योग कमेंटरी | बाबा है पिता

योग कमेंटरी | बाबा है पिता

भगवान् मेरा पीता है… मैं ईश्वरीय सन्तान हूँ… बाबा ने मुझे adopt किया है

मैं बाबा की गोद में हूँ… उनकी श्रीमत रूपी उंगली पकड़ चलता… सहज पुरूषार्थी हूँ

बाबा ने ज्ञान-गुण-शक्तियों से… मेरी सर्वश्रेष्ठ पालना कर… आप समान योग्य बनाया है

अपने सर्वश्रेष्ठ सतयुगी वर्से का… अधिकारी बनाकर… बालक सो मालिक बना दिया है

मुझे बाप समान… सम्पन्न… सम्पूर्ण जरुर बनना है

सभी मेरे रूहानी भाई-बहनों को भी… बाबा से जुड़ाकर… अपने सतयुगी वर्से के अधिकारी बनाना है… ओम् शान्ति!


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Sharing our attainments with all! | Avyakt Murli Churnings 16-06-2019

Sharing our attainments with all! | Avyakt Murli Churnings 16-06-2019

हम दिलखुश बच्चे सदा वाह-वाह के गीत गाते, और दुनिया में सभी दिल के दर्दी है (भिन्न-भिन्न प्रकार से)… इसलिए हमारा फर्ज है मास्टर दुख-हर्ता सुख-स्वरूप बन, अपने स्वराज्य वा सर्व शक्तियों के जमा स्टॉक से सबके भी खाते भरपूर करने है

पार्टियों से मुलाकात

1. सदा अपनी श्रेष्ठ साक्षी-पन की सीट पर सेट रहना है, जिसमें बैठ कर्म करने-देखने में बहुत मज़ा आताा… सदा इसी खुशी में रहना, कि हम ही वह कोटों में कोई आत्माएं है… जो भगवान् के बनते-जानते, सदाकाल की प्राप्ति के अधिकारी, समर्थ बनते

2. सदा एक बाप के बन, उस एक की मत पर चल, एकरस स्थिति बनानी, और परिवार से एक रहना, तो नम्बर-वन बन जाएँगे… कहां भी हो इस एक के मंत्र को याद करने से, एक बाप के साथी बन, माया से बचे रहेंगे 

अधर-कुमारों से मुलाकात

हम प्रवृत्ति में रहते, अलौकिक वृत्ति-दृष्टि रखते, गृहस्थी के बदले ट्रस्टी सदा-सुखी है… सिर्फ मेरे को तेरे में परिवर्तन कर, न्यारे-प्यारे निर्बंधन हो गए हैं… एक बाबा की लगन से, सर्व प्राप्ति सम्पत होने कारण, विघ्न समाप्त हो हम निर्विघ्न बन जाते, जैसे माखन से बाल 

माताओं से

हम है जगत माता, बेहद सेवा करने वाली… सदा इसी खुशी में रहना है, बाबा ने हमें कितनी श्रेष्ठ पद-भाग्य दिया है, जन्मों की थकावट दूर कर अतिन्द्रीय सुख-खुशी के झूले में झूला दिया है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा ने हमें कोटों में से चुना है, तो सब मेरे को तेरे में परिवर्तन कर, उस एक की याद में समाए हुए स्वराज्य अधिकारी, सदा सुखी-दिलखुश सर्व प्राप्ति सम्पन्न बन… सबको भी शक्तियों का महादान देने वाले जगत माता बन, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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योग कमेंटरी | मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ | I’m Master Almighty Authority

योग कमेंटरी | मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ | I’m Master Almighty Authority

मैं मास्टर सर्वशक्तिवान… मास्टर Almighty Authority हूँ… बहुत-बहुत शक्तिशाली

सर्वशक्तिवान बाबा की सन्तान हूँ… उसने मेरे सिर पर हाथ रख, अपनी सारी शक्तियां मुझे दे दी है… मैं most powerful हूँ

माया, समस्याओं से अधिक शक्तिशाली… विघ्न-विनाशक हूँ… मेरा कुछ भी अकल्याण नहीं हो सकता

औरों को भी शक्ति-दान… शुभ-भावना… सकाश-वरदान देता हूँ

श्रेष्ठ ज्ञान… श्रेष्ठ ज्ञान के चिन्तन… और गुणों की धारणा द्वारा… बाबा ने मुझे बहुत शक्तिशाली बना दिया है… ओम् शान्ति!


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Remembering one Baba at the end! | Sakar Murli Churnings 15-06-2019

Remembering one Baba at the end! | Sakar Murli Churnings 15-06-2019

1. बहुत खुशी में रहना है, हमें बाबा ने पढ़ाकर स्वदर्शन चक्रधारी बनाया है, सुख का वर्सा देते… जबकि बाबा आए है हमें दुःख से छुड़ाए सुख में ले जाने, तो नाम-रूप (और बुरे ख्याल) छोड़ एक बाबा को याद करना है (जिससे विकर्म विनाश हो, शान्ति वा सभी गुणों का अनुभव होता), पुरानी दुनिया भूल (वैशयालय, रावण-राज्य, जिसको आग लगनी है) अपने शान्तिधाम-सुखधाम को याद करना है

2. टाईम बहुत थोड़ा है, इसलिए श्रेष्ठ पुरूषार्थ कर ऊंच पद पाना है… सबको सच्ची सत्य-नारायण की कथा अथवा दो बाप का परिचय दे (बाबा के वर्से में भी पुरुषार्थ से ऊंच पद मिलता), सबको सुख देना है, धन भी सफल करना है, बाबा को सर्विसएबुल बच्चें बहुत प्यारे हैं

सार

तो चलिए आज सारा दिन… अपने श्रेष्ठ अन्तिम लक्ष्य को बुद्धि में रख, अपनी दिनचर्या-जीवन के हर पहलू में बाबा को बहुत प्यार से याद करते रहे… सबको भी उसके बच्चे के रूप में देखते, देह को भी उसकी अमानत समझते, बिल्कुल हल्की-उपराम-अलौकिक स्थिति का अनुभव करते… सबको भी उससे जुड़ाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय की 108 बातें | 108 points on this wonderful Brahma Kumaris World Spiritual University

इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय की 108 बातें | 108 points on this wonderful Brahma Kumaris World Spiritual University

हमारा परम सौभाग्य है हम ईश्वरीय विश्व विद्यालय में पढ़ते… आज़ भी मुरली में बाबा ने इस पर चर्चा की… तो आज इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय की 108 बातें देखते हैं, इन्हे प्रेम से स्वीकार करना जी! 

लक्ष्य, टीचर और स्कूल

  • एम-ऑब्जेक्ट / डिग्री… दिव्य-पवित्र-सतोगुणी जीवनमुक्त-देवता लक्ष्मी-नारायण बनना… दिव्यगुण-सम्पन्न, सर्व प्राप्ति सम्पन्न, दिव्य दर्शनीय मूर्त
  • टीचर… स्वयं भगवान् (निराकार परमात्मा शिव)… पुराने-बुढ़े ब्रह्मा-तन में आकर पढ़ाते
  • स्कूल… प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय… यह स्कूल कॉलेज, यूनिवर्सिटी, पाठशाला भी है… राजस्व अश्वमेध अविनाशी रूद्र गीता ज्ञान यज्ञ 

पढ़ाई और सब्जेक्ट

  • पढ़ाई… राजयोग की (आत्मा, परमात्मा, सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त, ड्रामा, कर्मों, आदर्श योगी जीवन का सत्य ज्ञान)… सच्ची सत्य-नारायण की कथा, अमर-कथा, तिज़री की
  • प्राप्ति… पवित्रता, शान्ति, प्रेम, खुशी, सुख, आनंद, शक्तियों सम्पन्न जीवन 
  • सब्जेक्ट… ज्ञान, योग, धारणा, सेवा… सदा खुश-सन्तुष्ट रहना, सबको करना 

स्टूडेंट कौन है?

  • कौन पढ़ते… विश्व की सभी आत्माएं, बुढ़े-जवान-बच्चे, स्त्री-पुरुष, गरीब-धनवान, अनपढ़ से लेकर PhD, 1 दिन के student से 80 वर्श तक, सभी रूप-रंग-जाती धर्म-देश-भाषा वर्ग-संस्था 
  • अच्छे स्टूडेंट… रेगुलर, Punctual, एकाग्र-चित्त… नोट्स (लिखना), मनन-चिन्तन-मंथन-सिमरण, धारणा (होमवर्क) करते… पेपर (परिस्थितियों) में पास होना, अन्तिम पेपर (सेकण्ड में नष्टोमोहा अशरीरी, बाबा की याद) में पास विद आनर

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि स्वयं भगवान् ने हमें अपना स्टूडेंट बनाया है, तो रोज सेन्टर पर ज्ञान सुन सदा उसके चिन्तन योग-अभ्यास द्बारा श्रेष्ठ शान्ति प्रेम आनंद से सम्पन्न स्थिति अनुभव करते… सबको भी कराते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति! 


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Bathing in the lake of spiritual knowledge! | Sakar Murli Churnings 14-06-2019

Bathing in the lake of spiritual knowledge! | Sakar Murli Churnings 14-06-2019

इस संगम पर बाबा रथ पर आकर नई गोल्डन एजेद सतयुगी दुनिया, सुखधाम के राज्य लिए हमें पढ़ाते… तो अपने को भी change कर देवताओं (लक्ष्मी-नारायण) समान पवित्र-गुणवान character बनाना है, विकारों से मुक्त… इसके लिए श्रीमत पर अपने स्वधर्म में टिक बाबा को याद करने का श्रेष्ठ पुरुषार्थ करना है (राजयोग), तो पद ऊंचा बन जाएंगा (माला का मणका)

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा के ज्ञान-मानसरोवर में सारा दिन डूपकी लगाते रहे हैं, अर्थात बार-बार मुरली की कुछ लाइन पढ़कर उसपर चिन्तन किया करे… तो स्वतः हमारी स्थिति हल्की-उपराम-योगयुक्त रहेंगी… अर्थात हम परी-समान देवता बन, सबको बनाते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!

समर्पित होने से 108 प्राप्तियां | 108 benefits of Surrendering to God

समर्पित होने से 108 प्राप्तियां | 108 benefits of Surrendering to God

बाबा के घर में समर्पित होना, यह सर्वश्रेष्ठ भाग्य है, जिसकी आज भी बाबा ने मुरली में बात की… तो आज समर्पित होने से 108 प्राप्तियां देखते हैं… इस सतगुरूवार की सौगात को बहुत रूहानी नशे से, बाबा की याद में स्वीकार करना जी! 

सर्वश्रेष्ठ ईश्वरीय जीवन

  • पवित्रता-अलौकिकता-दिव्यता-सादगी-सरलता सहज बढ़ जाती
  • सेवा के बहुत चान्स मिलते (कोर्स, मुरली, स्पेशल प्रोग्राम), सारा दिन याद सेवा में बीत सकता, हर पल कमाई ही कमाई, समय-श्वास-संकल्प सफल
  • सहज हो जाता श्रीमत-फरमान-नियम-मर्यादा की पालना, फोलो फादर
  • दिनचर्या-धारणाएं सहज (अमृतवेला, मुरली, revise, चिन्तन, शुद्ध भोजन योग में, ट्रेफिक कंट्रोल, नुमाशाम, रात योग, चार्ट)
  • सच्चा त्याग, tapasya, निश्चय…

सर्वश्रेष्ठ प्राप्तियां

  • सर्वश्रेष्ठ भाग्य है, कल्प-कल्प की नुन्ध, श्रेष्ठ भाग्य बना सकते… शिक्षक, सेवाधारी, बाप-समान बनने का भाग्य
  • सेन्टर (बाबा के घर, शहर के सर्वश्रेष्ठ स्थान) पर रहने को सौभाग्य मिलता, बाबा के कमरे में बार-बार जा सकते… मधुबन जाने के चान्स ज्यादा (गाइड, टीचर क्लासेज bhatti, आदि
  • श्रेष्ठ वातावरण-वायुमण्डल… संग (बड़ों से सीखते, उनका example, मार्गदर्शन मिलता)… ब्रह्मा भोजन (शुद्ध, बाबा की याद में)…

एक बाबा, दूसरा ना कोई!

  • सच्ची-पक्की ब्रह्माकुमारी ब्राह्मण बनते… सच्ची सजनी-पार्वती-सीता, शिव से सच्ची सगाई-शादी…
  • प्रैक्टिकल में एक बल, एक भरोसा, एक बाबा दूसरा ना कोई, एकव्रता, एकनामी…
  • बाबा को काम आते, मददगार बनते, उसकी gaddi संभालते, समय श्वास संकल्प जीवन सफल होती… दिल तख्त

बच जाते 

  • शादी (अपवित्रता, ढेर सारे सम्बन्ध, रोक टोक, आदि)
  • नौकरी (ट्रैवल, ऑफिस पालिटिक्स, संघर्ष, आदि)
  • औरों की बुरी दृष्टि-वृत्ति से
  • पैसे की लेन-देन, शॉपिंग, आदि
  • लौकिक जिम्मेवारी-बन्धन कम हो जाते
  • स्थूल-दुनियावी-लौकिक-भौतिक व्यर्थ-अपवित्र-नकारात्मक बातों से सहज उपराम-परे रहते 

सबके प्रिय!

  • सबका सम्मान-सत्कार मिलता
  • सबके लिए sample, example, उदाहरण बनते… स्वयं पर attention बढ़ता…
  • माँ-बाप-ज्ञान में चलने वाले सन्धी टीचर स्टूडेंट साथियों के दिल पर चाहते

सार

यदि निर्बंधन होने कारण हमारे पास समर्पित होने का गोल्डन चान्स है… तो बाबा और इन सभी प्राप्तियों को बुद्धि में रख, अपने को ज्ञान-योग से सशक्त कर इसे सर्वश्रेष्ठ सुहावने अवसर का लाभ ले, जीससे स्वयं और सर्व का श्रेष्ठ कल्प … सदा बाबा की सच्ची-सच्ची सजनी, सर्व प्राप्ति सम्पन्न, दिव्य दर्शनीय मूर्त बन, सबकी सच्ची सेवा करते सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति! 


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Our wonderful discus! | स्वदर्शन चक्र | Sakar Murli Churnings 13-06-2019

Our wonderful discus! | स्वदर्शन चक्र | Sakar Murli Churnings 13-06-2019

हम ब्राह्मण बन बाबा से राजयोग की पढ़ाई पढ़ते ही है, जीवनमुक्त-पवित्र सूर्यवंशी-देवता लक्ष्मी-नारायण महाराजा बनाने… हमें तीनों लोकों-कालों के ज्ञान की रोशनी मिली है, इसलिए अब बहुत खुशी से अपने को आत्मा समझ (जिससे बुद्धि स्थिर होती) बाबा को याद कर पवित्र बनते जाना है, और स्वदर्शन चक्र फिराते पद ऊंचा बनाते रहना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा ने हमें ज्ञान स्वादर्शन चक्र का सर्वश्रेष्ठ अस्त्र-शस्त्र दिया है, तो सदा इसको फिराते अर्थात ज्ञान चिन्तन वा बाबा की याद द्बारा सर्व प्राप्ति सम्पन्न, सदा खुश-सन्तुष्ट बन, सबकी माया का भी गला कांटते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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Filling ourself with jewels! | Sakar Murli Churnings 12-06-2019

Filling ourself with jewels! | Sakar Murli Churnings 12-06-2019

1. दोनों शिवालय (शान्तिधाम-सुखधाम) और बाप-टीचर-सतगुरु बाबा को याद रखने से, सुख-खुशी का पारा चढ़ पाप कटते, पद ऊंच बनता… माया-वश झुटका खाना वा बुद्धि को भटकाना नहीँ, उससे औरों को भी नुकसान होता, अच्छे से पढ़ना हैं, हमें सर्वश्रेष्ठ टीचर मिला है

2. घर जाकर सब भूलना नहीँ है, औरों को भी समझाते रहना है, कलियुग-संगमयुग-सतयुग पर, गंभीरता-निर्भयता से, चित्र-म्युज़ियम-लिखत-समझानी श्रेष्ठ हो… जो आने वाले होंगे वह आ जाएँगे… चने (स्थूल प्राप्तियों-सम्बन्धों का आकर्षण) छोड़ हीरों (ज्ञान रत्नों वा योग केे अनुभव) से सम्पन्न बनने-बनाने में समय सफल करना है, तो विश्व-महारानी बन जाएँगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा रोज़ हमपर अविनाशी ज्ञान रत्नों की वर्षा करते, तो इन सभी रत्नों को चिन्तन-योग द्बारा अनुभव कर धारण करते दसवें… तो सदा शान्ति प्रेम आनंद से मालामाल, सर्व प्राप्ति सम्पन्न बन, सबको करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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योग कमेंटरी | Creative Commentary on Rain

योग कमेंटरी | Creative Commentary on Rain

ऊपर परमधामसूक्ष्मवतन से… बाबा का प्यार बरस रहा है.. मैं सदा उनके प्यार में डूबा रहता

मेरा चित्त सूखा, एक बूंद का प्यासा था… अब सागर मिल गया है… उसमें ही डूबकी लगाता रहता

बाबा के प्यार में सदा रिफ्रेश… तरो-ताझा रहता… शान्ति प्रेम आनंद से सम्पन्न

इस बारिश में, मैं कांटे से फूलरूहें गुलाब बन गया हूँ… हीरे-समान

औरों को भी परमात्म प्यार के छींते बांट… गुणवान… सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनाना है… ओम् शान्ति!

गीत: बरस रही है बाबा…


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