Answers from Sakar Murli 26-06-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 26-06-2020*

1. *स्वदर्शन चक्रधारी* इनमें से किन्हें कहेंगे? _(बाबा, ब्राह्मण, देवता)_
° *बाबा* वा *ब्राह्मणों* को (देवताओं को नहीं)

2. सब थोड़ेही राजा बनेंगे। _(सही / गलत)_
° *गलत* (अरे तुम सबका चिंतन क्यों करते हो! स्कूल में यह ओना (फिकर) रखते हैं क्या कि सब थोड़ेही स्कॉलरशिप पायेंगे? पढ़ने लग पड़ेंगे ना।)

3. तुम अभी श्रीमत पर _______ की अति में जाते हो, तुम्हें बाप से ______ का वर्सा मिलता है, ______ में सब कुछ आ जाता है। आत्मा तो स्वयं _____ स्वरूप है। इस शरीर द्वारा सिर्फ पार्ट बजाना होता है।
°साइलेन्स, शान्ति, शान्ति, शान्त

4. सबसे *महान पुण्य* कौन-सा है? और सबसे श्रेष्ठ *दान* ?
° *घर-घर में प्रदर्शनी* खोलो। इन जैसा महान पुण्य कोई होता नहीं।
° किसको *बाप का रास्ता बताना*, इन जैसा दान कोई नहीं।

5. ______ की भावना रखने से सम्पन्न आत्मा हो जायेंगे और जो सम्पन्न होंगे वह सदा ______ होंगे। मैं देने वाले दाता का बच्चा हूँ-देना ही लेना है, यही भावना सदा _______ , इच्छा मात्रम् अविद्या की स्थिति का अनुभव कराती है। सदा एक लक्ष्य _____ की तरफ ही नज़र रहे, और कोई भी बातों के विस्तार को देखते हुए नहीं देखो, सुनते हुए भी नहीं सुनो।
°दातापन, तृप्त, निर्विघ्न, बिन्दू

6. यह प्रदर्शनी तो तुम्हारे _________ में होनी चाहिए क्योंकि तुम बच्चे ब्राह्मण हो। इन पर समझाना बहुत ______ है। अच्छा – तुमको एक _______ दे देंगे। बोर्ड पर भी लिख दो – _____ के द्वार कैसे खुल रहे हैं – आकर समझो।
°घर-घर, सहज, ब्राह्मणी (टीचर), स्वर्ग

7. बुद्धि वा स्थिति यदि कमजोर है, तो उसका कारण है _______।
°व्यर्थ संकल्प

8. विकर्माजीत बन ऊंच पद पाना है तो कौन-सा *चिन्तन* खत्म करना है, और कौन-सा चिन्तन करना है?
° यह क्यों होता है, यह ऐसे क्यों करता है। इन सब *फालतू बातें* को छोड़ना।
° एक ही चिंतन रहे कि *हमें तमोप्रधान से सतोप्रधान बनना है*। जितना बाप को याद करेंगे उतना विकर्माजीत बन ऊंच पद पायेंगे।

9. बाप को बुलाते भी इसलिए हो हे पतित-पावन, लिबरेटर, गाइड आओ। तुम्हारा भी नाम ______ गाया हुआ है। बाप भी _______ है। सभी आत्माओं को ले जायेंगे।
°पाण्डव, पण्डा

10. कोई _____ 7 रोज़ का कोर्स उठाते हैं। किसको ____ में भी तीर लग सकता है।
पुरानों से भी तीखे चले जाते हैं, क्यों?
° विरले, सेकेण्ड
° क्योंकि अच्छी-अच्छी प्वाइंट्स, तैयार माल मिलता है।

11. यह बाबा _______ इतना ऊंच पद पाते हैं, हम क्यों नहीं बनेंगे।
मीठे मीठे बच्चों ______ बनो। अपने को ________ समझकर बाप को याद करो। तुम मेरे लाडले _____ हो ना। आधाकल्प के तुम ____ हो।
°बूढ़ा, देही-अभिमानी, आत्मा, बच्चे, आशिक

12. बाबा ने कौन-सी *बेहद* की 4 बाते बतायी?
° बेहद का *बाप* बेहद का *वर्सा* दे रहे हैं। बेहद की *नॉलेज* सुना रहे हैं। तो *त्याग* भी बेहद का चाहिए।

13. जब _____ पतित दुनिया बनती है तब ही बाप आकर ______ पावन दुनिया बनाते हैं।
तुम बुलाते आये हो हे _________ , अब मैं आया हूँ, तुमको कहता हूँ यह अन्तिम जन्म ______ रहो। तो तुम _____ दुनिया के मालिक बनेंगे।
°सम्पूर्ण, सम्पूर्ण, पतित-पावन, पवित्र, पवित्र

Answers from Sakar Murli 27-06-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 27-06-2020*

1.______ और ________ के अनुभव द्वारा सदा सफलतामूर्त भव
°साथी,साक्षीपन

2. धंधा आदि भी भल करो। बाप कहते हैं हाथों से काम करो, _______ बाप की याद में रहे।
°दिल

3.आत्म-अभिमानी बनने पर बाबा ने क्या समझाया?
° रोज़-रोज़ बोलने की दरकार नहीं रहती कि अपने को आत्मा समझो। आत्म-अभिमानी भव अथवा देही-अभिमानी भव… अक्षर है तो वही ना। बाप कहते हैं अपने को आत्मा समझो। आत्मा में ही 84 जन्मों का पार्ट भरा हुआ है। एक शरीर लिया, पार्ट बजाया फिर शरीर खलास हो जाता है। आत्मा तो अविनाशी है।

4. जितनी-जितनी धारणा करेंगे उतना तुम्हारे पास नॉलेज की _____ होती जायेगी, नॉलेज की धारणा से तुम कितना धनवान बनते हो। वास्तव में कोई चीज़ का ______ नहीं है सिवाए एक बाप के।
°वैल्यु,मूल्य

5. यह बोर्ड लिख दो – कौन-सा?
° विश्व में शान्ति बेहद का बाप कैसे स्थापन कर रहे हैं सो आकर समझो। एक सेकण्ड में विश्व का मालिक 21 जन्म लिए बनना है तो आकर समझो।

6. गृहस्थ व्यवहार में रहकर कमल फूल समान ______ बनना है।
°पवित्र

7. इस ईश्वरीय सभा का कायदा क्या है?
°जिन्हें ज्ञान रत्नों का कदर है, कभी उबासी आदि नहीं लेते हैं उन्हें आगे-आगे बैठना चाहिए।

8. _______ की निशानी है-मन उदास और खुशी गायब।
°व्यर्थ संकल्पों

9. माया भुलाकर तूफान में ला देती है, इसमें _____ हो विचार सागर मंथन करना है।
°अन्तर्मुख

10. _____ अवस्था वाले होंगे वह कोई धर्मराज पुरी में सज़ायें थोड़ेही भोगेंगे।
°कर्मातीत

Answers from Sakar Murli 17-06-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 17-06-2020*

1. तुमको क्या *कण्ठ* करना है?
° *बाप* को

2. तुम _____ बच्चे हो, बच्चों को ______ रत्न कहा जाता है।तुमको अपना बनाया है तो तुम भी _____ हुए ना। अब तुम बच्चे बाप के पास आते हो तो तुम्हारी ______ में कितनी खुशी रहनी चाहिए।
°लाडले, नूरे, हमारे, दिल

3. सतयुग में यह मालूम रहेगा कि हमने यह संगम पर 21 जन्मों का वर्सा लिया हुआ है। _(सही / गलत)_
वहां शरीर कैसे छोड़ेंगे?
° गलत (यह अभी जानते हो हम 21 जन्मों का वर्सा आधाकल्प के लिए ले रहे हैं)
° जब शरीर बूढ़ा होगा तब समय पर शरीर छोड़ेंगे। जैसे सर्प पुरानी खल छोड़ नई ले लेते हैं। हमारा भी पार्ट बजाते-बजाते यह चोला पुराना हो गया है।

4. जो भी बच्चे _____ में रहते हैं, वो सदैव साथ में हैं। और _____ विनाश होते हैं फिर शुरू होता है _________ संवत। यह तुम ब्राह्मणों की बुद्धि में बाबा ________ करा रहे हैं। तुम बच्चे भी पहले इस ______ की नॉलेज को कुछ भी नहीं जानते थे।
°याद, विकर्म, विकर्माजीत, धारणा, बेहद

5. सतयुग में देवतायें यह जानते हैं कि हम आदि सनातन देवी-देवता धर्म के हैं। _(सही / गलत)_
° *गलत* (वहाँ तो धर्म की बात ही नहीं है। है ही एक धर्म)

6. ज्ञान तो सहज है, उसमें इतना टाइम नहीं लगता है, जितना ________ पर लगता है। बच्चों, एक बाप को याद करते रहो। यही ______ मंत्र है। तुम रावण पर जीत पहन _______ बनते हो। घड़ी-घड़ी अपने को _____ समझो। यह शरीर तो यहाँ 5 तत्वों का बना हुआ है। बनता है, छूटता है फिर बनता है। अब आत्मा तो ______ है, जिन्हें _______ बाप पढ़ा रहे हैं संगमयुग पर।
°याद की यात्रा, वशीकरण, जगतजीत, आत्मा, अविनाशी, अविनाशी

7. सच के लिए क्या कहावत है?
° सच की नांव हिलेगी, डुलेगी लेकिन डूबेगी नहीं।

8. तुम सच्चे-सच्चे ब्राह्मण को *भ्रमरी* क्यों कहा जाता है?
° तुम कीड़ों को आपसमान ब्राह्मण बनाती हो। तुम्हें कहा जाता है कि कीड़े को ले आकर बैठ भूँ-भूँ करो।

9. *जास्ती धारणा नहीं कर सकते*, तो बाबा ने क्या कहा?
° हर्जा नहीं। याद की तो धारणा है ना। बाप को ही याद करते रहो। जिनकी मुरली नहीं चलती है तो यहाँ बैठे सिमरण करें। (इस ज्ञान-योग से स्वतः सब धारणाएं होती जाएंगी)

10. _______ बन हर आत्मा की कमजोरी को परखते हुए, उन्हें ________ स्वरूप से समाप्त कर देना, कांटे को ______ बना देना, स्वयं भी _______ के समान सन्तुष्ट रहना और सर्व को सन्तुष्ट करना, जिसके प्रति सब निराशा दिखायें, ऐसे व्यक्ति वा ऐसी स्थिति में सदा के लिए ______ के दीपक जगाना अर्थात् दिलशिकस्त को ______ बना देना-ऐसा श्रेष्ठ कर्तव्य चलता रहे तो _______ , सन्तुष्टमणि का वरदान प्राप्त हो जायेगा।
°त्रिकालदर्शी, कल्याणकारी, फूल, सन्तुष्टमणी, आशा, शक्तिवान, परोपकारी

11. शिव के इतने *मन्दिर* क्यों बनते है?
° उनके बनते हैं क्योंकि भारत की और सारी दुनिया के *बच्चों की सर्विस करते* हैं।

12. जिसकी हम ______ करते थे वह हमको पढ़ा रहे हैं। जिन लक्ष्मी-नारायण के हम _______ थे वह अभी हम खुद बन रहे हैं। यह ज्ञान बुद्धि में है। ______ करते रहो फिर औरों को भी सुनाओ।
°पूजा, पुजारी, सिमरण

13. *श्रेष्ठ* किन्हें कहा जाता है?
° पवित्र देवताओं को

14. यह एक ही _______ है जबकि तुमको अपने को आत्मा समझ एक बाप को याद करना है। 5 हज़ार वर्ष पहले भी सिखाया था, और कोई की _______ नहीं जो ऐसे समझा सके। _______ है ही एक बाप, दूसरा कोई हो न सके।
°समय,ताकत, ज्ञान सागर,

15. सारा खेल दो बातों पर बना हुआ है। कौन-सी?
° *भारत की हार और भारत की जीत।* भारत में सतयुग आदि के समय पवित्र धर्म था, इस समय है अपवित्र।

16. परीक्षा के समय_____ याद आये तब प्रत्यक्षता होगी।
°प्रतिज्ञा

17. स्वर्गवासी बनने के लिए पाण्डवों ने कौन-सा पुरुषार्थ किया?
° जीते जी देह-अभिमान से गलने का पुरूषार्थ। तुम अभी यह पुरानी जुत्ती छोड़ने का पुरूषार्थ करते हो

18. गायन है ना- ______छोड़ विष काहे को खाए।
°अमृत

19. दूरदेशी बाप हमें दूरांदेशी बनाने लिए कौन-सा *दूरांदेशी ज्ञान* देते?
° *आत्मा कैसे चक्र में भिन्न-भिन्न वर्णों में आती* है। तुम जानते हो अभी हम ब्राह्मण वर्ण के हैं इसके पहले जब ज्ञान नहीं था तो शूद्र वर्ण के थे, उसके पहले वैश्य….. वर्ण के थे। दूरदेश में रहने वाला बाप आकर यह दूरांदेशी बनने का सारा ज्ञान बच्चों को देते हैं।

Murli Yog 28.12.2024

A

एक-दो के विचारों 💭 का… सम्मान रखने वाले… हम माननीय आत्मा ⭐ हैं!

अनादि स्वरूप में स्थित रहते… इसलिए हम ब्राह्मणों का विशेष लक्षण है; सदा स्वयं से सन्तुष्ट ☺️ रहना, सबको सन्तुष्ट करना… तब ही आगे बढ़ते!

इस कल्याणकारी 💫 युग में… हम कल्याणकारी स्वयं-सर्व का कल्याण करते (प्रकृति को भी सुखदाई बनाते!)… तो अकल्याण की हलचल का प्रभाव पड़ नहीं सकता; हम प्रकृतिजीत, मायाजीत है!

ओम् शान्ति 😌 अर्थात्; मैं (अनादि से) शान्त स्वरूप आत्मा हूँ… अभी भ्रकुटी में बैठ; कानों द्वारा यह रूहानी पढ़ाई सुन रही… याद द्वारा श्रेष्ठ, पावन; फिर से सतोप्रधान सुखी देवता बन रही!

तो निराकार परमपिता अपनी ईश्वरीय मत द्वारा… हमें सर्व खज़ानों 🪙 से मालामाल कर… स्वर्ग के मालिक 👑, सदा सुखी 😀 बनाते!

कैसे इन मीठी-मीठी लवली 💞, रमणीक, दिल ❤️ को छूने वाली बातों द्वारा… मन्मनाभव के महा वशीकरण मंत्र में हमें स्थित 🎯 करते… फिर हम भी भूँ-भूँ 🐝 कर आप समान 🧖 बनाते (और राजतिलक पाते 🎉!)


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शुभ भावना 💭 का दान ✋🏻 (32 पॉइंट्स! 📝) | Giving Good Wishes | Creative 🌈 Meditation Yog 🧘‍♀️

शुभ भावना 💭 का दान ✋🏻 (32 पॉइंट्स! 📝) | Giving Good Wishes | Creative 🌈 Meditation Yog 🧘‍♀️

सबका भला हो, कल्याण 💫 हो… सब सुखी 😀, सन्तुष्ट ☺️ रहे…. उनकी उन्नति 📈 हो, सफलता 🚀 मिले

सभी का अच्छा 🙌🏻 हो, सब सही रहे… वह खुश 😃, प्रसन्न 😊 हो… उन्हें हर पल प्रगति 🎉 प्राप्त हो, वह आगे बढ़े 🚶

उनका लाभ 🌈 हो, फायदा 🪙 हो… उन्हें प्राप्ति 🌧️ हो, मन 💬 की शान्ति 😌 मिले… वह ठीक 👍🏻, स्वस्थ 🩺, शक्तिशाली 💪🏻 रहे

वह आनंदित 😇, हर्षित 🙂 रहे… उनका भाग्य 🎨 श्रेष्ठ ⤴️, भविष्य उज्ज्वल 💡 हो… उनका जीवन खुशहाल 💐 रहे

उनको प्यार ❤️ मिले (☝🏻 परमात्म!)… सबका परमात्म मिलन 💞 हो. वह भी परमात्म वर्से 👑 के अधिकारी ✊🏻 बने… उनकी बुद्धि 🧠 में सत्य ज्ञान 📃 टच 🙏🏻 हो… अपना जीवन पावन 💎, योगी 🧘‍♂️, दिव्यगुणी 🎶 बनाए, ईश्वरीय श्रीमत 📝 पर निश्चिंत 💯


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Murli Yog 5.10.24

Murli Yog 5.10.24

सुख, शान्ति, डबल लाइट के गोल्डन वर्से से सम्पन्न 🪙; दिव्य ✨, खुशबूदार फूल 🌸 बन; सर्वशक्तिवान ⚡ के साथ से विजयी 🇲🇰 रह; सबके समीप, सम्मान देते संस्कार मिलन करने वाली ईश्वरीय नेचर बनाना… Murli Yog 5.10.24… आज माँ सन्तोषी समान सदा सन्तुष्ट रहे!

वह सदैव पवित्र, निराकार, रूहानी बाप… शान्ति के सागर 🌊, शान्ति देवा है जो हमें वापस अपने शान्तिधाम, मुक्ति, घर ले जाते (शान्ति का वर्सा!)… वह सुख के सागर भी है; जो हमें फिर सुखधाम, जीवनमुक्ति में भेजते!

तो याद, योगबल से सहज वापस जाते… और सच्चा सोना बनने कारण; फिर उस पवित्र, गोल्डन ऐज में पहुंचते… जो है दिव्यगुणों 🪂 वाले फूलों का बगीचा, गृहस्थ आश्रम; कितना धन 💰, हीरे-जवाहर होते; श्रीकृष्ण की डिनायस्टी, रामराज्य!

हमें आत्मा की पहचान मिली है; तो आत्मा समझ देही-अभिमानी रहना… आत्मा इस भ्रकुटी के चैतन्य अकालतख्त पर चमकती; एक तख्त 🪑 छोड़ दूसरा लेती, जो छोटे से बड़ा होता… अभी पुरूषोत्तम संगमयुगी ब्राह्मण तख्त है; फिर बड़ा फर्स्टक्लास, देवताई, गोल्डन ऐजेड़, सतोप्रधान तख्त मिलता… हम ऐसे वैल्यूबल; अनादि, अविनाशी पार्टधारी है!

यह सत्य बातें स्वयं सत्, चैतन्य, बीजरूप, ज्ञान सागर 🌊 हमें सुनाते… वह भारत में आकर सबकी सद्गति करते; तो यह ऊंच ते ऊंच देश, बड़ा तीर्थ ठहरा… तो जब इतनी प्राप्तियां हुई है, अब कुछ याद नहीं आता (स्वतः वैराग्य!)

हम डबल लाइट 🧖 है (क्योंकि सर्व जिम्मेवारी का बोझ बाप हवाले कर दिया है!)… सबके समीप आते सम्मान देते रहने से सहज संस्कार मिलन होता; ‘मेरे संस्कार’ यह शब्द ✍🏻 ही मिटकर ईश्वरीय नेचर बन गयी है!

सर्वशक्तिवान के साथ पर निश्चय को प्रैक्टिकल में यूज करने से… सहजयोगी, निरन्तर योगी रहते… (कभी हिलते नहीं; बातों को दूर से ही परख समाप्त करते!)… (AV 4.12.95; फिर से!)


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Murli Yog 4.10.24

Murli Yog 4.10.24

सुप्रीम, गोल्डन शान्ति की अनुभूति द्वारा मीठे, प्यारे, दिव्य साथ से बल अर्थात् आशीर्वाद प्राप्त करने के तकदीर-वान बन; सहज कल्याण करने में राइट हैण्ड बनना… Murli Yog 4.10.24… आज शिव शक्ति बन शिव से शक्ति लेते रहे!

ओम् शान्ति अर्थात् हम रूहानी बच्चों को अपने विचित्र, विदेही, निराकारी आत्म-स्वधर्म में टिकना है… जिससे स्वतः उस ऊंच ते ऊंच सुप्रीम, पतित-पावन सत्-बाप के बेहद सम्बन्ध की प्यार-भरी याद आती… जिससे प्योर, सतोप्रधान, गोल्डन एजेड़ बनते!

वह पुरूषोत्तम संगम पर ही आकर; मुक्तिधाम ले जाते… फिर उस नये, पवित्र अमरलोक में बेहद सुख के वर्से की बादशाही के मालिक बनाते (जहां 5 तत्व भी पावन!)… ऐसी बलवान राजाई मिलना ही जैसे सर्वशक्तिवान की आशीर्वाद है…

… यही ऊंच पद 🏆 भी है; इस ज्ञान-अमृत के सागर 🌊 की ऊंच, रूहानी, नई पढ़ाई में पास होना… अथवा सचखण्ड स्थापन करने वाले सतगुरू की लीगल मत पर कैरेक्टर्स सुधरकर; अच्छे, मीठे सर्विसएबुल फूल 🌸 बनना (जैसे दिव्यगुण-सम्पन्न श्री लक्ष्मी-नारायण!)

… ऐसे राजा बनने; आप समान 🧖 बनाने के मददगार भी बनना है; ट्रान्सफर करना… हम तकदीर-वान को ही ऐसे निश्चय बैठता; तो अब अपने पर रहम कर; स्कूल के अच्छे, होशियार 🧠 राइट हैण्ड स्टूडेन्ट बनना है!

हम त्रिकालदर्शी हर बात में कल्याण समझते… (क्योंकि सिर्फ एक काल से नहीं देखते!)

अपने पवित्रता ✨ के स्वधर्म पर निश्चय हो गया… बाबा को यथार्थ पहचान उस सर्वशक्तिवान को साथ रखते… ऐसे मास्टर सर्वशक्तिवान लिए सब सहज है (संकल्प 💭 में भी कोई हिला नहीं सकता!) (AV 4.12.95)

मरजीवा अर्थात् पुराने संस्कार भी किसी और के लगे; तो छूना नहीं!(AV 18.6.69)


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Murli Yog 3.10.24

Murli Yog 3.10.24

वन्डरफुल ब्राइडग्रुम के साथ द्वारा चमकते ✨, दिव्य तकदीर-वान बनकर; निःस्वार्थ, उदारचित्त, परोपकारी बन सबका स्नेह ❤️, सहयोग से कल्याण कर; सर्व की आशीर्वाद प्राप्त करना… Murli Yog 3.10.24… आज माँ ‘दुर्गा’ बन स्वयं के ‘दुर्गुणों’ का नाश करें!

वह ऊंच ते ऊंच रूहानी, निराकार पतित-पावन, परमात्मा शिवबाबा (ब्राइडग्रुम!); हम मीठे आत्म-सालिग्राम-सितारों (ब्राइड्स) को… नये हेवन, घोर रौशनी ☀️, सुखधाम के मालिक देवी-देवता बनाते (पवित्र राजाई डिनायसटी का वर्सा!)

तो पढ़कर होशियार 🧠 बन; श्रीमत पर दिव्यगुण अवश्य धारण करने है (सच्चाई, पवित्रता, शुद्ध खान-पान, तंग-दुःखी नहीं करना, आदि)… मुख्य बात धारण करनी है; याद की रेस, दौड़ी!

हम निश्चयबुद्धि बी.के अपने आत्म-ब्रदर्स का कल्याण करते रहते (बाबा का परिचय देते)… तो ब्राह्मण कुल की वृद्धि होती रहती… हम सब शिवबाबा के बच्चे है!

हम तकदीर-वान आत्माएं 🕯️… सच्ची सेवा द्वारा… सर्व की आशीर्वाद प्राप्त करते रहते!

बाप समान निःस्वार्थ, रहमदिल 💜; उदारचित्त, कल्याणकारी 💫, परोपकारी बन… हम स्नेह, सहयोग द्वारा एकमत हो; संस्कार मिलन के रास की महानता द्वारा… सम्पूर्णता वा समय को समीप लाते!

सोने के समय बुद्धि को क्लीयर, खाली रखने… अच्छा-बुरा सब बाबा के हवाले कर, उन्हें देकर, साथ में सो जाते (निर्संकल्प हो!)… तो और स्वप्नों से भी मुक्त रहते (यह है बाबा के फरमान की ताकत 💪🏻!)

कैसे इस अन्त में पुरूषोत्तम संगम पर, बेहद ज्ञान सागर 🌊 बीज सारे विश्व 🌍 की सद्गति कर विश्व-गुरू बनते… अभी सूक्ष्मवतन में कर्मातीत शरीर द्वारा हमसे मिलते, बोलते… इस बड़े वन्डरफुल 👌🏻 नाटक, अनादि ड्रामा 🎭 के भिन्न-भिन्न एक्ट, फीचर्स हुबहु रिपीट होते हुए भी नये-नये लगते!


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‘..फुल’ 💯’ से समाप्त होते 15 शब्द ✍🏻 | Words ending with ‘ful’ | Creative 🌈 Meditation Yog

‘..फुल’ 💯’ से समाप्त होते 15 शब्द ✍🏻 | Words ending with ‘ful’ | Creative 🌈 Meditation Yog

बाबा ❤️ ने मुझे ज्ञानवान 🧑‍🎓, नॉलेजफुल 📃 बनाये…अटेन्शन 💡 रखने में केयरफुल 👍🏻… दिव्यगुणों 🪂 में इसेन्सफुल 🧪 बना दिया है

मेरे मन 💭 की गति पीसफुल 😌… दिल 🤍 सबके लिए लवफुल 💜 हैं… बोल 🗣️ और कर्म मर्सीफुल ✋🏻

मेरा व्यवहार चियरफुल 😊… स्वभाव ब्लिसफुल 😇… चेहरा दिव्य 👑 हर्ष से जॉयफुल 😃 (खुश, प्रसन्न) है

मेरे संकल्प पावरफुल ✊🏻… जीवन सक्सेसफुल है… मैं सदा सोलफुल अर्थात् सोल-कॉन्शस ⭐ हूँ

मैं बाबा का सम्पूर्ण फेथफुल 🙌🏻… इसलिए मेरा भाग्य 💫 वन्डरफुल 👌🏻 है… बाबा से फुल 📈 वर्सा 🪙 प्राप्त करता; अपनी आत्म-बैटरी 🔋 फुल चार्ज ⚡कर! 🙂🙂👍🏻👍🏻


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