Answers from Sakar Murli 18-11-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 18-11-2020*

1. समझदार वह है जो मन्सा-वाचा-कर्मणा तीनों ____ साथ-साथ करते हैं।
° _सेवायें_

2. विश्व को लाइट और माइट का वरदान देने के लिए अमृतवेले याद के स्व अभ्यास द्वारा ____ वायुमण्डल बनाओ तब मन्सा सेवा का ____ प्राप्त होगा। लास्ट समय में मन्सा द्वारा ही ____ से निहाल करने की, अपनी ____ द्वारा उनकी वृत्तियों को बदलने की सेवा करनी है।
° _पावरफुल_, _सर्टीफिकेट_, _नज़र_, _वृत्ति_

3. बाबा ने समझाया है – मैं तुम्हारा बाप भी हूँ, ज्ञान का ____ हूँ। हमारा बाप सुप्रीम है, सत्य बाप, सत्य टीचर है, ____ सुनाते हैं। बेहद की शिक्षा देते हैं। बेहद का ___- है, सबकी सद्गति करते हैं।
° _सागर_, _सत्य_, _गुरू_

4. बाप तो और ही सबको ____ -धाम वापिस ले जाते हैं, बिगर मेहनत। हिसाब-किताब चुक्तू कर सब ____ जाते हैं क्योंकि कयामत का _____ है। बाप आते ही हैं ____ पर। सबको सद्गति दे देते हैं। तुम भी पहले ____ में फिर सद्गति में आयेंगे। यह बातें समझने की हैं।
° _शान्ति_, _घर_, _समय_, _सर्विस_, _गति_

5. बाबा को आज कौन-से *2 अंग्रेजी शब्द* अच्छे लगे?
° अंग्रेजी में *सुप्रीम* ही कहा जाता है। (अंग्रेजी अक्षर कुछ अच्छे होते हैं।)
° जैसे *ड्रामा* अक्षर है। (ड्रामा को नाटक नहीं कहेंगे, नाटक में तो अदली-बदली होती है। इस खेल-चक्र के रिपीटीशन-समय को हम ही जानते।)

6. सर्वोत्तम ब्राह्मण ___ कहा जाता है। सूक्ष्मवतन में ____ रहते हैं। वहाँ हड्डी-मांस होता नहीं। वह बिचारे समझते नहीं ____ शरीर क्या होता है। फिर सतयुग में होते हैं ____ आत्मायें। तुम अभी ___ पर हो। कलियुग और सतयुग दोनों को जानते हो।
° _कुल_, _फरिश्ते_, _सूक्ष्म_, _पुण्य_, _संगम_,

7. कितनी प्वाइंट्स बच्चों को ____ करनी हैं। भाषण करना होता है ______ पर। सत नाम लिखते हैं। पतित-पावनी गंगायें यह ____ हैं। शिव ____ कहो शिव वंशी कहो। शिव वंशी ब्रह्माकुमार- कुमारियां । ____ द्वारा एडाप्ट करते हैं।
° _धारण_, _टॉपिक्स_, _मातायें_, _शक्ति_, _ब्रह्मा_

8. कोई बात किसको समझ में न आये तो उनको बोलो-जब तक ____ को नहीं समझा है तो और कुछ समझ नहीं सकेंगे। एक बात ____ करो और लिखो, नहीं तो भूल जायेंगे। माया भुला देगी। मुख्य बात है ____ के परिचय की। हमारा बाप सुप्रीम बाप, सुप्रीम टीचर है जो सारे विश्व के आदि-मध्य-अन्त का ____ समझाते हैं, जिसका कोई को पता नहीं है।
° _अल्फ_, _निश्चय_, _बाप_,
_राज़_

9. गीता का कितना छोटा लॉकेट बनता है। वास्तव में है तो ____ की बात। बाप का बना जैसेकि ____ का मालिक बना। यह तो बहुत ऊंच ते ऊंच ___ है जिससे हम विश्व के मालिक बनते हैं।
° _सेकण्ड_, _विश्व_, _ज्ञान_

10. बाप बैठ *देवी-देवता धर्म का सैपलिंग* लगाते हैं, तो कन्वर्ट हुई आत्मा लौटकर आई, यह कैसे पता चलता?
° उनको *यह ज्ञान और योग बहुत अच्छा लगेगा*, इससे सिद्ध होता है कि यह देवता धर्म का है। (इसमें बड़ी विशालबुद्धि चाहिए समझने और समझाने की। धारणा करनी है, सिर्फ किताब पढ़कर नहीं सुनानी है।)

11. भक्ति मार्ग के दलदल में गले तक डूबे हुए हैं तो फिर निकाल कैसे सकेंगे। निकालना ही मुश्किल हो जाता है। परन्तु इससे भी *बड़ी दलदल* कौन-सी है?
° कोई-कोई तो औरों को निकालने निमित्त बन खुद ही डूब जाते हैं। खुद गले तक दुबन में फंसते अर्थात् *काम विकार* में गिर पड़ते हैं। यह है सबसे बड़ी दुबन (दलदल)। (सतयुग में यह बातें होती नहीं।)

12. मीठे-मीठे रूहानी बच्चों प्रति बाप बैठ समझाते हैं – यह सुप्रीम *बाप* भी है, सुप्रीम *टीचर* भी है, सुप्रीम *सतगुरू* भी है। बाप की ऐसी महिमा बताने से ऑटोमेटिकली सिद्ध हो जाता है कि कृष्ण की ऐसी महिमा नहीं। कैसे?
° कृष्ण किसी का *बाप* हो नहीं सकता। वह तो छोटा बच्चा, सतयुग का प्रिन्स है।
° वह *टीचर* भी नहीं हो सकता। खुद ही बैठकर टीचर से पढ़ते हैं।
° *गुरू* तो वहाँ होता नहीं क्योंकि वहाँ सब सद्गति में हैं।

13. “मीठे बच्चे – अभी तुम ___ बाप द्वारा ___ देवता बन रहे हो, इसलिए ____ -युग में ____-संग करने की जरूरत नहीं”
° _सत्य_, _सत्य_, _सत_, _सत_

14. *सतयुग में* देवताओं से कोई भी *विकर्म नहीं हो सकता* है, क्यों?
° क्योंकि उन्हें *सत्य बाप का वरदान* मिला हुआ है। विकर्म तब होता है जब रावण का श्राप मिलने लगता है। *सतयुग-त्रेता में है ही सद्गति* , उस समय दुर्गति का नाम नहीं। (विकार ही नहीं जो विकर्म हो। द्वापर-कलियुग में सबकी दुर्गति हो जाती इसलिए विकर्म होते रहते हैं। यह भी समझने की बातें हैं।)

15. दिखाते हैं विष्णु की नाभी से ब्रह्मा निकला। अच्छा विष्णु फिर किसकी नाभी से निकला? उसमें ____ का निशान दे सकते हो कि दोनों ओत-प्रोत हैं। ब्रह्मा सो विष्णु, विष्णु सो ब्रह्मा। यह उनसे, वह उनसे पैदा हुआ है। इनको लगता है _____ सेकेण्ड, उनको लगता है ____ हज़ार वर्ष। यह वन्डरफुल बातें हैं ना। तुम बैठ समझायेंगे। बाप कहते हैं लक्ष्मी-नारायण 84 जन्म लेते हैं फिर उनके ही बहुत जन्मों के अन्त में मैं _____ कर यह बनाता हूँ। समझने की बात है ना। बाप कहते हैं मैं इसमें प्रवेश कर बेहद का ____ कराता हूँ।
° _एरो_, _एक_, _5_, _प्रवेश_, _संन्यास_

Answers from Sakar Murli 17-11-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 17-11-2020*

1. ज्ञान का ____ करना ही सदा हर्षित रहने का आधार है।
° _सिमरण_

2. आपके सामने कैसी भी आत्मा हो लेकिन अपने ____ की वृत्ति से, _____ भावना से उसे परिवर्तन कर दो-यही है सच्ची सेवा। जैसे साइन्स वाले रेत में भी खेती पैदा कर देते हैं ऐसे साइलेन्स की शक्ति से ____ -दिल बन अप-कारियों पर भी ____ कर धरनी को परिवर्तन करो। _____ परिवर्तन से, शुभ भावना से कैसी भी आत्मा परिवर्तन हो जायेगी क्योंकि शुभ भावना _____ अवश्य प्राप्त कराती है।
° _रहम_, _शुभ_, _रहम_, _उपकार_, _स्व_, _सफलता_

3. बहुत ___ से बैठकर रूहानी बाप को याद करना है। याद में प्रेम के ____ आ जायें तो वह विजय माला का ____ बन जायेंगे। अपना समय भविष्य प्रालब्ध बनाने में _____ करना है।
° _प्रेम_, _ऑसू_, _दाना_, _सफल_

4. बाबा भी कहते हैं मैं _____ भी हूँ, _____ भी हूँ। छोटी सी बिन्दी हूँ और फिर ज्ञान का सागर भी हूँ। तुम्हारी आत्मा में सारा ज्ञान भरते हैं। 84 जन्मों का सारा राज़ तुम्हारी बुद्धि में है। तुम ज्ञान का _____ बन ज्ञान की वर्षा करते हो। ज्ञान का एक-एक रत्न कितना _____ है, इनकी वैल्यु कोई कर न सके इसलिए बाबा कहते हैं _____ भाग्यशाली। तुम्हारे चरणों में ____ की निशानी भी दिखाते हैं, इनको कोई समझ न सके।
° _रूप_, _बसन्त_, _स्वरूप_, _अमूल्य_, _पदमापदम_, _पदम_

5. यह ज्ञान बड़ा वन्डरफुल है। तुम कितने ____ स्टूडेन्ट हो। तुम कहेंगे हम ____ -शाला में जाते हैं, ____ हमको पढ़ाते हैं। एम ऑबजेक्ट क्या है? हम यह _______ बनेंगे। मनुष्य सुनकर वन्डर खायेंगे। हम अपने हेड ऑफिस में जाते हैं। क्या पढ़ते हो? मनुष्य से ___ , बेगर से ____ बनने की पढ़ाई पढ़ रहे हो।
° _गुप्त_, _पाठ_, _भगवान_,
_(लक्ष्मी-नारायण)_, _देवता_, _प्रिन्स_

6. फिर सतोप्रधान बनना हैं। उसके लिए बाप युक्ति बताते हैं कि अपने को आत्मा समझ ____ याद करो। मैं ही ___ -शक्तिमान् हूँ। मुझे याद करने से तुम्हारे में ____ आयेगी। तुम विश्व के ____ बनेंगे। यह लक्ष्मी-नारायण का वर्सा इन्हों को ____ से मिला है। कैसे मिला वह समझाते हैं।
° _मामेकम्_, _सर्व_, _शक्ति_, _मालिक_, _बाप_

7. पहले-पहले _____ का परिचय देना है। बाप कहते हैं _____ । जितना _____ करेंगे उस अनुसार पद पायेंगे। आदि सनातन ______ धर्म का राज्य स्थापन हो रहा है। इन ______ की डिनायस्टी है।
° _बाप_, _मनमनाभव_, _पुरूषार्थ_, _देवी-देवता_, _लक्ष्मी-नारायण_

8. महिमा है ही एक की। पतित से ____ बनाना यह तो बाप का ही काम है। ____ से छुड़ाने वाला तो एक ही बाप है। यह सब प्वाइंट्स बुद्धि में अच्छी रीति धारण करनी है। एक गॉड को ही मर्सीफुल कहा जाता है। एक बाप ही सब पर _____ करते हैं। सतयुग में सब ____ – ______ में रहते हैं।
° _पावन_, _दु:ख_, _रहम_, _सुख_, _शान्ति_

9. एक रूहानी बाप जिसका नाम ___ है, वह बैठ अपने बच्चों को समझाते हैं। हम कहते परमपिता परमात्मा ____ गीता का भगवान है। वही ज्ञान का ____ है। लिबरेटर, _____ भी परमात्मा को ही कहा जाता है। परमपिता परमात्मा ही आकर लिबरेट करते हैं अर्थात् तमोप्रधान से सतोप्रधान बनाते हैं। कहते हैं मैं ब्रह्मा द्वारा स्थापना करता हूँ। उस एक ही _____ बाप के सब बच्चे हैं। शिवरात्रि गाई जाती है तो जरूर ____ यहाँ आये होंगे ना।
° _शिव_, _शिव_, _सागर_, _गाइड_, _निराकार_, _शिव_

10. पहले-पहले यही बात ( *बाप का परिचय*) अन्तर्मुख हो समझानी-निश्चय करानी है, जास्ती तीक-तीक नहीं। इससे क्या *फायदा* होंगा? (2)
° तो फिर *आगे समझना सहज* होगा। (अगर बाप का परिचय ही नहीं मिला होगा तो प्रश्न करते रहेंगे।)
° बच्चे एक बात अल्फ पर किसको निश्चय कराते नहीं, और-और बातों में चले जाते हैं *फिर कहते गला ही खराब हो गया*। (तुम और बातों में जाओ ही नहीं।)

11. बाप जो सत्य है वह जरूर सत्य ही सुनायेंगे। दुनिया पहले नई सतोप्रधान थी। अभी दुनिया पुरानी तमोप्रधान है। *दुनिया को बदलने वाला एक बाप* ही है। बाप कैसे बदलते हैं वह भी समझाना चाहिए। तो मुख्य कौन-सी चीज बदलनी पड़े?
° *आत्मा जब सतोप्रधान बनें* तब दुनिया भी सतोप्रधान स्थापन हो।

12. “मीठे बच्चे – बाप आये हैं ____ दुनिया बनाने, तुम्हारे _____ सुधारने, तुम भाई-भाई हो तो तुम्हारी ___ बहुत शुद्ध होनी चाहिए”
° _वाइसलेस_, _कैरेक्टर_, _दृष्टि_

13. बाप की ____ में रहने से तुम किसको समझाने में भी एकरस होंगे। नहीं तो कुछ न कुछ नुक्स (कमी) निकालते रहेंगे। बाबा कहते हैं तुम जास्ती कुछ भी ____ न लो। स्थापना तो जरूर होनी ही है। ____ को कोई भी टाल नहीं सकते। ____ में रहना चाहिए। बाप से हम बेहद का ___ ले रहे हैं। बाप कहते हैं मामेकम् याद करो।
° _याद_, _तकलीफ_, _भावी_, _हुल्लास_, _वर्सा_

14. मनुष्यों की नब्ज भी देखनी चाहिए-कुछ समझता है या ____ है? टाइम ____ नहीं करना चाहिए। चात्रक, पात्र को परखने की भी ____ चाहिए। जो समझने वाला होगा उनका ____ ही बदल जायेगा। पहले-पहले तो खुशी की बात देनी है। बेहद के बाप से बेहद का ____ मिलता है ना।
° _तवाई_, _वेस्ट_, _बुद्धि_, _चेहरा_, _वर्सा_

15. बोलो, बाप तो सत्य बोलेंगे ना। हम ____ को बाप ही सुनाते हैं। यह ____ सब उसने बनवाये हैं, इसमें संशय नहीं लाना चाहिए। संशयबुद्धि विनशन्ती। पहले तुम अपने को आत्मा समझ बाप को याद करो तो _____ विनाश होंगे। और कोई उपाय नहीं। ____ -पावन तो एक ही है ना। बाप कहते हैं देह के सब सम्बन्ध छोड़ ____ याद करो। बाप जिसमें प्रवेश करते हैं, उनको भी फिर ____ कर सतोप्रधान बनना है।
° _बी.के._, _चित्र_, _विकर्म_, _पतित_, _मामेकम्_, _पुरूषार्थ_

16. प्रदर्शनी में इतने ढेर चित्रों की दरकार नहीं। तो बाबा ने आज कौन-से *3 चित्र* रखने लिए कहा?
° नम्बरवन चित्र है गीता का *भगवान कौन?* उसके बाजू में *लक्ष्मी-नारायण* का, *सीढ़ी* का। बस। (तुम बच्चों को जितना हो सके याद की यात्रा को बढ़ाना है। मूल फिकरात रखनी है कि पतित से पावन कैसे बनें!)

17. *पात्र* तुमको कहाँ मिलेंगे? (2)
° शिव के, लक्ष्मी-नारायण के, राम-सीता के *मन्दिरों में* । वहाँ जाकर तुम उन्हों की सेवा करो।
° *गंगा नदी पर* भी जाकर तुम समझाओ – पतित-पावनी गंगा है या परमपिता परमात्मा है? (सर्व की सद्गति यह पानी करेगा या बेहद का बाप करेगा? तुम इस पर अच्छी रीति समझा सकते हो। विश्व का मालिक बनने का रास्ता बताते हो। दान करते हो, कौड़ी जैसे मनुष्य को हीरे जैसे विश्व का मालिक बनाते हो। भारत विश्व का मालिक था ना। तुम ब्राह्मणों का देवताओं से भी उत्तम कुल है।)

18. यह बाबा तो समझते हैं – मैं बाप का एक ही ______ बच्चा हूँ। बाबा ने हमारा यह शरीर ___ पर लिया है। बाबा की हमारे पर _____ की हुई है। हमने बाबा को ____ दिया है कि सर्विस करो। उनका एवजा फिर वह कितना देते हैं। जो हमको सबसे ऊंच _____ पर चढ़ाते हैं। नम्बर- _____ ले जाते हैं। बाप को बच्चे प्यारे लगते हैं।
° _सिकीलधा_, _लोन_, _सवारी_, _शरीर_, _कन्धे_, _वन_

19. ब्रह्मा और विष्णु का कनेक्शन भी बताते हैं। बाप तुम ____ को राजयोग सिखलाते हैं तो तुम ____ -पुरी के मालिक बनते हो। फिर तुम ही 84 जन्म ले अन्त में शूद्र बनते हो। फिर बाप आकर शूद्र से ____ बनाते हैं। ऐसे और कोई बता न सके।
° _ब्राह्मणों_, _विष्णु_, _ब्राह्मण_

20. तुम बच्चे बेफिक्र बादशाह हो फिर भी तुम्हें *एक मूल फिकरात* अवश्य होनी चाहिए – कौन सी?
° हम पतित से *पावन कैसे बनें* – यह है मूल फिकरात। (ऐसा न हो बाप का बनकर फिर बाप के आगे सज़ायें खानी पड़ें। सज़ाओं से छूटने की फिकरात रहे, नहीं तो उस समय बहुत लज्जा आयेगी। बाकी तुम बेपरवाह बादशाह हो, सबको बाप का परिचय देना है। कोई समझता है तो बेहद का मालिक बनता, नहीं समझता है तो उसकी तकदीर। तुम्हें परवाह नहीं।)

Answers from Sakar Murli 16-11-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 16-11-2020*

1. सदा एक बाप के ___ संग में रहो तो और किसी के संग का रंग प्रभाव नहीं डाल सकता।
° _श्रेष्ठ_

2. *रूहानी रहमदिल* बच्चों की क्या निशानी हैं?
° वह *महादानी* बन बिल्कुल होपलेस केस में *होप* पैदा कर देते हैं। निर्बल को *बलवान* बना देते हैं। (दान सदा गरीब को, बेसहारे को दिया जाता है। तो जो निर्बल दिलशिकस्त, असमर्थ प्रजा क्वालिटी की आत्मायें हैं उनके प्रति रूहानी रहमदिल बन *महादानी* बनो। आपस में एक दूसरे के प्रति महादानी नहीं। वह तो सहयोगी साथी हो, भाई भाई हो, हमशरीक पुरूषार्थी हो, सहयोग दो, दान नहीं।)

3. यह प्वाइंट्स अच्छी रीति धारण करनी है। जो ___ बुद्धि होंगे वह अच्छी रीति धारण कर सकेंगे। इन बातों को कोई समझते नहीं हैं। _____ बुद्धि समझते हैं राजधानी में तो हर प्रकार के पार्टधारी होते हैं। सतयुग में जो राजधानी थी वह फिर से स्थापन हो रही है। तुम अभी तमोप्रधान से सतोप्रधान क्लास में ______ होते हो। गॉड फादर ही कहते हैं हम तुमको ____ -लोक के लिए पढ़ाते हैं। यह मृत्युलोक खलास होना है। सतयुग में इन लक्ष्मी-नारायण की _______ थी। यह स्थापन कैसे हुई, यह किसको पता नहीं है।भारत में एक नेशनल्टी थी, उनको ____ नेशनल्टी कहा जाता है।
° _फ्रेश_, _शुरूड़_, _ट्रांसफर_, _अमर_, _राजधानी_, _डीटी_

4. नई राजधानी में _____ पद पाने के लिए इस _____ की पढ़ाई पर पूरा-पूरा _____ देना है। पास होकर _____ माला का दाना बनना है। यहाँ तो बाप कहते हैं मुझे _____ करो। यह है _____ -जाप। मुख से कुछ बोलना नहीं है।
° _ऊंच_, _राजयोग_, _ध्यान_, _विजय_, _याद_, _अजपा_

5. युनिवर्स अर्थात् _____ । अब कायदे अनुसार युनिवर्सिटी अक्षर तुम बच्चों का है। यह है _____ युनिवर्सिटी। यह एक ही ____ फादरली युनिवर्सिटी है। सभी ______ को लेसन मिलता है।तुम्हारा यह ____ कोई न कोई प्रकार से सबको जरूर पहुँचना चाहिए, मैसेज देना है ना और यह मैसेज बिल्कुल _____ है।
° _विश्व_, _रूहानी_, _गॉड_, _आत्माओं_, _पैगाम_, _सिम्पुल_

6. बच्चे जानते हैं वह हमारा _____ का बाप है, जिसको सब याद करते हैं। ऐसे भी कहें वह हमारा बेहद का _____ है, जो भी विश्व में जीव आत्मायें हैं वह उसे याद जरूर करती हैं। सुखधाम में ले जाने वाला एक ही बाप है, उनको ______ भी कहते हैं। बाप को सब याद करते हैं, उनको गाइड, लिबरेटर, _______ भी कहते हैं। सभी आत्मायें एक को पुकारती हैं तो वह एक ही सारी युनिवर्स का टीचर भी हुआ ना। बाप तो है ही परन्तु यह किसको पता नहीं कि वह हम सब आत्माओं का टीचर भी है, _____ भी है। सबको गाइड भी करते हैं। इस बेहद के _____ को सिर्फ तुम बच्चे ही जानते हो।
° _बेहद_, _माशूक_, _लिबरेटर_, _मर्सीफुल (रहमदिल)_, _गुरू_, _गाइड_

7. बाबा को याद करना और *गीत सुनना*, दोनों एक ही बात है। _(सही / गलत)_
° *गलत* , गीत भी *स्थूल* हो जाता है। बच्चों को तो सिर्फ बाप को याद करना है। नहीं तो फिर गीत आदि याद आते रहेंगे। यहाँ मूल बात है ही याद की। तुमको *आवाज से परे* जाना है। (बाप का डायरेक्शन है ही मनमनाभव। बाप थोड़ेही कहते हैं गीत गाओ, रड़ी मारो। मेरी महिमा गायन करने की भी दरकार नहीं है। यह तो तुम जानते हो वह ज्ञान का सागर, सुख-शान्ति का सागर है।)

8. तुमने जाना है कि _____ क्या चीज़ है, दुनिया में किसको भी पता नहीं। भल कहते हैं भ्रकुटी के बीच चमकता है अजब ____, परन्तु समझ कुछ नहीं। अभी तुम जानते हो आत्मा तो _____ है। वह कभी बड़ी या छोटी नहीं होती। जैसे तुम्हारी आत्मा है, बाप भी वही _____ है। बड़ा छोटा नहीं। वह भी है आत्मा सिर्फ _____ आत्मा है, सुप्रीम है। बरोबर सभी आत्मायें परमधाम में रहने वाली हैं। यहाँ आती हैं ____ बजाने।
° _आत्मा_, _सितारा_, _अविनाशी_, _बिन्दी_, _परम_, _पार्ट_

9. तुम जानते हो हम सो देवता पूज्य बन रहे हैं। तुम्हारे ऊपर *अभी लाइट का ताज नहीं* दे सकते। _(सही / गलत)_
° *सही* , तुम्हारी आत्मा जब पवित्र बनेंगी तब यह शरीर छोड़ देगी। इस शरीर पर तुमको लाइट का ताज नहीं दे सकते, शोभेगा नहीं। (इस समय तुम हो गायन लायक। इस समय कोई की भी आत्मा पवित्र नहीं है, इसलिए किसके ऊपर भी इस समय लाइट नहीं होनी चाहिए। *लाइट सतयुग में* होती है। दो कला कम वाले को भी यह लाइट नहीं देनी चाहिए।)

10. शिवबाबा आज हमे कौन-सा *उल्हना* दे रहे थे? _(निमंत्रण)_
° बाप कहते हैं – मैं तो हूँ निराकार और विचित्र। यहाँ आता हूँ – सर्विस करने के लिए। हमारी बड़ाई देखो कितनी करते हैं। ज्ञान का सागर… हे बाबा और फिर *कहते हैं पतित दुनिया में आओ।* तुम निमंत्रण तो बड़ा अच्छा देते हो। *ऐसा भी नहीं कहते कि स्वर्ग में आकर सुख तो देखो* । कहते हैं हे पतित-पावन हम पतित हैं, हमको पावन बनाने आओ। निमंत्रण देखो कैसा है। *एकदम तमोप्रधान पतित दुनिया और फिर पतित शरीर में बुलाते* हैं। बड़ा अच्छा निमंत्रण देते हैं भारतवासी! ड्रामा में राज़ ही ऐसा है।

11. _____ ही आकर अपना नाम रूप आदि बताते हैं – मैं कैसा हूँ, तुम आत्मा कैसी हो! तुम बहुत मेहनत करते हो – ____ बजाने। आधाकल्प भक्ति की है, मैं तो ऐसे पार्ट में आता नहीं हूँ। मैं दु:ख सुख से ____ हूँ। तुम दु:ख भोगते हो फिर तुम ही सुख भोगते हो – सतयुग में। तुम्हारा पार्ट मेरे से भी ____ है। मैं तो आधाकल्प वहाँ ही आराम से बैठा रहता हूँ ______ में। तुम मुझे पुकारते आते हो।
° _बाप_, _पार्ट_, _न्यारा_, _ऊंच_, _वानप्रस्थ_

12. ड्रामा को मैं जानता हूँ। अब ड्रामा पूरा हुआ है, मुझे जाकर पतितों को पावन बनाने का ____ बजाना है और कोई बात है नहीं। तुम जब बिल्कुल तमोप्रधान बन जाते हो – तब एक्यूरेट _____ पर मुझे आना पड़ता है। _____ तन में ही आता हूँ। तुम बच्चों को आकर _____ से छुड़ाता हूँ। एक धर्म की _____ ब्रह्मा द्वारा, अनेक धर्मो का विनाश शंकर द्वारा…हाहाकार के बाद _____ -कार हो जायेगी।
° _पार्ट_, _टाइम_, _साधारण_, _दु:ख_, _स्थापना_, _जयजय_

13. इनको भी थोड़ेही पता था कि मेरा बहुत जन्मों के अन्त का ____ है। बाबा ने _____ किया है तब बताते हैं। बाबा ने हर एक बात का राज़ समझाया है। बाबा खुद कहते हैं – यह ब्रह्मा मेरी _____ है। मैं इनमें प्रवेश कर इन द्वारा तुमको _____ बनाता हूँ। प्रजापिता ब्रह्मा से यह प्रजा रची जाती है। कहते हैं यह है मेरी ____ वंशावली। यह सच्ची-सच्ची ____ माँ हो गई और वह एडाप्टेड मॉ ठहरी।
° _जन्म_, _प्रवेश_, _वन्नी (स्त्री)_, _अपना_, _मुख_, _बड़ी_

14. ब्रह्मा है मॉ परन्तु तन पुरूष का है। यह तो सम्भाल नहीं सकेंगे इसलिए एडाप्ट किया है ____ को। नाम रख दिया है मातेश्वरी। ___ हो गई। ड्रामा अनुसार है ही एक ____। बाकी दुर्गा, काली आदि सब अनेक नाम हैं। मॉ बाप तो एक ही होते हैं ना। तुम सब हो बच्चे। गायन भी है ____ की बेटी सरस्वती। तुम ब्रह्माकुमार कुमारियां हो ना। तुम्हारे ऊपर ____ बहुत हैं।
° _बच्ची_, _हेड_, सरस्वती, _ब्रह्मा_, _नाम_

15. बाबा हमेशा कहते हैं जहाँ तुम भाषण करते हो तो यह _____ का चित्र जरूर रखो। इनमें ____ भी जरूर लिखी हुई हो। तुम समझा सकते हो कि नये विश्व की शुरूआत से ____ वर्ष तक इस डिनायस्टी का राज्य था। जब ये _____ डिनायस्टी थी तो दूसरा कोई था नहीं। अब फिर यह डिनायस्टी _____ हो रही है। बाकी सबका ____ होना है।
° _लक्ष्मी-नारायण_, _डेट_, _1250_, _देवता_, _स्थापन_, _विनाश_

16. अभी *कितने ढेर* हो गये हैं, इसलिए इतने झगड़े आदि होते, लिमिट होनी चाहिए। परन्तु यह भी *बना बनाया खेल* है, जो भी एक्टर्स रहे हुए होंगे, आते रहेंगे। भल कितना भी कन्ट्रोल करने की कोशिश करे, कर नहीं सकते। तो यहां हमारे पास कौन-सी *खुशखबरी* है?
° हम बी.के. *ऐसा बर्थ कन्ट्रोल* कर देते हैं जो बाकी *9 लाख* जाकर रहेंगे। फिर सारी *आदमशुमारी ही कम* हो जायेगी। (हम आपको सत्य बताते हैं, अब स्थापना कर रहे हैं। नई दुनिया, *नया झाड़ जरूर छोटा* ही होगा। यहाँ तो यह कन्ट्रोल कर नहीं सकेंगे क्योंकि तमोप्रधान और होता जाता है। वृद्धि होती जाती है। एक्टर्स जो भी आने वाले हैं, यहाँ ही आकर शरीर धारण करेंगे।)

17. अभी तुम बच्चे कौन सा *ढिंढोरा* पीटते और कौन सी *बात* समझाते हो?
° तुम ढिंढोरा पीटते हो कि यह *नई दैवी राजधानी फिर से* स्थापन हो रही है। (अनेक धर्मो का अब विनाश होना है। तुम सबको समझाते हो कि सब *बेफिकर* रहो, यह इन्टरनेशनल रोला है। लड़ाई जरूर लगनी है, इसके बाद दैवी राजधानी आयेगी।)

18. अपनी स्थिति ऐसी अचल और ____ बनानी है जो अन्तिम ___ की को देख सकें। मेहनत करनी है _____ -अभिमानी बनने की। देही-अभिमानी रहने वाले बड़े ____ होते हैं।
° _निर्भय_, _विनाश_, _देही_, _मीठे_

Avyakt Murli Yog 26.10.25

Avyakt Murli Yog 26.10.25

हम दिलाराम ❣️ के.. दिल-पसन्द है.. (उन्हें प्यारे ❤️, लवली 💞 लगते!)

उनका मिलना (मेला मनाना!).. देखना 👁️ (हमारे मस्तक पर भाग्य!)..

.. दिल 💓 में समाना.. (लाड़ले 🥰, सिकीलधे कहना 💬!).. हम पर बलिहार जाना.. (हमारे गीत 🎼 गाना!)..

.. सर्व सम्बन्ध 👨‍👨‍👦‍👦 निभाना (शिक्षा, वरदानों से सम्पन्न 🪙 करना)..

.. सब उनकी पालना का स्वरूप है.. (तो नशा है.. वाह बाबा वाह!)

प्यार के अनुभवों में लहराते.. (एक बाबा दूसरा न कोई!).. ऐसे बाबा के अति प्यारे-न्यारे 🕊️ हैं!

.. तो दिल का यादप्यार.. पद्मगुणा दुआएं 🌬️ पाते.. (हम बालक 👶🏻 सो मालिक 👑!)

परमात्म प्यार 💖 का स्वरूप है.. विशेषता देखते 👁️.. मुबारक देते रहते!

गुप्त रूप में आये भगवान् 🛐 को पहचान.. ‘मेरा बाबा’ कह.. अपना बनाना.. (सबसे बड़ी विशेषता है!)

हम उड़ती कला वाले.. डबल लाइट 🧖.. फरिश्ते है.. (मुक्त!)

सदा मजबूत.. दृढ़ निश्चय से निश्चित विजयी 🇲🇰.. रिवाइज़, रियलाइज़ करते रहते!

दुआएं ✨ देना, लेना.. इसमे गुण 🌈, शक्ति ⚡ सब आ जाता.. (योगयुक्त बन जाते!)

पोइंट बन.. युक्तियां यूज करने से.. निवारण होता!

ऐसे ईश्वरीय संस्कारों से.. नया, दैवी.. जीवनमुक्त संसार बनाते!

अच्छे से अच्छे बनना अर्थात्.. बाप ☀️ समान 🟰.. लक्ष्मी-नारायण 🫅🏻👸🏻 बनना!

अमृतवेले शक्तियां 💪🏻 ले.. पावरफुल ✊🏻 स्टेज बनाने से.. शक्ति 🏋️ स्वरूप रहने से..

.. सारे दिन की जीवन महान.. सहजयोगी.. example 👍🏻 रहती.. (सब ऐसी जीवन 🎨 बनाते!)

तो पवित्रता ✨ की.. श्रेष्ठता.. अनुभव कराते.. (यही सच्ची सेवा है!)

प्रयोगी आत्मा.. सदा खुशी में नाचती.. (विजयी रहती!)


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Answers from Sakar Murli 20-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 20-10-2020*

1. व्यर्थ को फुल ____ दो और शुभ भावना का _____ फुल करो।
° _स्टॉप_, _स्टॉक_

2. यहां रहते *वतन की सभी सीन-सीनरियां स्पष्ट* अनुभव करने लिए क्या करना है? (3)
° सिर्फ संकल्प शक्ति अर्थात् *मन और बुद्धि को सदा मनमत से खाली* रखो।
° कोई भी बोझ अपने ऊपर नहीं रखो, *सब बोझ बाप को देकर डबल लाइट* बनो।
° मन-बुद्धि से *सदा शुद्ध संकल्प का भोजन* 🍲 करो। (कभी भी व्यर्थ संकल्प व विकल्प का अशुद्ध भोजन न करो तो बोझ से हल्के होकर ऊंची स्थिति का अनुभव कर सकेंगे।)

3. बाबा हम आत्माओं का ____ कर रहे हैं। उनके साथ शरीरों का भी हो जायेगा। आत्मा ____ होने से फिर शरीर भी सतोप्रधान मिलेंगे। सतोप्रधान तत्वों से शरीर बनेंगे। इन्हों का सतोप्रधान शरीर है ना इसलिए नेचरल ____ रहती है। एक ही देवी-देवताओं का रिलीजन है जिससे ____ मिलती है। आत्मा में ताकत कैसे आती है, यह भी तुम अभी समझते हो। घड़ी-घड़ी अपने को ____ समझो। हम आत्मा सतोप्रधान थी तो _____ थी।
° _श्रृंगार_, _पवित्र_, _ब्युटी_,
_माइट_, _आत्मा_, _पवित्र_

4. _____ राजाओं की ड्रेस ही अलग होती है। सतयुग का तो नाम लेते ही दिल ____ हो जाती है। कहते ही हैं स्वर्ग, पैराडाइज़।
° _सतयुगी_, _खुश_

5. आज बाबा ने हमे सारी मुरली में *विशेष कौन-सा टाइटल* दिया?
° तुम हो *स्प्रीचुअल* , रूहानी इनकागनीटो *सैलवेशन आर्मी* (तुम्हें सारी दुनिया को सैलवेज करना है, डूबे हुए बेडे को पार लगाना है। विषय सागर दुःखधाम से क्षीरसागर सुखधाम!)

6. तो विकारों की दुबन में फंसी हुई आत्माओं को *पार जाने के लिए* विशेष कौन-सी युक्ति है? (2)
° यहाँ आकर जब बैठते हो तो अपने को *आत्मा समझ बाप को याद* करते हो, इससे तुम्हारा बेडा पार होगा। (तुम यह विचार करके आते हो कि हम बेहद के बाप से मिलने जाते हैं। आत्मा शरीर द्वारा बोलती। पारलौकिक बाप ने यह शरीर उधार पर लिया है, इनसे समझाते हैं। तुम्हारा है *योग बाण* 🏹। बाप कहते हैं मामेकम् याद करोगे तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। )
° *काम महाशत्रु* है, इस पर *जीत पाने से तुम जगतजीत* बनेंगे। यह है मुख्य विकार। (भक्ति-मार्ग में भी इस वाम-मार्ग के चित्र है, जिससे आइरन एजड बने।)

7. बाबा ने कहा तुम श्रीमत पर सबको रास्ता बताते हो। तो *दूसरों का बेड़ा पार* कराने के लिए हमें पहले-पहले *बाप का परिचय* देना होगा। यह कैसे देना है?
° हर एक को समझाते हो – *दो बाप हैं, एक हद का, दूसरा बेहद का* । (लौकिक बाप होते हुए भी सब पारलौकिक बाप को याद करते हैं परन्तु उनको जानते बिल्कुल नहीं हैं। मैगजीन में भी निकाला है, मनुष्य क्या कहते और भगवान क्या कहते हैं।)

8. सिर्फ ईश्वर वा भगवान कहने से इतना ____ नहीं आता है। सबसे अच्छा अक्षर है ____ । मनुष्य बेहद के ____ को नहीं जानते तो जैसे आरफन हैं।
° _लव_, _बाप_, _बाप_

9. बाप एक ही बार आकर तुमको ____ -अभिमानी बनाते हैं। वहाँ यह ज्ञान नहीं रहता कि मैं _____ परमपिता परमात्मा की सन्तान हूँ।
° _देही_, _आत्मा_

10. संगम पर बाप *कौन-सी युनिवर्सिटी* खोलते हैं जो सारे कल्प में नहीं होती?
° राजाई प्राप्त करने के लिए पढ़ने की *गॉड फादरली युनिवर्सिटी वा कॉलेज* संगम पर बाप ही खोलते हैं। (ऐसी युनिवर्सिटी सारे कल्प में नहीं होती। इस युनिवर्सिटी में पढ़ाई पढ़कर तुम *डबल सिरताज राजाओं का राजा* बनते हो।)

11. आत्मा अपने बाप को याद करती है – हे बाबा, आकर ____ दो। विश्व में ____ थी जबकि इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य था।
° _शान्ति_, _शान्ति_

12. इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य था, तो *विश्व में शान्ति* थी। विश्व में शान्ति क्यों थी?
° क्योंकि *एक राज्य एक धर्म* था। (तुम्हारी आत्मा जानती है अब हम एक राज्य स्थापन कर रहे हैं। बाप हमको सब कुछ दे देते हैं। कोई भी हमसे राजाई छीन नहीं सकते। और कोई खण्ड में ऐसे नहीं कहते कि एक धर्म एक राज्य हो।)

13. इन संन्यासियों और देवताओं की *पवित्रता में रात-दिन का फ़र्क* है। बाबा ने कौन-सा एक मुख्य अन्तर सुनाया?
° देवताओं का तो *जन्म भी योगबल से* होता है!

14. *होलिका* 🔥 का वास्तविक अर्थ क्या है?
° *सारी दुनिया इसमें स्वाहा* होनी है। यह ज्ञान यज्ञ है। (ज्ञान अक्षर निकाल बाकी रूद्र यज्ञ कह देते हैं। वास्तव में यह है रूद्र ज्ञान यज्ञ।)

Answers from Sakar Murli 17-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 17-10-2020*

1. समय की समीपता का फाउन्डेशन है – बेहद की ____ वृत्ति।
° _वैराग्य_

2. यह दिव्य जन्म _______ जन्म नहीं, यह कर्मयोगी जन्म है। इस अलौकिक दिव्य जन्म में ब्राह्मण आत्मा स्वतंत्र है न कि ______ । यह देह लोन में मिली हुई है, सारे विश्व की सेवा के लिए पुराने शरीरों में बाप शक्ति भरकर चला रहे हैं, जिम्मेवारी बाप की है, न कि _____ की। बाप ने डायरेक्शन दिया है कि कर्म करो, आप स्वतंत्र हो, _____ वाला चला रहा है। इसी विशेष _____ से कर्मबन्धनों को समाप्त कर कर्मयोगी बनो।
° _कर्मबन्धनी_, _परतंत्र_, _आप_, _चलाने_, _धारणा_

3. वहाँ सब चीजें, 5 तत्व भी ______ बन जाते हैं। हर चीज़ फल आदि दी _____ होते हैं। सतयुग को कहा ही जाता है _____। वहाँ बहुत साहूकार ____ -वान थे। इन जैसा _____ विश्व का मालिक कोई हो न सके। अभी तुम जानते हो हम ही यह थे, तो कितनी ____ होनी चाहिए।
° _सतोप्रधान_, _बेस्ट_, _स्वर्ग_, _धन_, _सुखी_, _खुशी_

4. सुखधाम में कभी काल आता नहीं है, अमरपुरी बन जाती है। तुम मृत्यु पर जीत पाते हो।(सर्वशक्तिमान, सर्प 🐍का मिसाल, एक चोला बदलकर दूसरा)। *इससे सम्बंधित कौन-सी कहानी* बाबा ने याद की?
° कोई ने पूछा *पहले तुमको सुख चाहिए या दु:ख?* तो बोला सुख चाहिए। सुख में जायेंगे फिर तो वहाँ कोई जमदूत 😈(दुःख) आदि आ नहीं सकेंगे। यह भी एक कहानी है।

5. बाबा कहते हैं तुम समझो हमको _____ पढ़ाते हैं। हम पतित-पावन गॉड फादरली _____ हैं, इसमें सब आ गया। पतित-पावन भी हो गया, गुरू टीचर भी हो गया। _____ भी हो गया। सो भी निराकार है। यह है _____ गॉड फादरली वर्ल्ड युनिवर्सिटी। कितना अच्छा नाम है। ईश्वर की कितनी महिमा करते हैं, और चीज़ क्या है! ____ । उनमें पार्ट कितना भरा हुआ है।
° _भगवान_, _स्टूडेन्ट_, _फादर_, _इनकारपोरियल_, _बिन्दी_

6. बाप कहते हैं पुरूषार्थ ऐसा करो जो नम्बर- ____ में जाओ। टीचर का काम है सावधान करना। पास विद् _____ होना है। यह बेहद की पाठशाला है। यह है ही _____ स्थापन करने के लिए राजयोग। अब बाप कहते हैं देह होते हुए, गृहस्थ व्यवहार में रहते हुए ______ याद करो। अब फिर तेज रफ्तार चाहिए – ______ की। तेज याद करने वाले का ही ऊंच नाम होगा। _____ माला का दाना बनेंगे।
° _वन_, _ऑनर_, _राजाई_, _मामेकम्_, _याद_, _विजय_

7. _____ होता ही है सत द्वारा, सत बनने के लिए। सत्य एक ही बाप है। बाप बैठ नर से नारायण बनने की _____ सुनाते हैं, जिससे तुम नारायण बन जाते हो। फिर ____ मार्ग में (यादगार) सत्य नारायण की कथा बड़े प्यार से सुनते हैं।
° _सतसंग_, _कथा_, _भक्ति_

8. आत्मा भी है, देह भी है। ऐसे नहीं कि बिगर देह बैठे हो। परन्तु बाप कहते हैं देह-अभिमान छोड़ *देही-अभिमानी बनकर बैठो*। अपने को आत्मा समझो। क्यों?
° देही-अभिमान है *शुद्ध* , देह-अभिमान है अशुद्ध। तुम जानते हो *देही-अभिमानी बनने से हम शुद्ध पवित्र बन रहे* हैं। (देह-अभिमानी बनने से अशुद्ध, अपवित्र बन गये थे। पुकारते भी हैं हे पतित-पावन आओ। पावन दुनिया थी। अभी पतित है फिर से पावन दुनिया जरूर होगी। सृष्टि का चक्र फिरेगा। सुप्रीम रूह ने हमे आप समान स्वदर्शन चक्रधारी बनाया है। सतयुग में यह ज्ञान देने की दरकार नहीं रहेगी। ज्ञान से वर्सा मिल गया। बाप श्रीमत देते हैं ऐसे तुम श्रेष्ठ परिस्तानी बनेंगे।)

9. *धारणा* की कौन-सी पॉइंट्स आज बाबा ने सुनाई? _(डबल अहिंसक, दुःख ने देना)_ (2)
° तुम अभी डबल अहिंसक बनते हो। *अहिंसा परमो देवी-देवता धर्म* डबल अहिंसक गाया हुआ है।
° किसको हाथ लगाना, दु:ख देना वह भी हिंसा हो गई। बाप रोज़-रोज़ समझाते हैं – *मन्सा-वाचा-कर्मणा किसको दु:ख नहीं देना* है। मन्सा में आयेगा जरूर। (सतयुग में मन्सा में भी नहीं आता। यहाँ तो मन्सा-वाचा-कर्मणा आता है। यह अक्षर तुम वहाँ सुनेंगे भी नहीं।)

10. बाप का कौन-सा *नाम भल साधारण* है लेकिन कर्तव्य बहुत महान है? (2)
° बाबा को कहते हैं *बागवान-खिवैया*। यह नाम कितना साधारण है लेकिन डूबने वाले को पार ले जाना, यह कितना *महान कर्तव्य* है। (जैसे तैरने वाले *तैराक* 🏊‍♂️ एक-दो को हाथ में हाथ दे पार ले जाते हैं, ऐसे बाप का हाथ मिलने से तुम स्वर्गवासी बन जाते हो। अभी तुम भी मास्टर खिवैया हो। तुम हरेक की नईया को पार लगाने का रास्ता बताते हो।)

11. माला के दाने तो बहुत हैं। ऊपर में बाबा है फूल, फिर है युगल मेरू। फूल को सब नमस्ते करते हैं। एक-एक दाने को नमस्ते करते। परन्तु *रूद्र यज्ञ रचते हैं तो उनमें भी जास्ती पूजा शिव की करते* हैं। सालिग्रामों की इतनी नहीं करते। क्यों?
° *शिवबाबा द्वारा ही सालिग्राम ऐसे तीखे* बने हैं, जैसे अब तुम पावन बन रहे हो।

12. कोई भी बुजुर्ग को बापू जी कह देते हैं। यह (शिवबाबा) तो सबका _____ है। सबका फादर वह एक है। ______ को फादर थोड़ेही कह सकते। गाते भी हैं _____ -हुड। ईश्वर को सर्वव्यापी कहने से ______ -हुड हो जाता है।
° _बाप_, _बच्चे (कृष्ण)_, _ब्रदर_, _फादर_

13. उन्हों (लक्ष्मी-नारायण) को *भगवान-भगवती* भी कहते हैं, यह ठीक है। _(सही / गलत)_
° नहीं, बाप कहते भगवान-भगवती नहीं कह सकते। *भगवान तो एक ही मैं हूँ!*

14. वह भी परम आत्मा है। उस आत्मा का नाम शिव है, वह है निराकार। न सूक्ष्म, न स्थूल शरीर है। *उनका कोई भी आकार वा रूप नहीं* है। _(सही / गलत)_
° गलत (जिसका नाम है, आकार भी जरूर है। नाम-रूप बिगर कोई चीज़ है नहीं। परमात्मा बाप को नाम-रूप से न्यारा कहना कितना बड़ा अज्ञान है। बाप भी नाम-रूप से न्यारा, बच्चे भी नाम-रूप से न्यारे फिर तो कोई सृष्टि ही न हो।)

15. मीठे बच्चे – तुम्हें एक-एक को ____ -स्तानी बनाना है, तुम हो सबका _____ करने वाले, तुम्हारा कर्तव्य है गरीबों को _____ बनाना। जब तक तुम्हारे हाथ में _____ न मिले तब तक स्वर्गवासी बन न सकें।
° _परि_, _कल्याण_, _साहूकार_, _हाथ_

16. तुम बच्चों को बड़ी-बड़ी सभाओं में समझाना पड़ेगा। हमेशा *कहाँ भी भाषण पर जाओ तो* जिस टॉपिक पर भाषण करना है, उस पर क्या पूर्व तैयारी करनी है? (2)
° *विचार सागर मंथन कर लिखना* चाहिए। तुमको तो टॉपिक पर समझाना है। पहले लिखकर *फिर पढ़ना* चाहिए। (नहीं तो भाषण करने के बाद फिर स्मृति में आता है – यह-यह प्वाइंट्स नहीं बताई। यह समझाते थे तो अच्छा था।)

17. भाषण में *पहले-पहले* क्या बोलना चाहिए? (2)
° *भाई-बहनों आत्म-अभिमानी होकर बैठो*। (तुम आत्मा अविनाशी हो। अभी बाप आकर ज्ञान दे रहे। बाप कहते हैं मुझे याद करने से विकर्म विनाश होंगे। कोई भी देहधारी को मत याद करो। अपने को आत्मा समझो, हम वहाँ के रहने वाले हैं। हमारा बाबा कल्याणकारी शिव है, हम आत्मायें उनके बच्चे हैं। बाप कहते हैं आत्म-अभिमानी बनो। मैं आत्मा हूँ।)
° *शिवबाबा कहते हैं* अपने को आत्मा समझ शिवबाबा को याद करो। जितना मुझे याद करेंगे उतना सतोप्रधान बन ऊंच पद पायेंगे। एम ऑब्जेक्ट भी सामने है। पुरूषार्थ से ऊंच पद पाना है। (वह भी जानते हैं हमसे पहले पैराडाइज था। भारत सबसे प्राचीन है। परन्तु कब था, वह कोई नहीं जानते।)

18. तुम्हारे यादगार सामने खड़े हैं। नीचे राजयोग की तपस्या, ऊपर में राजाई खड़ी है। *नाम भी देलवाड़ा बहुत अच्छा* है। क्यों?
° *बाप सबकी दिल लेते हैं*। सबकी सद्गति करते हैं। (दिल लेने वाला कौन है। यह थोड़ेही किसको पता है। ब्रह्मा का भी बाप शिवबाबा। सबकी दिल लेने वाला बेहद का बाप ही होगा। तत्वों आदि सबका कल्याण करते हैं।)
° तुम्हारा यादगार देलवाड़ा मन्दिर देखो कैसा अच्छा है। जरूर *संगमयुग पर दिल ली होगी*। (आदि देव और देवी, बच्चे बैठे हैं। यह है रीयल यादगार। उनकी हिस्ट्री-जॉग्राफी कोई नहीं जानते सिवाए तुम्हारे। लक्ष्मी-नारायण के मन्दिर में जायेंगे तो भी तुम कहेंगे यह हम बन रहे हैं।)

19. बाबा ने समझाया है – सारी सृष्टि पर इस समय _____ का राज्य है। ____ भी मनाते हैं, कितना खुश होते हैं। बाप कहते हैं सब बच्चों को दु:ख से छुड़ाने मुझे भी पुरानी _____ की दुनिया में आना पड़ता है।
° _रावण_, _दशहरा_, _रावण_

20. और धर्म वालों के शास्त्र आदि कायम हैं। तुम्हारे ज्ञान का कुछ नहीं रहता। क्यों?
° *तुमको ज्ञान मिलता ही है संगम पर, फिर विनाश हो जाता* है तो कोई शास्त्र नहीं रहता। (शास्त्र हैं भक्ति मार्ग की निशानी। यह है ज्ञान।)

21. गंगा *पतित-पावनी* है। _(सही / गलत)_
° नहीं, बाप कहते हैं *इस समय 5 तत्व सब तमोप्रधान* पतित हैं। (सारा किचड़ा आदि वहाँ जाए पड़ता है। मछलियां आदि भी उसमें रहती हैं। पानी की भी एक जैसे दुनिया है। पानी में जीव कितने रहते हैं। तो गांव हो गया ना। गांव को फिर पतित-पावन कैसे कहेंगे। बाप समझाते हैं – मीठे-मीठे बच्चे, पतित-पावन एक बाप है। तुम्हारी आत्मा और शरीर पतित हो गया है, अब मुझे याद करो तो पावन बन जायेंगे। तुम विश्व के मालिक, खूबसूरत बन जाते हो।)

22. भक्ति अथाह है, देवियों आदि की पूजा में कितना खर्चा करते हैं। बाप कहते हैं इनसे *सिर्फ अल्पकाल का सुख* है। क्यों?
° जैसी-जैसी भावना रखते हैं वह पूरी होती है। देवियों को सजाते-सजाते कोई को साक्षात्कार हुआ बस बहुत खुश हो जाते। फायदा कुछ भी नही, *मुक्त-जीवनमुक्ति वा श्रेष्ठ जीवन बनाने की बात नहीं*।)

Answers from Sakar Murli 16-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 16-10-2020*

1. यथार्थ _____ वृत्ति का सहज अर्थ है – जितना न्यारा उतना प्यारा।
° _वैराग्य_

2. *रहमदिल बाप के रहमदिल बच्चो* की क्या निशानियाँ है? (2)
° किसी को भी भिखारी के रूप में देखेंगे तो उन्हें रहम आयेगा कि *इस आत्मा को भी ठिकाना मिल जाए, इसका भी कल्याण हो जाए*।
° उनके *सम्पर्क में जो भी आयेगा उसे बाप का परिचय* जरूर देंगे। (जैसे कोई घर 🏡 में आता है तो पहले उसे पानी 💧पूछा जाता है, ऐसे ही चला जाए तो बुरा समझते हैं, ऐसे जो भी सम्पर्क में आता है उसे बाप के परिचय का पानी जरूर पूछो अर्थात् *दाता के बच्चे दाता बनकर कुछ न कुछ दो* ताकि उसे भी ठिकाना मिल जाए।)

3. “मीठे बच्चे – तुम्हें संगम पर सेवा करके _____ लायक बनना है फिर भविष्य में पुरूषोत्तम बनने से तुम ____ लायक बन जायेंगे”
° _गायन_, _पूजा_

4. *बाप की दिल* ♥️ पर कब चढ़ेंगे? (2)
° जब यह *देह-अभिमान की बीमारी समाप्त* हो जाए। (जिस कारण ही सभी विकारों ने महारोगी बनाया)
° दिल पर चढ़ना है तो *विशाल बुद्धि* बनो, *ज्ञान चिता* पर बैठो। *रूहानी सेवा* में लग जाओ और वाणी चलाने के साथ-साथ *बाप को अच्छी रीति याद* करो।

5. *अपनी दिल ❤️ से* क्या पूछ सकते? (2)
° हम कितनों को *आपसमान* बनाते हैं? मास्टर पतित-पावनी बन सबको पावन (राज़-राज़ेश्वर) बनाने की सेवा कर रहे हैं?
° हमारे में कोई अवगुण तो नहीं है? *दैवीगुण* कहाँ तक धारण किये हैं?

6. छोटे बच्चे अल्फ बे पढ़ते हैं ना। तुम बैठे हो तुमको भी *अल्फ बे* पढ़ा रहे हैं। कैसे?
° अल्फ (शिवबाबा) और बे (बादशाही का वर्सा)। बाप कहते हैं मुझे *याद करो तो तुम विश्व के मालिक* बनेंगे। (कोई भी आसुरी काम नहीं करना है। दैवीगुण धारण करने हैं।)

7. बाप तुम्हें विश्व का मालिक बनाते हैं, मंजिल बहुत बड़ी है। तो इस अन्तिम समय में बाप कौन-सा *फरमान* करते?
° *मामेकम् याद करो*। देहधारियों को याद नहीं करना है। (मैं तो विदेही हूँ, इसमें बैठ तुमको ज्ञान देता हूँ।)

8. बाप कहते हैं मुझे *पुराने तन में पुरानी राजधानी में* आना पड़ता। _(सही / गलत)_
° *सही* (अभी यह रावण की राजधानी है। तन भी पराया है क्योंकि इस शरीर में तो पहले से ही आत्मा है। मैं पराये तन में प्रवेश करता हूँ। नहीं तो नाम पड़ता, बदलता। मुझे तो कहते ही हैं शिवबाबा।)

9. गीत 🎼:-जाग सजनियां जाग…….. नवयुग अर्थात् नई दुनिया सतयुग आया। अब *किसको कहते हैं जागो?*
° *आत्माओं को।* (क्योंकि आत्मायें घोर अन्धियारे में सोई पड़ी हैं। कुछ भी समझ नहीं। बाप को ही नहीं जानते। अब बाप जगाने आये हैं। अभी तुम बेहद के बाप को जानते हो। उनसे बेहद का सुख मिलना है नये युग में। सतयुग-स्वर्ग को नया, कलियुग नर्क को पुराना युग कहेंगे। नया युग फिर पुराना होता, रावण आता, 5000 वर्ष का चक्र आदि)

10.बाबा ने कहा जगत अम्बा वा लक्ष्मी की बायोग्राफी के *कान्ट्रास्ट* पर समझा सकते। तो क्या है कान्ट्रास्ट? (5)
° लक्ष्मी को *सतयुगी* देवी और जगत अम्बा को *संगमयुगी* ब्राह्मणी कहेंगे। (ब्राह्मण संगम पर ही होते हैं। इस संगमयुग को कोई नहीं जानते। प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा नयी पुरूषोत्तम सृष्टि रची जाती है।)
° वही *जगत अम्बा* फिर लक्ष्मी बनती है। फिर *लक्ष्मी* सो 84 जन्मों के बाद जगत अम्बा होगी।
° जैसे ब्रह्मा को इतनी भुजायें देते हैं (बच्चों का प्रतीक), *अम्बा के तो सब बच्चे हैं*। माँ-बाप ही प्रजापिता बनते हैं। (लक्ष्मी-नारायण को कभी सतयुग में जगतपिता जगत माता नहीं कहेंगे।)
° *जगत अम्बा* सरस्वती है एक। *नाम कितने रख दिये* हैं – दुर्गा, काली आदि।
° *प्रजापिता ब्रह्मा की बेटी* है सरस्वती, उनको अम्बा कहते हैं। (बाकी हैं बच्चे और बच्चियां। हैं सब एडाप्टेड, मुख वंशावली, मेरे है कहकर एडाप्टेड)

11. शिवबाबा बेहद का बाप है, *आत्माओं को एडाप्ट* करते हैं। _(सही / गलत)_
° गलत ( *आत्मायें तो हैं ही* । उनको एडाप्ट नहीं किया जाता है। बाप कहते हैं तुम आत्मायें सदैव मेरे बच्चे हो। फिर अभी मैं आकर *प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा बच्चों को एडाप्ट* करता हूँ। आत्माओं को नहीं एडाप्ट करते, बच्चे और बच्चियों को करते हैं। यह भी बड़ी सूक्ष्म समझने की बातें हैं।)

12. इन (ब्रह्मा-सरस्वती की) बातों को समझने से *क्या प्राप्ति* है?
° तुम यह लक्ष्मी-नारायण बनते हो। कैसे बनें, यह हम समझा सकते हैं। *क्या ऐसे कर्म किये जो यह विश्व के मालिक बनें।* तुम प्रदर्शनी आदि में भी पूछ सकते हो। तुमको मालूम है इन्हों ने यह *स्वर्ग की राजधानी कैसे ली* ।

13. *भारत और बाप* की इतनी अपरमअपार महिमा क्यों हैं?
° बेहद का बाप कहते हैं मैं यहाँ भारत में आता हूँ। यहाँ *आकर नर्क को स्वर्ग बनाते हैं, सबको शान्ति देते* हैं।

14. यह है भी गीता का युग। _______ लड़ाई भी बरोबर हुई थी। _____ एक को सिखाया होगा क्या, यहाँ तो ढेर पढ़ते हैं। तुम कहते हो ज्ञान सागर बाप द्वारा हम ज्ञान सीख रहे हैं, राज-राजेश्वरी बनने के लिए। ज्ञान सागर _____ भी सिखलाते हैं, राज- _____ भी सिखलाते हैं।
° _महाभारत_, _राजयोग_, _ज्ञान_, _योग_

15. सतयुग में इतने *थोड़े मनुष्य*, कलियुग में इतने *बहुत मनुष्य* हैं। यह कैसे समझाएं? _(कौन-सा चित्र)_
° इसके लिए फिर *गोला* भी जरूर चाहिए।

16. प्रदर्शनी में इतने सबको बुलाते हैं। ______ को तो कभी कोई ने निमंत्रण नहीं दिया है। तो ऐसे-ऐसे विचार चलाने पड़ें, इसमें बड़ी _____ -बुद्धि चाहिए।
° _कस्टम कलेक्टर_, _विशाल_

17. ब्रह्मा बाप का *रिगार्ड बढ़ाने* लिए बाबा ने कौन-सी बातें सुनाई? (2)
° *हुसेन के घोड़े को कितना सजाते* हैं। (पटका कितना छोटा होता, घोड़ा कितना बड़ा होता है। आत्मा भी कितनी छोटी बिन्दी है, उनका श्रृंगार कितना बड़ा है।)
° यह *अकालमूर्त का तख्त* है ना।

18. *सर्वव्यापी* की टॉपिक पर बावा ने कौन-सी पॉइंट सुनाई?
° बाप कहते हैं मैं आत्माओं को राजयोग *सिखलाता हूँ फिर सर्वव्यापी कैसे* होंगे। ( *बाप-टीचर-गुरू सर्वव्यापी कैसे* होंगे। बाप कहते हैं मैं तो तुम्हारा बाप हूँ फिर ज्ञान सागर हूँ। तुमको बेहद की हिस्ट्री-जॉग्राफी समझने से बेहद का राज्य मिल जायेगा।)

19. माया एकदम ____ से पकड़ लेती है। काला _____ कर लिया। तुम औरों को शिक्षा देकर खुद गिरते हो तो हज़ार गुणा _____ चढ़ जाता है। कहते हैं माया ने ____ मार दिया। माया ऐसा ____ मारती है जो एकदम अक्ल ही गुम कर देती है।
° _नाक_, _मुँह_, _पाप_, _थप्पड़_, _घूँसा_

20. समझदार बन _____ के तूफानों से कभी हार नहीं खाना है। ____ धोखा देती हैं इसलिए अपनी सम्भाल करनी है। कोई भी विकारी बातें इन _____ से नहीं सुननी हैं। हम आत्मा हैं। बाप हम _____ को पढ़ाते हैं।
° _माया_, _आंखें_, _कानों_, _आत्माओं_

21. पुरानी दुनिया में इतने अनेक प्रकार के *बॉम्ब्स* 💣 क्यों बनाये हैं?
° पुरानी दुनिया के *विनाश* लिए यह बॉम्ब्स काम आयेंगे।(रखने के लिए थोड़ेही बनाये हैं। यह पुरानी दुनिया गई कि गई।)

Answers from Sakar Murli 15-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 15-10-2020*

1. *लवलीन स्थिति* 💛 का अनुभव करने के लिए _____ की युद्ध समाप्त करो।
° _स्मृति-विस्मृति_

2. आप बच्चे *जग की ज्योति* हो, आपके सेकण्ड के *स्व-परिवर्तन से विश्व-परिवर्तन* होता, इतना महत्व है। तो अब क्या करना है? (2)
° इसलिए अपने महत्व वा कर्तव्य को जानकर *बीती सो बीती* कर सदा जागती-ज्योत बनो।
° सिर्फ प्रैक्टिस करो *अभी-अभी कर्मयोगी, अभी-अभी कर्मातीत स्टेज*। (जैसे आपकी रचना कछुआ 🐢 सेकण्ड में सब अंग समेट लेता है। ऐसे आप मास्टर रचता समेटने की शक्ति के आधार से *सेकण्ड में सर्व संकल्पों को समाकर एक संकल्प में स्थित* हो जाओ।)

3. सर्व का सद्गति दाता निराकार रूहानी बाप बैठ रूहानी बच्चों को पहले समझाते अपने को आत्मा निश्चय कर *देही-अभिमानी बनो, तब बाप को याद कर सकेंगे*। इसका वापिस घर जाने से क्या सम्बंध है?
° बाप कहते हैं तुमको वापिस जाना है। अपने को आत्मा समझो, आत्मा समझ बाप को याद करो *तब जन्म-जन्मान्तर के पाप भस्म हों, और कोई उपाय नहीं।* आत्मा ही पतित, आत्मा ही पावन बनती है। (शान्तिधाम ओर सतयुग में आत्मा पावन थी, कलियुग में पतित बन चिल्लाते – हे पतित-पावन आओ।)

4. दैवीगुण भी धारण करने हैं। बहुत मीठे, शान्त, अति ____ स्वभाव का बनना है। कभी भी क्रोध नहीं करना। मुख से सदैव ____ ही निकलें, कांटा नहीं। _____ -पना भी देह-अभिमान है, रूसना, रोना यह सब _____ संस्कार तुम बच्चों में नहीं होने चाहिए। दु:ख-सुख, मान-अपमान सब ____ करना है। अपनी आंखों 👀 को बहुत-बहुत _____ बनाना है।
° _मीठे_, _फूल_, _नाज़ुक_, _आसुरी_, _सहन_, _सिविल_

5. देह-अभिमान होने कारण एक दो की खामियां देखते खुद में अनेक प्रकार की ______ रह जाती हैं।
° _खामियां_

6 *सर्विस में ढीलापन* आने का मुख्य कारण क्या है? (2)
° जब देह-अभिमान के कारण एक दो की *खामियां देखने* लगते हैं। *आपस में अनबनी* होना भी देह-अभिमान है। मैं फलाने के साथ नहीं चल सकता, मैं यहाँ नहीं रह सकता…… यह सब *नाज़ुकपना* है। यह बोल मुख से निकालना माना कांटे बनना, *नाफरमानबरदार* बनना। (बाबा कहते बच्चे, तुम रूहानी मिलेट्री हो इसलिए ऑर्डर हुआ तो फौरन हाज़िर होना चाहिए। कोई भी बात में आनाकानी मत करो।)

7. बाबा का *हुक्म-आज्ञा-श्रीमत* क्यों माननी है?
° श्रीमत मिलती है ऐसा-ऐसा करना है तो समझना चाहिए कि *शिवबाबा की श्रेष्ठ मत* है। (वह है ही सद्गति दाता। दाता कभी उल्टी मत नहीं देंगे।)
° बड़े से बड़ी गवर्मेन्ट बेहद के बाप का ऑर्डर मिलता है, जिसका *राइट हैण्ड फिर धर्मराज* है। उनकी श्रीमत पर न चलने से फिर गिर पड़ते हैं।
° बाबा का हुक्म है, अगर हम नहीं मानेंगे तो *एकदम चकनाचूर* हो जायेंगे। 21 जन्मों की *राजाई में रोला* पड़ जायेगा।

8. मुझे ____ के बिगर तो कभी कोई जान न सके। कल्प पहले वाले ही _____ – ____ निकलते रहेंगे। यह हैं बिल्कुल ____ – ____ बातें। _____ भी जरूर रोज़ पढ़नी है अथवा सुननी है। मुरली नहीं पढ़ी गोया _____ पड़ गई।
° _बच्चों_, _आहिस्ते_, _आहिस्ते_, _नई_, _नई_, _मुरली_, _अबसेन्ट_

9. यह है गीता का युग। परन्तु शास्त्रों में इस *संगमयुग का वर्णन नहीं* है। _(सही / गलत)_
° *सही* , क्योंकि गीता को ही द्वापर में ले गये हैं। (जब राजयोग सिखाया तो जरूर संगम होगा ना। परन्तु किसकी भी बुद्धि में यह बातें नहीं हैं। अभी तुम्हें ज्ञान का नशा चढ़ा हुआ है।)

10. बाप कहते हैं मैं इनके बहुत जन्मों के अन्त में प्रवेश करता हूँ। इनसे भी देखो _____ ऊंच चली जाती है। गायन भी है – ____ को आगे रखा जाता है। पहले ____ फिर नारायण, यथा राजा रानी तथा प्रजा हो जाती है। तुमको भी ऐसा ____ बनना है।
° _लक्ष्मी_, _फीमेल_, _लक्ष्मी_, _श्रेष्ठ_

11. यह रूहानी नॉलेज, रूहानी बाप ही रूहों को देते हैं, राजयोग सिखाते। यह भी लिखते – रूहानी बाप स्प्रीचुअल नॉलेज रूहानी बच्चों को देते हैं। और दुनिया में सभी *कौन-से घोर अन्धियारे* में हैं?
° समझते हैं – *कलियुग* तो अभी *छोटा बच्चा*, रेगड़ी पहन रहा है। तो मनुष्य और ही नींद में सोये हुए हैं। (इस समय तो सारी दुनिया में रावण राज्य है। सभी कहते हैं रामराज्य चाहिए। अब है संगम। जब इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य था तो रावण राज्य नहीं था, फिर चेन्ज कैसे होती है, यह कोई नहीं जानते।)

12. अभी तुम पारसबुद्धि बनते हो तो पत्थर की _____ नहीं कर सकते हो। चित्रों के आगे जाकर ____ टेकते हैं। कुछ भी समझते नहीं। अब तुमको ज्ञान मिलता है तो _____ से वैराग्य आ जाता है। यह दुनिया ही बदलती है। वहाँ है ही ____। मनुष्य बन्दरबुद्धि 🐒 बन गये हैं, उनको मैं आकर _____ लायक बनाता हूँ।
° _पूजा_, _माथा_, _भक्ति_, _पूज्य_, _मन्दिर_

13. बाबा से कोई *माथा टेकते* 🛐, तो बाबा को बड़ा अच्छा लगता। _(सही / गलत)_
° गलत (बाप कहते हैं – *बच्चे, तुम माथा क्यों टेकते हो*। आधाकल्प तुमने माथा भी घिसाया, पैसे भी गँवाये, मिला कुछ नहीं। माया ने एकदम माथा मूड लिया है। कंगाल बना दिया है। फिर बाप आकर सबका माथा ठीक कर देते हैं।)

14. जो पीछे आते हैं तो सुख भी थोड़ा, दु:ख भी थोड़ा मिलता है। ____ -वासियों को सुख बहुत तो दु:ख भी बहुत है। शुरू में ही कितने धनवान एकदम विश्व के _____ होते हैं। और धर्म वाले कोई पहले थोड़ेही ____ -वान होते हैं। _____ -श्रद्वालू भी भारत है। यह भी ड्रामा बना हुआ है। बाप कहते हैं मैंने जिसको हेविन बनाया, वह ____ बन गया है।
° _भारत_, _मालिक_, _धन_, _अन्ध_, _हेल_

15. बाप कहते हैं मैं आया हूँ तुमको नर से नारायण बनाने। परन्तु *कोटो में कोई* ही निकलते – राजाई पद पाने वाले। उसमें भी 8 रत्न मुख्य गाये जाते हैं। *8 हैं पास विद् ऑनर्स*, सो भी नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार। ऐसा क्यों?
° क्योंकि *देह-अभिमान को तोड़ने में बड़ी मेहनत लगती* है। देह का भान बिल्कुल निकल जाए। (कोई-कोई पक्को का भी ऐसे होता। बैठे-बैठे देह का त्याग कर देते हैं। बैठे-बैठे ऐसे शरीर छोड़ते हैं, वायुमण्डल एकदम शान्त हो जाता है।)

16. प्रदर्शनी 🎪 आदि में भी *पहले-पहले क्या समझाना* है?
° तुम *अल्फ (बाप) का परिचय दो*। (पहले अल्फ और बे। बाप तो एक ही निराकार है। बाप रचयिता ही बैठ रचना के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान समझाते हैं। वही बाप कहते हैं मामेकम् याद करो। देह के सम्बन्ध छोड़ *अपने को आत्मा समझ मामेकम् याद करो*। बाप का परिचय तुम देंगे फिर किसको हिम्मत नहीं रहेगी प्रश्न-उत्तर करने की।)
° *पहले बाप का निश्चय पक्का* हो जाए तब बोलो 84 जन्म ऐसे लिये जाते हैं। चक्र को समझ लिया, बाप को समझ लिया फिर कोई प्रश्न उठेगा नहीं। (बाप का परिचय देने बिगर बाकी तुम तिक-तिक करते हो तो उसमें तुम्हारा टाइम ⌚बहुत वेस्ट हो जाता है। गले ही घुट जाते हैं। सिम्पुल रीति और धीरे से समझाओ।)

17. जो ____ -अभिमानी होंगे वही अच्छा समझा सकेंगे। बड़े-बड़े म्युज़ियम में अच्छे-अच्छे समझाने वालों को _____ देनी पड़े। थोड़े रोज़ अपना _____ छोड़ मदद देने आ जाना है।
° _देही_, _मदद_, _सेन्टर_

18. पिछाड़ी में सेन्टर सम्भालने कोई को बिठा दो। अगर गद्दी सम्भालने लायक *कोई को आपसमान नहीं बनाया है* , तो बाबा क्या समझेंगे? (4)
° बाप समझेंगे कोई काम के नहीं, *सर्विस नहीं की*। (बाबा को लिखते हैं सर्विस छोड़ कैसे जायें! अरे बाबा हुक्म करते हैं फलानी जगह प्रदर्शनी है सर्विस पर जाओ।)
° अगर गद्दी लायक किसको नहीं बनाया है तो *किस काम के*। (बाबा ने हुक्म किया – झट भागना चाहिए।)
° महारथी ब्राह्मणी उनको कहा जाता है। बाकी तो सब हैं *घोड़ेसवार, प्यादे* ।
° सबको सर्विस में मदद देनी है। इतने वर्ष में तुमने किसको आपसमान नहीं बनाया है तो *क्या करते थे* । (इतने समय में मैसेन्जर नहीं बनाया है, जो सेन्टर सम्भालें।)

19. तुम सारे विश्व की सेवा करते हो ना। तुम बच्चों को सारे विश्व पर *घेराव* डालना है। किस बात का?
° *पतित दुनिया को पावन* बनाना यह घेराव डालना है ना। *सभी को मुक्ति-जीवनमुक्ति* धाम का रास्ता बताना है, *दु:ख से छुड़ाना* है। अच्छा!

Answers from Sakar Murli 14-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 14-10-2020*

1. निर्मल स्वभाव _____ की निशानी है। निर्मल बनो तो _____ मिलेगी।
° _निर्मानता_, _सफलता_

2. *सम्पूर्णता की आंख* खोलना अर्थात् क्या?
° *सम्पूर्ण स्टेज तक पहुंचना* अर्थात् सम्पूर्णता की आंख खोलना!

3. जब आप जहान के ___ अपनी सम्पूर्णता की आंख खोलेंगे तब सेकण्ड में विश्व परिवर्तन होगा। फिर आप _____ मूर्त आत्मायें अपनी नज़र से भक्त आत्माओं को निहाल कर सकेंगी, जिनकी लम्बी क्यू है। इसलिए सम्पूर्णता की आंख खुली रहे। आंखों का मलना और संकल्पों का _____ व ______ खाना बन्द करो तब दर्शनीय _____ बन सकेंगे।
° _नूर_, _दर्शनीय_, _घुटका_, _झुटका_, _मूर्त_

4. बुद्धि को पवित्र बनाने के लिए याद की यात्रा में ____ रहना है। कर्म करते भी एक _____ याद रहे – तब विकर्माजीत बनेंगे। बाबा _____ पर जाते तो भी ख्याल रहता, हम याद में नहीं रहेंगे तो बाबा क्या कहेंगे। याद से आत्मा पवित्र होगी, अविनाशी ज्ञान _____ भी जमा होगा। फिर अगर अपवित्र बन जाते तो सारा ज्ञान बह जाता। ______ ही मुख्य है। बाप तो अच्छी-अच्छी बात ही समझाते हैं।
° _मस्त_, _माशूक_, _पिकनिक_, _धन_, _पवित्रता_

5. बाप तो है ही टीचरों का ______ , बापों का _____ । यह तो तुम बच्चे जानते हो हमारा बाबा बहुत _____ है। ऐसे बाप को तो बहुत _____ करना है। पढ़ना भी पूरा है। बाप को याद नहीं करेंगे तो ____ नष्ट नहीं होंगे। बाप सभी आत्माओं को साथ ले जायेंगे।
° _टीचर_, _बाप_, _प्यारा_, _याद_, _पाप_

6. 5 हज़ार वर्ष बाद एक ही बार संगम पर बाप आकर बच्चों को पढ़ाकर पावन बनाकर नई पावन खूबसूरत दुनिया बनाते (लक्ष्मी-नारायण का राज्य)। तो आत्म-अभिमानी जरूर बनना है। अपने को आत्मा समझो, *आत्मा सो परमात्मा*। _(सही / गलत)_
° नहीं, अपने को आत्मा समझ परमपिता *परमात्मा शिव को याद* करना है। (याद की यात्रा मुख्य है, जिससे ही तुम पतित से पावन बनते हो। पहले अपने को आत्मा समझेंगे तब पारलौकिक बाप को याद कर सकेंगे।)

7. सतयुग में *एक ही* लौकिक दैवी *बाप* कहेंगे। ऐसे क्यों? _(परलौकिक बाप?)_
° वहाँ पारलौकिक बाप को याद नहीं करते हैं क्योंकि *सुख* है। (भक्ति मार्ग में फिर दो बाप बन जाते हैं। लौकिक और पारलौकिक। दु:ख में सब पारलौकिक बाप को याद करते हैं। सतयुग में भक्ति होती नहीं। वहाँ तो है ही ज्ञान की प्रालब्ध, आधाकल्प सुख का वर्सा!)

8. ज्ञान मार्ग है ____ का मार्ग, जिससे तुम 21 जन्म समझदार बन जाते हो। तुम संगमयुगी हो शुद्ध ____ भोजन खाने वाले। देवतायें कभी _____ आदि थोड़ेही खाते हैं। इन देवताओं को कहा ही जाता है निर्विकारी। इस संगम पर ही तुम _____ देवी-देवता बनने की मेहनत करते हो। यह राजाई स्थापन हो रही है। बाप कहते हैं – मैं तुमको राजाओं का राजा बनाता हूँ तो ____ जरूर बनानी पड़े। अभी भी तुम गुल-गुल (फूल) बन अच्छे घर में ____ लेते रहेंगे।
° _समझ_, _पवित्र_, _प्याज़_, _पुरूषोत्तम_, _प्रजा_, _जन्म_

9. जब तक यहाँ न आयें तब तक कुछ भी समझ न सकें कि अभी ____ है वा कलियुग है। बाप कहते हैं ज्ञान सागर मैं ही हूँ, जो इस देवी-देवता धर्म के होंगे वह सब आकर फिर से अपना ____ लेंगे। अभी _____ लग रही है – तुम समझ जायेंगे। मीठे बच्चे – संगमयुग पर ही तुम्हें ______ बनने की मेहनत करनी पड़ती सतयुग अथवा कलियुग में यह मेहनत होती नहीं।
° _संगम_, _वर्सा_, _सैपलिंग_, _आत्म-अभिमानी_

10. सतयुग में कभी कोई ऐसे नहीं कहेंगे कि *हमको शान्ति चाहिए।* _(सही / गलत)_
° *सही* (बाप तुमको ऐसा साहूकार बना देते हैं जो देवताओं को भगवान से कोई चीज़ मांगने की दरकार नहीं रहती। यहाँ तो दुआ भी मांगते हैं ना।)

11. यह है बहुत छोटा युग इसलिए इनको _____ युग कहा जाता है। इनको कहा ही जाता है गीता का युग। तुम ____ -योग सीख रहे हो – जानते हो आदि सनातन देवी-देवता ____ का फाउन्डेशन लग रहा है। सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी दोनों _____ स्थापन हो रही हैं। ब्राह्मण ____ स्थापन हो चुका है। ब्राह्मण ही फिर सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी बनते हैं। जो अच्छी रीति मेहनत करेंगे वह सूर्यवंशी बनेंगे।
° _लीप_, _राज_, _धर्म_, _राजाई_, _कुल_

12. हमारा *बीजरूप* कौन है?
° परमात्मा *बाप* , क्योंकि बाप ही आकर स्वर्ग की स्थापना करते हैं ब्रह्मा द्वारा। (ब्रह्मा को प्रजापिता कहा जाता है। रचता नहीं कहेंगे। इन द्वारा बच्चे एडाप्ट किये जाते हैं। ब्रह्मा को भी तो क्रियेट करते हैं ना। बाप आकर प्रवेश कर यह रचते हैं। *शिवबाबा कहते हैं तुम मेरे बच्चे हो*।)

13. *श्रीकृष्ण का नाम* उनके माँ बाप से भी अधिक बाला है, क्यों? (3)
° क्योंकि श्रीकृष्ण से पहले जिनका भी जन्म होता है वो जन्म योगबल से नहीं होता। (कृष्ण के माँ बाप ने कोई *योगबल से जन्म* नहीं लिया है।)
° *पूरी कर्मातीत अवस्था* वाले राधे-कृष्ण ही हैं, वही सद्गति को पाते हैं। (जब सब पाप आत्मायें खत्म हो जाती हैं तब गुलगुल (पावन) नई दुनिया में श्रीकृष्ण का जन्म होता है, उसे ही वैकुण्ठ कहा जाता है।)
° संगम पर श्रीकृष्ण की आत्मा ने, *सबसे अधिक पुरुषार्थ* किया है इसलिए उनका नाम बाला है।

14. तुम कृष्ण को रिसीव करने वाले रहेंगे। भल तुम्हारा *छी-छी जन्म* होगा क्योंकि रावण राज्य है ना। _(सही / गलत)_
° *सही* , शुद्ध जन्म तो हो न सके। गुल-गुल (पवित्र) जन्म कृष्ण का ही पहले-पहले होता है। उसके बाद नई दुनिया बैकुण्ठ कहा जाता है। (कृष्ण बिल्कुल गुल-गुल नई दुनिया में आयेंगे।)

15. तुम किसको भी समझा सकते हो – हम यह बनने के लिए पढ़ रहे हैं। विश्व में इनका _____ अब स्थापन हो रहा है। हमारे लिए तो नई _____ चाहिए।
° _राज्य_, _दुनिया_

16. अभी तुमको *दैवी सम्प्रदाय* नहीं कहेंगे। _(सही / गलत)_
° *सही* (तुम हो ब्राह्मण सम्प्रदाय। देवता बनने वाले हो। दैवी सम्प्रदाय बन जायेंगे फिर तुम्हारी आत्मा और शरीर दोनों स्वच्छ होंगे। अभी तुम संगमयुगी पुरूषोत्तम बनने वाले हो।)

17. तुम्हारे में तो कितनी _____ रहती है। घर बैठे तुमको ____ मिल जाता है। _______ बाप से तुम इतनी ताकत लेते हो। तुम्हारे में भी पहले सुख की ताकत रहती है। फिर ____ हो जाती है।
° _ताकत_, _सुख_, _सर्वशक्तिमान्_, _गुम_

18. उन्हों _(साधु-सन्यासी)_ में भी पहले शान्ति की ताकत थी, *अब वह ताकत नहीं रही* है। बाबा ने यहां कौन-सा अच्छा तर्क सुनाया?
° *आगे तो सच कहते थे* कि रचता और रचना को हम नहीं जानते। अभी तो अपने को भगवान शिवोहम् कह बैठते हैं। (बाप समझाते हैं – इस समय सारा झाड़ तमोप्रधान है इसलिए साधुओं आदि का भी उद्धार करने मैं आता हूँ। यह दुनिया ही बदलनी है। सब आत्मायें वापिस चली जायेंगी।)

19. *एक भी नहीं* जिसको यह पता हो……. क्या? (2)
° *हमारी आत्मा में अविनाशी पार्ट भरा हुआ* है जो फिर से रिपीट करेंगे। (आत्मा इतनी छोटी है, इनमें अविनाशी पार्ट भरा है जो कभी विनाश नहीं होता। इसमें बुद्धि बड़ी अच्छी पवित्र चाहिए। वह तब होगी जब याद की यात्रा में मस्त रहेंगे।)
° कोई भी ऐसा नहीं है जो समझें कि *आत्मा पहले सतोप्रधान थी* फिर तमोप्रधान बनी है। (क्योंकि वह तो आत्मा को निर्लेप समझते हैं। आत्मा सो परमात्मा है, ऐसे-ऐसे कह देते हैं।)

20 *चढ़े तो चाखे…….* यह क्यों गाया जाता?
° कहाँ ऊंच ते ऊंच राजाओं का राजा *डबल सिरताज* , कहाँ *प्रजा* । पढ़ाने वाला तो एक ही है। (इसमें समझ बड़ी अच्छी चाहिए। बाबा बार-बार समझाते हैं याद की यात्रा है मुख्य। मेहनत सिवाए पद थोड़ेही मिलता।)

Answers from Sakar Murli 13-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 13-10-2020*

1. निर्विघ्न राज्य अधिकारी 👑 बनने के लिए _____ सेवाधारी बनो।
° _निर्विघ्न_

2. एक बाप की मत पर चल सदा सन्तुष्ट रह ____ देवी बनना है। यहाँ कोई भी ____ नहीं रखनी है। बाप से सर्व प्राप्तियां कर ____ -पति बनना है।
° _सन्तोषी_, _आश_, _पद्म_

3. बाप कहते हैं सर्व का _____ दाता तो मैं ही हूँ। तुम बच्चों को ___ जन्म के लिए खुशी ही खुशी देते हैं। ऐसे बाप को ____ भी करना चाहिए। याद से ही तुम्हारे _____ भस्म होंगे और तुम ______ बन जायेंगे। यह समझने की बातें हैं। जितना औरों को जास्ती समझायेंगे उतना ____ पद पायेंगे।
° _सद्गति_, _21_, _याद_, _पाप_, _सतोप्रधान_, _ऊंच_

4. *फाइनल पेपर* 📄के प्रकृति और पांच विकार (पुराने संस्कारों) के विकराल लास्ट रूप में पास होने लिये क्या जरूरी है? (2)
° ऐसे समय पर *समेटने की शक्ति* द्वारा अभी-अभी साकारी, अभी-अभी आकारी और अभी-अभी निराकारी *स्थिति में स्थित होने का अभ्यास* चाहिए।
° *देखते हुए न देखो*, सुनते हुए न सुनो। जब ऐसी *फुलस्टॉप की स्टेज* हो तब प्रकृतिपति बन प्रकृति की हलचल को स्टॉप कर सकेंगे।

5. “मीठे बच्चे – बाबा आये हैं तुम्हें मुक्ति-जीवनमुक्ति की राह बताने, तुम _____ होकर रहो तो यह राह सहज देखने में आयेगी”
° _आत्म-अभिमानी_

6. सच्ची शान्ति (वा मुक्ति) कहा जाता है *शान्तिधाम* को। क्यों?
° क्योंकि आत्मा शरीर बिगर कुछ भी बोल नहीं सकती। *कर्मेन्द्रियों द्वारा ही आवाज़ होता* है। मुख न हो तो आवाज़ कहाँ से आयेगा।

7. यहां स्टेज पर आत्मा को *कर्मेन्द्रियां मिली हैं कर्म करने* लिए। तो इस सन्दर्भ में सतयुग और कलियुग के बीच मुख्य अन्तर क्या है?
° रावण राज्य में *विकर्म* (विकार, दु:ख) होते। यह विकर्म छी-छी कर्म हो जाते हैं।
° सतयुग में रावण 5 विकार ही नहीं तो कर्म *अकर्म* हो जाते हैं। उसको कहा जाता है – स्वर्ग।

8. कहते हैं बाबा *ऐसी जगह* ले चलो जहाँ दु:ख का नाम न हो। वह कहां कहेंगे?
° वह तो *भारत जब स्वर्ग था* तब दु:ख का नाम नहीं था। स्वर्ग से नर्क में आये हैं, अब फिर स्वर्ग में जाना है। यह खेल है।

9. *सच्चा-सच्चा सतसंग* यह है। कैसे?
° तुम यहाँ *सत बाप को याद करते* हो, वही ऊंच ते ऊंच भगवान परमपिता परमात्मा है। (बाबा हम सिर्फ आपको ही याद करेंगे, आपसे ही वर्सा लेंगे। बाप कहते हैं देह सहित देह के सर्व सम्बन्धों को भूल जाना है। एक बाप को याद करना है। आत्मा को यहाँ ही पवित्र बनना है। याद नहीं करेंगे तो फिर सज़ायें खानी पड़ेंगी। पद भी भ्रष्ट हो जायेगा इसलिए बाप कहते हैं याद की मेहनत करो। आत्माओं को समझाते हैं।)

10. हर एक चीज़ *पहले सतोप्रधान* फिर सतो-रजो-तमो में आती है। यहां बाबा ने किसका मिसाल दिया?
° *छोटे बच्चे* 👶 को सतोप्रधान कहेंगे। महात्मा से भी ऊंच, विकारों का पता नहीं, बिल्कुल इनोसेंट।

11. देवताओं की महिमा गाते हैं – सर्वगुण सम्पन्न….. *अहिंसा* परमोधरम। अर्थात्‌ क्या?
° बाप ने हिंसा और अहिंसा का अर्थ समझाया है। किसको मारना इसको हिंसा कहा जाता है। सबसे बड़ी हिंसा है काम कटारी चलाना। *देवतायें हिंसक नहीं होते। काम कटारी नहीं चलाते*। बाप कहते हैं अब मैं आया हूँ तुमको मनुष्य से देवता बनाने।

12. यहाँ कोई भी *अपने को देवता* नहीं कह सकते। क्यों?
° *समझते हैं* हम नीच पापी विकारी हैं। फिर अपने को देवता कैसे कहेंगे।

13. एक बाप से ही *सुख-शान्ति का वर्सा* मिलता है। ऐसा क्यों?
° क्योंकि *सर्व के शान्ति का, सुख का दाता* तो एक ही बाप है। (तुम जानते हो शान्तिधाम, सुखधाम में ले जाने वाला एक ही बाप है।)

14. और कोई भी सतसंग आदि नहीं होगा जहाँ कहे – हे रूहानी _____ । यह है रूहानी _____ , जो रूहानी _____ से ही बच्चों को मिलता है। रूह अर्थात् निराकार। शिव भी निराकार है ना। तुम्हारी आत्मा भी _____ है, बहुत छोटी।
° _बच्चों_, _ज्ञान_, _बाप_, _बिन्दी_

15. बहुत भक्ति करते हैं तो फिर मैं ही उनको *साक्षात्कार* कराता हूँ। यह तो *बहुत अच्छी बात* है। _(सही / गलत)_
° इससे फायदा कुछ भी *नहीं* । सिर्फ खुश हो जाते हैं। पाप तो फिर भी करते हैं, *मिलता कुछ भी नहीं। पढ़ाई बिगर* कुछ बन थोड़ेही सकेंगे। (देवतायें सर्वगुण सम्पन्न हैं। तुम भी ऐसे बनो ना। बाकी तो वह है सब भक्ति मार्ग का साक्षात्कार। *सचमुच कृष्ण से झूलो, स्वर्ग में उनके साथ रहो। वह तो पढ़ाई पर है।* जितना श्रीमत पर चलेंगे उतना ऊंच पद पायेंगे। परमपिता परमात्मा की श्रीमत से कृष्ण की आत्मा ने यह पद पाया है।)

16. तुम हो ____ वंशावली, वह हैं कुख वंशावली। वह हथियाला बांधते हैं ____ चिता पर बिठाने का। अभी तुम सच्ची-सच्ची ब्राह्मणियां _____ चिता पर बिठाने हथियाला बांधते हो।
° _मुख_, _काम_, _ज्ञान_

17. सबसे गन्दी *बीमारी* कौन-सी है?
° *बाइसकोप* । अच्छे बच्चे भी बाइसकोप में जाने से खराब हो पड़ते हैं इसलिए तुम्हें बाइसकोप में जाना मना है।

18. अभी तुम बच्चों को समझाया है – मूलवतन सूक्ष्मवतन साकार-वतन। खेल सारा यहाँ चलता है। यह चक्र फिरता ही रहता है। *तुम ब्राह्मण बच्चों को ही ऐसे स्वदर्शन चक्रधारी* बनना है। देवताओं को नहीं। _(सही / गलत)_
° *सही* (परन्तु ब्राह्मणों को यह अलंकार नहीं देते हैं क्योंकि पुरूषार्थी हैं। आज अच्छे चल रहे हैं, कल गिर पड़ते हैं इसलिए देवताओं को दे देते हैं।)

19. संगम पर *कौन-सी ऐसी नॉलेज* मिली है, जिससे सतयुगी देवतायें मोहजीत कहलाये?
° संगम पर तुम्हें बाप ने *अमरकथा सुनाकर अमर आत्मा की नॉलेज* दी। ज्ञान मिला – यह अविनाशी बना-बनाया *ड्रामा* है, हर एक आत्मा अपना-अपना *पार्ट* बजाती है। (वह एक शरीर छोड़ दूसरा लेती है, इसमें *रोने की बात नहीं*। इसी नॉलेज से सतयुगी देवताओं को मोहजीत कहा जाता। वहाँ मृत्यु का नाम नहीं। खुशी से पुराना शरीर छोड़ नया लेते हैं।)

20. मनुष्यों ने अनेक प्रकार के व्रत बनाये हैं। परन्तु बाप ने कौन-सा *व्रत* सिखाया था?
° अभी तुमको व्रत रखना चाहिए – *सदैव पवित्र रहने का* क्योंकि पावन दुनिया में जाना है तो पतित नहीं बनना है।