योग कमेंटरी | रूहानियत का अभ्यास

योग कमेंटरी | रूहानियत का अभ्यास

मैं रूह हूँ… मेरा बाबा सुप्रीम रूह है… उनके संग में रूहानियत (आत्मिक स्थिति) का अनुभव कर रहा हूँ

देह से बिल्कुल न्यारा… रूहानी स्थिति में स्थित हूँ… देह को देखते भी नहीं देखता

निरन्तर शान्ति, प्रेम, आनंद का अनुभवी… मै बाबा को देख रहा… उनके सम्पूर्ण गुण-शक्तियों से सम्पन्न बन रहा हूँ

मैं पावन… सतोप्रधान… दिव्य बनता जा रहा हूँ

यह प्रकंपन सारे वातावरण को अलौकिक बनाता… सभी आत्माओं को बहुत सहयोग दे रहा… सारे विश्व को पावन-दिव्य बना रहा है… ओम् शान्ति!


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The beauty of Trustee-ship! | Sakar Murli Churnings 09-05-2019

The beauty of Trustee-ship! | Sakar Murli Churnings 09-05-2019

1. बाबा ऎसा wonderful बाप टीचर सतगुरू है, जो उनके ऊपर कोई नहीं… इसी बात को स्मृति में रख बाबा को याद करना है (आत्म अभिमानी बन, भाई-भाई की दृष्टि पक्की करके), तो पावन राज्य के मालिक बन जाएँगे… बाप को याद करने से विकर्म विनाश होते, टीचर को याद करने से सारी नॉलेज बुद्धि में आ जाती, और गुरू योग सिखाते

2. हम अभी कलियुग से निकल आए हैं, हम न असुर है न देवता है, हम सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण है स्वयं भगवान् हमें पढ़ाते, यह ड्रामा बड़ा wonderful है… खुद चैतन्य बीज आकर हमें सारे झाड़ का राज समझाते, कैसे यह वेरायटी का खेल है, हम आत्मा शरीर धारण कर पार्ट बजाती, बाबा अब हमारी सद्गति करते… माया रावण को हमसे ईर्षा है, इसलिए वह विघ्न जरूर डालेगी, हमें बाबा को याद कर उन्नति को पाते रहना है, हमारे लिए सहज है

3. सबकुछ बाबा का दिया हुआ है, इसलिए सदा उनकी श्रीमत पर चलने वाले सच्चा ट्रस्टी बनना है, ममत्व नहीँ… मुख्य बात अपने को आत्मा समझ बाबा को देखते रहना है (अर्थात याद करना है) तब ही उनकी करेन्ट कैच कर पावन बन बाबा के साथ जा सकते, पहले शान्तिधाम फिर सुखधाम… औरों को भी बाबा का परिचय देना है, जो आने वाले होंगे वह आ जाएँगे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा आ गया है, तो सबकुछ उसे सौप हर पल उनकी यादों-प्यार में डूबे रहे, सदा सर्व प्राप्ति सम्पन्न भरपूर-तृप्त बन, सबको रूहानी स्नेह-खुशियां बांटते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!


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योग कमेंटरी | मैं उड़ता पंछी हूँ | I’m a flying bird

योग कमेंटरी | मैं उड़ता पंछी हूँ | I'm a flying bird image

योग कमेंटरी | मैं उड़ता पंछी हूँ | I’m a flying bird

मैं उड़ता पंछी हूँ… देह रूपी घोसले से न्यारा… बिल्कुल हल्का हूँ

ज्ञानयोग के पंख… वा उमंग-उत्साह के पंख द्वारा… मैं सदा उड़ती कला में… सदा शान्ति प्रेम आनंद से भरपूर हूँ

सभी डालियां छोड़… मैं उड़ चली ऊपर… परमधाम रूपी घर की ओर

मैं निर्बंधन… स्वतंत्र, आज़ाद हूँ… पहुँच गई अपने प्रियतम के पास

बाबा मुझे बहुत-बहुत प्यार करते… सभी गुण-शक्तियों से भरपूर-सम्पन्न कर… मुझे जन्म-जन्मान्तर के लिए पद्मपद्म भाग्यशाली बना दिया है… ओम् शान्ति!

गीत: मन पंछी तू…

गीत: मैं आत्म पंछी…


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Becoming a Hero Actor | Sakar Murli Churnings 08-05-2019

Becoming a Hero Actor | Sakar Murli Churnings 08-05-2019

1. ओम् शान्ति अर्थात अपने को आत्मा समझ शान्ति के स्वधर्म में रहना… स्वयं निराकार पतित-पावन बाप हमें बेहद सुख की पढ़ाई पढ़ाते, हीरे जैसा देवता सूर्यवंशी लक्ष्मी-नारायण बनाने… अभी हम संगमयुगी ब्रह्मा मुख वंशावली सर्वोत्तम ब्राह्मण कुल भूषण है, देवताओं से भी ऊंच, पुराना-पन समाप्त हो गया है

2. बाबा आकर मूत पलीती कपड़ धोते, अर्थात हम ब्राह्मण बच्चों को पावन बनाकर श्रेष्ठ सद्गति का वर्सा देते… जहां पवित्रता-सुख-शान्ति सम्पन्न एक ही आदि सनातन देवी-देवता धर्म होंगा, कोई वज़ीर-गुरू की भी जरूरत नहीं

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि बाबा ने हमें इस विश्व नाटक का सम्पूर्ण ज्ञान दे दिया है, मुख्य बात कि हम हीरो एक्टर है… तो हर पल, श्रेष्ट स्मृतियों में रहते श्रेष्ठ पार्ट बजाते रहे, सदा शान्ति प्रेम आनंद का अनुभव करते और कराते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति! 


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योग कमेंटरी | न्यारा-प्यारा बनने

योग कमेंटरी | न्यारा-प्यारा बनने

सभी आत्माएं हैं… बाबा के बच्चें है… उनको शुभ भावना देता हूँ

मुझे अपना पार्ट श्रेष्ठ बजाना है… सबकी पालना का रिटर्न देना है

मेरा वायदा है ‘एक बाबा, दूसरा ना कोई’… मैं एकव्रता… वफादार सजनी हूँ

वही मेरा संसार है… उनसे ही सर्व सम्बन्धों का सुख लेती… सदा उसके साथ रहती हूँ

औरो के प्रभाव से परे रह… सबको बाबा की गुण-शक्तियां बांटती… न्यारी, और सबका प्यारी हूँ

इसी अभ्यास से दुःखों से परे रह… सबको निरन्तर शान्ति, प्रेम, सुख, आनंद दे सकते… यही परिवार के लिए सच्चा प्यार है… ओम् शान्ति!


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The sword of Remembrance! | योग की तलवार | Sakar Murli Churnings 07-05-2019

The sword of Remembrance! | योग की तलवार | Sakar Murli Churnings 07-05-2019

1. याद की तलवार से ही पाप कट होते, सतोप्रधान बनते, आयु बढ़ती, कर्मातीत बनते, कर्मभोग पर विजयी… इसलिए सुबह के साथ सारे दिन के चार्ट को भी चेक करना है (हरेक को), हम कितना याद-धारणाओं (दु:ख न देना, उल्टे सुलते बोल नहीं, आदि)-सेवा करते… याद का सही प्रमाण है बाकी सब भूल जाना

2. औरों के बजाए बाबा को याद करना है, चलते-फिरते भोजन करते… जो एवर-pure चुम्बक हम लवली बच्चों को खींचते, नीचे आकर हमें ऊँची बातें समझाते, वर्सा देते, जंगल को मंगल करते, पूज्य बनाते… माया के तूफान तो आएंगे, ड्रामा पर अचल रह हमारे लवली बाबा को याद करते रहना है, बाबा-बहनें हमपर कितनी मेहनत करते

3. ज्ञान समझाना सहज है, सिर्फ मिठास-युक्ति चाहिए… इसके लिए चिन्तन, भिन्न भिन्न पॉइंट्स नोट कर, करेक्शन करते रहना है… तो सरल उन्नति को पाते रहेंगे, माया से बचे हुए, बुद्धि भटकेगी नहीं… वाणी में भी योग का जौहर भरना है… चेहरे से हमारी अवस्था दिख जाती है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… जबकि हमें माया पर विजयी होने की सर्वश्रेष्ठ तलवार मिल गई है, तो हर पल (और रात को चार्ट भी चेक करते) आत्म-अभिमानी का फ़ाउंडेशन पक्का कर, एक बाबा की मीठी प्यारी बातों में मग्न रहे… तो सदा शान्ति, प्रेम, आनंद से बहुत भरपूर रहेंगे, औरों को भी भरपूर करते, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!


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परमधाम अनुभव करने के 108 संकल्प | 108 Thoughts for experiencing Soul World

परमधाम अनुभव करने के 108 संकल्प | 108 Thoughts for experiencing Soul World

परमधाम का अनुभव करना हमारे इस सहज राजयोगी जीवन का मुख्य अभ्यास है, जिससे बाबा को याद करना भी बहुत सहज हो जाता… तो आज आपको परमधाम अनुभव करने के 108 संकल्प भेज रहे हैं, इन्हें बहुत प्रेम से स्वीकार करना जी!

परमधाम का अनुभव!

  • आकाश, सूर्य, चन्द्र, तारागण, अंतरिक्ष से भी पार-ऊपर
  • परमधाम, परलोक… परे ते परे… परमात्मा के रहने का स्थान है
  • ब्रह्मलोक… स्वयं प्रकाशित… चारों ओर सुनहरा-लाल प्रकाश ही प्रकाश, लाइट ही लाइट है… छठा ब्रह्म महतत्व है
  • शान्तिधाम… चारों ओर शान्ति ही शान्ति है… बेहद-असीम चेन, सुकून, विश्राम है… डेड साइलेंस… स्वीट साइलेंस… शान्तिधाम की शान्ति मुझमें समा रही है… मैं बिल्कुल शान्त हो चुकी है
  • निर्वाण-धाम… वाणी से परे, वानप्रस्थ, पार निर्वाण… यहां कोई आवाज़ भी नहीं… साइलेंस वर्ल्ड है
  • मुक्तिधाम… मैं सम्पूर्ण मुक्त, आज़ाद, स्वतंत्र, निर्बंधन, बन्धन-मुक्त हूँ
  • मूलवतन, निराकारी दुनिया, आत्माओं की दुनिया… आत्माओं का घर, सुहावना होम स्वीट होम है… शिवबाबा के भी रहने का स्थान,शिवपुरी है
  • देह, देह-भान, देहधारी, पदार्थ, दुनिया, हीलना, हलचल कुछ नहीं… दुख-दर्द-तकलीफ-पीड़ा कुछ नहीं… समय भी नहीं

परमधाम में शिवबाबा!

  • ज्योति-बिन्दु स्वरूप बाबा दिखाई दे रहे, उनसे चारों ओर सफेद किरणें फैल रही है… सारा परमधाम जगमगा उठा है
  • मैं उनके पास-समीप-संग में… पावन, गुणवान, शक्तिशाली हो रही हूँ
  • बाबा ने मुझे खुला निमन्त्रण दिया है… मैं जब चाहे, यहां आ सकती… अधिकारी-त्रिलोकीनाथ हूँ… मुझे बार-बार यहां आना है

मैं आत्मा, परमधाम में!

और संकल्प

  • लाल आसमान परमधाम में, मैं रूहानी सितारा चमक रहा हूँ… खड़ा हूँ
  • दूर-देश परमधाम से… बाबा रोज़ मुझे पढ़ाने आते…
  • मैं भी वहीं से आया हूँ, वहीं मुझे जाना है… मैं सबको मुक्ति का रास्ता दिखाता, मेरी एक आँख में मुक्ति है
  • परमधाम मेरा पियर-घर है… बाबा बीजरूप है, मैं बाबा के बिल्कुल समीप हूँ, बाकी सब अपने-अपने सेक्शन में है… कल्प वृक्ष में
  • भक्ति में यहां आने लिए ही पुरूषार्थ किया, बाबा ने अब बहुत सहज रास्ता बता दिया, अब एक सेकण्ड में मन-बुद्धि द्वारा पहुँच सकता
  • मोक्ष धाम, सिद्ध शीलापति, ज्योति धाम है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… इन्हीं संकल्पों को दोहराते, परमधाम की असीम शान्ति को अपने अन्दर समाते, बाबा की यादों में झूमते रहे… सभी ज्ञान-गुण-शक्तियों के खज़ानों से सम्पन्न बन, सबको सम्पन्न बनाते, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!

1) गीत: जाना है हमें, अपने परमधाम…

2) गीत: बाबा के संग जाना है…

3) गीत: आवाज़ से परे…


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बेगर टू प्रिन्स बनने का सहज अर्थ | Becoming a divine Prince! | Sakar Murli Churnings 06-05-2019

बेगर टू प्रिन्स बनने का सहज अर्थ | Becoming a divine Prince! | Sakar Murli Churnings 06-05-2019

1. आत्मा ही सुनती वा सब जगह जाती, इसलिए आत्मा-अभिमानी जरूर बनना है… फिर सिर्फ़ एक बाबा को याद करने से पावन, विश्व का मालिक, प्रिन्स बन जाएँगे

2. यह समझना सहज है, सिर्फ सतोप्रधान बनने में टाईम लगता, इसलिए याद को बहुत सहज बनाने, बुद्धि से सबकुछ बाबा को सौप पूरा ट्रस्टी बनना है

3. बेगर माना अशरीरी (शरीर से ममत्व नहीँ, जीते जी मरे हुए), सबकुछ बाबा का है कुछ हमारा नहीं, याद करना तो दूर की बात है… तो ऎसे बेगर बनने से बाबा की पूरी करंट खींच सकते, जिससे पावन-सतोप्रधान-दिव्य अर्थात प्रिन्स बनते, बाबा हमें मालामाल बना देते

4. बहुत खुशी वा अतिन्द्रीय सूख में रहना है, स्वयं ज्ञान सागर बाप हमें पढ़ाकर राजाओं का राजा बनाते… भल बाबा नीचे आएं है, उन्हें ऊपर ही याद करना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… देह-दुनिया, जिम्मेवारी सबकुछ बाबा को सौप बिल्कुल डबल लाइट फरिश्ता बन जाएँ… फिर बाबा को याद करने से बहुत ही सहज गुण-शक्तियों से भरपूर-सम्पन्न बनते… सबको बांटते, सतयुग बनाते रहते… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | मैं और मेरा

योग कमेंटरी | मैं और मेरा

मैं आत्मा हूँ… मेरा बाबा है… और सब स्मृतियाँ मर्ज हो गई है 

मैं देव-कुल की महान आत्मा हूँ… विश्व कल्याणकारी… मास्टर सर्व शक्तिमान हूँ

मेरा बाबा ऊंच ते ऊंच… सर्वश्रेष्ठ वर्सा देने वाला… सर्वश्रेष्ठ श्रीमत देते हैं

परिस्थितियां सिर्फ साइड-सीन है… आसपास सभी आत्माएं भी… बाबा के बच्चे है

बाकी सबकुछ भूल… बस मैं और मेरा बाबा… इसी स्मृति में स्थित रहना है… ओम् शान्ति!


और योग कमेंटरी:

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हलचल में अचल रहने की सहज विधि | Being Calm in Crisis | Avyakt Murli Churnings 05-05-2019

हलचल में अचल रहने की सहज विधि | Being Calm in Crisis | Avyakt Murli Churnings 05-05-2019

1. हम एक बल, एक भरोसे वाली हिम्मतवान-स्नेही-एकरस आत्माएं है, हलचल-रुकावट-थकावट हमें रोक नहीं सकती:

  • हम उड़ती कला के पंछी है, जो उड़ती कला द्वारा समस्याओं को छोटा-सहज-खिलौने जैसा बना देती
  • दर्दनाक बाते भी दृढ़ता बढ़ाती
  • भयानक बातें भी स्वाभाविक लगती
  • दुःख के नज़ारे भी सुख के नगाड़े बन जाएँ, ऎसा प्रभाव से परे… ताकि हम अपनी शान्ति-शक्ति शीतल जल से औरों को सहयोग दे सके

विश्व की तड़पती आत्माओं को यही आवश्यकता है, इसी योग के सहयोग द्वारा जयजयकार-प्रत्यक्षता होगी… ऎसी शक्तिशाली स्थिति चाहिए, जो उन्हें एक सेकण्ड की शान्ति-शक्ति की अनुभुती द्वारा जन्म-जन्मान्तर की तृप्ति-प्राप्ति करा सके, ऎसा अखण्ड योगी बनना है… इसके लिए खुद दुःखों से परे मास्टर सागर की स्थिति में स्थित, इच्छा मात्रम अविद्या, अखण्ड सेवाधारी बनना है… तब ही पूज्यनीय बनेंगे, यही समय की घण्टी है

2. बाबा की छत्रछाया सदा हमपे है, सिर्फ उसका हाथ-साथ पकड़ के रखना है… नथिंग-न्यू की स्मृति द्वारा अचल-अडोल रहना है, यह तो सिर्फ रिहर्सल है… हम बेफिक्र बादशाह है, हर दृश्य में कल्याण-स्व उन्नति-सेवा समाई हुई है.. यह नहीं सोचना, कि हम पहले जाएँ, लेकिन हमें सबको तृप्त-सन्तुष्ट कर साथ लें जाना है… अंत के जयजयकर के सीन देखकर

3. हमारा जन्म-सिद्ध अधिकार है स्वराज्य अधिकारी बनना, और स्वराज्य अधिकारी सो विश्व राज्य अधिकारी… ऎसे कर्मेंद्रीयां के राजा बनने में ही शान्ति-सुख-नशा-उड़ती कला-शक्ति है, कर्मेंद्रीयां के वश होने में तो धोखा-दुःख है

4. जो पहले से पहेली है, मैं कौन वही अब है कि हम कौनसी माला में आएंगे… अष्ट-माला में वह आएँगे जो सदा अष्ट-शक्तियों से सम्पन्न रहते, और जो परिवार के इष्ट-समान सदा श्रेष्ठ-महान-वरदानी रहते

5. जैसे दुनिया में बाम्ब्स गिरते तो अण्डरग्राउण्ड चले जाते… ऎसे मायावी वाइब्रेशन से बचने के लिए चाहिए सदा एक बाबा दूसरा ना कोई की लगन… फिर माया वार भी नहीं कर सकती, यही safety का साधन है

6. जो बाबा के समीप रहते, वह उसके संग में रंग में सदा रूहानियत में स्थित रहते… अर्थात देह से न्यारे रूहानी स्थिति में स्थित, सबको आत्मा ही दिखाई दे यही कमाल है… सदा नशा रहे कि हम अधिकारी है, बाबा के सर्व ज्ञान-शान्ति-सुख-शक्तियां हमारे है, तो स्वतः और सब स्मृतियों से परे रहेंगे

7. विश्व को कंट्रोल तब कर पाएंगे, जब पहले अपने में एसी कन्ट्रोलिंग पावर होगी कि… जब चाहे सेकण्ड में शरीर में आए, जब चाहे शरीर से परे अव्यक्त स्थिति में स्थित हो, फ़ाइनल पेपर भी एक सेकण्ड का होगा…. ऎसे सुख केे झूले में झूलतेे रहना है, कि हमारे नैन-मुख-चेहरे को देख दुःखी भी सुखी हो जाए… ऎसा सुखदाई बनना है, दुःख की लहर से एकदम परे

सार

तो चलिए आज सारा दिन… इस नाजुक समय पर नथिंग न्यू का पाठ पक्का कर, सदा एक बाबा दूसरा ना कोई, इसी स्मृति द्वारा बाबा के हाथ-साथ को पकड़, सदा अतिन्द्रीय सूख-शान्ति-खुशियों के झूले में झूलते रहे… इससे न सिर्फ , औरों को भी, सतयुग बनाते चले… ओम् शान्ति!