योग कमेंटरी | मैं एक महान आत्मा हूँ | I’m a great soul

योग कमेंटरी | मैं एक महान आत्मा हूँ | I’m a great soul

मैं एक महान आत्मा हूँ… स्वयं भगवान ने कहा है… तुम महान हो

मैंने 2500 साल देव-रूप में बिताए हैं… मैं परम पवित्र… परम पूज्य आत्मा हूँ

सर्वो-महान परमात्मा की सन्तान… सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण परिवार की शान… सबकी आशाओं का दीपक हूँ

मेरा जन्म ही महान कार्यों के लिए हुआ है… मैं पूर्वज… विश्व कल्याणकारी हूँ

मेरे अन्दर छिपी हुई महानता… वा योग्यताएं जागृत हो रही है… मैं बहुत शक्तिशाली हो रहा हूँ

औरों को भी महान… भाग्यवान… सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनाना है… ओम् शान्ति!


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Sakar Murli Churnings 22-03-2019

Sakar Murli Churnings 22-03-2019

स्वयं भगवान् हमारे लिए खीच कर आए हैं, इसलिए यह ब्राह्मण जीवन सर्वश्रेष्ठ हीरे-तुल्य है… अब वापिस घर जाने पावन सतोप्रधान जरूर बनना है, इसके लिए देह-भान-मुक्त आत्म-अभिमानी बन बाबा को याद करना है, फिर दैवीगुण भी धारण करने है… ऎसे योगयुक्त खुशमिजा़ज़ हो तन-मन-धन से सेवा करने से सहज स्थिति श्रेष्ठ रहती और सबकी बहुत आशीर्वाद मिलती, इसलिए रहमदिल बन सर्व का कल्याण करते रहना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… स्वयं भगवान् मुझे पढ़ाकर ज्ञान रत्नों से झोली भर रहे हैं, इसी स्मृति में रह… सदा श्रेष्ठ स्थिति का अनुभव करते, औरों को भी ज्ञान दान देते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | ज्ञान-वान होने का अनुभव | Experiencing knowledgeful-ness

योग कमेंटरी | ज्ञान-वान होने का अनुभव | Experiencing knowledgeful-ness

ज्ञान सागर ने… मुझे सर्वश्रेष्ठ ज्ञान सुनाकर… मास्टर ज्ञान सागर बना दिया है

मुरलीधर की मुरली ने… मुझे मास्टर मुरलीधर बनाकर… सदा अतिन्द्रीय सुख में रहना सिखा दिया है

तीनों कालों का ज्ञान देकर… त्रिकालदर्शी… त्रिनेत्री बना दिया है

अब मैं तीनों लोकों का मालिक… त्रिलोकिनाथ बन गया हूँ

मैं ज्ञान-वान… ज्ञान स्वरूप… ज्ञानी तू आत्मा हूँ

सदा मुख से ज्ञान रत्न ही सुनाने है… मैं ज्ञान गंगा हूँ… सबको पावन बनाती हूँ… ओम् शान्ति!


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योग कमेंटरी | सच्ची-सच्ची होली मनाने | Celebrating Holi

योग कमेंटरी | सच्ची-सच्ची होली मनाने | Celebrating Holi

आज होली का दिन है… बाबा को आज की बढ़ाइया देते… अपनी पवित्रता की प्रतीज्ञा फिर से दोहराता हूं

सभी बुराइयां को… होली की आग में भस्म कर… मैं पावन बन गया हूं

बाबा के संग रह… उनके ज्ञान के रंग… अविनाशी सुख-शान्ति खुशियों के रंग में रंग गया हूँ

अपनी दिव्य बुद्धि रूपी पिचकारी द्वारा… सबको अविनाशी खुशियों का रंग लगाना है… स्नेह मिलन मनाना है

जो पास्ट में हुआ, वह हो-ली… अब मैं बाप की होली… Holy हूँ

गीत: प्रभु तेरे रंग में…


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Sakar Murli Churnings 21-03-2019

Sakar Murli Churnings 21-03-2019

यह संगमयुग हीरे-तुल्य है, इसलिए इस (मालामाल बनाने वाले सोर्स ऑफ income) ज्ञान को बहुत अच्छे refined रूप में धारण कर, बाबा को बहुत प्यार से याद करना है, तो सुधरे हुए देवता बन जाएँगे… औरों को भी धारणा कराकर श्रेष्ठ सुखी बनाना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमें सर्वश्रेष्ठ बाबा के विद्यालय में एडमिशन मिला है, तो बहुत श्रेष्ठ ज्ञान-योग की दौडी़ लगाकर धारणा-मूर्त दिव्यगुणों के श्रूंगारों से सम्पन्न बन जाएं… तो स्वतः हमारे हर कदम से सबकी सेवा होती रहेंगी, हम सतयुग स्थापन करने के निमित्त बन जाएंगे… ओम् शान्ति!

Sakar Murli Churnings 20-03-2019

Sakar Murli Churnings 20-03-2019

यह ईश्वरीय पढ़ाई (राजयोग और त्रिकाल-त्रिलोक का ज्ञान) हैं देवता बनाने वाली सतयुग के (जहां जेल, जज, आदि कुछ नहीं होगा)… तो सवेरे एकान्त में विचार सागर मंथन कर, नई-नई पॉइन्ट्‍स निकालनी है, औरों को भी पढ़ाना है… जो देखते-सुनते-पढ़ते वा हमारे संग की पूरी संभाल रखनी है

सार

तो चलिए आज होली के पावन पर्व पर… होली अर्थात हो-ली, जो हो गया उसे चित्त-चिन्तन से भूल, जैसेकि पिछले जन्म की बात है, ड्रामा की भावी… इससे हमारे पुरूषार्थ की गति बहुत तेज़ हो जाएंगी, और हम बाबा से सम्पूर्ण ज्ञान गुण शक्तियों ले भरपूर हो जाएंगे… इससे स्वतः हमारी स्व-उन्नति, औरों का कल्याण होते, हम सतयुग स्थापन करने के निमित्त बन जाएंगे… ओम् शान्ति!

Sakar Murli Churnings 19-03-2019

Sakar Murli Churnings 19-03-2019

हमारा योग सत्य के साथ है, जिससे हमारे अन्दर सारा कीचड़ा समाप्त हो, हम पवित्र दिव्यगुण-सम्पन्न पुरुषोत्तम बन जाते… तो इस पढ़ाई और याद में लग जाना है, इस संगमयुग को कभी नहीं भूलना है, क्योंकि यही समय है सर्व प्राप्तियां करने की

सार

तो चलिए आज सारा दिन… हम संगमयुगी श्रेष्ठ ब्राह्मण आत्मा है, इसी स्मृति-स्वरूप रह सदा प्रभु मिलन मनाते, विशेष हीरो पार्ट बजाते रहे… अर्थात सदा शान्ति, प्रेम, खुशीयों से भरपूर रह हर कर्म करते रहे… तो औरों को भी श्रेष्ठ अनुभुतीयां होते विशेष प्रेरणाएँ मिलती रहेंगी, और हम सभी साथ में सतयुग स्थापन करने के निमित्त बन जाएंगे… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | मैं अनुभवी-मूर्त सन्तुष्ट-मणि हूँ | I’m an experienced Jewel of Contentment | Baba Milan Murli Churnings 18-03-2019

योग कमेंटरी | मैं अनुभवी-मूर्त सन्तुष्ट-मणि हूँ | I'm an experienced Jewel of Contentment | Baba Milan Murli Churnings 18-03-2019 image

योग कमेंटरी | मैं अनुभवी-मूर्त सन्तुष्ट-मणि हूँ | I’m an experienced Jewel of Contentment | Baba Milan Murli Churnings 18-03-2019

मैं सन्तुष्ट-मणि हूँ… परिस्थितियों को मनोरंजन अनुभव करने वाली… अनुभव की सीट पर सेट… मायाजीत हूँ

मैं सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न… सदा सन्तुष्ट… हर्षित… प्रसन्न- चित्त हूँ

बाबा ने मुझे वरदान दिया है, ‘खुश रहो, आबाद रहो’… मैं समाधान स्वरूप… सदा बाबा के लव में लीन हूँ, सदा उनके साथ हूँ 

मेरे श्रेष्ठ वाइब्रेशन से… श्रेष्ठ वायुमण्डल बनता… जो सबको सहयोग देता

मैं सदा दृढ़ता सम्पन्न… सफलता-मूर्त हूँ… स्वयं प्रिय… बाप को… और सर्व को प्रिय हूँ… ओम् शान्ति!


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Becoming a Jewel of Contentment through the Authority of Experience | अनुभव की अथॉरिटी द्वारा सन्तुष्ट-मणि बनें | Baba Milan Murli Churnings 18-03-2019

Becoming a Jewel of Contentment through the Authority of Experience अनुभव की अथॉरिटी द्वारा सन्तुष्ट-मणि बनें | Baba Milan Murli Churnings 18-03-2019

Becoming a Jewel of Contentment through the Authority of Experience | अनुभव की अथॉरिटी द्वारा सन्तुष्ट-मणि बनें | Baba Milan Murli Churnings 18-03-2019 image

1. सर्व प्राप्ति सम्पन्न होने के कारण हम सन्तुष्ट-मणियां हैं,.. और इस महान शक्ति सन्तुष्टता से अनेकानेक प्राप्तियां हैं:

  • और सभी शक्तियों का आह्वान होता
  • चेहरा चमक उठता, हम हर्षितमुख, प्रसन्न-चित्त बनते
  • श्रेष्ठ वाइब्रेशन का वायुमण्डल बनाता… स्वयं, बाप, परिवार सभी के प्रिय बनते
  • परिस्थिति वार कर परेशान नहीं कर सकती, वह मनोरंजन अनुभव होती, सहज पार करते

इसलिए बाबा दाता बन रोज अमृतवेले हमें वरदान देते ‘खुश रहो, आबाद रहो’… तो जैसे हम, बाबा, खजाने, वरदान सब अविनाशी सदा के लिए है, हमें भी कभी-कभी शब्द छोड़ चेक करना है हम कहाँ तक सर्वशक्तियो-गुणों से सम्पन्न, सम्पूर्ण, समान बनें है

2. वरदानों को नोट-वर्णन करने के साथ, उन्हें कार्य में लाकर फलीभूत करना है, तो उसकी और वृद्धि होगी… बाबा इसी लिए हमें वरदान देते

3. गे-गे (करेंगे, देखेंगे, आदि) कि भाषा छोड़ दृढ़ता (जो हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है) की चाबी से सफलता को प्राप्त करना है… कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर समाधान-स्वरूप बनना है… इस बाबा की आश को पूर्ण कर प्यार का सच्चा-सच्चा सबूत देना है… यही है सच्चा परवाना बन, रूहानी शमा बाप पर कुर्बान-फिदा होना

4. सेवा के उमंग-उत्साह की रिज़ल्ट में हम सभी पास है, इसके साथ अचानक में पास होने के लिए… ज्ञानी योगी धारणा-मूर्त सेवाधारी बनने के साथ चारों सब्जेक्ट में अनुभवी-मूर्त बनना है… तो ज्ञान समझ बनकर हर कर्म में लाइट और माइट, हर कर्म नैचुरल श्रेष्ठ और सफल बन जाएंगा …यह अनुभव की अथॉरिटी सबसे श्रेष्ठ अथॉरिटी वा शक्ति है, जो मायाजीत बनाती

5. तीव्र गति की उड़ती कला के पुरूषार्थ के वाइब्रेशन द्वारा, सहयोग का वायुमण्डल बनाना है… जब हम प्रकृति को भी परिवर्तन करने की चैलेंज देते हैं, तो मनुष्य आत्माओं को तो दुःख-अशान्ति से मुक्त कर ही सकते… हमारा तो बाबा से वायदा है, साथ चलेंगे साथ रहेंगे साथ हैं… बाबा भी इन्तज़ार कर रहा है, तो हमें इन्तज़ाम जरूर करना है

6. लक्ष्य-लक्षण एक करने के लिए हम जो कहते, उसका अनुभव भी करना है… सबसे सहज सिर्फ एक ‘मैं आत्मा हूँ‘ इसके अनुभवी बन जाओ… तीन बिन्दु के स्मृति-स्वरूप बनो

7. कभी अकेला नहीं होना, सदा बाप से combined रह उनकी कम्पनी में रहना है… अमर भव के वरदान द्वारा माया से सदा सेफ रहना है… हम शेर है, उमंग उत्साह से यज्ञ सेवा कर बहुत पुण्य का खाता जमा किया है, जो लम्बा समय काम आएँगा… अपने तीव्र पुरूषार्थ द्वारा बाबा को प्रत्यक्ष जरुर करना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा के लव में लवलीन रह सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न सन्तुष्ट-मणि बने… स्वराज्य अधिकारी स्थिति द्वारा सदा शान्ति, प्रेम, आनंद से भरपूर हो औरों को भी उत्साह मैं लाते रहे… तो हम बहुत ही जल्द सतयुग स्थापन करने के निमित्त बन जाएंगे… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | मैं अवतार हूँ | I’m an incarnation

योग कमेंटरी | मैं अवतार हूँ | I’m an incarnation

मैं अवतार हूँ… ऊपर से अवतरीत हुआ हूँ… परमधाम वा सूक्ष्मवतन से

मैं सदा परमात्म स्मृति में… सर्व प्राप्ति सम्पन्न हूँ… सब को देते रहता हूँ

मैं महान कार्य करने आया हूँ… सबको दुःखों से मुक्त कर… सतयुग स्थापन करने… मैं विश्व कल्याणकारी हूँ

मैं शान्ति दूत… प्रेम का अवतार… सुखदेव… आनंद-मय हूँ

मैं इस देह-सृष्टि में मेहमान… सो महान हूँ… कुछ ही समय के लिए… ओम् शान्ति!


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