योग कमेंटरी | मैं दीपक हूँ | I’m the flame of a diya

योग कमेंटरी | मैं दीपक हूँ | I’m the flame of a diya

इस मिट्टी (शरीर) में, मैं आत्मा रूपी ज्योति चमक रही हूँ… मैं बाबा की आशाओं का दीपक… कुल दीपक हूँ

मुझसे चारों ओर प्रकाश की किरणें फैल रही है… अन्धकार मीट रहा है… मैं सदा जागती ज्योत हूँ

मैं ज्ञान घृत से भरपूर हूँ… स्वयं भगवान ने मेरी ज्योति जगाई है… मेरी हर दिन दीवाली है

मैं दीपमाला का दीपक हूँ… सभी दीपकों के साथ चमक रहा हूँ… भल मिट्टी (शरीर) अलग है, ज्योति एक समान है… एक बाबा के बच्चे, हम सभी एकता के सूत्र में बंधे हुए हैं

मैं दीपराज बाबा की… बहुत प्यारी दीपरानी हूँ… ज्ञान, गुण, शक्तियों से प्रकाशित हूँ

कोई भी माया के तूफान मुझे हिला नहीं सकते… मैं स्थिर और शक्तिशाली हूँ… सत्यता की शक्ति से सम्पन्न… ओम् शान्ति!


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