Answers from Sakar Murli 12-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 12-10-2020*

1. प्राप्तियों को सदा _____ रखो तो कमजोरियाँ सहज समाप्त हो जायेंगी।
° _सामने_

2. जैसे वृक्ष का पहले बीज होता है, उस बीज द्वारा दो पत्ते 🌱 निकलते हैं, ऐसे मुख्य है बीज _____ की स्मृति फिर दो पत्ते अर्थात् _____ और _____ की सारी नॉलेज। इन तीन स्मृतियों को धारण करने वाले _____ भव वा सम्पूर्ण ______ भव के वरदानी बन जाते हैं।
° _बाप_, _आत्मा_, _ड्रामा_,
_स्मृति_, _विजयी_

3. अब बाप फिर वर्थ _____ बनाते हैं। बाबा ने समझाया है – एक शिवबाबा की जयन्ती ही वर्थ _____ है। अब तुम बच्चों को ऐसा लक्ष्मी-नारायण बनना है। वहाँ पर घर-घर में ______ रहती है, सबकी ज्योत जग जाती है। मेन _____ से ज्योत जगती है। बाबा कितना सहज रीति बैठ समझाते हैं। बाप के सिवाए मीठे-मीठे _____ सिकीलधे बच्चे कौन कहेगा।
° _पाउण्ड_, _पाउण्ड_, _दीपमाला_, _पावर_, _लाडले_

4. मीठे-मीठे _____ अति ____ रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप समझाते हैं।
° _नम्बरवार_, _मीठे_

5. कोई आई.सी.एस. का इम्तहान पास करते तो समझते बहुत बड़ा इम्तहान पास किया। परन्तु यहां ऊंच ते ऊंच बाप-टीचर-सतगुरू हमे समझदार बनाकर *कितना बड़ा इम्तहान पास कराते*। इस पास होने में सबसे अनोखी बात कोन-सी है? _(और पढ़ाई की भेंट में)_
° तुमको पढ़ा करके *तुम्हारे लिए दुनिया को ही बदल देते* हैं, नई दुनिया में राज्य करने के लिए। (सिर्फ तुम बच्चे ही जानते हो – हम कितना ऊंच ते ऊंच बाप-टीचर द्वारा ऊंच वर्सा पाते हैं।)

6. यह भी तुम बच्चे जानते हो कि पुरानी दुनिया बदल रही है। (बाप आये हैं ब्रह्मा द्वारा नई दुनिया की स्थापना करने)। और बाबा कहते यह *जैसे तैरना 🏊‍♂️सीखते हो*। कैसे?
° अभी तुम्हारा तैरना देखो कैसा है, *एकदम ऊपर (परमधाम) में चले जाते हो फिर यहाँ (सतयुग) आते हो*। (वह तो दिखलाते हैं इतने माइल्स ऊपर में गये। तुम आत्मायें कितना माइल्स ऊपर में जाते हो। वह तो स्थूल वस्तु है, जिसकी गिनती करते हैं। तुम्हारा तो अनगिनत है। तुम जानते हो हम आत्मायें अपने घर चली जायेंगी, जहाँ सूर्य-चाँद आदि नहीं होते। तुमको खुशी है – वह हमारा घर है। हम वहाँ के रहने वाले हैं।जिसके लिए आधाकल्प पुरूषार्थ करते भी बन नहीं सके हैं। न कोई ज्योति में समा सके, न मुक्तिधाम में जा सके, न मोक्ष को पा सके। जो कुछ पुरूषार्थ किया वह व्यर्थ।)

7. तुमको अभी *आस्तिक* कहा जाता है। कैसे?
° *बाप* को अच्छी रीति तुम जानते हो और बाप द्वारा *सृष्टि चक्र* को भी जाना है। बाप कहते हैं *मुक्ति-जीवनमुक्ति का ज्ञान* कोई में भी नहीं है। देवताओं में भी नहीं है। (बाप को कोई नहीं जानते तो किसको ले कैसे जायेंगे। कितने ढेर गुरू लोग हैं, कितने उन्हों के फालोअर्स बनते हैं। सच्चा-सच्चा सतगुरू है शिवबाबा।)

8. *जो बाप के मददगार बनते* हैं, उन्हें मदद के रिटर्न में क्या प्राप्त होता?
° उन्हें बाप ऐसा बना देते हैं जो *आधाकल्प कोई की मदद लेने वा राय लेने की दरकार ही नहीं* रहती है। (कितना बड़ा बाप है, कहते हैं बच्चे तुम मेरे मददगार नहीं होते तो हम स्वर्ग की स्थापना कैसे करते।)

9. मीठा-मीठा बाबा आया हुआ है, हमको घर ले जाने *लायक* बनाने, बाप *बच्चों की मदद* ले रहे हैं। तो इसके लिए मुख्य कौन-सा *पुरूषार्थ* है? (2)
° कहते हैं – बच्चे, अब *छी-छी काला मुँह मत बनो*। माया से हार नहीं खाओ। नहीं तो नाम बदनाम कर देते हैं। (यह बॉक्सिंग 🥊 है। दो पार्टी हैं। एक हैं माया के मुरीद, एक हैं ईश्वर के। तुम बाप को प्यार करते हो। गायन भी है विनाश काले विपरीत बुद्धि। तुम्हारी है प्रीत बुद्धि। तो तुमको नाम बदनाम थोड़ेही करना है। अब माया को जीतना जरूर है। वाह-वाह प्राप्त करना है!)
° बाप कहते हैं देह सहित जो कुछ देखते हो, उन *सबको भूल जाओ। मामेकम् याद करो।* (माया ने तुमको सतोप्रधान से तमोप्रधान बना दिया है। अब फिर सतोप्रधान बनना है। माया जीते जगतजीत बनना है।)

10. यहाँ बाप कहते हैं तुमको *पांव पड़ने से भी छुड़ा देता* हूँ। इसके कौन-से 3 कारण सुनाये?
° वह कहते हैं *हमको तो चरण हैं नहीं*। मैं कैसे अपने को पुजवाऊं।
° बच्चे *विश्व के मालिक* बनते हैं, उनसे थोड़ेही पुजवाऊंगा।
° भक्ति मार्ग में बच्चे बाप के पांव पड़ते हैं। वास्तव में तो *बाप की प्रापर्टी के मालिक बच्चे हैं*। (यहाँ बाप कहते हैं तुमको पांव पड़ने से भी छुड़ा देता हूँ। कितना बड़ा बाप है। कहते हैं *तुम बच्चे मेरे मददगार* हो।)

11. एक लेक है, कहते हैं उसमें *डुबकी लगाने से परियां* बन जाते हैं। इसका आध्यात्मिक रहस्य क्या है?
° अभी तुम *ज्ञान सागर में डुबकी मार परीज़ादा बन जाते* हो। (बाकी मनुष्य को उड़ने के पंख आदि हो नहीं सकते।)

12. *आत्मा* की तुलना आज बाबा ने कौन-सी 2 चीजों से की?
° उड़ने वाली है ही आत्मा। आत्मा जिसको *रॉकेट* 🚀 भी कहते हैं, आत्मा कितनी छोटी है। (जब सब आत्मायें जायेंगी तो हो सकता है तुम बच्चों को साक्षात्कार भी हो।)
° कहते भी हैं *छोटा सा स्टॉर* ⭐ है जिसको इन आंखों 👀 से देख नहीं सकते। (शरीर कितना बड़ा है, जिससे कर्म करना है। आत्मा कितनी छोटी है उसमें 84 का चक्र नूँधा हुआ है। एक भी मनुष्य नहीं होगा जिसको यह बुद्धि में हो कि हम 84 जन्म कैसे लेते हैं। आत्मा में कैसे पार्ट भरा हुआ है। वण्डर है। आत्मा ही शरीर लेकर पार्ट बजाती है।)

13. तुम बच्चे जानते हो हमको बागवान मिला है, कांटे से फूल 🌸 बनने की ____ बतलाते हैं। गायन भी है ना ____ ऑफ अल्लाह। खुदा का बगीचा साक्षात्कार कराने वाला तो खुद ही _____ होगा।
° _युक्ति_, _गॉर्डन_, _खुदा_

14. अन्दर में *बहुत खुशी* होनी चाहिए – क्यों? (2)
° *अभी हम सुखधाम में जाते* हैं। वहाँ दु:ख की बात नहीं होती। (बाप कहते हैं सुखधाम, शान्तिधाम को याद करो। घर को क्यों नहीं याद करेंगे। आत्मा घर जाने के लिए कितना माथा मारती है। जप तप आदि बहुत मेहनत करती है परन्तु जा कोई भी नहीं सकते। झाड़ से नम्बरवार आत्मायें आती रहती हैं फिर बीच में जा कैसे सकती। जबकि बाप ही यहाँ है।)
° तुम अभी तक *जिस बाप को याद करते* रहते थे – हे पतित-पावन आओ, *उस बाप से तुम पढ़ रहे* हो। (तुम्हारा ओबीडियन्ट सर्वेन्ट टीचर भी है। ओबीडियन्ट सर्वेन्ट बाप भी है।)

15. *दु:खी* क्यों होते हैं? (2)
° *बाप को भूलने के कारण* ही फिर दु:खी क्यों होते हैं। (माया का मोचरा लग जाता है। अब तो ज़रा भी मोचरा नहीं खाना है। मूल है *देह-अभिमान*।)

16. यहाँ तुम कितना ऊंच काम कर रहे हो। विश्व का ____ कर रहे हो और तुमको 3 पैर ____ के भी नहीं मिलते हैं। तुम तो राजाओं को भी कहते हो – तुम ____ डबल सिरताज थे, अब _____ बन पड़े हो। अब बाप फिर से ____ बनाते हैं तो बनना चाहिए ना।
° _उद्धार_, _पृथ्वी_, _पूज्य_,
_पुजारी_, _पूज्य_

17. बाप कहते हैं _____ को आगे बढ़ाना है। ______-फेरी में भी पहले-पहले मातायें हो। ____ भी तुम्हारे फर्स्टक्लास हैं। यह _____ का चित्र तुम्हारे आगे हो। सबको सुनाओ दुनिया बदल रही है। बाप से वर्सा मिल रहा है कल्प पहले मुआफिक। बच्चों को विचार सागर मंथन करना है – कैसे _____ को अमल में लायें। टाइम तो लगता है ना।
° _माताओं_, _प्रभात_, _बैज_, _ट्रांसलाइट_, _सर्विस_

Answers from Sakar Murli 10-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 10-10-2020*

1. संगमयुग का एक-एक सेकण्ड 🕒 वर्षो के समान है इसलिए ______ में समय नहीं गंवाओ।
° _अलबेलेपन_

2. कौन-से सेवाधारी बच्चों को *आधारमूर्त बनने का वरदान* प्राप्त हो जाता? _(हमारे *स्वप्न* कैसे होने चाहिए?)_ (3)
° विश्व कल्याणकारी बच्चे *स्वप्न में भी फ्री नहीं* रह सकते। (जो दिन रात सेवा में बिजी रहते हैं उन्हें *स्वप्न में भी कई नई-नई बातें*, सेवा के प्लैन व तरीके दिखाई देते हैं।)
° वे सेवा में बिजी होने के कारण अपने *पुरूषार्थ के व्यर्थ* से और *औरों के भी व्यर्थ से बचे* रहते हैं। (उनके सामने बेहद विश्व की आत्मायें सदा इमर्ज रहती हैं। उन्हें जरा भी अलबेलापन आ नहीं सकता।)

3. *नई* देहली कब कहेंगे?
° पुरानी दुनिया सो फिर नई होगी। *देहली तो जब परिस्तान होगी तब नई देहली कहेंगे।* (नई दुनिया में नई देहली थी, जमुना घाट पर। उन पर लक्ष्मी-नारायण के महल थे। परिस्तान था। अभी तो कब्रिस्तान होना है, सब दफन हो जाने हैं इसलिए बाप कहते हैं – मुझ ऊंच ते ऊंच बाप को याद करो तो पावन बनेंगे।)

4. बाप कहते हैं मैं तुमको पढ़ाता हूँ, तुम सिर्फ _____ याद करो। देह सहित सभी सम्बन्धों से बुद्धि का ____ तोड़ो। अपनी _____ भी छोड़ी तो बाकी रही आत्मा। अपने को आत्मा समझ मुझ बाप को याद करो। जब तक मेरी ____ पर नहीं चलेंगे तो कट कैसे उतरेगी। बाबा समझाते हैं बच्चे तुमने ही _____– 84 का चक्र लगाया है तो तुमको ही आकर समझाना पड़े।
° _मामेकम्_, _योग_, _देह_, _श्रीमत_, _आलराउन्ड_

5. *ओम् शान्ति* कहने से ही क्या याद आना चाहिए? _(आज की मुरली अनुसार)_
° *बाप* जरूर याद आना चाहिए। (बाप का पहला-पहला कहना है मनमनाभव।जरूर आगे भी कहा है तब तो अभी भी कहते हैं ना। )

6. बाबा ने कहा *चींटी मार्ग की सर्विस* करते हो, ऐसा क्यों? सेवा में सबसे *मुख्य धारणा* कौन-सी है? _(जिससे तीर लगे)_
° बाबा का नाम नहीं लेते हो इसलिए तुम्हारा कोई सुनते नहीं हैं। *बाबा की याद न होने से* तुम्हारे में जौहर नहीं भरता। जिस योगबल से तुम विश्व के मालिक बनते हो। (सारा दिन बाबा को तो बिल्कुल याद ही नहीं करते। झरमुई झगमुई में लगे रहते हैं और लिखते हैं कि हमने ऐसा भाषण किया, हमने यह समझाया।)
° *”बाबा कहते हैं, बाबा कहते हैं”*, यह तो धुन 🎶 लगा देनी चाहिए। (बाबा ऐसे कहते हैं, यह कहने से तुम छूट जायेंगे। घड़ी-घड़ी बाबा का नाम लेकर समझाओ तो शिवबाबा याद रहेगा। बाबा का नाम लेंगे तब ही किसको तीर लगेगा। बाबा ऐसे कहते हैं, बाबा यह समझाते हैं, ऐसे-ऐसे तुम बोलो फिर देखो तुम्हारा कितना प्रभाव निकलता है। तुम्हारा एक ही भाषण ऐसा सुनें तो कमाल हो जाए।)

7. ______ शिवबाबा कहना है, सिर्फ शिव नहीं। ____ द्वारा स्थापना कौन कराते हैं? क्या ब्रह्मा क्रियेटर हैं? ऐसे-ऐसे ____ से बोलो तब काम कर सकते हो। नहीं तो देह-अभिमान में बैठ भाषण करते हैं।
° _त्रिमूर्ति_, _ब्रह्मा_, _नशे_

8. बाबा भारतवासी बच्चों से *विशेष कौन-से प्रश्न* पूछते हैं? (3) _(जो हम भी बाबा-बाबा कह दूसरों को सहज समझा सकते)_
° तुम भारतवासी बच्चे जो इतने साहूकार थे, सर्वगुण सम्पन्न 16 कला सम्पूर्ण देवता धर्म के विश्व के मालिकथे, तुम पवित्र थे, काम कटारी नहीं चलाते थे, बहुत धनवान थे। फिर तुमने इतना *देवाला* कैसे निकाला है – कारण का पता है? बच्चे, तुम *गुलाम* कैसे बन गये? इतना सब धन दौलत कहाँ गँवा दिया? ख्याल करो तुम पावन से *पतित* कैसे बन गये?

9. तो हम भारतवासी ऐसे *पतित*-गुलाम क्यों बने? _(आज की मुरली अनुसार)_
° *मेरे से योग न लगाने से* तुम और ही पतित बन पड़ते हो। मुझे याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। (तुम्हारा *मेरे से योग* टूटने से यह हाल हुआ है। अब फिर मेरे से योग लगाओ तो विकर्म विनाश होंगे। मुक्तिधाम में पवित्र आत्मायें रहती हैं। अभी तो सारी दुनिया पतित है। पावन दुनिया का तुमको मालूम ही नहीं है।)

10. *भाषण* में और क्या-क्या समझा सकते? (6)
° शिवबाबा कहते हैं, वही ऊंच ते ऊंच *पतित-पावन* है। जरूर पावन बनाने के लिए यहाँ आकर समझाते हैं। (शिवबाबा कहते मैं आता भी हूँ भारत में और *राजयोग सिखलाने* आता हूँ, कहता हूँ *मामेकम् याद* करो, मुझ ऊंच बाप को याद करो क्योंकि वह बाप देने *वाला* दाता है। बरोबर भारत में तुम विश्व के मालिक थे ना।)
° शिवबाबा समझाते हैं भगवान तो *एक* ही है। जो *दु:ख हर्ता सुख कर्ता* है, नई दुनिया स्थापन करने वाला है। (इसी *भारत पर स्वर्ग* था। हीरे-जवाहरातों के महल थे, एक ही राज्य था। सब क्षीरखण्ड थे। जैसे बाप की महिमा अपरमअपार है, वैसे भारत की महिमा भी अपरमअपार है। भारत की महिमा सुनकर खुश होंगे।)
° बाबा कहते हैं – हमने तो स्वर्ग, शिवालय स्थापन किया, स्वर्ग में *इन लक्ष्मी-नारायण का राज्य था* ना। तुम यह भी भूल गये हो। (तुमको यह भी पता नहीं है कि राधे-कृष्ण ही स्वयंवर के बाद लक्ष्मी-नारायण बनते हैं। कृष्ण जो विश्व का मालिक था, उनको कलंक बैठ लगाते हो, मेरे को भी कलंक लगाते हो। मैं *तुम्हारा सद्गति दाता*, तुम मुझे कुत्ते बिल्ली, कण-कण में कह देते हो। बाप कहते हैं सर्व का सद्गति दाता, पतित-पावन मैं हूँ। तुम फिर पतित-पावनी गंगा कह देते हो।)
° बोलो, *हम बाप की महिमा करते हैं*, बाप खुद कहते हैं मैं कैसे साधारण पतित तन में बहुत जन्मों के अन्त में आता हूँ। (यह अपने जन्मों को नहीं जानते हैं। भागीरथ यह है, इनके भी वानप्रस्थ अवस्था में मैं आता हूँ।)
° हर बात में बोलो बाबा कहते हैं। यह हठयोगी तुमको मुक्ति थोड़ेही दे सकते हैं। जबकि *सर्व का सद्गति दाता* एक है फिर और किसी को गुरू किसलिए करते हो? (क्या तुमको संन्यासी बनना है या हठयोग सीखकर ब्रह्म में लीन होना है? लीन तो कोई हो नहीं सकता।)
° क्या हालत हो गई, इसलिये फिर मुझे (बाबा को) आना पड़ता है। तुम कितने धर्म कर्म भ्रष्ट हो गये हो। बताओ *हिन्दू धर्म किसने कब स्थापन किया?* ऐसे अच्छी ललकार से भाषण करो।

11. जिनके पास *मकान 🏢, विमान* ✈️ 🚁 आदि हैं वह स्वर्ग में हैं। _(सही / गलत)_
° गलत (बाप कहते हैं भारत जब *शिवालय* था तो उसे *स्वर्ग* कहा जाता था।)

12. “अहम् ब्रह्मस्मि” माया के हम मालिक हैं। _(सही / गलत)_
° *गलत* (बाप कहते हैं तुम यह भी नहीं जानते कि माया किसको कहा जाता और सम्पत्ति किसको कहा जाता है! तुम धन को माया कह देते हो।)

13. बाप समझाते हैं यह अनेक धर्मों का _____ वृक्ष है। पहले-पहले है _____ धर्म। अब वह कहाँ गया? लाखों वर्ष कह देते हैं यह तो ____ हज़ार वर्ष की बात है। तुम _____ भी उन्हों के बनाते रहते हो।
° _कल्प_, _देवी-देवता_, _5_, _मन्दिर_

14. दिखाते हैं पाण्डवों और कौरवों की ____ लगी। पाण्डव पहाड़ों पर गल मरे फिर क्या हुआ? मैं कैसे हिंसा करुँगा। मैं तो तुमको अहिंसक _____ बनाता हूँ। काम कटारी न चलाना, उसको ही ______ कहते हैं। वह हैं ______ की वंशावली। अच्छा!
° _लड़ाई_, _वैष्णव_, _वैष्णव_, _विष्णु_

Answers from Sakar Murli 09-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 09-10-2020*

1. _____ शक्ति द्वारा व्यर्थ संकल्पों के बहाव 🌊 का फोर्स समाप्त करो।
° _परिवर्तन_

2. *परिस्थितियों पर विजय* प्राप्त करने का साधन क्या है? कैसे?
° *स्व-स्थिति।* (यह देह भी पर है, स्व नहीं।)
° स्व स्थिति व स्वधर्म *सदा सुख का अनुभव कराता* है और प्रकृति-धर्म अर्थात् पर धर्म या देह की स्मृति किसी न किसी प्रकार के दु:ख का अनुभव कराती है। (तो जो सदा स्व स्थिति में रहता है वह *सदा सुख का अनुभव* करता है, उसके पास दु:ख की लहर आ नहीं सकती।)
° वह *संगमयुगी विजयी रत्न* बन जाते हैं।

3. ज्ञान से तुम बच्चे सालवेन्ट बनते हो, इसलिए देवताओं को _____ -पति कहते हैं। देवतायें बहुत ____ -वान बनते हैं। वहाँ तुम्हारा ____ भी बहुत समय चलता है। तुम्हारे पास बहुत ____ रहता है। तुम भारत में ही रहते थे। तुम्हारा ____ था, कल की बात है।
° _पद्म_, _धन_, _सुख_, _धन_, _राज्य_

4. ऊंच ते ऊंच की महिमा तो बहुत भारी है। *सर्वशक्तिमान्* है तो क्या नहीं कर सकते, सब कुछ उसके हाथ में है। _(सही / गलत)_
° नहीं (बाप कहते हैं ड्रामा अनुसार सब कुछ होता है, मैं कुछ भी करता नहीं हूँ। सर्वशक्तिमान इसलिए है क्योंकि *उनके सिखाए हुए याद की शक्ति द्वारा हम पवित्र-सतोप्रधान सर्वशक्तिमान् बन विश्व पर राज्य* करेंगे। कोई की ताकत नहीं जो छीन सके।)

5. कहते भी हैं यह नाटक है, हम पार्ट बजाने आये हैं। परन्तु फिर भी एक भी मनुष्य को *ड्रामा का ज्ञान* नहीं कहेंगे। क्यों?
° अगर समझते हो कि नाटक है तो *शुरू से अन्त तक* वह याद आना चाहिए। नहीं तो नाटक कहना ही रांग हो जाता है। (उस नाटक के *आदि-मध्य-अन्त* को भी जानना चाहिए ना। हम ऊपर से आते हैं तब तो वृद्धि होती रहती है। इतनी सब आत्मायें कहाँ से आई, यह कोई समझते नहीं कि यह *अनादि बना-बनाया अविनाशी ड्रामा* है। जो आदि से अन्त तक *रिपीट* होता रहता है। तुम *बाइसकोप* शुरू से अन्त तक देखो फिर दुबारा रिपीट करके अगर देखेंगे तो चक्र जरूर हूबहू रिपीट होगा। ज़रा भी फ़र्क नहीं होगा।)

6. ऐसे-ऐसे सवेरे बैठ विचार सागर ______ करना है। प्वाइंट्स निकलेंगी तो तुमको _____ होगी। ____ में घण्टा डेढ़ घण्टा बीत जाता है। जितनी प्रैक्टिस होती जायेगी उतनी ______ बढ़ती जायेगी। बहुत मज़ा आयेगा और फिर घूमते-फिरते भी _____ करना है। फुर्सत बहुत है।
° _मंथन_, _खुशी_, _खुशी_, _खुशी_, _याद_

7. *सवेरे-सवेरे उठकर बाबा (और स्वयं) से मीठी-मीठी बातें* करनी हैं। रोज़ खुशी की खुराक खाते हुए अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करना है। तो कैसी-कैसी बातें-चिन्तन कर सकते? (9)
° *बाबा, आप कितने मीठे हो* । बाबा बस, अभी तो हम चलते हैं अपने सुखधाम में।
° बाबा आप *कितनी अच्छी युक्ति बताते हो*, श्रेष्ठाचारी राज्य स्थापन करने की। (फिर हम श्रेष्ठाचारी माताओं की गोद में जायेंगे। अनेक बार हम ही उस नई सृष्टि में गये हैं।)
° अभी *हमारे खुशी के दिन आते* हैं। (यह खुशी की खुराक है इसलिए गायन भी है अतीन्द्रिय सुख पूछना हो तो गोप-गोपियों से पूछो।)
° अब *हमको बेहद का बाप मिला* है। हमको फिर से स्वर्ग का मालिक श्रेष्ठाचारी बनाते हैं। (कल्प-कल्प हम अपना राज्य-भाग्य लेते हैं। हार खाते हैं फिर जीत पाते हैं। अभी बाप को याद करने से ही रावण पर जीत पानी है फिर हम पावन बन जायेंगे।)
° अब फिर आधाकल्प हम कोई गुरू नहीं करेंगे। *शान्तिधाम, सुखधाम जायेंगे*। (बाप कहते हैं तुम सुखधाम के राही हो। अब दु:खधाम से सुखधाम में जाना है।)
° *वाह हमारा बाबा* , कैसे हमको पढ़ा रहे हैं।
° मनुष्यों को *भगवान का परिचय कैसे दें।* (सृष्टि तमोप्रधान बनती जाती है। यहाँ अब तुम सतोप्रधान बनने का पुरूषार्थ करते हो। गीता में भी अक्षर है मन-मनाभव। सिर्फ यह नहीं जानते कि भगवान कौन।)
° मीठी-मीठी बातें करनी चाहिए। *अभी हम श्रेष्ठाचारी दुनिया में जायेंगे* । (बूढ़ों के दिल में तो यह रहता है ना कि हम शरीर छोड़ गर्भ में जायेंगे। बाबा कितना नशा चढ़ाते हैं। ऐसी-ऐसी बातें बैठ करो तो भी तुम्हारा जमा हो जाए। शिवबाबा हमको नर्कवासी से स्वर्गवासी बना रहे हैं।)
° पहले-पहले हम आते हैं, सारा *आलराउन्ड पार्ट हमने बजाया* है। अब बाबा कहते हैं इस छी-छी चोले को छोड़ दो। देह सहित सारी दुनिया को भूल जाओ। यह है *बेहद का संन्यास* ।

8. हम बाबा से *राजयोग* सीखते, इसका कौन-सा यादगार बना हुआ है?
° इस *देलवाड़ा मन्दिर* की तो अपरमअपार महिमा है। (अभी हम राजयोग सीखते हैं। उसका यादगार तो जरूर बनेगा ना। यह हूबहू हमारा यादगार है। बाबा, मम्मा और बच्चे बैठे हैं। नीचे योग सीख रहे हैं, ऊपर में स्वर्ग की राजाई है। झाड़ में भी कितना क्लीयर है।)

9. अभी तुमको *ज्ञान का तीसरा नेत्र* मिलता है। बाप तीसरा नेत्र देने की कथा सुनाते हैं। इसका यादगार कौन-सी *3 कथाएं* भक्ति मार्ग में गाई हुई है?
° इसको ही फिर *तीजरी* की कथा कह दिया है। *अमरकथा* , *सत्य नारायण* की कथा भी मशहूर है। (सुनाने वाला एक ही बाप है जो फिर भक्ति मार्ग में चलती है।)

10. सारी दुनिया की ____ होने में टाइम लगता है ना। यह बेहद की दुनिया है। _____ है ही अविनाशी खण्ड। यह कभी प्राय: लोप होता नहीं। एक ही खण्ड रहता है – _____ -कल्प। फिर और खण्ड इमर्ज होंगे नम्बरवार। तुम बच्चों को कितना ____ मिलता है। बोलो – वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी कैसे ____ लगाती है – आकर समझो।
° _सफाई_, _भारत_, _आधा_, _ज्ञान_, _चक्र_

11. प्राचीन ऋषि मुनियों का कितना मान है, परन्तु वह भी सृष्टि के _______ को नहीं जानते। वह हठयोगी हैं। हाँ बाकी उनमें ______ की ताकत है जिससे भारत को थमाते हैं। नहीं तो भारत पता नहीं क्या हो जाता। मकान को _____ आदि लगाई जाती है ना – तो शोभा होती है। कुछ सुधार कर अपना नाम बाला किया है। अब वह भी सब ______ बन गये हैं।
° _आदि-मध्य-अन्त_, _पवित्रता_, _पोची_, _तमोप्रधान_

12. *पहले-पहले* क्या समझाना है?
° *बाप की पहचान* देनी है। (बाप का नाम, रूप, देश, काल जानते हो? ऊंच ते ऊंच बाप का पार्ट तो मशहूर होता है ना।)

13. अभी तुम जानते हो – वह बाप ही हमको ____ दे रहे हैं। तुम फिर से अपनी ______ स्थापन कर रहे हो। तुम बच्चे मेरे मददगार हो। तुम _____ बनते हो। तुम्हारे लिए पवित्र _____ जरूर स्थापन होनी है।
° _डायरेक्शन_, _राजधानी_, _पवित्र_, _दुनिया_

14. और हम *लिख* 📝 क्या सकते?
° *पुरानी दुनिया बदल रही* है। फिर यह सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी राज्य होगा। (फिर रावण राज्य होगा।)

15. चित्रों पर समझाना बहुत ____ लगता है, इनमें तिथि-तारीख सब लिखा हुआ है। भारत का प्राचीन ____ -योग माना याद। याद से _____ विनाश होते हैं और ____ से स्टेट्स मिलती है। ____ -गुण धारण करने हैं।
° _मीठा_, _राज_, _विकर्म_, पढ़ाई, _दैवी_

16. धन्धे में मनुष्य को नींद नहीं आती। सुस्त लोग नींद करते हैं। तुम जितना हो सके _____ को ही याद करते रहो। तुमको बुद्धि में रहता है शिवबाबा के लिए हम _____ बनाते हैं। शिवबाबा के लिए हम यह करते हैं। भोजन भी _____ से बनाना है। बाबा खुद भी _____ करते हैं। अच्छा!
° _शिवबाबा_, _भोजन_, _शुद्धि_, _याद_

17. इस *ईश्वरीय ज्ञान* की कौन-सी महिमा *मम्मा* ने सुनाई? (2)
° अपना जो ईश्वरीय ज्ञान है, वो बड़ा ही *सहज सरल और मीठा* है (क्योंकि स्वयं परमात्मा पढ़ा रहा है), इससे जन्म-जन्मान्तर के लिये *कमाई* जमा होती है। यह ज्ञान इतना सहज है जो *कोई भी* महात्मा, अहिल्या, धर्मात्मा, बालक से लेकर वृद्ध प्राप्त कर सकता। (विद्वान बनना, भाषा सीखना, हठयोग, हठक्रिया, जप तप की कोई जरुरत नहीं है।)
° यह तो नेचुरल आत्मा को *अपने परमपिता परमात्मा के साथ योग* लगाना है। (भल कोई इस ज्ञान को न भी धारण कर सके तो भी सिर्फ योग से भी बहुत फायदा होगा। इससे एक तो *पवित्र* बनते हैं, दूसरा फिर *कर्मबन्धन भस्मीभूत* होते हैं और *कर्मातीत* बनते हैं, इतनी ताकत है इस सर्वशक्तिवान परमात्मा की याद में। भल वो अपने साकार ब्रह्मा तन द्वारा हमें योग सिखला रहे हैं परन्तु याद फिर भी डायरेक्ट उस ज्योति स्वरूप शिव परमात्मा को करना है, उस याद से ही कर्मबन्धन की मैल उतरेगी।)

Answers from Sakar Murli 08-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 08-10-2020*

1. *बीती को बिन्दी* क्यों लगाना है? _(स्लोगन)_
° नहीं तो एक बार की हुई गलती को बार-बार सोचना अर्थात् *दाग पर दाग* लगाना है।

2. एकान्तवासी बनने से एकाग्रता आती, *एकाग्रता 🎯 अर्थात् एक ही श्रेष्ठ संकल्प में स्थित रहना*। जिस एक बीज रूपी संकल्प में सारा वृक्ष रूपी विस्तार समाया हुआ है। तो इस *एकाग्रता से क्या प्राप्तियां* होती? (4)
° जहाँ एकाग्रता है वहाँ स्वत: *एकरस स्थिति* है। एकाग्रता से संकल्प, बोल और कर्म का व्यर्थ पन समाप्त हो जाता है और *समर्थ पन* आ जाता है।
° एकाग्रता को बढ़ाओ तो सर्व प्रकार की *हलचल समाप्त* हो जायेगी। सब संकल्प, बोल और कर्म सहज *सिद्व* हो जायेंगे।

3. मीठे बच्चे – डायरेक्ट बेहद का बाबा आये हैं तुम्हें बहुत ____ से पढ़ाने, तुम भी _____ से पढ़ो – नशा रहे हमको पढ़ाने वाला स्वयं भगवान है। सच्चा बाप सच्ची सेवा सिखलाते हैं, तुम विश्व का भी कल्याण करते हो। तो कितना _____ से करना चाहिए। बाबा कितनी ____ से सर्व की सद्गति करते हैं।
° _रुचि_, _रुचि_, _रुचि_, _रुचि_

4. ऐसे-ऐसे ख्यालात कई बच्चों को आते हैं। इस *आवागमन* से, दु:ख सुख से छूट जायें। यह सोचना ठीक है। _(सही / गलत)_
° नहीं (बाप कहते हैं यह कभी हो नहीं सकता। मोक्ष पाने के लिए कोशिश करना ही वेस्ट हो जाता है। बाप ने समझाया है एक भी आत्मा पार्ट से छूट नहीं सकती। *आत्मा में अविनाशी पार्ट भरा है। वह है ही अनादि अविनाशी, बिल्कुल एक्यूरेट* एक्टर्स हैं। एक भी कम जास्ती नहीं हो सकते। तुम बच्चों को सारी नॉलेज है।)

5. बाबा हर एक बात बार-बार समझाते रहते हैं क्योंकि ____ – _____ बच्चे आते रहते हैं। उनको आगे की _____ कौन पढ़ाये। तो बाप नये-नये को देख फिर _____ प्वाइंट्स ही रिपीट करते हैं।
° _नये_, _नये_, _पढ़ाई_, _पुरानी_

6. इस समय ही बाप आकर _____ की बातें सुनाते हैं। सतयुग में तो है ही _____ । यह इस समय तुमको ही समझाया जाता है। गीता में भी शुरू में फिर पिछाड़ी में यह बात आती है – ______ । पढ़ाया जाता है स्टेट्स पाने के लिए। तुम _____ बनने के लिए अब पुरूषार्थ करते हो।
° _ज्ञान_, _प्रालब्ध_, _मनमनाभव_, _राजा_

7. बड़े-बड़े तीर्थ बनाते हैं। वास्तव में *सबका तीर्थ यह भारत* ही है, कैसे?
° यहां बेहद का *बाप आते* हैं। बाप ने भारत में ही आकर *सर्व की सद्गति* की है। (बाप कहते हैं मुझे लिबरेटर, गाइड कहते हो ना। हम तुमको इस पुरानी दुनिया, दु:ख की दुनिया से लिबरेट कर शान्तिधाम, सुखधाम में ले जाते हैं। बच्चे जानते हैं बाबा हमें शान्तिधाम, सुखधाम ले जायेंगे। बाकी सब शान्तिधाम जायेंगे। दु:ख से बाप आकर लिबरेट करते हैं।)

8. यह बाप चला जायेगा तो इनका क्रियाकर्म, सेरीमनी आदि कुछ भी नहीं करना होता। क्योंकि उनको ____ ही नहीं।
° _शरीर_

9. ज्ञान कोई वहाँ सतयुग में साथ नहीं चलता। वहाँ बाप को *याद करने की दरकार ही नहीं* रहती। क्यों?
° जीवनमुक्ति में हैं। वहाँ याद करना होता है क्या? *दु:ख* की *फरियाद* वहाँ होती ही *नहीं*!

10. इस समय तुम बाप के खिदमतगार बच्चे बने हो। भारत की खास सच्ची सेवा करते हो, परन्तु गुप्त। तुम से बहुत पूछते, तुम *ब्रह्माकुमार-कुमारियों का उद्देश्य* वा शुद्ध भावना कौनसी है?
° तुम्हारा उद्देश्य है – कल्प 5 हज़ार वर्ष पहले की तरह *फिर से श्रीमत पर विश्व में सुख और शान्ति का राज्य स्थापन करना* । (तुम्हारी शुद्ध भावना है कि श्रीमत पर हम सारे विश्व की सद्गति करेंगे। तुम नशे से कहते हो हम सबको सद्गति देने वाले हैं। तुम्हें बाप से पीस प्राइज़ मिलती है। नर्कवासी से स्वर्गवासी बनना ही प्राइज़ लेना है।)

11. एकदम तीखे में तीखा नर्क है फिर बाप आकर तीखा _____ बनाते हैं। इस समय है 100 प्रतिशत _____ , फिर 100 प्रतिशत सुख-शान्ति होगी। आत्मा जाकर अपने ___ विश्राम पायेगी। समझाने में बड़ा सहज है। बाप कहते हैं मैं आता ही तब हूँ जब नई दुनिया की _____ कर पुरानी का _____ करना होता है। इतना कार्य सिर्फ एक तो नहीं करेंगे। _____ बहुत चाहिए।
° _स्वर्ग_, _दु:ख_, _घर_, _स्थापना_, _विनाश_, _खिदमतगार_

12. अभी तुम बच्चे बाबा की _____ से राज्य स्थापन करते हो। ____ -गुण धारण करते हैं इसलिए तुम्हारा ही गायन पूजन है। अभी तुम पुजारी हो फिर पूज्य बनते हो। बाप तो है ही निराकार, वह सदैव ____ है।कहते हैं – अब _____ याद करो। दूसरे कोई ______ को याद नहीं करना है।
° _श्रीमत_, _दैवी_, _पूज्य_, _मामेकम्_, _देहधारी_

13. *अब जज करो*, भक्तिमार्ग में राइट सुना है या हम राइट बताते हैं। बाबा ने यह आज किस बात के लिए कहा?
° बाप ने तुमको *हम सो का अर्थ* भी समझाया है। वह तो कह देते शिवोहम्, आत्मा सो परमात्मा। अब बाप ने करेक्ट कर बताया है। (हम सो का अर्थ बहुत लम्बा-चौड़ा है। हम सो ब्राह्मण, देवता, क्षत्रिय। हम आत्मा चक्र में ऐसे आती हैं। विराट रूप का चित्र भी है।)

14. *विराट रूप* का चित्र भी है, परन्तु उसमें कौन-सी भूल है?
° *चोटी ब्राह्मण और बाप को दिखाया नहीं* है। (देवतायें कहाँ से आये? पैदा कहाँ से हुए? कलियुग में तो है शूद्र वर्ण। सतयुग में फट से देवता वर्ण कैसे हुआ? बीच में ब्राह्मण चाहिए। कुछ भी समझते नहीं।)

15. संन्यासी कहते हैं हम ____ योगी, तत्व योगी हैं। ब्रह्म तो ____ है, जहाँ आत्मायें रहती हैं। कितनी भारी भूल कर दी है। बाप आकर सब ___ दूर कर देते हैं।
° _ब्रह्म_, _तत्व_, _भ्रम_

16. भक्ति मार्ग में कहते भी हैं हे प्रभू तेरी गति मत न्यारी है। ____ तो कोई कर न सके। _____ तो अनेकानेक की मिलती हैं। यहाँ की मत कितनी _____ कर देती है। सारे विश्व को _____ कर देती है।
° _गति_, _मतें_, _कमाल_, _चेंज_

17. *दिव्य दृष्टि की चाबी* हमको दे दो तो हम कोई को साक्षात्कार करा दें। शिवबाबा का उत्तर?
° नहीं, *यह चाबी किसको मिल नहीं सकती*। (उनके एवज में तुमको फिर विश्व की बादशाही देता हूँ। मैं नहीं लेता हूँ। मेरा ही पार्ट है साक्षात्कार कराने का। साक्षात्कार होने से कितना खुश हो जाते हैं।)

18. *साक्षात्कार* होने से कितना खुश हो जाते हैं। मिलता कुछ भी नहीं। _(सही / गलत)_
° *सही* (ऐसे नहीं कि साक्षात्कार से कोई *निरोगी* बन जाते हैं या *धन* मिल जाता है। नहीं, मीरा को साक्षात्कार हुआ परन्तु *मुक्ति* को थोड़ेही पाया। मनुष्य समझते हैं वह रहती ही वैकुण्ठ में थी। परन्तु *वैकुण्ठ* कृष्णपुरी है कहाँ। यह सब हैं साक्षात्कार।)

19. इनको भी पहले-पहले ____ का साक्षात्कार हुआ तो बहुत खुश हो गया। वह भी जब देखा कि मैं महाराजा बनता हूँ। _____ भी देखा फिर राजाई का भी देखा तब ______ बैठा ओहो! मैं तो विश्व का मालिक बनता हूँ। बाबा की _____ हो गई। बस बाबा यह सब आप ले लो, हमको तो विश्व की बादशाही चाहिए। तुम भी यह _____ करने आये हो ना।
° _विष्णु_, _विनाश_, _निश्चय_, _प्रवेशता_, _सौदा_

Answers from Sakar Murli 07-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 07-10-2020*

1. _____ पर पूरा-पूरा अटेन्शन दो तो फर्स्ट 1️⃣ डिवीजन में नम्बर आ जायेगा।
° _अभ्यास_

2. स्व और सर्व प्रति *सदा विघ्न विनाशक* बनने लिए क्या करना है? (5)
° क्वेश्चन मार्क ❓को विदाई देना और *फुल स्टॉप द्वारा सर्व शक्तियों का फुल स्टॉक* करना।
° सदा विघ्न प्रूफ *चमकीली फरिश्ता ड्रेस पहनकर रखना*, मिट्टी की ड्रेस नहीं पहनना।
° साथ-साथ *सर्व गुणों के गहनों से सजे* रहना।
° सदा *अष्ट शक्ति शस्त्रधारी* सम्पन्न मूर्ति बनकर रहना और *कमल पुष्प के आसन* पर अपने श्रेष्ठ जीवन के पांव रखना।

3. बाप ही *ऊंच ते ऊंच समझदार ते समझदार, ज्ञान सागर* पतित-पावन है। कई बार हंसी में कहते की समझाया उनको जाता है जो बेसमझ होते हैं। तो हम किन-किन बातों से बेसमझ थे? (3)
° मैं आत्मा अविनाशी हूँ, शरीर विनाशी है। फिर भी *आत्म-अभिमान छोड़ देह-अभिमान में फँस पड़े* । तो बेसमझ ठहरे ना। (बाप कहते हैं सब बच्चे बेसमझ हो पड़े हैं, देह-अभिमान में आकर। फिर तुम बाप द्वारा देही-अभिमानी बनते हो तो बिल्कुल समझदार बन जाते हो।)
° फिर भी पुरूषार्थ बहुत करना है क्योंकि बच्चों में दैवीगुण भी चाहिए। बच्चे जानते हैं हम सर्वगुण सम्पन्न, 16 कला सम्पूर्ण…… थे। फिर इस समय *निर्गुण बन पड़े हैं। कोई भी गुण नहीं रहा* है। (हम पूज्य थे तो समझदार थे फिर हम ही पुजारी बन बेसमझ बने हैं। आदि सनातन देवी-देवता धर्म प्राय: लोप हो गया है। इनका दुनिया में किसको पता नहीं है। यह लक्ष्मी-नारायण कितने समझदार थे, राज्य करते थे। तत् त्वम्।
° तुम बच्चों में भी नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार इस *खेल को समझते* हैं। (समझते-समझते भी कितने वर्ष हो गये हैं। फिर भी जो नये हैं वह अच्छे समझदार बनते जाते हैं। औरों को भी बनाने का पुरूषार्थ करते हैं।)

4. अब *पावन* बनना है, तो इसके लिए बाप कौन-सी *दवाई* देते हैं?
° कहते हैं – *योग से तुम भविष्य 21 जन्म निरोगी* बन जायेंगे। तुम्हारे सब रोग, दु:ख खत्म हो जायेंगे। तुम मुक्तिधाम में चले जायेंगे। (अविनाशी सर्जन के पास *एक ही दवाई* है। एक ही इन्जेक्शन आत्मा को आए लगाते हैं।)
° बाप तो *सीधी बात* बताते हैं – बच्चे, तुम मुझे याद करो तो तुम पावन बन जायेंगे। तुम्हारे सब दु:ख दूर हो जायेंगे।(मुख्य बात है याद की। सभी कहते हैं याद में रहना बड़ा मुश्किल है। हम जितना चाहते हैं, याद में रह नहीं सकते हैं। कोई *सच्चाई से अगर चार्ट लिखे* तो बहुत फायदा हो सकता है।)

5. बाप को कहते हैं आकर पतित से *पावन बनाओ*, क्यों?
° क्योंकि *पतितपने में दु:ख* है। (शान्तिधाम को पावन दुनिया नहीं कहेंगे। स्वर्ग को ही पावन दुनिया कहेंगे।)

6. सच्ची-सच्ची शान्ति तो वहाँ है जहाँ शरीर नहीं, उसको कहा जाता है शान्तिधाम। इसलिए बहुत कहते हैं शान्तिधाम में रहें, परन्तु………… क्या? *_(एक लॉ (नियम) है)_*
° यह *अविनाशी नाटक* हैं, इसमें हर एक पार्टधारी को पार्ट बजाने अपने *समय पर आना ही है*। (कोई कहे हम सदा शान्तिधाम में ही बैठ जाएं – तो यह लॉ नहीं है। उसे तो पार्टधारी ही नहीं कहेंगे। यह बेहद की बातें बेहद का बाप ही तुम्हें सुनाते हैं।)

7. सर्व के सद्गति दाता पतित-पावन हैं। सर्व को पावन बनाने वाले ____ नहीं हो सकते। ____ आदि सब तत्व हैं, वह कैसे सद्गति करेंगे। ____ ही पार्ट बजाती है।
° _तत्व_, _पानी_, _आत्मा_

8. बाप ने कितना समझाया है – कोई ऐसी युक्ति रचो जो मनुष्य समझें – पूज्य हैं नई दुनिया में, ____ हैं ____ दुनिया में। पावन को पूज्य, ____ को पुजारी कहा जाता है। वहाँ हैं श्रेष्ठ। गाते भी हैं सम्पूर्ण श्रेष्ठाचारी। अभी तुम बच्चों को ऐसा बनना है। तुम जानते हो हम आत्मा शरीर सहित पावन थी। अभी वही आत्मा शरीर सहित ____ बनी है। 84 जन्मों का हिसाब है ना।
° _पुजारी_, _पुरानी_, _पतित_, _पतित_

9. बाप बच्चों को यह ज्ञान देते हैं कि मनमनाभव। तुम ____ सहित कहते हो, तुम्हें बाप हर बात यथार्थ रीति ____ सहित समझाते हैं। बाप कहते हैं मेरा काम ही है पतित से _____ बनाना। मुझे तो बुलाते ही इसलिए हो।
° _अर्थ_, _अर्थ_, _पावन_

10. परमात्मा किन चीजों का *दाता* है? (3)
° सर्व का *सद्गति* दाता, *मुक्ति-जीवनमुक्ति* का दाता, एक ही ज्ञान सागर बाप है इसलिए उनको *ज्ञान दाता* कहा जाता है। (भगवान ने ज्ञान दिया था परन्तु कब दिया, किसने दिया, यह किसको पता नहीं है।)

11. तुम जानते हो – अभी यह दुनिया ____ का जंगल बन गई है। यह लक्ष्मी-नारायण तो _____ हैं ना। उन्हों के आगे कांटे जाकर कहते हैं आप सर्वगुण सम्पन्न…… हम पापी कपटी हैं। सबसे बड़ा कांटा है – _____का। बाप कहते हैं इस पर जीत पहन ___ -जीत बनो।
° _कांटों_, _फूल_, _काम विकार_, _जगत_

12. मनुष्य कहते हैं भगवान को कोई न कोई रूप में आना है, ____ -रथ पर विराजमान हो आना है। भगवान को आना ही है पुरानी दुनिया को ____ बनाने। नई दुनिया को सतोप्रधान, पुरानी को _______ कहा जाता है। जबकि अभी पुरानी दुनिया है तो जरूर ____ को आना ही पड़े। बाप को ही रचयिता कहा जाता है। तुम बच्चों को कितना सहज समझाते हैं। कितनी ____ होनी चाहिए।
° _भागी_, _नया_, _तमोप्रधान_, _बाप_, _खुशी_

13. सिर्फ शिवजयन्ती नहीं है परन्तु ____ शिव जयन्ती है। जरूर जब शिव की जयन्ती होगी तो ____ की भी जयन्ती होगी। लौकिक, पारलौकिक और यह है ____ बाप। यह है प्रजा- _____ ब्रह्मा।
° _त्रिमूर्ति_, _ब्रह्मा_, _अलौकिक_, _पिता_

14. *शिवरात्रि* का अर्थ भी नहीं जानते। अभी तुम जानते हो (कलियुग रात्री को सतयुग दिन बनाते), बाप आते ही हैं – सबकी ज्योत जगाने। तो हमें *कैसे मनाना* है?
° तुम यह *बत्तियां आदि जगायेंगे* तो समझेंगे इनका कोई बड़ा दिन है। (अब तुम जगाते हो अर्थ सहित।)

15. जब इस मनुष्य सृष्टि झाड़ का बीज रूप परमात्मा है, तो उस परमात्मा द्वारा जो नॉलेज प्राप्त हो रही है वो सब मनुष्यों के लिये जरूरी है। सभी धर्म वालों को यह नॉलेज लेने का अधिकार है। भल हरेक धर्म की _____ अपनी-अपनी है, हरेक का ____ अपना-अपना है, हरेक की ____ अपनी-अपनी है, हरेक का ____ अपना-अपना है लेकिन यह नॉलेज सबके लिये हैं।
° _नॉलेज_, _शास्त्र_, _मत_, _संस्कार_

16. भल वो इस ज्ञान को न भी उठा सके, हमारे घराने में भी न आवे परन्तु सबका ____ होने कारण उनसे ____ लगाने से फिर भी ____ अवश्य बनेंगे। इस कारण अपने ही सेक्शन में ____ अवश्य पायेंगे। बहुत मनुष्य ऐसे कहते हैं हमें भी मुक्ति चाहिए, मगर सजाओं से छूट मुक्त होने की ____ भी इस योग द्वारा मिल सकती है।
° _पिता_, _योग_, _पवित्र_, _पद_, _शक्ति_

Answers from Sakar Murli 06-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 06-10-2020*

1. सुखदाता द्वारा सुख का भण्डार प्राप्त होना – यही उनके ____ की निशानी है।
° _प्यार_

2. जैसे आजकल स्थूल खुशबू के साधनों से गुलाब 🌹, चंदन व भिन्न-भिन्न प्रकार की खुशबू फैलाते, ऐसे हमे *कौन-सा आटोमेटिक स्विच आन* करनी है? _(जिससे विश्व में अशुद्ध वृत्तियों की बदबू समाप्त हो)_
° *संकल्प का!* (आप शिव शक्ति कम्बाइन्ड बन मन्सा संकल्प व वृत्ति द्वारा *सुख-शान्ति, प्रेम, आनंद की खुशबू* फैलाओ। रोज़ अमृतवेले भिन्न-भिन्न श्रेष्ठ वायब्रेशन के *फाउन्टेन* ⛲के माफिक आत्माओं के ऊपर *गुलावाशी* डालो।)

3. ___ है सुख का रास्ता, ____ से सतयुग की राजाई मिलती है।
° _ज्ञान_, _ज्ञान_

4. ____ की यात्रा बिगर कल्याण होना नहीं है। वर्सा देने वाले बाप को तो जरूर _____ करना है तो विकर्म विनाश होंगे। बाबा को तो घड़ी-घड़ी _____ करना है। नेष्ठा में एक जगह बैठने की बात नहीं। चलते-फिरते ____ करना है।
°याद, _याद_, _याद_, _याद_

5. तमोप्रधान से _____ बनना है। बाप श्रीमत देते हैं ऐसे-ऐसे करो, ______ धारण करो। जो करेंगे वह पायेंगे। तुम्हारे तो खुशी में _____ खड़े हो जाने चाहिए। बेहद का बाप मिला है, उनकी सर्विस में ____ बनना है। अन्धों की _____ बनना है। जितना जास्ती बनेंगे, उतना अपना ही कल्याण होगा।
°सतोप्रधान, _दैवीगुण_, _रोमांच_, _मददगार_, _लाठी_

6. एक-दो से नफ़रत-विरोध के बदले, *एक-दो से प्यार से रहना* हैं। इसके लिए बाबा ने कौन-से दिव्य कारण / समझानी दी? (6)
° बाप कहते हैं *तुम आत्मा रूप-बसन्त बनते* हो। (तुम्हारे मुख से रत्न ही निकलने चाहिए। अगर पत्थर निकलते हैं तो गोया आसुरी बुद्धि ठहरे।)
° तुम कहते हो ना – बाबा हम तो *लक्ष्मी-नारायण* बनेंगे। तुमको तो यहाँ *दैवीगुण* ही धारण करने हैं। (आसुरी चलन तो नहीं होनी चाहिए।)
° जानते हो हम सब भाई-बहन, *ईश्वरीय सन्तान* हैं। (ईश्वर की महिमा है वो ज्ञान का सागर, प्रेम का सागर है, यानी सबको सुख देते हैं। तुम सब दिल से पूछो – जैसे बाप भविष्य 21 जन्मों के लिए सुख देते हैं वैसे हम भी वह कार्य करते हैं?)
° तुम हो ही *दु:ख हर्ता, सुख कर्ता बाप के बच्चे* । (दु:ख देने का ख्याल भी तुमको नहीं आना चाहिए।)
° बच्चों को बहुत-बहुत मीठा बनना है। जो सर्विस करेंगे वही प्यारे लगेंगे। *भगवान बाप आये हैं* बच्चों के पास, उनकी श्रीमत पर चलना पड़े। (श्रीमत पर नहीं चलते हैं तो तूफान लगने से गिर पड़ते हैं।)
° विप्रीत बुद्धि होना असुरों का काम है। अपने को *ईश्वरीय सम्प्रदाय* कहलाकर फिर एक-दो को दु:ख देना उनको असुर कहा जाता है। (ऩफरत करने वाले कलियुगी नर्कवासी हैं।)

7. ऐसा *मीठा प्यारा दिव्यगुण-सम्पन्न* बनने लिए बाबा ने कौन-सी विधियां सुनाई? (4)
° बाबा कहते हैं *अपना चार्ट रखो*। चार्ट रखने से मालूम पड़ेगा – हमारा रजिस्टर सुधरता जाता है या वही आसुरी चलन है? (बाबा सदैव कहते हैं कभी किसको दु:ख न दो। निंदा-स्तुति, मान-अपमान, ठण्डी-गर्मी सब सहन करना है। चार्ट लिखते रहो तो डर रहेगा। कोई-कोई लिखते भी हैं, बाबा देखेंगे तो क्या कहेंगे। चाल-चलन में बहुत फ़र्क रहता है।)
° कोई ने कुछ कहा तो *शान्त रहना* चाहिए। ऐसे नहीं कि उनके लिए दो वचन और कह देना है। (कोई किसको दु:ख देते हैं तो उनको बाप समझायेंगे ना। बच्चे, बच्चे को कह नहीं सकते। *अपने हाथ में लॉ नहीं लेना* है। कुछ भी बात है तो बाप के पास आना है।)
° *जांच करनी है* कि हम किसको दु:ख तो नहीं देते हैं? आसुरी चलन तो नहीं चलते हैं? (माया ऐसे काम कराती है, बात मत पूछो।)
° बाप बच्चों को समझाते हैं बच्चे माया बड़ा जोर से थप्पड़ लगाती है, विकर्म करा देती है इसलिए *रोज़ कचहरी करो, आपेही अपनी* कचहरी करना अच्छा है। (यह भी समझते नहीं हैं – शिवबाबा ऑर्डर करते हैं। बाबा ने कहा है हमेशा समझो शिवबाबा सुनाते हैं। तो तुम सेफ रहेंगे, उनके साथ कितना रिगार्ड, रायॅल्टी से चलना चाहिए।)

8. सच बताते तो आधा माफ, कोई सच नहीं बताने से सौगुणा दण्ड। तो *सच सुनाना इतना जरूरी क्यों* है?
° नहीं तो फिर वह *आदत बढ़ती जायेगी* । (बाप को सुनायेंगे तो बाबा सावधान करेंगे।)
° सुनाते नहीं, छिपा लेंगे तो फिर *करते ही रहेंगे* । न बतलाने से एक बार के बदले *100 बार* करते रहेंगे। (बाबा कितनी अच्छी राय देते हैं परन्तु कोई-कोई को ज़रा भी असर नहीं होता है। अपनी तकदीर को जैसे लात मारते रहते हैं। बहुत-बहुत नुकसान करते हैं।)

9. बाप कहते तुम अपने को *आत्मा* समझ बाप को याद करो। *देही-अभिमानी* बनेंगे तब ही इतना ऊंच पद पायेंगे। कई बच्चे फालतू बातों में बहुत टाइम वेस्ट करते हैं। ज्ञान की बात ही ध्यान में नहीं आती। यहां बाबा ने कौन-सा (भक्ति का) *मिसाल* दिया?
° यह भी गायन है *घर की गंगा का मान नहीं रखते* । घर की चीज़ का इतना मान नहीं रखते हैं। (जबकि कृष्ण आदि का चित्र घर में भी है फिर श्रीनाथ द्वारे आदि इतना दूर-दूर क्यों जाते हो। भिन्न-भिन्न लिंग, गंगाजल आदि। यह भी ड्रामा में पार्ट है जो तुमको धक्का खाना पड़ता है। यह है ही ज्ञान और भक्ति का खेल।)

10. गीत 🎵:-तू प्यार का सागर है… वो तो ऐसे ही सिर्फ महिमा गाते रहते हैं। इतना प्यार नहीं है क्योंकि पहचान नहीं। *और हमें?*
° तुमको *बाप ने पहचान दी है* मैं प्यार का सागर हूँ और तुमको प्यार का सागर बना रहा हूँ। (बाप प्यार का सागर कितना सबको प्यारा लगता है। वहाँ भी सब एक-दो को प्यार करते हैं।)

11. और सब सतसंगों आदि में, और इस पढ़ाई में क्या *अन्तर* है?
° वह है कनरस, जिससे अल्पकाल सुख मिलता है। यह *बाप द्वारा तो 21 जन्मों का सुख* मिलता है। बाबा *सुख-शान्ति का सागर* है, हमको भी बाप से *वर्सा* मिलना है। (सेवा करेंगे तब तो मिलेगा, इसलिए बैज सदा पड़ा रहे। हमको ऐसा सर्वगुण सम्पन्न बनना है, जांच करनी है।)

12. जब कोई मरता है तो कहते हैं *स्वर्गवासी* हुआ। इन बातों को अभी तुमने समझा है। और हम क्या कहते? _(स्वर्गवासी के विषय पर)_
° अभी तुम कहते हो *हम स्वर्गवासी बनने के लिए स्वर्ग की स्थापना करने वाले बाप के पास* बैठे हैं। (ज्ञान की बूंद मिलती है। थोड़ा भी ज्ञान सुना तो स्वर्ग में जरूर आयेंगे, बाकी है पुरूषार्थ पर।)

13. *ट्रेन में भी तुम सर्विस* कर सकते हो। क्या समझाना है?
° तुम कोई को भी समझा सकते हो कि *ऊंच ते ऊंच कौन* है? उनको *याद* करो। वर्सा उनसे ही मिलेगा। आत्मा को बाप से *बेहद का वर्सा* मिलता है। (कोई दान-पुण्य करने से राजा के पास जन्म लेते हैं सो भी अल्पकाल के लिए। सदा तो राजा नहीं बन सकते। तो बाप कहते हैं यहाँ तो 21 जन्मों की गैरन्टी है। वहाँ यह पता नहीं पड़ेगा कि हम बेहद के बाप से यह वर्सा ले आये हैं। यह ज्ञान इस समय तुमको मिलता है तो कितना अच्छी रीति पुरूषार्थ करना चाहिए।)

14. बच्चों को युक्तियां भी बहुत समझाई जाती हैं, अपने *पति को* पवित्रता के लिए क्या समझा सकते?
° बोलो, *बाबा कहते हैं* बच्चे काम महाशत्रु है, इन पर जीत पहनो। माया जीते *जगतजीत* बनो। अब हम *स्वर्ग के मालिक* बनें या तुम्हारे कारण अपवित्र बन नर्क में जायें। *बहुत प्यार, नम्रता* से समझाओ। (मुझे नर्क में क्यों ढकेलते हो। ऐसी बहुत बच्चियां हैं – समझाते-समझाते आखिर पति को ले आती हैं। फिर पति कहता कि यह हमारा गुरू है, इसने हमको बहुत अच्छा रास्ता बताया। बाबा के आगे चरणों में आए गिरते हैं।)

15. अभी कुछ न कुछ विकर्म रहे हुए हैं, हिसाब-किताब है इसलिए ____ पूरा नहीं लगता है। ____ नहीं करते हैं तो गोया अपने पांव पर कुल्हाड़ा ⛏️ मारते। अभी कोई भी नहीं कह सकते कि हम ______ अवस्था में हैं। नज़दीक आने से फिर बहुत निशानियाँ दिखाई पड़ेंगी। सारा मदार तुम्हारी अवस्था पर और _____ पर है। तुम्हारी पढ़ाई पूरी होने पर होगी तो फिर देखेंगे _____ सिर पर खड़ी है। अच्छा!
°योग, _पुरुषार्थ_, _कर्मातीत_, _विनाश_, _लड़ाई_

16. बाबा ने *अन्त में साक्षात्कार द्वारा सजाओं* का वर्णन कैसे किया? (2)
° बाप कहते हैं ग़फलत छोड़ो। नहीं तो बहुत *पछताना* पड़ेगा। अपने पुरूषार्थ का फिर पिछाड़ी में साक्षात्कार जरूर होगा फिर बहुत *रोना* पड़ेगा। क्या *कल्प-कल्प* यही वर्सा मिलेगा। *दास-दासी* जाकर बनेंगे। (पिछाड़ी में फिर तुम बच्चों को साक्षात्कार होंगे। साक्षात्कार बिगर सज़ा कैसे मिल सकती। कायदा ही नहीं।)
° अन्त में सबको साक्षात्कार होगा। यह-यह बनेंगे, क्लास में ट्रांसफर होते हैं तो मार्क्स निकलती हैं ना। *ट्रांसफर होने पहले रिजल्ट निकलती* है। तुम भी अपने क्लास में जाते हो तो मार्क्स का पता पड़ेगा फिर बहुत *ज़ार-ज़ार रोयेंगे*। (फिर क्या कर सकेंगे? रिजल्ट तो निकल गई ना। जो तकदीर में था वो ले लिया। बाप सब बच्चों को सावधान करते हैं। कर्मातीत अवस्था अभी हो न सके।)

Answers from Sakar Murli 05-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 05-10-2020*

1. परमात्म प्यार ❤️ में खो जाओ तो दु:खों की _____ भूल जायेगी।
°दुनिया

2. ब्राह्मण परिवार की विशेषता है *अनेक होते भी एक* । इस एकता द्वारा ही सारे विश्व में *एक धर्म, एक राज्य की स्थापना* होती है। तो अब क्या करना है?
° इसलिए विशेष अटेन्शन देकर *भिन्नता को मिटाओ* और *एकता को लाओ* तब कहेंगे सच्चे सेवाधारी। (सेवाधारी स्वयं प्रति नहीं लेकिन सेवा प्रति होते हैं। स्वयं का सब कुछ सेवा प्रति स्वाहा करते हैं, जैसे साकार बाप ने सेवा में हड्डियां भी स्वाहा की ऐसे आपकी हर कर्मेन्द्रिय द्वारा सेवा होती रहे।)

3. शिवबाबा हमारे साथ *कौन-सा व्यापार* करते?
° *पुराने शरीर आदि लेकर नया देते* हैं, सबको रास्ता बताते हैं। (यह भी धन्धा उनको करना है। यह व्यापार तो बहुत बड़ा है।)

4. और *हमे इस व्यापार में* क्या करना है? (3)
° जितना तुम *बाप की याद* में रहेंगे, *कमाई* में आत्मा को बहुत मज़ा आयेगा। (कमाई के लिए मनुष्य रात में भी जागते हैं। सीज़न में सारी रात भी दुकान खुला रहता है। तुम्हारी कमाई रात को और सवेरे को बहुत अच्छी होगी।)
° *स्वदर्शन चक्रधारी* बनेंगे, *त्रिकालदर्शी* बनेंगे। *21 जन्म के लिए धन* इकट्ठा करते हैं। (मनुष्य साहूकार बनने के लिए पुरूषार्थ करते हैं। तुम भी बाप को याद करेंगे तो विकर्म विनाश होंगे, बल मिलेगा। याद की यात्रा पर नहीं रहेंगे तो बहुत घाटा पड़ जायेगा क्योंकि सिर पर पापों का बोझा बहुत है। अब जमा करना है।)
° *विचार सागर मंथन कर रत्न निकालने* हैं। (बाबा कहते हैं जितना हो सके अपनी कमाई करनी है, यही काम आनी है। *एकान्त में* बैठ बाप को याद करना है।)

5. बाप पहले-पहले समझाते मीठे-मीठे बच्चों जब यहाँ बैठते हो, तो अपने को आत्मा समझ बाप को याद करते रहो और कोई तरफ बुद्धि नहीं जानी चाहिए। *आत्मा क्यों समझना* है? (3)
° तुम बच्चे जानते हो *हम आत्मा हैं* । (पार्ट हम आत्मा बजाती हैं इस शरीर द्वारा। आत्मा अविनाशी, शरीर विनाशी है। तो तुम बच्चों को देही-अभिमानी बन बाप की याद में रहना है।)
° हम आत्मा हैं *चाहें तो इन आरगन्स से काम लेवें वा न लेवें*। (अपने को शरीर से अलग समझना चाहिए। बाप कहते हैं अपने को आत्मा समझो। देह को भूलते जाओ। *हम आत्मा इन्डिपिन्डेंट हैं*।)
° यह पढ़ाई है, अपने को आत्मा न समझने से *बाप-टीचर-गुरू सबको भूल जाते* हैं।

6. *शरीर का भान* छोड़ो। क्यों? (2)
° यह पुराना शरीर है ना। *पुरानी चीज़ को छोड़ा जाता है ना*। अपने को अशरीरी समझो।
° अभी तुमको बाप को याद करते-करते बाप के पास जाना है। ऐसे करते-करते फिर तुमको आदत पड़ जायेगी। अभी तो तुमको *घर जाना है फिर इस पुरानी दुनिया को याद क्यों* करें।

7. भक्ति मार्ग में भी ब्रह्म तत्व को या कोई शिव को भी याद करते हैं। परन्तु वह याद कोई *यथार्थ नहीं* है। _(सही / गलत)_
° सही ( *बाप का परिचय ही नहीं* तो याद कैसे करें। तुमको अब बाप का परिचय मिला है।)

8. हमको सिवाए एक बाप के और कोई को ____ नहीं करना है। हम आत्मा का ___ रहना है अब बाप के साथ। ____ में बैठ ऐसे अपने साथ मेहनत करनी है। इसमें है ___ की बात। _____ तो है सिखलाने वाला। उनको तो पुरूषार्थ नहीं करना है। यह बाबा पुरूषार्थ करते हैं, वह फिर तुम बच्चों को भी समझाते हैं। गृहस्थ व्यवहार में तो रहना ही है। बाकी ____ निकालना है। स्टूडेण्ट को पढ़ाई का ____ होता है ना।
°याद , योग, _एकान्त_, _बुद्धि_, _शिवबाबा_, _टाइम_, _शौक_

9. बाबा ने कहा सवेरे-सवेरे उठकर *एकान्त में अपने साथ बातें* करते रहो। *विचार सागर मंथन* करो, बाप को याद करो, इससे तुमको खुशी भी रहेगी। तो कैसी-कैसी बातें कर सकते? (4)
° जितना हो सके ऐसे बैठकर विचार करो। *अभी हमको जाना है अपने घर*। इस शरीर को तो यहाँ छोड़ना है।
° बाप को *याद करने से ही विकर्म विनाश होंगे* और आयु भी बढ़ेगी। अन्दर यह चिन्तन चलना चाहिए।
° बाबा हम *अभी आया कि आया आपकी सच्ची गोद में*। वह है रूहानी गोद।
° तो ऐसे-ऐसे अपने साथ बातें करनी चाहिए। बाबा आया हुआ है। *बाबा कल्प-कल्प आकर हमको राजयोग सिखलाते* हैं। (बाप कहते हैं – मुझे याद करो और चक्र को याद करो। स्वदर्शन चक्रधारी बनना है।)

10. *एकान्त का अर्थ* क्या है? एकान्त में बैठ तुमको *कौन-सा अनुभव* करना है?
° *एकान्त* का अर्थ है *एक* की याद में इस शरीर का *अन्त* हो अर्थात् एकान्त में बैठ ऐसा अनुभव करो कि मैं आत्मा इस शरीर (चमड़ी) को छोड़ बाप के पास जाती हूँ। (कोई भी याद न रहे। बैठे-बैठे अशरीरी हो जाओ। जैसेकि हम इस शरीर से मर गये। बस हम आत्मा हैं, शिव बाबा के बच्चे हैं, इस प्रैक्टिस से देह भान टूटता जायेगा।)

11. *जीते जी मरना* किसे कहा जाता है?
° एकान्त में बैठ अब ऐसा अभ्यास करो जो *अनुभव हो मैं शरीर से भिन्न आत्मा हूँ* , इसको ही जीते जी मरना कहा जाता है।

12. फुर्सत है तो मन्दिरों में भी बैज सहित बहुत सर्विस कर सकते। ( *रूहानी मिलट्री*!)। क्या समझा सकते?
° तुम लिखते भी हो – हम *स्वर्ग* की स्थापना कर रहे हैं। *आदि सनातन देवी-देवता धर्म* था, अब नहीं है जो फिर स्थापन करते हैं। यह *लक्ष्मी-नारायण* एम-ऑब्जेक्ट है ना। (लक्ष्मी-नारायण सिर्फ एक तो नहीं थे, उन्हों की राजधानी थी ना। यह *स्वराज्य* स्थापन कर रहे हैं। अब बाप कहते हैं मन-मनाभव। बाप को याद करो तो विकर्म विनाश होंगे।)

13. एम ऑब्जेक्ट कितनी ___ है। एक राज्य, एक धर्म था, बहुत साहूकार थे। मनुष्य चाहते हैं एक राज्य, एक धर्म हो। मनुष्य जो चाहते हैं सो अब _____ दिखाई पड़ते हैं फिर समझेंगे यह तो ठीक कहते हैं। 100 प्रतिशत पवित्रता, सुख, शान्ति का राज्य फिर से _____ कर रहे हैं फिर तुमको खुशी भी रहेगी। याद में रहने से ही ____ लगेगा। शान्ति में रह थोड़े ____ ही बोलने हैं। जास्ती आवाज़ नहीं।
°क्लीयर,आसार,स्थापन,तीर,_अक्षर_

14. कोई समय यह ट्रांसलाइट का चित्र बैटरी सहित उठाकर _____ देंगे और सबको कहेंगे, यह राज्य हम स्थापन कर रहे हैं। यह चित्र सबसे फर्स्टक्लास है। यह चित्र बहुत ______ हो जायेगा। यह गोला, झाड़ आदि के चित्र कम थोड़ेही हैं। एक दिन तुम्हारे पास यह सब चित्र _______ के बन जायेंगे। फिर सब कहेंगे हमको ऐसे चित्र ही चाहिए। इन चित्रों से फिर _____ मार्ग की सर्विस हो जायेगी।
°परिक्रमा, _नामीग्रामी_, _ट्रांसलाइट_, _विहंग_

15. ____ भी तुम सौगात देते रहो। शिवबाबा का भण्डारा तो सदा भरपूर है। आगे चलकर बहुत सर्विस होगी। ____ भी अच्छे हों जो मनुष्य पढ़कर जागें। बच्चे वृद्धि को पाते रहते हैं। इस लक्ष्मी-नारायण के चित्र को देखने से ही समझ में आ जाता है – शिव-बाबा यह ____ दे रहे हैं। _____ की स्थापना करने वाला बाप ही है।
°लिटरेचर, _स्लोगन_, _वर्सा_, _सतयुग_

16. तुम्हारे पास बच्चे इतने आयेंगे जो ____ नहीं रहेगी। ढेर आयेंगे। बहुत खुशी होगी। दिन-प्रतिदिन तुम्हारा ____ बढ़ता जायेगा। ड्रामा अनुसार जो फूल बनने वाले होंगे उनको ___ होगा।
°फुर्सत, _फोर्स_, _टच_

17. तुम खुदाई ______ हो ना। सच्ची-सच्ची बात बाबा पहले से ही बता देते हैं – क्या-क्या करना है। ऐसे ____ ले जाने पड़ेंगे। सीढ़ी का भी ले जाना पड़े। ड्रामा अनुसार स्थापना तो होनी ही है। बाबा सर्विस के लिए जो _____ देते हैं, उस पर ध्यान देना है। बाबा कहते हैं ____ किस्म-किस्म के लाखों बनाओ। ट्रेन की टिकेट लेकर 100 माइल तक सर्विस करके आओ। एक ____ से दूसरे में, फिर तीसरे में, बहुत सहज है। बच्चों को सर्विस का ____ रहना चाहिए।
°खिदमतगार, _चित्र_, _डायरेक्शन_, _बैजेस_, _डिब्बे_, _शौक_

18. बाप भी है ____ आत्मा। उनको शरीर तो है नहीं। अभी इस ____ में बैठ तुमको समझाते हैं। यह वन्डरफुल बात है। भागीरथ पर विराजमान होंगे तो जरूर दूसरी ____ है। बहुत जन्मों के अन्त का जन्म इनका है। नम्बरवन पावन वही फिर नम्बरवन पतित बनते हैं।
°परम, _शरीर_, _आत्मा_

19. *ब्रह्मा बाबा* अपने को भगवान, विष्णु आदि तो कहते नहीं। _(सही / गलत)_
° सही ( *यहाँ एक भी आत्मा पावन है नहीं*, सब पतित ही हैं।)

20. बाबा इनकी *बुद्धि को टच* करो। _(सही / गलत)_ (2)
° टच कोई *बाबा थोड़ेही करते* हैं। (समय पर आपेही टच होगा। बाप तो रास्ता बतायेंगे ना।)
° बहुत बच्चियां लिखती हैं – हमारे पति की बुद्धि को टच करो। ऐसे सबकी बुद्धि को टच करेंगे *फिर तो सब स्वर्ग में* इकट्ठे हो जायें। पढ़ाई की ही मेहनत है।

21. और धर्मों की स्थापना और *दैवी झाड़ की स्थापना 🌱* में क्या अन्तर है?
° और धर्मों में *ऊपर से आते* हैं। (जैसेकि झाड़ स्थापन हुआ ही पड़ा है, इसमें फिर नम्बरवार आते जायेंगे, वृद्धि को पाते जायेंगे। तकलीफ महिमा कुछ नहीं। धर्म स्थापक के पिछाड़ी आते रहते हैं।)
° यहाँ तो बाप भविष्य देवी-देवता धर्म की स्थापना कर रहे हैं। *संगमयुग पर नया सैपलिंग 🌱लगाते* हैं ना। (पहले पौधों को गमले में लगाकर फिर नीचे लगा देते हैं। वृद्धि होती जाती है।) तुम भी *अब पौधा लगा रहे हो फिर सतयुग में वृद्धि को पाए राज्य-भाग्य* पायेंगे। तुम नई दुनिया की स्थापना कर रहे हो।

22. समझते हैं हम बहुत सुधार कर रहे। *5 वर्ष के अन्दर इतना अनाज* होगा जो अनाज की कभी तकलीफ नहीं होगी। और तुम क्या जानते हो?
° ऐसी हालत होगी जो अन्न खाने के लिए नहीं मिलेगा। ऐसे नहीं अनाज कोई सस्ता होगा।
(तुम बच्चे जानते हो हम 21 जन्म के लिए अपना राज्य-भाग्य पा रहे हैं। यह *थोड़ी बहुत तकलीफ* तो सहन करनी ही है। कहा जाता है *खुशी जैसी खुराक नहीं*। अतीन्द्रिय सुख गोप-गोपियों का गाया हुआ है।)

Answers from Sakar Murli 03-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 03-10-2020*

1. ______ रूपी पहरेदार ठीक हैं तो ______ सुख का खजाना खो नहीं सकता।
°अटेन्शन, _अतीन्द्रिय_

2. अपने श्रेष्ठ पवित्र जीवन द्वारा स्वयं को *परमात्म ज्ञान का प्रत्यक्ष प्रमाण*-प्रूफ समझने से ही माया प्रूफ बनेंगे। तो *सम्पूर्ण पवित्र जीवन में चलना* किसे कहेंगे? (3)
° सबसे बड़ी असम्भव से सम्भव होने वाली बात *प्रवृत्ति में रहते पर-वृत्ति* में रहना। (देह और देह की दुनिया के संबंधों से पर (न्यारा) रहना।)
° पुराने शरीर की आंखों से पुरानी दुनिया की वस्तुओं को *देखते हुए न देखना* अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र जीवन में चलना। (यही परमात्मा को प्रत्यक्ष करने वा माया प्रूफ बनने का सहज साधन है।)

3. कई फिर ____ तू आत्मा बच्चे भी हैं। बाप तो बच्चों की बहुत _____ करते हैं। बाप कहते हैं – बच्चे, तुम बहुत-बहुत _____ हो। तुमको तो इतने झंझट नहीं।बाबा को भी _____ करना है। माशूक की याद तो बिल्कुल _____ होनी चाहिए।
°योगी, _महिमा_, _भाग्यशाली_, _याद_, _पक्की_

4. *परमधाम* सम्बंधित कौन-सी बातें बाबा ने सुनाई? _(यह योग में बहुत उपयोगी रहता)_ (2)
° ऊंच ते ऊंच नाम है, *ऊंच उनका गांव*। (बाप सभी आत्माओं सहित वहाँ निवास करते हैं। बैठक भी ऊंच है। (वास्तव में कोई बैठने की जगह नहीं है। जैसे स्टॉर ⭐ कहाँ बैठे हैं क्या? खड़े हैं ना।)
° तुम *आत्मायें भी* अपनी ताकत से *वहाँ खड़ी* हो। (ताकत ऐसी मिलती है जो वहाँ जाकर खड़े होते हैं। बाप का नाम ही है सर्वशक्तिमान्, उनसे शक्ति मिलती है।)

5. *परमात्मा* बाप ने अपनी कौन-सी *महिमा* सुनाई? _(योग में यह एक-एक *टाइटल* बहुत काम आते।)_ (4)
° *रूहानी बाप* का नाम क्या है? *शिवबाबा* । वह है ही *भगवान*, *बेहद का बाप*। (मनुष्य को कभी बेहद का बाप अथवा *ईश्वर* वा भगवान नहीं कहा जा सकता।)
° *ऊंच ते ऊंच* है ही भगवान, *परमपिता*। (ऊंच ते ऊंच नाम है, ऊंच उनका गांव।)
° बाप का नाम ही है *सर्वशक्तिमान्*, उनसे शक्ति मिलती है। (आत्मा उसको याद करती है, बैटरी चार्ज हो जाती है।)
° पहले भक्ति शुरू होती है तो *पहले एक ही शिव की पूजा* करते। (यथा राजा-रानी तथा प्रजा। ऊंच ते ऊंच है ही भगवान, उनको ही याद करना है।)

6. बाप खुद अपना परिचय देते हैं कि मैं क्या हूँ, कैसा हूँ। कैसे तुम्हारी आत्मा की बैटरी डल हो जाती है। *अब तुमको राय देता हूँ*……….कौन-सी?
° *मेरे को याद करो तो बैटरी सतोप्रधान फर्स्टक्लास हो जायेगी*। (पवित्र बनने से आत्मा 24 कैरेट बन जाती है। अभी तुम मुलम्मे के बन गये हो। ताकत बिल्कुल खत्म हो गई है। वह शोभा नहीं रही है। अब बाप तुम बच्चों को समझाते हैं बच्चे मुख्य बात है योग में रहना, पवित्र बनना।)

7. सर्वशक्तिमान बाप की याद से ही *बैटरी चार्ज* हो जाती है। तो यहां बाबा ने कौन-सा *मिसाल* दिया? _(बैटरी)_
° *जैसे मोटर 🚗 में बैटरी* होती है, उसके ज़ोर से ही मोटर चलती है। बैटरी में *करेन्ट भरी हुई* होती है फिर चलते-चलते वह खाली हो जाती है फिर बैटरी *मेन पावर से चार्ज* कर मोटर में डालते हैं। (वह होती हैं हद की बातें। यह है बेहद की बात। तुम्हारी बैटरी तो 5 हज़ार वर्ष चलती है। चलते-चलते फिर ढीली हो जाती है।)

8. आत्मा उसको याद करती है, बैटरी चार्ज हो जाती है।
मालूम पड़ता है – *एकदम खत्म नहीं होती* है, कुछ न कुछ रहती है। यहां बाबा ने कौन-सा मिसाल दिया?
° जैसे *टार्च 🔦 में डिम हो जाती* है ना। (आत्मा तो है ही इस शरीर की बैटरी। यह भी डल हो जाती है। बैटरी इस शरीर से निकलती भी है फिर दूसरी, तीसरी मोटर में जाकर पड़ती है। 84 मोटरों में उनको डाला जाता है तो अब बाप कहते हैं तुम कितने डलहेड पत्थरबुद्धि बन गये हो। अब फिर अपनी बैटरी को भरो। सिवाए बाप की याद के आत्मा कभी पवित्र हो नहीं सकती। एक ही सर्वशक्तिमान् बाप है, जिनसे योग लगाना है।)

9. तुम ईश्वरीय ____ में लग जाओ। कभी भी आपस में _____ में नहीं आना है। _____ बन सर्विस करनी है। अपने तन-मन धन से, बहुत-बहुत _____ से सेवा कर सबको बाप का परिचय (पैगाम) देना है।
°सर्विस, मतभेद, _फ्राकदिल_, _नम्रता_

10. तुम बच्चों से कई पूछते हैं – तुम *इनको* भगवान क्यों कहते हो? तो क्या उत्तर देना है? _(हम तो उनको भगवान नहीँ कहते!)_
° बाप पहले से ही समझाते हैं – *कोई भी स्थूल वा सूक्ष्म देहधारी को भगवान नहीं कह सकते*। (सूक्ष्म देहधारी सूक्ष्मवतनवासी ही ठहरे। उन्हों को देवता कहा जाता है। ऊंच ते ऊंच है ही भगवान, परमपिता। ऊंच ते ऊंच नाम है, ऊंच उनका गांव।)

11. *मुख्य बात है योग* में रहना, *पवित्र* बनना। नहीं तो क्या परिणाम होगा? _(कुक्कड़ ज्ञानी)_
° *बैटरी* भरेगी नहीं। *योग* लगेगा नहीं। भल कुक्कड़ ज्ञानी तो बहुत हैं। ज्ञान भल देते हैं परन्तु वह *अवस्था* नहीं है। (यहाँ बड़े भभके से अनुभव सुनाते हैं। *अन्दर खाता रहता* है। मैं जो वर्णन करता हूँ ऐसी अवस्था तो है नहीं।)

12. हर बात आदि से अन्त तक ऊपर से नीचे तक बाप समझाते हैं।अभी तुम फिर पवित्र सतोप्रधान बन रहे हो, इसमें ही मेहनत है। और आपस ब्राह्मण भाई-बहन में तो बिलकुल शुद्ध दृष्टि चाहिए (सब देवता बनते हैं!)। तो *दृष्टि को शुद्ध करने लिए कौन-सी युक्तियां* बाबा ने सुनाई? (6)
° *अपने को देखना* है (माया धोखा तो नहीं देती? क्रिमिनल आई तो नहीं बनती? कोई पाप का ख्याल तो नहीं आता?)
° कुदृष्टि कभी नहीं जानी चाहिए। उनको रोकना है। (यह भी *हमारी मीठी बहन वा भाई* है। वह *रूहानी लव* रहना चाहिए। इसमें बहुत-बहुत मेहनत है।)
° है भी सहज याद। अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना है। बाबा ने समझाया है – यह आंखें बहुत धोखा देने वाली हैं, उनको बदलना है। (हम *आत्मा* हैं। अभी तो हम *शिवबाबा के बच्चे* हैं। *एडाप्ट* किये हुए *भाई-बहन* हैं। हम अपने को *बी.के.* कहलाते हैं।)
° *सच्चे बाप के आगे सच्चा* रहना, झूठ बोला तो बहुत दण्ड पड़ जायेगा। (कोर्ट में कसम उठाते हैं ना। सच्चे ईश्वर बाप के आगे सच कहेंगे। सच्चे बाप का बच्चा भी सच्चा होगा। बाप ट्रूथ है ना। वह सत्य ही बतलाते हैं। बाकी सब हैं गपोड़े।)
° अपनी *अवस्था का वर्णन* करना चाहिए। *अनुभव सुनाना* चाहिए। (हम घर में कैसे रहते हैं? अवस्था पर क्या असर पड़ता है?)
° *डायरी* रखो – कितना समय इस अवस्था में रहता हूँ? (बाप समझाते हैं रूसतम से माया भी रूसतम होकर लड़ती है।)

13. श्री श्री 108 अपने को कहलाते हैं, वास्तव में यह तो माला है ना, जो सिमरते हैं। तुम बच्चों को अब ज्ञान मिला हुआ है। तो *108 की माला* पर क्या समझा सकते? (2)
° बोलो, 108 की जो माला है उसमें *ऊपर में फूल तो है निराकार*। उनको ही सब याद करते हैं।
° उनकी याद से ही हम (माला का दाना) *स्वर्ग की पटरानी* अर्थात् महारानी बनते हैं। *नर से नारायण, नारी से लक्ष्मी* बनना – यह है सूर्यवंशी मखमल की पटरानी बनना फिर खादी की हो जाती है। (तो ऐसी-ऐसी प्वाइंट्स बुद्धि में रख फिर समझाना चाहिए। फिर तुम्हारा नाम बहुत बाला हो जायेगा। बात करने में शेरनी बनो। तुम शिव शक्ति सेना हो ना।)

14. *भक्ति मार्ग में तो तुम बाप को कितना याद करते* आये हो – हे भगवान, पूजा भी पहले-पहले उस निराकार भगवान की ही करते हैं। परन्तु यथार्थ परिचय न होने के साथ और कौन-सी बात नहीं थी? _(जिस कारण उतरते आये।)_
° ऐसे नहीं कि उस समय तुम *आत्म-अभिमानी* बनते हो। (आत्म-अभिमानी फिर पूजा थोड़ेही करेंगे।)

15. *वेश्याओं* को क्या समझा सकते? (3)
° तुम्हारे नाम के कारण भारत की इतनी आबरू (इज्जत) गई है (वैश्यालय)। अब *बाप आये हैं शिवालय में ले चलने* । (हम श्रीमत पर आये हैं तुम्हारे पास। अभी तुम विश्व की मालिक बन जाओ। भारत का नाम बाला करो, हमारे मुआफिक। हम भी बाप को याद करने से पवित्र बन रहे हैं। तुम भी यह एक जन्म छी-छी काम छोड़ दो।)
° कोई नया युगल हो, बोले *हम पवित्र रहते हैं* । पवित्र रहने से ही विश्व के मालिक बनते हैं। तो क्यों नहीं पवित्र बनेंगे। (रहम तो करना है ना। फिर तुम्हारा नाम बाला बहुत हो जायेगा। कहेंगे इनमें तो ऐसी ताकत है जो ऐसा गन्दा धंधा इनसे छुड़ा दिया।)
° बड़ी नम्रता से जाकर कहना है, हम आपको परमपिता परमात्मा का पैगाम देने आये हैं। अब विनाश सामने खड़ा है। बाप कहते हैं मैं सबका उद्धार करने आया हूँ। *तुम भी यह एक जन्म विकार में मत जाओ*। (ऐसा काम करो जिसमें वाह-वाह हो। हज़ारों मदद देने वाले निकल आयेंगे। यह अपना संगठन बनाओ। मुख्य-मुख्य को चुनो, सेमीनार करो।)

Answers from Sakar Murli 02-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 02-10-2020*

1. ब्राह्मणों का श्वांस ______ है, जिससे कठिन से कठिन कार्य भी _____ हो जाता है।
°हिम्मत, _आसान_

2. *परमात्म मिलन-ज्ञान की विशेषता* है – *अविनाशी प्राप्तियां* होना। यह सब प्राप्तियां भविष्य में ही होंगी। _(सही / गलत)_
° नहीं। अभी संगमयुग की विशेषता है एक कदम उठाओ और *हजार कदम प्रारब्ध* में पाओ। (तो सिर्फ पुरूषार्थी नहीं लेकिन *श्रेष्ठ प्रारब्धी* हैं – इस *स्वरूप को सदा सामने* रखो। प्रारब्ध को देखकर सहज ही चढ़ती कला का अनुभव करेंगे।)
° “ *पाना था सो पा लिया* ” (यह गीत गाओ तो घुटके और झुटके खाने से बच जायेंगे।)

3. यह है ईश्वरीय युनिवर्सिटी, *ईश्वरीय विश्व विद्यालय* । कैसे?
° (ईश्वरीय विश्व विद्यालय) एक ही होता है, जो *ईश्वर* आकर खोलते हैं, जिससे *सारी विश्व का कल्याण* हो जाता है।
° (ईश्वरीय विश्व विद्यालय, वर्ल्ड युनिवर्सिटी।) *सारी युनिवर्स को चेंज किया जाता* है।

4. ____ होते हुए भी फिर भी बाप को भूल जाते हैं। बाप की ____, यह है पढ़ाई का तन्त। याद की यात्रा से _____ अवस्था को पाने में मेहनत लगती है, इसमें ही माया के विघ्न आते हैं।
°निश्चय, _याद_, _कर्मातीत_

5. बाप कहते हैं मैं इनका लोन लेता हूँ, इसलिए मेरा ____ अलौकिक जन्म कहा जाता है।अभी पार्ट है – विश्व को ____ बनाना। उनका नाम बड़ा अच्छा है – ____ गॉड फादर। बाप रचयिता है _____ का।
°दिव्य, _नया_, _हेविनली_, _स्वर्ग_

6. राइट रांग को समझाने वाला एक ही ______ होता है, जिसको ____ कहते हैं। बाप ही आकर हर एक को राइटियस बनाते हैं। राइटियस बनेंगे तो फिर मुक्ति में जाकर _____ में आयेंगे।
°राइटियस, _ट्रूथ_, _जीवनमुक्ति_

7. बाप ही आकर समझाते हैं, बाप को ज्ञान का सागर कहा जाता है तो जरूर ज्ञान देंगे ना। *प्रेरणा की तो बात होती नहीं*। _(सही / गलत)_
° *सही* (भगवान कोई प्रेरणा से समझाते हैं क्या। तुम जानते हो उनके पास सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान है। वह फिर तुम बच्चों को सुनाते हैं।)

8. *सच्चा श्री श्री 108 का टाइटिल* कईयों को मिल सकता। _(सही / गलत)_
° नहीं। *बाप को ही* श्री श्री 108 जगतगुरू कहा जाता है, जो 108 रत्नों को पास कराते। (8 रत्न गाये जाते हैं। वह पास विद् ऑनर होते हैं इसलिए उनको जपते हैं। फिर उनसे कम 108 की पूजा करते हैं।)

9. हर एक आत्मा की अपने ____ पर सवारी है। अभी तुम्हारी बुद्धि में 84 का ____ है। जानते हो अभी हम ____ जाते हैं, फिर ____ में आयेंगे।
°रथ, चक्र, _घर_, _स्वर्ग_

10. ड्रामा को भी तुम बच्चे जानते हो। तो *ड्रामा की कौन-सी विशेषताएं* आज बाबा ने सुनाई? (4)
° आदि से लेकर अन्त तक पार्ट बजाने नम्बरवार आते हो। यह *खेल चलता ही रहता* है। (ड्रामा शूट होता जाता है।)
° यह *एवर न्यु* है। (यह ड्रामा कभी पुराना नहीं होता है।)
° और सब नाटक आदि विनाश हो जाते हैं। (यह बेहद का *अविनाशी ड्रामा* है। इनमें सब *अविनाशी पार्टधारी* हैं। *अविनाशी खेल* वा माण्डवा देखो कितना बड़ा है।)
° बाप आकर पुरानी सृष्टि को फिर नया बनाते हैं। वह सब तुमको साक्षात्कार होगा। जितना नज़दीक आयेंगे फिर तुमको खुशी होगी। साक्षात्कार करेंगे। (कहेंगे अब पार्ट पूरा हुआ। *ड्रामा को फिर रिपीट* करना है। फिर *नयेसिर पार्ट बजायेंगे*, जो कल्प पहले बजाया है। इसमें ज़रा भी *फ़र्क नहीं हो सकता* है, इसलिए जितना हो सके तुम बच्चों को ऊंच पद पाना चाहिए।)

11. बाबा हम पढ़े-लिखे नहीं हैं। *मुख से कुछ निकलता नहीं*। यह कहना ठीक है। _(सही / गलत)_
° ऐसा तो होता नहीं। *मुख तो जरूर चलता ही है*। खाना खाते हो मुख चलता है ना। वाणी न निकले यह तो हो नहीं सकता। (बाबा ने बहुत सिम्पुल समझाया है। कोई *मौन में रहते तो भी ऊपर में इशारा देते* हैं कि उनको याद करो। दु:ख हर्ता सुख कर्ता वह एक ही दाता है।)

12. जबकि *इस पुरूषोत्तम संगमयुग पर ही* ज्ञान सागर परमात्मा शिवबाबा हमें उत्तम ते उत्तम पुरुष लक्ष्मी-नारायण बनाते (स्वर्ग के मालिक)। इसका भक्ति में कौन-सा *यादगार त्योहार* है?
° *पुरूषोत्तम मास* भी होता है। (सतयुग-त्रेता-द्वापर-कलियुग…… यह 4 युग तो हैं। पांचवा फिर है पुरूषोत्तम संगमयुग। इस युग में मनुष्य चेंज होते हैं। कनिष्ट से सर्वोत्तम बनते हैं।)

13. शास्त्रों में दिखाते – बड़ी प्रलय हुई। फिर नम्बरवन *श्रीकृष्ण पीपल के पत्ते पर अगूंठा चूसता सागर में* आया। इसका आध्यात्मिक रहस्य क्या है?
° *पहले-पहले ज्ञान सागर से निकला हुआ उत्तम ते उत्तम पुरूष श्रीकृष्ण* है। (ज्ञान सागर से स्वर्ग की स्थापना होती है। उनमें नम्बरवन पुरूषोत्तम यह श्रीकृष्ण है और यह है ज्ञान का सागर, पानी का नहीं। प्रलय भी होती नहीं।)

14. यज्ञ में कोई लाख *सालिग्राम* (हम आत्माओं का यादगार) भी बनाते हैं। इसका *आध्यात्मिक रहस्य* क्या है?
° क्योंकि *तुम सभी भारत की सेवा कर रहे* हो बाप के साथ। बाप की पूजा होती है तो बच्चों की भी पूजा होनी चाहिए। (यह नहीं जानते कि रूद्र पूजा क्यों होती है। बच्चे तो सब शिवबाबा के हैं। इस समय सृष्टि की कितनी आदमशुमारी है इसमें सब आत्मायें शिवबाबा के बच्चे ठहरे ना। परन्तु *मददगार सिर्फ तुम बनते*।)

15. यह पुरानी प्वाइंट बाबा फिर क्यों *रिपीट* करते?
° कई *बच्चे नये-नये आते* हैं तो बाप को फिर पुरानी प्वाइंट रिपीट करनी पड़ती हैं।

16. कौन-सी बात सोचने वा बोलने से *कभी भी उन्नति* नहीं हो सकती?
° *ड्रामा में होगा तो पुरूषार्थ कर लेंगे*। ड्रामा करायेगा तो कर लेंगे। (यह कहना ही रांग है। तुम जानते हो अभी जो हम पुरुषार्थ कर रहे हैं, यह भी ड्रामा में नूँध है। पुरुषार्थ करना ही है।)

17. कोई कुछ *खाते-पीते नहीं* हैं, *आग-पानी से चले जाते*। यह तो बहुत अच्छी बात है। _(सही / गलत)_
° नहीं (कोई सारी आयु खाता-पीता नहीं फिर भी क्या? *प्राप्ति तो कुछ नहीं* है ना। झाड़ को भी खाना तो मिलता है ना नेचुरल।)
° हमको तो इस सहज *राजयोग से जन्म-जन्मान्तर* का फायदा है। जन्म-जन्मान्तर के लिए *दु:खी से सुखी* बनाते। बाप कहते हैं – बच्चे, ड्रामा अनुसार हम तुमको गुह्य बातें सुनाता हूँ।)

18. कई मुक्ति को ही मोक्ष कहते, इसको ही ऊंच पद समझते (और जीवन-मुक्ति समझते जो जीवन में रहकर अच्छा कर्म करते)। बाकी *कर्मबन्धन से मुक्त हो जाना* वो तो *कोटों में से कोई विरला* ही होता। _(सही / गलत)_
° *नहीं* , यह है उन्हों की अपनी मत। *हम तो परमात्मा द्वारा जान चुके हैं* पहले विकारी कर्मबन्धन से मुक्त होने के बाद ही आदि-मध्य-अन्त दु:ख से छूट सकेंगे। (पहले *जब ईश्वरीय नॉलेज को धारण करे* तब ही उस स्टेज पर पहुँच सके, और उस *स्टेज पर पहुँचाने वाला स्वयं परमात्मा* चाहिए क्योंकि मुक्ति जीवनमुक्ति देते वह हैं।)

19. बाप ही *पुरानी दुनिया* नर्क रचेंगे। _(सही / गलत)_
° गलत ( *मकान 🏡 हमेशा नया बनाया जाता* है। शिवबाबा नई दुनिया रचते हैं ब्रह्मा द्वारा।)

20. वानप्रस्थी बनना अर्थात् गुरू द्वारा वाणी से परे जाने का पुरूषार्थ करना। परन्तु *वापिस कोई जा नहीं सकते*। _(सही / गलत)_
° *सही* (क्योंकि विकारी भ्रष्टाचारी हैं। यह लक्ष्मी-नारायण निर्विकारी श्रेष्ठाचारी हैं। कुमारियां भी निर्विकारी हैं – इसलिए उनके आगे माथा टेकते हैं।)

21. शंकर *आंख खोलते हैं तो विनाश* होता है। _(सही / गलत)_
° यह कहना भी ठीक *नहीं* है। (बाप कहते हैं – न मैं विनाश कराता हूँ, न वह करते हैं, यह रांग है। देवतायें थोड़ेही पाप करेंगे। अब शिवबाबा बैठ यह बातें समझाते हैं।)

Answers from Sakar Murli 01-10-2020

*Om Shanti*

*Answers from Sakar Murli 01-10-2020*

1. सुने हुए को ____ करो, इससे ही शक्तिशाली बनेंगे।
°मनन

2. जैसे बाप का भण्डारा सदा चलता रहता है, रोज़ देते हैं ऐसे *आपका भी अखण्ड लंगर चलता रहे*। क्यों? (3)
° क्योंकि आपके पास *ज्ञान* का, *शक्तियों* का, *खुशियों का भरपूर भण्डारा* है। (इसे साथ में रखने वा यूज़ करने में कोई भी खतरा नहीं है। यह भण्डारा खुला होगा तो चोर नहीं आयेगा।)
° भण्डारा *बंद रखेंगे तो चोर (माया के) आ जायेंगे!* (इसलिए रोज़ अपने मिले हुए खजानों को देखो और स्व के प्रति और औरों के प्रति यूज करो।)
° तो *अखण्ड महादानी* बन जायेंगे।

3. *यहाँ तुम आते हो रिफ्रेश होने*। बाबा किस स्थान की बात कर रहे हैं?
° इसका नाम ही पड़ा है *मधुबन* । तुम्हारे कलकत्ता वा बाम्बे में थोड़ेही मुरली चलाते हैं। *मधुबन में ही मुरली बाजे* । (मुरली सुनने के लिए बाप के पास आना होगा रिफ्रेश होने। नई-नई प्वाइंट्स निकलती रहती हैं। सम्मुख सुनने में तो फील करते हो, बहुत फर्क रहता है।)

4. पहला नम्बर विश्व का प्रिन्स *श्रीकृष्ण के माथे में मोर 🦚का पंख* लगाते हैं। इसका आध्यात्मिक रहस्य क्या है?
° क्योंकि सतयुग में भी *विकार का नाम नहीं*। (तुमको मालूम है – मोर-डेल है वह विकार से बच्चा पैदा नहीं करते। उनको आंसू गिरता है, उसे डेल धारण करती है। नेशनल बर्ड कहते हैं।)

5. हमें किस बात का *नशा* होना चाहिए? (2)
° तुम्हारा नाम है बी.के.। तुम *महिमा लायक बन फिर पूजा लायक* बनते हो।
° *बाप ही तुम्हारा टीचर* भी है। तो तुम बच्चों को नशा रहना चाहिए, हम स्टूडेन्ट हैं। भगवान *जरूर भगवान-भगवती ही बनायेंगे*।

6. हम बच्चों को *बहुत खुशी* क्यों होनी चाहिए?
° हम *बेहद के बाप के सम्मुख बैठे हैं* जिसको कोई भी नहीं जानते हैं। (ज्ञान का सागर वह शिवबाबा ही है। देहधारी से बुद्धि योग निकाल देना चाहिए।)

7. हम रूहानी-चैतन्य-अविनाशी पार्टधारी आत्माओं को इस बेहद नाटक- *ड्रामा के सब राज़* मालूम है। जैसे कि? (3)
° तुम इस सृष्टि चक्र को जानते हो, इसमें *सब एक्टर्स का पार्ट नूँधा हुआ* है। बदल नहीं सकता। न कोई छुटकारा पा सकता। हाँ, थोड़ा समय मुक्ति मिलती है। (बाप कहते हैं मेरी आत्मा में भी यह ज्ञान नूँधा हुआ है। हूबहू तुम को वही बोलेंगे जो कल्प पहले ज्ञान दिया था।)
° तुम तो *आलराउण्ड* हो। *84 जन्म लेते* हो। बाकी सब अपने घर में होंगे फिर पिछाड़ी में आयेंगे। तुम तो *ड्रामा अनुसार पढ़ते* हो। जानते हो बाबा ने *5 हज़ार वर्ष पहले भी ऐसे राजयोग* सिखाया था। तुम फिर औरों को समझाते हो कि शिवबाबा ऐसे कहते हैं। (अभी तुम जानते हो हम कितने ऊंच थे, अब कितने नींच बने हैं। फिर बाप ऊंच बनाते हैं तो ऐसे पुरूषार्थ करना चाहिए ना।)
° *आगे चल बहुत पार्ट देखने हैं* । (बाबा पहले-पहले सब सुना दे तो टेस्ट निकल जाए। आहिस्ते-आहिस्ते इमर्ज होता जाता है। एक सेकण्ड न मिले दूसरे से।)

8. वेद-शास्त्र, शिव-पूजा से बाप कहते *कोई मेरे को प्राप्त नहीं कर सकते*। क्यों?
° क्योंकि *भक्ति है ही उतरती कला*। ज्ञान से सद्गति होती है तो जरूर कोई से उतरते भी होंगे। *यह एक खेल है* , जिसको कोई भी जानते नहीं। (पत्थरबुद्धि बन गये हैं तो पूजा भी पत्थर की करते हैं, ज्ञान बिगर। दूसरी तरफ कहते हैं नाम-रूप से न्यारा!)

9. जब ज्ञान है तो तुम पूजा नहीं करते हो। चैतन्य सम्मुख में है, उनको ही तुम _____ करते हो। जानते हो इससे विकर्म _____ होंगे।
°याद, _विनाश_

10. बाबा से हमारी *कौन-सी प्रतिज्ञा* है?
° बाप से तुम प्रतिज्ञा करते आये हो – *बाबा मेरा तो आप एक दूसरा न कोई*। हम आपको ही याद करेंगे। (भक्ति मार्ग में भल गाते हैं परन्तु उनको पता नहीं है कि याद से क्या होता है। वह तो बाप को जानते ही नहीं।)

11. जैसे हम *आत्मा बिन्दी है वैसे बाप भी* बिन्दी है। इसमें मूँझने की कोई दरकार नहीं। _(सही / गलत)_
° *सही* (कोई कहते हैं हम देखें। बाप कहते हैं देखने वालों की तो तुमने बहुत पूजा की। फायदा कुछ भी हुआ नहीं। अब *यथार्थ रीति मैं तुमको समझाता हूँ*। मेरे में सारा पार्ट भरा हुआ है। सुप्रीम सोल हूँ ना, सुप्रीम फादर।)

12. यहाँ मुख्य है याद की यात्रा। *याद भी घड़ी-घड़ी खिसक जाती*। यहां बाबा ने कौन-सी चीज़ का मिसाल दिया?
° जैसे *पारा* खिसक जाता है ना! (कितना चाहते हैं बाप को याद करें फिर और-और ख्याल आ जाते हैं। इसमें ही तुम्हारी रेस है।)

13. इस ज्ञान में कौन-से बच्चे *तीखे* जा सकते हैं? *घाटा* किन्हें पड़ता है?
° जिन्हें अपना *पोतामेल रखना आता* है वह इस ज्ञान में बहुत तीखे जा सकते हैं। घाटा उनको पड़ता है जो *देही-अभिमानी* नहीं रहते। (बाबा कहते व्यापारी लोगों को पोतामेल निकालने की आदत होती है, वह यहाँ भी तीखे जा सकते हैं।)

14. गीत 🎵:- मुखड़ा देख ले प्राणी… जबकि हमे दिव्यगुण-सम्पन्न देवता बनना है, तो अन्दर कौन-से *5 प्रकार के अवगुण* नहीं होने चाहिए?
° *गुस्सा* करना, *मारना*, *तंग* करना, *बुरा काम* करना , *चोरी* -चकारी करना यह सब महापाप है। (बाप कहते हैं तुमको देवता बनाते हैं तो अपनी जांच पूरी करो। कहाँ तक दैवीगुणों की धारणा हुई है? मेहनत बिगर विश्व का मालिक थोड़ेही बन सकेंगे।)

15. बाप आये हैं रूहानी सेवा करने तो बच्चों का भी *फ़र्ज है रूहानी सेवा* करना। *कम से कम* क्या बताना है?
° यह तो बताओ – *बाप को याद करो और पवित्र बनो* । (पवित्रता में ही फेल होते हैं क्योंकि याद नहीं करते हैं।)

16. बाबा ने *सेवा की सुन्दर युक्ति* सुनाई, कहते हैं यह भी जज करो …….. क्या?
° जज करो कि *महान् आत्मा किसको कहा जाए?* *श्रीकृष्ण* जो छोटा बच्चा स्वर्ग का प्रिन्स है, वह महात्मा है *या आजकल के कलियुगी मनुष्य?* (वह विकार से पैदा नहीं होता है ना। वह है निर्विकारी दुनिया।)

17. हमारी *कर्मातीत स्थिति* हो गई होंगी। _(सही / गलत)_
° *गलत* (ऐसे नहीं कि फट से पाप मिट जायेंगे। समय लगता है। कर्मातीत अवस्था हो जाए तो *फिर यह शरीर ही न रहे*। परन्तु अभी कोई कर्मातीत अवस्था को नहीं पा सकते हैं। फिर *उनको सतयुगी शरीर चाहिए*।)

18. अभी तुम *बी.के.* बने हो। तो हमारे *कितने प्रकार के सम्बन्ध* है?
° समझाया जाता है – *भगवान एक* है। *बाकी सब भाई-भाई* । दूसरा कोई कनेक्शन नहीं। प्रजापिता ब्रह्मा से रचना होती है फिर वृद्धि होती है। (सबसे जास्ती होता है पति का प्रेम। तुम्हें तो पतियों के पति (परमात्मा) को याद करना है और सबको भूल जाना है)

19. धर्मराज द्वारा *बहुत डन्डे* कब खाने पड़ेंगे?
° *शिवबाबा का यह रथ* है। इनका *रिगार्ड नहीं रखेंगे तो* धर्मराज द्वारा बहुत डन्डे खाने पड़ेंगे। *बड़ों का* रिगार्ड तो रखना है ना। (आदि देव का कितना रिगार्ड रखते हैं। जड़ चित्र का इतना रिगार्ड तो चैतन्य का कितना रखना चाहिए।)