योग कमेंटरी | I’m a truly knowledgeful soul | Avyakt Murli Churnings 10-02-2019

योग कमेंटरी | I’m a truly knowledgeful soul | Avyakt Murli Churnings 10-02-2019

मैं ज्ञानी तू आत्मा… सदा बाबा के साथ रहने वाली… मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ

मैं स्वराज्य अधिकारी हूँ… सभी गुण शक्तियां मेरे सेवाधारी है… मैं जब चाहे, जैसे चाहे उन्हें use कर सकती हूँ

मैं बन्धन-मुक्त फरिश्ता हूँ… पुराने-पन का कोई भी बोझ मुझे खींच नहीं सकता… मैं सदा उड़ती कला के अनुभव में उड़ता रहता हूँ

मैं बाबा का वारिस बच्चा हूँ… सम्पूर्ण वर्से का अधिकारी… राज्य पद अधिकारी हूँ

मैं भय से मुक्त निड़र हूँ… औरों को भी सुख-शान्ति देने के निमित्त आत्मा हूँ… शान्ति का वरदान देने वाली वरदानी महादानी आत्मा हूँ

गीत: दानी बनो, वरदानी बनो…


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘I’m a truly knowledgeful soul | Avyakt Murli Churnings 10-02-2019’

Sakar Murli Churnings 11-02-2019

Sakar Murli Churnings 11-02-2019

हम सभी ज्ञान सुनाने में (प्रश्नावाली करना, गोले पर समझाना, मुरली चलाना आदि) होशियार है, लेकिन ज्ञान के साथ चाहिए योग का जौहर… इसलिए अपने को आत्मा समझ बाबा को याद करना है, इससे ही पाप कट हो पावन बनेंंगे, सबको भी यही सिखाना है… यह पुरुषोत्तम संगमयुग है, जबकि हीरे तुल्य देवता बनाने वाले स्वयं ज्ञान सागर बाप आए हैं, हमें ज्ञान गंगाएँ बनाकर सारे विश्व को पावन दैवी बनाते हैं

सार

तो चलिए आज सारा दिन… कल्प बाद मिले हुए बाबा को बहुत प्यार से याद कर, योगयुक्त रहे… जिससे न सिर्फ हमारी स्थिति सर्वश्रेष्ठ रहती, लेकिन सर्व को भी श्रेष्ठ अनुभुतीयां करा सकते, और हम साथ में मिलकर सतयुग बना लेंगे… ओम् शान्ति!

Becoming truly knowledgeful | सच्चे ज्ञानी के लक्षण | Avyakt Murli Churnings 10-02-2019

Becoming truly knowledgeful | सच्चे ज्ञानी के लक्षण | Avyakt Murli Churnings 10-02-2019 image

Becoming truly knowledgeful | सच्चे ज्ञानी के लक्षण | Avyakt Murli Churnings 10-02-2019

तीन प्रकार के बच्चे

  • भक्ति की भावना वाली आत्माएं… यथाशक्ति, शान्ति प्रेम ज्ञान खुशी का थोड़ा अनुभव करती… लेकिन indirect, अन्धश्रद्धा से मिक्स
  • परिचय के अधार से बाप और परिवार प्रति भावना वाली आत्माएं… बह भी कहती मेरा बाबा, प्यार मे बहुत खुशी में दिखती … लेकिन शक्तिशाली न होने के कारण सदा खुश नहीं रह सकते… वर्से के हकदार तो बने, लेकिन पूरा वर्सा नहीं ले पाएंगे
  • सच्चा ज्ञानी अर्थात मास्टर सर्वशक्तिमान, स्वराज्य अधिकारी, सर्व गुण शक्तियों जब चाहे स्वयं वा सर्व प्रति use कर सके… सम्पूर्ण वर्से के अधिकारी, राज्य पद अधिकारी

अन्य पॉइन्ट्‍स

1. बाबा ने हमें भय से मुक्त किया है, मृत्यु का भी (हम तो अविनाशी आत्मा है) और रहे हुए कामों का भी (सब बाबा को सौप दिया है)… जो खुद ऎसे मुक्त है, वही औरों को सुख-शान्ति दे सकते… आगे चलके प्रसिध्द होगा कि यही शान्ति का यथार्थ स्थान है, तो सबकी शान्ति की अनुभव कराते रहना है

2. हम शान्ति का पैगाम वा सन्देश देने वाली संदेशी आत्माएं है, महादानी, वरदानी है… ऎसे अपने भिन्न-भिन्न टाइटल्स को स्मृति में लाते ही खुशी होती, स्वतः सेवा याद आती

3. हम डबल लाइट फरिश्ते है… फ़र्श (अर्थात पुरानी देह और दुनिया) का कोई बोझ नहीं, सदा उड़ते हुए… अभी समय है ऎसे फरिश्ते बनने का… इसी एक शब्द फरिश्ता, जो कि बाबा का वरदान है, उसे याद रखना है, तो मालामाल बन जाएँगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सच्चा ज्ञानी बन सदा बाप से combined रह, शक्तिशाली स्थिति का अनुभव करते रहे… और फरिश्ता बन सदा हल्का रहे, सबको सुख-शान्ति का वरदान देते रहे, भगवान से जुड़ाते रहे, सतयुग बना ले… ओम् शान्ति!

Becoming Golden Aged | गोल्डन एजेड बनने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 09-02-2019

Becoming Golden Aged image

Becoming Golden Aged | गोल्डन एजेड बनने की सहज विधि | Sakar Murli Churnings 09-02-2019

परमात्मा निराकार पतित-पावन है… हमें ब्रह्मा मुख द्वारा सत्य ज्ञान (spiritual knowledge) देकर स्वदर्शन चक्रधारी वा राजयोगी (आत्म-अभीमानी वा योगयुक्त) बनाते हैं, जिससे हम दिव्यगुण-सम्पन्न (और विकारों से मुक्त) गोल्डन एजेड बन जाते हैं… और तन-मन-धन से रूहानी सर्विस कर विश्व को भी गोल्डन एज बना देेते!

सार

तो चलिए आज सारा दिन… हमारी गोल्डन एजेड स्मृतियों को ईमर्ज कर, स्वयं को और विश्व को भी गोल्डन एजेड बना दे… सतयुग बना दे… ओम् शान्ति!

Sakar Murli Churnings 08-02-2019

Sakar Murli Churnings 08-02-2019

ड्रामा अनुसार अब वापिस घर जाने का समय है, बाबा आया है हमें लेने, तो पुरानी देह और दुनिया में ममत्व नहीँ रखना है… फिर नई दुनिया नये सम्बन्ध में चलना है, इसलिए अपनी जांच करनी है, चेक करना है, चार्ट रखना है, हमने कहा तक दैवीगुण धारण किए है, हमारी दृष्टि भाई-भाई की बनी है?, हम ज्ञान योग में कहा तक रेग्युलर है?

सार

तो चलिए आज सारा दिन… अपने सुखधाम-शान्तिधाम को याद करते रहे… जिससे सहज ही कमजोरियों से मुक्त दैवीगुण सम्पन्न बन जाएँगे, और को भी बनाते रहेंगे, सतयुग बनाने के निमित्त बन जाएंगे… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | सूक्ष्मवतन में बापदादा से मिलन | Experiencing God in the subtle world

योग कमेंटरी | सूक्ष्मवतन में बापदादा से मिलन | Experiencing God in the subtle world image

योग कमेंटरी | सूक्ष्मवतन में बापदादा से मिलन | Experiencing God in the subtle world

बाबा बाहें पसारे… बुला रहे हैं “आओ बच्चे”… मेरे मीठे बच्चे… प्यारे बच्चे… लाडले बच्चे

मैं फरिश्ता… बाबा के पास पहुँच गया हूँ… बाबा मुझे बहुत मीठी दृष्टि दे रहे हैं… मैं बाबा की दृष्टि ले रहा हूँ

उनका वरदानी हाथ मेरे सिर पर है… बाबा वरदान दे रहे हैं… निरन्तर योगी भव… मायाजीत भव… सदा सुखी भव

विजय का तिलक लगा रहे हैं… सफलता तुम्हारा जन्म सिद्ध अधिकार है… मैं सदा तुम्हारे साथ हूँ

उनकी छत्रछाया में, मैं सदा सुरक्षित हूँ… परिस्थितयां व माया मुझे हिला नहीं सकती… बाबा मेरा रक्षक है

सदा बाबा को साथ रख… इसी हल्की अव्यक्त स्थिति में रहना है… सबको भगवान से जुड़ाना है… ओम् शान्ति!

गीत: बाबा से मिलन मनाने, आ जाओ मेरे लाल…


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘सूक्ष्मवतन में बापदादा से मिलन | Experiencing God in the subtle world’

Sakar Murli Churnings 07-02-2019

Sakar Murli Churnings 07-02-2019

रूहानी सर्जन बाबा धीरज देते हैं, बाकी थोड़ा समय है, माया से मुक्त हो हम नई दुनिया में पहुँच जाएँगे… इसलिए याद की यात्रा में रह सतोप्रधान बनना है, सजाओं से छूटने लिए… ज्ञान अमृत पीतेे रह स्वदर्शन चक्रधारी बनकर दैवीगुण धारण करने है, विकारों को छोड़ देना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… याद की यात्रा में रह, दुःख के अंश मात्र से भी मुक्त रहे और अतिन्द्रीय सुख का सदा अनुभव करते रहे, जिससे वातावरण बहुत सुन्दर रहेगा, सबकी सेवा होगी, सतयुग बन जाएंगा… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | मैं खुशबूदार फूल हूँ | I’m a fragrant flower

योग कमेंटरी | मैं खुशबूदार फूल हूँ | I’m a fragrant flower

मैं खुशबूदार फूल हूँ… शीतल चन्दन हूँ… मुझसे चारों ओर गुणों की खुशबू फैल रही है… वातावरण श्रेष्ठ सुगंधित हो रहा है… सभी प्रसन्नीत हो रहे हैं

मैं रूहानी सूरजमुखी हूँ… मेरी मन-बुद्धि सदा ज्ञान सूर्य बाबा की तरफ है… उनसे ही शक्तियां ले रही हूँ

योग की धूप… ज्ञान के जल… धारणा की धरती से… मैं फूल खिल उठा हूँ… सभी परिस्थिति में खिला हुआ हूँ

मैं सदा हर्षित… मीठा… शान्त-चित हूँ

सदा श्रेष्ठ स्थिति में स्थित… मैं रूहे गुलाब हूँ… राजा हूँ… सबसे सुन्दर

स्वयं भगवान मेरा बागवान है… उनके बगीचे का, मैं किंग फ्लावर हूँ… सबको भी बनाना है… ओम् शान्ति!

गीत: भगवान की बगिया के…


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘मैं खुशबूदार फूल हूँ | I’m a fragrant flower’