Sakar Murli Churnings 03-01-2019

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Sakar Murli Churnings 03-01-2019

बाप और वर्से को याद करना है सेकेण्ड की बात, जिससे खुशियों से भरपूर बन जाते हैं!

लेकिन माया (अर्थात पुराने संस्कार) याद करने नहीं देते… इसलिए अशरीरी बनने और बाबा को याद करने का अभ्यास करना है… तो हम बहुत मीठे और रॉयल बन जाएँगे, और सुख के टाॅवर स्वर्ग में पहुच जाएँगे!

तो जितना ऎसे बुद्धी को गोल्डन एज बनाकर धारणा केरेंग और कराएंगे, श्रीमत पर चलेंंगे, बाबा को याद कर पवित्र बनेंगे… तो आने वाले समय को भी सहज पार करेंगे, और स्वर्ग में भी बहुत ऊंच पद पाएंगे!

सार

तो चलिए आज सारा दिन… अल्फ और बे (बाप और वर्से) को याद कर बेअंत खुशी में रहे… और सब के साथ इस खुशी को बांटते रहे, विश्व को स्वर्ग बनाते चले… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | मैं फरिश्ता हूँ | I’m an Angel

योग कमेंटरी | मैं फरिश्ता हूँ | I’m an Angel

मैं बहुत हल्का हूँ… सब बोझ बाप को दे दिए हैं… मैं निश्चिंत हूँ

मैं डबल लाइट हूँ… आत्मा भी लाइट, शरीर भी लाइट… हल्का और प्रकाशमय

मैं लाइट रूपधारी हूँ… प्रकाशमय काया… जिसके चारों ओर लाइट ही लाइट फैल रही है… पारदर्शी हूँ… मुझे कोई छू भी नहीं सकता

मैं फरिश्ता हूँ… फ़र्श से कोई रिश्ता नहीं… सर्व रिश्ता एक बाप से

मैं बाप समान हूँ… कदम-कदम पर फॉलो फादर करने वाली आत्मा हूँ

मैं सबको देने अया हूँ… शुभ भावना, दुआएं, आशीर्वाद, आदि

मैं कर्मातीत बन्धनमुक्त हूँ… कोई भी रस्सीयां मुझे खींच नहीं सकती

मैं अव्यक्त हूँ… व्यक्त भान से परे… व्यक्तियों से भी परे

मैं सूक्ष्मवतन वासी हूँ… यहाँ अवतरीत हुआ हूँ… नयी सतयुगी सृष्टि की स्थापना करने… ओम् शान्ति!


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Sakar Murli Churnings 02-01-2019

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Sakar Murli Churnings 02-01-2019

भगवान हमारा बाप है… तो उनसे डरना नहीं है, लेकिन सदा साथ रहकार सर्व प्राप्ति स्वरूप बनना है!

पुरुषोत्तम युग में पुरुषोत्तम बनने का पूरा-पूरा पुरुषार्थ करना है… बाबा से अविनाशी ज्ञान रत्नों का व्यापार कर, 21 जन्मों के लिए मालामाल बनना और बनाना है!

एक सत बाप के संग में रहना है, जिससे न सिर्फ वर्तमान लेकिन भविष्य भी सुख-शान्ति सम्पन्न बन जाता है… जबकि बाप गुप्त वेश में हमें पढ़ाकर अपने से भी ऊंचा बनाते हैं!

पुराने संस्कारों वा हिसाब-किताब का बोज़ा सिर पर है, इसलिए योग अग्नि से उनको चूकतु करते रहना है… साथ में भविष्य (और वर्तमान!) प्रालब्ध बनाने पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना है, मुरली एक दिन भी miss नहीं करनी है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा के सदा साथ रहे, अर्थात उनसे ज्ञान रत्नों का व्यापार कर अपना और सर्व का कल्याण करे, और योग में रहकार पुुराने-पन के भार से हल्का बने… इस ज्ञान योग के अभ्यास से हमारे दैवी संस्कार emerge हो जाएंगे, और हम फिर सेेेे इस विश्व को स्वर्ग बनाने के निमित्त बन जाएंगे… ओम् शान्ति!

Welcoming the New Age | नव युग की बधाई हो | Avyakt Murli Churnings 31-12-2018

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Welcoming the New Age | नव युग की बधाई हो | Avyakt Murli Churnings 31-12-2018

नव युग की मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो!

जैसे नये वर्ष की स्मृति, आनंद और इन्तज़ार है… वैसे ही मन और नैनों में नव युग की भी बहुत बहुत खुशी रखनी है, कि बाबा हमें कितनी नई बातें दे रहे हैं:

  • नया युग (जो अब आया की आया)
  • नया राज्य
  • नया जीवन
  • नया चमकीला दैवी ड्रेस (शरीर)
  • नया मन, धन वा सम्बन्ध
  • नयी सीन-सीनरीयां
  • नये सर्व प्राप्तियों के भण्डार

पुरानी बातों को विदाई

बाबा चाहते हैं, कि हम दृढ़तापूर्वक हिम्मतवान बनकर सभी पुराने-पन को विदाई दे:

  • पुराने स्वभाव
  • पुराने संस्कार
  • पुरानी चलन
  • माया
  • पुराने व्यर्थ संकल्प, कमझोरी के संकल्प

इसके लिए सिर्फ हिम्मत का एक कदम उठाना है, तो बाबा की हज़ार (वा पदम) गुणा मदद के अधिकारी हो… किसी भी हालत में हिम्मत नहीं छोड़नी है… माया हिल जाए, लेकिन हमारा हिम्मत का पांव न हीले!

नव वर्ष में क्या नवीनता लानी है?

  • हमारा occupation है विश्व कल्याणकारी वा विश्व परिवर्तक बनना… इसलिए परोपकारी, रहमदिल बनकर शुभ भावना वा दुआओं का दान देकर… स्व के, परिवार के और विश्व के कल्याणकारी बनना है
  • सेवा में जैसे लक्ष्य रखते कि बाप को प्रत्यक्ष करना है… वैसे पहले स्वयं को प्रत्यक्ष करना है… शिव शक्ति, पाण्डव वा विजयी रूप में
  • बाप समान जरूर बनना है
  • कारण वा समस्या शब्द सदा के लिए समाप्त करने है… चाहे स्व से, परिवार से, वा संगठन के संबंधित हो… निवारण करना है, समाधान स्वरूप बनना है
  • बीच-बीच में मालिक बन मन-बुद्धि को श्रेष्ठ स्थितियों में एकाग्र करने की ड्रिल जरूर करनी है

अन्य पॉइन्ट्‍स

  • सदा OK रहने वालो पर बाबा स्नेह भरी दुआओं की वर्षा करते है… और वाह बच्चे वाह के गीत गाते हैं
  • मेरा बाबा कहा, और अधिकारी बन गए… श्रीमत पर चलने के अधिकारी, और सर्व प्राप्तियों के अधिकारी
  • की हुई सेवा के लिए बाबा मुबारक दे रहे है
  • दिल्ली का स्थापना के कार्य में महत्वपूर्ण पार्ट है… इसलिए number 1 (वा गोल्डन कप) लेना है
  • डबल विदेशीयों ने सेवा में वृद्धि अच्छी की… अभी डबल तीव्र पुरुषार्थी बनने का गोल्डेन कप लेना है

बाबा का याद-प्यार

चारों ओर के स्नेही, सहयोगी, श्रेष्ठ… स्व की प्रत्यक्षता द्वारा बाप को प्रत्यक्ष करने वाले विश्व कल्याणकारी बच्चो को बापदादा की बहुत बहुत दुआएं स्वीकार हो… और नमस्ते!

सार

तो चलिए इस सारे वर्ष… अपने श्रेष्ठ नये युग को बार-बार नैनों के सामने लाते बहुत बहुत खुशी में रहे… जिससे सहज ही हम पुराना-पन से मुक्त हो… फिर से अपने कल्प पहले वाले श्रेष्ठ स्वरूप को धारण कर, स्वयं की प्रत्यक्षता द्वारा बाप को प्रत्यक्ष करें… जिससे सहज ही स्वर्ग की स्थापना सम्पन्न हो जाएगी… ओम् शान्ति!

The Magic of God’s love | भगवान के प्यार में लवलीन | Sakar Murli Churnings 31-12-2018

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The Magic of God’s love | भगवान के प्यार में लवलीन | Sakar Murli Churnings 31-12-2018

1. हम अपने को आत्मा समझ (अर्थात देही अभिमानी बन) बाप को याद करते हैं… तो हम हो गए रूहानी आशिक, एक माशूक बाप से सच्ची मुहब्बत रखने वाले… इसके फल स्वरूप, बाबा हमें:

  • अपने साथ स्वीट होम (शान्तिधाम) में ले चलेंगे
  • सभी पापों से मुक्त कर देंगे
  • फिर स्वर्ग (कृष्णपुरी, वैकुण्ठ) में भेज देंगे

2. बहुत खुशी में रहने के लिए:

  • अपने से मीठी-मीठी बातें करनी है
  • ज्ञान का चिन्तन करना है
  • स्वदर्शन चक्रधारी बनना है
  • आपस में ज्ञान की ही बातें करनी है

3. याद करने के लिए हमारे पास बहुत समय है:

  • कर्म करते
  • खाना पकाते, खाते, पीते
  • ट्रेन में सफर करते
  • जब दफ्तर में थोडी फुर्सत मिले
  • आदि

4. जो प्राप्तियां हमें हुई, वह सभी मित्र-संबंधियों को भी करानी है… लाइट हाउस बन सबको राह दिखानी है… एक आंख में मुक्ति. दूसरी आँख में जीवनमुक्ति, दुःखधाम से मुक्त!

सार

तो चलिए आज सारा दिन…मन वचन कर्म से ज्ञान सागर के ज्ञान में ही बहुत प्यार से रमण करते रहे… तो हमारी स्थिति स्वतः बहुत श्रेष्ठ, शान्त वा खुश रहती… और सबको भी आगे बढ़ाते रहेंगे… जिससे सहज ही यह संसार स्वर्ग बन जाएगा… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | मैं निमित्त आत्मा हूँ | I’m an instrument soul

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योग कमेंटरी | मैं निमित्त आत्मा हूँ | I’m an instrument soul

करन-करावनहार बाबा है… मैं सिर्फ निमित्त हूँ

सदा हल्की हूँ… सभी बोझ बाबा को दे दिए हैं… वही मुझे चला रहा है

यह विशेषताएं सभी बाबा की देन है… और बाबा का ही ज्ञान सुनाते हैं… बाबा के बच्चों को

मेरा जीवन सफल हो रहा है… मैं बहुत भाग्यशाली हूँ… स्वयं भगवान ने मुझे चुना है, निमित्त बनाया है

बाबा ने मुझे मान दिया है… मुझे किसी से मान की अपेक्षा नहीं… सबको सम्मान देना है

मुझे सदा निर्मान रहना है… निर्मल वाणी रखनी है… चेहरे और चलन द्वारा सबकी सेवा करनी है… बाबा की आशाओं को पूर्ण करना है

मैं बाबा की हूँ… बाबा को अर्पित, समर्पित… ओम् शान्ति!

गीत: झलक तुम्हारी ओ प्यारे भगवंत…


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Experiencing the flying stage | उड़ती कला में रहने की सहज विधि | Avyakt Murli Churnings 30-12-2018

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Experiencing the flying stage | उड़ती कला में रहने की सहज विधि | Avyakt Murli Churnings 30-12-2018

बिन्दु का महत्व

  • बिन्दु को समझना बहुत सहज है… बच्चा, बीमार, अनपढ़, कमझोर सब समझ सकते
  • बिन्दु का हिसाब… 10 से 100, 100 से 1000 बन जाता
  • बिन्दु के महत्व को समझने से महान बनते… बिन्दु बनना, बिन्दु बन बिन्दु वाप को याद करना, बिन्दु से मिलन मनाना

सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण जीवन!

  • संगमयुग है मिलन मनाने का युग… और मिलन द्वारा उड़ती कला में रहना (अर्थात कर्मों के बन्धन से न्यारा, कर्मातीत)… क्योंकि करन-करावनहार बाप है, हम निमित्त और साक्षी है
  • मेरापन ही मोह का बन्धन है… इसलिए देह बाप को सौपना है, सर्व सम्बन्ध बाप से जोड़ने है
  • तो सबके आशीर्वाद (अर्थात शुभ भावना, शुभ कामना) से उड़ते रहेंगे… बापदादा का आशीर्वाद (वा वरदान) ही हमारे ब्राह्मण जीवन का आधार है

विदेही वा कर्मतीत स्थिति का सहज अनुभव

विदेही वा कर्मातीत अर्थात:

  • मेरेपन वा स्वार्थ भाव से मुक्त, इच्छा मात्रम् अविद्या… कर्म के बन्धन से भी न्यारा
  • पुराने हिसाब-किताब, वर्तमान के स्वभाव-संस्कार, बाहर की परिस्थिति‍यां, देह की व्याधि सब के प्रभाव से परे

विदेही स्थिति का सहज अनुभव

  • कर्म करने के लिए देह मै, और कर्म समाप्त होते ही देह से न्यारे… इसी अभ्यास को बार-बार करना है!

अन्य पॉइन्ट्‍स

  • मधुबन घर में आराम भी मिलता, राम भी मिलता… हम बाबा के इस घर के श्रृंगार है!
  • अभी सिर्फ क्लास कराना नहीं, लेकिन स्वयं हल्के रह सर्व को हल्का करना है!… हल्के रहनेे से ही ऊँची स्थिति रहती, आनंद और मौज में रहते!

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा को सब कुछ सौप सदा उसके साथ रहे… जिससे सहज ही हम उड़ती कला (अर्थात हल्कापन वा शान्ति प्रेम आनंद के निरन्तर अनुभव) द्वारा अपने सम्पूर्णता की मंज़िल तक जल्दी पहुंच जाएंगे… ओम् शान्ति!

Becoming Divine | Sakar Murli Churnings 29-12-2018

Becoming Divine | Sakar Murli Churnings 29-12-2018

  • पिछले पापों से मुक्त होने लिए, मुख्य है बाबा से योग लगाने की यात्रा… और बाबा से ज्ञान सुनकर, धारण कर, सबको सुनाना है… तो भगवान् भगवाती बन जाएँगे, विजय माला का मणका बन जाएंगे!
  • मनुष्य से देवता (अर्थात गुणवान) बनना ही जीवन बनाना है… तो पूरा पास होने की शुभ कामना वा लक्ष्य रखना है… फिर कल्प कल्प हमारा श्रेष्ठ पद बन जाएगा!… यही उचित है जबकि ऊंच ते ऊंच परमपिता परमात्मा, नॉलेेजफूल, पतित पावन भगवान हमें पढ़ाते हैं!
  • बहुत बहुत खुशी में रहना है… बाबा हमें स्वर्ग का मालिक बनाते, जहां बहुत बड़े महल, जमीन, संपत्ति, आदि रहती!

सार

तो चलिए आज सारा दिन… याद और सेवा में अपना हर सेकंड सफल करे… और बहुत खुशी में रहे, और सबको खुशी बांटते रहे… ओम् शान्ति!

आत्मा और शरीर के 55 सम्बन्ध | 55 Differences between Body and Soul

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आत्मा और शरीर के 55 सम्बन्ध | 55 Differences between Body and Soul

आत्म अभिमानी (soul conscious) बनने के लिए आत्मा और शरीर का सम्बन्ध (वा अन्तर) अच्छे से समझना बहुत आवश्यक है… तो आज 55 पॉइन्ट्‍स आत्मा और शरीर के अन्तर पर देखते हैं!

आत्मा और शरीर का मुख्य अन्तर

  • मैं आत्मा हूँ, यह मेरा शरीर है
  • मैं रूहानी हूँ, शरीर जिस्मानी है
  • मैं एक हूँ, शरीर अनेक लिए हैं
  • मैं ऊपर से आई हूँ, शरीर यहाँ बना है
  • मैं सूक्ष्म हूँ, शरीर स्थूल है
  • मैं चैतन्य हूँ, शरीर जड़ है
  • मैं निराकार हूँ, शरीर साकार है
  • मैं बिन्दी हूँ, शरीर बड़ा है
  • मैं हल्की हूँ, शरीर का वज़न है
  • मैं ऊर्जा हूँ, शरीर 5 तत्वों से बना है
  • मैं शक्ति (पुरुष) हूँ, शरीर प्रकृति है
  • मैं अजर हूँ, शरीर बूढ़ा होता है
  • मैं अमर हूँ, शरीर की मृत्यु होती है
  • मैं अविनाशी हूँ, शरीर विनाशी है
  • मैं शाश्वत (permanent) हूँ, शरीर temporary है

शरीर है निवास स्थान

  • मैं मकान मालिक हूँ… शरीर मकान है
  • मैं मूर्ति हूँ… शरीर मन्दिर है
  • मैं लाइट हूँ, शरीर house है (अर्थात साथ में light house)
  • मैं मेहमान हूँ, शरीर temporary address है
  • मैं actor हूँ, शरीर costume (चोला) है
  • मैं showpiece हूँ, शरीर showcase है
  • मैं हीरा हूँ, शरीर डिब्बी है
  • मैं अमूल्य हूँ, शरीर का फिर भी मूल्य है
  • मैं फूल हूँ, शरीर गमला है
  • मैं गुणवान हूँ, शरीर जैसे कि निर्गुण है
  • मैं ज्योति हूँ, शरीर मिट्टी का दीपक है
  • मैं पंछी हूँ, शरीर घोसला है

शरीर है वाहन और instrument (यंत्र)

  • मैं driver हूँ, शरीर car है
  • मैं सारथी (वा रथी) हूँ, शरीर रथ है
  • मैं करावनहार हूँ, शरीर करनहार है
  • मैं राजा हूँ, कर्मेन्द्रीयां मन्त्री है
  • मैं सेठ हूँ, कर्मेन्द्रीयां कर्मचारी है
  • मैं मालिक हूँ, कर्मेन्द्रीयां नौकर-चाकर है
  • मैं user हूँ, शरीर साधन (मोबाइल आदि) है
  • मैं programmer हूँ, शरीर computer है
  • मैं operator हूँ, शरीर robot है
  • मैं बिजली हूँ, शरीर यंत्र है
  • मैं दृशता हूँ, आँखें खिड़की है
  • मैं speaker हूँ, मुख mic हैं
  • मैं सुनने वाला हूँ, कान sound-receiver हैं

भ्रूकुटी में विराजमान

  • मैं राजा हूँ… भ्रूकुटी अकाल-तख्त है
  • मैं योगी हूँ… भ्रूकुटी कुटिया है
  • मैं तपस्वी हूँ… भ्रूकुटी गुफा है

और पॉइंट्स

  • मैं आत्मा rocket हूँ
  • मैं स्टार (सितारा) हूँ
  • मैं तिलक-स्वरूप हूँ

शरीर से ममत्व मिटाने लिए

  • शरीर पुरानी जुत्ती है
  • शरीर मिट्टी है
  • शरीर सर्प है, मैं उसके सिर पर मणि हूँ
  • शरीर दूम्ब है
  • शरीर मुर्दा है
  • शरीर पुराना, विकारी, तमोप्रधान, जड़जड़िभूत है

इस लिस्ट से प्राप्ति

  • इन सभी पॉइन्ट्‍स को एक के बाद एक दोहराने से… बहुत अच्छी आत्म-अभिमानी स्थिति बनती है!
  • सारा दिन नैचुरल देही-अभिमानी स्थिति रहतीं हैं
  • सेकंड में अशरीरी बन सकते हैं
  • देह-भान से बचे रहते हैं
  • पुरुषार्थ मैं नवीनता मिलती है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… इन सभी points को स्मृति में रख नैचुरल आत्म-अभिमानी स्थिति (अर्थात शान्ति, प्रेम और आनन्द के निरन्तर अनुभव!) में स्थित रहे… जिससे हमारा बाबा से कनेक्शन भी मजबूत रहेगा, और हम सबके साथ इन गुणों का अनुभव बांटते रहेंगे… जिससे सहज ही यह संसार स्वर्ग बन जाएगा… ओम् शान्ति!


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The enthusiasm for Seva | सर्विस का शौक | Sakar Murli Churnings 28-12-2018

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The enthusiasm for Seva | सर्विस का शौक | Sakar Murli Churnings 28-12-2018

  • मम्मा-बाबा समान सौभाग्यशाली बनने लिए:
    • सेवा का उमंग रखना है
    • पुरानी दुनिया से ममत्व नहीं रखना है
    • माया से बचे रहना है
  • सर्विस का खूब शौक रखना है:
    • धंधा करते, गृहस्थ में रहते भी… मन्सा, वाचा, कर्मणा सेवा करनी है… बाप का परिचय वा मनमनाभाव का छू मंत्र सबको देना है, सबको सुख देना है
    • मन्दिरों, शमशान में जाओ
    • मित्र-सम्बन्धियों को समझाओ
    • उनको बुलाओ, उनके पास भी जाओ
    • अखबार में डालो, हाॅल भी ले सकते हो
    • भल 100 में से 1 निकले, विघ्न और गालियाँ भी सहन करनी पड़े
  • 2500 साल पहले तक भी, सतयुग त्रेता में… वन रिलीजन, वन गवर्नमेंट था, सम्पूर्ण एकता थी… अभी तो अनेक मतें हैं, देश देश और घर घर में जगदे है, एक दो को मार भी डालते.. तो हमें फिर से सम्पूर्ण एकता लानी की सेवा करनी है
  • परमधाम निवासी होने के नाते, इस जग में हम सभी foreigners है… तो जैसे बाबा नें हमे रूहानी डॉक्टर वा रूहानी व्यापारी बनाया है, आज बाबा ने हमारी विदेश जाने की भी इच्छा पूरी कर दी!

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा को साथ रखकर अथक सेवा करतेे रहें … जिससे हमारी स्थिति स्वतः श्रेष्ठ और व्यर्थ से मुक्त रहती… और सबकी दुआएं मिलती, सबका भी जीवन श्रेष्ठ बनता, जिससे सहज ही यह संसार स्वर्ग बन जाएगा… ओम् शान्ति!