योग कमेंटरी | बाबा से रिफ्रेश होना | Sakar Murli Churnings 22-01-2021

योग कमेंटरी | बाबा से रिफ्रेश होना | Sakar Murli Churnings 22-01-2021

मैं सन्तुष्टता द्वारा हर संकल्प पुण्य… हर बोल में दुआ कमाने वाली… सिद्धि स्वरुप आत्मा हूँ

सदा बाबा के सम्मुख-साथ रह… रिफ्रेश हो खुशी का अनुभव कर… दुःख-आलस्य से मुक्त हूँ

मेरा अविनाशी पतित-पावन बाबा… खिवैया बन… अपने साथ घर ले जाता

मैं सतोप्रधान दैवी आत्मा… अमरलोक-परिस्तान विश्रामपुरी की मालिक… सतयुगी दिन-सोझरे में जा रही

मैं गुप्त-रूप आत्मा… मुख द्वारा बोलती… मुझमे 84 जन्मों का वण्डरफुल पार्ट भरा हुआ है


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योग कमेंटरी | हमारे विभिन्न स्वरूप | Sakar Murli Churnings 21-01-2021

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मैं तपस्या के बल से… भाग्यविधाता को अपना बनाने वाली… बालक सो मालिक, बाबा की सजनी हूँ

अकाल-मूर्त आत्मा… भृकुटी तख्त पर वीराजमान… मधुमक्खी-समान छोटी आत्मा हूँ

पावन-सतोप्रधान-शक्तिमान देवता थी… सर्वशक्तिमान की याद से फूल चार्ज बेटरी… घृत से भरपूर दीपक!

मैं पवित्रता से सम्पन्न… सूक्ष्मवतनवासी फरिश्ता… साक्षात्कार-मूर्त हूँ


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योग कमेंटरी | मैं श्रेष्ठ पार्टधारी आत्मा हूँ | Sakar Murli Churnings 20-01-21

योग कमेंटरी | मैं श्रेष्ठ पार्टधारी आत्मा हूँ | Sakar Murli Churnings 20-01-21

मैं प्रयोगी विशेष आत्मा, देही अभिमानी स्थिति में स्थित… सर्व खजानों से भरपूर… सन्तुष्टता की वरदानी आत्मा हूँ

मैं अविनाशी आत्मा… उस निराकारी दुनिया, Incorporeal वर्ल्ड… परमधाम, शान्तिधाम, मुक्तिधाम की निवासी हूँ

गोल्डन एज में देवी-देवता… विश्व का महाराजा-महारानी… पुरूषोत्तम आत्मा थी

मैं सच्ची सीता… एक निराकार राम की याद-अग्नि से… सम्पूर्ण पावन आत्मा बन रही

मैं शिव साजन की सजनी.. ज्ञान रत्नों से श्रृंगारित… सम्पूर्ण पवित्र सुखी हूँ

मैं ज्ञान-सम्पन्न लाइट हाउस… सबको शान्तिधाम-सुखधाम का रास्ता दिखाता… सबकी जीवन-नावों का पायलट हूँ


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योग कमेंटरी | मीठी आत्म-अभिमानी स्थिति | Sakar Murli Churnings 19-01-21

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मैं अजर-अमर-अविनाशी आत्मा… सत्-चित्-आनंद स्वरूप… शान्त हूँ

मैं आत्मा मेरे बाबा को याद करती… स्वीट बाबा के संग… याद की यात्रा में रहती

पावन सतोप्रधान… मीठी सुखदाई फूल… पुरूषोत्तम देवता बन रही हूँ

मैं हिम्मतवान आत्मा हूँ… सदा बाबा को साथ रखती… मायाजीत हूँ

मैं विश्व कल्याणकारी आत्मा हूँ… सबके लिए शुभ भावना से सम्पन्न


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इस स्मृति-समर्थी-ताजपोशी दिवस से मन के टाइमटेबल द्वारा भिन्न स्वमानों के स्मृति-स्वरूप बन, बाप समान अशरीरी स्थिति के अभ्यास द्वारा नष्टोमोहा फरिश्ता स्वरूप बनो | Baba Milan Murli Churnings 18-01-2021

इस स्मृति-समर्थी-ताजपोशी दिवस से मन के टाइमटेबल द्वारा भिन्न स्वमानों के स्मृति-स्वरूप बन, बाप समान अशरीरी स्थिति के अभ्यास द्वारा नष्टोमोहा फरिश्ता स्वरूप बनो | Baba Milan Murli Churnings 18-01-2021

1. आज के दिन को कहते ही हैं स्मृति दिवस। सभी के दिल में बाप के स्नेह की तस्वीर दिखाई दी, अनेक स्नेह के मोतियों की मालायें देखी। हर बच्चे के दिल में आटोमेटिक यह गीत बज रहा – मेरा बाबा, ब्रह्मा बाबा, मीठा बाबा। और बापदादा के दिल में मीठे बच्चे, प्यारे बच्चे। यह परमात्म स्नेह, ईश्वरीय स्नेह सिर्फ संगमयुग पर ही अनुभव होता, सहजयोगी बना देता, आपका जन्म का आधार स्नेह है। कुछ भी करना पड़ा लेकिन स्नेह के प्लेन में सभी पहुंच गये

2. आज के दिन को समर्थी दिवस भी कहा जाता, क्योंकि यह दिन विशेष स्नेह से समार्थियों का वरदान प्राप्त करने का दिन है। आज के दिन को ताजपोशी का दिन भी कहा जाता। ब्रह्मा बाप ने निमित्त बने हुए महावीर बच्चों को विश्व सेवा का ताज पहनाया। खुद अननोन हुए और बच्चों को विश्व सेवा के स्मृति का तिलक दिया। बच्चों को करनहार बनाया, स्वयं करावनहार बनें। अपने समान फरिश्ते रूप का वरदान देकर लाइट का ताज पहनाया।

3. जैसे अमृतवेले शक्तिशाली अवस्था का अनुभव करते, वैसे कर्म में फर्क पड़ जाता। तो अपना जीवन काल समाप्त कब होना है, मालूम है? अचानक कुछ भी हो सकता। तो विश्व के डेट के संकल्प से अलबेला नहीं बनना। कब नहीं कहो, अब। मुझे एवररेडी रहना ही है। तो इतनी तैयारी सबके अटेन्शन में है? अपना कर्मों का हिसाब चुक्तू किया है? चारों ही सबजेक्ट में ऐसी तैयारी है? पूरा बेहद के वैराग्य का अनुभव चेक किया है? नष्टोमोहा स्मृति स्वरूप

4. ब्रह्मा बाप ने भी स्वयं को पुरूषार्थ करके ऐसा बनाया, अचानक अशरीरी बनने का अभ्यास अशरीरी बनाकर उड़ गये। नष्टोमोहा, बच्चों के हाथ में हाथ होते कहाँ आकर्षण रही? फरिश्ता बन गये। बच्चों को फरिश्ते बनाने का तिलक दे गये। इसका कारण बहुत समय अशरीरीपन का अभ्यास रहा। कर्म करते-करते ऐसे अशरीरी बन जाते।

5. तो जो कर्मयोग में अन्तर पड़ता, कारण स्मृति में इमर्ज नहीं, मैं कौन सी आत्मा हूँ? मैं करावनहार हूँ और यह कर्मेन्द्रियां करनहार हैं, इस सीट पर सेट है तो कोई भी कर्मेन्द्रिय आर्डर में रहेगी। आपको भी चेक करना चाहिए आज विशेष मन-बुद्धि संस्कार का क्या हाल रहा? हर एक को बाप ने मास्टर सर्वशक्तिवान भव का वरदान दिया है। जब आलमाइटी अथॉरिटी का वरदान है, तो वरदान के स्थिति में स्थित रहकरके अगर आर्डर करो तो हो नहीं सकता कि आप आर्डर करो और शक्ति न मानें।

6. हर समय जो काम करते तो भी अपने मन का टाइमटेबल बनाके रखो। यह काम करते हुए मन का स्वमान क्या रहेगा? आज के दिन कौन सा लक्ष्य रखूंगा, भले भिन्न-भिन्न टाइमटेबल बनाओ। बहुत माला है स्वमान की। इतनी बड़ी माला है जो स्वमान गिनती करते जाओ और माला में समा जाओ

7. कर लेंगे, हो जायेगा, यह अलबेलापन है। जिनको पीछे सन्देश देंगे वह भी आपको उल्हना देंगे, आपने पहले क्यों नहीं बताया तो हम भी कुछ कर लेते। मातेश्वरी जगत अम्बा सदा यह लक्ष्य रखती थी बापदादा ने जो श्रीमत, चाहे मन्सा वाचा कर्मणा दी है, वह हमें करना ही है। ऐसे पूरा वर्सा लेने वाले यही लक्ष्य बुद्धि में रखो कि अचानक एवररेडी और बहुत समय, तीनों ही शब्द साथ में याद रखो।

8. अब फोर्स का कोर्स कराओ। जो वह आत्मायें बाप के सिर्फ स्नेही-सहयोगी नहीं बनें लेकिन हर श्रीमत को पालन करने वाली, सर्व फोर्स भरने वाली समीप का रत्न बनें। क्योंकि अभी प्रकृति कोई न कोई प्रभाव दिखा रही और दिखाती रहेगी, जो ख्याल ख्वाब में बातें नहीं। आप सब तो वारिस हो ना, फुल अधिकारी। हर एक को बापदादा की यह आज्ञा – मुझे कभी शब्द नहीं कहना है। अभी-अभी, कल भी किसने देखा, आज। जो करना है वह करना ही है, सोचना नहीं।


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योग कमेंटरी | साइलेन्स की स्थिति | Sakar Murli Churnings 15-01-21

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मैं व्यर्थ से मुक्त… देह-भान से परे… एकान्तवासी आत्मा हूँ

आत्मिक स्थिति में स्थित… योगयुक्त हूँ

ज्ञान-शान्ति सागर की यादों में समाई… रूहानी यात्री हूँ

जादूगर बाबा मुझे देवता बना रहे… माया की जेल से मुक्त

इसी silence में सर्व समाधान समाये है… सबको शान्ति-शक्ति मिलती.. साक्षात्कार होंगे… ओम् शान्ति!


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देकर सर्व ख़ज़ानो की चाबी, बनाया पद्मापद्म भाग्यवान – कविता

देकर सर्व ख़ज़ानो की चाबी, बनाया पद्मापद्म भाग्यवान – कविता

(मेरा बाबा, मीठा बाबा, प्यारा बाबा)
देकर यह सर्व ख़ज़ानो की चाबी, बनाया पद्मापद्म भाग्यवान
लुटाकर अखुट वरदानों की बौछार, जीवन बनाई आलीशान

ज्ञानामृत का मीठा सोमरस पिलाकर, मन बुद्धि किये refine
अलौकिक गुण ईश्वरीय शक्तियां बरसाकर, जीवन बनाई divine
अपनी नजरों से हमें संवारा, बनाया खुद समान
(देकर सर्व ख़ज़ानो की चाबी, बनाया पद्मापद्म भाग्यवान)

दिखाकर हमारी दिव्य शान्ति प्रेम आनंद से सम्पन्न reality
आई बोल में मधुरता, कर्म में कुशलता, व्यवहार में royalty
साधारण से इंसान को बनाया, इस जग में महान
(देकर सर्व ख़ज़ानो की चाबी, बनाया पद्मापद भाग्यवान)

बुराइयों पर कराये विन, बनाया हमे number one
दृष्टि में समाई शीतलता, संकल्पों में बहती पावन निर्मलता
पहनाकर विश्व कल्याण का ताज, पूरे कराये सबके अरमान
(देकर सर्व ख़ज़ानो की चाबी, बनाया पद्मापदा भाग्यवान)


और कविता:

ऐसी पिलाई ज्ञान की मीठी सैक्रीन, हो गये तेरी यादों में लवलीन – कविता

ऐसी पिलाई ज्ञान की मीठी सैक्रीन, हो गये तेरी यादों में लवलीन – कविता

ऐसी पिलाई ज्ञान की मीठी सैक्रीन
हो गये तेरी यादों में लवलीन

देकर हमारी सत्य पहचान, हो गये गुण शक्तियों से धनवान
अब करते, अपनी प्राप्तियों को सदा गीन
(ऐसी पिलाई ज्ञान की मीठी सैक्रीन, हो गये तेरी यादों में लवलीन)

पाकर तुम्हारा प्यारा परिचय, संसार हमारा बना सुखमय
अब सुना लगता, तेरे बिन
(ऐसी पिलाई ज्ञान की मीठी सैक्रीन, हो गये तेरी यादों में लवलीन)

दिखाकर दैवी मंजिल, जीवन हमारी बनाई सौमिल
सफल हुए हमारे रात-दिन
(ऐसी पिलाई ज्ञान की मीठी सैक्रीन, हो गये तेरी यादों में लवलीन)

दिलाकर कल्याणकारी का ज्ञान, जिंदगी ऐसी बनी आसान
सुन्दर लगता ड्रामा का हर सीन
(ऐसी पिलाई ज्ञान की मीठी सैक्रीन, हो गये तेरी यादों में लवलीन)

शिक्षायें देकर बेमिसाल, तुने किये बड़े कमाल
अब होते हर परिस्थिति में विन
(ऐसी पिलाई ज्ञान की मीठी सैक्रीन, हो गये तेरी यादों में लवलीन)


और कविता:

A surrendered Intellect! | Samarpan Bhaav

A surrendered Intellect! | Samarpan Bhaav 

Baba says in the Murli many times to us children that:

“You had promised in Bhakti, that when you (God) will come, I will surrender myself to you. God, Baba has come to remind you of that promise”

Why does Baba wish to remind us about the promise?

When I say surrender to Him, it means I say that everything I have; my body, mind, wealth, relations, problems, issues all belongs to Him, and He belongs to me…. This samarpan bhaav is actually the essence, the secret of constant fast Purusharth!

Here is how:

Body

1. When the body is mine, I can use it in unhealthy ways, e.g., For my pleasure, I could eat more fried food, ice cream, etc without caring for the body
When the body is Baba’s, I am a trustee, can’t use this body in unhealthy ways, because body is His, to be used in His Ishwariya Seva

2. When I consider the body His in a genuine deep way; the attachment to the body, the feeling of mine starts reducing. This is a very subtle point, which makes it much easier to experience soul consciousness. And soul consciousness is the basis of a Yogyukt life, the basis of all divine virtues, the basis for success in seva. Hence, this feeling that this body is Baba’s makes everything easy.

Mind

1. When my mind is Baba’s, I will fully follow Baba’s Shrimat and not manmat or parmat.
This will ensure:
a. No doubts on effectiveness or practicality of Shrimat
b. No excuses regarding Purusharth

 2. Slowly, my opinion too will start becoming aligned with Shrimat e.g., Before, on hearing about need to come daily to class, it seemed difficult; now due to personal experiences & transformation even our mind says come daily to class. 

Wealth 

When the wealth is Baba’s:
1. Will never use it in wrong ways
2. Will not earn wealth by giving pain to others, or disturbing anyone
3. Will ensure no dishonesty related to wealth e.g., Tax matters

Relations

Just need to check, whether the friends & relatives are mine or are they Baba’s children? Whose are they more? All are Baba’s, they belong to Him..

The more I remind this to myself, the more worriless and detached I become. This makes me more capable to fulfill responsibilities & take care, to keep giving, leading to harmony in relationships.

Seva 

1. When I deeply remember that Baba is the doer, I am just the instrument, it frees from any burden, worries, etc related to seva. This lightness increases efficiency, leading to success in seva. 

2. When I remember Baba is the doer, it becomes easier to receive His touchings, making seva successful.

Work

When we do work as a trustee, keeping Baba alongside; we remain light, free from hard work, burden & tiredness..

As Baba says, when we keep Baba alongside rather than being alone, it’s like two people doing one work, which halves the efforts. This actually refers to the fact that sthiti becomes very good with Baba alongside; enhancing our capacity, efficiency, intuition & hence reducing the efforts required.

Conclusion (A surrendered Intellect!)

Thus, in essence, when we convert Mine to Yours, we become free of worries, Befikra Baadshah, this gives a big boost to our progress.

Hence, Baba is reminding us of the promise. Baba is the Giver, He doesn’t want anything from anyone. He’s just reminding because this Dharna will make everything easy, and Purusharth speedy!

Om Shanti!


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स्वयं भगवान् बना हमारा बागवान – कविता

स्वयं भगवान् बना हमारा बागवान – कविता

क्या किस्मत है, स्वयं भगवान् बना हमारा बागवान
महक उठे दिव्यगुणों से, बने रूहे गुलाब मूल्यवान
(स्वयं भगवान्‌ बना हमारा बागवान)

प्रेम के शितल जल से है सिंचा, ज्ञान सूर्य ने अपनी शक्तियों से सवारा
देकर श्रेष्ठ धारणाओं की धरती, योग्यताएं सदा हममे है बढ़ती
अपने गुणों से बनाया शक्तिवान
(स्वयं भगवान्‌ बना हमारा बागवान)

भरके शान्ति खुशी के रंग, फैलाई दिव्यगुणों (दिव्यता) की सुगंध
ऐसी जगाई ज्ञान योग की वासधूप, निखर उठा हमारा स्वरूप
सर्व प्राप्तियों से बनाया गुणवान
(स्वयं भगवान्‌ बना हमारा बागवान)

थे कलियुगी कांटे, करके मीठी मीठी बाते
जोड़के प्यारे नाते, अब हम धन्यवाद के गीत है गाते
जबकि बनाया महान सौभाग्यवान
(स्वयं भगवान बना हमारा बागवान)


और कविता: