Answers from Sakar Murli 24-04-2021

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 24-05-2021*

1. द्वापर से प्रालब्ध पूरी हो, उतरती कला होती, बाप नर्कवासी को कल्प-कल्प ___ बनाते, रामराज्य, दिन, जीत। मैं आकर वर्सा देता, तुम्हारी शक्ल मनुष्य की और सीरत ___ की थी, पारलौकिक बाप सम्मुख समझा रहे। सतयुग में खुशी में प्रालब्ध भोगते, फिर उतरना, कोई अच्छे अनुभवी हैं जिनकी ___ अच्छी होती।
° _स्वर्गवासी_, _देवताओं_, _धारणा_

2. मैं तुम्हारा बेहद बाप, सृष्टि रचयिता हूँ, मुझे ___ करने से तुमको बेहद वर्सा मिलेगा, खाद निकलेगी। पवित्र होने बिगर जा नहीं सकते, नई दुनिया में हैं ही ___, विश्व के मालिक थे। फिर उनको साहूकार बनना है, भारत स्वर्ग था, ___ का राज्य था, पतित-पावन बाप तुमको रीयल बात समझाते।
° _याद_, _सतोप्रधान_, _लक्ष्मी-नारायण_

3. सद्गति भगवान ही देते, हम बाबा के ___ से देवता बनते, अब दुनिया से वैराग्य है। कोई यथार्थ भगवान को नहीं जानते, परमात्मा भी ___ है, स्वयं ब्रह्मा तन से समझाते मैं तुम आत्माओं का बाप हूँ। मुझे-वर्से को याद करो तो विकर्म विनाश होंगे, वाह! ऐसे ___ को भूलना थोड़ी चाहिए, स्वर्ग का मालिक बना रहे, जिसके लिए आधाकल्प भक्ति करते आये।
° _ज्ञान_, _बिन्दी_, _साजन वा बाप_

4. अब हम शरीर छोड़ राजाई में जायेंगे, यह ___ जन्म है, सतयुग में समझते एक शरीर छोड़ दूसरा लेना है, आत्म-अभिमानी। नॉलेज सिर्फ तुमको है, यह ज्ञान-ज्ञानेश्वर ज्ञान सागर बाप सुनाते, तुम पुरूषार्थ कर सम्पूर्ण ___ बनते।सम्पूर्ण निर्विकारी, गृहस्थ में रहते याद करो, ___ तो करना ही है, बुद्धियोग बाप साथ लगा रहे तो वर्सा मिल जायेगा।
° _अन्तिम_, _गुणवान_, _कर्म_

5. शिवबाबा कहते मनमनाभव, मामेकम् याद करो, अभी तुमको ___-अभिमानी बनाते जो आधाकल्प चलता, आयु सबकी बड़ी होती। बाप सम्मुख कितना अच्छा समझाते – हे ___, क्योंकि आत्मा ज्ञान लेती, धारणा आत्मा में। वह पुनर्जन्म नहीं लेते, बाबा ने काम दिया था परमात्मा की और ___ की महिमा लिखो, वह साकार वह निराकार, इतना गुणवान जरूर परमात्मा बनाते।
° _आत्म_, _आत्माओं_, _बच्चे_

6. इस समय तुम ___ सम्प्रदाय हो, बाप सिखला रहे। वैराग्य अर्थात् देह सहित सब सम्बन्ध छोड़ ___ आत्मा समझना, जैसे आये थे वैसे जाना। कहते मुझे याद करो, खुद अपना ___ देते, मैं जो-जैसा हूँ कोई विरला जान निश्चय कर पुरूषार्थ कर वर्सा पाते। याद से विकर्म विनाश होंगे, पवित्र बन पवित्र ___ के मालिक बनेंगे।
° _ईश्वरीय_, _अशरीरी_, _परिचय_, _दुनिया_

7. सदा ___ रहे पहले करना फिर कहना, मेहनत का फल अच्छा। यदि दूसरों को कहते स्वयं करते नहीं, तो सर्विस साथ ___ भी प्रत्यक्ष होती, जैसे अमृत बीच विष की एक बूंद पड़ने से सारा अमृत विष बनता। इसलिए पहले अपने ऊपर अटेन्शन दो तब कहेंगे सच्चे ___।
° _अटेन्शन_, _डिससर्विस_, _सेवाधारी_

8. अनेकता में एकता लाना, बिगड़ी को बनाना – यह सबसे बड़ी ___ है।
° _विशेषता_

9. हार-जीत का खेल है, इसमें उतरती कला होने का भी कारण है, जब ___ हो परमात्मा को भूलते तो गिरते विकारों में। हम श्रेष्ठ ___ से सुख उठाते। परमात्मा तो चढ़ती कला में हमारे ___ है, बाकी गिराने वाली माया है।
° _बॉडी कॉन्सेस_, _कर्म_, _साथ_

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