योग कमेंटरी | बाबा से दृष्टि लेते हुए | Taking drishti

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योग कमेंटरी | बाबा से दृष्टि लेते हुए | Taking drishti

बाबा मुझे दृष्टि दे रहे हैं… बहुत प्यार-भरी, मीठी… शक्तिशाली… आत्मिक दृष्टि

बाबा सदा मेरी विशेषताएं देखते… जाने क्या देखा मुझमे… जो मुझे अपना बनाकर, पद्मपद्म भाग्यशाली बना दिया है

मुझमे अनोखी शक्ति भर रही है… मैं बिल्कुल हल्किशान्ति, प्रेम, आनंद से भरपूर हो गयी हूँ

मैं बाबा का अनन्य रत्न हूँ… बाबा की दृष्टि सदा मुझ पर है… मैं उनकी छत्रछाया में, सदा सुरक्षित हूँ

सबकुछ मुझपर लुटाने वाले बाबा, मुझे देख रहे हैं… मुझे उनकी आशाओं को पूर्ण कर… बाप समान बनना है

बाबा से दृष्टि ले… सारे विश्व को दृष्टि अर्थात श्रेष्ठ वाइब्रेशन देने है… सबकी विशेषताएं देखते, आगे बढ़ाना है… ओम् शान्ति!

गीत: आप दृष्टि यूँ ही देते रहो बाबा…


और योग कमेंटरी:

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Making this Gita episode successful | Sakar Murli Churnings 18-02-2019

Making this Gita episode successful | Sakar Murli Churnings 18-02-2019

1. भगवान् ने जब 5000 साल पहले राजयोग सिखाया था तब कलियुग का अंत था फिर आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना हुई थी… अब वही संगमयुग चल रहा है, हमें सिर्फ पवित्र-ज्ञानी-योगी बनना है, तो जगतजीत बन जाएँगे

2. प्रभात फेरी में लक्ष्मी-नारायण की ट्रांसलाइट और सीढ़ी के चित्र पर सेवा करनी है… भगवान् हमें राजयोग सिखाते, तो पूरा निश्चय वा संग की संभाल चाहिए, सदा बाबा के संग रहने से पार हो जाएंगे

3. अब समय बहुत थोड़ा है, यह sapling वृद्धि को पाता रहेंगा, कल्प पहले वाले आते रहेंगे… हमें अपने को देख श्रीमत पर ज्ञान-योग के अभ्यास द्वारा श्रेष्ठ भाग्य जरूर बनाना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि गीता एपिसोड चल रहा है, तो भगवान् को अपना साथी बनाकर उनकी मत पर ज्ञान-योग के अस्त्र-शस्त्र से भरपूर बन माया-रावण पर विजयी बन स्वराज्य अधिकारी सो विश्व राज्य अधिकारी बन जाएँ… औरों को भी विजयी बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

Understanding the subject of Gyan

Understanding the subject of Gyan

Our spiritual study can be divided into 4 subjects:

  • Spiritual knowledge (Gyan)
  • Meditation (Yog)
  • Inculcation of divine virtues (Dharna)
  • Service (Seva)

Hence today, let’s explore the 1st subject Gyan!

What is Gyan?

Gyan means understanding of the truth, which can be summarized as… The knowledge of:

  • A = Atma i.e., soul
  • B = Baba i.e., our Supreme Father, the Supreme Soul
  • C = Cycle of Time
  • D = Drama

A = Atma i.e., soul

The knowledge of the soul can be summarized, in essence, as:

  • The energy which uses the body, Master of this body
  • A tiny point of light, situated in the centre of the forehead
  • The energy which thinks, decides, & comes into action through the body
  • Originally full of knowledge, purity, peace, love, happiness, bliss & power
  • Originally a resident of soul world, having come down to play it’s imperishable part in this world drama
  • Can be best understood with the example of Car & Driver, denoting Body & Soul respectively!

B = Baba i.e., our Supreme Father, the Supreme Soul

The knowledge of the Supreme Soul, can be summarized as:

  • A tiny point of light
  • Resident of soul world
  • Ocean of All Virtues (Knowledge, Purity, Peace, Love, Happiness, Bliss) & Powers
  • Comes at the end of Kaliyuga in the old body of Prajapita Brahma, transforms humans to deities (& thereby Kaliyuga to Satyuga) by sharing spiritual knowledge & teaching Rajyoga Meditation
  • This small phase of time (of God’s descent) between end of Kaliyuga & start of Satyuga, is called the Kalyankari Purushottam Sangam-yug
  • Name is Shiv (means point, peace & benefactor)… Not to be confused with Shankar, who’s always shown as a different entity meditating on the Shiv Ling!

C = Cycle

The world time cycle consists of 4 (or 5) phases.. Satyuga, Tretayuga, Dwaparyug, Kaliyuga (& this small Sangamyug) :

  • In Satyuga,
    • Souls are 100% charged, body is perfectly healthy, mind always happy, wealth limitless, relations sweet, nature perfect & happiness-giving
    • There’s one religion language & kingdom, ruled by Lakshmi Narayana as emperor & empress
  • In Tretayuga,
    • There’s a very slight decline.. In other words, souls are now 14 celestial degrees complete (as compared to Satyuga when souls are 16 celestial degrees complete)
  • In Dwaparyug,
    • Souls start falling into body-consciousness, hence vices (lust, anger, greed, attachment, ego), hence sorrow
    • And when souls experience sorrow, they remember their Supreme Father.. Hence, we start remembering God, build temples, etc
    • Our holy fathers (Abraham, Gautam Buddha, Mahavir, Jesus Christ, Mohammed, Shankaracharya, etc) come & give the message of humanity.. Later takes the form of different religions / paths
    • Saints at this time write down all the scriptures (Ramayan, Mahabharat, Shrimad Bhagavad Gita, etc)
  • In Kaliyuga,
    • Souls go deeper into body-consciousness, vices & sorrow
    • Religion & governments become weak.. Soul’s battery becomes almost negligible
    • Science becomes very powerful.. Souls become almost completely dependent on matter
  • In Sangamyug,
    • As promised, God comes & starts sharing His spiritual knowledge, establishing this Brahma Kumaris World Spiritual University
    • Through spiritual efforts, innumerable souls get transformed from humans to deities
    • In the end, destruction (i.e., transformation) of the old world through nuclear missiles, natural calamities & civil wars
    • Establishment of the New Golden Aged World

D = Drama

  • This cycle of time keeps repeating infinitely… i.e., Satyuga becomes Kaliyuga, then Sangamyug, then again Satyuga & so on!
  • Every moment & scene of the world drama repeats ‘as it is’… And every scene is accurate & beneficial
  • Every soul’s role in this world drama is fixed, which keeps repeating

Excelling in the subject of Gyan

The best practices for excelling in the subject of Gyan are… A daily practice of:

  • Listening to spiritual knowledge (i.e., the Murli class, God’s direct elevated versions) with attention
  • Revising & Churning on the spiritual knowledge heard (vichar sagar manthan)
  • Implementing the knowledge, in meditation (Yog) & in practical life (Dharna)

Later, we’ll explore the subjects of Yog, Dharna & Seva in depth!

Om Shanti!

Accepting the Guarantee | Sakar Murli Churnings 17-04-2019

Accepting the Guarantee | Sakar Murli Churnings 17-04-2019

1. इस पुरुषोत्तम संगमयुग पर समझ मिली है, कैसे सुबह हम अमीर थे अब फकीर बनें है, अब फिर अमीर स्वर्गवासी बनने लिए सिर्फ़ है मन्मनाभव (सर्वशक्तिमान बाप से योग, बाबा से सर्व सम्बन्ध) और मध्याजीभव (दिव्यगुणों की धारणा, स्वयं की चेकिंग, और ज्ञान-योग में रेग्युलर रहना है संग से बचकर)

2. बाबा की मत अनुसार और सब तरफ से बुद्धि हटाए एक बाबा में लगानी है, तो सम्पन्न बन औरों को भी दे पाएंगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि स्वयं भगवान् ने हमें देवता बनने की guarantee दी है, तो इसे use कर ज्ञान-योग की ऎसी तीव्र दौड़ी लगाए… कि हम सर्वश्रेष्ठ पद के अधिकारी सदा श्रेष्ठ स्थिति में स्थित दिव्यगुण-सम्पन्न बन… औरों के जीवन को भी श्रेष्ठ-सुन्दर बनाते, सतयुग बनाते चलेंगे… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | Eating with God | बाबा के साथ भोजन

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योग कमेंटरी | Eating with God | बाबा के साथ भोजन

यह ब्रह्मा भोजन है… शिवबाबा के भण्डारे का भोजन… मुझे तन-मन से सम्पूर्ण स्वस्थ करेगा

मैं बाबा की याद में रह… भोजन को दृष्टि दे रहा हूँ… बाबा की पवित्रता की किरणें इसमें समा रही है… भोजन सम्पूर्ण शुध्द-शक्तिशाली बन गया है

मैं मेरे बाबा के साथ भोजन पर बैठी हूँ… मैं बाबा को खिला रही हूँ… बाबा मुझे खिला रहे हैं

इस शरीर (गाड़ी) को पेट्रोल मिल रहा है… मैं इस बाबा के शरीर को खिला रही हूँ… उपराम वृत्ति से… बाबा की याद में

भोजन शरीर को शक्ति देता… बाबा की याद मुझ आत्मा को सशक्त करती… मैं तन-मन से स्वस्थ हो रही हूँ… ओम् शान्ति!

गीत: तेरी याद का अमृत…

Beautiful 4-minute visualisation on offering Bhog to Baba, in Sheilu Behn’s voice:


और योग कमेंटरी:

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The safety of Shrimat! | Sakar Murli Churnings 16-04-2019

The safety of Shrimat! | Sakar Murli Churnings 16-04-2019

यह वानप्रस्थ का समय है, जितना अपने को आत्मा समझ बाबा को याद करते, सतोप्रधान बनते जाते… माया तो अन्त तक आएंगी, इसलिए सदा श्रीमत पर चलते विजयी बनना है, तो हमारा पद भी ऊंचा हो जाएँगा

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा के श्रीमत रूपी हाथ को सदा साथ रख, सदा निश्चिंत रह नाचते-कूदते जीव न के हर सीन क्रॉस करते रहे… हर पल बाबा की यादोंं में उन्नति करते, सदा खुश दिव्यगुण-सम्पन्न बन… सबको आप समान श्रेष्ठ बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

बाबा की याद से 134 प्राप्तियां | 134 Benefits of remembering Baba

बाबा की याद से 134 प्राप्तियां | 134 Benefits of remembering Baba

प्राण-प्यारे बाबा की याद हम सभी ब्राह्मण बच्चों का जियदान है, जिससे हम सदा अतिन्द्रीय सुख के झूले में झूलते, परिस्थितियों का सहज सामना कर पाते… तो आज आपको बाबा की याद से 134 प्राप्तियां भेज रहे हैं, आपकी याद की यात्रा को और सुखदाई और तीव्र बनाने… इन्हें बहुत रूहानी नशे से बाबा की याद में स्वीकार करना जी!

सर्वोत्तम प्राप्ति!

  • पवित्र-पावन सतोप्रधान बनते, बैट्री चार्ज होती… दिव्य बनते, सदा श्रेष्ठ स्थिति रहती
  • उड़ती कला के अनुभवी अर्थात सदा शान्ति प्रेम आनंद, वास्तविक खुशी, अतिन्द्रीय सुख के अनुभवी बनते… तृप्त-सन्तुष्ट होते… रूहानी नशे में रहते
  • बाप-समान, सम्पन्न-सम्पूर्ण, अव्यक्त-फरिश्ता बनते… पूज्य देवता बनते, श्रेष्ठ भाग्य बनता, रूहानी कमाई जमा होती, पद ऊंचा बनता
  • निरोगी होते, आयु बढ़ती… एकरस-अचल-अडो़ल रहते
  • श्रीमत पालन होती, फॉलो फादर होता… आज्ञाकारी, वफादार, फरमानवरदार, सपूत, ईमानदार, सच्चे बच्चे बनते… अन्त में साक्षात्कार होते

श्रेष्ठ, सहज, सुखदाई जीवन!

  • बाबा का प्यार-साथ-मिलन महसूस होता… उनकी आशीर्वाद-मदद-शक्ति-छत्रछाया अनुभव होती… वह जिम्मेवार हो जाता, हमारे सोचने का काम भी वही करता… अकेला-पन, भय से मुक्त रहते
  • देह-भान से न्यारे, मन शान्त, बुद्धि स्थिर, संस्कार परिवर्तन-शीतल होते… स्वराज्य अधिकारी बनते
  • जीवन आसान बनता, विकास होता… एकाग्रता, कार्य-क्षमता, कार्य-रचनात्मकता, कार्य-सन्तुष्टता बढ़ती… सम्बन्ध अच्छे बनते, सम्पर्क अलौकिक
  • पास्ट मर्ज होता, भविष्य निश्चिंत, वर्तमान सुन्दर बनता… समस्या हल्की हो जाती, परिस्थितियों का सामना सहज, कर्मभोग पर विजयी बनते, विघ्न-विनाशक, समाधान-स्वरूप बनते, आगे विकर्म से बचते

ब्राह्मण जीवन में उन्नति

  • ज्ञान गहराई से समझ आता, मुरली में बहुत आनंद आता… अनुभव मिलते, निश्चय-बुद्धि बनते, समर्पण-भाव जाग्रूत होता
  • देही-अभिमानी, आत्म-अभिमानी, अशरीरी, विदेही बनना सहज… याद से याद मिलती, करन्ट मिलती… ज्वालामुखी तपस्या, और शक्तिशाली योग, बीजरूप स्थिति का अनुभव कर सकते… बाबा के गले का हार बनते, विजय माला में आते
  • धारणा-मूर्त, हर्षितमुख चेहरा, शीतल दृष्टि रहती… अमृतवेला सफल होता… भोजन को श्रेष्ठ वाइब्रेशन मिलते… नींद अच्छी-गहरी आती, कम घंटे में… स्वप्न शान्त-शुध्द आते
  • प्रकृति को पवित्र वाइब्रेशन मिलते, शुध्द वायुमण्डल बनता, मन्सा सेवा कर सकते… वाणी में जौहर भरता, कथनी-करनी एक समान बनती… औरों को अनुभव करा सकते, आप समान योगी बना सकते

पुराना-पन समाप्त!

  • विकर्म विनाश, पाप कट, कीचड़ा समाप्त, स्वच्छ-साफ होते
  • कर्मातीत, मायाजीत, विकर्माजीत, विकार-जीत (काम-जीत, क्रोध-जीत, लोभ-जीत, मोह-जीत, अहंकार-जीत)
  • व्यर्थ-जीत, फीलिंग-प्रूफ, रोना-प्रूफ, प्रभाव-मुक्त साक्षी-दृष्टा रहते

उपराम!

  • देह-स्मृति, देहधारी-याद, वस्तु-आकर्षण, दुनियावी-बातें सब से… सहज न्यारा, उपराम, अनासक्त, इच्छा-मात्रम-अविद्या बन सकते
  • वैराग्य, त्याग सहज हो जाता

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा ने हमें अपना सत्य परिचय दे दिया है, तो अपनी दिनचर्या के हर पहलू में बाबा को बहुत प्रेम से याद करते रहे… इससे स्थिति सदा श्रेष्ठ रह, हम सदाकाल का श्रेष्ठ भाग्य बनाते रहेंगे… औरों को भी बाबा से जुड़ाते, उन्हें भी सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनाते, हम सतयुग बनाते चलेेंगे… ओम् शान्ति!

https://youtu.be/gTPsBQnAeK0

1) गीत: तुम्हारी याद बाबा एक…

2) गीत: एक तेरी याद में बाबा…

3) गीत: यादें तुम्हारी बाबा…

4) गीत: याद तुम्हारी इतनी प्यारी…


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Our wonderful spiritual university! | Sakar Murli Churnings 15-04-2019

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1. जबकि सब पतित-पापी-दु:खी बन गए हैं, बाबा सबकी सद्गति कर वापिस ले जाते, तो ऎसे बाबा को तो कितना याद करना चाहिए… जिससे हम नई दुनिया के मालिक देवी-देवता सम्पूर्ण सुखी बन जाते, यही इस wonderful ईश्वरीय विद्यालय का लक्ष्य है!

2. हमें सिर्फ पवित्र-ज्ञानी-योगी सम्पूर्ण अहिंसक बनना है,… अंत के सीन देख सब जागेंगे, हम खुशनसीब है कि पहले से सब ज्ञान समझ अपना भाग्य बना लिया है

सार

जबकि बाबा ने हमें अपनी सर्वश्रेष्ठ ईश्वरीय विश्व विद्यालय में ले लिया है… तो चलिए, इस ज्ञान-योग की पढ़ाई में एसी तीव्र दौडी़ लगाए, कि हम सदा श्रेष्ठ स्थिति के अनुभवी, दिव्यगुण-सम्पन्न बन… औरों को भी बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

Earning Blessings through the Art of Balance | बैलेन्स की कला द्वारा ब्लैसिंग की प्राप्ति | Avyakt Murli Churnings 14-04-2019

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Earning Blessings through the Art of Balance | बैलेन्स की कला द्वारा ब्लैसिंग की प्राप्ति | Avyakt Murli Churnings 14-04-2019

हम प्रेम-स्वरूप बच्चों से प्यार का सागर मिलने आए हैं, यह प्रेम के सम्बन्ध की महफिल है, जो राहत-राह-प्राप्ति-प्रोपर्टी सब दिलाता… सभी की याद, प्यार, लक्ष्य श्रेष्ठ है (108 की माला में आना, लक्ष्मी-नारायण बनना)… फिर भी सदा एकरस-उड़ती कला के अनुभवी, बाबा के प्यार में सूद-बूद खोये नहीं रहते… क्योंकि बैलेन्स की कमी है, इसलिए ब्लैसिंग नहीं मिलती और मेहनत करनी पड़ती

बैलेन्स से ब्लैसिंग!

कौन से बैलेन्स?

  1. याद और सेवा का बैलेन्स, अर्थात याद में रह सेवा करना… Priority याद को, ऎसे नहीं समय मिला तो याद करेंगे
  2. इस बैलेन्स से स्वतः स्वमान और निर्मानता का बैलेन्स रहता… ज्ञान का नशा भी आवश्यक है, साथ मेंं कारावनहार बाप की स्मृति निमित्त-निर्मान रखती
  3. अलौकिक-ईश्वरीय सेवा की जिम्मेवारी निभाते भी डबल लाइट, बाबा करा रहे हैं… जीतना न्यारा, उतना प्यारा
  4. श्रेष्ठ अनुभव द्वारा श्रेष्ठ ज्ञानी-योगी-सेवाधारी बनने के नशे के साथ याद रखना है… कि हमें हर पल उड़ती कला-उन्नति के अनुभवी, सर्व के लिए एक्जैम्पुल बनना है

और पॉइन्ट

1. बॉम्बे से मुलाकात…ऎसा अविनाशी खज़ानों के खान की प्राप्ति के सम्पत्ति-वान बनना है, कि स्थूल सम्पत्ति वाले भी हमको देख अपना अविनाशी भाग्य बनाने की प्रेरणा ले… हमनेेे तो माया को सागर के तले में डाल दिया है… अब तो सिर्फ, सर्व के लिए example बन, मम्मा-बाबा की सेवाओं का श्रेष्ठ रिटर्न देना है

2. बाबा ने हमें रूहानी जिम्मेवारी का ताज दिया है… यह जितना बड़ा, उतना ही हल्का, सुखदाई, खुशी देने वाला ताज है… यह हर कर्म में साथ रहता, और सतयुग में भी साथ आता, एसी wonderful ताजपोशी बाबा ने हमारी करा दी है!

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि स्वयं प्यार का सागर हमारे लिए आया है, तो हम भी सदा याद द्वारा निर्मान, डबल लाइट, उड़ती कला अर्थात सदा शान्ति प्रेम आनंद के अनुभवी बन… सर्व को श्रेष्ठ प्राप्तियां कराते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

आत्म-अभिमानी बनने के 150 संकल्प | 150 thoughts for becoming soul-conscious

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आत्म-अभिमानी बनने के 150 संकल्प | 150 thoughts for becoming soul-conscious

आत्मा-अभिमानी बनना, हमारे इस सहज राजयोगी जीवन का मुख्य फ़ाउंडेशन है… तो इसे और सहज करने, आपको आत्म-अभिमानी बनने के 150 संकल्प भेज रहे हैं… इन्हें बहुत रूहानी स्नेह से, बाबा की याद में स्वीकार करना जी!

मैं आत्मा हूँ!

मैं आत्मा, रूह, प्राण, चैतन्य शक्ति, ऊर्जा, soul, spirit, consciousness, conscient-energy, life-force, being हूँ… स्थूल 5 तत्वों से परे, बिल्कुल हल्की हूँ

मैं अजर, अमर, अविनाशी, चैतन्य सत्ता हूँ… सत्-चित्त-आनंद स्वरूप

आत्मा का रूप!

मैं निराकार… बिंदी… ज्योति स्वरूप… बिन्दु स्वरूप… ज्योति-बिन्दु स्वरूप… Point of light-might… प्रकाश का पुंज… चमकती मणि… दिव्य सिताराअमूल्य हीरादियाखुशबूदार फूल हूँ

मैं आत्म-अभिमानी हूँ

मैं ज्ञान स्वरूप, पवित्र स्वरूप, शान्त स्वरूप, प्रेम स्वरूप, खुश, सुख स्वरूप, आनंद स्वरूप, शक्ति स्वरूप… सतोगुणी, सतोप्रधान, दिव्य आत्मा हूँ

मैं देही-अभिमानी हूँ

मैं देह से उपराम, न्यारी, detached हूँ… यह देह अलग, मैं आत्मा अलग हूँ… भ्रूकुटी के बीच विराजमान… भ्रूकुटी की कुटिया, गुफा में अकालतख्त-नशीन हूँ

इस शरीर को चलाने वाली… शरीर की मालिक… आँखों द्बारा देखने वाली… कानों द्वारा सुनने वाली… मुख द्वारा बोलने वाली… शरीर द्वारा कर्म करने वाली शक्ति आत्मा हूँ…

मैं सोचती-महसूस करती… निर्णय लेती… कर्म कर… अनुभव करती… मैं आत्मा ही सबकुछ करती… मुझमे ही संस्कार है

मैं दिव्य मूर्ति, शरीर मन्दिर है… मैं हीरा, शरीर डिब्बी… मैं एक्टर, शरीर वस्त्र है… मैं ड्राइवर, शरीर गाड़ी… और 51 ऎसे संकल्प

आत्मिक दृष्टि!

सभी आत्माएं है… बाबा भी परम-आत्मा है… सभी एक बाप के बच्चे, मेरे भाई-भाई है… सभी आत्माएं सुखी हो / कल्याण हो / आगे बढ़े / खुश रहे / बाबा से जुड़कर, सर्व-प्राप्ति सम्पन्न बने

(बातें करते वक्त) मैं आत्मा से बात कर रही हूँ… कानों द्वारा सुनती हूँ

(फोन use करते)… आत्मा का फोन है, मैं आत्मा से बात कर रही हूँ

आत्मा का पार्ट!

मैं परमधाम-निवासी… अशरीरी… विदेही हूँ… शरीर में प्रवेश कर पार्ट बजाती… इस देह में अवतरीत हुई हूँ… एक शरीर छोड़ दूसरा लेती हूँ…

मैं देव आत्मा, महान आत्मा, विश्व कल्याणकारी, फरिश्ता, हीरो एक्टर हूँ…

मैं जहान का नूर, बाबा की नैनों का नूर, मास्टर ज्ञान सूर्य, मास्टर पवित्रता का सूर्य, मस्तक मणि, स्वराज्य अधिकारी, श्रेष्ठ आत्मा हूँ

सार

तो चलिए आज सारा दिन… इन सभी संकल्पों का प्रयोग कर निरन्तर आत्म-अभिमानी स्थिति में स्थित रह, सदा शान्ति प्रेम आनंद का अनुभव करते रहे… औरों को भी यह खज़ानें बांटते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

https://youtu.be/TZpeoMvJ2lo

गीत: मैं जगमगाती…

गीत: मस्तक सिंहासन पे हम आत्माएं…

गीत: भ्रूकुटी की कुटिया में…


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