योग कमेंटरी | मैं शिव शक्ति हूँ | I’m a Shiv Shakti

योग कमेंटरी | मैं शिव शक्ति हूँ | I’m a Shiv Shakti

मैं शिव शक्ति हूँ… सदा शिव से combined… शक्ति स्वरूपा हूँ

मैं अष्ट शक्ति सम्पन्न माँ दुर्गा हूँ… पुराने संस्कार को भस्म करने वाली माँ काली हूँ… सदा सन्तुष्ट रहने वाली माँ संतोषी हूँ

मैं ज्ञान-वीणा वादीनी माँ सरस्वती हूँ… पवित्र श्वेत-वस्त्र धारिणी… गुण-ग्राही हंस-वाहिनी हूँ

मैं सबकी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली माँ अम्बा हूँ… सब को ज्ञान गुण शक्तियों का सहयोग देने वाली महा-लक्ष्मी हूँ… सबकी पालना करने वाली जगत माता हूँ

सबको आप समान बनाना है… परमात्मा से जुड़ाकर… उन्हें भी सर्व-प्राप्ति सम्पन्न करना है… ओम् शान्ति!

गीत: शिव शक्तियां आ गई…


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Becoming full of self respect | सहज स्वमान-धारी कैसे बने | Avyakt Murli Churnings 17-02-2019

Becoming full of self respect | सहज स्वमान-धारी कैसे बने | Avyakt Murli Churnings 17-02-2019

1. बाबा ने हमें सर्व खज़ानों का अधिकारी बनाया है, ज्ञान स्वरूप बना दिया है, भविष्य सुख-शान्ति-सम्पत्ति की guarantee दे दी है… तो चेक करना है, कहाँ तक हमने अपने में शक्ति और खुशी धारण की है, कितना लगन में मगन रहते हैं

2. हम श्रेष्ठ पवित्र आत्माएं, सर्व प्राप्ति सम्पन्न है, बेफिक्र बादशाह, दिव्य श्रूंगारों से सम्पन्न है… नौलखा हार से भी श्रेष्ठ है बाबा के गले का हार बनना, बाबा के सिरताज बनने के आगे बह ताज कुछ नहीं, ब्रह्मा भोजन का एक कणा 36 प्रकार के भोजन से भी श्रेष्ठ है… इन्हीं श्रेष्ठ स्वमानों के नशे में रहना है

3. स्वराज्य अधिकारी अर्थात शक्तिशाली, तो रोज चेक करना है, हमारी एक एक कर्मेंद्री (आँख, कान, मुख, आदि) हमारे अनुसार चली, बल्कि हर कर्म करने से पहले सोच-समझ कर करना है

4. आत्म-अभीमानी बनने के अनुभव से स्वतः परमात्म प्राप्तियों का अनुभव होगा… बस, दो बातें आत्मा और परमात्मा के अनुभव की अथॉरिटी बनो, तो spiritual जज बन सबको जन्म-जन्म के दुख छुड़ाने के निमित्त बन जाएंगे

5. गुजरात की विशेषता है, ज्ञान की खुशी का रास करना, लगन में मगन रहने की रास करना… राजस्थान है स्वराज्य अधिकारी राजाओं का स्थान… कर्नाटक ने विस्तार अच्छा किया है, तो अभी मन के विस्तार को समेटकर सार-स्वरूप बनना है (मक्खन जैसे)

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा भिन्न-भिन्न स्वमानों के अभ्यास द्वारा श्रेष्ठ स्थिति में रहे… औरों को भी सम्मान देते हुए उन्हें श्रेष्ठ स्थिति में लाते, साथ मिलकर सतयुग बनाते चले … ओम् शान्ति!

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योग कमेंटरी | मैं दिव्य दर्शनीय मूर्त आत्मा हूँ | I’m a divine idol of beauty

योग कमेंटरी | मैं दिव्य दर्शनीय मूर्त आत्मा हूँ | I'm a divine idol of beauty image

योग कमेंटरी | मैं दिव्य दर्शनीय मूर्त आत्मा हूँ | I’m a divine idol of beauty

मैं दिव्य दर्शनीय मूर्त आत्मा हूँ… दिव्य श्रृंगारों से सम्पन्न… सुशोभित

स्वयं भगवान ने मुझे दिव्यगुणों से सजाया है… रूहानी साजन बनकर

मेरे मस्तक पर आत्मिक स्मृति का तिलक है… गले में गुणों की माला है… चारों ओर गुणों की खुशबू फैल रही है

मेरे चेहरे पर हर्षितमुखता की लाली है… रूहानी मुस्कान है… अलौकिक सूरत है

मैं बहुत सुन्दर आत्मा हूँ… सम्पूर्ण पवित्र… सर्वगुण सम्पन्न हूँ

मेरे हाथों में परमात्म प्रेम की अंगूठी है… ईश्वरीय मर्यादाओं का कंगन है… हर कदम में पद्मों की कमाई है

मेरे चारों ओर पवित्रता का आभामण्डल है… मैं साक्षात्कार मूर्त आत्मा हूँ

सिर पर विश्व कल्याण का ताज है… मैं डबल ताजधारी हूँ… अभी सो भविष्य में… ओम् शान्ति!

गीत: जगमग हो जगमग हो सतयुग का तेज…


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Sakar Murli Churnings 16-02-2019

Sakar Murli Churnings 16-02-2019

यह wonderful ड्रामा है, जो बिल्कुल accurate चल रहा है, इसलिए किसी भी बात में रोना रुसना नहीं है… सिर्फ़ यही ध्यान रखना है कि श्रीमत पर चल हमें ज्ञान को accurate perfect (ज्यों का त्यों) धारण कर साक्षी रहना है… योग द्वारा सतोप्रधान धारणा-मूर्त बनना है… तो सेवा भी अपने आप होती रहेंगी, आगे हम सेवा में बहुत busy रहेंगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… ड्रामा को यथार्थ रीति समझ निश्चिंत रह, बाबा की याद में तीव्र दौड़ी लगाए… और खुद भी सर्व दैवी-गुण सम्पन्न बन जाएँ, औरों को भी बनाएं, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

Sakar Murli Churnings 15-02-2019

Sakar Murli Churnings 15-02-2019

सारी दुनिया तमोप्रधान हो गई है, तो उनकी बातें भूल… नई दुनिया की तैयारी के लिए बच्चा बन रूहानी पढ़ाई और बाबा की याद में तत्पर रहना है, तो अभी का जीवन भी बहुत अच्छा हो जाएंगा… योगबल से स्वयं और विश्व को सतोप्रधान बनाना है… ज्ञान चिन्तन करते सदा हर्षित रहना हैै… हीरो एक्टर की स्मृति में रह हर कर्म श्रेष्ठ वा accurate करना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… हीरो एक्टर बन ज्ञान-योग का ऎसा पक्का अभ्यास करे, कि हम स्वयं और सारे विश्व को सतोप्रधान सतयुगी बना दे… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | Experiencing God’s love | परमात्म प्यार का अनुभव

योग कमेंटरी | Experiencing God’s love | परमात्म प्यार का अनुभव

मैं प्रेम स्वरूप आत्मा हूँ, बाबा प्यार का सागर है… बाबा दिलाराम, दिलवर है, मैं उनकी दिलरूबा हूँ… वह रूहानी माशूक, मैं आशिक हूँ

बाबा कहते, तुम मेरे सिरमोर… सिरताज… गले का हार हो… मेरे दिल-तख्त-नशीन… राजा बच्चा… नैनों के नूर हो

बाबा सदा मेरी विशेषताएं देखते… आगे बढ़ाते… मुझे बहुत प्यार करते हैं

इसी प्रेम में सच्ची सुखशान्ति है… परमात्म प्यार सबसे बड़ा भाग्य है… मैं पद्मपद्म भाग्यशाली आत्मा हूँ

मैं रूहानी शमा बाप पर फिदा हूँ… बलिहार हो चुकी हूँ… समर्पित हूँ

मैं मास्टर प्रेम का सागर हूँ… सबको यह परमात्म प्रेम बांटना है… अपनी गुण-ग्राही दृष्टि… मधुर बोल… श्रेष्ठ व्यवहार द्वारा

सबको प्यार के सागर से जुड़ाकर, उन्हें भी सर्व-प्राप्ति-सम्पन्न बनाना है… ओम् शान्ति!

गीत: तेरे प्यार में डूबा रहता है… 

जो प्यार मिला मुझे तुमसे…

कितना प्यार दिया बाबा…

प्रभु प्यार की किरणों से…


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Sakar Murli Churnings 14-02-2019

Sakar Murli Churnings 14-02-2019

1. शिवबाबा आकर (शिव जयन्ती), हमें ज्ञान देते हैं (गीता जयन्ती), जिससे हम मनुष्य से देवता बन जाते हैं (कृष्ण जयन्ती)… तो शिव जयन्ती फिर गीता जयन्ती फिर श्रीकृष्ण जयन्ती, यही सही क्रम है… और कोई क्रम नहीं हो सकता, क्योंकि बाबा ही पतित-पावन है जो ज्ञान देकर दैवी रजाई स्थापन करते हैं

2. तो ज्ञान सागर का ज्ञान अमृत पीते-पीते पावन बनना है, और ज्ञान गंगा बन विश्व को पावन बनाना है… पवित्र बनने के लिए याद में जरूर रहना है

सार

तो चलिए इस 14 फरवरी पर… कल्प बाद आए हुए बाबा के प्रेम में डूबे रहे, लवलीन रहकर फिर से लवली देवता बन जाएँ… और मास्टर प्रेम के सागर बन सबको प्यार बांटते रहे, प्यार के सागर से जुड़ाकर उन्हें भी सर्व-प्राप्ति-सम्पन्न बना दे… दैवी प्यार की दुनिया सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | मैं पूज्य आत्मा हूँ | I’m a worship-worthy soul

योग कमेंटरी | मैं पूज्य आत्मा हूँ | I’m a worship-worthy soul

मैं दिव्यता से सम्पन्न… सदा श्रेष्ठ स्थिति में स्थित… सर्व प्राप्ति स्वरूप हूँ

मेरे रूहानी नैन सबकी विशेषताएं देखते… चेहरा सदा हर्षित है… रूहानी मुस्कान है

मेरे वरद हस्त सबको दुआएं, आशीर्वाद, वरदान दे रहे हैं… मैं सबको देने वाला देवता हूँ… गुणवान… चरित्रवान… महान हूँ

मैं सम्पूर्ण पवित्र… गायन योग्य… पूजन योग्य आत्मा हूँ

सदा एकरस अचल-अडो़ल हूँ… कोई कुछ भी करे, मैं शान्त हूँ… कुछ भी हो जाए, मैं सन्तुष्ट हूँ

सभी भक्त सदा सुखी रहे… उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो… वह खुश रहे… उनका भी मिलन परमात्मा से हो जाए… वह सर्व-प्राप्ति सम्पन्न बन जाएं

सभी मेरा श्रेष्ठ दिव्य स्वरूप देखना चाहते… मेरे गुणगान करते हैं… मुझे सबकी आशाओं को पूर्ण करना है… ओम् शान्ति!

गीत: हे नाम रे, सबसे बड़ा तेरा नाम…


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Sakar Murli Churnings 13-02-2019

Sakar Murli Churnings 13-02-2019

सर्वश्रेष्ठ महिमा-योग्य बाप हमें कितना ऊंच मनुष्य से देवता, परिज़ादा बनाते हैं… तो ऎसे प्यारे बाप की शिक्षाओं (अल्फ और बे) पर पूरा चलना है, अर्थात अपने को आत्मा समझ ज्ञान वा सुख के सागर बाबा को याद करना है, जिसे और सहज बनाने ज्ञान-योग का चिन्तन करते रहना है, जिससे बहुत खुशी में रहेंगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… ज्ञान की मस्ती में रह हर पल रूहानी मौज का अनुभव करते रहे, सबको खुशियां बांटते रहे, खुशियों की दुनिया सतयुग बनाते रहें… ओम् शान्ति!

Sakar Murli Churnings 12-02-2019

Sakar Murli Churnings 12-02-2019

कर्मों के नियम अनुसार, हमें खुद मेहनत कर कर्मातीत स्थिति पानी है… ड्रामा अनुसार बाबा हमें जो ज्ञान वा श्रीमत देते, वही सबसे बड़ी मदद है… तो स्वदर्शन चक्रधारी बन टीचर (बाबा) और नॉलेज को याद करना है, कर्मीन्द्रीयों से कोई भी विकर्म नहीं करना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… याद की ज़रा सी मेहनत कर फिर से सतोप्रधान दिव्य-संस्कार सम्पन्न बन जाएँ… साथ में औरों को भी श्रेष्ठ बनाते रहे, जिससे सहज ही सतयुग आ जाएंगा… ओम् शान्ति!