*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 09-02-2021*
1. अपनी तपस्या द्वारा _____ के वायब्रेशन फैलाना ही विश्व सेवाधारी बनना है।
° _शान्ति_
2. त्याग अर्थात् मन्सा _______ से भी त्याग, _______ स्वरूप से त्यागी। तपस्वी अर्थात् सदा बाप की लगन में _______ , ज्ञान, प्रेम, आनंद, सुख, शान्ति के सागर में _______ हुए। ऐसे त्यागी, तपस्वी ही सेवा में सफलता प्राप्त करने वाले सच्चे _______ हैं।
° _संकल्प_, _ज्ञान_, _लवलीन_, _समाये_, _सेवाधारी_
3. तुम कैसे विश्व के मालिक बनते हो। वहाँ तुम्हारे पास अथाह, अनगिनत _______ रहता। सोने की _______ के मकान बनते।फिर उसमें भी हीरे-जवाहरों की _______ करते। किसको पता नहीं – लक्ष्मी-नारायण ने _______ कैसे पाया? सतयुग में भारत ही था, उनमें देवी-देवताओं, गॉड गॉडेज का राज्य, _______ -राज्य था। जरूर इस समय ऐसे _______ करते होंगे। फिर पुनर्जन्म लिया, चक्र फिरता रहता, हिस्ट्री मस्ट रिपीट।
° _धन_, _ईटों_, _जड़ित_, _राज्य_, _राम_, _कर्म_
4. “मीठे बच्चे – तुम अभी _______ -लोक _______ -पुरी स्थापन करने के निमित्त हो, जहाँ कोई भी दु:ख वा पाप नहीं होगा, वह है ही _______ वर्ल्ड”। वहाँ मनुष्यों की आयु एवरेज _______ वर्ष होती है।
° _अमर_, _विष्णु_, _वाइसलेस_, _125-150_
5. बाबा आने से ही पढ़ाई शुरू करते, इसलिए शिवजयन्ती सो _______ जयन्ती। गीता जयन्ती सो श्री- _______ जयन्ती। कृष्णपुरी _______ को कहते, 21 जन्मों लिए तुमको वर्सा देते। उनके बीच में होती _______ क्योंकि पवित्रता चाहिए। पुरानी दुनिया का _______ (दशहरा) भी चाहिए। इसके पहले बाप को याद कर सतोप्रधान बन जाए, बाप नई दुनिया स्थापन करने लिए तुमको _______ कर रहे।
° _गीता_, _कृष्ण_, _सतयुग_, _राखी_, _विनाश_, _तैयार_
6. कहाँ भी रहो, पढ़ते रहो, _______ तो विलायत में भी जा सकती। बाबा रोज़ सावधानी देते, बच्चे बाप को _______ करो इससे तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। आत्मा में जो _______ पड़ी है वह निकल जायेगी। आत्मा 100 परसेन्ट _______ बननी है। हम _______ कला से सुखधाम में जायेंगे। यह लक्ष्मी-नारायण विश्व के _______ , महाराजा-महारानी थे।
° _मुरली_, _याद_, _खाद_, _प्योर_, _चढ़ती_, _मालिक_
7. यह घर भी है, युनिवर्सिटी भी है, _______ भी है। तुम्हारी _______ है नई दुनिया अमरलोक लिए, ऐसा कोई कॉलेज नहीं होगा। वह बाप भी है, पतित-पावन भी है, पढ़ाते भी हैं। तो यह गॉड फादरली _______ है। जल्दी-जल्दी पढ़कर _______ होना है। अशुद्ध खान-पान _______ कर देना है।
° _इन्स्टीट्युशन_, _पढ़ाई_, _युनिवर्सिटी_, _होशियार_, _त्याग_
8. वह है _______ -बाबा। _______ हैं सालिग्राम। आत्मा कहती है हमारा _______। आत्मा है _______ , शरीर है विनाशी।अभी तुम अपने को _______ समझते हो।
° _शिव_, _आत्मायें_, _शरीर_, _अविनाशी_, _आत्मा_
9. हमारा बाबा शिव है, वह है _______ फादर-टीचर-गुरू। बुलाते हैं – ओ _______ फादर, भगवान, ईश्वर। दु:ख से हमको लिबरेट कर शान्तिधाम ले जाओ, _______ -पावन। बेहद की हिस्ट्री-जॉग्राफी सुनाते इसलिए सुप्रीम _______ भी हुआ। बेहद का बाप बेहद का _______ देते बच्चों को। फिर बाबा सद्गति का रास्ता बताते, अब पावन बनना है, सतगुरू। यह _______ का बाप, टीचर, गुरू एक ही है।
° _सुप्रीम_, _गॉड_, _पतित_, _टीचर_, _वर्सा_, _बेहद_
10. भगवानुवाच – पतित-पावन _______ का सागर भगवान को कहा जाता है। वही _______ हर्ता सुख कर्ता है, जब हम बाप के _______ हैं तो जरूर हम सुख में होने चाहिए। _______ दुनिया है सुखधाम। बाप है ही लिबरेटर, _______ -दिल, ब्लिसफुल, आकर सबको मुक्ति-जीवनमुक्ति देते। गाते भी हैं पतित-पावन आओ, आकर हमको _______ बनाओ।
° _ज्ञान_, _दु:ख_, _बच्चे_, _नई_, _रहम_, _पावन_
11. यह दादा, वह डाडा (ग्रैन्ड-फादर) वर्सा _______ का मिलता है। शिवबाबा को अपना _______ नहीं, वह है निराकार गॉड फादर। डाडे की मिलकियत मिलेगी तो बाप द्वारा ना, शिवबाबा से भी _______ द्वारा तुम मनुष्य से _______ बन रहे। अल्फ को याद करो तो बे _______ तुम्हारी। मुझे याद करो तो _______ मिले।
° _डाडे_, _शरीर_, _ब्रह्मा_, _देवता_, _बादशाही_, _सुख_
12. उन्हों की यह माला है जो विश्व को नर्क से _______ , पतित से पावन बनाते। जो _______ करके जाते, उन्हों की ही याद रहती। अब बच्चों को पुरानी दुनिया भूल स्वीट होम स्वर्ग की बादशाही को _______ करना है। जैसे नया _______ बनाते तो फिर बुद्धि में वही याद रहता। अब भी नई _______ की स्थापना हो रही है। बाप है सर्व का सद्गति दाता, आत्मा _______ बनेगी, बाप की याद से।
° _स्वर्ग_, _सर्विस_, _याद_, _घर_, _दुनिया_, _पवित्र_
13. *गॉडली फैमिली प्लानिंग* का वन्डरफुल प्लैन कौन सा है?
° *एक सत धर्म स्थापन* कर अनेक धर्मों का विनाश करना। (मनुष्य बर्थ कन्ट्रोल करने के प्लैन्स बनाते, बाप कहते उनके प्लैन्स चल न सकें। मैं ही नई दुनिया की स्थापना करता हूँ तो बाकी सब आत्मायें ऊपर *घर* में चली जाती हैं। बहुत *थोड़ी आत्मायें ही रहती* हैं।)
