Answers from Sakar Murli 29-07-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 29-07-2020*

1. संगमयुग पर बापदादा का वायदा है – एक दो लाख (अनगिनत) लो। जैसे सर्वश्रेष्ठ समय-जन्म-टाइटल इस समय के हैं, वैसे *सर्व प्राप्तियों का अनुभव अभी ही होता है* । क्यों अभी ही? (3)
° अभी जब चाहो जैसे चाहो, जो चाहो *बाप सर्वेन्ट रूप में बांधे हुए हैं* ।
° क्योंकि वर्तमान समय *वरदाता ही आपका* है।
° जब *बीज आपके हाथ में है* तो बीज द्वारा जो चाहो वह सेकण्ड में लेकर सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न बन सकते हो।

2. *सफलता-सम्‍पन्‍न* बनना चाहते है, तो क्या करना है? (2)
° एक दो की बातों को *स्‍वीकार* करो और *सत्‍कार* दो।

3. मुख्य मिस्टेक बाप को भूल गए, जिस कारण ही भारत अनराइटियस इरिलीजस, इनसालवेन्ट बना है। अभी विचार सागर मंथन करना है कैसे किसको बाप का परिचय दे? आज बाबा ने *किस क्रम में बाप का परिचय देना* सिखाया? (7)
° पहले है कि परमात्मा, बाप रचता, गॉड फादर खुदा *एक है*। वह सब आत्माओं का *बाप है* (पारलौकिक)
° वह सदैव पावन *यहाँ आयेंगे स्वर्ग का वर्सा देने* अर्थात्‌ स्वर्ग का मालिक बनाने।यह भी तुम बच्चे जानते हो स्वर्ग का रचता भारत में ही स्वर्ग रचते हैं, जिसमें देवी-देवताओं का ही राज्य होता है।
° (ऐसे प्राप्ति / अनुभूति के बाद परिचय) वह *पुनर्जन्म रहित, निराकार, बिन्दी* है (तब तो कह सकते कि देह के सब धर्म छोड़ मामेकम् याद करो)। हमको *राजयोग* सिखाते अर्थात् नर से *नारायण* बनाते। पतितों को *पावन* बनाते। रचता और रचना के आदि-मध्य-अन्त का राज़ समझाते हैं, जो *नॉलेज* और कोई नहीं जानते हैं। बाप को आपेही आकर अपना परिचय देना है।
° उनका नाम है *शिव* (परमपिता परमात्मा, भगवान, ज्ञान का सागर सबका बाप वह है।)
° *दिव्य जन्म* है। साधारण तन का आधार लेते (भगवानुवाच है, तो जरूर भगवान का मुख चाहिए ना।) (जो पहले लक्ष्मी-नारायण बनते हैं, वही 84 जन्म लेते-लेते पिछाड़ी में आते हैं तो फिर उनके ही तन में आते। कृष्ण के बहुत जन्मों के अन्त में)
° बाप *पढ़ाकर साथ मुक्तिधाम ले जाते* हैं और कोई तकलीफ की बात नहीं (फिर *चक्र रिपीट* होगा।)
° (अन्त में हमको प्रैक्टिकल में अब क्या करना है) बाप सिर्फ कहते हैं *मामेकम् याद* करो, जिससे ही पाप कटेंगे, सतोप्रधान बनेंगे।

4. ऐसे अच्छे से बाबा का परिचय देने से *अच्छा रिजल्ट* क्या निकलेंगा? (3)
° सब समझेंगे *यह तो ट्रूथ है*, परमात्मा झूठ थोड़े ही कहेंगे।
° इससे तुम्हारा *नाम बहुत बाला* होंगा, इसमें कोई खिटपिट नहीं करेंगे। तुम्हारे पास *बहुत आयेंगे* ।
° बहुतों का प्यार भी होगा, *तुमको बुलायेंगे कि यहाँ आकर भाषण करो* इसलिए पहले-पहले अल्फ सिद्ध कर समझाओ।

5. कहते हैं ना – विश यू लाँग लाइफ एण्ड प्रॉसपर्टी। बाबा ऐसे *आशीर्वाद* देते हैं कि सदा जीते रहो। _(सही / गलत)_
° *गलत*
° बाबा ऐसे आशीर्वाद नहीं देते। यह साधू लोग कहते हैं – अमर रहो। (बाबा तो हमें ऐसे *श्रेष्ठ कर्म* सीखाते जिसके फलस्वरूप हमें *भाग्य* में लम्बी आयु मिल जाती।) तुम बच्चे समझते हो अमर तो जरूर अमरपुरी में होंगे।

6. सदा इसी ____ वा _____ में रहना है कि हमको भगवान पढ़ाते हैं। स्टूडेन्ट की ____ में यह सारी नॉलेज होनी चाहिए ना। खुशी रहती है, हम कितनी _____ करते हैं, यह अमरकथा अमर बाबा तुमको सुनाते हैं।
°नशे, खुशी, बुद्धि, कमाई

7. सतयुग में तो कुछ सीखते नहीं हैं। जरूर _____ पर ही सीखते होंगे। ऊंच ते ऊंच बनना है, वह कैसे बनें। जरूर बीच में ______ है जब पवित्र बनते हैं। हेविनली गॉड फादर जरूर ______ पर ही आते हैं। तुम जानते हो अभी _____ है।
°संगम, संगमयुग, संगम, संगम

8. यह एक धर्म एक _____ से स्थापन होता है। सूक्ष्मवतन की बातों में ज्यादा _____ नहीं रखना है।
°श्रीमत, इन्ट्रेस्ट

9. चित्रों को, शास्त्रों को भी *परिक्रमा* दिलाते हैं फिर घर ले आकर सुलाते हैं। बाबा ने इसका कौन-सा बहुत सुन्दर आध्यात्मिक रहस्य सुनाया?
° अभी तुम बच्चे जानते हो हम सतयुग में पहले लक्ष्मी-नारायण देवता से क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र बनते हैं, यह चक्र लगाते हैं। *चक्र के बदले वह फिर परिक्रमा* दिलाकर घर में जाए रखते हैं।

10. बाबा ने समझाया है माया *आंखों द्वारा बहुत धोखा* देती है। कैसे? (4) तो अब आंखों का *क्या करना* है? (2)
° ( *लोभ* ) अच्छी चीज़ देखेंगे तो दिल बित-बित करेगी खायें।
° आंखों से देखते हैं तब *क्रोध* आता है मारने लिए। देखें ही नहीं तो मारे कैसे।
° आंखों से देखते हैं तब लोभ, *मोह* भी होता है। मुख्य धोखा देने वाली आंखे हैं।
° क्रिमिनलपना ( *विकार* )
° (क्या करना है) इन पर *पूरी नज़र* रखनी चाहिए। *आत्मा को ज्ञान* मिलता है, तो फिर क्रिमिनलपना छूट जाता है। ऐसे भी नहीं है आंखों को निकाल देना है। तुम्हें तो क्रिमिनल आई को *सिविलआई* बनाना है। अच्छा!

Answers from Sakar Murli 25-07-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 25-07-2020*

1. हम रचयिता और रचना के आदि-मध्य-अन्त को जान गये हैं। तो आदि में *नई दुनिया में नया भारत* कैसा था? (3) अब अन्त में विश्व कैसा बन गया है?
° भारत में सतयुग (स्वर्ग, दिन, विष्णुपुरी, शिवालय, वन्डर ऑफ वर्ल्ड) था तो देवी-देवताओं *(लक्ष्मी-नारायण) का राज्य* था (वजीर भी नहीं), एक ही धर्म था। है ।
° भारत *मोस्ट सालवेन्ट* था। हीरे-जवाहरों के महल थे
° वाइसलेस, *महान् पवित्र देश* था
° अभी है 100 परसेन्ट इरिलीजस, अनराइटियस, इनसालवेन्ट, पतित विशश

2. अभी तुम समझाते हो कि भारत की _____ कला और _______ कला कैसे होती है।
°चढ़ती, उतरती

3. जबकि देही-अभिमानी को ही ईश्वरीय सम्प्रदाय कहा जाता है (क्योंकि ईश्वर को देह है ही नहीं। सदैव आत्म-अभिमानी है।), तो *आत्म-अभिमानी बनने के लिए* बाबा ने आज कौन-कौन सी पॉइंट्स सुनाई? (3)
° *रूहानी बच्चे* सुन रहे हैं। अपने को *आत्मा समझकर* बैठो। देह न समझो। हम *फर्स्टक्लास* आत्मा हैं।
° आत्मा *अविनाशी* है, शरीर विनाशी है। आत्मा *शरीर द्वारा पार्ट* बजाती है। आत्मा तो *अशरीरी* है ना। कहते भी हैं अशरीरी आये हैं, अशरीरी जाना है।
° *भृकुटी के बीच* चमकता है अजब सितारा। उसमें *84 जन्मों का पार्ट* भरा हुआ है।

4. व्यर्थ से बेपरवाह बनो, _______ में नहीं।
°मर्यादाओं

5. जबकि हमे परमपिता परमात्मा (सुप्रीम आत्मा, सभी आत्माओं का बाप। ऊंचे ते ऊंच।) को याद करना है, तो उनका *रूप* , *महिमा* और (हमसे) *सम्बन्ध* क्या है?
° (रूप) वह *निराकार* है (जन्म-मरण में नहीं आते)।
° (महिमा) *ज्ञान का सागर, शान्ति का सागर, पवित्रता का सागर*, यह उस एक की ही महिमा है। (दूसरे कोई की महिमा हो नहीं सकती। देवताओं की महिमा अलग है, परमपिता परमात्मा शिव की महिमा अलग है। वह है बाप।)
° (सम्बन्ध) वह हमारा क्रिएटर, रचता, बाप है ( *सर्व* ही सम्बन्ध है)

6. इस रूद्र *यज्ञ* का पूरा नाम क्या है?
° राजस्व अश्वमेध अविनाशी रूद्र गीता ज्ञान यज्ञ।

7. बाबा के *स्नेह का रिटर्न* क्या है? ऐसा बनने से *प्राप्ति* क्या है? तो अभी कौन-सा *पुरुषार्थ* करना है?
° *फरिश्ते पन की स्थिति में स्थित होना* – यही बाप के स्नेह का रिटर्न है।
° ऐसा रिटर्न देने वाले *समाधान स्वरूप* बन जाते हैं। समाधान स्वरूप बनने से स्वयं की वा अन्य आत्माओं की समस्यायें स्वत: समाप्त हो जाती हैं।
° तो अब ऐसी सेवा करने का समय है, लेने के साथ *देने का समय* है। इसलिए अब *बाप समान उपकारी* बन, पुकार सुनकर अपने फरिश्ते रूप द्वारा उन आत्माओं के पास पहुंच जाओ और समस्याओं से थकी हुई आत्माओं की *थकावट उतारो*।

8. इस सच्चे-सच्चे *सतसंग* (सत का संग) और दुनिया के सत्संगो में कौन-से 2 मुख्य अन्तर हैं?
° उसमें *आत्मा या परमात्मा का ज्ञान* न कोई में है, न दे सकते हैं।
° वहाँ तो कोई *एम आबजेक्ट* होती नहीं। तुम बच्चे तो अभी *पढ़ाई* पढ़ रहे हो।

9. इस युग को *पुरूषोत्तम* संगमयुग क्यों कहा जाता है?
° बाबा हमको ऐसा *पुरूषोत्तम बनाते* हैं। (यह सच्ची सत्य नारायण की कथा है। सत्य बाप तुमको नर से नारायण बनने का राजयोग सिखला रहे हैं। यह ज्ञान सिर्फ एक बाप के पास है।)
° बाप तुमको पुरूषोत्तम, *पारसबुद्धि* बना रहे हैं।
° बाप मनुष्य से *देवता* बनने की तुम्हें सुमत देते हैं।

10. बाप की मत के लिए ही गाया जाता है तुम्हरी गत- *मत न्यारी*…..। क्यों?
° बाप समझाते हैं मैं *ऐसी श्रेष्ठ मत देता हूँ जो तुम देवता बन जाते* हो।

11. भारत ही *ऊंच खण्ड* है, जो भी मनुष्य मात्र हैं, उनका यह *तीर्थ* है। कैसे?
° सर्व की सद्गति करने *बाप यहाँ ही आते* हैं। रावण राज्य से लिबरेट कर गाइड बन ले जाते हैं।

12. इस नॉलेज को पूरी रीति समझने में *7 रोज़* क्यों लगते हैं? (2)
° पतित *बुद्धि को पावन* बनाना है।
° सिर्फ स्थूल प्राप्तियों से समझते हैं हम स्वर्ग में बैठे हैं। सुखधाम (स्वर्ग) को बिल्कुल जानते नहीं क्योंकि पत्थरबुद्धि हैं। अब उन्हें *पारसबुद्धि बनाने के लिए* 7 रोज़ की भट्ठी में बिठाओ।
(पतित को यहाँ तो बिठा नहीं सकते। यहाँ पावन ही रह सकते हैं। पतित को एलाउ नहीं कर सकते।)

13. शिव के मन्दिर में इतने ही हीरे जवाहर थे जो मुहम्मद गजनवी *ऊंट भरकर* ले गये। _(सही / गलत)_
° *गलत*… (इतने माल थे, ऊंट तो क्या कोई लाखों ऊंट ले आये तो भी भर न सकें। सतयुग में सोने, हीरे-जवाहरों के तो अनेक महल थे। मुहम्मद गजनवी तो अभी आया है। द्वापर में भी कितने महल आदि होते हैं। वह फिर अर्थक्वेक में अन्दर चले जाते हैं।)

14. *कल्प की आयु* लम्बी-चौड़ी क्यों कर दी है? कौन-से *तर्क* से यह सत्य स्पष्ट कर सकते?
° *84 लाख योनियाँ* समझने के कारण। (वास्तव में है 5 हज़ार वर्ष। बाप समझाते हैं तुम 84 जन्म लेते हो, न कि 84 लाख।)
° कल्प की आयु लाखों वर्ष दें फिर तो (ज़न) *संख्या* बहुत होनी चाहिए।

15. *हम सो* का अर्थ क्या समझते है? सही अर्थ क्या है?
° हम आत्मा सो परमात्मा कह देते हैं, कितना रांग है।
° सही अर्थ है *हम आत्मा ब्राह्मण सो देवता* सो क्षत्रिय…. बनती। (सो फिर ब्राह्मण)

Answers from Sakar Murli 24-07-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 24-07-2020*

1. हज़ूर को बुद्धि में _____ रखो तो सर्व प्राप्तियां जी ____ करेंगी।
°हाज़िर, हज़ूर

2. बाबा, *माया भुला देती है*। _(सही / गलत)_
° *गलत*… (दोष माया पर रखते हैं। अरे, याद तो तुमको करना है। बाप को भूल जाते हो, अच्छा टीचर को याद करो। (गुरू भी) तुमको 3 चांस दिये जाते हैं। एक भूले तो दूसरे को याद करो।)

3. जबकि बहुत प्यार से बाबा को याद करना है, तो बाबा ने आज आते ही कौन-सी *याद की युक्ति* बताई? किन-किन बातों को *ज्ञान* कहेंगे? 84 के *चक्र को याद* करने से क्या प्राप्ति है? आत्मा की *वैल्यू* कब है?
° (याद की युक्ति) जब मुरली पहले बैठते हैं, अन्दर में हो शिव भोले बाबा आये हैं। समझो आधा घण्टा शान्त में बैठ जाते हैं, बोलते नहीं हैं तो तुम्हारे अन्दर आत्मा कहेगी कि शिवबाबा कुछ बोले। जानते हो शिवबाबा विराजमान है, परन्तु बोलते नहीं हैं। *यह भी तुम्हारी याद की यात्रा है ना। बुद्धि में शिवबाबा ही याद है*। अन्दर में समझते हो बाबा कुछ बोले, ज्ञान रत्न देवे।
° (ज्ञान) *बाबा जो कुछ समझायेंगे उसको ज्ञान कहेंगे*। (देही-अभिमानी हो रहो। बाप को याद करो। यह ज्ञान हुआ। बाप कहते हैं इस ड्रामा के चक्र को, सीढ़ी को और बाप को याद करो – यह ज्ञान हुआ। बाबा जो कुछ समझायेंगे उसको ज्ञान कहेंगे। याद की यात्रा भी समझाते रहते हैं। यह सब है ज्ञान रत्न।
°(84 के चक्र की याद से) स्मृति रहेंगी चक्र पूरा हुआ, हम पवित्र आये थे फिर *पवित्र* होकर ही जाना है। *कर्मातीत* अवस्था में जाना है और बाप से *पूरा वर्सा* लेना है। वह तब मिलेगा, जब आत्मा *सतोप्रधान* बन जायेगी याद के बल से। (नहीं तो सज़ायें खानी पड़ेंगी।) पुरानी जुत्ती से *वैराग्य* होगा।
° (आत्मा की वैल्यू) वहाँ तुम्हारी आत्मा की कितनी वैल्यु रहती है। *सतोप्रधान* है ना।वहाँ आत्मा पवित्र है, तो बहुत वैल्यु है। अभी 9 कैरेट बन गई है तो कोई वैल्यु नहीं है इसलिए बाप कहते हैं आत्मा को पवित्र बनाओ तो फिर शरीर भी पवित्र मिलेगा। जैसा सोना वैसा जेवर। सतयुग में हम आत्मा और शरीर दोनों पवित्र थे। (यह ज्ञान और कोई दे न सके।)

4. बाबा ने आज कौन-सी 5 *अलौकिक* बाते बताई?
° शिवबाबा है निराकार, *उनका अलौकिक जन्म* है।
° तुम *बच्चों को भी अलौकिक जन्म* देते हैं।
° अलौकिक *बाप*
° अलौकिक *बच्चे*
° अलौकिक बाप से अलौकिक *वर्सा* मिलता है।

5. अपने को आत्मा समझना कभी-कभी मुश्किल रहता। धन्धे आदि में वह अवस्था नहीं रहती। बाप कहते हैं अच्छा अपने को *आत्मा नहीं समझ सकते हो, तो* यह करो। क्या? (2)
° *शिवबाबा को याद* करो। (हथ कार डे दिल यार डे।)
° धंधा आदि करते यही मेहनत करो कि मैं *आत्मा* इस शरीर से काम करती हूँ। मैं *आत्मा* ही शिवबाबा को याद करती हूँ। *आत्मा* ही पहले-पहले पवित्र थी, अब फिर पवित्र बनना है।

6. बाबा ने कहा इस पुरुषार्थ में *बड़ी जबरदस्त कमाई* है (दुनिया की तुलना में)। कैसे?
° यहाँ कितने भी साहूकार हैं, अरब-खरब हैं परन्तु वह सुख नहीं है। *सबके सिर पर दु:ख* हैं।

7. कौन-सी 3 बातों की *जांच* रखनी है?
° तुम बच्चे अपनी जांच करते रहो, कोई हमारे में *अवगुण* तो नहीं है? *याद* में रहते हैं? *पढ़ाई* भी पढ़नी है।

8. प्रैक्टिकल में तुम _____ में जाकर राज्य करेंगे। तुम गुप्त वेष में _______ से अपना गँवाया हुआ राज्य लेते हो।अब तुम बच्चों को 21 जन्म विश्राम पाने के लिए ___ तो जरूर बनना पड़े। इस पुरानी दुनिया से ______ होना है।
°वैकुण्ठ, दिल व जान, सिक व प्रेम, पावन, नष्टोमोहा

9. बाप समझाते हैं – बच्चे, नर से नारायण बनना है तो तुम्हारी जो ____ है, वही करनी हो। पहले अपनी _____ को देखना है। बाबा हम तो आपसे पूरा वर्सा लेकर ही छोड़ेंगे, तो वह _____ भी चाहिए।
°कथनी, अवस्था, चलन

10. *नई दुनिया में नये भारत* का बाबा ने क्या वर्णन किया? (3)
° कैपीटल भी जानते हो, *जमुना का कण्ठा* था, जिसको परिस्तान भी कहते थे।
° उसमें देवी-देवता थे। वहाँ नैचुरल ब्युटी रहती है। आत्मा पवित्र बन जाती है तो पवित्र आत्मा को शरीर भी पवित्र मिलता है। बाप कहते हैं मैं आकर तुमको *हसीन सो देवी-देवता* बनाता हूँ।
° है ही *वाइसलेस* वर्ल्ड। वहाँ होते ही हैं मोहजीत।

11. परमात्मा *सृष्टि का मालिक* है। _(सही / गलत)_
° * *गलत* (बाप समझाते हैं – मीठे-मीठे बच्चों, मैं इस सृष्टि का मालिक नहीं हूँ। तुम मालिक बनते हो और फिर राज्य गँवाते हो। फिर बाप आकर विश्व का मालिक बनाते हैं।)

12. इस *पढ़ाई* की कौन-सी विशेषताएं आज बाबा ने सुनाई? (6)
° यह पढ़ाई है *ऊंच ते ऊंच* ,
° *पढ़ाने वाला भी* है ऊंच ते ऊंच शिवबाबा।
° वहाँ तो मनुष्य, मनुष्य को पढ़ाते हैं। हो तुम भी मनुष्य परन्तु बाप तुम *आत्माओं को बैठ पढ़ाते* हैं। पढ़ाई के संस्कार आत्मा में ही रहते हैं। यह है *रूहानी नॉलेज* । तुम्हारी रूह को रूहानी बाप बैठ नॉलेज सुनाते हैं।
° 5 हज़ार वर्ष पहले भी तुमने सुनी थी। सारे मनुष्य सृष्टि भर में ऐसे कभी कोई पढ़ाता नहीं होगा। किसको भी पता नहीं, *ईश्वर कैसे पढ़ाते* हैं?
° तुम बच्चे जानते हो अभी इस *पढ़ाई से किंगडम* स्थापन हो रही है।
° यह एक ही पढ़ाई है, *नर से नारायण* बनने की।

13. जबकि *पढ़ाई से किंगडम* स्थापन हो रही है, तो हाइएस्ट कौन बनते और प्रजा में कौन आते?
° जो अच्छी रीति पढ़ते और *श्रीमत* पर चलते हैं वह हाइएस्ट बनते हैं।
° जो बाप की जाए निंदा कराते हैं, हाथ छोड़ जाते हैं वह प्रजा में बहुत कम पद पाते हैं।

14. ____ नहीं करते हैं तो मोस्ट वैल्युबुल टाइम नुकसान होता है।
°याद

15. इस *खेल* के बारे में क्या-क्या सुनाया? (3)
° यह *हार और जीत* का खेल है।
° यह *अनादि* खेल चला आता है। चक्र फिरता रहता है, प्रलय होती नहीं। भारत तो अविनाशी खण्ड है।
° सूर्य-चांद इस *माण्डवे की बत्तियां* हैं।

16. *सच्ची सत्य नारायण की कथा* किसे कहेंगे? *अल्लाह अवलदीन* का आध्यात्मिक रहस्य क्या है? *हातमताई* की कहानी से कौन-सी धारणा की पॉइंट सीखनी है?
° (सच्ची सत्य नारायण की कथा) तुमको पहचान मिली है – *हम तो मालिक थे, सूर्यवंशी देवतायें थे। अभी फिर वह बनने के लिए पुरूषार्थ कर रहे* हो क्योंकि यहाँ तुम सत्य नारायण की कथा सुन रहे हो ना। बाप द्वारा हम नर से नारायण कैसे बनें? बाप आकर राजयोग सिखलाते हैं।
° (अल्लाह अवलदीन) दिखाते हैं ठका करने से खजाना निकल आया। अभी तुम बच्चे जानते हो – *अल्लाह तुमको ठका करने से क्या से क्या बनाते* हैं।
° (हातमताई) मुहलरा मुख में डालते थे तो माया गुम हो जाती थी। मुहलरा निकालने से माया आ जाती थी। रहस्य तो कोई समझ न सके। बाप कहते हैं बच्चे *मुख में मुहलरा डाल दो। तुम शान्ति के सागर (की सन्तान) हो, आत्मा शान्ति में अपने स्वधर्म में रहती* है।

17. जैसे स्थूल सीजन का इन्तजाम करते, जिससे किसी को कोई तकलीफ न हो, समय व्यर्थ न जाए। ऐसे ही अब *हमें क्या करना* है? इसके लिए क्या *पुरुषार्थ* है?
° सर्व आत्माओं की गति-सद्गति करने की अन्तिम सीजन आने वाली है, तड़फती हुई आत्माओं को क्यू में खड़ा करने का कष्ट नहीं देना है, *आते जाएं और लेते जाएं*।
° इसके लिए *एवररेडी* बनो। पुरूषार्थी जीवन में रहने से ऊपर अब दातापन की स्थिति में रहो। *हर संकल्प, हर सेकण्ड में मास्टर दाता* बन करके चलो।

Answers from Sakar Murli 23-07-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 23-07-2020*

1. बाबा ने आते ही कौन-से *बहुत सुन्दर शब्दों में हमारे भाग्य का वर्णन* किया, जिसकी हमे बहुत खुशी होनी चाहिए। (3) हमारा जीवन *अमूल्य* क्यों है?
° ऊंच ते ऊंच भगवान तुमको (अपने से भी) *ऊंच ते ऊंच* सारे विश्व का मालिक बनाते हैं।
° किसी को कुछ पता नहीं। दुनिया क्या है, *वैकुण्ठ* क्या है। भल कितने भी कोई नवाब, मुगल आदि होकर गये हैं, भल अमेरिका में कितने भी पैसे वाले हैं परन्तु इन *लक्ष्मी-नारायण* जैसे तो हो न सकें। वह तो व्हाईट हाउस आदि बनाते हैं परन्तु वहाँ तो *रत्न जड़ित गोल्डन हाउस* बनते हैं।
° तुम्हारा ही *हीरो-हीरोइन* का पार्ट है। तुम *डायमण्ड* बनते हो। गोल्डन एज थी। अब है आइरन एज। बाप कहते हैं तुम कितने *भाग्यशाली* हो। भगवान खुद बैठ समझाते हैं।
° यह तुम्हारा जीवन बहुत अमूल्य है क्योंकि तुम विश्व की सर्विस करते हो।

2. फिर भी *खुशी चली जाये*, तो क्या करना है? (2) *अपार खुशी* में कौन रह सकते हैं? (2)
° जो भी शंका हो (जिस कारण देह-अभिमान में आते) तो *बाबा से पूछो*।
° *कान भी प्योर* करना चाहिए। प्योरिटी फर्स्ट। पवित्रता होगी तो धारणा होगी।
° अपार खुशी उन्हें ही रहेगी जो सदा *दूसरों की खिदमत* (सेवा) में रहते हैं (स्थूल-सूक्ष्म दोनों, सच्ची सत्य नारायण की कहानी सुनाते।)
° मुख्य धारणा *चलन बहुत-बहुत रॉयल* हो। खान-पान बहुत सुन्दर हो।

3. कैसा *स्नेह का सागर* बनना है?
° जो *क्रोध समीप भी न आ सके*।

4. बाबा ने आज कौन-सा *जबरदस्त उल्हना* दिया? (2)
° पतित दुनिया में ही मुझे बुलाते हैं। पारसनाथ बनाता हूँ। तो बच्चे खुद पारसपुरी में आ जाते हैं। वहाँ तो मुझे कभी *बुलाते ही नहीं* हैं। कभी बुलाते हो कि बाबा पारसपुरी में आकर थोड़ी विजिट तो लो? बुलाते ही नहीं।
° गायन भी है दु:ख में सिमरण सब करें, पतित दुनिया में याद करते हैं, सुख में करे न कोई। *न याद करते* हैं, न बुलाते हैं।

5. अमरलोक में *ऊंच पद* पाने के लिए क्या करना है? (3) *अविनाशी ज्ञान रत्नों के व्यापार* पर बाबा ने क्या सुनाया? (3)
° (ऊंच पद लिए) एक तो *पवित्र* बनना है, दूसरा फिर *दैवीगुण* भी धारण करने हैं। अपना रोज़ *पोतामेल* रखो।
° व्यापारी लोग इन बातों को अच्छी रीति समझेंगे। यह हैं ज्ञान रत्न। *कोई विरला व्यापारी* इनसे व्यापार करे। कोई तो अच्छी रीति व्यापार कर *स्वर्ग का सौदा* लेते हैं – *21 जन्म* के लिए। 21 जन्म भी क्या 50-60 जन्म तुम *बहुत सुखी* रहते हो। *पद्मपति* बनते हो। (देवताओं के पैर में पद्म दिखाते हैं ना।)
° स्थूल व्यापार तो इनके आगे कुछ भी नहीं है।

6. बाबा कहा तो *बाबा माना बाबा* । यह कहकर बाबा ने अपनी कौन-सी *महिमा* सुनाई? (3)
° भक्तिमार्ग में भी गाया जाता है पतियों का *पति* , गुरूओं का *गुरू* एक ही है। वह हमारा *फादर* है।
° ज्ञान का सागर *पतित-पावन* है।
° तुम बच्चे कहते हो बाबा हम कल्प-कल्प आपसे वर्सा लेते आये हैं। आप बेहद के बाप से हमको जरूर *बेहद का वर्सा* मिलेगा। बाबा माना वर्सा। *बेहद का बाप* तो एक ही है। अच्छा।

7. अभी तुम बच्चों को कितनी _____ करनी चाहिए। बाप समझाते हैं तुमको तो ______ का दाना बनना है। ऐसे मीठे-मीठे बाबा को _______ भी कहते हैं। ऐसे बाप की ____ पर भी चलना चाहिए ना। बाबा कितना समझाते हैं, _चार्ट_ रखो। नहीं तो बहुत पछताना पड़ेगा।मीठे-मीठे _____________ वाले बच्चों प्रति बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग।
°तैयारी,विजय माला, बाबा-बाबा, राय, 5 हज़ार वर्ष बाद फिर से आकर मिलने

8. *कृष्ण* कैसे बना?
इन भक्ति मार्ग की बातों का आध्यात्मिक रहस्य क्या है:
° *मानसरोवर* में टुबका लगाये तो परी बन जाये।
° पाण्डवों के बहुत *बड़े-बड़े चित्र*
° विष्णु की *नाभी* से ब्रह्मा निकला
° कृष्ण ने *भगाया*!
उत्तर:
° *आगे जन्म में शिवबाबा को याद* करने से ही कृष्ण बना।
° वास्तव में है *ज्ञान मानसरोवर*। उसमें तुम क्या से क्या बन जाते हो। *शोभनिक* को परी कहते हैं।
° क्योंकि पाण्डव को महावीर कहा जाता (ऊंची *ऊंची स्थिति* )
° ब्रह्मा सो विष्णु, विष्णु *सो* ब्रह्मा बनते हैं। ब्रह्मा को विष्णु बनने में सेकण्ड लगता है। सेकण्ड में जीवनमुक्ति
° भगवान् अभी हमें (बुद्धि से भगाकर!) पटरानी बनाते। स्वर्ग की महारानी!

9. समय प्रति समय जैसे हमारी स्टेज आगे बढ़ती जा रही है, *माया* का क्या होना चाहिए? यदि माया आ भी जाए, तो क्या करना चाहिए? निर्भय वा *मायाजीत* कौन बन सकते?
° अब माया का वार नहीं होना चाहिए, *माया नमस्कार* करने आये वार करने नहीं।
° यदि माया आ भी जाए तो उसे *खेल* समझकर देखो। ऐसे अनुभव हो जैसे *साक्षी* होकर हद का *ड्रामा* देखते हैं। माया का कैसा भी विकराल रूप हो आप उसे खिलौना और खेल समझकर देखेंगे तो बहुत मजा आयेगा, फिर उससे डरेंगे वा घबरायेंगे नहीं।
° जो बच्चे सदा *खिलाड़ी* बनकर साक्षी हो माया का खेल देखते हैं वह सदा निर्भय वा मायाजीत बन जाते हैं।

Answers from Sakar Murli 22-07-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 22-07-2020*

1. तुम बच्चों को बहुत ____ रहनी चाहिए। तुम _____ भी रॉयल हो। तुम बच्चों को कितना ____ रहना चाहिए और ऊंच ______ होने चाहिए।
°खुशी, स्टूडेन्ट, नशा, ख्यालात

2. सतयुग में एक ही _____ , पवित्रता-सुख-शान्ति सब रहता। तुम बच्चे जानते हो बाप ______ का मालिक बनाने आये हैं। ______ को कहते ही है गॉर्डन ऑफ अल्लाह। हम जिसके मालिक बन रहे हैं।
°धर्म, सुखधाम, बहिश्त

3. *निश्चयबुद्धि* की 3 निशानीयां कौन-सी है? हमे *डबल पितायें* कौन-से मिले हैं?
° *निश्चित* विजयी और *निश्चिंत*, उनके पास *व्यर्थ आ नहीं सकता*।
° एक *निराकार* ऊंच ते ऊंच, दूसरा फिर *साकार* वह भी ऊंच ते ऊंच।

4. स्टूडेन्ट कहाँ भी बैठे होंगे उनकी बुद्धि में बाप भी याद आता है, ______ भी याद पड़ता है। भगवान जिसको सारी दुनिया अल्लाह गॉड कह पुकारती है, वह यहाँ ड्रामा अनुसार कल्प पहले मुआफिक आये हैं। यह है गीता का _____ , जिसमें बाप आकर स्थापना करते हैं।मूलवतन, सूक्ष्मवतन और सृष्टि का चक्र, बस, और कोई ____ से तुम्हारा काम नहीं।
°टीचर, एपीसोड, धाम

5. हम ब्राह्मणों का *अलौकिक धर्म* क्या है? बाबा *सच्चा खुदाई खिदमतगार* किन्हें कहते? *छोटे बच्चों* की कैसे सेवा कर सकते?
° (अलौकिक धर्म) *श्रीमत पर अलौकिक सेवा* में तत्पर रहना। (यह भी मनुष्यों को पता पड़ जायेगा कि तुम श्रीमत पर कितना ऊंच काम कर रहे हो। तुम्हारे जैसी अलौकिक सर्विस कोई कर न सके। इसमें ही बिजी रहना चाहिए।)
° (सच्चा खुदाई खिदमतगार) जो *कम से कम 8 घण्टा आत्म-अभिमानी* रहने का पुरूषार्थ करते हैं।
° (छोटे बच्चे) उनको भी *शिवबाबा की ही याद* दिलानी

6. सदा _____ की स्थिति में स्थित रहने वाले _____ -मुक्त, _____ -मुक्त भव। ________ बनना – यह है बेहद की स्थिति।
°बेहद, बन्धन, जीवन, देही अभिमानी

7. आज बाबा ने आते ही पहले-पहले कौन-सी *सावधानी* दी? (2) वा नम्बरवन बात बताई?
° यहाँ बैठते हो तो अपने को *आत्मा* समझ बाप के आगे बैठे हो? (आत्मा इन आरगन्स द्वारा सुनती) यह भी बुद्धि में लाओ कि हम *बाप* के आगे भी बैठे हैं, टीचर के आगे भी बैठे हैं। (उनसे पढ़ते)
° नम्बरवन बात है – *हम आत्मा हैं, बाप भी आत्मा* है, टीचर भी आत्मा है, गुरू भी आत्मा है। एक ही है ना। यह नई बात तुम सुनते हो।
° (तुम कहेंगे बाबा हम तो कल्प-कल्प यह सुनते हैं। यह ज्ञान इस समय ही तुम बच्चों को मिलता है ऊंच ते ऊंच भगवान द्वारा। वह सभी आत्माओं का बाप है जिससे हम स्वर्ग का वर्सा ले रहे हैं।)

8. हम स्वर्ग में जरूर जायेंगे। स्वर्ग की स्थापना जरूर होनी है। फिर हम *पुरूषार्थ क्यों* करते? *स्वर्ग* / सतयुग किसे कहेंगे? कौन-सी बात समझने में *बुद्धि बड़ी विशाल* चाहिए?
° (पुरूषार्थ क्यों) सिर्फ *ऊंच पद* पाने लिए।
° (स्वर्ग किसे कहेंगे) स्वर्ग कहा ही जाता है *नई दुनिया को* । त्रेता को नई दुनिया थोड़ेही कहेंगे। पहले-पहले सतयुग में है एकदम नई दुनिया।।
° यह *लक्ष्मी-नारायण* विश्व के मालिक कैसे बनें! इस समझने में बुद्धि बड़ी विशाल चाहिए।

9. शिवबाबा का *पार्ट* ही दिव्य अलौकिक है। कैसे?
° *पतितों को पावन* बनाने वाला एक ही बाप है। कहते हैं मेरा पार्ट सबसे न्यारा है।

10. ऐसे नहीं ड्रामा अनुसार हमारा कम पुरूषार्थ चलता है। *पुरूषार्थ को तेज* करना चाहिए। कैसे? (3)
° ड्रामा पर *छोड़ नहीं देना* है।
° अपने *चार्ट* को देखते रहो। बढ़ाते रहो। नोट रखो हमारा चार्ट बढ़ता जाता है, कम तो नहीं होता है।
° बहुत खबरदारी चाहिए। यहाँ तुम्हारा है ब्राह्मणों का *संग*। बाहर में सभी है कुसंग।

11. बाबा कह रहे थे हमे इस समय बिल्कुल *सिम्पुल* रहना है। इस सन्दर्भ में अति देह-अभिमान किसे कहेंगे? इन शिक्षाओं का *प्रैक्टिकल सार* क्या है?
° 100-150 रूपया देते हैं सिर्फ बाल बनाने के लिए। इसको कहा जाता है अति देह-अभिमान। (ऊंची साड़ी, आदि)
° (प्रैक्टिकल सार) देह-अभिमान तोड़ने के लिए सब हल्का कर देना चाहिए। अच्छी चीज़ देह-अभिमान में लाती है। (और देह-अभिमान छोड़ने से ही *बाबा से सम्पूर्ण योग लगाकर सर्व प्राप्ति सम्पन्न* बन सकते, कल्प-कल्पान्नतर के लिए)

12. हम कैसे *वारियर्स* / सेना हैं? (3) हमारा मुख्य *कर्त्तव्य* क्या है?
° इनकागनीटो, अननोन (गुप्त), नान-वायोलेन्स (डबल अहिंसक)
° (मुख्य कर्त्तव्य) *पवित्र* जगतजीत लक्ष्मी-नारायण बनना।

13. अपने अभी तुमको कोई चित्र आदि भी याद नहीं करना है। सब कुछ भूलो। कोई में बुद्धि न जाए, लाइन ______ चाहिए। पहले-पहले तुम _______ आये थे, फिर तुमको जाना है। तुम ________ हो। वह होते हैं हद के एक्टर्स, तुम हो बेहद के। ______ को भूल अपने को आत्मा समझ और बाप को याद करना है, तब ही पाप नाश होंगे।
.°क्लीयर,अशरीरी, आलराउन्डर, दुनिया

14. जो स्वयं को *बेहद का पार्टधारी* समझकर चलते हैं, उनकी निशानी क्या होंगी? (2)
° उनकी बुद्धि में कोई भी सूक्ष्म वा स्थूल *देहधारी की याद नहीं* होगी। वह एक बाप को और शान्तिधाम घर को याद करते रहेंगे क्योंकि बलिहारी एक की है।
° जैसे बाप सारी दुनिया की खिदमत करते हैं, पतितों को पावन बनाते हैं। ऐसे बच्चे भी *बाप समान खिदमतगार* बन जाते हैं।

15. याद की मेहनत से सर्व ______ को तोड़ कर्मातीत बनना है।
°कर्मबन्धनों

Answers from Sakar Murli 21-07-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 21-07-2020*

1. आत्मा जब पवित्र है तो ________ कही जाती है, फिर शरीर भी एसा मिलता। अभी तुम बच्चे आत्म-अभिमानी बनने के _______ अपने में डालते हो। तुम अभी ______ पर पूज्य देवता बन रहे हो। अभी तुमको आसुरी बंधनों से छुड़ाकर सुख के _____ सम्बन्ध में ले जाते हैं। आत्माओं और परमात्मा का _____ होता है।
°गोल्डन एजेड, संस्कार, संगमयुग, दैवी, मेला

2. कैसी भी धरनी तैयार करनी है तो वाणी के साथ ___ से सेवा करो।
°वृत्ति

3. *खूबसूरती* पर बाबा ने कितनी पॉइंट्स सुनाई? (8)
° उनको हसीन परमपिता *परमात्मा* भी कहा जाता है, बहुत खूबसूरत है क्योंकि वह एवर प्योर है।
° *आत्मा* प्योर बन जाती है तो उनको शरीर भी प्योर, नैचुरल सुन्दर मिलता है।
° शान्तिधाम में आत्मायें पवित्र रहती हैं फिर जब यहाँ आती हैं *पार्ट* बजाने तो सतोप्रधान सुन्दर से श्याम अर्थात् काली इमप्योर बन जाती हैं (सतो, रजो, तमो)
° ऐसे नहीं, आजकल जो बहुत खूबसूरत हैं, उनकी आत्मा पवित्र है। नहीं। भल शरीर खूबसूरत है फिर भी आत्मा तो पतित है ना ( *नर्क की खूबसूरती* )
° यह लक्ष्मी-नारायण हैं *सतयुगी खूबसूरत*
° हम अभी स्वर्ग के लिए *नेचुरल सुन्दर बन रहे* हैं। 21 जन्म के लिए ऐसे सुन्दर बनेंगे।
° बाबा आया हुआ है, सारी दुनिया के मनुष्य मात्र तो क्या *दुनिया को भी खूबसूरत* बनाते हैं। सतयुग नई दुनिया में थे ही खूबसूरत देवी-देवतायें।
° बाबा कहते हैं मैं तुमको हसीन (सुन्दर) बनाने आया हूँ, तुम फिर काला मुँह मत करो।

4. यह _____ शरीर बहुत वैल्युबल है, इसमें बहुत _____ करनी है। बेहद के बाप के साथ खाते, पीते……. सर्व ____ की अनुभूति करनी है।
°अन्तिम पुरुषार्थी, कमाई, सम्बन्धों

5. कोई भी ऐसा कर्म नहीं करना है जिससे ब्राह्मण परिवार की वा बाप की _____ जाये। आत्म अभिमानी बन पूरा ____ बनना है। ____ से पुरानी खाद निकालनी है।
°इज्ज़त, पवित्र, याद

6. बाबा *अपने से भी बच्चों को ऊंच* बनाते हैं। कैसे? _(2)_
° तुम *डबल मालिक* बनते (विश्व का भी मालिक हो तो ब्रह्माण्ड का भी मालिक बनते हो)
° तुम्हारी *पूजा भी डबल* होती है। आत्माओं की भी पूजा होती है। देवता वर्ण में भी पूजा होती है।
° (बाबा कहते) मेरी तो सिंगल सिर्फ शिवलिंग के रूप की पूजा होती है। मैं राजा तो बनता नहीं हूँ। तुम्हारी कितनी सेवा करता हूँ।

7. इस कलियुगी दुनिया में कुछ भी हो लेकिन आपकी सदा ______ कला है। दुनिया के लिए हाहाकार है और आपके लिए ______ है। आप किसी भी परिस्थिति से घबराते नहीं क्योंकि आप पहले से ही _____ हो। ______ होकर हर प्रकार का खेल देख रहे हो। वह सहज ही बेहद के ____ बन जाते हैं।
°चढ़ती, जयजयकार, तैयार, साक्षी, वैरागी

8. रूहानी शमा पर जो *परवाने फिदा* होने वाले हैं, उनकी निशानी क्या होगी?
° शमा *जो है जैसी है* उसे यथार्थ रूप से जानते और याद करते हैं।
° फिदा होना माना *बाप समान* बनना।
° फिदा होना माना *बाप से भी ऊंच* राजाई का अधिकारी बन जाना।

9. परमात्मा किसका *सागर* है? (4) *सागर से थालियां* निकलने का आध्यात्मिक रहस्य क्या? परमात्मा के और कौन-से *टाइटल्स* आज सुनाये? (6)
° वही ज्ञान का सागर, पवित्रता, शान्ति, सम्पत्ति का सागर है।
° यह भी दिखाते हैं सागर से रत्नों की थालियाँ निकलती हैं। बाप समझाते हैं यह हैं *अविनाशी ज्ञान रत्न*। इन ज्ञान रत्नों से तुम बहुत साहूकार बनते हो और फिर हीरे जवाहर भी तुमको बहुत मिलते हैं। यह एक-एक रत्न *लाखों रूपये* का है जो तुमको इतना *साहूकार* बनाते हैं।
° निराकार परमपिता *परमात्मा* शिवबाबा, ओबीडियन्ट सच्चा *फादर* , रूहानी *शमा* , *हुसैन* , *हसीन* (एवर प्योर), *सतगुरू* (कालों का काल, महाकाल, सुप्रीम गाइड)

10. *शान्तिधाम* के बारे में क्या-क्या सुनाया?
° आत्माओं और परमात्मा का *घर* शान्तिधाम है। वहाँ चुरपुर कुछ भी नहीं होती है।
° शान्तिधाम में *आत्माएं पवित्र* रहती है।
° बुलाते हैं हमको सद्गति में ले जाओ। ऐसी युक्ति बताओ जो हम शरीर छोड़ *शान्तिधाम चले जायें* ।

11. *ब्रह्मा बाबा* के कौन-से टाइटल्स आज की मुरली में है? (5)
° बेहद का रचयिता, ग्रेट-ग्रेट ग्रैन्ड फादर, आदि देव, एडम, ब्रह्मपुत्रा

Answers from Sakar Murli 20-07-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 20-07-2020*

1. ______ बन सर्विस में तत्पर रहो, क्योंकि इस सर्विस में बहुत ऊंच _____ है, 21 जन्मों के लिए तुम वैकुण्ठ का मालिक बनते हो। समझाना चाहिए ना – इस पढ़ाई से हम ______ बनेंगी। यह पढ़ाई तो भविष्य 21 जन्म के लिए _____ का मालिक बनाती है। अब बाप समझाते हैं विषय सागर से चलो ______ में। सतयुग को ______ कहा जाता है।
°बन्धनमुक्त, कमाई, महारानी, स्वर्ग, शिवालय, क्षीर सागर

2. 100 परसेन्ट सालवेन्ट सोने की चिड़िया भारत के *देवताएं* कैसे थे? (4)
° *सर्वगुण सम्पन्न*
° रिलीजस, राइटियस, कितना बल था। विश्व के मालिक थे।

3. हम विश्व के मालिक पारसनाथ थे। फिर 84 जन्म लेते-लेते अब _____ बन पड़े हैं। बाप ने हमको कितना साहूकार बनाया था, अब कितने _____ बन पड़े हैं। जो पूज्य थे, सो अब _____ बन पड़े हैं।
° पत्थरनाथ, कंगाल, पुजारी

4. हम ब्राह्मणों का *कर्त्तव्य* और *पुरुषार्थ* क्या है?
° तुम ब्राह्मणों का कर्तव्य है – *भ्रमरी* के मिसल कीड़ों को भूँ-भूँ कर आप समान बनाना।
° तुम्हारा पुरूषार्थ है – *सर्प* के मिसल पुरानी खाल छोड़ नई लेने का।

5. जैसे दान पुण्य की सत्ता वाले किसी को क्या भी बना सकते। वैसे हम महादानी पुण्य आत्माओं को *कौन-सी विशेष सत्ता* मिली हुई है? इस सत्ता से हम कौन-सा *वन्डरफुल कार्य* कर सकते? सिर्फ क्या *ध्यान* रखना है?
° डायरेक्ट बाप द्वारा *प्रकृतिजीत, मायाजीत* की विशेष सत्ता प्राप्त है
° आप अपने शुद्ध संकल्प के आधार से *किसी भी आत्मा का बाप से सम्बन्ध जोड़कर मालामाल बना सकते* हो।
° सिर्फ इस सत्ता को *यथार्थ रीति यूज़* करो।

6. बाबा ने आज आते ही कौन-सी वन्डरफुल *श्रीमत* याद दिलायी? वैसे तो नशा स्थाई चढ़ना चाहिए, फिर भी कौन-सी *छोटी सी बात* में नशा उड़ जाता है? यदि बाबा ने फर्स्टक्लास ब्राह्मणी को कहाँ *भेजा* है सर्विस के लिए, तो हमें क्या करना है? इससे *प्राप्ति* क्या होंगी?
° (श्रीमत) बच्चे जब सुनते हैं तो अपने को *आत्मा* निश्चय कर बैठे और यह निश्चय करें कि निराकार *परमात्मा* (बेहद का बाप) हमको सुना रहे हैं। इस *लव*-प्रीत से परमात्मा को याद करना।
° (छोटी सी बात) ऐसे नहीं *ब्राह्मणी नहीं* तो नशा उड़ जाए। (फिर मूँझ जाना, ईर्षा करना, अन्धे लूले बनना, सेन्टर पर न आना, क्लास न करना, आदि)
° याद द्वारा जो धारणा हुई है, उस आधार से *सर्विस करनी है* (प्वाइंट्स सुनाने की प्रैक्टिस, सेन्टर सम्भालना, क्लास कराना, खुशी होनी चाहिए हम गद्दी पर बैठ समझाएं, भल छुट्टी लेनी पड़े)
° तब ही दूसरों को *आप समान* बनायेंगे, प्रजा बनायेंगे।

7. *गुड़ियों की पूजा* किसे कहेंगे?
° चित्रों के *आक्यूपेशन जाने बिना* पूजा करना (समझ के आधार पर करने से ही प्राप्ति है)

8. *इतनी सहज बात* भी किसको समझा नहीं सकते। कौन-सी?
° सीढ़ी में पूरा *84 जन्मों का वृतान्त* है।

9. जब आप _____ की बधाईयां मनायेंगे तब समय, प्रकृति और माया विदाई लेगी।
°सम्पूर्णता

10. *बेहद का वैराग्य* हमने क्यों धारण किया है? तो *प्रैक्टिकल जीवन* में इसकी क्या निशानी है?
° (वैराग्य) क्योंकि हम अब *शिवालय, पावन दुनिया में जा रहे* हैं
° (प्रैक्टिकल में) तुम सब ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ भाई-बहन हो। विकारी तमोप्रधान *दृष्टि* जा न सके। (पुरानी आदतें ईर्ष्या आदि भी छोड़ देनी है)

11. पुरानी दुनिया खलास हो जानी है। सागर की एक ही ____ से सारा डांवाडोल हो जायेगा। नैचुरल कैलेमिटीज किसको भी छोड़ती नहीं है। अच्छा!
°लहर

Answers from Sakar Murli 28-07-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 28-07-2020*

1. *एक का पदमगुणा* फल किन्हें मिलता?
° जो *समय पर सहयोगी* बनते हैं।

2. दुनिया में बहुत प्लान्स बनाते। तो *बाबा का प्लान* क्या है? और हम *बच्चों का प्लान*?
° बाप कहते हैं मेरा प्लैन है *पुरानी को नया* बनाना।
° हमारा एक ही प्लैन है। जानते हो *बाप की श्रीमत से हम अपना वर्सा ले रहे* हैं। बाबा रास्ता बताते हैं, श्रीमत देते हैं, *याद में रहने की मत* देते हैं।

3. बाबा ने आज पुरुषार्थ की कौन-सी *अच्छी-अच्छी युक्तियां* सुनाई? (3) माया *तंग* किन्हें करती है?
° सवेरे में स्नान कर *(याद में) घूमने फिरने* में बड़ा मज़ा आता (तनदुरस्ती भी रहती), अन्दर यही याद रहे हम एक्टर्स हैं। बाबा ने चक्र का राज़ बताया है। हम सतोप्रधान थे, यह बड़ी खुशी की बात है। (मनुष्य घूमते-फिरते हैं, उनकी कुछ भी कमाई नहीं। तुम तो बहुत कमाई करते।)
° अपने को देखो – हम *क्या थे, अब क्या बन गये हैं! फिर हमको बाबा ऐसा देवता बनाते* हैं।
° पुरुषार्थ करते रहो फिर *पक्का* होता जायेगा फिर ऑफिस में काम करने समय भी यह ईश्वर की स्मृति रहेगी। तुम भी घर में बैठो फिर भी बुद्धि उस तरफ लगी रहे। यह *आदत* रखो तो तुम्हारे अन्दर यही *चिन्तन* चलता रहे।
° (माया तंग) जो बच्चे ज्ञान का *विचार सागर मंथन नहीं करते* हैं उनकी बुद्धि में माया खिट-खिट करती है। उन्हें ही माया तंग करती है। (अन्दर विचार करो हमने यह चक्र कैसे लगाया। सतयुग में इतने जन्म लिए। अब फिर सतोप्रधान बनना है। बाबा ने कहा है – मुझे याद करो तो सतोप्रधान बन जाएंगे।)

4. बाप आते ही सेकण्ड में ऊंच चढ़ा देते हैं, तीसरा नेत्र दे दूरांदेशी-विशाल बना देते। तो जबकि हम इतने *समझदार-बुद्धिवान* है, तो हम इस *ड्रामा* में बारे में क्या-क्या जानते हैं? (5) *सार* में क्या याद रखना है?
° हम आत्मा हैं। यह शरीर रूपी *चोला पहनकर बहुरूपी पार्ट* बजाते हैं। नाम, रूप, देश, फीचर्स बदलते जाते हैं।
° सारे ड्रामा के *चक्र का राज़* बुद्धि में याद है (जो बाबा ने दिया है)। एक्टर्स घर में चले जाते हैं, वहाँ कोई पार्ट नहीं बजाते। पार्ट इस स्टेज पर बजाते। गोल्डन एज में सतोप्रधान-पावन-सुख का राज्य था, फिर आइरन एज में रावण-वश तमोप्रधान-पतित-दु:खी बने।
° बाकी आत्मायें सब ऊपर से यहाँ आती हैं पार्ट बजाने। यह झाड़ *सब धर्मों* का नम्बरवार है। (यह सब बीज-झाड़ के चित्र में भी आ जाता, बीच में त्रिमूर्ति भी रखकर समझा सकते)
° इस चैतन्य ड्रामा में ज़रा भी *अदली-बदली नहीं* हो सकती।
° सतयुग से लेकर कलियुग तक आते हैं फिर जाते हैं *फिर नये सिर* आकर पार्ट बजाते हैं।
° ( *सार* ) अपने को *आत्मा* समझना है। मुझ आत्मा में सारे चक्र का *पार्ट* है। अभी वह पार्ट *पूरा* हुआ है। बाप राय देते हैं बहुत सहज, मुझे *याद* करो।

5. वहाँ के *गरीब भी बहुत ऊंच* हैं, यहाँ के साहूकारों से। _(सही / गलत)_
° *सही*… (भल यहां कितने भी बड़े-बड़े राजायें थे, धन बहुत था परन्तु हैं तो विकारी ना। इनसे वहाँ की साधारण प्रजा भी बहुत ऊंच बनती है। बाबा फर्क बतलाते हैं।)

6. कौन-सी *3 प्रकार की विद्या* बाबा ने बताई? इस आध्यात्मिक विद्या (स्प्रीचुअल नॉलेज) की *मुख्य विशेषता* कौन-सी हे?
° उन स्कूलों में मिलती है *जिस्मानी* विद्या। और फिर वह है *शास्त्रों* की विद्या। यह फिर है *रूहानी* विद्या (आध्यात्मिक विद्या, स्प्रीचुअल नॉलेज)
° यह स्प्रीचुअल नॉलेज जो *स्प्रीचुअल फादर* सभी आत्माओं का बाप है, वही *पढ़ाते* हैं। (उनकी महिमा है *शान्ति, सुख का सागर*……।)

7. *परमधाम* के कौन-कौन से नाम आज की मुरली में आये हैं? (6) वहां आत्माएं *कैसी* दिखती है?
° शान्तिधाम, मुक्ति, घर, मूलवतन, निराकारी दुनिया, ब्रह्म महतत्व।
° आत्मायें ब्रह्म महतत्व में खड़ी होती हैं, *जैसे स्टार्स आकाश में* खड़े हैं। (यह स्टार्स तो दूर से *छोटे-छोटे* देखने में आते हैं।)

8. याद के लिए *यात्रा* अथवा *युद्ध* अक्षर सिर्फ समझाने में काम में लाते हैं। _(सही / गलत)_
° *सही* … (इसमें युद्ध आदि कुछ है नहीं। यात्रा भी अक्षर है। बाकी है तो याद।)
° ( *यात्रा* ) याद करते-करते पावन बन जायेंगे। यह यात्रा पूरी भी यहाँ ही होगी। कहाँ जाना नहीं है।
° ( *युद्ध* ) युद्ध कोई है नहीं। अपने को तमोप्रधान से सतोप्रधान बनाना है। माया पर जीत पानी है।

9. भल माया की चमक कितनी भी है परन्तु यह है ______ की गोल्डन एज, वह (सतयुग) है _____ गोल्डन एज। सतयुग में तो एक ____ एक _____ थी, जो अब फिर से स्थापन कर रहे हैं। बाप तो _____ भाषा में ही समझाते रहते हैं। मीठे-मीठे बच्चों को फिर भी समझाते हैं – जल्दी-जल्दी _____ करो। शरीर पर भरोसा थोड़ेही है।
°रावण, ईश्वरीय, राज्य,भाषा, हिन्दी, पुरूषार्थ

10. कोई-कोई बहुत कट्टर होते हैं सुनते भी नहीं, लिटरेचर भी नहीं लेते। बहुत मेहनत करते हैं फिर भी कोई *बिरले निकलते* हैं। इसलिए सेवा छोड़ देनी चाहिए। _(सही / गलत)_
° *गलत* (थकना नहीं है। मेहनत तो करनी है। मेहनत बिगर कुछ मिलता थोड़ेही है। प्रजा तो बनती रहती है)

11. ज्ञान मार्ग में बच्चे कौन-सी *गुड़ियों का खेल* करते? इसके बदले बातों का *क्या करना* है?
° (गुड़ियों का खेल) आपके सामने भी जब कोई निर्जीव, असार बातें (ईर्ष्या, अनुमान, आवेश आदि) आती हैं, आप उनका *विस्तार कर अनुभव करते* या कराते हो कि यही सत्य हैं, तो यह भी जैसे उनमें प्राण भर देते हो।
° फिर उन्हें ज्ञान सागर बाप की याद से, बीती सो बीती कर, स्वउन्नति की लहरों में डुबोते भी हो लेकिन इसमें भी टाइम तो वेस्ट जाता है। इसलिए पहले से ही *मास्टर ज्ञान सागर बन स्मृति सो समर्थी भव के वरदान से इन गुड़ियों के खेल समाप्त* करो।

Answers from Sakar Murli 18-07-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 18-07-2020*

1. तुम बच्चों को अभी कितनी ____ है, नई दुनिया स्थापन हो रही है। बाबा कहते हैं हम तुमको कितना ______ बनाता हूँ। कल्प-कल्प तुम्हारे जैसा _____ और _____ कोई नहीं।।
°खुशी,धनवान,पवित्र,सुखी

2. _____ के महत्व को सामने रख सर्व प्राप्तियों का खाता फुल जमा करो।
°समय

3. बाबा आज हमे किस *विशेष रूप* में मिलने आये है? हम कैसी *सेना* है? (3) हमारा *कर्त्तव्य* क्या है? इसके लिए *प्रैक्टिकल* में क्या करना है? (2)
° बाप है ऊंच ते ऊंच कमान्डर इन चीफ, *सुप्रीम कमान्डर*।
° तुम हो *रूहानी* , बेहद की, डबल अहिंसक, गुप्त सेना (तुम्हारे में कमान्डर्स, कैप्टन, जनरल, लेफ्टिनेंट अर्थात नम्बरवार महारथी, घोड़ेसवार, प्यादे हैं)
° हम *श्रीमत पर सारे विश्व पर फिर से अपना दैवी राज्य स्थापन* कर रहे हैं (नई दुनिया सतयुग, लक्ष्मी-नारायण का राज्य)
° राजऋषि बन (देह-धर्म त्याग कर) मामेकम् याद द्वारा पावन- *पुरुषोत्तम* बनना।
° दूसरा है आपस में मिलकर राय-प्लैन करना (कैसे-कैसे हम सर्विस करें वा बढ़ाएं, सबको बाप का पैगाम-परिचय-सन्देश-मैसेज कैसे दें, हम अपने भाई-बहिनों को चेतावनी कैसे दें)… कि *बाप नई दुनिया स्थापन करने के लिए आये हैं। कहते हैं अपने को आत्मा समझ मुझ बाप को याद करो।* अब इस पुरानी दुनिया का विनाश होना है।)

4. बाबा हम बच्चों को *ज्ञान* सुना रहे हैं। इसमें कौन-सी 3 भक्तिमार्ग की कहानियां आ जाती?
° सत्य नारायण की कथा, तीजरी की कथा, अमर कथा।

5. बाप विश्व का मालिक बनने की पढ़ाई पढ़ाने आये हैं इसलिए कभी ऐसा नहीं कहना कि हमें ______ नहीं। बाप का यह _____ सदा याद रहे – हियर नो ईविल, टॉक नो ईविल……।
°फुर्सत,डायरेक्शन

6. हमें कौन-सा *निश्चय* है? (2)
° हम बाप द्वारा वर्ल्ड का *क्राउन प्रिन्स* बन रहे हैं। (तो ऐसा पुरूषार्थ कर दिखाना है।)
° *माशूक आया हुआ है, जिसको हम पुकारते थे*, जरूर कोई शरीर में आया होगा। उनको अपना शरीर तो है नहीं। बाप कहते हैं मैं इनमें प्रवेश कर तुम बच्चों को सृष्टि चक्र की, रचयिता और रचना की नॉलेज देता हूँ।

7. सुखधाम की स्थापना अर्थ बाबा हमको *नम्बरवन डायरेक्शन* कौन-सा देते हैं?
*हमारा धनी है* (और हमारा ब्राह्मण धर्म बहुत ऊंच है) , इसलिए कौन-सी 2 बाते नहीं करनी है?
° नम्बरवन डायरेक्शन है *पावन बनो*।
° तुम्हें न विकार में जाना है, न लड़ना-झगड़ना है।

8. मुरली के अन्त में बाबा ने कौन-सी *मीठी-मीठी बातें* सुनने-सुनाने को कहा?
° हम क्राउन प्रिन्स बने। फिर 84 का चक्र लगाया अब फिर बनते हैं। यह है नर्क, इनमें कुछ भी नहीं रहा है। फिर बाप आकर भण्डारा भरपूर कर काल कंटक दूर कर देते हैं। अमरपुरी में काल आ न सके। वह है अमरलोक, यह है मृत्युलोक। ऐसी मीठी-मीठी बातें सुननी-सुनानी है।

9. तुम बच्चे इस समय सभी को _____ दान देते हो। बाप तुम्हें _____ का दान देते हैं, तुम दूसरों को देते हो। तुम अपने ही _______ से श्रीमत पर भारत को _____ बना रहे हो।
°ज्ञान,रत्नों,तन-मन-धन,स्वर्ग

10. बाप को ______ देनी है। बाप फिर रिटर्न में _____ जन्म के लिए देते हैं। नये-नये चित्र निकलते हैं, प्रदर्शनी भी करते हैं। अच्छा, फिर क्या किया जाए? अच्छा _______ बनाओ।
°मदद, 21,रूहानी म्युज़ियम

11. बाबा ने आज वरदान में कहा सूक्ष्म आलस्य का भी नाम निशान न रहे इसके लिए सदा अलर्ट, एवररेडी और आलराउन्डर बनो।तो *आलस्य* वास्तव में क्यों होता है? इससे क्या *नुकसान* है?
° जो *पुरूषार्थ में दिलशिकस्त* होते हैं उन्हें ही आलस्य आता है, वह सोचते हैं क्या करें इतना ही हो सकता है, ज्यादा नहीं हो सकता। हिम्मत नहीं है, चल तो रहे हैं, कर तो रहे हैं –
° *पुरूषार्थ की थकावट* आलस्य की निशानी है। आलस्य वाले जल्दी थकते हैं, उमंग वाले अथक होते हैं।

12. भक्ति का राज्य में मनुष्य कौन-सी *छोटी सी बात* भी नहीं जानते?
*विराट रूप* के चित्र में कौन-सी समझानी है?
*ब्रह्मा* किसका बच्चा, किसने क्रियेट किया, मनुष्य सृष्टि की रचना कैसे होती?
*लाखों बर्ष* होते तो क्या हो जता?
° (छोटी सी बात) पतित दुनिया में एक भी पावन नहीं हो सकता और *पावन दुनिया में फिर एक भी पतित नहीं* हो सकता।
° (विराट रूप में है *सृष्टि चक्र* का ज्ञान) ब्राह्मण चोटी के ऊपर है ऊंच ते ऊंच भगवान निराकार। फ़िर हम बनते हैं देवता, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र। फिर ब्राह्मण।
° *क्रियेटर* तो एक निराकार ही है। बाप कहते हैं – मैंने इसमें *प्रवेश* कर नाम बदली किया। तुम ब्राह्मणों के भी ( *एडाप्ट* किये)
° लाखों वर्ष की बात हो फिर *आधा-आधा* तो हो न सके। लाखों वर्ष हो तो फिर देवता धर्म के हैं उनकी *संख्या बहुत बड़ी* होनी चाहिए। *अनगिनत* होने चाहिए।

Answers from Sakar Murli 17-07-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 17-07-2020*

1. बाबा ने आज आते ही पूछा *आत्म-अभिमानी* होकर बैठे हो? तो *सारा 84 का चक्र* भी बुद्धि में आ जाना चाहिए (क्योंकि आत्मा में ही 84 जन्मों का पार्ट भरा हुआ है)। इस (84 के पार्ट) में कौन-कौन सी *ज्ञान की बातें* आ जाती है? (4)
° हम *आत्मा* हैं।
° *मूलवतन* की रहने वाली हैं।
° यहाँ हमारा पार्ट है। मूलवतन से पहले-पहले *देवी-देवता* धर्म (सूर्यवंशी फिर चन्द्रवंशी) में आते हैं। नई दुनिया स्वर्ग में अथाह सुख देखे!
° अब हमने 84 का चक्र पूरा किया है। अब हमको पवित्र बनना है। पवित्र बन *फिर नये सिर* चक्र लगायेंगे। (सतोप्रधान दुनिया में सतोप्रधान पार्ट बजायेंगे!)

2. जितना यात्रा पर नजदीक होगे उतनी _____ होगी। तुम जानते हो ______ सामने खड़ा है। ______ के झाड़ दिखाई पड़ रहे हैं। बस, अब पहुँचे कि पहुँचे। अच्छा
°खुशी, शान्तिधाम-सुखधाम, वैकुण्ठ

3. *समर्थ बोल* की कौन-सी 2 निशानीयां है?
° जिस बोल में *आत्मिक भाव* और *शुभ भावना* हो।

4. बच्चे सदा यह अटेन्शन रखें कि हमें अपना टाइम ______ करना है, वेस्ट नहीं। बहुतों को रास्ता बताने का पुरूषार्थ करो। _____ बनो। बाप को याद करो तो विकर्म ______ होंगे, ______ बनेंगे और ______ के मालिक बन जायेंगे। जो भी आते हैं उनको यह समझाओ और 84 का चक्र बताओ।
°सफल, महादानी, विनाश, निरोगी, स्वर्ग

5. हमें *खुशी* होनी चाहिए। क्यों? (3)
° जितना *यात्रा पर नजदीक* होगे, उतनी खुशी होगी।
° अन्दर खुशी होगी ना। सतयुग में दु:ख की कोई बात होती नहीं। ऐसी *कोई अप्राप्त वस्तु नहीं* जिसकी प्राप्ति के लिए पुरूषार्थ करें!
° तुम बच्चों को खुशी रहनी चाहिए कि अभी हम इस गन्दी दुनिया से छूटते हैं।

6. बाबा ने कहा अपना घरबार भी सम्भालना है, साथ में अपनी ऊंच तकदीर बनाने लिए बाप श्रीमत देते हैं – मीठे बच्चे, अपना सब कुछ धनी के नाम पर सफल कर लो। अर्थात्‌ *प्रैक्टिकल में क्या करना* है? (2) इससे कौन-सी जबरदस्त *प्राप्ति* हैं? *नहीं तो* क्या होंगा? कौन-सा *उदाहरण* हमारे सामने है?
° धनी (बाप) खुद कहते हैं – बच्चे, इसमें खर्च करो, यह *रूहानी हॉस्पिटल, युनिवर्सिटी खोलो* (वा उसकी पालना करो) तो बहुतों का कल्याण हो जायेगा।
° धनी के नाम तुम खर्चते हो जिसका फिर *21 जन्म के लिए तुमको रिटर्न* में मिलता है। (वर्से में राज्य-भाग्य!)
° *किनकी दबी रहेगी धूल में*, किनकी राजा खाए……। यह दुनिया ही खत्म होनी है इसलिए धनी के नाम जितना हो सके सफल करो। धनी शिवबाबा है ना।
° *ब्रह्मा बाबा* (तुम सब बादशाही लेने लिए बैठे हो तो फालो करो ना। जानते हो इसने कैसे सब छोड़ दिया। नशा चढ़ गया, ओहो! राजाई मिलती है, अल्फ को अल्लाह मिला….)

7. पढ़ाई में चित्रों की दरकार नहीं। बुद्धि में सबकुछ होना चाहिए। फिर भी समझाने लिए चित्र बहुत उपयोगी है। तो *बाबा ने आज कौन-कौन से चित्र याद किये* और किस समझानी लिए? (6)
° विराट रूप (वर्णों का ज्ञान)
° सीढ़ी (कैसे हम सीढ़ी उतरते हैं। फिर बाप चढ़ती कला में ले जाते हैं। )
° गोला (यह 5 हज़ार वर्ष का चक्र है। अगर लाखों वर्ष होते तो संख्या कितनी बढ़ जाती।)
° विष्णु चतुर्भुज (वा लक्ष्मी-नारायण, त्रिमूर्ति) का चित्र
° रावण का चित्र (5 + 5 विकार)
° गीता का भगवान कृष्ण के बदले, हम कहते हैं शिव है। (इसका भी चित्र है)

8. सूक्ष्मवतन में जाते हो, परन्तु इसमें न योग है, न ज्ञान है। यह सिर्फ एक _____ है। सूक्ष्मवतन की जो _______है, यह भी टाइम पास करने के लिए है। जब तक ______ अवस्था हो टाइम पास करने के लिए यह _____ हैं।
°रस्म, रमत-गमत, कर्मातीत, खेलपाल

9. ब्रह्मा बाप समान अथक बनने के लिए *अलबेलेपन को समाप्त* करना है। इसके लिए कौन-सी तीन शक्तिशाली युक्तियां बाबा ने सुनाई? और क्या *नहीं करना* है? इससे *प्राप्ति* क्या है?
° कोई *कड़ा नियम* बनाओ।
° *दृढ़ संकल्प* करो
° *अटेन्शन रूपी चौकीदार सदा अलर्ट* रहें तो अलबेलापन समाप्त हो जायेगा।
° *आराम के संकल्पों के डंलप को छोड़ो* । करना ही है, यह स्लोगन मस्तक में याद रहे तो परिवर्तन हो जायेगा।
° पहले स्व के ऊपर मेहनत करो फिर सेवा में, तब *धरनी परिवर्तन* होगी।