मुरली सुनने से 121 प्राप्तियां | 121 Benefits of Murli

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मुरली सुनने से 121 प्राप्तियां | 121 Benefits of Murli

बाबा की मुरली हम सभी ब्राह्मण बच्चों का जियदान, जीवन का आधार, सबसे अमूल्य खज़ाना है… आज भी बाबा ने मुरली में कहा, मुरली ही रिफ्रेश करती, सत्य समझ देती, पुज्य-देवता बनाती!

तो आज मुरली सुनने से 121 प्राप्तियां आपको भेज रहे हैं… इन्हें बहुत आनंद से बाबा की याद में स्वीकार करना जी!

सुनते हुए

  • समझानी, सत्य ज्ञान मिलता, ज्ञान से भरपूर होते, ज्ञान से श्रृंगारे जाते… रौशनी-प्रकाश मिलता, समस्याओं का समाधान-शक्ति मिलती
  • स्थिति ऊँची-श्रेष्ठ-शक्तिशाली, निश्चिंत-खुशहाल बनती… स्मृति-स्वमान जागृत होता, उमंग-उत्साह-खुशी पुरुषार्थ बढ़ता

बाबा से सम्बन्ध वा स्वमानों का अनुभव!

  • बाबा को जान सकते, मिलन होता, उनका अनुभव होता, साथ रहते, बातें करते… सुप्रीम टीचर से पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त होता…
  • सुप्रीम माँ की ममता, बाप की पालना, टीचर की पढ़ाई-डायरेक्शन, सतगुरू की शिक्षा-सावधानी-श्रीमत, सखा से संवाद, साजन का प्रेम-पत्र, बड़े भाई का मार्गदर्शन, बच्चे का आवाज, सुप्रीम सर्जन की प्रिस्क्रिप्शन मिलती
  • अपने को गॉड्ली स्टूडेंट, मास्टर ज्ञान सागर, नॉलेजफुल, त्रिकालदर्शी, त्रिलोकीनाथ, त्रिनेत्रि, सच्ची पार्वती, अर्जुन अनुभव कर सकते

दिन का पक्का फाउंडेशन!

  • मन का भोजन, आंतरिक अवस्था का स्नान हो जाता, ज्ञान धन-रत्न बढ़ते… ज्ञान के अस्त्र-शस्त्र से सम्पन्न रहतेे, विचार चेक-चेंज कर सकते, स्थिति अच्छी-पावरफुल बनती
  • पास्ट मर्ज होता, चिंता कम होती, मन सशक्त, बुद्धि स्थिर होती… संस्कार शीतल-परिवर्तन-दैवी बनते
  • बुद्धि श्रेष्ठ स्मृतियों से भरपूर रहती… मन को श्रेष्ठ दिशा, चिन्तन का सामान मिलता, नवीनता…

सारा दिन

  • एकाग्रता, कार्य क्षमता, रचनात्मकता, कार्य सन्तुष्टता बढ़ती… सारा दिन अच्छा जाता, प्रभाव-मुक्त
  • औरों को भी अच्छे पॉइंट्स सुना सकते, सेवा कर सकते
  • योग के संकल्प मिलते, योग सहज, बाबा के समीप रहते… कर्मयोगी सहज

ब्राह्मण जीवन में

  • श्रीमत पालना, फॉलो फादर होता.. समय सफल, कान शुद्ध, ज्ञान अमृत मिलता.. संगमयुग का अनुभव होता
  • संगम के समय-श्वास-संकल्प.. बाबा के ज्ञान-राजयोग-गुण-शक्तियों की वैल्यू realize होती
  • सब योग के अभ्यास सहज हो जाते (देही-अभिमानी, आत्म-अभिमानी, अशरीरी, विदेही, स्वमानों का अभ्यास, आत्मिक दृष्टि, परमधाम सूक्ष्मवतन सतयुग का अनुभव, बाबा की याद, बापदादा मिलन, बाबा के titles से याद)

सेन्टर पर मुरली से प्राप्ति

  • एकान्त मिलता, अन्तर्मुखी होते, ज्ञान अच्छे से, गहराई से समझ आता
  • सेन्टर का सर्वश्रेष्ठ वातावरण मिलता, सेन्टर पे कुछ समय बीता सकते… बहनों के अनुभव, धारणाओं, मार्गदर्शन का लाभ मिलता… संगठन-संग का बल, योग सहज करता
  • सेवा के चांस मिलते, मुरली सुनाने की सेवा भी मिल सकती

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा हमें खास परमधाम से आकर रोज़ सर्वश्रेष्ठ पालना मुरली द्बारा करते, तो ऎसे पक्के स्टूडेंट बने, मिस करना तो दूर की बात, दिन में भी बार-बार मुरली पढ़ते-पढ़ाते रहे… तो स्वतः हमारी स्थिति योगयुक्त, हम सदा शान्ति प्रेम आनंद से भरपूर-सम्पन्न-शक्तिशाली रहते… सबको भी यह खज़ाने बांटते, सतयुग बनाते रहेंगे.. ओम् शान्ति!

https://youtu.be/anOp2-3H6lE

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The enchanting Murli! | Sakar Murli Churnings 25-05-2019

The enchanting Murli! | Sakar Murli Churnings 25-05-2019

1. बाबा मधुबन में ब्रह्मा-तन में आकर मुरली सुनाते, जिससे हमें सत्य ज्ञान मिलता, पुज्य बनते

2. मुख्य है योग अग्नि वा याद की यात्रा, जिससे पिछले विकर्म विनाश होते, इस जन्म का भी बाबा को सबकुछ बताने से हल्का करना है… बाबा बेहद में सबको देखते, करंट देते, जितना हम भी याद करेंगे, उतना सहयोग मिलता-पावन बनते… सारे विश्व को भी हमारे योग का सहयोग मिलता, फिर हम ही विश्व का मालिक बनते, इसी नशे में रहना है

3. बैज़ सदा लगा रहे (जिसमें बहुत सहज समझनी है… बेहद का बाबा, कल्याणकारी हमें स्वर्ग का वर्सा देते, यह संगमयुग चल रहा)… सुनकर फिर सुनाना-पढ़ाना भी है, ऎसा लायक बनना है कि मुरली भी सुना सके, सेन्टर भी चला सकें

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हम रोज शिवबाबा की ज्ञान मुरली की मधुर तान सुनते, तो सदा उसीके चिन्तन में अतिन्द्रीय सुख-खुशी में नाचते रहे… सबको भी ज्ञान-गुण-शक्तियों का महादान-वरदान देते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

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योग कमेंटरी | हमारा सुन्दर योगी जीवन

योग कमेंटरी | हमारा सुन्दर योगी जीवन

हमारा योगी जीवन… सर्वश्रेष्ठपावन… सर्व प्राप्ति सम्पन्न है

हम बहुत-बहुत प्यार से… बाबा को याद करते… जो हमारा अति मीठा पिता… शान्ति प्रेम आनंद का सागर है

बाबा ने हमें अपना बनाकर… क्या से क्या बना दिया है… भाग्य का सितारा ⭐ चमका दिया है

बाबा, आप कितने मीठे हो… हम आपकी ही यादों में… आपका बन कर रहेंगे

अब हमारी जीवन आप पर बलिहार है… सबको भी आपसे मिलाकर… उन्हें सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनाना है… ओम् शान्ति!

गीत: योगी पवित्र जीवन, कितना सुखद-सलोना…


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A refreshing fan! | Sakar Murli Churnings 24-05-2019

A refreshing fan! | Sakar Murli Churnings 24-05-2019

1. जितना स्वदर्शन चक्र का पंखा चलाते (जो एक सेकण्ड में चलता), तो रिफ्रेश होते और भविष्य चक्रवर्ती राजा, विष्णुवंशी-सूर्यवंशी बनते… सबको समझाना है, यही इस Spiritual यूनिवर्सिटी का एम-ऑब्जेक्ट है, पहले भी हम देवता थे

2. वृक्षपति बीजरूप बाबा (जो हमारा बाप, टीचर, सतगुरु है) नें हमें सारे चक्र का ज्ञान दिया है कि कैसे हम ही पूज्य-श्रेष्ठ-पारस थे और वर्सा भी देते, तो उनको तो बहुत याद करना है, विकारों-दुःख को छोड़… तो बाबा भी हमको याद करते, यही संगम का श्रेष्ठ भाग्य है… सतयुग में हमारी आयु भी लंबी होंगी

3. एक बाबा ही सत है जो सम्पूर्ण निर्विकारी, सतोप्रधान, ऑलमाइटी, विश्व का मालिक बनाते और कल्प बाद मिले हैं, तो उसके प्यार में डूबे रहना है, कलियुग को भूल… सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी राज्य मस्ट रिपीट, यही हमारा एम ऑब्जेक्ट है, जो पाते श्रीमत-याद द्वारा… तो भारत भी फिर धनवान-गुणवान महिमा-योग्य बन जाएंगा.. हम भक्ति को भी समझ गए है, भगवान् आए ही है भक्ति का फल देने

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमें सर्वश्रेष्ठ स्वदर्शन चक्र का पंखा मिल गया है, तो उसे सदा स्विच ऑन रख बिल्कुल शीतल-शान्ति का अनुभव करते रहे… औरों को भी श्रेष्ठ वाइब्रेशन से सहयोग मिलते, सतयुग बन जाएंगा… ओम् शान्ति!


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योग कमेंटरी | आत्मिक सम्पर्क

योग कमेंटरी | आत्मिक सम्पर्क

मैं आत्मा सदा हल्की… हर्षित… प्रसन्न-चित्त हूँ

मैं आत्मा को देखती… आत्मा से बातें करती… मेरा सम्बन्ध आत्मा के साथ है

सबने मेरी बहुत पालना की है… अभी मुझे उनकी पालना करनी है… अपनी श्रेष्ठ स्थिति-रॉयल व्यवहार द्वारा

उनमें बहुत विशेषताएं हैं… उनका सम्मान-शुभ भावना दे… आगे बढ़ाना है

मुझे सदा सन्तुष्ट रह… सबको सन्तुष्ट करना है… मैं सन्तुष्टमणि हूँ… बाबा की अमूल्य रत्न

एक बाबा के बच्चे… सभी मेरे भाई-बहन… ईश्वरीय परिवार है… ओम् शान्ति!


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Sitting in God’s eyes | Sakar Murli Churnings 23-05-2019

Sitting in God’s eyes | Sakar Murli Churnings 23-05-2019

1. इस पुरुषोतम संगमयुग पर बाबा साधारण तन में आकर, हमें पढ़ाकर पारस-बुद्धि बनाते, फिर स्वर्ग में सम्पूर्ण सुख-धन-साधन एकता होंगी… ऎसे सुखधाम में जाना है, बाकी सब तो शान्तिधाम जाएँगे, इस दुखधाम-अपवित्रता को छोड़ना है (हम आत्मा भाई-भाई है, भ्रकुटी के बीच, बाप से वर्सा मिलता)… जो आने वाले होंगे वह आ जाएँगे, हमें भी समझाते रहना है (दो बाप, आदि)

2. हमें सम्पूर्ण ज्ञान मिल गया है, तो कैसे भी करके (हर जगह, भोजन करते, आदि) बाबा को याद करना है, तो विकर्म-विनाश हो माया-जीत बन पवित्र-सतोप्रधान विश्व का मालिक बन जाएँगे… बाकी थोड़ा समय है, गुल-गुल बनने से बाबा नयनों में बिठाकर ले जाएँगे, कमाई बड़ी भारी ही (घाटा भी!) देही-अभिमानी बनने से सब सहज होता… चिन्तन भी करना है कैसे हम आत्मा है, फिर घर जाएँगे, फ़िर सतयुग में आएँगे

सार

तो चलिए आज आरा दिन… जबकि बाबा ने हमें अपने नयनों में बिठा दिया है, तो हम भी उन्हें अपने नैनों में समाकर, अपनी दिनचर्या के हर पहलू को योगयुक्त बना दे… तो सदा श्रेष्ठ स्थिति में स्थित दिव्यगुण-सम्पन्न बन, औरों को भी श्रेष्ठ बनाते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!


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योग कमेंटरी | बाबा रूहानी चुम्बक है

योग कमेंटरी | बाबा रूहानी चुम्बक है

मैं आत्मा हूँ… देह-भान से बिल्कुल न्यारी… आत्म-अभिमानी स्थिति में स्थित

बाबा रूहानी चुम्बक है… उनका प्यार मुझे खींचता है… सहज सबकुछ भुलाकर… उसके पास पहुंचा देता

उसकी मीठी-मीठी याद… मुझे भरपूर कर देती है… पावन बनाती, जैसे कि सारी कट उतर गई है

मैं बहुत हल्कीशुध्दखुशियों से भरपूर हो चुकी हूँ

सबको ऎसे बाबा से जुड़कर… सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनाना है… ओम् शान्ति!


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हमारे wonderful चित्र | Sakar Murli Churnings 22-05-2019

हमारे wonderful चित्र | Sakar Murli Churnings 22-05-2019

1. जबकि बाबा हमें फूल-हीरा कहते, और हम ही देवता बनते… तो सदा अपने एम ऑब्जेक्ट को सामने रख, चेक करते रहें, क्या हममें ऎसे गुण है? (खुशी, अतिन्द्रीय सूख, आदि), औरों को भी आप समान बनाते हैं?… यह सब सहज हो जाता याद की यात्रा से (जो बाबा हमें शान्तिधाम-सुखधाम ले जाते, एसी याद जो अंत में और कुछ याद न आए)

2. जबकि बाबा हमें इतनी ऊँची जबर्दस्त प्राप्ति कराते (और समय भी कम है), तो देह-सहित सबकुछ भूल उसकी याद में मग्न हो जाएँ… वह भी बहुत प्रेम से, तो ऊंच पद बन जाएँगा

3. अभी हम नम्बरवार पुरूषार्थी है, फिर वैकुण्ठ नई दुनिया के मालिक बनते… इसमें कोई संशय की बात नहीं, यह खेल तो बना हुआ है… हमारे ज्ञान-योग के हर कदम में पद्मों की कमाई है, धन भी सफल जरूर करना है 

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा ने हमारे लिए इतने wonderful चित्र बनवाए हैं, तो सदा गोला-झाड-सीडी को सामने रख, इसी नशे में रहे कि बाबा संगम पर हमें कितना ऊंच ते ऊंच दिव्यगुण सम्पन्न विश्व का मालिक बनाते… इसी नशे से ज्ञान-योग का तीव्र पुरूषार्थ कर सदा शान्ति प्रेम आनंद से भरपूर रह, सबको भी सम्पन्न करते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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दिव्यता अनुभव करने के 108 संकल्प | 108 Thoughts for experiencing Divinity

दिव्यता अनुभव करने के 108 संकल्प | 108 Thoughts for experiencing Divinity

हमारा इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय में लक्ष्य ही है मनुष्य से देवता बनना, बाबा नेे भी हमें रोज़ दिव्यगुणों से श्रृंगारकर, हमारा सारा जीवन ही दिव्य और अलौकिक बना दिया है…

तो आज दिव्यता अनुभव करने के 108 संकल्प आपको भेज रहे हैं, इन्हें बहुत खुशी से बाबा की याद में स्वीकार करना जी!

मैं देवता हूँ!

  • मैं ज्ञान, पवित्रता, शान्ति, प्रेम, खुशी, सुख, आनंद, शक्तियों से भरपूर… सतोगुणी, पावन, सतोप्रधान, फूल चार्ज, दिव्य आत्मा हूँ… पारस-बुद्धि
  • मैं सतयुगी दिव्य आत्मा हूँ… दैवी सम्प्रदाय-कुल की महान आत्मा, देवता, देव आत्मा हूँ… दैवी स्वभाव-संस्कार-संस्कृति से सम्पन्न
  • मैं सतयुग-स्वर्ग-हैवन-जन्नत, अमरलोक-सचखण्ड, सुखधाम, जीवनमुक्ति-धाम की रहवासी थी
  • मैं विश्व का मालिक, डबल ताजधारी, बहुत सुन्दर-सुशोभित, सम्पूर्ण दैवी बनने वाली हूँ
  • I’m a Divine soul, full of divinity & divine virtues

मुख्य गुण

  • मैं सर्वगुण सम्पन्न, 16 कला सम्पूर्ण, सम्पूर्ण पवित्र, सम्पूर्ण निर्विकारी, मर्यादा पुरुषोत्तम, अहिंसा परमोधर्म. डबल अहिंसक, सच्चा वैष्णव, श्रेष्ठ धर्म-कर्म करने वाली श्रेष्ठाचारी आत्मा हूँ… आदि-सनातन देवी-देवता धर्म की… सदा आत्‍म-अभिमानी, बुद्धिमान, फूल-समान गुणवान हूँ
  • मैं दिव्यता से भरपूर, दिव्यगुण-सम्पन्न हूँ… मैं सर्व प्राप्ति सम्पन्न, सदा भरपूर, सन्तुष्ट-तृप्त, श्रेष्ठ स्थिति में स्थित हूँ… आँखे शीतल, चेहरा हर्षित रूहानी मुस्कान सम्पन्न है… मेरी चलन रॉयल, बोल मधुर, व्यवहार सुखदाई सम्मान-दायी उदारता-सम्पन्न है… सम्पर्क हल्के, सन्तुष्टता-पूर्वक… सम्बन्ध मीठे है
  • मैं तेजस्वी आत्मा हूँ… मेरा चारों ओर दिव्य आभामण्डल है, जो सबको दिव्यता की अनुभुती कराता
  • मैं श्रेष्ठ धारणा-मूर्त आत्मा हूँ… सब कहते यह जैसे देवता है

पूज्य!

  • मैं देने वाला देवता, दाता हूँ… सब का इष्ट, इष्ट देव-देवी हूँ… पूजनीय, पूज्य, पूजन योग्य हूँ… गायन योग्य, महिमा योग्य हूँ
  • मैं मूर्ति, शरीर मन्दिर है… मेरा घर भी मन्दिर है, सभी मेरे दैवी भाई-बहन है
  • मैंने 2500 साल देव-रूप में बिताए हैं, मैं महान आत्मा हूँ… इस दिव्यता को फिर जगाना है
  • मैं दिव्य पुरुष, शिव शक्ति, मैं वही हूँ जिनकी मन्दिरों में पूजा हो रही है
  • मैं अवतरित हुई… अलौकिक-दिव्य सत्ता हूँ

बाबा से सम्बन्धित

  • बाबा ने साजन बन, मुझे दिव्यगुणों से श्रृंगारा है… जन्मते ही दिव्य-बुद्धि का वरदान दिया है
  • बाबा आए ही है मनुष्य से देवता बनाने… कृृष्ण समान दैवी प्रिन्स-महाराजा… इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय में, मेरा एम ऑब्जेक्ट ही है लक्ष्मी-नारायण बनना
  • मेरी दिव्यता की पर्सेंटेज हर-रोज़ बढ़ रही है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… इन्हीं संकल्पों को दोहराते, अपने देव स्वरूप का प्रत्यक्ष अनुभव करते रहें… तो स्वतः दिव्यता से भरपूर, सर्व प्राप्ति सम्पन्न, सदा खुश-सन्तुष्ट-तृप्त बन … सबको यह खज़ाने बांटते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!


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Our All-in-One Baba! | Sakar Murli Churnings 21-05-2019

Our All-in-One Baba! | Sakar Murli Churnings 21-05-2019

1. हम आत्मा पार्टधारी ही, इस स्मृति से बाबा को याद करना है, तो कल्याण होता… सबको समझाना है, कैसे वह है:

  • परमपिता (बेहद सुख का वर्सा दे, विश्व का मालिक बनाते)
  • परम शिक्षक (ज्ञान का सागर, राजयोग सिखाते… मनुष्य सृष्टि का बीजरूप, सारे सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान सुनाते),
  • सतगुरू (दुःखों से liberate कर, गाइड बन साथ ले जाते, सद्गति भी करते)
  • सत्-चित्त-आनंद स्वरूप, सुख-शान्ति का सागर… जो हमें सर्वगुण सम्पन्न देवता बनाते

इससे स्वतः सिद्ध होता कि भगवान् सर्वव्यापी नहीं (टीचर-स्टूडेंट जरूर अलग होंगे)

2. श्रीमत से ऎसा श्रेष्ठाचारी बनते, कि अब तक देवताओं की पूजा होती है, और रावण एकदम अनराइटियस बना देता … मुख्य बात, कलियुगी अपवित्र मर्यादा जोड़ सम्पूर्ण पावन जरूर बनना है… रावण राज्य में सब दुःखी है, इसलिए औरों को भी भूँ-भूँ करते, सत्य ज्ञान दान देते रहना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमें बाबा सर्व सम्बन्धों (मात-पिता, शिक्षक-सतगुरू, सखा-साजन, सर्जन-बच्चा) के रूप में मिल गए हैं, तो सदा उनके प्यार में डूबे हुए, सुखों के झूले में झूलते रहे, माया से अनजान… सबको भी यह सुख-खुशियां बांटते, सतयुग बनाते चले.. ओम् शान्ति!


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