योग कमेंटरी | सच्ची-सच्ची होली मनाने | Celebrating Holi

योग कमेंटरी | सच्ची-सच्ची होली मनाने | Celebrating Holi

आज होली का दिन है… बाबा को आज की बढ़ाइया देते… अपनी पवित्रता की प्रतीज्ञा फिर से दोहराता हूं

सभी बुराइयां को… होली की आग में भस्म कर… मैं पावन बन गया हूं

बाबा के संग रह… उनके ज्ञान के रंग… अविनाशी सुख-शान्ति खुशियों के रंग में रंग गया हूँ

अपनी दिव्य बुद्धि रूपी पिचकारी द्वारा… सबको अविनाशी खुशियों का रंग लगाना है… स्नेह मिलन मनाना है

जो पास्ट में हुआ, वह हो-ली… अब मैं बाप की होली… Holy हूँ

गीत: प्रभु तेरे रंग में…


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Thanks for reading this meditation commentary on ‘सच्ची-सच्ची होली कैसे मनाएं | Celebrating Holi’

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