*Om Shanti*
*Answers from Sakar Murli 09-03-2021*
1. सदा अचल अडोल रहने के लिए ___ स्थिति के आसन पर विराजमान रहो।
° _एकरस_
2. आजकल हर आत्मा किसी न किसी बात के बंधन वश है। कोई तन के दु:ख, सम्बन्ध, इच्छाओं, दुखदाई संस्कार-स्वभाव, प्रभू प्राप्ति न मिलने कारण पुकारने-चिल्लाने…ऐसी आत्मायें अपने को _____ करना चाहती हैं, इसके लिए अपने _____ -स्वरूप और _____ -देश के _____ -मान में स्थित रह, _____ -दिल बन मास्टर लिबरेटर बनो।
° _लिबरेट_, _स्व_, _स्व_, _स्व_, _रहम_
3. बाबा सहज सावधानी देते, _____ बाप-वर्से को याद करो। इस योग अग्नि से ही विकर्म विनाश होंगे, _____ निकलेगी, सतोप्रधान बनेंगे। शिवबाबा से _____ मिलता, दैवी राजधानी का। _____ लिए यथार्थ पढ़ाने वाला एक ही रूहानी बाप है। _____ रहकर सिर्फ बाप-वर्से को याद करो, कोई देहधारी नहीं, तो अन्त मती सो गति होगी। कहते हैं मेरे _____ रत्न, जब तुम सतयुग में आते हो तो तुम वन-वन से राजाई करते।
° _निरन्तर_, _खाद_, _वर्सा_, _भविष्य_, _चुप_, _नूरे_,
4. मुझ अपने _____ बाप को याद करो। _____ बाप हम रूहों से बात करते। महिमा गाते _____ -पावन, ज्ञान सागर। तुम समझाते हो शिवबाबा आया हुआ है, वही सर्व का _____ दाता है। ऊंच ते ऊंच _____ परमात्मा है, उनकी श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ मत हुई, जिससे ही सर्व की सद्गति होती। शिव _____ मनाते परन्तु यह थोड़ेही जानते शिव ने आकर भारत को सचखण्ड बनाया है।
° _निराकार_, _रूहानी_, _पतित_, _सद्गति_, _परमपिता_, _जयन्ती_
5. बाप खुद बतलाते मैं आकर भारत को फिर से _____ बनाता हूँ। योग अग्नि से खाद निकलेगी और तुम _____ पुरी में जाने लायक बनेंगे, उनको भी बाप से वर्सा मिलता। शिवबाबा का ही सारा पार्ट है, ब्रह्मा ब्राह्मण रचते हैं, वही फिर _____ -पुरी के मालिक बनते। आप ही सेकेण्ड में _____ का वर्सा देने वाले हो। _____ सिखलाकर राजाओं का राजा बनाते।
° _स्वर्ग_, _कृष्ण_, _विष्णु_, _सद्गति_, _राजयोग_
6. 84 जन्मों का चक्र लगाकर तुम आकर _____ वंशी बने हो, लक्ष्मी-नारायण सो फिर ब्रह्मा सरस्वती। हम ही यहाँ _____ बनते फिर पुजारी बन अपनी ही पूजा करेंगे। हम सो _____ , सो क्षत्रिय…. बनें। हम आत्मा _____ -धाम में रहने वाली हैं, यह चक्र फिरता रहता। ऐसे नहीं कि नई सृष्टि रचता हूँ। नहीं, पुरानी को _____ बनाने मैं आता हूँ, संगम पर।
° _ब्रह्मा_, _पूज्य_, _देवता_, _निर्वाण_, _नया_
7. *बड़ी भारी-भारी जो भूलें* हैं उन पर जोर देना है। बाबा ने कौन-सी 3 (वा 4) भूलें सुनाई?
° एक तो ईश्वर को *सर्वव्यापी* कहना, दूसरा फिर *गीता का भगवान* कृष्ण को कहना, कल्प *लाखों वर्ष* का कहना – यह बड़ी भारी भूले हैं।(कहते हैं वह *प्रेरणा से सब कुछ करते* हैं, परन्तु नहीं। प्रेरणा से थोड़ेही पावन बना देंगे। यह तो बाप बैठ सम्मुख समझाते हैं मामेकम् याद करो।)
8. कौन से बोल *कर्म-संन्यास* को सिद्ध करते, तुम नहीं बोल सकते?
° *ड्रामा में होगा तो कर लेंगे*, बाबा कहते यह तो कर्म संन्यास हो गया। (तुम्हें कर्म तो अवश्य करना है। बिना पुरूषार्थ के तो पानी भी नहीं मिल सकता, इसलिए ड्रामा कहकर छोड़ नहीं देना है। नई राजधानी में ऊंच पद पाना है तो खूब पुरूषार्थ करो।)
