Sakar Murli Churnings 01-03-2019

Sakar Murli Churnings 01-03-2019

1. संगमयुग पर बाबा आकर दो क्लास कराते हैं, ज्ञान की और योग की… तो अपने को आत्मा (कैसे हम शरीर लेकर पार्ट बजाती है, आदि में सतोप्रधान देवी देवता ही) बाबा को याद करना है (कैसे वह हमारा बाप पतित पावन है, उनको याद), उसी के संग में ज्ञान गुण शक्तियों के रंगे रहना है

2. ऎसे ही देवताएं बनते हैं, इसलिए औरों को भी समझाकर आप समान पावन बनाना है {बैज पर समझाना, हॉस्पिटल में मरीज़ों को बताना सुप्रीम सर्जन आया है हमें 21 जन्म निरोगी बनाने, फूड मिनिस्टर को कैसे सतयुग में अथाह अनाज था, आदि)

सार

तो चलिए आज सारा दिन… अपने को आत्मा समझ बाबा के संग रह, अतिन्द्रीय सुख का अनुभव करते रहे… इसी श्रेष्ठ स्थिति में रह औरों की भी सेवा कर आप समान बनाते रहे, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


Almost exactly 5 years ago, Baba had given me this most wonderful divine opportunity of conducting Murli class for the very 1st time, a great fortune indeed… That same Murli has got repeated today

Hence, please find the entire Murli Class 01-03-2019 by BK Viral below… It’s a really really wonderful class, with numerous very beautiful insights shared in between!… Indeed a must-watch! ?

Please find the video below:

Note : The first 5 minutes video is of low resolution, after which the video is perfect… Hence, kindly bear with it..

योग कमेंटरी | Experiencing Lightness | हल्केपन की अनुभुती

योग कमेंटरी | Experiencing Lightness | हल्केपन की अनुभुती

मैं फरिश्ता… बिल्कुल हल्का हूँ… कुछ भी वज़न नहीं है

मेरी प्रकाशमय काया है… पवित्रता कि… आध्यात्मिक ऊर्जा से सम्पन्न

मेरे सभी बोझ बाबा ने ले लिए हैं… मैं निश्चिंत हूँ… सुरक्षित हूँ

अब बाबा जिम्मेवार है… मुझे उनपर पूरा भरोसा है… ड्रामा कल्याणकारी है

हर पल मेरी उन्नति हो रही है… उड़ती कला का अनुभव है… मेरी कार्य क्षमता बहुत बढ़ गयी है

मेरे चारों ओर का वातावरण भी श्रेष्ठ अलौकिक बन गया है… मेरे आसपास सभी हल्के हो रहे हैं… तनाव-मुक्त… Tension-free बन गए हैं… ओम् शान्ति!


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘Experiencing Lightness | हल्केपन की अनुभुती’

योग कमेंटरी | बाबा से बातें करना | Talking with God

योग कमेंटरी | बाबा से बातें करना | Talking with God

बाबा आप कितने मीठे हो… हमें क्या से क्या बनाते हो… स्वर्ग की बादशाही देते हो

आप मेरे हो… मैं आपकी हूँ… सिर्फ़ एक आप ही मेरे हो

बाबा आप मिले, सबकुछ मिल गया… अब कोई इच्छा बाकी नहीं… पाना था सो पा लिया

आपका बहुत शुक्रिया है बाबा… आपने हमारा जीवन श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ… पवित्र योगी बना दिया है

अब सबको आपसे जुड़ाकर… सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनाना है… मेरा जीवन अब आपकी ही सेवा के लिए है… ओम् शान्ति!

गीत: ओ बाबा, क्या आपसे मैं दो बातें कर लु…


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘बाबा से बातें करना | Talking with God’

Sakar Murli Churnings 28-02-2019

Sakar Murli Churnings 28-02-2019

ड्रामा अनुसार बाबा आए हमें हंस अर्थात लक्ष्मी-नारायण दैवी संप्रदाय फूल बनाने, ऎसा हंस कोंटों में कोई विरला ही बनते हैं… तो श्रीमत अनुसार और सब विचारों को छोड़ बाबा की याद में लग जाना है, तो अंदर का कीचड़ा समाप्त हो, हम हीरे-समान ऊंच पद पा लेंगे… औरों को भी श्रेष्ठ बनाते रहेंगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… ड्रामा की समझ को स्मृति में रख, व्यर्थ को छोड़ बाबा की याद में लगे रहें… तो इस श्रेष्ठ स्थिति के vibrations से स्वतः विघ्न समाप्त होते रहेंगे, हम दिन प्रतिदिन उन्नति को पाते रहेंगे, अपना औरों और सारे विश्व का भाग्य सतयुगी बना देंगे… ओम् शान्ति!

Sakar Murli Churnings 27-02-2019

Sakar Murli Churnings 27-02-2019

1. इस कयामत-समय पर श्रीमत अनुसार देह-देह की दुनिया को भूल, बच्चा बन बहुत प्यार से अपने मीठे बाप को याद करना है, तो वर्से के मालिक बन जाएँगे

2. नहीं तो औरों की याद आती रहेगी देह-भान के वश, ऊपर-नीचे होते रहेंगे जिससे नुकसान होता, इसलिए अपना चार्ट जरूर रखना है, जांच करनी है हम क्यूँ बाबा को याद नहींं कर पाते

3. फिर शान्तिधाम-सुखधाम चले जाएंगे, लक्ष्मी-नारायण समान दैवीगुण सम्पन्न बन जाएँगे… तो औरों की भी सेवा कर उनका कल्याण करना है, पेट ज्यादा नहीं मांगता

सार

तो चलिए आज सारा दिन… भिन्न-भिन्न युक्तियों से बाबा को याद करते रहे, फिर चार्ट द्वारा अपनी उन्नति भी देखते रहें… इससे सहज आगे बढ़ते रहेंगे, औरों की भी सेवा और अच्छी होती रहेंगी, और करते ही करते हम फिर से सतयुग स्थापन करने के निमित्त बन जाएंगे… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | शरीर से ममत्व मिटाने | How to overcome attachment to the body

योग कमेंटरी | शरीर से ममत्व मिटाने | How to overcome attachment to the body image

योग कमेंटरी | शरीर से ममत्व मिटाने | How to overcome attachment to the body

यह देह temporary है… मैं इस देह में थोड़े समय का मेहमान… सो महान आत्मा हूँ

मैं निराकारी आत्मा, अशरीरी, विदेही हूँ… परमधाम निवासी हूँ… अब वापिस वहां जाना है

यह शरीर जुत्ती है… ऎसे कई शरीर मैंने लिए और छोड़े है… अब इस पुरानी जुत्ती को भी छोड़ना है

यह शरीर पुराना तमोप्रधान है, मुझे नयी कंचन-काया मिलनी है… अब इस शरीर के भान से परे… मुझे आत्म-अभीमानी स्थिति में स्थित रहना है

यह शरीर पतित रोगी है… इसे श्रेष्ठ स्थिति के vibrations द्वारा… बाबा की सेवा में चलाना है

इस देह में रहते, देह से न्यारा… और बाबा का… तथा सर्व का प्यारा रहना है

यह शरीर अब मेरा नहीं है… बाबा की अमानत है… मुझे इसे श्रीमत पर ही use करना है

यह शरीर सिर्फ मेरा यंत्र, वस्त्र वा रथ हैं… मैं आत्मा ही सबकुछ करती हूँ… ओम् शान्ति!


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘शरीर से ममत्व कैसे मिटाए | How to overcome attachment to the body’

Sakar Murli Churnings 26-02-2019

Sakar Murli Churnings 26-02-2019

बाबा आए हैं हमें आप समान निराकारी बनाने, इसलिए अपने को आत्मा समझ इस पुराने शरीर पुरानी जुत्ती से ममत्व मिटाना है, हमें तो वापिस घर जाना है… औरों को भी आत्मा देख उनसे मोह निकालना है, अच्छाई बुराई से परे रहें, ताकि सदा हम उनको देेते रह सके… एवर-pure बाबा को बहुत प्यार से याद करे वारी जाएँ, जिस प्रभु को आधा-कल्प से याद करते आएं हैं, तो कट से मुक्त पावन बन जाएँगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमें अपना सत्य परिचय मिल गया है, तो उसी में स्थित रह सदा शान्ति, प्रेम, खुशी का अनुभव करते रहे… औरों को भी यह अनुभव बांटते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | अलौकिकता का अनुभव | Experiencing Spirituality

योग कमेंटरी | अलौकिकता का अनुभव | Experiencing Spirituality image

योग कमेंटरी | अलौकिकता का अनुभव | Experiencing Spirituality

मैं विदेही आत्मा… देह भान से मुक्त… बिल्कुल हल्की हूँ

आत्म-अभीमानी स्थिति में स्थित … अव्यक्त स्थिति का अनुभव कर रही हूँ

मैं बाह्य प्रभाव से परे हूँ… मुझे कोई छू भी नहीं सकता… मैं अलौकिक सत्ता हूँ

मैं सदा श्रेष्ठ स्थित में स्थित हूँ… सबको खुशियां बांटती… सम्मान देती हूँ

सब कार्य करते हुए भी हल्की… निमित्त हूँ, बाबा करा रहे हैं

व्यर्थ से मुक्त हूँ… बिल्कुल शान्त चित्त हूँ… सबकुछ जैसेकि अपने आप हो रहा है… ओम् शान्ति!


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘अलौकिकता का अनुभव | Experiencing Spirituality’

Remembering our illustrious past & present | हमारा श्रेष्ठ आदि-काल | Sakar Murli Churnings 25-02-2019

Remembering our illustrious past & present | हमारा श्रेष्ठ आदि-काल | Sakar Murli Churnings 25-02-2019

1. हमारे सुप्रीम बाप टीचर सतगुरु बाबा नें बताया है, कैसे हम अपने सूर्यवंशी राजधानी रामराज्य में सुख-शान्ति से सम्पन्न थे, अब फिर बनना है

2. इसके लिए सिर्फ़ श्रीमत अनुसार आत्म-अभीमानी बनने का पुरूषार्थ करना है, जिससे:

  • सहज बाबा की याद रहेंगी (और पाप कटेंगे)
  • दिव्यगुण धारण होंगे (बहुत मीठे सुखदाई बनेंगे और क्रिमिनल eye, क्रोध, दुःख देना आदि सब छूट जाएंगा)

3. सब को खुशखबरी / रास्ता बताने का श्रेष्ठ कर्म जरूर करना है, कैसे हम सतोप्रधान सुखी थे, अब फिर बाबा हमें ऎसा बनाने आएं हैं

सार

तो चलिए आज सारा दिन… अपने श्रेष्ठ आदिकाल और भविष्य को स्मृति में रख बहुत-बहुत खुशी में रहे… बाबा की छत्रछाया और गोदी में रहे, जिससे पुरूषार्थ-सेवा सब सहज हो जाएंगा, और हम बहुत ही जल्द सतयुग को लाने के निमित्त बन जाएंगे… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | मेरा स्थान शान्ति कुण्ड है | Creating a reservoir of peace

योग कमेंटरी | मेरा स्थान शान्ति कुण्ड है | Creating a reservoir of peace image

योग कमेंटरी | मेरा स्थान शान्ति कुण्ड है | Creating a reservoir of peace

मैं शान्त स्वरूप आत्मा… शान्ति के सागर की सन्तान हूँ… शान्ति की किरणें मुझ पर पड़ रही हैं… मैं परमात्म शान्ति से भरपूर हो गया हूँ

मुझसे चारों ओर शान्ति की किरणें फैल रही है… मेरा स्थान शान्ति कुण्ड बन चुका है… जिससे चारों ओर शान्ति के प्रकम्पन फैल रहे हैं

यह श्रेष्ठ वातावरण सबको आराम दे रहा है… सबको आकर्षित करता… सबका कनेक्शन बाबा से जुटा़ रहा है

यह घर एक मन्दिर है… बाबा का घर है… मधुबन का मॉडल… सतयुग का मॉडल है

मैं शान्ति देवा… शान्ति दूत… शान्ति का फरिश्ता हूँ… ओम् शान्ति!

गीत: शान्ति की शक्ति से…


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘मेरा स्थान शान्ति कुण्ड है | Creating a reservoir of peace’