*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 13-11-2020*
1. ___ बल, ____ भरोसा-इस पाठ को सदा पक्का रखो तो बीच भंवर से सहज निकल जायेंगे।
° _एक_, _एक_
2. जैसे *दीपावली* पर एक दीप से अनेक दीप जगाते, *दीपमाला* मनाते हैं। दीपक में अग्नि होती है, ऐसे……….. क्या? _(वरदान)_
° आप दीपकों में *लगन की अग्नि* है। (अगर एक एक दीपक की एक दीपक के साथ लगन लग गई तो यही *सच्ची दीपमाला* है। तो देखना है कि हम दीपक लगन लगाकर अग्नि रूप बनने वाले, अपनी *रोशनी से अज्ञानता का अंधकार मिटाने वाले* ही सच्चे सेवाधारी हैं।)
3. 5 हजार वर्ष की बात है – जब इनका राज्य था। आधाकल्प के बाद पुरानी दुनिया कहा जाता है इसलिए धन्धे वाले ____ रखते हैं चौपड़े में। उनका भी अर्थ है ना। _____ को फिर विघ्न विनाशक देवता समझते हैं। स्वास्तिका में पूरे 4 भाग होते हैं। अभी दीपावली मनाते हैं, वास्तव में सच्ची-सच्ची दीवाली ____ की यात्रा ही है जिससे आत्मा की _____ 21 जन्मों के लिए जग जाती है। बहुत कमाई होती है। तुम बच्चों को बहुत खुशी होनी चाहिए। अभी तुम्हारा नया ____ शुरू होता है – नई दुनिया के लिये। ____ जन्मों के लिए खाता अभी जमा करना है।
° _स्वास्तिका_, _गणेश_, _याद_, _ज्योति_, _खाता_, _21_
4. ____ ही सुनती है, पढ़ती है, आत्मा में ही ____ हैं। हम आत्मा भिन्न-भिन्न ____ धारण करती हैं। अभी तुम जानते हो हम आत्मायें कहाँ से आई हैं ____ बजाने। तुमने ही 84 ____ जन्म लिए हैं। वह भी अविनाशी हैं। तुम जानते हो कल्प-कल्प 84 का चक्र हम फिरते रहते हैं। अब बाप बच्चों को समझाते हैं, अपने को ____ समझ सुन रहे हो, तो खुशी भी रहेगी। बाप हमको पढ़ाते हैं। भगवानुवाच भी है ना।
° _आत्मा_, _संस्कार_, _शरीर_, _पार्ट_, _वैरायटी_, _आत्मा_
5. ऐसे-ऐसे विचार सागर मंथन करना चाहिए। गायन है मन के जीते जीत, मन से हारे हार……. वास्तव में कहना चाहिए – ____ पर जीत। मनुष्य कहते हैं मन की शान्ति कैसे हो? बाप कहते हैं ____ कैसे कहेगी कि मन की शान्ति चाहिए। आत्मा तो है ही ____ -धाम में रहने वाली। आत्मा जब शरीर में आती है तब कार्य करने लग पड़ती है। बाप कहते हैं तुम अब ____ में टिको, अपने को आत्मा समझो। आत्मा का स्वधर्म है ____ । बाकी शान्ति कहाँ से ढूंढेगी। इस पर रानी का भी दृष्टान्त है ____ का।
° _माया_, _आत्मा_, _शान्ति_, _स्वधर्म_, _शान्त_,
_हार_
6. मीठे बच्चे – यह भूल-भुलैया का खेल है, तुम घड़ी-घड़ी ____ को भूल जाते हो, निश्चयबुद्धि बनो तो इस खेल में फसेंगे नहीं। अभी तुम बच्चों ने ____ को जान लिया है। सम्मुख बैठे हो। जो गाते थे तुम्हीं से ______ …..। वह सब कुछ हो रहा है। तुम जानते हो _____ पढ़ाते हैं। भगवान कौन है? ____ शिव को ही कहेंगे। यह है बेहद का ____, तुम हो बेहद के स्टूडेन्ट।
° _बाप_, _बाप_, _बैठूँ_, _भगवान_, _निराकार_, _टीचर_
7. ____ मेरे पास है। बाकी न मनुष्यों में ___ है, न देवताओं में। जो मैं तुम बच्चों को देता हूँ। यह है रूहानी ____ ।
° _ज्ञान_, _ज्ञान_, _ज्ञान_
8. बाप तुम बच्चों को कितना प्यार से _____ पर बिठाकर ले जाते हैं। ___ का हार बनाए सबको ले जाता हूँ। _____ चिता पर बिठाए, हिसाब-किताब चुक्तू कराए वापिस ले जाते हैं। अब तुम्हारा काम है पढ़ने से, और ____ में क्यों जाना चाहिए। यह तो ____ का समय है, सब हिसाब-किताब चुक्तू कर वापिस चले जायेंगे। यह बेहद के ___ का राज़ तुम बच्चों की बुद्धि में है, और कोई नहीं जानते।
° _नयनों_, _गले_, _ज्ञान_, _बातों_, _कयामत_, _ड्रामा_
9. सब विश्व में शान्ति चाहते हैं, कहते एक धर्म हो जाए तो शान्ति हो। । अब यह तो समझना चाहिए – जरूर विश्व का _____ ही विश्व में शान्ति स्थापन करते हैं। ____ द्वारा शान्ति और सुख की स्थापना होती है। अब तुम बच्चे जानते हो – बाप शान्ति, सुख, ____ की स्थापना कर रहे हैं। विश्व में शान्ति कब थी, बाप कहते हैं तुम्हारे घर में तो चित्र रखे हैं ना। इनका ____ था – तो सारे विश्व में शान्ति थी, उनको स्वर्ग कहा जाता है। नई दुनिया को ही हेविन गोल्डन एज कहा जाता है। अभी ये पुरानी दुनिया बदलनी है। वह _____ स्थापन हो रही है।यही भारत के मालिक थे – इनके राज्य में जरूर सुख-शान्ति थी। _____ वर्ष की बात है – जब इनका राज्य था।
° _मालिक_, _ब्रह्मा_, _सम्पत्ति_, _राज्य_, _राजधानी_, _5 हजार_
10. *पहले जरूर सतोप्रधान दुनिया होती है*, फिर पुरानी तमोप्रधान दुनिया होती है। यह समझाने लिए बाबा ने कौन-से 2 मिसाल दिये?
° *झाड़ 🌳 भी पहले नया सतोप्रधान होता* है। (नये पत्ते बहुत अच्छे-अच्छे होते हैं। यह तो बेहद का झाड़ है। ढेर धर्म हैं। तुम्हारी बुद्धि अब बेहद तरफ जायेगी। कितना बड़ा झाड़ है। पहले-पहले आदि सनातन देवी-देवता धर्म ही होगा। फिर वैरायटी धर्म आयेंगे।)
° *शुरू में ही नया घर* 🏡 होगा फिर पुराना होता जायेगा। (घर में बच्चों की वृद्धि होती जायेगी। पुत्र, पोत्रे, पर-पोत्रे वह तो पुराने घर में आयेंगे ना। कहेंगे हमारे दादा, परदादा का यह मकान है। पीछे आने वाले भी बहुत होते हैं ना। जितना जोर से पुरूषार्थ करेंगे तो पहले नये घर में आयेंगे।)
11. अनेक बार एक ____ स्थापन हुआ है। फिर अनेक धर्मों की वृद्धि होते-होते ____ बड़ा हो जाता है फिर ____ को आना पड़ता है।
° _राज्य_, _झाड़_, _बाप_
12. वह है रामराज्य। हमेशा ____ राज्य हो तो फिर मनुष्य थक जाएं। कभी सुख देख न सकें। अभी तुम ___ -स्तिक बने हो और ____ -दर्शी भी बने हो। आधा समय है ज्ञान – सतयुग-त्रेता। अभी तुम बच्चे ____ -फुल बनते जाते हो। हमने सबसे जास्ती _भक्ति_ की है इसलिए हम ही पहले-पहले बाप के पास आये हैं। फिर हम ही राजधानी में आयेंगे। तो बच्चों को पूरा ____ करना चाहिए – नई दुनिया में ऊंच पद पाने। बच्चों की दिल होती है अब हम जल्दी नये घर में जायें।
° _रावण_, _आ_, _त्रिकाल_,
_नॉलेज_, _पुरुषार्थ_
13. पत्थरबुद्धि राजायें और ____ -बुद्धि राजायें यहाँ ही हैं। ____ -नाथ का मन्दिर भी है। यह सारी दुनिया कांटों का जंगल हैं। फूलों के ____ को आग लगी, ऐसा कभी सुना नहीं होगा। हमेशा जंगल को आग लगती है। इस सारी दुनिया को ही ___ कहा जाता है।
° _पारस_, _पारस_, _बगीचे_, _भंभोर_
14. तुम जानते हो इस समय हैं ___ बाप। कहते भी हैं वह परम- _____ परमात्मा है। बाबा ने भी देह में आकर प्रवेश किया है। बाप कहते हैं मैं साधारण तन में आता हूँ, इनको भी बैठ समझाता हूँ कि तुम अपने जन्मों को नहीं जानते हो। और कोई ऐसे कह न सके कि बच्चों, देही-अभिमानी बनो, बाप को याद करो। प्रजा- ____ भी बाबा ठहरा ना। नई सृष्टि जरूर प्रजापिता द्वारा ही रची जाती है। हम आत्मायें भाई-भाई हैं फिर शरीर धारण कर भाई-बहन हो जाते। याद _____ को करते और पारलौकिक को करते हैं। प्रजापिता ब्रह्मा को कोई याद नहीं करते। सुख में तो किसी को भी याद नहीं करते हैं। वहाँ सुख ही सुख है। अब बेहद का बाप आये हैं ब्रह्मा के तन में – हम बच्चों को बेहद का ____ देने। उनका बनने से हम बेहद का ____ पाते हैं।
° _3_, _पिता_, _पिता_, _लौकिक_, _सुख_, _वर्सा_
