*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 19-05-2021*
1. हर एक पुरूषार्थ करते ___ की तकदीर बनाने, शान्ति चाहिए, सुख दो। भगवान ही सुख-कर्ता है, तुम कहते शिवबाबा, वह है ___, हम भी। यहाँ कहते परमपिता, पारलौकिक बाप। अंग्रेजी में गॉड फादर, ___ सोल।
° _सुख और शान्ति_, _निराकार_, _सुप्रीम_
2. तुम बाप पास आये हो वर्सा लेने, सुख-कर्ता बाप ही सुख का ___ बताते, वही कल्याणकारी है। यह एक ही संगम है, बाप आते सबकी ___ जगाने वा सुख देने, हम बाप पास आये हैं जिन्होंने इनमें प्रवेश किया हैं। इनका नाम ब्रह्मा, तुम बी.के., तुमको ___ है हम ब्रह्मा की सन्तान बने हैं बाप से सुख का वर्सा लेने।
° _रास्ता_, _ज्योत_ , _निश्चय_
3. तुमको सुख था जब लक्ष्मी-नारायण का राज्य था, फिर ___ आयेगा, वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी रिपीट। फिर स्वर्गवासी बनना है, तुम देवी-देवताओं का बहुत छोटा ___ था, हम सारे विश्व के मालिक थे। नई दुनिया पावन थी, भारत बहुत साहूकार, पवित्र प्रवृत्ति मार्ग था, ___, सर्वगुण सम्पन्न, 16 कला सम्पूर्ण थे।
° _सतयुग_ , _झाड़_, _सम्पूर्ण निर्विकारी_
4. भगवान को यहाँ आना है, आत्मा तमोप्रधान बनी है, इसलिए ___ नहीं सकती अर्थात् बाप पास घर वापिस जा नहीं सकती। इसलिए पुकारते हे पतित-पावन, अब तुमको ___ आत्मा बनना है, तुम सतोप्रधान थे। पावन बनने की ___ बाप ही आकर बताते इन द्वारा।
° _उड़_, _पुण्य_ , _युक्ति_
5. स्वर्ग में तुम 16 कला सम्पूर्ण थे, मैं ___ इस सृष्टि का आदि-मध्य-अन्त जानता। आपेही तरस परोई… तरस किया तब ___ बने, इनको कहते ऊंच ते ऊंच तकदीर, ईश्वर द्वारा। बाप ___ से बैठ बात करते, आत्मा कहती यह मेरा शरीर, मैं एक शरीर छोड़ दूसरा लेती।
° _ज्ञान सागर_, _देवता_ , _आत्माओं_
6. तुम बच्चे जो बाप से वर्सा लेते, वह सतयुग में ___ करेंगे, अभी बाप द्वारा लायक बन रहे। बाप कहते मैं तो परमधाम रहता, आत्मा का निवास स्थान शान्तिधाम फिर तुम सुखधाम आते, भगवान ब्रह्मा तन आकर ___ सिखाते। लिब्रेटर सबका एक, मैं तुम्हारा सच्चा ___ हूँ, तुमको पावन बनाता।
° _राज्य_, _राजयोग_, _गुरू_
7. याद करो तो विकर्म विनाश हो तुम मेरे ___ आयेंगे, अन्तिम जन्म है, अभी वर्सा नहीं लिया फिर कभी नहीं। देही-अभिमानी बनना, हाथों से काम करते याद में रहना, तुम ___ हो माशूक के। तुम आये हो 21 जन्म सदा सुख का वर्सा पाने, और कोई स्वर्ग का मालिक बना न सके, ___ भी मनाते परन्तु भूल गये।
° _पास, आशिक, शिव जयन्ती_
8. प्रीत बुद्धि अर्थात् बुद्धि की लगन एक ___ साथ लगी हुई, अन्य किसी व्यक्ति-वैभव साथ नहीं। वे सदा बापदादा को ___ अनुभव करेंगे, मन्सा में भी श्रीमत विपरीत संकल्प नहीं। उनके मुख-दिल से यही बोल निकलते – तुम्हीं से ___, ऐसे ही विजयी रत्न बनते।
° _प्रीतम, सम्मुख, खाऊं वा बैठूँ वा सर्व संबंध निभाऊं_
9. चाहिए-चाहिए का ___ आना भी रॉयल रूप का मांगना है।
° _संकल्प_
