* रहती हैं।
° इन लक्ष्मी-नारायण की दुनिया तो *वाह-वाह* थी। हीरों-जवाहरातों के महल थे। (तुम जानते हो बरोबर हम स्वर्ग के मालिक थे। हमने ये सोमनाथ का मन्दिर बनाया था।)

3. बाबा ने आज आते ही हमे *आत्म-अभिमानी* बना दिया। कैसे (किन शब्दों से)? (6)
° रूहानी बच्चों प्रति अथवा रूहों प्रति, क्योंकि रूह अथवा *आत्मा सुनती है* कानों द्वारा। *धारणा आत्मा में* होती है। बाप की *आत्मा में भी ज्ञान* भरा हुआ है। बच्चों को आत्म-अभिमानी बनना है इस जन्म में।
° आत्मा है जरूर। आत्मा ही *शरीर में प्रवेश करती* है। (दु:ख भी आत्मा को ही होता है। कहा भी जाता है पतित आत्मा, पावन आत्मा)
° आत्मा *कितनी छोटी* है, उसमें कैसे *पार्ट भरा हुआ* है,
° *घड़ी-घड़ी* अपने को आत्मा समझना है।
° तुम बच्चे अब *चैतन्य* में हो, यह शरीर तो विनाशी है। मिट्टी का बनता है, मिट्टी में मिल जाता है। आत्मा तो *अविनाशी* है ना। (बाकी बैटरी डिस्चार्ज होती है।)
° *आत्मायें ही* बाप को *पुकारती* हैं (ओ बाबा हम डिस्चार्ज हो गये हैं, अब आप आओ, हमको चार्ज होना है। l

4. आत्म-अभिमानी बनाने के बाद, *याद की यात्रा* सिखाते हुए बाबा ने एक जबरदस्त मिसाल दिया। कौन-सा?
° जैसे देखो यह इमर्जेन्सी लाइट💡आई है, जो बैटरी पर चलती है। इसको फिर चार्ज करते हैं। *बाप है सबसे बड़ी पावर* । आत्मायें कितनी ढेर हैं। सबको उस पावर से भरना है। बाप है *सर्वशक्तिमान्* । हम आत्माओं का उनसे *योग लगाकर बैटरी को चार्ज* करना होता है।

5. ऐसे सर्वशक्तिमान् बाबा साथ योग लगाने से कौन-सी *प्राप्तियां* होती? (4)
° बाप कहते हैं मेरे साथ बुद्धि योग लगाओ तो तुम्हारी आत्मा में *पावर भरकर सतोप्रधान* बन जायेगी। पढ़ाई तो है ही कमाई। याद से तुम *पावन* बनते हो। *आयु बड़ी* होती है। *बैटरी चार्ज* होती है।

6. बाप से बहुत ____ होना चाहिए। बाबा हम आपके हैं, आपके साथ ही _____ जाने वाले हैं। जैसे पियर घर से ससुरघर वाले ले जाते हैं ना। यहाँ तुमको दो बाप मिले हैं, ______ कराने वाले। श्रृंगार भी अच्छा चाहिए अर्थात् सर्व- _____ सम्पन्न बनना है।
°लव, घर, श्रृंगार, गुण

7. कोई कह देते *ड्रामा आपेही पुरूषार्थ करायेगा।* तो बाबा ने आज कौन-सा वन्डरफुल उत्तर दिया?
° अच्छा *अब ड्रामा पुरूषार्थ करा रहा है ना, तो करो* । एक जगह बैठ तो नही जाना है। (जिन्होंने कल्प पहले पुरूषार्थ किया है, वह करेंगे।)

8. बाप ही विश्व की बादशाही देते हैं, उनको कितना _____ करना चाहिए। याद में न रहने से माया का ______ लग जाता है। सबसे कड़ा थप्पड़ है _____ का। युद्ध के मैदान में तुम ब्राह्मण ही हो ना, तो तुमको ही तूफान आयेंगे। परन्तु कोई ______ कर हार नहीं खाना।
°याद, थप्पड़ 👋, विकार, विकर्म

9. बाबा सदा कहते अपने से पूछो (कोई अवगुण तो नहीं, कर्मणा से तो कुछ नहीं करता? दु:ख तो नहीं देता?)। ऐसे *क्यों चेक* करना है? (2)
° (हमारा) *बाप है दु:ख हर्ता, सुख कर्ता*।
° *हम भी सबको सुख का रास्ता बताते* हैं।

10. *बच्चे तंग करते* हैं तो गुस्सा आ जाता है। क्या यह ठीक है?
° बच्चों को अच्छी रीति सम्भालेंगे नहीं तो खराब हो जायेंगे। कोशिश करके *थप्पड़ नहीं लगाओ।* (कृष्ण के लिए भी दिखाते हैं ना ओखली से बांधा। रस्सी से बांधो, खाना न दो। रो-रो कर आखिर कहेंगे अच्छा अब नहीं करेंगे।) बच्चा है फिर भी करेगा, *शिक्षा देनी है*। (बाबा भी बच्चों को शिक्षा देते हैं – बच्चे, कभी विकार में मत जाना, कुल-कलंकित नहीं बनना।)

11. जैसे गन्दगी में कीड़े, वैसे ही *मेरा-पन से माया* का जन्म होता है। तो *मायाजीत* कैसे बनना है? (3)
° माया-जीत बनने का सहज तरीका है-स्वयं को *सदा ट्रस्टी* समझो। ब्रह्माकुमार माना ट्रस्टी, ट्रस्टी की किसी में भी *अटैचमेंट नहीं* होती क्योंकि उनमें मेरापन नहीं होता। (गहृस्थी समझेंगे तो माया आयेगी और ट्रस्टी समझेंगे तो माया भाग जायेगी।)
° इसलिए *न्यारे होकर प्रवृत्ति के कार्य में* आओ तो मायाप्रूफ रहेंगे।

12. तुम जानते हो _____ है दिन, _____ है रात। फिर रात से होता है ____, फिर दिन शुरू होता है। बाप कहते हैं रात को भूलो, अब दिन को _____ करो। स्वर्ग है दिन, नर्क है रात। अभी तुम कितने समझदार बनते हो। तुम्हारी बुद्धि चली जाती है _____ में। वहाँ से हम आये हैं। यहाँ सूक्ष्मवतन का तो मालूम पड़ गया। ब्रह्मा-सरस्वती फिर लक्ष्मी-नारायण बनते हैं, इसलिए _____ को 4 भुजा दी हैं। अब स्मृति आई है कल्प-कल्प 84 का चक्र लगाया है, फिर वापिस जाते हैं। यह है _____-युग। अब ट्रांसफर होते हैं।
°ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, याद, घर, विष्णु, संगम

13. भल *वाणी* तो बहुत अच्छी-अच्छी चलाते हैं। साथ में क्या चाहिए?
° *याद* का जौहर नहीं तो वह ताकत नहीं रहती है। *जौहर*-दार तलवार नहीं।

14. बाबा ने कहा *बैज़ेस आदि भगवान ने खुद बनाये* हैं, तो इनका बहुत कदर हो। फिर बैज से समझाना क्या है?
° मुख से सिर्फ इतना बोलो कि *बाप को याद करो* तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे और तुम यह *लक्ष्मी-नारायण बन जायेंगे*।

15. भारतवासी जो खास *देवी-देवताओं के पुजारी* हैं, उनको क्या समझाना है?
° *सतयुग में देवी-देवता धर्म था* तो उनकी पूजा करते हैं। (जैसे धर्म स्थापक की महिमा करते, हम आदि सनातन देवी-देवता धर्म की महिमा करते हैं।)
° वह *किसने स्थापन किया*।

16. तुम तो हो सेना। तुम्हारा नाम ही है *प्रजापिता ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ* । फिर कोई भी अन्दर आये (सेंटर में), तो क्या समझा सकते? _(ब्रह्मा बाबा से संबंधित बातें) (3)_
° पहले-पहले तो ये पूछो कि किसके पास आये हो? कहेंगे हम *बी. के.* के पास आये हैं। अच्छा *ब्रह्मा* कौन है? प्रजापिता ब्रह्मा का नाम कभी सुना है? हाँ *प्रजापिता के तो तुम भी बच्चे* हो। सिर्फ जानते नहीं हो।
° ब्रह्मा भी जरूर किसी का बच्चा होगा ना। *उनके बाप का कोई शरीर देखने में नहीं आता* है। (ब्रह्मा-विष्णु-शंकर इन तीनों के ऊपर है *शिवबाबा*। त्रिमूर्ति शिव कहा जाता है तीनों का रचयिता। वह है आत्माओं का पिता।)
° अच्छा, फिर ब्रह्मा कहाँ से आया। बाप कहते हैं मैं *इनमें प्रवेश कर*, इनका *नाम रखता हूँ ब्रह्मा* । (शिवबाबा कहते हैं यह मेरा दिव्य अलौकिक जन्म हैं। तुम बच्चों को तो एडाप्ट करता। बाकी इनमें प्रवेश करता हूँ, बाजू में आकर बैठता हूँ। यह हो गये बाप-दादा।)

17. समझाने की _____ भी होती हैं ना। धीरे-धीरे तुम्हारी वृद्धि होती जायेगी। अभी बाबा बड़ी _____ खोल रहे हैं। इसमें समझाने के लिए _____ तो चाहिए ना। आगे चलकर तुम्हारे पास यह सब चित्र ______ के बन जायेंगे जो फिर तुमको समझाने में भी सहज हो।
°युक्तियाँ, युनिवर्सिटी, चित्र, ट्रांसलाइट

18. तुम्हारी *सच की नांव* को तूफान लगते हैं (कोई रिद्धि-सिद्धि दिखाते, अपने को भगवान कहते, हिलाने की कोशिश करते)। परन्तु अन्त में क्या होंगा?
° तुम जानते हो कि हमारी सच की नांव कभी डूब नहीं सकती। आज जो विघ्न डालते हैं, *वह कल समझेंगे* कि सद्गति का रास्ता यहाँ ही मिलना है। सबके लिए यह *एक ही हट्टी है*। (कोई का भी सच्चा कनेक्शन नहीं है। सच्चा कनेक्शन है ही तुम बच्चों का। बाप को याद करने बिगर ज्योत जगेगी कैसे? ज्ञान भी सिर्फ एक बाप ही देते हैं।)

19. जो चलते-चलते *भाग गये* , (शादी आदि), उनका क्या होगा?
° ड्रामा में पार्ट होगा तो आकर *फिर पुरूषार्थ करेंगे* , जायेंगे कहाँ। (बाप के पास ही सबको पूँछ लटकाना पड़ेगा। लिखा हुआ है भीष्मपितामह आदि भी अन्त में आते हैं। तुम भी हर 5 हज़ार वर्ष के बाद पार्ट बजाते हो, राजाई लेते हो, गंवाते हो। दिन-प्रतिदिन सेन्टर्स बढ़ते जाते हैं।)

20. *बेहद का वैराग्य* दिलाने लिए (ताकि हम योग द्वारा फूल चार्ज हो जाये), बाबा ने इस दुनिया के बारे में क्या सुनाया? (4)
° (झाड़ का मिसाल) सब मनुष्य जैसे *सूख गये हैं।* (सब एक-दो को दु:ख देते रहते हैं। अभी सबका शरीर खलास हो जायेगा। बाकी आत्मायें चली जायेंगी।)
° अभी यह पुरानी दुनिया है, *सब चीज़ों से ताकत निकल गई है*। सोना भी खानियों से नहीं निकलता है।
° कुछ भी नहीं है। *कर्जा ही कर्जा* लेते रहते हैं। अनाज, चीनी आदि *कुछ नहीं मिलता*। अब विश्व को बदलना है।
° बाप आते ही हैं सर्व की सद्गति करने। फिर *न तो यह जंगल रहेगा, न जंगल में रहने वाले रहेंगे*। अभी तुम हो संगमयुग पर, जानते हो कि यह पुरानी दुनिया *कब्रिस्तान* हुई पड़ी है। कोई मरने वाले से दिल थोड़ेही लगाते हैं, यह दुनिया तो गई कि गई। *विनाश* हुआ कि हुआ।

Answers from Sakar Murli 09-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 09-09-2020*

1. *फरिश्ता* कौन है? _(स्लोगन)_
° जो देह के सूक्ष्म अभिमान के सम्बन्ध से भी *न्यारा* है।

2. मनन शक्ति द्वारा *शुद्ध संकल्पों का स्टॉक* जमा करने से, वा *ज्ञान की गहराई* में जाकर अनुभवी मूर्त बनने से क्या प्राप्तियां है? (2)
° अनुभवी *सदा अविनाशी और निर्विघ्न* रहते हैं। (उन्हें कोई भी हिला नहीं सकता।)
° अनुभवी के आगे *माया* की कोई भी कोशिश सफल नहीं होती। अनुभवी *कभी धोखा नहीं* खा सकते। (इसलिए अनुभवों को बढ़ाते हुए हर गुण के अनुभवी मूर्त बनो।)

3. तुम्हारे इस *योगबल की करामात* क्या है? (3)
° यही योगबल है जिससे तुम्हारी *सब कर्मेन्द्रियाँ वश* हो जाती हैं।
° योग बल के सिवाए तुम पावन बन नहीं सकते। योगबल से ही *सारी सृष्टि पावन बनती* है इसलिए पावन बनने के लिए वा *भोजन को शुद्ध* बनाने के लिए याद की यात्रा में रहो। युक्ति से चलो। नम्रता से व्यवहार करो।

4. बाप आकर समझाते, तुम एकदम ऊंच चोटी थे। अब महसूस करते। स्वप्न में भी नहीं था कि बाप आकर क्या करेंगे। अब बाप मिला हुआ है तो समझते हो ऐसे *बाप के ऊपर तो न्योछावर* होना पड़े। यहां बाबा ने कौन-सा मिसाल दिया? (2)
° जैसे *पतिव्रता स्त्री* होती है तो पति पर कितना न्योछावर जाती है। (आगे चिता पर चढ़ती थी। बाबा तो ऐसी कोई तकलीफ नहीं देते। भल नाम ज्ञान चिता है परन्तु जलने करने की कोई बात नहीं। बाप बिल्कुल ऐसे समझाते हैं जैसे मक्खन से बाल।)
° यह *बाप तो ऐसा बील्वेड है* जिस पर कहते हैं जीते जी न्योछावर जायें क्योंकि *पतियों का पति* , बापों का बाप सबसे ऊंच है। (भूले-चूके भी बाप को नहीं भूलना है। कुछ भी हो जाये। गीत भी है तुम्हारे दर को कभी नहीं छोड़ेंगे। चाहे कुछ भी कहो। बाहर में रखा ही क्या है?)

5. थोड़ा भी कुछ समझकर जाते हैं तो *स्वर्ग में जरूर आ जायेंगे* । इसलिए पुरुषार्थ करने की कोई आवश्यकता नहीं। _(सही / गलत)_ _(2)_
° गलत (भल बाबा कहते हैं थोड़ा भी सुना है तो स्वर्ग में आ जायेंगे। परन्तु हर एक मनुष्य पुरूषार्थ तो ऊंच बनने का ही करते हैं ना। तो *पुरूषार्थ है फर्स्ट।*)
° राजाई में भी पोजीशन तो होती हैं ना। हर एक के *पुरुषार्थ अनुसार मर्तबा* होता है। (पुरुषार्थ बच्चों को करना है और प्रारब्ध भी बच्चों को पानी है।)

6. *सच्ची शान्ति* किसे कहेंगे?
° बाप कहते हैं बच्चे, तुम्हारा *स्वधर्म ही है शान्त*, इस शरीर से तुम कर्म करते हो। (जब तक शरीर धारण न करे तब तक आत्मा शान्त रहती है।)

7. रूहानी बाप आकर स्वर्ग नई दुनिया की स्थापना करते हैं। तो बाबा से *सब कुछ मांगना / पुछ लेना* है। _(सही / गलत)_ (4)
° गलत (तुम बाप से कोई भी प्रकार की *मांगनी नहीं* कर सकते हो। बाप सब कुछ समझाते हैं।)
° कुछ भी *पूछने की दरकार नहीं* रहती, सब कुछ आपेही समझाते रहते हैं। (बाप कहते हैं मुझे कल्प-कल्प इस भारत खण्ड में आकर क्या करना है, सो मैं जानता हूँ। रोज़-रोज़ समझाते रहते हैं। कोई भल एक अक्षर भी न पूछे तो भी सब कुछ समझाते रहते हैं!)
° बाप समझाते मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों तुम 5 हज़ार वर्ष बाद फिर से मिले हो। बाबा आपसे क्या मिलना है, यह तो *प्रश्न ही नहीं। आप तो हो ही हेविनली गॉड फादर।* (नई दुनिया के रचयिता। तो जरूर आपसे बादशाही ही मिलेगी।)
° तुमसे भी प्रश्न पूछते हैं, बाप सब कुछ बतलाते रहते हैं। सिर्फ उस पर *पूरा ध्यान देना है।*

8. ऐसा बापदादा जो स्वर्ग का मालिक बनाते हैं, *कितना साधारण* है। यहां यज्ञ इतिहास की कौन-सी वन्डरफुल सीखने योग्य बात सुनाई?
° शुरू में बच्चियाँ जब बीमार पड़ती थी तो *बाबा खुद उन्हों की सेवा करते थे* । अहंकार कुछ भी नहीं। (बापदादा ऊंच ते ऊंच है। कहते हैं जैसे कर्म मैं इनसे कराऊंगा, या करूंगा।)

9. बड़े से बड़ा आसामी है ______ और _______ । फिर तुम जानते हो _____ कौन है? तुम तो कहेंगे हम इनके घराने के हैं, यह लक्ष्मी-नारायण तो सतयुग में राज्य करते हैं। बच्चे समझ गये हैं, हमको तो यह ______ शोभते नहीं। हम अभी शिक्षा पा रहे हैं। पुरूषार्थ कर रहे हैं। फिर ऐसे बन जायेंगे। ______ फिराते-फिराते हम देवता बन जायेंगे। बच्चों को अभी बाप _____ रहे हैं।
°भगवान, प्रजापिता ब्रह्मा, विष्णु, अलंकार, स्वदर्शन चक्र, जगा

10. अभी तुम बच्चे जानते हो बाबा आया हुआ है। _______ भी कहती हैं – बाबा हर 5 हज़ार वर्ष के बाद हम आपसे स्वर्ग का वर्सा लेते हैं। हम अभी आये हैं स्वर्ग की _____ लेने। तुम जानते हो कि सभी एक्टर्स का अपना _____ है। तुम फिर इसी ही नाम रूप में आकर इसी समय बाप से वर्सा लेने का पुरूषार्थ करेंगे। कितनी अथाह ______ है। अच्छा, तुम तो ऐसे बने हो। फिर कोई को ______बनाते हो?
° बुढ़ियाँ, राजाई, पार्ट, कमाई, आप समान

11. माया उल्टा काम कराने की कोशिश करेंगी, परन्तु बच्चों को *दैवीगुण धारण करने हैं*। क्यों?
° *हम ईश्वरीय सन्तान हैं* वह है सबका बाप, सबके लिए शिक्षा यह एक ही देंगे। बाप शिक्षा देते हैं-बच्चे *स्वर्ग का मालिक बनना है।*

12. तो *पुलिस* वालों को क्या करना है?
° अपना पुलिस आदि का *काम भी करो* , नहीं तो डिसमिस कर देंगे। अपना काम तो करना ही है, आंख दिखानी पड़ती है। *जितना हो सके प्रेम से काम लो।* नहीं तो युक्ति से आंख दिखाओ। हाथ नहीं चलाना है। (मूल बात है पवित्र रहना।)

13. *बहुत नम्रता से* चलना है (क्रोध पर भी *फूलों की वर्षा* करो)। साथ-साथ पवित्रता के लिये कैसे समझा सकते? (2)
° बोलो, *आप तो भगवान (समान) हो* फिर यह क्या मांगते हो? (हथियाला बांधते समय कहते हैं – मैं तुम्हारा पति ईश्वर गुरू सब कुछ हूँ।)
° अब मैं पवित्र रहना चाहती हूँ, तो तुम रोकते क्यों हो। *भगवान को तो पतित-पावन कहते* है ना। *आप ही पावन बनाने वाले बन जाओ।* (ऐसे प्यार से नम्रता से बात करनी चाहिए।)

14. बाप आया है स्वर्ग की बादशाही फिर से देने। तो इनको *रिफ्यूज़ नहीं करना* है। विश्व की बादशाही रिफ्यूज़ की तो क्या होगा?
° खत्म। फिर *रिफ्यूज़ (किचड़े के डिब्बे) में जाकर पड़ेंगे*। यह सारी दुनिया है किचड़ा। तो इनको रिफ्यूज़ ही कहेंगे। दुनिया का हाल देखो क्या है।)

15. इस समय (कलियुग अन्त में) *पुण्य आत्मा* कौन-कौन हैं?
° वास्तव में *पुण्य आत्मा एक भी नहीं* है। सब हैं पाप आत्मायें। पुण्य करें तो पुण्य आत्मा बन जायें। पुण्य आत्मायें होती हैं सतयुग में। (हॉस्पिटल आदि बनाई सो क्या हुआ। सीढ़ी उतरने से थोड़ेही बच जायेगा। गिरते ही जाते हैं।)

Answers from Sakar Murli 08-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 08-09-2020*

1. देह-अभिमान का *दरवाजा*🚪 कौन-सा है, जिसे बन्द करना है?
° *मैं पन और मेरा पन”

2. जैसे बाप के संकल्प-बोल-नयनों में *सदा ही कल्याण की भावना*-कामना है, ऐसे हम बच्चों को क्या करना है?
° हमारे *संकल्प में* भी विश्व कल्याण की भावना-कामना भरी हुई हो। (कोई भी *कार्य करते* विश्व की सर्व आत्मायें इमर्ज हों।)
° *मास्टर ज्ञान सूर्य* बन शुभ भावना वा श्रेष्ठ कामना के आधार से *शान्ति व शक्ति की किरणें* देते रहो तब कहेंगे *विश्व कल्याणकारी* ।
° लेकिन इसके लिए सर्व *बन्धनों से मुक्त, स्वतंत्र* बनो।

3. अपनी दिल पर हाथ रखकर पूछो कि बाबा जो सुनाते हैं क्या हम सब पहले जानते थे। अभी जानते हो बाबा फिर से आकर हमको विश्व की _____ देते हैं। जो हमसे आधाकल्प तक कोई छीन नहीं सकते। तो बच्चों को कितनी _____ होनी चाहिए। बाप से कितना बार _____ लिया है। बाप _____ है, सत्य शिक्षक भी है, सतगुरू भी है। कब सुना ही नहीं।
°बादशाही, खुशी, राज्य, सत्य

4. बाप के पास आते हैं, _____ होने। सम्मुख बैठने से याद पड़ती है। बाबा आया है ले जाने के लिए। बाप सम्मुख बैठे हैं तो जास्ती _____ आनी चाहिए। अपनी ____ की यात्रा को वहाँ भी तुम रोज़ बढ़ा सकते हो। ज्ञान में इतना समय नहीं लगता है, जितना ____ की यात्रा में लगता है। 84 जन्मों की कहानी तो जैसे एक _____ है, आज से 5 वर्ष पहले किन्हों का राज्य था, वह राज्य कहाँ गया?
°रिफ्रेश, याद, याद, याद, कहानी

5. अपने को देखना है कि हमारे में कोई ______ तो नहीं हैं! जैसे देवतायें _____ हैं, ऐसा बना हूँ?
°अवगुण, मीठे

6. तुम्हारे इस *ब्राह्मण धर्म में सबसे अधिक ताकत* है – कौन-सी और कैसे?
° (कौन-सी) तुम्हारा यह ब्राह्मण धर्म ऐसा है जो *सारे विश्व की सद्गति* श्रीमत पर कर देते हैं। ब्राह्मण ही *सारे विश्व को शान्त* बना देते हैं। तुम ब्राह्मण कुल भूषण देवताओं से भी ऊंच हो,
° (कैसे) तुम्हें *बाप द्वारा* यह ताकत मिलती है। तुम ब्राह्मण *बाप के मददगार* बनते हो, तुम्हें ही *सबसे बड़ी प्राइज* मिलती है। (तुम ब्राह्माण्ड के भी मालिक और विश्व के भी मालिक बनते हो।)

7. तुम बच्चों को अब सारी नॉलेज है। तुम हो कितने साधारण अजामिल जैसे पापी, अहिल्यायें, कुब्जायें, भीलनियाँ उनको कितना _____ बनाते हैं। बाप समझाते हैं – तुम क्या से क्या बन गये हो। बाप खुद कहते हैं मैं तुमको अपने से भी ______ बनाता हूँ। बाबा लिखते हैं _____ ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण।
°ऊंच, ऊंच, सर्वोत्तम

8. बेहद का बाप है तो जरूर उनसे वर्सा भी मिलता होगा। इस बात को समझने लिए कौन-सा *एक वन्डरफुल अंग्रेजी शब्द* है?
° *हेविनली गॉड फादर* (यह अक्षर बहुत मीठा है और हेविन मशहूर भी है। तुम बच्चों की बुद्धि में हेविन और हेल का सारा चक्र फिरता है, जो-जो सर्विसएबुल हैं।)

9. तुम कहेंगे हम रूहानी बच्चे बाप की श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ ____ पर चल रहे हैं। ऊंच ते ऊंच बाप की ही _____ है। _____ भगवद् गीता भी गाई हुई है। अभी तुम समझते हो बाप ने ही ______ -योग सिखाया, जिससे सब मुक्ति-जीवनमुक्ति को पाते हैं।
°मत, श्रीमत, श्रीमद्, राज

10. कोई को पता नहीं गॉड वा ईश्वर कौन है, बाप ही बच्चों को बैठ अपना _____ देते हैं।
रूहानी बाप एक ही बार हर 5 हज़ार वर्ष के बाद आते हैं जरूर।
हम सभी आत्माओं का बाप वह ____ है। यह भी समझते हो कि भारत में ही शिवबाबा आया था, उनकी ______ भी मनाते हैं। कृष्ण की आत्मा के _____ में बाप ने प्रवेश किया है। कितनी वन्डरफुल बात है। कभी किसकी बुद्धि में आयेगा नहीं।
°परिचय, एक, जयन्ती, रथ

11. *बैज लगाने का उमंग बढ़ाने* लिए बाबा ने कौन-सा वन्डरफुल मिसाल दिया? (2)
° तुम *रूहानी सेना* हो। तुम यह बैज नहीं लगायेंगे तो मनुष्य कैसे समझेंगे कि यह भी रूहानी मिलेट्री है। मिलेट्री वालों को हमेशा बैज लगा हुआ होता है। (बैज में, *शिवबाबा* है नई दुनिया का रचयिता। वहाँ इन *देवताओं का राज्य* था, अब नहीं है। फिर बाप कहते हैं मनमनाभव। देह सहित सब सम्बन्ध छोड़ *मामेकम् याद* करो तो कृष्ण की डिनायस्टी में आ जायेंगे।) इसमें लज्जा की तो बात ही नहीं।
° अभी तुम बच्चों को ज्ञान है, बैज तो जरूर लगा रहना चाहिए। तुम हो *नर को नारायण बनाने वाले* । *राजयोग भी तुम ही सिखलाते* हो।

12. तुमसे पूछेंगे *क्या पढ़ते हो?* (2)
° बोलो, हम *नई दुनिया में राजाई प्राप्त करने लिए राजयोग* पढ़ते हैं। (यह है ही राजयोग। टीचर को जरूर याद तो करेंगे ना।)
° तुम कहेंगे हम स्वर्ग की राजाई प्राप्त करने के लिए ही पढ़ते हैं। *कौन पढ़ाते हैं? शिवबाबा भगवान* । (उनका नाम तो एक ही है जो चला आया है। मेरा नाम है ही शिव। बाप शिव और रथ ब्रह्मा कहेंगे।)

13. आजकल छोटेपन में ही *गुरू* करते हैं। गुरू का चित्र बनाए भी गले में डालते वा घर में रखते। और यहां कौन-सी वन्डरफुल बात है?
° यहाँ तो वन्डर है-बाप, शिक्षक, सतगुरू *सब एक शिवबाबा ही है।* बाप कहते हैं मैं साथ में ले चलूँगा।)

14. जिनको *धन मोटर आदि* हैं, वह स्वर्ग में है। _(सही / गलत)_
° *गलत* (स्वर्ग कहा जाता है नई दुनिया को। यह साइंस भी वहाँ सुख देती है। यहाँ तो इन सबसे है अल्पकाल का सुख। वहाँ तुम बच्चों के लिए यह स्थाई सुख हो जायेगा।)
° अभी है *अल्पकाल का सुख*। (फिर यह बॉम्ब्स आदि ही सबको खलास कर देंगे। यहाँ तो अशान्ति का राज्य है। यह भी तुम्हारे में नम्बरवार हैं जो समझते हैं, हम पहले-पहले अपने घर जायेंगे फिर सुखधाम में आयेंगे।)

15. यह है *एकज़ भूल* का नाटक। कौन-सी है यह बड़े ते बड़ी भूल? (3)
° *गीता में नाम गुम* होने से महिमा भी गुम हो गई है।
° जिससे सारी दुनिया को सुख-शान्ति मिलती है, उस *बाप को भूल गये* हैं। इनको कहा ही जाता है एकज़ भूल का नाटक।
° बड़े ते बड़ी भूल यह है जो *बाप को नहीं जानते* । कभी कहते वह *नाम-रूप से न्यारा* है फिर कहते *कच्छ-मच्छ* अवतार है। *ठिक्कर-भित्तर* में है। भूल में भूल होती जाती है। (सीढ़ी नीचे उतरते जाते हैं। कला कम होती जाती है, तमोप्रधान बनते जाते हैं।)
° ड्रामा के प्लैन अनुसार जो बाप स्वर्ग का रचयिता है, *जिसने भारत को स्वर्ग का मालिक बनाया*, उनको ठिक्कर-भित्तर में कह देते हैं।

16. इनको *भाग्यशाली रथ* क्यों कहते हैं?
° क्योंकि *शिवबाबा की प्रवेशता* है तो जरूर दो आत्मायें ठहरी। यह भी तुम जानते हो। (दिखाते हैं भागीरथ ने गंगा लाई। क्या पानी लाया? किसने लाया है? किसने प्रवेश किया है? बाप ने किया ना। मनुष्य में पानी थोड़ेही प्रवेश करेगा। जटाओं से पानी थोड़ेही आयेगा। इन बातों पर मनुष्य कभी ख्याल भी नहीं करते हैं।)

17. *विराट रूप* भल बनाया है परन्तु वह भी *आधा है* । कैसे?
° *मुख्य रचता और उनकी पहली रचना* को कोई नहीं जानते। बाप ( *बिन्दी* ) है रचता, फिर ब्राह्मण हैं *चोटी* , इसमें ताकत है।

18. *अज्ञान अन्धियारा* किसे कहा जाता है?
° ड्रामा क्या है, पूछते रहते हैं। यह दुनिया कब से बनी है? नई सृष्टि कब थी तो कहेंगे *लाखों वर्ष आगे* । समझते हैं पुरानी दुनिया में तो अभी *बहुत वर्ष पड़े* हैं, इसको अज्ञान अन्धियारा कहा जाता है। (गायन भी है ज्ञान अजंन सतगुरू दिया, अज्ञान अन्धेर विनाश।)

Answers from Sakar Murli 07-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 07-09-2020*

1. स्वभाव, संस्कार, सम्बन्ध, सम्पर्क में _____ रहना अर्थात् फरिश्ता बनना।
°लाइट

2. संकल्प और बोल के विस्तार को सार में लाने वाले *अन्तर्मुखी भव*। ऐसे अन्तर्मुखी बच्चे *साइलेन्स की शक्ति* द्वारा क्या-क्या कर सकते? (3)
° भटकती हुई आत्माओं को *सही ठिकाना दिखा सकते* हैं।
° यह साइलेन्स की शक्ति *अनेक रूहानी रंगत* दिखाती है।
° साइलेन्स की शक्ति से हर आत्मा के *मन का आवाज* इतना समीप सुनाई देता जैसे कोई सम्मुख बोल रहा।

3. बाबा ने आज आते ही *आत्म-अभिमानी* बनने लिए कौन-से संकल्प दिये? (2)
° रूहानी बच्चे समझते हैं *हम आत्मा हैं, न कि शरीर* । आत्मा ही *शरीर में प्रवेश* करती है। *एक शरीर छोड़ दूसरा* लेती रहती है। आत्मा नहीं बदलती, शरीर बदलता है। आत्मा तो *अविनाशी* है, तो अपने को आत्मा समझना है।
° यह ज्ञान कभी कोई दे न सके। यह *ज्ञान अभी ही मिलता-परमपिता परमात्मा से* । बाप कहते हैं जबकि मैं आया हूँ तो तुम अपने को आत्मा निश्चय करो।

4. पुराने संस्कार पलटने में मेहनत लगती। याद करने में ही माया विघ्न डालती। तो बाबा ने *सहज याद* की कौन-सी 2 युक्तियां सुनाई?
° बाप कहते हथ कार डे दिल यार डे ( *कर्मयोगी* बनो)। यह है बहुत सहज।
° *जैसे आशिक-माशूक* होते हैं जो एक-दो को देखने बिगर रह न सके। (तुम भक्ति मार्ग से लेकर मुझ माशूक के सब आशिक हो। बुलाते भी हो कि आकर दु:ख से लिबरेट कर पावन बनाओ। तुम सब हो ब्राइड्स, मैं हूँ ब्राइडग्रूम। तुम सब आसुरी जेल में फंसे हुए हो, मैं आकर छुड़ाता हूँ।)

5. परमात्मा तो एक ही है ऊंच ते ऊंच _____ , फिर सब हैं आत्मायें बच्चे। सर्व का _____ दाता एक है फिर हैं देवतायें। उनमें भी नम्बरवन है ____ क्योंकि आत्मा और शरीर दोनों पवित्र हैं। तुम हो संगमयुगी।
°भगवान, सद्गति, कृष्ण

6. बाबा को *क्रियेटर, डायरेक्टर और मुख्य एक्टर* क्यों कहते?
° बाप क्रियेटर भी है, तुम बच्चों को क्रियेट करते हैं। *अपना बनाया है*।
° डायरेक्टर बन डायरेक्शन भी देते हैं। *श्रीमत देते* ।
° फिर एक्ट भी करते हैं। *ज्ञान सुनाते* हैं। यह भी उनकी ऊंच ते ऊंच एक्ट है ना।

7. *बाबा का आना* कब होता है?
° बाप आकर समझाते हैं मेरा आना होता है कल्प के *पुरूषोत्तम संगमयुग पर जबकि सारा विश्व पुरूषोत्तम बनता* है। (इस समय तो सारा विश्व कनिष्ट पतित तमोप्रधान जड़जड़ीभूत है, 5 विकारों से दुःखी। उसको कहा जाता है अमरपुरी, यह है मृत्युलोक। मृत्युलोक में आसुरी गुण वाले मनुष्य होते हैं, अमरलोक में दैवीगुण वाले मनुष्य हैं इसलिए उनको देवता कहा जाता है।)

8. बाप आये हैं तुम पुराने भक्तों को भक्ति का _____ देने। भक्ति का फल है _____ , जिससे ही तुम्हारी सद्गति होती है। भक्ति करने वालों को सीता कहा जाता, भगवान को _____ कहा जाता। इस बेहद के _____ राज्य में सारी दुनिया फंसी हुई है। उन्हों को लिबरेट कर राम राज्य में ले जाते हैं। बुलाते भी हैं हम आत्माओं को अपने घर ले जाओ। यह किसको पता नहीं है कि बाप _____ का भी राज्य-भाग्य देते हैं।
°फल, ज्ञान, राम, रावण, स्वर्ग

9. *सबसे ऊंचा धर्म / अमूल्य जीवन* किसका कहेंगे? देवताओं का?
° सब धर्मों में ऊंच तो तुम्हारा ब्राह्मण धर्म है, *प्रजापिता ब्रह्मा के मुख वंशावली ब्राह्मण*, वह तो सब भाई-बहन होने चाहिए।
° वास्तव में *देवताओं से भी ऊंच* ब्राह्मणों को कहेंगे, चोटी हैं ना। (क्योंकि यह ब्राह्मण ही मनुष्यों को *देवता बनाते* हैं। *पढ़ाने वाला है परमपिता परमात्मा* , स्वयं ज्ञान का सागर।)
° तुम हो संगमयुगी। देवताओं का नहीं, *ब्राह्मणों का अमूल्य जीवन* है। (बाप तुमको बच्चा बनाए तुम्हारे पर कितनी मेहनत करते, देवतायें थोड़ेही इतनी मेहनत करेंगे। वह पढ़ाने लिए बच्चों को स्कूल भेज देंगे। तो कितना रिगॉर्ड होना चाहिए।)

10. सर्विसएबुल बच्चों को *सर्विस का बहुत शौक* होना चाहिए। तो बाबा ने उमंग बढ़ाने लिए किन्हों का मिसाल दिया?
° लड़ाई के मैदान में जाने के लिए *मिलेट्रीके* पास लिस्ट रहती। ड्रिल सिखलाते हैं कि जरूरत पर बुला लेंगे। यहाँ तो वह बात नहीं है (तो आपेही सर्विसएबुल बनना चाहिए ना!)

11. कई बच्चे चलते-चलते *तकदीर को आपेही शूट* करते हैं। कैसे?
° अगर बाप का बनकर *सर्विस* नहीं करते, अपने पर और दूसरों पर *रहम* नहीं करते तो वह अपनी तकदीर को शूट करते हैं अर्थात् *पद* भ्रष्ट हो जाते हैं। अच्छी रीति *पढ़ें* , *योग* में रहें तो पद भी अच्छा मिले। सर्विसएबुल बच्चों को तो *सर्विस* का बहुत *शौक* होना चाहिए।

12. कॉन्फ्रेन्स में टॉपिक रखी है ”मानव जीवन में *धर्म की आवश्यकता*।” इस पर क्या समझानी बाबा ने दी? (3)
° समझाना चाहिए धर्म की तो आवश्यकता है ना। *पहले-पहले कौन-सा धर्म था*, फिर कौन-से धर्म आये हैं! (वास्तव में *डायरेक्ट ऑलमाइटी अथॉरिटी से योग लगाकर ऑलमाइटी बनना* है, विश्व के मालिक बन जाते हो। तुम्हारे राज्य को कोई छीन न सके। उस समय और कोई खण्ड होते नहीं।)
° सारा चक्र बना ही है धर्मों पर। यह है ही *वैराइटी धर्मों का झाड़*, यह झाड़ है अन्धों के आगे आइना।
° बोलो, धर्म स्थापक फिर *अपने समय पर आयेंगे*। (हर एक को सतोप्रधान से सतो-रजो-तमो में आना ही है। अभी है रावण राज्य। तुम्हारी है सच्ची गीता, जो निराकार गॉड फादर सुनाते हैं।)

13. औरों की भेंट में यहाँ तुम्हारी *स्थापना बड़ी वन्डरफुल* है। कैसे?
° तुम अभी बाहर सर्विस पर निकले हो, *आहिस्ते-आहिस्ते वृद्धि* होती जाती है। *तूफान लगने से बहुत पत्ते गिरते* भी हैं ना। और धर्मों में तूफान लगने की बात नहीं रहती। उनको तो ऊपर से आना ही है, यहाँ मेहनत बहुत है। ( *क्रिमिनल आई* धोखा देती है, सिविल आई बनने में मेहनत लगती है। देवताओं के कितने अच्छे कैरेक्टर्स हैं।)

14. इस समय (कलियुग अन्त में) *पूज्य* किनको कह सकते?
° इस समय कोई *एक भी पूज्य नहीं* हो सकता। (ऊंच ते ऊंच भगवान पूज्य फिर है सतयुगी देवतायें पूज्य। इस समय तो सब पुजारी हैं, अव्यभिचारी पूजा फिर सतो फिर देवताओं से भी उतर कर जल की, मनुष्यों की, पक्षियों आदि की पूजा करने लग पड़ते। दिन-प्रतिदिन अनेकों की पूजा होने लगती है।)

15. *मोक्ष* पर बाबा ने कौन-सी 2 अच्छी पॉइंट्स सुनाई?
° मोक्ष को *वर्सा* नहीं कहा जाता। (बाप से तो वर्सा मिलना चाहिए!)
° खुद *शिवबाबा को भी पार्ट बजाना पड़ता* है। (तो फिर और किसको मोक्ष में कैसे रख सकते।)

16. भगवानुवाच हैं ____ अर्थात् अशरीरी आये थे, फिर अशरीरी बनकर जाना है। भगवानुवाच के अर्थ को नहीं समझते हैं। बाप कहते हैं तुम आत्मायें यहाँ यह _____ धारण कर पार्ट बजाने आई हो, फिर वापिस जाना है। नये-नये किस्म के धर्म इमर्ज होते रहते हैं, इसलिए इनको _____ धर्मों का झाड़ कहा जाता।
°नंगे, शरीर, वैराइटी

Answers from Sakar Murli 05-09-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 05-09-2020*

1. सर्व शक्तियों से सम्पन्न रहना यही ब्राह्मण स्वरूप की ______ है।
°विशेषता

2..हर समय *बाप के भिन्न-भिन्न सम्बन्धों को अनुभव* करने पर कौन-सी वन्डरफुल बातें वरदान में सुनाई? (4)
° यही *सहज योग* है।
° बाप सदा *सम्बन्ध निभाने लिए बंधे हुए* हैं।
° सारे कल्प में *अभी ही* सर्व अनुभवों की खान प्राप्त होती है (इसलिए सदा सर्व सम्बन्धों का सहयोग लो और निरन्तर योगी, सहजयोगी बनो।)
° जो सर्व सम्बन्धों की अनुभूति वा प्राप्ति में मग्न रहता है, वह पुरानी *दुनिया के वातावरण से सहज ही उपराम* हो जाता।

3. *नई दुनिया की देहली* कैसी थी? (3)
° देहली *परिस्तान* थी, *जमुना का कण्ठा* था। *लक्ष्मी-नारायण का राज्य* था। (चित्र भी हैं। लक्ष्मी-नारायण को स्वर्ग का ही कहेंगे। तुम बच्चों ने साक्षात्कार भी किया है कि कैसे स्वंयवर होता है। यह सब प्वाइंट्स बाबा रिवाइज़ कराते हैं।)

4. हमे इस पुरानी दुनिया से निकल फिर नई दुनिया में आना है। तो इस नई दुनिया को *हद की दुनिया* भी कह सकते। _(सही / गलत)_
° *सही* (क्योंकि वह *बहुत छोटी* है, वहाँ है एक धर्म। अनेक धर्म, अनेक मनुष्य होने से बेहद हो जाती। *वहाँ तो है एक धर्म*, थोड़े मनुष्य। एक धर्म की स्थापना के लिए आना पड़ता है।)

5. देवताओं को सब जानते, वो सम्पूर्ण ______ होने के कारण सम्पूर्ण विश्व के मालिक बनते हैं। 2500 वर्ष में जो आये हैं, उनको जानते हैं परन्तु उनसे पहले जो _________ थे, उनको कितना समय हुआ, कुछ नहीं जानते। हर एक को अपना धर्म _____ लगता है। तुम समझते हो यह बेहद के बाप की ______ है।
°निर्विकारी, आदि सनातन देवी-देवता, प्यारा, फैमिली

6. इस *अन्तिम शरीर* वा जन्म की कौन-सी *विशेषताएं* है? (3)
° तुम्हारी स्टूडेन्ट लाइफ है ना। यह अन्तिम जन्म *बहुत वैल्युबल* है फिर शरीर बदल हम देवता बन जायेंगे।
° तुम्हारी आत्मा इस रथ में बैठ पढ़ती है। आत्मा पवित्र बन जाती इसलिए *बलिहारी इस तन की* है।
° इस पुराने शरीर द्वारा ही तुम शिक्षा पाते हो। *शिवबाबा के बनते* हो। तुम जानते हो हमारी *जीवन अब वर्थ पाउण्ड बन रही* है। (जितना पढ़ेंगे उतना ऊंच पद पायेंगे।)

7. तुम बेहद के स्कूल में बैठे हो। तुम ही फिर ______ बनेंगे। तुम समझ सकते हो ऊंच ____ कौन पा सकते हैं। उनकी ________ क्या होनी चाहिए। याद की यात्रा है मुख्य। इनको ही भारत का प्राचीन _____ कहते हैं जिससे तुम पतित से ______ बनते हो, स्वर्गवासी तो सब बनते हैं फिर है पढ़ाई पर मदार।
°देवता, पद, क्वालिफिकेशन, योग, पावन

8. *आसुरी मत और ईश्वरीय मत* में क्या अन्तर है? (3)
° आसुरी मत से हम उतरती कला में जाते हैं। ईश्वरीय मत से *चढ़ती कला* में जाते हैं।
° ईश्वरीय मत *देने वाला एक* है, आसुरी मत देने वाले अनेक हैं। (माँ-बाप, भाई-बहन, टीचर-गुरू कितनों की मत मिलती है।)
° अभी तुमको एक की मत मिलती है जो *21 जन्म काम आती* है। (तो ऐसे श्रीमत पर चलना चाहिए ना। जितना चलेंगे उतना *श्रेष्ठ पद* पायेंगे।)

9. *अच्छा प्वाइंट्स याद नहीं* पड़ती, तो क्या करना है? (2)
° *बाबा को याद* करो।
° बाप भूल जाता है तो *टीचर को याद* करो। (टीचर जो सिखलाते हैं वह भी जरूर याद आयेगा ना। टीचर भी याद रहेगा, नॉलेज भी याद रहेगी। उद्देश्य भी बुद्धि में है।)

10. हम इस बेहद नाटक के राज़ को समझते है। इस समय जो कुछ प्रैक्टिकल में होता है उसका ही फिर भक्ति मार्ग में त्योहार मनाते हैं। बाबा ने कहा विचार कर *त्योहारों को नम्बरवार लिखो*, सही क्रम में। _(गीता जयंती, शिव जयंती, नारायण जयंती)_
° ऊंच ते ऊंच भगवान *शिवबाबा की जयन्ती* कहेंगे। (वह जब आये तब फिर और त्योहार बनें।)
° शिवबाबा पहले-पहले आकर गीता सुनाते हैं अर्थात् आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान सुनाते हैं। योग भी सिखाते हैं। तो पहले-पहले बाप आया शिवजयन्ती हुई *फिर कहेंगे गीता जयन्ती*। (आत्माओं को ज्ञान सुनाते हैं तो गीता जयन्ती हो गई।)
° पहले बाप आते हैं, वही आकर राजयोग सिखलाते हैं तो कहेंगे शिवजयन्ती सो फिर गीता जयन्ती *फिर नारायण जयन्ती*। (वह तो हो जाता सतयुग।)

11. रचता बाप ने समझाया है कि तुम बच्चों ने ऐसे _____ बजाया है। अभी तुमको बेहद के नाटक की ______ मिलती है। यहाँ तुम आत्माओं को घर से _______ आना होता है। यहाँ आकर यह शरीर रूपी ______ पहनते हो। हर एक को अपना-अपना ______ मिला हुआ है।
°पार्ट, नॉलेज, अशरीरी, कपड़े, पार्ट

12. निराकार-रूहानी बाप हमें शरीर द्वारा समझाते, हम निराकारी-रूहानी बच्चे भी शरीर द्वारा बाप के सम्मुख बैठी हैं।(आत्मा-परमात्मा अलग रहे…..।) तो हम जिस बाप के सामने बैठे हैं, उनकी *महिमा* क्या है? उनको *परमपिता* वा *दु:ख हर्ता सुख कर्ता* क्यों कहते?
° ऊंच ते ऊंच बाप को ही *भगवान, ईश्वर, प्रभु, परमात्मा* भिन्न नाम दिये हैं।
° बाप है मुख्य क्रियेटर, *डायरेक्टर* , डायरेक्शन भी देते हैं। श्रीमत देते हैं।
° *परमपिता* अर्थात् वह सभी का पिता है एक।
° बाबा *दु:ख हर्ता सुख कर्ता* है। सुख मिलता है सुखधाम में। शान्ति मिलती है शान्तिधाम में। यहाँ है ही दु:ख। (यह ज्ञान तुमको मिलता है संगम पर।)

13. बाप *प्रेरणा* से कार्य नहीं करते उनका अवतरण होता है, यह किस बात से सिद्ध होता है?
° बाप को कहते ही हैं *करनकरावनहार*। प्रेरणा का तो अर्थ है विचार। प्रेरणा से कोई *नई दुनिया की स्थापना* नहीं होती है। बाप बच्चों से स्थापना कराते हैं, कर्मेन्द्रियों बिगर तो कुछ भी करा नहीं सकते इसलिए उन्हें *शरीर का आधार* लेना होता है।

14. ऊंच ते ऊंच भगवान ही है, जिसने _____ को ऊंच ते ऊंच बनाया फिर नीच ते नीच रावण ने बनाया। बाप _____ बनाते फिर रावण सांवरा बनाते। बाप _____ देते हैं। वह तो है ही वाइसलेस। ______ की महिमा गाते हैं सर्वगुण सम्पन्न……
°कृष्ण, गोरा, वर्सा, देवताओं

15. लौकिक बाप से वर्सा मिलता है। पारलौकिक बाप को भी दु:ख व सुख में याद करते हैं। तो *प्रजापिता ब्रह्मा (अलौकिक बाप)*) को क्यों याद करें?
° तुम जानते हो हम *ब्रह्मा द्वारा* शिवबाबा से वर्सा ले रहे हैं। (जैसे हम पढ़ते हैं, यह रथ भी निमित्त बना हुआ है। बहुत जन्मों के अन्त में इनका शरीर ही *भाग्यशाली रथ* बना है।)

16. बाप संगमयुग पर आते। ब्रह्मा के द्वारा ब्राह्मण। ब्रह्मा के बच्चे तो सब ठहरे। वह है ग्रेट ग्रेट ग्रैन्ड फादर। तो ब्रह्मा बाबा की पॉइंट *कैसे समझा सकते?*
° बोलो, *प्रजापिता ब्रह्मा का नाम नहीं सुना है?* परमपिता परमात्मा ब्रह्मा द्वारा ही सृष्टि रचेंगे ना। (ब्राह्मण कुल है। ब्रह्मा मुख वंशावली भाई-बहिन हो गये। यहाँ राजा-रानी की बात नहीं। यह ब्राह्मण कुल तो संगम का थोड़ा समय चलता है।)

17. बाप आते ही तब हैं जब नई दुनिया की *स्थापना* और पुरानी दुनिया का *विनाश* होना है। इसमें *पहले क्या कहेंगे?*
° पहले हमेशा कहना चाहिए *नई दुनिया की स्थापना*। (पहले पुरानी दुनिया का विनाश कहना रांग हो जाता है। अभी तुमको बेहद के नाटक की नॉलेज मिलती है।)

18. शिव जयन्ती कब हुई वह भी पता नहीं है, ज्ञान सुनाया, जिसको गीता कहा जाता है फिर _____ भी होता है। इसके लिए यह _______ लड़ाई है।
°विनाश, महाभारत