योग कमेंटरी | मैं नये विश्व की तकदीर हूँ | Avyakt Murli Churnings 31-03-2019

योग कमेंटरी | मैं नये विश्व की तकदीर हूँ | Avyakt Murli Churnings 31-03-2019

मैं नये विश्व की तकदीर… विश्व का आधार-मूर्त… विश्व राज्य अधिकारी आत्मा हूँ

मेरे श्रेष्ठ राजयोगी जीवन से… सारा विश्व सुख-शान्ति सम्पन बनता… मेरे योग से सारा विश्व पावन बनता… मेरी श्रीमत-पालना से नये विश्व का विधान बन रहा है

मैं पवित्रता की लाइट का ताजधारी… बाबा के दिल-तख्त-नशीन… स्वराज्य का तीलकधारी हूँ… मेरे हाथो में स्वराज्य का गोला है

मैं सदा सन्तुष्ट… प्रसन्न-चित्त… प्रसन्नता-स्वरूप हूँ

मेरी सन्तुष्टता, सारे विश्व को सन्तुष्ट करती… यही जिम्मेवारी, उन्नति का साधन है… बाबा मेरे साथ है… ओम् शान्ति!


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘मैं नये विश्व की तकदीर हूँ | Avyakt Murli Churnings 31-03-2019’

Sakar Murli Churnings 01-04-2019

Sakar Murli Churnings 01-04-2019

1. पारलौकिक बाबा ने हमें सम्पूर्ण सत्य ज्ञान दिया है कैसे अब मुक्तिधाम जाना है, इसके लिए बाबा को याद कर पवित्र बनना है… साथ में दिव्यगुण भी धारण करने है, औरों को समझाने से साथ खुद भी पक्का रहना है, तो पवित्रता-सुख-शान्ति सम्पन्न गोरा नैचुरल beauty वाले बन जाएँगे

2. हम त्रिमूर्ति शिवबाबा के सम्मुख है जो ब्रह्मा द्वारा नई दुनिया को स्थापना कर… हम सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण कुल है, जो विजयी बनते हैं, इसी नशे में रहना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… बाबा ने हमें कितना ऊंच बनाया है, इसी नशे और खुशी द्वारा श्रेष्ठ ज्ञान-योग का पुरूषार्थ करते रहे… तो इस स्व-परिवर्तन से सहज विश्व-परिवर्तन हो, सतयुग स्थापन हो जाएँगा… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | मैं श्रेष्ठ आत्मा (कुमार) हूँ | Avyakt Murli Churnings 31-03-2019

योग कमेंटरी | मैं श्रेष्ठ आत्मा (कुमार) हूँ | Avyakt Murli Churnings 31-03-2019 image

योग कमेंटरी | मैं श्रेष्ठ आत्मा (कुमार) हूँ | Avyakt Murli Churnings 31-03-2019

मैं श्रेष्ठ आत्मा हूँ… अपनी सर्व-शक्तियों को श्रेष्ठ कार्य… विश्व कल्याण में लगाता

मैं शक्तिशाली आत्मा हूँ… सदा निर्बंधन, स्वतन्त्र, हल्का… बेफिक्र बादशाह हूँ

मैं समर्थ बाप की सन्तान… समर्थ आत्मा हूँ… उड़ती कला का अनुभवी… सदा शान्ति, प्रेम, आनंद से भरपूर हूँ

मैं विजयी आत्मा हूँ… सदा बाबा को साथ रख… सबको बाबा का साथी बनाता… अपने वरदानी स्वरूप… संतोषी-मूर्त द्वारा

श्रीमत के कदम पर कदम रखते… सदा मेहनत से मुक्त… सफलता-स्वरूप हूँ… ओम् शान्ति!


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘मैं श्रेष्ठ आत्मा (कुमार) हूँ | Avyakt Murli Churnings 31-03-2019’

हम हैं पद्मपद्म भाग्यशाली, विश्व की तकदीर | Creating the illustrious fortune of the world | Avyakt Murli Churnings 31-03-2019

हम है पद्मपद्म भाग्यशाली, विश्व की तकदीर आत्माएं | Creating the illustrious fortune of the world | Avyakt Murli Churnings 31-03-2019 image

हम हैं पद्मपद्म भाग्यशाली, नये विश्व की तकदीर | Creating the illustrious fortune of the world | Avyakt Murli Churnings 31-03-2019

हम सारे विश्व की तकदीर है, सारे विश्व के आधार-मूर्त, हमारे श्रेष्ठ सहज राजयोगी जीवन से सारा विश्व सुख-शान्ति-सम्पन्न बन जाता… हम श्रीमत पर जो योग करते, उससे सारा विश्व परिवर्तन हो नये विश्व का विधान बन जाता, इसलिए आज तक सभी भगवान्-देवताओं की कसम उठाते, उन्हों के सामने सच बताते… बाबा ने हमें ऎसा वरदानी सन्तुष्टता-मूर्त, सर्व प्राप्ति स्वरूप बना दिया है

हम कौन है?

  • पवित्रता की लाइट के ताजधारी
  • हमारे हाथ में स्वराज्य का गोला रूपी मक्खन है
  • बाबा के दिल-तख्त-नशीन
  • स्वराज्य के तीलकधारी
  • हम महान आत्माएं हैं, हमारे हर कदम-संकल्प-कर्म से विश्व का विधान बनता

तो सदा रूहानी नशे में रहना है, हम यदि सन्तुष्ट रहते तो सारा विश्व सन्तुष्ट बन जाता .. यह जिम्मेवारी सदा उन्नति कराती, और बहुत सहज भी है क्योंकि बाबा हमारे साथ है

हम आत्माएं (कुमार) कैसे है?

1. श्रेष्ठ आत्माएं अर्थात तन-मन की सारी शक्तियां श्रेष्ठ कार्य अर्थात विश्व कल्याण में लगाने वाली… सदा व्यर्थ से मुक्त रह, हर कदम पद्मों की कमाई जमा करने वाले, श्रेष्ठ प्राप्ति के अधिकारी है

2. शक्तिशाली आत्माएं अर्थात जो चाहे कर सकती, एसी अवस्था में बाबा मिलना सबसे श्रेष्ठ भाग्य है… हमारा साथी कुछ नहीं लेता, और सदा अविनाशी सहयोग देते रहता, जब भी याद करते… हम निर्बंधन स्वतन्त्र सेफ बेफिक्र हल्के है, सदा ऎसे श्रेष्ठ रहना है

3. हम समर्थ बाप की सन्तान समर्थ आत्मा, समर्थ कार्य करने वाली है, हमारे संकल्प बोल वा कर्म सब समर्थ है… इसलिए सदा उड़ती कला के अनुभवी है, बाबा की टचिंग द्वारा एक सेकण्ड में सफलता-स्वरूप बनने वाले हैं… व्यर्थ सेे सम्पूर्ण मुुक्त, डबल लाइट, सदा ऊपर रहने वाले

4. हम माया से युद्ध करने के बजाए कमाल करने वाले अर्थात सदा बाबा को साथ रख सब को बाबा का साथी बनाने वाले… अपने वरदानी-स्वरूप द्वारा शुभ भावना देते, सब को अचल बनाते

5. सदा बाबा साथ रखने से विजयी सफलता-रूप रहते अर्थात मेहनत कम, प्राप्ति ज्यादा रहती… ज्यादा सोचने के बजाए, श्रीमत पर कदम पे कदम रखकर सदा मंज़िल पर सहज पहुंचने वाले

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा बाबा को साथ रख समर्थ बन, उड़ती कला के अनुभवी अर्थात सदा शान्ति प्रेम आनंद से भरपूर रहे… सब को बाबा का साथी बनाने की श्रेष्ठ सेवा करते, सारे विश्व की तकदीर बदलकर सतयुग स्थापन कर ले… ओम् शान्ति!

Sakar Murli Churnings 30-03-2019

Sakar Murli Churnings 30-03-2019

1. बाबा ने हमें सम्पूर्ण ज्ञान दे दिया है, मुख्य बात बाकी थोड़ा समय है जिसमें सतोप्रधान फूल चार्ज बनना है… इसके लिए बाबा रोज़ सकाश सर्चलाइट current देते, इसे कैच करने बुद्धि और तरफ हटाकर बाबा को याद करना है, तो फूल चार्ज हो जाएँगे

2. बाबा हमें देही-अभिमानी (भ्रूकुटी के बीच विराजमान आत्मा) और भाई-भाई की दृष्टि भी पक्की कराते, फिर सतयुग में भी हम आपस में बहुत प्रेम से रहेंगे… ड्रामा अनुसार जिनका पार्ट होगा वह समझेंगे, हमें अपना पार्ट श्रेष्ठ करना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… यही समय है सतोप्रधान बनने का, इसी स्मृति में रहते व्यर्थ से अपने को समेट ज्ञान-योग की तीखी दौडी़ लगाते रहे … तो सदा स्थिति श्रेष्ठ रहेंगी, और दिनों-दिन सतोप्रधान बनते जाएंगे… औरों की भी सेवा होते, सतयुग बनाते चलेंगे… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | अब घर जाना है

योग कमेंटरी | अब घर जाना है

84 जन्मों, 5000 साल से पार्ट बजा रहा हूँ… अब पार्ट पूरा हुआ… अब घर जाना है

परमधाम मेरा घर है… जहाँ सम्पूर्ण शान्ति है… विश्राम है

सबकुछ बाबा को सौप कर… मैं निश्चिंत हो गया हूँ… बाबा की याद से… सम्पूर्ण सतोप्रधान बन रहा हूँ

जैसे भरतू हो आए थे… वैसे ही भरतू हो जाना है… बाबा की याद में रह… सर्व प्राप्ति सम्पन्न बनना है

सबको ख़ज़ाने बांटते… उन्हे भी आप समान सम्पन्न… तैयार करना है… ओम् शान्ति!

गीत:मेरे बाबा का पैगाम…


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘अब घर जाना है’

Sakar Murli Churnings 29-03-2019

Sakar Murli Churnings 29-03-2019

सभी को शरीर छोड़ने का बहुत डर रहता, इसलिए ज्ञान सागर बाप आकार हमें देह से ममत्व छुड़ाए सम्पूर्ण पावन हिसाब-किताब-मुक्त कराए भय से मुक्त करते, फिर सतयुग में कोई डर नहीं रहता… लेकिन माया याद में रहने नहीं देती, और सभी याद दिलाती, इसलिए अपना चार्ट रख रोज़ उन्नति को पाते रहना है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… यही ख्याल रहे, कि जैसे भरतू हो आए थे, ऎसे ही भरतू हो वापिस जाना है… इसलिए सदा बाबा की यादों में रह सर्व खज़ानौं से सम्पन्न, व्यर्थ से मुक्त रहना है… तो स्वतः औरों को भी खजाने बांटते रहेंगे, सतयुग बनाते चलेंगे… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | मैं बालक सो मालिक हूँ

योग कमेंटरी | मैं बालक सो मालिक हूँ image

योग कमेंटरी | मैं बालक सो मालिक हूँ

मैं ईश्वरीय सन्तान … बाबा का बच्चा… बालक सो मालिक हूँ

सदा निरहंकारी… सरल-चित्त… भोलेपन से भरपूर हूँ

मैं स्वराज्य अधिकारी… अपने मन का मालिक… सदा शान्त-चित्त, आन्तरिक खुशी से भरपूर हूँ

बाबा ने मुझे अपना बनाकर… अपने सारे ज्ञान-गुण-शक्तियों का मालिक… सर्व खजा़नों से सम्पन्न कर दिया है

उनकी छत्रछाया में… मैं सदा बेफिक्र… रूहानी मौज का अनुभव करता हूँ… ओम् शान्ति!


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘मैं बालक सो मालिक हूँ’

Sakar Murli Churnings 28-03-2019

Sakar Murli Churnings 28-03-2019

पतित-पावन बाबा आकर हमें काम-जीत बनाकर कांटे से फूल बनाते, यही फ़र्स्ट क्लास फ़ैमिली प्लानिंग है, फिर सतयुग में बहुत थोड़े रहेंगे… पावन बनने से ही सतयुग में आ सकेंगे, तो गोरा बन सर्व को गोरा बनाना है, यही श्रेष्ठ कर्म है जिससे सर्वगुण सम्पन्न विश्व का मालिक लक्ष्मी नारायण बनते… भाई भाई की दृष्टि पक्की करनी है

सार

तो चलिए आज सारा दिन… सदा अपनी शुध्द आत्मिक स्थिति में स्थित रह, परमात्म मुहब्बत के झूले में झूलते रहें… तो स्वतः श्रेष्ठ स्थिति रहेंगी, हम श्रेष्ठ सेवा करते रहेंगे, सतयुग बनाते रहेंगे… ओम् शान्ति!

योग कमेंटरी | रूहानी नैनौं का श्रूंगार | Spiritual Decoration of Eyes

योग कमेंटरी | रूहानी नैनौं का श्रूंगार | Spiritual Decoration of Cool Eyes image

योग कमेंटरी | रूहानी नैनौं का श्रूंगार | Spiritual Decoration of Eyes

मेरे रूहानी नैन… सबकी विशेषताएं देखते… सबको आत्मिक रूप में देखते

मेरी आँखें शीतल… निर्मल… रहम भाव से भरपूर है

इन नैनों में भगवान समाया हुआ है… और कोई इसमे नहीं बस सकता… रूहानी नूर छलक उठा है

इन आँखों में… पवित्रता की झलक… भोलापन… सरलता चमक रही है

यह आँखें बहुत भाग्यवान है… जिन्होने धरती ? पर आते भगवान को देखा है

इस रूहानी दृष्टि से… सबको शक्तिशाली बनाकर… दुःखों से मुक्त करना है…

जब भी घर से निकले… ऎसे आँखों को सजाकर… सबकी सेवा करनी है… ओम् शान्ति!


और योग कमेंटरी:

Thanks for reading this meditation commentary on ‘रूहानी नैनौं का श्रूंगार | Spiritual Decoration of Eyes’