योग कमेंटरी | प्रकृति को पावन वाइब्रेशन देने | Giving pure vibrations to Nature

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योग कमेंटरी | प्रकृति को पावन वाइब्रेशन देने | Giving pure vibrations to Nature

प्रकृति ने हज़ारों साल मेरी पालना की है… उसका बहुत शुक्रिया है… अभी मुझे उनकी पालना करनी है… प्रकृति-पति बनकर

मैं परम-पवित्र आत्मा… पवित्रता के सागर की सन्तान हूँ… बाबा की पवित्रता की किरणें… मुझमे समा रही हैं

मुझसे चारों ओर पवित्रता की किरणें फैल रही है… वातावरण बहुत शुध्द… सतोगुणी, दिव्य बन रहा है

यह प्रकंपन प्रकृति को पहुँच… पांचों तत्वों को शान्त, शीतल… पावन, सतोप्रधान बना रहे हैं

यही पावन प्रकृति… स्वर्ग में सम्पूर्ण सुख देगी… कल्प-कल्प हमारी सेवा करेंगी… वाह प्रकृति वाह!… ओम् शान्ति!


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