कलियुग के विभिन्न नाम | Names of Kaliyuga, Iron Age, Old World, Hell

कलियुग के विभिन्न नाम | Names of Kaliyuga, Iron Age, Old World, Hell

आज कलियुग के 23 नाम देखते हैं, जो बाबा ने मुरलीयों में बताए हैं… ताकि इस पुरानी दुनिया से हमारा लगाव (जो कि दुःख का कारण है) सहज कम हो… और हमारे संकल्प, स्थिति और vibrations से हम अपने और सबके लिए सतयुगी वातावरण बनाते जाए! 

समय से सम्बंधित नाम

  • कलियुग
  • Iron Age
  • पुरानी दुनिया
  • बेहद की रात
  • ब्रह्मा की रात 

धर्मों में दिए गए नाम

  • नर्क
  • दोझक
  • Hell 

कैसी है यह दुनिया?

विकारी दुनिया

  • वैश्यालय
  • विषय सागर
  • विषय वैतरणी नदी
  • पतित दुनिया 

आसुरी दुनिया

  • रावणराज्य
  • कंसपुरी
  • पाप आत्माओं की दुनिया
  • भ्रष्टाचारी दुनिया

दुःख की दुनिया 

  • दुःखधाम
  • शोक वाटिका
  • कांटों का जंगल
  • मृत्युलोक
  • कब्रिस्तान 

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा की मीठी यादों में झूलते रहे, और इतनी ऊँची शान्ति प्रेम और आनंद से भरपूर स्थिति में स्थित रहे, कि सहज हमारी बुद्धि पुरानी दुनिया से उपराम रहे… और हर कदम हमारी स्थिति और vibrations द्वारा सतयुग बनता जाए! … ओम् शान्ति!


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योग कमेंटरी | I’m a Brahmin Soul | मैं ब्राह्मण आत्मा हूँ

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योग कमेंटरी | I’m a Brahmin Soul | मैं ब्राह्मण आत्मा हूँ

मैं ब्राह्मण हूँ… ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण… सर्वोत्तम ब्राह्मण कुल भूषण

मैं भगवान की पालना में पलने वाली… सारे कल्प में सबसे पद्मपडम भाग्यशाली आत्मा हूँ… देवता बनने वाली हूँ

भगवान ने मुझे सम्पूर्ण सत्य ज्ञान दे दिया है… त्रिकालदर्शी, त्रिनेत्री, त्रिलोकिनाथ बना दिया है

मैं ब्रह्ममुहुर्त में उठ, ब्रह्मलोक की सैर करने वाली आत्मा हूँ… ब्रह्मा-ज्ञान (मुरली) सुनने और सुनाने वाली… ब्रह्मा भोजन खाने वाली आत्मा हूं 

में ब्रह्मा-चारी आत्मा हूँ… ब्रह्मा बाप के हर कदम पर कदम रखने वाली…

बाबा की मददगार आत्मा हूँ, विश्व कल्याणकारी हूँ… बाबा के ज्ञान यज्ञ को संभालने वाली सच्ची ब्राह्मण आत्मा हूँ… यज्ञ स्नेही, यज्ञ सहयोगी, यज्ञ रक्षक हूँ 

बाबा सदा मेरे साथ है… मैं बाबा की, बाबा मेरा… ओम् शान्ति! 

Winning the prize of Satyuga | स्वर्ग की प्राइज़ लेने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 18-12-2018

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Winning the prize of Satyuga | स्वर्ग की प्राइज़ लेने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 18-12-2018

परमात्मा का सत्य परिचय 

परमात्मा ऊंच ते ऊंच है… उनका नाम और धाम भी ऊंच ते ऊंच है… महिमा अपरमपार है… वह खुद आकर अपना सत्य परिचय देते हैं:

  • नाम है शिव 
  • रूप है निराकार ज्योति बिन्दु स्वरूप (स्टार मिसल) 
  • देश है परमधाम… वह जन्म-मरण रहित है
  • गुण है… ज्ञान, पवित्रता, शान्ति, प्रेम, सुख, आनंद, शक्तियों का सागर
  • कर्तव्य है… ब्रह्मा मुख द्वारा राजयोग का ज्ञान सुनाकर, पतितों को पावन (अर्थात मनुष्य से देवता) बनाकर, कलियुग को सतयुग बनाना… अर्थात नई सृष्टि की रचना करता, इसलिए उसे रचता वा मनुष्य सृष्टि का बीजरूप कहा जाता है 
  • कब आते हैं… जब सारी दुनिया पतित हो जाती है, धर्म की अति ग्लानि हो जाती है, कलियुग का अंत होता है 
  • आते हैं भारत में… भारत ही सबसे पुराना अविनाशी खण्ड है, जहां देवताएं निवास करते थे
  • उनसे हमारे सर्व सम्बन्ध हैं… अर्थात वह हमारा माता, पिता, शिक्षक, सतगुरू, सखा, साजन, सर्जन, बच्चा, आदि सब है 

सबसे बड़ी prize!

बाबा सबसे बड़ी prize, स्वर्ग की प्राइज़ देते हैं… उन बच्चों को जो:

  • पवित्र बनते हैं
  • अशरीरी बन, बाप को याद करते है 
  • स्वदर्शन चक्र घुमाते हैं… अपने स्वीट घर और स्वीट राजधानी को याद करते हैं 
  • सेवा करते हैं (अर्थात बाप के रचे हुए इस रुद्र ज्ञान यज्ञ की सच्ची दिल से संभाल करते हैं) 

हम रूहानी warriors (योद्धा) है… जो योगबल से माया पर विजय प्राप्त कर, फिर से अपना स्वराज्य प्राप्त करते हैं… जिससे सदा शान्ति, प्रेम और आनंद के झूले में झूलते रहते हैं… इसके लिए इस पुरानी दुनिया (कब्रिस्तान) से दिल भी हटानी है

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा के सत्य परिचय के आधार पर उसकी मीठी यादों में रहे… और हर कदम उसकी श्रीमत पर चल फिर से अपना सुख-शान्ति का स्वराज्य प्राप्त कर ले… ओम् शान्ति! 

Making our Time Successful | अपना समय सफल करें | Sakar Murli Churnings 17-12-2018

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Making our Time Successful | अपना समय सफल करें | Sakar Murli Churnings 17-12-2018

  • यह पढ़ाई है मनुष्य से देवता बनने की… यही पढ़ाई का समय है, फिर सब परिवर्तन हो जाएगा… इसलिए गफलत नहीं करनी है, टाईम वेस्ट नहीं करना है
  • ब्रह्मा बाप समान सब कुछ सफल करना है, भगवान का मददगार बनना है… और सच्ची सेवा तब कहेंगे जब यह ख्याल भी न आए की मैंने दिया… हम जो भी करते अपने लिए करते, हमारा भाग्य बनता… शिवबाबा तो दाता है, उनका यज्ञ चल रहा है और चलता रहेगा
  • इतने सब साधु-महात्मा होते भी सृष्टि की यह हालत क्यूँ?… क्योंकि बाप सिवाए कोई भी 100% आत्म-अभिमानी नहीं है… इसलिए बाप की श्रीमत पर सदा चलते रहना है:
    • पवित्रता बढ़ाने का पुरुषार्थ करना है
    • आत्म-अभिमानी लम्बा समय रहना है
    • याद, पढ़ाई और सेवा में अपना समय सफल करना है 

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… अपने हर सेकंड, श्वांस, संकल्प को ज्ञान चिंतन, याद और सेवा में सफल करे… जिससे स्वतः हमारी श्रेष्ठ स्थिति रहेगी, औरों का कल्याण होता रहेगा… अर्थात हमारा वर्तमान और भविष्य भाग्य दोनों श्रेष्ठ बनता जाएगा… ओम् शान्ति! 

Overcoming Weaknesses | कमझोरीयों से मुक्त होने की सहज विधि | Avyakt Murli Churnings 16-12-2018

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Overcoming Weaknesses | कमझोरीयों से मुक्त होने की सहज विधि | Avyakt Murli Churnings 16-12-2018 

चैतन्य चात्रक! 

बाबा कहते मेरे सभी बच्चे चात्रक है… 3 रीति से:

  • सुनना… इसमे सभी नम्बरवन है… मास्टर मुरलीधर बन सहज ही मास्टर सर्वशक्तिवान बन सकते हैं 
  • मिलना… बाबा के संग में रहना… और गुणों और शक्तियों के रंग में रंगना… इसमें नम्बर है 
  • बनना… अर्थात हर संकल्प, बोल और कर्म में फॉलो फादर करना, हममे बाप दिखाई दे… इसमें सब यथाशक्ति है 

शक्तिशाली संकल्प को फलदायक बनाने की सहज विधि

शक्तिशाली संकल्प होते भी वह फल क्यूँ नहीं देता?… जैसे स्थूल बीज को धरती, पानी, धूप और देख-रेख चाहिए… हमारे शक्तिशाली संकल्प रूपी बीज को भी चाहिए:

  • धारणा रूपी धरती 
  • ज्ञान रूपी जल 
  • याद रूपी धूप (वा गर्मी) 
  • Attention रूपी देख-रेख

तो श्रेष्ठ संकल्प का प्रत्यक्षफल (अर्थात खुशी और अतिन्द्रीय सुख) अवश्य प्राप्त होता है! 

हमारी विशेषताएं! 

बाबा ने कहा हमारी विशेषताओं की लंबी चौड़ी माला है

  • सेवा में उमंग उत्साह अच्छा है, स्नेह है, खुशी के झूले में झूलते हैं, एकता अच्छी है 
  • पहचानने की और मेहसूस करने की शक्ति है, catching power अच्छी है, दृढ़ता है 
  • दूर होते भी समीप है… वाह बाबा, वाह परिवार, वाह ड्रामा के गीत अच्छे गाते हैं… बाप और परिवार के समीप है… मधुबन की शान और शृंगार है 

विशेषताएं बहुत है, और कमझोरी एक है… और वह भी 99% परिवर्तन हो गई है, सिर्फ 1% बाकी है… वह भी हुई पड़ी है

छोटी बातों को मिटाओ, हटाओ, और उड़ो! 

बच्चे जल्दी घबरा जाते हैं… फिर सोच सोचके बात को बड़ा बना लेते हैं… बातें हैं कंकड़, चींटी वा चूहे जैसी छोटी, लेकिन:

  • चींटी माथे में घुस जाती है, tension आदि के रूप में… उसको पांव के नीचे कर देना है
  • चूहा हमारी सहनशक्ति, सरलता, स्नेह को काट लेता… इसलिए उसको सवारी बनाकर, गणेश बनना है! 

अन्य पॉइन्ट्‍स 

  • कल्प पहले भी मिले थे, इसलिए फिर से अपना अधिकार लेने आए हैं… हमारे परिवार में, स्वीट होम में पहुँच गए 
  • ज्ञान, गुण और शक्तियों के अविनाशी खझाने से भरपूर रहते हैं, इसलिए हम जैसा धनवान कोई नहींहमारी ईश्वरीय position भी सबसे ऊंच है, इसे कोई छीन नहीं सकता… सिर्फ कमझोरी के पास्ट के व्यर्थ चिंतन से बचना है 

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… हर कदम पर बाबा को फॉलो कर, अतिन्द्रीय सुख और खुशी के झूले में झूलते रहें… और बाबा ने बताई हुई अपनी विशेषताओं को स्मृति में रख, सभी कमझोरियों से मुक्त रहे… ओम् शान्ति!


Also read: How to overcome Weaknesses? | भूतों (अर्थात कमज़ोरियां) को भगाने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 03-12-2018

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Becoming an Angel | फरिश्ता स्वरूप की परिभाषा | Avyakt Murli Churnings 15-12-2018

Becoming an Angel | फरिश्ता स्वरूप की परिभाषा | Avyakt Murli Churnings 15-12-2018

आज बाबा हमारे 3 रूप देख रहे हैं… ब्राह्मण सो फरिश्ता सो देवता… यही हम संगमयुगी ब्राह्मणों का लक्ष्य और लक्षण हैं 

फरिश्ता-पन की परिभाषा और लक्षण

हमारा एम ऑब्जेक्ट है लक्ष्मी-नारायण बनना, लेकिन देवता बनने से पहले फरिश्ता बनना है… यही तीव्र पुरुषार्थ करना है, धुन लगानी है, संगमयुग के अन्तिम स्टेज को emerge करना है कि मैं डबल लाइट फरिश्ता हूँ!

फरिश्ता अर्थात स्वराज्य अधिकारी, कर्मेन्द्रियों का राजा, बाबा का राजा बच्चा… लाइट के स्वरूप-धारी

फरिश्ता अर्थात इन सभी बातों में लाइट (अथवा न्यारा):

  • संकल्प, स्वभाव, संस्कार 
  • देह, सम्बन्ध, सम्पर्क (अर्थात औरों के स्वभाव संस्कार), संसार

तो ब्रह्मा बाप, मम्मा और दादीयों समान सबके प्यारे, प्रिय बन जाएंगे… सब कहेंगे यह मेरे हैं!

हमे मस्तक पर आत्मा की लाइट अनुभव होगी, बोलते हुए अशरीरी हो जाएंगे, विस्तार सार में समा जाएगा, हमारी दृष्टि से रूहानियत की लाइट सबको मिलेंगी!

हम सहज कर्मातीत बन जाएंगे! 

अब क्या सेवा करनी है? 

सेवा में उमंग-उत्साह अच्छा है, प्लेन्स अच्छे बनाते हैं, सभी परिवार के प्यार की system से प्रभावित होते हैं, मानते हैं ब्रह्मकुमारियों का ज्ञान अच्छा है 

अब सेवा में addition चाहिए फरिश्ता बनने के धुन की… इससे अशरीरी बनना बहुत सहज हो जाएगा 

अशरीरी बनने के अभ्यास से मेहनत कम, सफलता ज्यादा मिलेगी… अशरीरी-पन के वातावरण से सबको अनुभव करा सकते हैंप्राप्तियों, शक्तियों, शान्ति, आत्मिक प्रेम, खुशी, सुख, आनंद का

इससे सब कहेंगे मेरा बाबा, मैं बाबा का और बाबा मेरा… अर्थात बाप की प्रत्यक्षता हो जाएंगी

सबसे बड़ा विघ्न है अभिमान 

सेवा में वा फरिश्ता बनने में सबसे बड़ा विघ्न है देह भान (63 जन्मों का संस्कार) और देह अभिमान… अर्थात अपने गुण, कला, विशेषता (भाषण करना, कोर्स कराना, हैंडलिंग, आदि) का अभिमान

अभिमान को चेक करने की सहज विधी है:

  • अपमान बहुत जल्दी महसूस होगा 
  • रोब (क्रोध का अंश) आ जाएगा 

(अभिमान को समाप्त करने लिए निमित्त भाव, और बाबा के दिए हुए सभी उपकारों को कभी नहीं भूलना है) 

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… चलते फिरते अपने डबल लाइट फरिश्ता स्वरूप में स्थिति रहे… इससे हर बात में लाइट और सर्व के प्यारे रहेंगे… और अशरीरी-पान के वातावरण द्वारा सर्व को परमात्म प्राप्तियों का अनुभव कराते रहेn… इससे सहज परमात्मा प्रत्यक्षता होगी, और यह संसार पुनः स्वर्ग बन जाएगा… ओम् शान्ति! 

How God creates the New World | सतयुगी सृष्टि कैसे स्थापन होती है | Sakar Murli Churnings 15-12-2018

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How God creates the New World | सतयुगी सृष्टि कैसे स्थापन होती है | Sakar Murli Churnings 15-12-2018

आज बाबा ने मुरली में (रात्रि क्लास सहित) बड़ी स्पष्ट रूप में समझाया है कि नई दुनिया की स्थापना कैसे होती है! 

नई दुनिया की स्थापना

  • बेहद की रात (कलियुग) में है दुख, भगवान की पुकार, आदि… और सतयुग-त्रेता में है सुख, अशोक वाटिका… सर्वोत्तम आदि सनातन देवी-देवता धर्म
  • यह वही गीता एपिसोड चल रहा है… भगवान (ब्रह्मा के) रथ पर आए हैं, हम सभी अर्जुन (अपने अपने शरीरो के रथी) को ज्ञान देने… और इस महाभारत (अर्थात माया के साथ युध्द) में विजयी बनाने 
  • पवित्रता ही सुख-शान्ति की जननी है… इसलिए पीस स्थापन करने लिए बाबा राजयोग सिखाते, पवित्रता की प्रतिज्ञा कराते! 
  • सबको मिठास से, रॉयल्टी से, समझ-पूर्वक ज्ञान सुनाना है… और हमारी बुद्धि में धारणा तब होगी, जब योग अच्छा होगा… फिर भव्य रूप से भी समझा सकते हैं! 

रात्रि क्लास के पॉइन्ट्‍स 

  • मंगलम भगवान विष्णु… अर्थात हम अभी भगवान के साथ मंगल मिलन मना रहे हैं, जिससे भविष्य में विष्णु कुल में जाएँगे! 
  • इसलिए हम ब्राह्मणों जैसा खुशनसीब वा सौभाग्यशाली कोई नहीं 
  • बाबा कहते तुम जैसी ईश्वरीय समझ सारे कल्प में किसी के पास नहीं 
  • हम ब्राह्मण सिर्फ खुद देवता नहीं बनते, बल्कि सर्व को मनुष्य से देवता बनाने की सेवा करते हैं! 

और जब हम सब एक बड़ी संख्या में तैयार हो जाते, तो इसके प्रभाव से सारे विश्व की स्थिति बदल जाती, और यह सृष्टि परिवर्तन हो सतयुग बन जाती! 

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… राजयोग का अभ्यास (अर्थात परमात्म मिलन) करते हुए, बहुत शुध्द और ऊंची स्थिति में स्थित रहे… और इस खुशनसीबी, मीठे बोल और रॉयल व्यवहार से सबका बुद्धियोग परमात्मा से जोड़ते रहे, जिससे सहज ही इस सृष्टि पर सतयुग स्थापन हो जाए!… ओम् शान्ति!

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Inculcating Divine Virtues | दैवी मैनर्स कैसे धारण करे |Sakar Murli Churnings 14-12-2018

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Inculcating Divine Virtues | दैवी मैनर्स कैसे धारण करे | Sakar Murli Churnings 14-12-2018

आज बाबा ने मुरली दैवीगुणों की धारणा पर चलाई है

बहुत मीठा कैसे बनें?

  • बहुत मीठा बनना है (जैसे लक्ष्मी नारायण कितने हर्षित है, कितने प्यारे लगते हैं)
  • इसके लिए बड़ा सयाना योगयुक्त बनना है, तो अपने आप शान्तचित रहेंगे… फिर बोल भी कम मीठे ज्ञानयुक्त, और व्यवहार बडा रॉयल रहेगा! 
  • एक आंख मे मुक्ति और दूसरी में जीवनमुक्ति हो! 
  • पवित्र बनना है… इसके लिए सद्गति दाता के दिए हुए सत्य ज्ञान को अच्छे से पढ़ना है, तो पावन बन जाएंगे! 

विश्व में शान्ति कैसे हो? 

  • सब चाहते है विश्व में शान्ति हो, वह कैसे होगी? 
  • जब हम सब अंदर से शान्त होंगे, तो अपने आप विश्व में शान्ति हो जाएगी
  • ऎसी सच्ची शान्ति (अथवा मुक्ति जीवनमुक्ति) तो बाबा के सिखाए हुए राजयोग से ही प्राप्त होती है!

सर्वव्यापी की बात

जितना परमात्मा (जो मिठास का सागर है) को यथार्थ रूप से याद करेंगे, उतना मीठा बनेंगे… इसके लिए बाबा अपना सत्य परिचय देते हैं, और समझाते कि मैं सर्वव्यापी नहीं हूँ… बाबा ने आज सर्वव्यापी की बात पर 3 पॉइंट्स सुनाए:

  • हम सभी ईश्वरीय सन्तान है, अर्थात ब्रदर्स है… लेकिन अगर सबके अंदर परमात्मा है, तो ब्रदरहूद के बजाए फादरहूद हो जाए! 
  • कोर्ट में परमात्मा के नाम पर कसम उठावाते हैं, इससे सिद्ध है कि परमात्मा कोई अलग चीज़ है 
  • परमात्मा को बुलाते हैं, तो जरूर वह हमारे अंदर नहीं है! 

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… अति मीठे बाबा की याद में रह, हम खुद भी बहुत मीठे, रॉयल और शान्तचित रहे… जिससे सब को ऎसा बनने की प्रेरणा मिले, और हम साथ में इस सृष्टि को सतयुग बना दें… ओम् शान्ति! 

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191 स्वमानों की माला | List of 191 Swaman (Self-Respect points)

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191 स्वमानों की माला | List of 191 Swaman (Self-Respect points)

बाबा हमें बहुत ऊंची दृष्टि से देखते हैं… इस आधार से बाबा हमारे लिए जो भी शब्द उच्चारते, वह हमारे स्वमान बन जाते हैं!

तो आपके लिए, बाबा के दिए हुए 191 स्वमानों की लिस्ट तैयार की है, पुरुषार्थ को अति सहज बनाने के लिए!

अनादि (आत्मिक) स्वरूप

आत्मा का रूप

आत्मा के गुण

  • ज्ञान स्वरूप आत्मा, पवित्र स्वरूप आत्मा, शान्त स्वरूप, प्रेम, सुख, आनंद, शक्ति
  • मास्टर ज्ञान सागर, मास्टर पवित्रता का सागर, मास्टर शान्ति का सागर, प्रेम, सुख, आनंद, शक्ति
  • मास्टर नॉलेजफूल, ज्ञान गंगा, मास्टर ज्ञान सूर्य
  • परम पवित्र, मास्टर पतित पावनी, मास्टर पवित्रता का सूर्य
  • शान्तिदूत, शान्ति का फरिश्ता, शान्ति के भण्डार
  • प्रेम का अवतार
  • रहमदिल, दयालु, कृपालु
  • सुखदेव, मास्टर सुखकर्ता दुखहर्ता
  • सत-चित्-आनंद स्वरूप
  • मास्टर सर्वशक्तिवान, मास्टर ऑलमाइटी अथॉरिटी, समर्थ आत्मा

देवता स्वरूप

  • दिव्य आत्मा (देवता)
  • विश्व के मालिक, स्वर्ग के मालिक, विश्व राज्य अधिकारी, डबल ताजधारी
  • सर्वगुण सम्पन्न, सोलह कला सम्पूर्ण
  • सम्पूर्ण पवित्र, सम्पूर्ण निर्विकारी, सच्चे वैष्णव
  • डबल अहिंसक (अहिंसा परमोधर्म)
  • मर्यादा पुरुषोत्तम

पूज्य स्वरूप

  • पूज्य आत्मा, पूर्वज आत्मा, महान आत्मा
  • इष्ट देवी, शिव शक्ति, विघ्न विनाशक
  • आधार मूर्त, उद्धार मूर्त, उदाहरण मूर्त

फरिश्ता स्वरूप

ईश्वरीय जीवन

ज्ञान

  • ईश्वरीय सन्तान
  • गॉडली स्टूडेंट, ज्ञानी तू आत्मा
  • ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण, ब्रह्माकुमार / ब्रह्माकुमारी
  • तीव्र पुरुषार्थी, सहज पुरुषार्थी, सच्चे पुरुषार्थी
  • स्वदर्शन चक्रधारी
  • त्रिकालदर्शी, त्रिनेत्री, त्रिलोकीनाथ
  • अकालतख्त-नशीन 
  • मास्टर क्रिएटर, मास्टर सतगुरू, मास्टर भगवान, मास्टर ब्रह्मा
  • अनन्य रत्न

योग

  • सहज योगी, निरन्तर योगी, स्वतःयोगी, कर्मयोगी
  • योगी तू आत्मा
  • राजयोगी, राजऋशी
  • बेहद के वैरागी, बेहद के सन्यासी, सर्वस्व त्यागी

भगवान का प्यार

  • भगवान के सिरमोर, नैनो के नूर, मस्तक मणी, गले का हार, दिलतख्तनशीन
  • रूहानी आशिक, दिलाराम की दिलरूबा, प्रीतमा
  • सच्ची गोपी, सच्ची सीता, सच्ची पार्वती

दिव्य गुणों की धारणा

  • धारणा-मूर्त, स्व चिंतक, शुभ चिंतक
  • संतुष्टमणी, सरलचित्त, मधुरभाषी, नम्रचित्त, निरहंकारी
  • आज्ञाकारी, वफादार, फरमानवरदार, ईमानदार, सपूत
  • एकनामी, एकव्रता
  • महावीर, महारथी, पाण्डव, रूहानी योद्धा
  • अचल, अडोल, एकरस
  • स्वमानधारी, स्वराज्य अधिकारी
  • एवर-रेडी, समाधान स्वरूप, सिद्धि स्वरूप
  • होली हंस
  • स्नेही
  • माननीय, गायन योग्य, पूजन योग्य

सेवा

  • अंधो की लाठी, रूहानी सेल्वेशन आर्मी, रूहानी सोशल वर्कर
  • भगवान के राइट हैंड, भगवान की भुजाएं, भगवान के मददगार, खुदाई खिदमतगार
  • दानी, महादानी, वरदानी 
  • सहयोगी, परोपकारी
  • सच्चे सेवाधारी, निरन्तर सेवाधारी, रूहानी सेवाधारी, ऑल-राउंड सेवाधारी
  • रूहानी माली, रूहानी सेल्समैन
  • विश्व कल्याणकारी, विश्व परिवर्तक
  • यज्ञ रक्षक

सार (191 स्वमानों की माला)

तो चलिए आज सारा दिन… भिन्न भिन्न स्वमानों का अभ्यास करने हुए सदा ऊंची स्थिति में स्थित रहे, जैसे बाबा हमें देखना चाहते हैं!… ओम् शान्ति!


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राजयोग के 50 विभिन्न अभ्यास | List of 50 Rajyoga Meditation Practices

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राजयोग के 50 विभिन्न अभ्यास | List of 50 Rajyoga Meditation Practices

हमारी ईश्वरीय पढ़ाई के 4 सब्जेक्ट है:

  • ज्ञान
  • योग
  • दिव्यगुणों की धारणा
  • सेवा

इसमे बहुत महत्वपूर्ण सब्जेक्ट है योग

तो आपके योग को बहुत सहज, नवीन और आनंदमय बनाने के लिए… यह योग के 50 विभिन्न अभ्यास दिए हुए है (हर एक अभ्यास को dark में लिखा हुआ है)

स्व से संबंधित

  • आत्मा का अभ्यास
    • देही अभिमानी स्थिति (मैं आत्मा इस शरीर द्वारा कर्म कर / करा रही हूं)
    • आत्म अभिमानी स्थिति (आत्मा के 7 अनादि गुणों का अनुभव… ज्ञान, पवित्रता, शान्ति, प्रेेेेम, सुख, आनंद, शक्तियां)
    • अशरीरी स्थिति (बैठे हुए अनुभव हो, कि यह देह अलग और मैं आत्मा अलग हूं)
    • विदेही स्थिति (परमधाम निवासी, बीजरूप स्थिति)
  • फरिश्ता स्वरूप का अभ्यास 
  • देवता स्वरूप का अभ्यास 
  • पांच स्वरूपों की ड्रिल (अनादि, आदि, पूज्य, ब्राह्मण, फरिश्ता) 
  • भिन्न भिन्न स्वमान का अभ्यास (मास्टर ज्ञान सूर्य, स्वराज्य अधिकारी, आदि) 

स्थानों से संबंधित

  • परमधाम में टिकना 
  • सूक्ष्मवतन में रहना 
  • सतयुग में जाना 
  • मन बुद्धि से मधुबन की सैर करना 

बाबा की याद

  • शिवबाबा को याद करना (निराकार ज्योति बिन्दु स्वरूप) 
  • बापदादा की याद (शिव बाबा, अव्यक्त ब्रह्मा बाबा के तन में)…. (दृष्टि लेना, वरदान लेना, तिलक लगवाना) 
  • बाबा से रूहरुहान (अर्थात बातें) करना 
  • बाबा से सर्व संबंधों का अनुभव (माँ, बाप, शिक्षक, सतगुरु, बंधु, सखा, साजन, सर्जन, बच्चा
  • बाबा को भिन्न भिन्न titles के आधार से याद करना (बागवान, खीवैया, रत्नागर, जादूगर, आदि) 

कर्मयोग के अभ्यास 

  • में आत्मा इस शरीर द्वारा कर्म कर / करा रही हूं (देही अभिमानी स्थिति) 
  • बाबा के साथ का अनुभव (हाथों में हाथ, बाबा की छत्रछाया सिर पर, दुआओं का हाथ सिर पर) 
  • भोजन करते हुए (बाबा मुझे खिला रहे हैं, बाबा की शक्तिशाली किरणें भोजन पर पड़ रही है) 
  • सोते हुए (बाबा की गोद में सोना) 

औरों से संबंधित

  • आत्मिक दृष्टि (अर्थात औरों को आत्मा देखना) 
  • बातें करते हुए (मैं आत्मा बोल रही हूँ, आत्मा से बात कर रही हूं
  • बातें सुनते हुए (मैं आत्मा सुन रही हूँ, आत्मा से सुन रही हूं
  • सकाश देना 
  • किसी की याद आए तो, उन्हें आत्मा देखकर शुभ भावना का दान देना

स्मृति में रखना की

  • अब घर जाना है 
  • यह संगमयुग का समय चल रहा है 
  • बाबा आया हुआ है 
  • आदि

सार (राजयोग के 50 विभिन्न अभ्यास)

तो चलिए आज सारा दिन… योग के विभिन्न अभ्यास करते हुए अपने योग के चार्ट को बढ़ाते जाए, और निरन्तर सहजयोगी बनने के हमारे लक्ष्य तक जल्दी से जल्दी पहुंच जाएं!… ओम् शान्ति! 


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