Sakar Murli Churnings 22-12-2018

Sakar Murli Churnings 22-12-2018

भगवान की यह पढ़ाई प्रत्यक्षफल (अर्थात मनुष्य से देवता, 21 जन्मों के लिए बनाने) वाली है… इसलिए, अशरीरी बन बहुत प्यार से बाबा को याद करना है (और बाबा से बातें भी करनी है!)… उस पर बलिहार जाना है, नष्टोमोहा बनना है… सेवा भी जरूर करनी है!

ओम् शान्ति!

शिवबाबा की याद में कैसे टिके | Stabilising in God’s remembrance | Sakar Murli Churnings 21-12-2018

शिवबाबा की याद में कैसे टिके | Stabilising in God’s remembrance | Sakar Murli Churnings 21-12-2018

आज का wonderful रात्रि क्लास!

सिर्फ एक बाप को याद करना अव्यभिचारी याद हैं, औरों को याद करने से याद व्यभिचारी हो जाती है… और हमारा लक्ष्य है एक की याद में रहना, इसलिए जब भी हमारी बुद्धि और तरफ भटके, तो बाबा ने आज 15 स्मृतियाँ दिलाई जिससे फिर से हम बाबा की याद में टिक जाएं!

  • बाबा हमें विश्व का मालिक बनाते, पतित से पावन बनाते, ज्ञान का सागर है… ऎसे wonderful बाप को कैसे भूल सकते हैं!
  • हमारा वायदा है, मेरा तो एक… भक्ति में भी कहते थे, जब आप आएंगे तो आप की ही याद में रहेंगे… उसमें ही फायदा है, और सब में नुकसान है
  • बाप की याद से पाप कटते है, हम दैवी dynasty में जाएँगे, दैवी सम्बन्धी मिलेंगे… बाबा की श्रीमत है ‘मामेकम् याद करो’, औरों को याद करना ठगी है!
  • नई दुनिया आ रही है, जिसके लिए पवित्रता चाहिए, जो योग से ही बढ़ती है!… अभी याद करेंगे तो, कल्प कल्प की श्रेष्ठ नूंढ़ हो जाएगी!
  • हमारी लगन एक बाप से हैं!

और भी कई संकल्प हैं:

  • बैठकर योग करने लिए समय निर्धारित करना है, भल 10-15 मिनट के लिए… और उस समय दूसरी बात याद आए, तो उसको 10 मिनट बाद सोचेंगे!
  • सहजयोग की भिन्न भिन्न विधि use करे, जैसेकि:
    • बाबा से बातें करे… पत्र लिखे
    • बाबा के भिन्न भिन्न titles याद करे
    • बापदादा (शिवबाबा, ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त शरीर में) को याद करें
  • जैसे अर्जुन को सिर्फ चिड़िया को आंख दिखाई दी… हमें भी शिव पिता बिन्दु ही दिखाई देता!

और बाबा ने कहा यदि योग बढ़ाना चाहते हो, तो:

  • योग में बैठो… तो मेहनत करनी है, attention रखना है, कि बुद्धि इधर-उधर न जाए… फिर यह अभ्यास सहज हो जाएगा, और हम शान्ति प्रेम और आनंद के झूले में झूलते रहेंगे!
  • अपनी डायरी (chart) रखना है, कि हम कितना समय बाबा की याद में रहते हैं?

यह रात्रि क्लास ब्रह्मा बाप के सम्पूर्ण होने के 6 दिन पहले चली थी… तो हम देख सकते कि शिवबाबा कितनी wonderful रीति से ब्रह्मा बाबा को तैयार कर रहे हैं, और ब्रह्मा बाबा का पुरुषार्थ भी कितना ऊंचा स्तर पर चल रहा था!… हमें भी ऎसा श्रेष्ठ पुरुषार्थ करना है!

आज के अन्य पॉइन्ट्‍स

  • शुभ काम में देरी नहीं करनी है… अपने भाई-बहनों को ठोक्कर खाने से बचाना है… ज्ञान की भूं-भूं करते रहना है!
  • हम निश्चयबुद्धि बच्चे हैं, ईश्वरीय संप्रदाय, जो बाबा से राजयोग सीख रहे हैं… और फिर बाबा के पास जाकर, हमारा अगला जन्म नई दुनिया में होगा!

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बार-बार योग में बैठकर अपनी बुद्धि की लिंक बाबा से जोड़ने रखने का पुरुषार्थ करे… ऎसे कुछ समय के Attention से, योग में रहने का हमारा संस्कार बन जाएगा, और हम सदा के लिए शान्ति प्रेम और आनंद से भरपूर होते रहेंगे!… ओम् शान्ति!

56 दिव्यगुणों की लिस्ट | List of 56 Divine Virtues

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56 दिव्यगुणों की लिस्ट | List of 56 Divine Virtues

हमारा लक्ष्य है मनुष्य से देवता (अर्थात सर्वगुण सम्पन्न) बनना… तो आज 56 दिव्यगुणों की लिस्ट देखते हैं, जो बाबा ने मुरलीयों में बताए हैं!

सबके प्रिय गुण! 

  • संतुष्टता, प्रसन्नता, हर्षितमुखता 
  • मधुरता, शीतलता, धैर्यता
  • सरलता, स्वच्छता, नम्रता
  • निमित्त भाव, निर्मान भाव, निर्मल वाणी, निःस्वार्थ भाव
  • उमंग, उत्साह, रमणीकता

आत्मा के अनादि गुण

  • दिव्यता, ज्ञान, पवित्रता, शान्ति, प्रेम, सुख, आनंद, शक्ति

और गुण! 

  • गंभीरता, सत्यता, निर्भयता
  • दृढ़ता, सहनशीलता
  • आज्ञाकारी, वफादार, फरमानवरदार, ईमानदार, सपूत 
  • एकांतप्रिय, अंतर्मुखी, एकाग्र-चित
  • एकरस, अचल, अडोल 
  • एकव्रता, एकनामी, व्यर्थ से economy, एकता
  • स्वमान में रहना, औरों को सम्मान देना 
  • स्वचिंतक, शुभचिंतक, गुण-ग्राही दृष्टि
  • अथक, एवररेडी, आल-राउंडर 
  • निश्चयबुद्धि, बेफिक्र, समर्पण भाव, परोपकारी

सार 

बाबा साजन बनकर हमें इन सभी दिव्यगुणों से श्रृंगारने आए हैं… तो चलिए आज सारा दिन, योगयुक्त रहकर इन सभी गुणों का अनुभव करते रहें… जिससे स्वतः इन दिव्यगुणों की खुशबू चारों ओर फैलती रहेगी, और सबका जीवन सुखमय और शान्तिमय बनता जाएगा… ऎसे सहज ही ये संसार स्वर्ग बन जाएगा!… ओम् शान्ति! 


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God, the most humble| भगवान सबसे निरहंकारी है | | Sakar Murli Churnings 20-12-2018

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God, the most humble| भगवान सबसे निरहंकारी है | Sakar Murli Churnings 20-12-2018

कितना मीठा, कितना प्यारा! 

बाबा ने कहा मैं तुमसे अपनी पूजा नहीं करा सकता, क्योंकि:

  • में तुम्हारा most obedient servant हूँ… तुम मेरे मालिक हो 
  • मैं तो तुम्हें नमस्ते करता हूँ… निरहंकारी हूँ 
  • में सदा दाता हूँ… कुछ भी लेता नहीं हूँ 
  • मेरे तो पैर ही नहीं! 
  • तुम विश्व के मालिक बनने वाले हो… बाप समान बनते हो 
  • तुम खुद पूज्य बनते हो, सालिग्राम और देवता रूप मे तुम्हारी डबल पूजा होती है… क्योंकि तुम पवित्र बन, रूहानी सोशल वर्कर बन भारत को स्वर्ग बनाने की सेवा करते हो!
  • माया ने तुम्हें बहुत तंग किया है, और भी बहुत दुःख आने है 

और भी कुछ पॉइंट्स हैं:

  • आधाकल्प बच्चे भक्ति करते थक गए हैं 
  • बाबा हमसे सच्चा प्यार करते… हमको मेहनत करते नहीं देख सकते 
  • बाबा हमें बहुत ऊंची दृष्टि से देखते हैं! 
  • बाबा ज्ञान का सागर है, इसलिए हमे सिर्फ यथार्थ पुरुषार्थ कराते हैं… अर्थात अपने को आत्मा समझ बाप को यथार्थ रीति याद करना हैं, इसमें सब कुछ आ जाता है 
  • वह चाहता है, कि उसके सारे गुण हम अपने में ग्रहण करे, सिर्फ पूजा नहीं! 

आज के अन्य पॉइन्ट्‍स 

  • सतयुग में हम पारसबुद्धि होते हैं, निरोगी रहते हैं, और सम्पूर्ण सुख होता है 
  • हम बाबा की गोद में है… बाबा हमें ज्ञान, गुण, शक्तियों से रॉयल पालना कर रहे हैं… इससे हम छोटी छोटी समस्याएं तो क्या, विनाश के दर्दनाक सीन को भी सहज क्रॉस कर लेंगे! 
  • आज का गीत, निर्बल से लड़ाई बलवान की ये कहानी है दिये की और तूफान की, बहुत अच्छा है.. इसे पूरा अवश्य सुने (Brahma Kumaris Official Madhuban Murli App द्वारा!) 

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… ऎसे मीठे निरहंकारी बाबा को बहुत प्यार से याद करते रहें, और उनके गुण और शक्तियों से भरपूर रहे… जिससे हम सभी दुखों के प्रभाव से पार, अतिन्द्रीय सुख की झूले में झूलते रहें!… ओम् शान्ति! 

कलियुग के विभिन्न नाम | Names of Kaliyuga, Iron Age, Old World, Hell

कलियुग के विभिन्न नाम | Names of Kaliyuga, Iron Age, Old World, Hell

आज कलियुग के 23 नाम देखते हैं, जो बाबा ने मुरलीयों में बताए हैं… ताकि इस पुरानी दुनिया से हमारा लगाव (जो कि दुःख का कारण है) सहज कम हो… और हमारे संकल्प, स्थिति और vibrations से हम अपने और सबके लिए सतयुगी वातावरण बनाते जाए! 

समय से सम्बंधित नाम

  • कलियुग
  • Iron Age
  • पुरानी दुनिया
  • बेहद की रात
  • ब्रह्मा की रात 

धर्मों में दिए गए नाम

  • नर्क
  • दोझक
  • Hell 

कैसी है यह दुनिया?

विकारी दुनिया

  • वैश्यालय
  • विषय सागर
  • विषय वैतरणी नदी
  • पतित दुनिया 

आसुरी दुनिया

  • रावणराज्य
  • कंसपुरी
  • पाप आत्माओं की दुनिया
  • भ्रष्टाचारी दुनिया

दुःख की दुनिया 

  • दुःखधाम
  • शोक वाटिका
  • कांटों का जंगल
  • मृत्युलोक
  • कब्रिस्तान 

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा की मीठी यादों में झूलते रहे, और इतनी ऊँची शान्ति प्रेम और आनंद से भरपूर स्थिति में स्थित रहे, कि सहज हमारी बुद्धि पुरानी दुनिया से उपराम रहे… और हर कदम हमारी स्थिति और vibrations द्वारा सतयुग बनता जाए! … ओम् शान्ति!


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योग कमेंटरी | I’m a Brahmin Soul | मैं ब्राह्मण आत्मा हूँ

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योग कमेंटरी | I’m a Brahmin Soul | मैं ब्राह्मण आत्मा हूँ

मैं ब्राह्मण हूँ… ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण… सर्वोत्तम ब्राह्मण कुल भूषण

मैं भगवान की पालना में पलने वाली… सारे कल्प में सबसे पद्मपडम भाग्यशाली आत्मा हूँ… देवता बनने वाली हूँ

भगवान ने मुझे सम्पूर्ण सत्य ज्ञान दे दिया है… त्रिकालदर्शी, त्रिनेत्री, त्रिलोकिनाथ बना दिया है

मैं ब्रह्ममुहुर्त में उठ, ब्रह्मलोक की सैर करने वाली आत्मा हूँ… ब्रह्मा-ज्ञान (मुरली) सुनने और सुनाने वाली… ब्रह्मा भोजन खाने वाली आत्मा हूं 

में ब्रह्मा-चारी आत्मा हूँ… ब्रह्मा बाप के हर कदम पर कदम रखने वाली…

बाबा की मददगार आत्मा हूँ, विश्व कल्याणकारी हूँ… बाबा के ज्ञान यज्ञ को संभालने वाली सच्ची ब्राह्मण आत्मा हूँ… यज्ञ स्नेही, यज्ञ सहयोगी, यज्ञ रक्षक हूँ 

बाबा सदा मेरे साथ है… मैं बाबा की, बाबा मेरा… ओम् शान्ति! 

Winning the prize of Satyuga | स्वर्ग की प्राइज़ लेने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 18-12-2018

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Winning the prize of Satyuga | स्वर्ग की प्राइज़ लेने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 18-12-2018

परमात्मा का सत्य परिचय 

परमात्मा ऊंच ते ऊंच है… उनका नाम और धाम भी ऊंच ते ऊंच है… महिमा अपरमपार है… वह खुद आकर अपना सत्य परिचय देते हैं:

  • नाम है शिव 
  • रूप है निराकार ज्योति बिन्दु स्वरूप (स्टार मिसल) 
  • देश है परमधाम… वह जन्म-मरण रहित है
  • गुण है… ज्ञान, पवित्रता, शान्ति, प्रेम, सुख, आनंद, शक्तियों का सागर
  • कर्तव्य है… ब्रह्मा मुख द्वारा राजयोग का ज्ञान सुनाकर, पतितों को पावन (अर्थात मनुष्य से देवता) बनाकर, कलियुग को सतयुग बनाना… अर्थात नई सृष्टि की रचना करता, इसलिए उसे रचता वा मनुष्य सृष्टि का बीजरूप कहा जाता है 
  • कब आते हैं… जब सारी दुनिया पतित हो जाती है, धर्म की अति ग्लानि हो जाती है, कलियुग का अंत होता है 
  • आते हैं भारत में… भारत ही सबसे पुराना अविनाशी खण्ड है, जहां देवताएं निवास करते थे
  • उनसे हमारे सर्व सम्बन्ध हैं… अर्थात वह हमारा माता, पिता, शिक्षक, सतगुरू, सखा, साजन, सर्जन, बच्चा, आदि सब है 

सबसे बड़ी prize!

बाबा सबसे बड़ी prize, स्वर्ग की प्राइज़ देते हैं… उन बच्चों को जो:

  • पवित्र बनते हैं
  • अशरीरी बन, बाप को याद करते है 
  • स्वदर्शन चक्र घुमाते हैं… अपने स्वीट घर और स्वीट राजधानी को याद करते हैं 
  • सेवा करते हैं (अर्थात बाप के रचे हुए इस रुद्र ज्ञान यज्ञ की सच्ची दिल से संभाल करते हैं) 

हम रूहानी warriors (योद्धा) है… जो योगबल से माया पर विजय प्राप्त कर, फिर से अपना स्वराज्य प्राप्त करते हैं… जिससे सदा शान्ति, प्रेम और आनंद के झूले में झूलते रहते हैं… इसके लिए इस पुरानी दुनिया (कब्रिस्तान) से दिल भी हटानी है

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा के सत्य परिचय के आधार पर उसकी मीठी यादों में रहे… और हर कदम उसकी श्रीमत पर चल फिर से अपना सुख-शान्ति का स्वराज्य प्राप्त कर ले… ओम् शान्ति! 

Making our Time Successful | अपना समय सफल करें | Sakar Murli Churnings 17-12-2018

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Making our Time Successful | अपना समय सफल करें | Sakar Murli Churnings 17-12-2018

  • यह पढ़ाई है मनुष्य से देवता बनने की… यही पढ़ाई का समय है, फिर सब परिवर्तन हो जाएगा… इसलिए गफलत नहीं करनी है, टाईम वेस्ट नहीं करना है
  • ब्रह्मा बाप समान सब कुछ सफल करना है, भगवान का मददगार बनना है… और सच्ची सेवा तब कहेंगे जब यह ख्याल भी न आए की मैंने दिया… हम जो भी करते अपने लिए करते, हमारा भाग्य बनता… शिवबाबा तो दाता है, उनका यज्ञ चल रहा है और चलता रहेगा
  • इतने सब साधु-महात्मा होते भी सृष्टि की यह हालत क्यूँ?… क्योंकि बाप सिवाए कोई भी 100% आत्म-अभिमानी नहीं है… इसलिए बाप की श्रीमत पर सदा चलते रहना है:
    • पवित्रता बढ़ाने का पुरुषार्थ करना है
    • आत्म-अभिमानी लम्बा समय रहना है
    • याद, पढ़ाई और सेवा में अपना समय सफल करना है 

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… अपने हर सेकंड, श्वांस, संकल्प को ज्ञान चिंतन, याद और सेवा में सफल करे… जिससे स्वतः हमारी श्रेष्ठ स्थिति रहेगी, औरों का कल्याण होता रहेगा… अर्थात हमारा वर्तमान और भविष्य भाग्य दोनों श्रेष्ठ बनता जाएगा… ओम् शान्ति! 

Overcoming Weaknesses | कमझोरीयों से मुक्त होने की सहज विधि | Avyakt Murli Churnings 16-12-2018

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Overcoming Weaknesses | कमझोरीयों से मुक्त होने की सहज विधि | Avyakt Murli Churnings 16-12-2018 

चैतन्य चात्रक! 

बाबा कहते मेरे सभी बच्चे चात्रक है… 3 रीति से:

  • सुनना… इसमे सभी नम्बरवन है… मास्टर मुरलीधर बन सहज ही मास्टर सर्वशक्तिवान बन सकते हैं 
  • मिलना… बाबा के संग में रहना… और गुणों और शक्तियों के रंग में रंगना… इसमें नम्बर है 
  • बनना… अर्थात हर संकल्प, बोल और कर्म में फॉलो फादर करना, हममे बाप दिखाई दे… इसमें सब यथाशक्ति है 

शक्तिशाली संकल्प को फलदायक बनाने की सहज विधि

शक्तिशाली संकल्प होते भी वह फल क्यूँ नहीं देता?… जैसे स्थूल बीज को धरती, पानी, धूप और देख-रेख चाहिए… हमारे शक्तिशाली संकल्प रूपी बीज को भी चाहिए:

  • धारणा रूपी धरती 
  • ज्ञान रूपी जल 
  • याद रूपी धूप (वा गर्मी) 
  • Attention रूपी देख-रेख

तो श्रेष्ठ संकल्प का प्रत्यक्षफल (अर्थात खुशी और अतिन्द्रीय सुख) अवश्य प्राप्त होता है! 

हमारी विशेषताएं! 

बाबा ने कहा हमारी विशेषताओं की लंबी चौड़ी माला है

  • सेवा में उमंग उत्साह अच्छा है, स्नेह है, खुशी के झूले में झूलते हैं, एकता अच्छी है 
  • पहचानने की और मेहसूस करने की शक्ति है, catching power अच्छी है, दृढ़ता है 
  • दूर होते भी समीप है… वाह बाबा, वाह परिवार, वाह ड्रामा के गीत अच्छे गाते हैं… बाप और परिवार के समीप है… मधुबन की शान और शृंगार है 

विशेषताएं बहुत है, और कमझोरी एक है… और वह भी 99% परिवर्तन हो गई है, सिर्फ 1% बाकी है… वह भी हुई पड़ी है

छोटी बातों को मिटाओ, हटाओ, और उड़ो! 

बच्चे जल्दी घबरा जाते हैं… फिर सोच सोचके बात को बड़ा बना लेते हैं… बातें हैं कंकड़, चींटी वा चूहे जैसी छोटी, लेकिन:

  • चींटी माथे में घुस जाती है, tension आदि के रूप में… उसको पांव के नीचे कर देना है
  • चूहा हमारी सहनशक्ति, सरलता, स्नेह को काट लेता… इसलिए उसको सवारी बनाकर, गणेश बनना है! 

अन्य पॉइन्ट्‍स 

  • कल्प पहले भी मिले थे, इसलिए फिर से अपना अधिकार लेने आए हैं… हमारे परिवार में, स्वीट होम में पहुँच गए 
  • ज्ञान, गुण और शक्तियों के अविनाशी खझाने से भरपूर रहते हैं, इसलिए हम जैसा धनवान कोई नहींहमारी ईश्वरीय position भी सबसे ऊंच है, इसे कोई छीन नहीं सकता… सिर्फ कमझोरी के पास्ट के व्यर्थ चिंतन से बचना है 

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… हर कदम पर बाबा को फॉलो कर, अतिन्द्रीय सुख और खुशी के झूले में झूलते रहें… और बाबा ने बताई हुई अपनी विशेषताओं को स्मृति में रख, सभी कमझोरियों से मुक्त रहे… ओम् शान्ति!


Also read: How to overcome Weaknesses? | भूतों (अर्थात कमज़ोरियां) को भगाने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 03-12-2018

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Becoming an Angel | फरिश्ता स्वरूप की परिभाषा | Avyakt Murli Churnings 15-12-2018

Becoming an Angel | फरिश्ता स्वरूप की परिभाषा | Avyakt Murli Churnings 15-12-2018

आज बाबा हमारे 3 रूप देख रहे हैं… ब्राह्मण सो फरिश्ता सो देवता… यही हम संगमयुगी ब्राह्मणों का लक्ष्य और लक्षण हैं 

फरिश्ता-पन की परिभाषा और लक्षण

हमारा एम ऑब्जेक्ट है लक्ष्मी-नारायण बनना, लेकिन देवता बनने से पहले फरिश्ता बनना है… यही तीव्र पुरुषार्थ करना है, धुन लगानी है, संगमयुग के अन्तिम स्टेज को emerge करना है कि मैं डबल लाइट फरिश्ता हूँ!

फरिश्ता अर्थात स्वराज्य अधिकारी, कर्मेन्द्रियों का राजा, बाबा का राजा बच्चा… लाइट के स्वरूप-धारी

फरिश्ता अर्थात इन सभी बातों में लाइट (अथवा न्यारा):

  • संकल्प, स्वभाव, संस्कार 
  • देह, सम्बन्ध, सम्पर्क (अर्थात औरों के स्वभाव संस्कार), संसार

तो ब्रह्मा बाप, मम्मा और दादीयों समान सबके प्यारे, प्रिय बन जाएंगे… सब कहेंगे यह मेरे हैं!

हमे मस्तक पर आत्मा की लाइट अनुभव होगी, बोलते हुए अशरीरी हो जाएंगे, विस्तार सार में समा जाएगा, हमारी दृष्टि से रूहानियत की लाइट सबको मिलेंगी!

हम सहज कर्मातीत बन जाएंगे! 

अब क्या सेवा करनी है? 

सेवा में उमंग-उत्साह अच्छा है, प्लेन्स अच्छे बनाते हैं, सभी परिवार के प्यार की system से प्रभावित होते हैं, मानते हैं ब्रह्मकुमारियों का ज्ञान अच्छा है 

अब सेवा में addition चाहिए फरिश्ता बनने के धुन की… इससे अशरीरी बनना बहुत सहज हो जाएगा 

अशरीरी बनने के अभ्यास से मेहनत कम, सफलता ज्यादा मिलेगी… अशरीरी-पन के वातावरण से सबको अनुभव करा सकते हैंप्राप्तियों, शक्तियों, शान्ति, आत्मिक प्रेम, खुशी, सुख, आनंद का

इससे सब कहेंगे मेरा बाबा, मैं बाबा का और बाबा मेरा… अर्थात बाप की प्रत्यक्षता हो जाएंगी

सबसे बड़ा विघ्न है अभिमान 

सेवा में वा फरिश्ता बनने में सबसे बड़ा विघ्न है देह भान (63 जन्मों का संस्कार) और देह अभिमान… अर्थात अपने गुण, कला, विशेषता (भाषण करना, कोर्स कराना, हैंडलिंग, आदि) का अभिमान

अभिमान को चेक करने की सहज विधी है:

  • अपमान बहुत जल्दी महसूस होगा 
  • रोब (क्रोध का अंश) आ जाएगा 

(अभिमान को समाप्त करने लिए निमित्त भाव, और बाबा के दिए हुए सभी उपकारों को कभी नहीं भूलना है) 

सार 

तो चलिए आज सारा दिन… चलते फिरते अपने डबल लाइट फरिश्ता स्वरूप में स्थिति रहे… इससे हर बात में लाइट और सर्व के प्यारे रहेंगे… और अशरीरी-पान के वातावरण द्वारा सर्व को परमात्म प्राप्तियों का अनुभव कराते रहेn… इससे सहज परमात्मा प्रत्यक्षता होगी, और यह संसार पुनः स्वर्ग बन जाएगा… ओम् शान्ति!