योग कमेंटरी | बेहद स्थिति | Avyakt Murli Churnings 28-04-2019

योग कमेंटरी | बेहद स्थिति | Avyakt Murli Churnings 28-04-2019

यह देह बाबा की है… मैं इस देह-घर से भी बेघर… अशरीरी-निराकार आत्मा हूँ

साधन भी बाबा की सेवा के लिए है… मुझे इसे न्यारा बन use करना है… बाबा करा रहा है

मेरे संकल्प बेहद में… बोल निःस्वार्थ… सदा करावनहार करा रहे हैं, इसी रूहानी मस्ती में… मैं रमता योगी… उड़ता योगी हूँ

यह साधन सिर्फ़ एक विधि है… श्रेष्ठ तीव्र-पुरूषार्थ… और सेवा की वृद्धि के लिए

मैं मास्टर शान्ति सागर-सूर्य हूँ… सबको शान्ति-शक्ति का दान देते… बाबा से जुड़ाकर… सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनाता हूँ… ओम् शान्ति!


और योग कमेंटरी:

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नज़र से निहाल अर्थात क्या | Sakar Murli Churnings 29-04-2019

नज़र से निहाल अर्थात क्या | Sakar Murli Churnings 29-04-2019

1. बाबा हमारा बाप-टीचर-स्वामी-सतगुरु है, जो हमें ज्ञान की आँख दे निहाल अर्थात सद्गति कर देते, विश्व का मालिक बनाते… फिर जितना पवित्र आत्‍म-अभिमानी बन बाबा को याद करते उतना हम ऊंच पद पाएंगे, सचखण्ड के वर्से में… जितना हम याद-सेवा करते, बाबा भी हमें याद करते

2. बाबा अति-सुक्ष्म ज्योति-बिन्दु स्वरूप परम-पवित्र है, जिसकी याद-संग से हम भी पावन-निर्विकारी बनते… तो ऎसे शमा पर तो पूरा फिदा होना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि स्वयं भगवान् की नज़र हम पर है, तो हम भी सदा बाबा को देख-देख भरपूर होते रहे… तो स्वतः यह वाइब्रेशन सभी विघ्न नष्ट करते, सब को सहयोग देते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!

गीत: दिल कहे बाबा, तुम्हे देखता रहूं…

Giving peace & power to all | शान्ति की लहरें-किरणें बांटना | Avyakt Murli Churnings 28-04-2019

Giving peace & power to all | शान्ति की लहरें-किरणें बांटना | Avyakt Murli Churnings 28-04-2019

1. हम पूर्वज-पूज्य आत्माएं हैं, जिनके द्वारा सबको शान्ति-शक्ति मिलती (हम मास्टर शान्ति-सागर, शान्ति-सूर्य है), सब यही चाहते … तो मन्सा को ऎसे मजबूत करना है, क्योंकि मन के अनुभव ही मन तक पहुँचते, औरों को श्रेष्ठ बनने की प्रेरणा देते

2. बेहद के वैरागी अर्थात इस शरीर-घर से भी न्यारे, तो पुराने स्वभाव-संस्कार-साधन से स्वतः परे रहेंगे… सिर्फ़ निमित्त साधनो को मालिक-करावनहार-उड़ता योगी बन सेवा-पुरूषार्थ के लिए विधि बनाकर सिद्धि को प्राप्त करना है… फिर वशीभूत-परवश-परेशान नहीं होंगे, परन्तु सदा देह-भान (धरती), विकारों (अग्नि), साधनो के आकर्षण (बहाव) से ऊपर रहेंगे

3. हलचल में अलबेलापन (यह तो होता ही है, अभी तो समय है), वा आलस्य (कर रहे हैं, हो जाएँगा, कौन बना है) की चद्दर ओढ़ने के बजाए… सदा अचल बन सबको अपनी सेवा द्वारा शान्ति-शक्ति-उमंग दिलाते रहना है… हम समय-परिस्थिति से श्रेष्ठ है, तो सिर्फ उनके कारण तीव्र पुरूषार्थ करने के बजाए, हमें समय को समीप लाना है

4. हमें सिर्फ निमित्त बन स्नेह-पूर्ण सेवा-संदेश देना है, इससे स्नेह-सम्बन्ध बढ़ता, और बीज पड़ता आगे फलीभूत जरूर होगा (अर्थात सब अपना भाग्य अवश्य बनाएँगे, विदेश देश को जगाएगा), हमारा जमा तो होता ही है… अभी तो साधन भी सहज, जितना दिल से सेवा में busy रहते उतना मायाजीत रहते, आगे बढ़ने का वरदान तो हमें मिला ही हुआ है

5. हम सदा मिलन मेले में है (जहां भी हो), इसलिए सदा सर्व प्राप्तियां-सुख से सम्पन्न झूल रहे है… शान्ति की शक्ति सर्वश्रेष्ठ शक्ति है (जिससे ही सर्व शक्तियां-साइंस निकली है), इससे असम्भव भी सम्भव-सहज होता, तो इसके द्वारा सहजयोगी जरूर बनना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… समय से पहले ही सदा बाबा के मिलन मेले में सर्व-प्राप्ति-सम्पन्न बन, मास्टर शान्ति सागर-सूर्य बनके सबको शान्ति-शक्ति की अनुभुती कराते, सत्य प्राप्ति कि realization कराते रहे… बाबा से जुड़ाते सतयुग बनाते चले

ईश्वरीय सेवा करने की 108 विधियाँ | 108 ways of doing service

ईश्वरीय सेवा करने की 108 विधियाँ | 108 ways of doing service

पिछले रविवार की मुरली में बाबा ने कहा… सबमें विशेषताएं हैं, उन्हें सिर्फ कार्य में लगाना है, तो सहज सफलता मिल जाएंगी… तो आज आपको 108 सेवा-योग्य विशेषताएं भेज रहें हैं, इनमें से कोई एक द्वारा भी स्वयं और सर्व का कल्याण कर सकते … इन्हें प्रेम से स्वीकार करना जी!

मन्सा सेवा

वाचा सेवा

  • ज्ञान सुनाना, अनुभव सुनाना, निमन्त्रण देना, भाषण (कोर्स, मुरली, स्पेशल प्रोग्राम) करना, स्पीकर का इंट्रो देना
  • कमेंटरी द्वारा योग कराना

कर्मणा सेवा

  • स्टेज-माइक-म्यूजिक-लाइट वा audience सम्भालना… हॉल की सफाई, खुर्सी सेट करना
  • भोजन बनाना (रोटी, टोली बनाना-पैक करना, सब्जी काटना-बनाना)
  • टोली देना… कुछ समय गाड़ी देना, ड्राइव करना
  • मधुबन में यज्ञ-सेवा करना, गाइड बनना

सम्बन्ध-सम्पर्क से

  • किसी को ले आना (प्रोग्राम पे, सेन्टर वा मधुबन)
  • औरों को सेवा सिखाना, चान्स देना, आगे बढ़ाना

विशेषताओं द्वारा

  • कलाओं द्वारा (गाना, नाचना, कविता-गीत-लेख लिखना, रचनात्मकता)
  • कंप्यूटर सेवा (ग्राफिक डिजाइन, pamphlet बनाना, ईमेल, आदि)
  • सोशल मीडिया (WhatsApp, Facebook, YouTube, SMS) द्वारा अच्छे quotes, classes, songs, videos भेजना

और सेवाएं

  • अपना समय-विशेषताएं सेवा में ऑफर करना
  • मन से (नई युक्तियां निकालना, suggestion देना)
  • धन से (बड़े दिनों पर, प्रोग्राम के वक्त, हर महीने, आदि)

श्रेष्ठ जीवन द्वारा

  • श्रेष्ठ स्थिति-वाइब्रेशन-सन्तुष्टता द्वारा… हर्षितमुख चेहरे, शीतल दृष्टि, मीठे बोल द्वारा… सुखदाई सम्मान-पूर्वक व्यवहार, रॉयल चलन द्वारा
  • शान्त-चित्त कार्य करने के तरीके से, अन्तर्मुखता, हल्केपन, पवित्रता से… श्रेष्ठ उसूल-नियम-मर्यादाओं द्वारा… सैंपल, example, आदर्श बनने से
  • धारणाओं द्वारा (रोज़ ज्ञान सुनना, योग करना, भोजन साइलेंस में बाबा की याद में करना, शुध्द भोजन, कार्य पहले 1 मिनट साइलेंस, परिस्थितियों में एकरस-अचल-अडो़ल-सकारात्मक रहना)

सार

तो चलिए आज सारा दिन… निरन्तर सेवाधारी बन, हर पल मन्सा-वाचा-कर्मणा अपने को निमित्त-निर्माण बन सेवा में busy रखे… सिर्फ़ हमें अपना समय-विशेषताएं को सेवा में ऑफर करना है, फिर बाबा अपने समय पर जैसे चाहे use करें… हमें अपनी श्रेष्ठ योगयुक्त स्थिति द्वारा सदा शान्ति प्रेम आनंद का अनुभव करते और कराते, सतयुग स्थापन करने रहना है… ओम् शान्ति!

1) गीत: दानी बनो, वरदानी बनो…

2) गीत: तेरी वाणी शिव बाबा…

3) गीत: करते चलो सबका भला…

4) गीत: हम दुनिया नई बनाएँगे…

5) गीत: हम स्वर्ग धारा पर लाएंगे…


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The Joy of being a Trustee! | Sakar Murli Churnings 27-04-2019

The Joy of being a Trustee! | Sakar Murli Churnings 27-04-2019

1. हमें सम्पूर्ण सत्य मिल गया है, कैसे आत्मा ही सबकुछ करती, तो देह-सहित सबकुछ भूल अपने को आत्मा समझ निराकार जन्म-मरण-रहित सर्वशक्तिमान पतित-पावन बाबा को याद करना है, तो दैवीगुण-सम्पन्न पूज्य देवता विश्व-स्वर्ग का मालिक बन जाएँगे..

2. घर गृहस्थ में रहते सिर्फ़ ट्रस्टी हो रहना है… जब सबकुछ बाबा के हवाले किया है, तो देह से न्यारा बन शान्ति के सागर से सम्पूर्ण शान्ति-गुण-शक्तियां भी अवश्य लेनी है

3. इस संगमयुग पर भगवान् गीता द्वारा नई दुनिया रचते, हमारा यह जीवन हीरे-तुल्य है, भगवान् हमें पढ़ाते, हम सच्चे-सच्चे सत के संग में बैठे हैं!

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि भगवान् हमारे सभी बोज़ लेने लिए ऑफर करते, तो सबकुछ बुद्धि से उसे समर्पण कर निश्चिंत हो जाएँ… ऎसे हल्के बन योग-अभ्यास करते ईश्वरीय ज्ञान-गुण-शक्तियों से भरपूर-सम्पन्न बन… औरों को भी सम्पन्न बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | चाँद पर | Creative Commentary on Moon

योग कमेंटरी | चाँद पर | Creative Commentary on Moon

मुझे सम्पूर्ण चन्द्रमा समान… सोलह कला सम्पूर्ण बनना है… माया के ग्रहण से बिल्कुल मुक्त

सफेद चन्द्रमा की तरह… मैं सम्पूर्ण पवित्र… सबके जीवन को प्रकाशित करता… राह दिखाता हूँ

हज़ारों चन्द्रमा के समान सूक्ष्मवतन में… मैं चमकीली फरिश्ता ड्रेस में… प्रकाशमय बापदादा के सम्मुख हूँ

ज्ञान चन्द्रमा मुझे… शीतलता प्रदान कर रहे हैं… मैं उनके स्नेह में समा गया हूँ

मैं रूहानी चकोर हूँ… मेरे चाँद बाबा को देख… नाच उठा हूँ… ओम् शान्ति!

गीत: ये गगन का चाँद… (बहुत सुन्दर गीत, अस्मिता बहन द्वारा गाया हुआ)


और योग कमेंटरी:

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Making True Earnings | सच्ची कमाई | Sakar Murli Churnings 26-04-2019

Making True Earnings | सच्ची कमाई | Sakar Murli Churnings 26-04-2019

1. देह-भान छोड़ बाबा की याद से विकर्म विनाश हो खुशी का पारा चढ़ता, कर्मेंद्रीयां वश होती और शक्तिशाली विश्व का मालिक बनते (पूज्य भी)… साथ में ज्ञान-चिन्तन और सेवा (और बाबा की सर्चलाइट) भी है, इसलिए हमारी हर पल कमाई ही कमाई है

2. याद में ही माया विघ्न डालती… इसलिए सदा स्मृति रखनी है हमारा माशूक आया है हमें चड़ती कला में ले चल, शान्तिधाम-सुखधाम का मालिक बनाने… आत्मा भाई-भाई की दृष्टि पक्की करनी है, व्यर्थ बाते नहीं सुननी है

3. बाबा हमें अमरलोक, फूलों के बगीचे में ले चलते… तो दैवीगुण भी जरूर धारण करने है, औरों के गुण ही देखने है… श्रीमत पर सबकुछ सफल करना है, ब्रह्मा बाप समान

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमे ज्ञान मिला है कि संस्कार-कर्म ही साथ जाते, तो हर पल याद और सेवा में तत्पर रहते (लौकिक कार्य भी सेवा समझकर करते), हर पल रूहानी कमाई करे अर्थात सदा शान्ति प्रेम आनंद से भरपूर रह… औरों को भी सम्पन्न बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | मुरली क्या है

योग कमेंटरी | मुरली क्या है

मुरली है बाबा से बातेंबाबा से मिलन मनाना… परमात्म-प्रेम अनुभव करना

यही मात-पिता की पालना… प्यार-पुचकार… श्रेष्ठ मार्ग-दर्शन है

सुप्रीम टीचर की शिक्षा… सर्वश्रेष्ठ गाइड-लाइंस, डाइरेक्शन्स … सोर्स ऑफ इन्कम है

सतगुरू की श्रीमत… वरदान है… जिसके द्वारा मनमनाभव का महा-मन्त्र मुझे दिया है

साजन का प्रेम-पत्र… मीठी-मीठी बातें है… जो दिव्यगुणों से मुझे श्रृंगारती

खुदा दोस्त से संवाद… चिट-चैट है… जो कल्प-कल्‍पान्तर का सर्वश्रेष्ठ भाग्य बनाता

मुझे मुरली में सदा रेगुलर… पंचुअल… एकाग्र-चित्त रहना है… ओम् शान्ति!


और योग कमेंटरी:

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The victorious warrior! | Sakar Murli Churnings 25-04-2019

The victorious warrior! | Sakar Murli Churnings 25-04-2019

1. इस संगमयुग पर हम सर्वशक्तिमान बाप से योग द्वारा मायाजीत बन विश्व का मालिक बनते… हम फुलो का बगीचा, सतयुग दैवी राजधानी स्थापन करते हैं, अपने ही तन-मन-धन द्वारा

2. बाबा ने हमें ही सत्य ज्ञान दिया है, तो स्वदर्शन चक्रधारी बन बाबा की यादों में रहना है… औरों को भी समझाते रहना है योग्य टीचर बन, समय बहुत थोड़ा है, सेवा तो बहुत है… मुख्य है याद, चलते-फिरते भी

3. सदा रूहानी नशे में रहना है, हम पद्मापद्म भाग्यशाली है, स्वयं भगवान् हमें पढ़ाते… जितना अभी करेंगे उसका सौगुणा मिलता, तो फ्राकदिली से सेवा करते रहना है, मैं-पन से मुक्त हो

सार

तो चलिए आज सारा दिन… मैं शिव-शक्ति हूँ, सदा इसी स्मृति में रह सर्वशक्तिमान बाबा से योग लगाए सदा शान्ति, प्रेम, आनंद से भरपूर रहे… औरों का भी कल्याण करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | बाबा है ज्ञान सूर्य | Remembering the Supreme Sun

योग कमेंटरी | बाबा है ज्ञान सूर्य | Remembering the Supreme Sun

बाबा ज्ञान-सूर्य… पवित्रता के सूर्य है… उनकी पवित्रता की किरणें चारों ओर फैल… सारे परमधाम को जगमगा रही है

बाबा सर्वशक्तिमान… ऑलमाइटी अथॉरिटी है… उनके संग रहकार… मैं भी सशक्त हो गया हूँ

मैं मास्टर ज्ञान-सूर्य हूँ… मुझसे चारों और शक्तिशाली पवित्र किरणें फैल… वातावरण को शुध्द-सतोगुणी बना रही हैं

मेरे जीवन का अन्धकार… दुःख-दर्द सब समाप्त हो गया है… प्रभु प्रेम से मेरा जहां रोशन है

औरों के भी जीवन को प्रकाशित कर… सुखीश्रेष्ठ बनाते… सतयुग स्थापन करना है… ओम् शान्ति!


और योग कमेंटरी:

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