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Murli Yog 1.10.24
सर्व प्राप्तियां 🌈, खज़ाने, गुण, शक्तियों ⚡ के भाग्य की कमाई जमा करने का एकमात्र उपाय – दिव्य आत्म-अभिमानी स्थिति द्वारा प्यार से बाबा की याद… Murli Yog 1.10.24… एक तारीख को; दिल ❤️ वा मन 💭 में भी एकानामी रहना, तो बोल में भी सिर्फ एक बाबा हो!
हम रूहानी बच्चों अर्थात् आत्माओं 🪔 को बाबा समझाते… तो यह ‘आत्मा हूँ’ की मूल, मुख्य पाठ वा प्रेक्टिस को… एकान्त, साइलेन्स में; फुर्सत निकाल पक्का करना है…
… इससे ही उस आत्माओं के, रूहानी, अनादि परमपिता की याद भी पक्की ✊🏻 रहती… क्योंकि वह भी निराकार आत्मा है; सिर्फ सुप्रीम, ऊंच ते ऊंच… तो उन्हें प्यार ❤️ से याद करते!
इससे ही पावन, सतोप्रधान, पुण्य आत्मा बनने का वर्सा पाते… जिसकी प्रालब्ध वहां शिवालय, दिन में सुख पाते; अमर, आयुश्वान भव वाली फुल 💯 आयु… तो पवित्र बन, दिव्यगुण भी धारण करते (वाणी से परे, मूलवतन घर भी जायेंगे; हम सितारे!)
तो कितनी अच्छी नॉलेज, शिक्षा इस गॉडली यूनिवर्सिटी 🏫 में स्वयं भगवान् 🛐 हमें पढ़ाते (आदि देव, भाग्यशाली रथ द्वारा; एडाप्टेड़ ब्राह्मण बनाये!)… तो यह पैगाम दे, कल्याण करने वाले फूल 🌸 ही बाबा के दिल पर चढ़ते (ज्ञान डांस भी अच्छा होता; सामने बैठने चाहिए!)
हम शमा 🔥 पर स्वयं को इतना मिटाते; जो पुराने, ‘मेरे’ संस्कार, नेचर समाप्त हो; बाप समान अव्यक्ति फीचर्स बनते… हमारी मुख्य फाउण्डेशन पवित्रता को धरत परिये धर्म नहीं छोड़ते… यह पवित्रता ✨ ही परमात्म ज्ञान की नवीनता है; इससे ही ज्ञानी, योगी आत्मा बन सकते; तो सम्पूर्ण लगाव-मुक्त हो प्रकृति को भी पावन करने की सेवा करते!
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Murli Yog 30.9.24
ऊंची, परम गोद की पावन पालना के नशे, मस्ती में बैटरी चार्ज की उन्नति कर लक्की, चैतन्य, दिव्य ✨, प्यारा ❤️, पूज्य फरिश्ता 🧖 बनना; सबको भगवान् 🛐 से मिलाने की गुण 🌈, विशेषता धारण कर; सेवा में हड्डियां स्वाहा करके… Murli Yog 30.9.24!
वह ऊंच ते ऊंच रूहानी बाप, निराकार पतित-पावन, परमपिता परमात्मा परमधाम-निवासी शिवबाबा… ज्ञान सागर 🌊 होने कारण हमें राजयोग का ज्ञान, मन्त्र भी देते; सुधार, पालना के लिए पढ़ाई, शिक्षा भी देते… स्व-चिन्तन में मस्त रह उन्नति में टाइम सफल करो; अपनी घोट तो नशा चढ़े!
तो जबकि हम बाबा की गोद में है; अभी याद की हाइएस्ट युक्ति, मूल बात, नम्बरवन सब्जेक्ट द्वारा… सतोप्रधान बन, बैटरी चार्ज कर पूज्य ✋🏻, चैतन्य देवता बनना है… ऊंच, नम्बरवन, प्यारा श्रीकृष्ण सो लक्ष्मी-नारायण 🫅🏻👸🏻 बनना… नई दुनिया 🌏, स्वर्ग के वर्से में!
तो बाबा इस पुरूषोत्तम संगम पर भाग्यशाली रथ द्वारा श्रीमत देते… हम कोटों में कोई विरल आत्माओं; अच्छा पढ़ने वाले लक्की, मीठे बच्चों को!
आत्मा का ही कनेक्शन शिवबाबा के साथ है (हम उनके बच्चे है!)… हम आत्मा ही उस मूलवतन, निराकारी सृष्टि के स्टॉक से यहां आये, शरीर धारण कर जीव-आत्मा बन पार्ट बजाती… अब वहां वापस जाना हैं (शरीर तो जल जायेगा!)
पहले सूक्ष्मवतन-वासी फरिश्ता बनेंगे… (हड्डी-मास बिना; क्योंकि हड्डियां 🦴 तो दधीची ऋषि मिसल यज्ञ-सेवा में स्वाहा कर दी!)… फरिश्ता जीवन कर्मातीत होने कारण शुद्ध वा पीछले कर्मों के बन्धन से भी न्यारे है; इसीलिए हमारी विशेषता में ‘इच्छा मात्रम अविद्या’ का गायन है!
हम रूहानी सोशल वर्कर सबको भगवान् 🛐 से मिलने का ठिकाना दिलाते… सब अच्छे गुण 🌈, विशेषता, सेवा दाता की देन है; इस स्मृति 💭 से लगाव-मुक्त, आकर्षण-मुक्त 🧲, प्रभाव-मुक्त रहते!
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Avyakt Murli 💌 Yog 29.9.24 (Rev. 3.2.02)
अविनाशी खज़ानों 🪙 की सम्पन्नता द्वारा सर्व प्राप्ति, तृप्ति, खुशी, दुआएं 🌬️ आदि सर्वगुण 🌈 emerge करने समझ + योगबल द्वारा संकल्पों 💭 को निश्चिंत, समर्थ रख सदा हल्के, इजी़, मीठे मीजाज़ में रहना; यह है आबाद, आयुश्वान, वाह-वाह, सर्व के प्यारे ❤️ बनना… Avyakt Murli 💌 Yog 29.9.24 (Rev. 3.2.02)!
सर्व, अविनाशी खजानों के मालिक द्वारा हम खज़ाने जमा कर… सदा भरपूर, सम्पन्न; प्राप्ति-स्वरूप, तृप्त, खुश रहते:
ज्ञान-खज़ाना जमा करने के फलस्वरूप… जीवन में रहते सर्व दुख, अशान्ति, चिंताओं के व्यर्थ बन्धनों के तूफ़ान, वातावरण 💨, वायुमण्डल 🌬️ से… मुक्त, जीवनमुक्त, कमल 🪷 समान न्यारे 🕊️, बाबा के प्यारे ❤️ है!
धारणाओं के खज़ाने द्वारा सर्वगुणोंं के खज़ाने प्राप्त करते; योगबल के खज़ाने द्वारा सर्व शक्तियां ⚡ प्राप्त हो, मास्टर सर्वशक्तिमान ✊🏻 बनते… तो एक-एक शक्ति 💪🏻 चेक करना, फुल हैं?… क्योंकि हमारा दृढ़ निश्चय, लक्ष्य, प्रतिज्ञा है कि फुल पास सूर्यवंशी, 16 कला सम्पन्न बनना ही है… और कमी भरने का समय कम है, तो अभी-अभी लक्ष्य-लक्षण 🎯 समान कर बाप समान बनना ही है!
यथार्थ सेवा द्वारा आत्मिक खुशी से खुशनुमः, खिला हुआ रूहानी गुलाब 🌹, खुशी के झूले में झूलते रहते… जिससे वायुमण्डल, सेवा-स्थान, सेवा-साथी, जिनकी सेवा करते; सब पर प्रभाव पड़ता… और सम्बन्ध-सम्पर्क द्वारा दुआओं की फीलिंग, अनुभूति से स्वयं-सर्व डबल लाइट, इजी रहते!
देह-भान से परे, स्वमान 👑 में टिकने जब भी मैं शब्द ✍🏻 बोलो तो ‘मैं कौन-सी आत्मा हूँ’ याद आये (मुझ निराकार आत्मा ने इस देह में प्रवेश किया है!); तो स्वतः निरहंकारी, निर्विकारी रहते… तो साक्षी हो खेल enjoy करने के साथ; बीच-बीच में भी सेकण्ड में एकदम देह से न्यारे; फुल 💯 शक्तिशाली, पॉवरफुल; निराकार आत्म-स्वरूप में स्थित होना (अभी-अभी कार्य में, अभी न्यारे!) … ऐसे तीव्र पुरूषार्थी को दिलाराम ❣️ के दिल का यादप्यार है!
सर्व खजाने आबाद कर, आबाद रहना (ब्राह्मण जीवन में सदा आयुश्वान भव ✋🏻; फिर ब्राह्मण सो देवता तो आयुश्वान है ही!)… हम प्रतिज्ञा में पक्के रहने वालों को अमृतवेले वह प्रतिज्ञा दोहरानी; फिर बार-बार प्रैक्टिकल में चेक करना; हम मजबूत, समाधान स्वरूप, विजयी रत्न 💎 एक-एक लाख समान है… हमारे मस्तक पर बाबा ने विजयी 🇲🇰 का अमर तिलक लगाये, अमर भव के वरदानी बनाया है; तो बाबा के संस्कार को अपने संस्कार बनाने है … हम सबके प्यारे सुकुमार अनेक कुमारों को पक्के, वाह-वाह, फर्स्टक्लास बनाने वाले हैं (फिर मधुबन 🏫 लाना; गवर्नमेंट भी पॉजिटिव कर्म करने वाले कुमारों की कमाल देख खुश होंगे!)
हम मीठा मिजाज वाले भूल से भी दुःख नहीं दे सकते… शिक्षक बन परिस्थिति हमें सहन, सामना शक्ति का पाठ पढाती; जबकि हम ट्रस्टी ने सब बाबा हवाले किया है; तो निश्चिन्त, समर्थ, निर्भय रहना… भक्ति का फल; ज्ञान सागर 🌊 और अविनाशी ज्ञान मिला; हम उसमें समाई हुई ज्ञानी तू आत्मा है; तो इच्छा रूपी अप्राप्ति आ ही नहीं सकती!
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Murli Yog 28.9.24
मीठे, लाड़ले, कल्याणकारी 💫 के संग, पास रह दिव्य सुख, शान्ति, बड़ी आयु की अमर प्राप्ति; अर्थात् सर्व वरदान, गुण 🌈. खज़ानों 🪙 से सम्पन्न राजा; दाता ✋🏻, अखण्ड महादानी बनना; सहनशील, साक्षी हो हर खेल मज़े से, मायाजीत हो देखना… Murli Yog 28.9.24!
इस अनादि नाटक में कल्याणकारी, पुरूषोत्तम संगम पर… ऊंच ते ऊंच परमपिता; बेहद ज्ञान सागर 🌊, चैतन्य बीज, टीचर; साथ ले जाने वाला सतगुरू, निराकार… हम निराकार आत्माओं 🪔 को पढ़ाते; हम कानों द्वारा सुनने वाले रूहानी, मीठे, लाड़ले बच्चे है…
… ऐसे समझदार हो, एकान्त में याद, राजयोग द्वारा पावन, सतोप्रधान बन मुक्ति में बाबा पास जाते… फिर सर्वगुण सम्पन्न देवता, डबल सिरताज लक्ष्मी-नारायण 🫅🏻👸🏻 मालिक बनने का ऊंच पद 🏆 पाते…
… उस नई दुनिया की बादशाही के वर्से में; जहां बहुत सुखी, धनवान, शान्ति में रहते… सतोप्रधान शरीर की आयु बड़ी अर्थात् आयुश्वान भव का अमर वरदान मिला हुआ है (गर्भ महल से बाहर आना भी जैसे बीजली चमकती!)… एक धर्म, राज्य, भाषा!
यह सारा ज्ञान हमारी बुद्धि में धारण रहता; जिससे चक्रवर्ती राजा बनते… और औरों को भी समझा सकते, बन्धनमुक्त बन… बाबा को अपना गुप्त, पूरा वारिस बनाते; बाबा हमारा सबकुछ आपका, आपका सब हमारा (अर्थात् हम भी वारिस!); कितना अच्छा सौदा 🤝🏻 है!
हम सर्व खज़ानों से सम्पन्न श्रेष्ठ आत्माएं 🕯️, दाता के बच्चे मास्टर दाता, अखण्ड महादानी; एक सेकण्ड भी दान दिये बिना नहीं रहते; इसलिए राजा बनते… साक्षी हो हर खेल देखते 👁️; जो हो रहा अच्छा, जो होने वाला और अच्छा; मज़े से, मायाजीत हो… हम सहनशील आत्मा; व्यर्थ भाव, स्वभाव से परे है!
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Murli Yog 27.9.24
मीठी शान्ति, दिव्य सुख वा खुशी की चमत्कारी ताकत के वन्डरफुल मालिक 👑 बनना; यही है स्नेह ❤, प्यार का सबूत; साथ-साथ स्वमान में स्थित रह सर्व को सम्मान देने वाले माननीय बनना; श्रेष्ठ कार्यों के जिम्मेवार बन मन्दुरूस्त रहना… Murli Yog 27.9.24!
हमें सम्मुख गर्म-गर्म हलुआ 😋 मिलता… अर्थात् मीठे-मीठे, रूहानी बच्चें कह वह रूहानी, सुप्रीम, बेहद बाप हम आत्माओं 🪔 को राजयोग 🧘♀️ की शिक्षा पढ़ाते… ओम् शान्ति अर्थात् हम आत्मा-स्टार्स ऊपर शान्ति, निराकारी, ब्रह्म तत्व में थी; इस कर्मक्षेत्र पर शरीर ले कर्म करती…
… हम आत्माएं 🕯️ ही पहले ईश्वरीय राज्य, वैकुण्ठ, सुखधाम में लक्ष्मी-नारायण 🫅🏻👸🏻 मालिक के ऊंच पद 🏆 वाले देवता थे; ईश्वरीय वन्डर ऑफ वर्ल्ड पैराड़ाइज के वर्से में deitism… आत्मा में ही राज्य करने की ताकत 💪🏻 है!
याद में रहने वाले है पुण्य आत्मा, सतोप्रधान; पवित्र, चमत्कारी; महारथी पहलवान 🤼♂️, विजयी 🇲🇰 (क्योंकि बाबा है पतित-पावन, सर्वशक्तिमान, वर्ल्ड ऑलमाइटी अथॉरिटी!)… तो दिल अन्दर कितनी खुशी होनी चाहिए; हम हेवन स्थापन कर रहे…
… पढ़ाई भी सहज है; बिगर खर्चे मम्मा कैसी नम्बरवन, होशियार 🧠, राजयोगिन बन गयी… परन्तु खबरदार, अक्लमंद भी रहना है; भाई-बहन सो भाई-भाई बनना है (फिर वहां ऊपर भी भाई-आत्माओं से मिलेंगे!)…
… यह न्यारा ज्ञान है… इस ड्रामा 🎭 में एक सेकण्ड न मिले दूसरे से… आबू सर्वोत्तम, श्रेष्ठ, बड़ा तीर्थ है जहां से सर्व की सद्गति होती; अन्त में महिमा होंगी (अहो शिवबाबा ✨ तेरी लीला!)
हम सदा स्वमान में स्थित 🎯 रह… सर्व को सम्मान देने वाले… माननीय है!
हद की इच्छाओं से परे रह… सभी श्रेष्ठ सेवा के कार्यों में, ब्राह्मण आत्माओं की उन्नति, आदि में जिम्मेवार बनने से… प्रत्यक्षफल सदा मन्दुरूस्त, खुश, मन्मनाभव रहते!
हम स्नेही वा ज्ञानी आत्माओं के प्यार का सबूत है… सबकुछ न्योछावर, कुर्बान करना… (व्यर्थ संकल्प 💭, गुण-विशेषता का अभिमान, आदि सर्व मूल कमजोरियां!)
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Murli Yog 26.9.24
मीठे, लाड़ले, प्रिय बन एक से प्रीत, संग, पास रह कल्याणकारी 💫 खुशी, सुख, शान्ति के मालिक बनना; ऐसे रूहानी वायब्रेशन द्वारा शक्तिशाली वायुमण्डल 🌬️ बनाना अर्थात् देने से स्वतः सम्पन्न 🪙 बनना; यह है ज्ञान-घृत द्वारा सदाकाल के लिए आत्म-दीप 🪔 जगाना वा स्नेह ❤ का रिटर्न देना… Murli Yog 26.9.24!
जबकि हमें मीठा बाबा मिला है… हम लाड़ले बच्चे उनके पास आये हैं… उसके अति प्रिय ईश्वरीय सन्तान बने हैं (और इसी ईश्वरीय संग में रहते!)… तो ईश्वर से पूरा वर्सा लेने…
… सदा ईश्वरीय मत, राय पर उठते, बैठते, चलते, फिरते 🚶 याद द्वारा पावन, सतोप्रधान बनना; अर्थात् आत्म-दीप जगाने का कल्याण कर, सद्गति पानी है; सदा खुश, सुधरा हुआ क्रोध-जीत बनना है…
… तो सुखधाम की बादशाही, राज्य के मालिक लक्ष्मी-नारायण 🫅🏻👸🏻 बनने का ऊंच ते ऊंच पद 🏆 प्राप्त करते… जहां सब सतोप्रधान अर्थात् आत्म-ज्योति जगी हुई है; 21 जन्मों के लिए ज्ञान-घृत भरपूर!
तो इस वन्डरफुल 👌🏻 ज्ञान द्वारा सबको पावन बनाए, सच्ची खुशी दिलानी है; यह बाबा को मदद देनी है… रूहानी बाप, टीचर, सतगुरू की रूहानी 💐 पढ़ाई, विद्या द्वारा जन्म-जन्मांतर कल्प-कल्पान्तर का फायदा है… तो खबरदारी से चलना; यह होलीएस्ट ऑफ होली स्थान है!
ऐसे हम रूहानी वायब्रेशन्स द्वारा शक्तिशाली वायुमण्डल बनाने वाले; सबसे श्रेष्ठ सेवाधारी है… सर्व की शुभ इच्छाएं पूर्ण करने वाली मूर्ति बनने का दृढ़ संकल्प 💭 करने से; अर्थात् देने से स्वयं स्वतः सम्पन्न बन जाते!
बाबा का हमसे इतना स्नेह है कि कमी देख नहीं सकते; हमारी गलती भी अपनी समझते; हमें सम्पन्न, सम्पूर्ण 💯🔋, समान देखना चाहते… तो इस स्नेह का रिटर्न; स्वयं को टर्न करना अर्थात् सिर्फ रावण का शीश उतार देना है!
Thanks
”
Murli Yog 25.9.24
मीठी प्रीत, प्यार ❤ द्वारा अविनाशी खुशी, उत्साह, नशे की परम अनुभूति के दैवी, डबल सिरताज मालिक बनने की ईश्वरीय लॉटरी; शुद्ध, शक्तिशाली संकल्पों 💭 द्वारा सबको सेफ्टी की छत्रछाया ☂️ में रखना; डायरेक्ट परमात्म पालना, पढ़ाई, श्रीमत का सर्वश्रेष्ठ भाग्य अनुभव करना… Murli Yog 25.9.24!
पूरा ज्ञान, वा ओम् शान्ति अर्थात्… इस शरीर लेकर चलाने वाली मैं छोटी, मीठी, अविनाशी आत्मा सुन रही… और निराकार, आत्माओं 🪔 के बाप, परमात्मा हमें पढ़ाते!
ऐसे; उस एक प्यार के सागर 🌊, ब्राइडग्रुम से ही प्रीत द्वारा… प्योर, पवित्र ✨, सतोप्रधान, सुन्दर, गोरा बनते… क्योंकि वह पतित-पावन, सर्वशक्तिमान ✊🏻 अथॉरिटी है (तो हमारा योग, अग्नि का रूप लेता!)
वह प्योरिटी में भी फुल; सुख, शान्ति का सागर है… तो उनकी यथार्थ याद द्वारा सदा खुशी, उल्लास, नशे में रहते!
तो वह ज्ञान-सूर्य 🌞, सद्गति दाता… इस संगम पर निरहंकारी सरवेन्ट बन… हमें राजयोग की नित्य-नई बातें सुनाकर पारस-बुद्धि बनाए…
… उस नये, पावन, सुखधाम, पैराड़ाइज के राज्य के वर्से का मालिक; पूज्य देवता अथवा डबल सिरताज, गॉड-गॉडेज़, लक्ष्मी-नारायण 🫅🏻👸🏻 बनाते (जहां धन 💰, दौलत सब नया है!)…
… तो ऐसी ईश्वरीय लॉटरी, बेहद स्कॉलरशिप में रेस कर ऊंच पद 🏆 पाना चाहिए… दिव्यगुण धारण कर राजा बन… साथ में सर्विस द्वारा पावन बनाए नये ब्राह्मणों को भी तैयार करना है!
डायरेक्ट भगवान द्वारा… पालना, पढ़ाई और श्रेष्ठ जीवन की श्रीमत प्राप्त करने वाले… हम सबसे श्रेष्ठ भाग्यवान है!
शक्तिशाली आत्मा अर्थात् दृढ़ता के शुद्ध, शक्तिशाली संकल्प द्वारा… कमाल की सफलता प्राप्त करने वाले… तो शुद्ध संकल्पों के घेराव द्वारा सबको सेफ्टी का साधन; छत्रछाया, किले की अनुभूति कराते!
सर्व आत्माओं को प्राप्ति कराने का सोचने से स्वयं स्वतः सम्पन्न 🪙 बन जाते!
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Murli Yog 24.9.24
सबसे प्यारे ❤️ के समीप रहने का विशेष, हीरे 💎 समान, हीरो पार्ट बजाते जीवनमुक्त सुखों के दैवी स्वराज्य 👑 की कमाई जमा करना; ईश्वरीय बुद्धि, अच्छे पुरूषार्थी अर्थात् सिर्फ हिम्मत 💪🏻 का पहला कदम उठाने से बाबा की सम्पूर्ण मदद प्राप्त करना… Murli 💌 Yog 24.9.24!
जबकि बाबा सबसे प्यारी चीज़ है… हमारी उनसे अलौकिक सगाई है… उनका परिचय मिला है… वह कहते भी हैं मामेकम् याद करो…
… तो बाबा पढ़ाने आये, उससे 15 मिनट पहले ही आकर… उस रूहानी, आत्माओं 🪔 के, कल्याणकारी 💫 बाबा की याद में बैठना है… जिससे बाबा के समीप, नजदीक, पास मुक्ति में जाते…
… फिर नये सुखधाम, स्वर्ग की राजधानी, बादशाही के वर्से में फुल पूज्य देवता; नारायण, श्रीकृष्ण-समान बनते… तो ऐसी वन्डरफुल कमाई लिए अपना याद का समय नोट करना; अर्थात् सच्चा-सच्चा चार्ट 📝 लिखने में ही फायदा, कल्याण है!
हम ब्राह्मण ही निमित्त है ज्ञान का रास्ता देने (इसलिए देवियों की पूजा 🙏🏻 होती!)… ईश्वरीय सेवा से हमारी कमाई जमा हो; साल्वेन्ट, पद्मापद्म-पति बनते… परन्तु जब उस समर्थ, वर्ल्ड ऑलमाइटी अथॉरिटी की याद में करते (जो अभी सम्मुख, डायरेक्ट है; भल फिर ब्राह्मण ही शिवबाबा के खज़ाने, भण्डारे से पलते!)
इस पुरूषोत्तम संगमयुग पर हमें डायरेक्ट श्रीमत द्वारा ईश्वरीय बुद्धि मिली है; जो आत्मा समझ, पवित्र बन, दिव्यगुण धारण करते… बाबा भक्ति की हर बात पीछे की प्रैक्टिकल एक्टिविटी; अर्थात् वन्डरफुल बातें सुनाते (रूद्र, सालिग्राम; महालक्ष्मी, दुर्गा, आदि) … अभी वह अव्यक्त हमारे साथ है!
इस संगमयुग, स्मृति 💭 के युग में हम स्मृति-स्वरूप रह हीरो पार्ट बजाने वाले विशेष, हीरे-समान आत्माएं है… तो सदा यह दिल का गीत बजता रहे ‘वाह मेरा श्रेष्ठ भाग्य’… तो सदा अपना अविनाशी ऑक्युपेशन ‘मैं श्रेष्ठ आत्मा हूँ’ याद रहे, तब कहेंगे विशेष आत्मा!
हर बात में सिर्फ हिम्मत 💪🏻 का पहला कदम उठाने से, हम बाबा की सम्पूर्ण 💯 मदद के पात्र हैं… सिर्फ अच्छा पुरूषार्थ ✊🏻 करना है (इच्छा नहीं रखनी है), तब प्रालब्ध जमा होती! ✅
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Murli Yog 23.9.24
सुप्रीम साथ 😇 की अलौकिक, अविनाशी खुशियां, नशे में निश्चिंत बन अच्छे, नम्बरवन, दैवी, सम्पूर्ण फूल 🌺 बनना; उदारता, विशालदिल से एकता की नींव बनने की ताकत 💪🏻… Murli Yog 23.9.24!
हम कोटों में कोई, विरले बच्चे… उस सुप्रीम, निराकार, रूहानी अर्थात् आत्माओं 🪔 के, परमपिता शिवबाबा के पास आये हैं… जो दिव्य, अलौकिक रीति 👌🏻 रथ में प्रवेश कर; टीचर बन हमें युक्ति, ज्ञान की चाबी दे…
… उस नये, गोल्डन एजेड़, स्वर्गिक… विश्व की बादशाही, राज्य के वर्से के मालिक… लॉर्ड कृष्णा, नारायण बनाते (कुबेर के खज़ानों 🪙 से सम्पन्न!)…
… तो कितनी खुशी होनी चाहिए… उस साथ खाने, पीने, खेलने वाले खुदा दोस्त, ज्ञान सूर्य ☀ को मामेकम् याद करना चाहिए… दिन-रात अन्दर बाबा-बाबा चलता रहे!
हम आत्म-सितारे… ऊपर परमधाम 🌅, ब्रह्म, निराकारी झाड़ से… यहां आयी है पार्ट बजाने इस अनादि ड्रामा 🎭 में; अब फिर शरीर छोड़ जाना है!
एडाप्टेड़ ब्राह्मण बनने से ही फिर पूज्य, पवित्र देवता बनते… बाबा हमें बड़े अच्छे सर्विसएबुल, नम्बरवन ऑनेस्ट, अपने को ही देख फास्ट आगे बढ़ता फूल 🌸 देखना चाहते; सम्पूर्ण 💯, ताकतवर, नशे में… तो बाबा रोज़ हमें नई-नई, वन्डरफुल बातें सुनाते!
बच्चा बनना अर्थात् सहज, अविनाशी अधिकार प्राप्त करना (निश्चित!)… तो “वाह मैं श्रेष्ठ अधिकारी ✊🏻 आत्मा”; इस बेहद खुशी, नशे से निश्चिंत रहते… (बाबा को सर्व जिम्मेवारियों का बोझ दे, चिंता-मुक्त!)
हम उदार, विशालदिल वाले एकता की नींव है… मान की इच्छा सेवा में विघ्न-रूप बनाती; तो क्यों नहीं स्वमान 👑 में ही टीके, जिससे मान परछाई समान पीछे-पीछे आये
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