The immensely fortunate student! | Sakar Murli Churnings 24-04-2019

The immensely fortunate student! | Sakar Murli Churnings 24-04-2019

1. इस स्कूल-पाठशाला-विद्यालय में हम आत्माओं को स्वयं परमपिता परमात्मा बेहद का बाप भगवान् राजयोग की रूहानी पढ़ाई पढ़ाते

2. हमारा यह जीवन हीरे-तुल्य देवताओं से भी उत्तम है, अभी हम ईश्वरीय सन्तान वा ईश्वरीय परिवार के है, आस्तिक है… स्वयं बाबा हमारी पालना-पढ़ाई कर गुल-गुल बनाएं साथ ले जाते

3. हमें सिर्फ बाबा को याद करना है, माया तो खींचती रहेंगी, हमें अपनी धारणाओं में पक्का रह उन्नति करते रहना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि स्वयं भगवान् ने हमें अपनी ईश्वरीय विद्यालय में लिया है, तो इसी पद्मपद्म भाग्य को स्मृति में रख सदा ज्ञान-योग द्वारा श्रेष्ठ स्थिति में स्थित दिव्यगुण समपन्न बन… सर्व को उमंग-उत्साह दिलाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

कैसा होगा सतयुग? (156 बातें) | 156 points describing Satyuga

कैसा होगा सतयुग? (156 बातें) | 156 points describing Satyuga

आज बाबा ने धारणा में कहा सतयुग में क्या-क्या होगा उस पर विचार करो, और स्वयं को ऎसा चरित्रवान बनाओ… तो आज आपको सतयुग की 156 बातें भेज रहे हैं, जो बाबा ने मुरलीयों में बताई है… इन्हे बहुत उमंग-उत्साह से, बाबा की याद में स्वीकार करना जी!

हम कैसे होंगे?

  • सर्वगुण सम्पन्न, सोलह कला सम्पूर्ण, सम्पूर्ण पवित्र (निर्विकारी), डबल अहिंसक (अहिंसा परमोधर्म), मर्यादा पुरुषोत्तम, सच्चे वैष्णव
  • पावन, सतोप्रधान, दिव्य, सतोगुणी (पवित्र, शान्ति, प्रेम, सुख, आनंद, शक्तियों से भरपूर)

हमारा भाग्य कैसा होगा?

  • डबल ताजधारी (पवित्रता का ताज और रतन-जड़ित ताज)… हर चीज़ नई
  • तन.. कंचन काया, सम्पूर्ण स्वस्थ (निरोगी), अकाले मृत्यु नहीं, कोई तकलीफ नहीं, बहुत बहुत सुन्दर (नैचुरल beauty)
  • मन.. शान्त, सन्तुष्ट, खुश
  • धन.. अनगिनत, अथाह, बहुत जमीन, बड़े बड़े बगीचे, सोने के महल, हिरों की जड़त, हरेक का पुष्पक विमान (जो संकल्प से चलता, कोई एक्सिडेंट नहीं), कोई कमी नहीं… हर स्थान-अवसर के वस्त्र अलग, बिल्कुल हल्के जेवर… रेत में भी सोना, हिरों के पत्थर
  • सम्बन्ध.. मीठे, पवित्र, स्नेह-समपन्न
  • सम्पर्क… हल्के, सन्तुष्टता-पूर्वक

समाज कैसा होगा?

सतयुग के विभिन्न नाम | Names of Paradise, Heaven | Golden Age names image
  • समाज… 9 लाख सूर्यवंशी देवताएं (2 करोड़ तक बढ़ेंगे, सतयुग अंत तक), 1 लक्ष्‍मी-नारायण का अटल-अखण्ड-अद्वैत राज्य (दिल्ली में, यमुना किनारे), 1 आदि सनातन देवी-देवता धर्म, 1 भाषा, 1 खण्ड, सम्पूर्ण एकता
  • 1 बच्चा-1 बच्ची, योगबल की पैदाइश, गर्भ महल, जन्‍मते ही गोल्डन स्पून इन माउथ, दास-दासियों द्वारा फर्स्ट-क्लास पालना… स्कूल में कविता, गीत, संगीत, चित्र, कलाओं की पढ़ाई
  • 1250 साल में 8 जन्म, लगभग 150 वर्ष की आयु

प्रकृति कैसी होगी?

  • प्रकृति.. सतोप्रधान, सुखदाई, लो & ऑर्डर, कोई उपद्रव नहीं
  • सदा बहारी मौसम, न ठंडी न गर्मी, सुगन्धित हवा… स्वच्छ-अहिंसक-फ़र्स्टक्लास पशु… साफ-सुगंधित नदियां… संगीत करने वाले पेड़-पंछी
  • धरती बहुत उपजाऊ, 56 प्रकार का भोजन, फल-फूल की सब्जियां, खाने-पीने के फल अलग (थोड़ा दबाने से रस मिलेगा)

सतयुग के भिन्न-भिन्न नाम

स्वर्ग, वैकुण्ठ, Heaven, Golden Age, जन्नत… और 23 नाम

क्या नही होगा?

  • लाइट-फैन की आवश्यकता नहीं… कोई वज़ीर नहीं
  • कोर्ट, जज, वकील, जेल, पुलिस… हॉस्पिटल, डॉक्टर, दवाई… सेना, हथियार, युद्ध… अपवित्रता, विकार, नकारात्मकता, व्यर्थ, दुःख आदि
  • मन्दिर, पूजा, भक्ति

सतयुग में पद कौन से होंगे? (सबसे श्रेष्ठ पद पहले)

महाराजा, राजा, रॉयल फ़ैमिली, साहूकार प्रजा, प्रजा, राजा के दास-दासी, प्रजा के दास दासी, चण्डाल

सार

बाबा हमें कितना श्रेष्ठ, ऊंच, सुखदाई वर्सा दे रहे हैं … तो चलिए आज सारा दिन, इसी खुशी के उमंग उत्साह द्वारा अपने ज्ञान-योग के पुरूषार्थ को ऎसा तीव्र बनाए, कि हम सर्वश्रेष्ठ महाराजा-महारानी पद प्राप्त कर ले… औरों को भी श्रेष्ठ पद प्राप्त कराते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

1) गीत: जगमग हो जगमग…

2) गीत: जीवन गुणों से पूर्ण होगा...

3) गीत: सोने की दुनिया होगी…


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Coming in the rosary of victory | Sakar Murli Churnings 23-02-2019

Coming in the rosary of victory | Sakar Murli Churnings 23-02-2019

1. हमें सम्पूर्ण ज्ञान मिला है, कैसे सबको मुक्ति में जाकर फिर जीवनमुक्ति में आना है, तो ऊंच पद जरूर प्राप्त करना है… इसके लिए और सब बातों से बुद्धि हटाएं सिर्फ एक सर्वशक्तिमान पतित-पावन बाप को याद करना है, तो पावन-सम्पूर्ण-सतोप्रधान बन जाएँगे (सभी मालाओं में आगे रहेंगे)… दिव्यगुण भी चाहिए, अपना पोतामेल जरूर रखना है, रूहानी व्यापारी होने के नाते… सेवा भी अवश्यय करनी है

2. सतयुग में सदा बहारी मौसम, सोने के बर्तन, सबकुछ स्वच्छ-सुगन्धित होगा… फिर भी जो सतयुग में होगा, वह तब देखेंगे, अभी हमें याद कर सतोप्रधान बनना है, बस!

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा ने अब भी हमारे लिए विजय माला की कुछ सीट खाली रखी है… तो ज्ञान-योग के तीव्र पुरूषार्थ की ऎसी श्रेष्ठ दौड़ी लगाए की हम मायाजीत बन माला का श्रेष्ठ मणका बन जाएँ… औरों को भी विजयी बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | प्रकृति को पावन वाइब्रेशन देने | Giving pure vibrations to Nature

योग कमेंटरी | प्रकृति को पावन वाइब्रेशन देने | Giving pure vibrations to Nature image

योग कमेंटरी | प्रकृति को पावन वाइब्रेशन देने | Giving pure vibrations to Nature

प्रकृति ने हज़ारों साल मेरी पालना की है… उसका बहुत शुक्रिया है… अभी मुझे उनकी पालना करनी है… प्रकृति-पति बनकर

मैं परम-पवित्र आत्मा… पवित्रता के सागर की सन्तान हूँ… बाबा की पवित्रता की किरणें… मुझमे समा रही हैं

मुझसे चारों ओर पवित्रता की किरणें फैल रही है… वातावरण बहुत शुध्द… सतोगुणी, दिव्य बन रहा है

यह प्रकंपन प्रकृति को पहुँच… पांचों तत्वों को शान्त, शीतल… पावन, सतोप्रधान बना रहे हैं

यही पावन प्रकृति… स्वर्ग में सम्पूर्ण सुख देगी… कल्प-कल्प हमारी सेवा करेंगी… वाह प्रकृति वाह!… ओम् शान्ति!


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The True Understanding | सत्य समझ | Sakar Murli Churnings 22-04-2019

The True Understanding | सत्य समझ | Sakar Murli Churnings 22-04-2019

1. इस पुरुषोतम संगमयुग पर हमें सत्य समझ मिली है, कि हमें कौन पढ़ाते, उनकी ही मत से हम श्रेष्ठ देवता बनते… तो सदा उस सत के संग द्वारा, सतयुगी फूल बनते रहना है… यह बेहद की पढ़ाई, विश्व का मालिक बनाने वाली है

2. माया तो आती रहेंगी याद रोकने, हमें श्रेष्ठ पुरूषार्थ करते रहना है… सदा स्मृति रहे, कि यह अंतिम जन्म है (विनाश सामने खड़ा है), शान्तिधाम जाना है (तो पावन जरूर बनना है), और सुखधाम जाना है (दिव्यगुण धारण करने है)

3. यह वही गीता एपिसोड है, जबकि भगवान् आकर हमें मायाजीत सो जगतजीत बनाते… तो उनकी श्रीमत पर सच्चा योगी अवश्य बनना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमें स्वयं-बाबा-समय की सत्य पहचान मिल गई है… तो माया के भी नोलेजफूल बन, सदा भिन्न-भिन्न युक्तियों द्वारा योगयुक्त रह अपने योग के चार्ट को बढ़ाते जाएं… तो स्वतः हम सदा खुश रह, सबको श्रेष्ठ-सुखी बनाते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | ज्ञान सूर्य-चन्द्रमा से मिलन | Avyakt Murli Churnings 21-04-2019

योग कमेंटरी | ज्ञान सूर्य-चन्द्रमा से मिलन | Avyakt Murli Churnings 21-04-2019

सूक्ष्मवतन में… ज्ञान-सूर्य बाबा… ज्ञान-चन्द्रमा में प्रवेश कर… दोनों मुझे देख रहे हैं

बहुत प्यार-भरी… शीतल… मीठी दृष्टि दे रहे हैं

मुझे शक्ति का वरदान, स्नेह का वरदान देकर… लवली, लाइट-हाऊस… सफलता का सितारा बना दिया है

मैं बापदादा से मिलन मनाते… बहुत हल्की, निश्चिंत… आनंद-मई स्थिति में स्थित हूँ

सब को सफलता का वरदान देती… सुखशान्ति सम्पन्न बनाती हूँ… बाबा ने मुझे विश्व कल्याणकारी बना दिया है… ओम् शान्ति!

गीत: तुम तो यहीं कहीं बाबा…


और योग कमेंटरी:

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Becoming a star of success | सफलता का सितारा बनने की सहज विधि | Avyakt Murli Churnings 21-04-2019

Becoming a star of success | सफलता का सितारा बनने की सहज विधि | Avyakt Murli Churnings 21-04-2019 image

Becoming a star of success | सफलता का सितारा बनने की सहज विधि | Avyakt Murli Churnings 21-04-2019

1. इस मधुबन-मण्डल में हम ज्ञान-सितारों को दोनों ज्ञान सूर्य-चन्द्रमा अर्थात शक्ति-स्नेह के वरदान मिले हैं, जिससे सहज लवली वा लाइट-हाउस, सफलता-स्वरूप सफलता के सितारे बन गए हैं… सबका लक्ष श्रेष्ठ रहता, सिर्फ स्वार्थ के कारण सफलता नहीं मिलती (और कलह-क्लेश, सब विकार आते), इसलिए स्वार्थ के बदले सेवा-भाव लाना है

2. वर्तमान स्मृति और भविष्य राजतिलक के साथ हमें मिला है, फरिश्ता स्वरूप का सम्पन्न-समान तिलकसर्व विशेषताओं की मणियों से सजा ताज, और डबल लाइट तख्त… बाबा भी स्नेह-शक्ति-वरदान की मालाएँ हमें पहनाते, हम भी याद-प्यार-स्नेह की मालाएँ वा उमंग-उत्साह के पुष्प उनको चढ़ाते, इसी का यादगार भक्ति में चला आया है

3. हम शक्तिशाली आत्माओं ने स्व-अध्ययन और सेवा द्वारा वर्तमान और भविष्य जन्म-जन्मान्तर का श्रेष्ठ भाग्य बना लिया है… सदा साथ रहने के वरदानी होते, सब को ऎसा वरदानी बनाना है, कैसे मोहब्बत द्वारा मेहनत से मुक्त रहना… यही सेवा विशेष लॉटरी है, जिनका सेवा से जन्म-पालना मिली वा आगे बढ़ रहे हैं, उन्हेंं इसका रिटर्न-सहयोग अवश्य मिलता है

4. ऊंच ते ऊंच बाबा के साथ पार्ट बजाने वाले (और ऊंच युग के रहवासी होते), मैं विशेष पार्टधारी हूँ इसी स्मृति में रहना है… तो स्वतः हर बॉल-कर्म विशेष होगा, औरों को भी ऎसे विशेष बनने की आकर्षण होगी… सिर्फ़ जो विशेषताएं मिली है उन्हें कार्य में लगाना है

5. मन के वश होने के बजाए, एकाग्रता की शक्ति द्वारा मालिक बनना है… तो स्वतः फरिश्ता स्वरूप की अनुभुती, एक बाबा दूसरा ना कोई, निर्विघ्न स्थिति और सर्व के प्रति स्नेह-कल्याण-सम्मान की वृत्ति रहेंगी… आगे चल ऎसा सहज फरिश्ता स्वरूप में स्थित रहेंगे सबकुछ करते, कि खुद भी देह भान से न्यारे उड़ते औरों को भी उड़ाते रहेंगे

वरदान-स्लोगन!

सेन्ट अर्थात व्यर्थ से इनोसेंट, इसलिए सदा सत्यता-यथार्थता-दिव्यता से सम्पन्न रहते… ऎसे ब्रह्मा बाप को फॉलो करने से फ़र्स्ट डिविजन में आ जाएँगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा ज्ञान सूर्य-चन्द्रमा के साथ एकाग्रता-चित्त रह वरदानों से भरपूर बन, हर पल विशेष कर्म करते सब को विशेष बनाते रहें… फरिश्ता बन, फरिश्ता बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | सुख का अनुभव

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योग कमेंटरी | सुख का अनुभव

मैं सुख-स्वरूप आत्मा… सुख के सागर की सन्तान हूँ… दुःख की लहर भी मुझे छू नहीं सकती

बाबा ने मेरे सर्व भण्डारे… ज्ञान-गुण-शक्तियों के ख़ज़ाने से सम्पन्न कर दिए हैं… सुखों से झोली भरकर… तृप्त, सन्तुष्ट कर दिया है

मुझे पवित्र-योगी बनाकर… सुख-शान्ति से भरपूर कर दिया है… जन्म-जनमान्तर के लिए

सभी सुखी हो… सबका कल्याण हो… सब आगे बढ़े

मैं सुखदेव हूँ… सबको सुख बांटता… सुखी-स्वर्णिम संसार बनाने के निमित्त बना हूँ… ओम् शान्ति!


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The power of Shrimat! | Sakar Murli Churnings 20-04-2019

The power of Shrimat! | Sakar Murli Churnings 20-04-2019

1. इस पुरुषोत्तम संगमयुग पर ईश्वरीय मत मिलती, जिससे सम्पूर्ण सुख-हेल्थ-वेल्थ-हैपीनेस की दुनिया (स्वर्ग शिवालय) स्थापन हो जाती… जबकि बाबा आएं हैं हमें रावण से छुड़ाने, तो उस पवित्रता-सुख-शांति के सागर को याद कर सतोप्रधान जरूर बनना है

2. हम प्रजापिता ब्रह्माकुमार-कुमारीयां शिव शक्ति है, जो विश्व में दैवी स्वराज्य स्थापन करते (बृहस्पति की दशा)… तो भाई-भाई की दृष्टि और बाबा की निरन्तर याद द्वारा विकल्प-जीत अवश्य बनना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमें सर्वश्रेष्ठ ईश्वरीय मत मिली है, तो उसी अनुसार अपनी दिनचर्या को सेट कर, सदा सुरक्षित श्रेष्ठ स्थिति का अनुभव करते, हर पल उन्नति को पाते रहे… औरों को भी आगे बढ़ाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

Remaining in the Unlimited | बेहद में रहना | Sakar Murli Churnings 19-04-2019

Remaining in the Unlimited | बेहद में रहना | Sakar Murli Churnings 19-04-2019 image

Remaining in the Unlimited | बेहद में रहना | Sakar Murli Churnings 19-04-2019

1. लौकिक में भी नौकरी के साथ पढ़ाई उठाते है स्व-उन्नति अर्थ, ऎसे ही बेहद की उन्नति लिए बेहद की पढ़ाई-श्रीमत उठानी है… वही हमारे साथ आएँगा, आगे चल सब समझेंगे…

2. जो बाप हमें इतना प्यार से पढ़ाते, पालकों पर बिठाकर साथ ले जाते हैं, क्या से क्या सुखधाम, विश्व का मालिक बनाते… तो ऊंच पद जरूर प्राप्त करना है

3. अपने को आत्मा समझ औरों को भी आत्मा देखने से… बुरे ख्यालात, नाम-रूप से बच जाएंगे… यही मेहनत है विश्व का मालिक बनने की

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बेहद बाप के बेहद बच्चे होते, एसी श्रेष्ठ बेहद की पढ़ाई-उन्नति करे, कि सदा श्रेष्ठ स्थिति में स्थित बेहद प्रालब्ध-बादशाही के अधिकारी बन जाएँ… औरों को भी बेहद सुख देने के निमित्त बन, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!