Answers from Sakar Murli 17-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 17-10-2020*

1. समय की समीपता का फाउन्डेशन है – बेहद की ____ वृत्ति।
° _वैराग्य_

2. यह दिव्य जन्म _______ जन्म नहीं, यह कर्मयोगी जन्म है। इस अलौकिक दिव्य जन्म में ब्राह्मण आत्मा स्वतंत्र है न कि ______ । यह देह लोन में मिली हुई है, सारे विश्व की सेवा के लिए पुराने शरीरों में बाप शक्ति भरकर चला रहे हैं, जिम्मेवारी बाप की है, न कि _____ की। बाप ने डायरेक्शन दिया है कि कर्म करो, आप स्वतंत्र हो, _____ वाला चला रहा है। इसी विशेष _____ से कर्मबन्धनों को समाप्त कर कर्मयोगी बनो।
° _कर्मबन्धनी_, _परतंत्र_, _आप_, _चलाने_, _धारणा_

3. वहाँ सब चीजें, 5 तत्व भी ______ बन जाते हैं। हर चीज़ फल आदि दी _____ होते हैं। सतयुग को कहा ही जाता है _____। वहाँ बहुत साहूकार ____ -वान थे। इन जैसा _____ विश्व का मालिक कोई हो न सके। अभी तुम जानते हो हम ही यह थे, तो कितनी ____ होनी चाहिए।
° _सतोप्रधान_, _बेस्ट_, _स्वर्ग_, _धन_, _सुखी_, _खुशी_

4. सुखधाम में कभी काल आता नहीं है, अमरपुरी बन जाती है। तुम मृत्यु पर जीत पाते हो।(सर्वशक्तिमान, सर्प 🐍का मिसाल, एक चोला बदलकर दूसरा)। *इससे सम्बंधित कौन-सी कहानी* बाबा ने याद की?
° कोई ने पूछा *पहले तुमको सुख चाहिए या दु:ख?* तो बोला सुख चाहिए। सुख में जायेंगे फिर तो वहाँ कोई जमदूत 😈(दुःख) आदि आ नहीं सकेंगे। यह भी एक कहानी है।

5. बाबा कहते हैं तुम समझो हमको _____ पढ़ाते हैं। हम पतित-पावन गॉड फादरली _____ हैं, इसमें सब आ गया। पतित-पावन भी हो गया, गुरू टीचर भी हो गया। _____ भी हो गया। सो भी निराकार है। यह है _____ गॉड फादरली वर्ल्ड युनिवर्सिटी। कितना अच्छा नाम है। ईश्वर की कितनी महिमा करते हैं, और चीज़ क्या है! ____ । उनमें पार्ट कितना भरा हुआ है।
° _भगवान_, _स्टूडेन्ट_, _फादर_, _इनकारपोरियल_, _बिन्दी_

6. बाप कहते हैं पुरूषार्थ ऐसा करो जो नम्बर- ____ में जाओ। टीचर का काम है सावधान करना। पास विद् _____ होना है। यह बेहद की पाठशाला है। यह है ही _____ स्थापन करने के लिए राजयोग। अब बाप कहते हैं देह होते हुए, गृहस्थ व्यवहार में रहते हुए ______ याद करो। अब फिर तेज रफ्तार चाहिए – ______ की। तेज याद करने वाले का ही ऊंच नाम होगा। _____ माला का दाना बनेंगे।
° _वन_, _ऑनर_, _राजाई_, _मामेकम्_, _याद_, _विजय_

7. _____ होता ही है सत द्वारा, सत बनने के लिए। सत्य एक ही बाप है। बाप बैठ नर से नारायण बनने की _____ सुनाते हैं, जिससे तुम नारायण बन जाते हो। फिर ____ मार्ग में (यादगार) सत्य नारायण की कथा बड़े प्यार से सुनते हैं।
° _सतसंग_, _कथा_, _भक्ति_

8. आत्मा भी है, देह भी है। ऐसे नहीं कि बिगर देह बैठे हो। परन्तु बाप कहते हैं देह-अभिमान छोड़ *देही-अभिमानी बनकर बैठो*। अपने को आत्मा समझो। क्यों?
° देही-अभिमान है *शुद्ध* , देह-अभिमान है अशुद्ध। तुम जानते हो *देही-अभिमानी बनने से हम शुद्ध पवित्र बन रहे* हैं। (देह-अभिमानी बनने से अशुद्ध, अपवित्र बन गये थे। पुकारते भी हैं हे पतित-पावन आओ। पावन दुनिया थी। अभी पतित है फिर से पावन दुनिया जरूर होगी। सृष्टि का चक्र फिरेगा। सुप्रीम रूह ने हमे आप समान स्वदर्शन चक्रधारी बनाया है। सतयुग में यह ज्ञान देने की दरकार नहीं रहेगी। ज्ञान से वर्सा मिल गया। बाप श्रीमत देते हैं ऐसे तुम श्रेष्ठ परिस्तानी बनेंगे।)

9. *धारणा* की कौन-सी पॉइंट्स आज बाबा ने सुनाई? _(डबल अहिंसक, दुःख ने देना)_ (2)
° तुम अभी डबल अहिंसक बनते हो। *अहिंसा परमो देवी-देवता धर्म* डबल अहिंसक गाया हुआ है।
° किसको हाथ लगाना, दु:ख देना वह भी हिंसा हो गई। बाप रोज़-रोज़ समझाते हैं – *मन्सा-वाचा-कर्मणा किसको दु:ख नहीं देना* है। मन्सा में आयेगा जरूर। (सतयुग में मन्सा में भी नहीं आता। यहाँ तो मन्सा-वाचा-कर्मणा आता है। यह अक्षर तुम वहाँ सुनेंगे भी नहीं।)

10. बाप का कौन-सा *नाम भल साधारण* है लेकिन कर्तव्य बहुत महान है? (2)
° बाबा को कहते हैं *बागवान-खिवैया*। यह नाम कितना साधारण है लेकिन डूबने वाले को पार ले जाना, यह कितना *महान कर्तव्य* है। (जैसे तैरने वाले *तैराक* 🏊‍♂️ एक-दो को हाथ में हाथ दे पार ले जाते हैं, ऐसे बाप का हाथ मिलने से तुम स्वर्गवासी बन जाते हो। अभी तुम भी मास्टर खिवैया हो। तुम हरेक की नईया को पार लगाने का रास्ता बताते हो।)

11. माला के दाने तो बहुत हैं। ऊपर में बाबा है फूल, फिर है युगल मेरू। फूल को सब नमस्ते करते हैं। एक-एक दाने को नमस्ते करते। परन्तु *रूद्र यज्ञ रचते हैं तो उनमें भी जास्ती पूजा शिव की करते* हैं। सालिग्रामों की इतनी नहीं करते। क्यों?
° *शिवबाबा द्वारा ही सालिग्राम ऐसे तीखे* बने हैं, जैसे अब तुम पावन बन रहे हो।

12. कोई भी बुजुर्ग को बापू जी कह देते हैं। यह (शिवबाबा) तो सबका _____ है। सबका फादर वह एक है। ______ को फादर थोड़ेही कह सकते। गाते भी हैं _____ -हुड। ईश्वर को सर्वव्यापी कहने से ______ -हुड हो जाता है।
° _बाप_, _बच्चे (कृष्ण)_, _ब्रदर_, _फादर_

13. उन्हों (लक्ष्मी-नारायण) को *भगवान-भगवती* भी कहते हैं, यह ठीक है। _(सही / गलत)_
° नहीं, बाप कहते भगवान-भगवती नहीं कह सकते। *भगवान तो एक ही मैं हूँ!*

14. वह भी परम आत्मा है। उस आत्मा का नाम शिव है, वह है निराकार। न सूक्ष्म, न स्थूल शरीर है। *उनका कोई भी आकार वा रूप नहीं* है। _(सही / गलत)_
° गलत (जिसका नाम है, आकार भी जरूर है। नाम-रूप बिगर कोई चीज़ है नहीं। परमात्मा बाप को नाम-रूप से न्यारा कहना कितना बड़ा अज्ञान है। बाप भी नाम-रूप से न्यारा, बच्चे भी नाम-रूप से न्यारे फिर तो कोई सृष्टि ही न हो।)

15. मीठे बच्चे – तुम्हें एक-एक को ____ -स्तानी बनाना है, तुम हो सबका _____ करने वाले, तुम्हारा कर्तव्य है गरीबों को _____ बनाना। जब तक तुम्हारे हाथ में _____ न मिले तब तक स्वर्गवासी बन न सकें।
° _परि_, _कल्याण_, _साहूकार_, _हाथ_

16. तुम बच्चों को बड़ी-बड़ी सभाओं में समझाना पड़ेगा। हमेशा *कहाँ भी भाषण पर जाओ तो* जिस टॉपिक पर भाषण करना है, उस पर क्या पूर्व तैयारी करनी है? (2)
° *विचार सागर मंथन कर लिखना* चाहिए। तुमको तो टॉपिक पर समझाना है। पहले लिखकर *फिर पढ़ना* चाहिए। (नहीं तो भाषण करने के बाद फिर स्मृति में आता है – यह-यह प्वाइंट्स नहीं बताई। यह समझाते थे तो अच्छा था।)

17. भाषण में *पहले-पहले* क्या बोलना चाहिए? (2)
° *भाई-बहनों आत्म-अभिमानी होकर बैठो*। (तुम आत्मा अविनाशी हो। अभी बाप आकर ज्ञान दे रहे। बाप कहते हैं मुझे याद करने से विकर्म विनाश होंगे। कोई भी देहधारी को मत याद करो। अपने को आत्मा समझो, हम वहाँ के रहने वाले हैं। हमारा बाबा कल्याणकारी शिव है, हम आत्मायें उनके बच्चे हैं। बाप कहते हैं आत्म-अभिमानी बनो। मैं आत्मा हूँ।)
° *शिवबाबा कहते हैं* अपने को आत्मा समझ शिवबाबा को याद करो। जितना मुझे याद करेंगे उतना सतोप्रधान बन ऊंच पद पायेंगे। एम ऑब्जेक्ट भी सामने है। पुरूषार्थ से ऊंच पद पाना है। (वह भी जानते हैं हमसे पहले पैराडाइज था। भारत सबसे प्राचीन है। परन्तु कब था, वह कोई नहीं जानते।)

18. तुम्हारे यादगार सामने खड़े हैं। नीचे राजयोग की तपस्या, ऊपर में राजाई खड़ी है। *नाम भी देलवाड़ा बहुत अच्छा* है। क्यों?
° *बाप सबकी दिल लेते हैं*। सबकी सद्गति करते हैं। (दिल लेने वाला कौन है। यह थोड़ेही किसको पता है। ब्रह्मा का भी बाप शिवबाबा। सबकी दिल लेने वाला बेहद का बाप ही होगा। तत्वों आदि सबका कल्याण करते हैं।)
° तुम्हारा यादगार देलवाड़ा मन्दिर देखो कैसा अच्छा है। जरूर *संगमयुग पर दिल ली होगी*। (आदि देव और देवी, बच्चे बैठे हैं। यह है रीयल यादगार। उनकी हिस्ट्री-जॉग्राफी कोई नहीं जानते सिवाए तुम्हारे। लक्ष्मी-नारायण के मन्दिर में जायेंगे तो भी तुम कहेंगे यह हम बन रहे हैं।)

19. बाबा ने समझाया है – सारी सृष्टि पर इस समय _____ का राज्य है। ____ भी मनाते हैं, कितना खुश होते हैं। बाप कहते हैं सब बच्चों को दु:ख से छुड़ाने मुझे भी पुरानी _____ की दुनिया में आना पड़ता है।
° _रावण_, _दशहरा_, _रावण_

20. और धर्म वालों के शास्त्र आदि कायम हैं। तुम्हारे ज्ञान का कुछ नहीं रहता। क्यों?
° *तुमको ज्ञान मिलता ही है संगम पर, फिर विनाश हो जाता* है तो कोई शास्त्र नहीं रहता। (शास्त्र हैं भक्ति मार्ग की निशानी। यह है ज्ञान।)

21. गंगा *पतित-पावनी* है। _(सही / गलत)_
° नहीं, बाप कहते हैं *इस समय 5 तत्व सब तमोप्रधान* पतित हैं। (सारा किचड़ा आदि वहाँ जाए पड़ता है। मछलियां आदि भी उसमें रहती हैं। पानी की भी एक जैसे दुनिया है। पानी में जीव कितने रहते हैं। तो गांव हो गया ना। गांव को फिर पतित-पावन कैसे कहेंगे। बाप समझाते हैं – मीठे-मीठे बच्चे, पतित-पावन एक बाप है। तुम्हारी आत्मा और शरीर पतित हो गया है, अब मुझे याद करो तो पावन बन जायेंगे। तुम विश्व के मालिक, खूबसूरत बन जाते हो।)

22. भक्ति अथाह है, देवियों आदि की पूजा में कितना खर्चा करते हैं। बाप कहते हैं इनसे *सिर्फ अल्पकाल का सुख* है। क्यों?
° जैसी-जैसी भावना रखते हैं वह पूरी होती है। देवियों को सजाते-सजाते कोई को साक्षात्कार हुआ बस बहुत खुश हो जाते। फायदा कुछ भी नही, *मुक्त-जीवनमुक्ति वा श्रेष्ठ जीवन बनाने की बात नहीं*।)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *